एबीएन डेस्क। काॅमेडियन राजू श्रीवास्तव अब हमारे बीच नहीं रहे। मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव बीते करीब डेढ़ महीने से अस्पताल में भर्ती थे। एक महीने से अधिक समय पहले दिल का दौरा पड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती कराए गए लोकप्रिय हास्य-अभिनेता-अभिनेता राजू श्रीवास्तव अब इस दुनिया में नहीं रहे। श्रीवास्तव को 10 अगस्त को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती करवाया गया था और उसी दिन उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी। 40 दिन हो गए हैं, मगर चिकित्सकों का कहना था कि राजू ठीक होने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हमें आप सभी की प्रार्थनाओं की जरूरत है। श्रीवास्तव, 1980 के दशक के अंत से मनोरंजन जगत में सक्रिय रहे हैं। उन्हें 2005 में स्टैंड-अप कॉमेडी शो द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज के पहले सीजन में भाग लेने के बाद काफी लोकप्रियता मिली थी। उन्होंने मैंने प्यार किया, बाजीगर, बॉम्बे टू गोवा (रीमेक) और आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष भी हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी में इस वक्त उथल पुथल मचा हुआ है। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं। इसी दौरान पार्टी मंल अध्यक्ष पद के लिए खींचतान शुरू हो गई है। दरअसल, पार्टी के कई नेता राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष रूप में देखना चाहते हैं। समस्या ये आ रही है कि राहुल गांधी इसके लिए तैयार नहीं है। वो बार-बार अध्यक्ष पद के लिए मना कर रहे हैं। इसी बीच राहुल को मनाने की जिम्मेदारी सचिन पायलट को दी गई है। पायलट को यात्रा में शामिल होने के लिए भेजा गया है। सचिन पायलट ने कोच्चि से यात्रा को जॉइन कर लिया है। इससे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक की थी। राजस्थान सीएम अशोक गहलोत ने विधायक दल की बैठक में कहा था कि यदि वह पार्टी अध्यक्ष के पद के लिए नामांकन भरेंगे तो विधायकों को दिल्ली पहुंचने का संदेश आयेगा। विधायक दल की बैठक के बाद राजस्थान के एक कैबिनेट मंत्री ने यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत पहले कोच्चि जायेंगे और राहुल गांधी से पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने का आग्रह करेंगे। उनके अनुसार बैठक में मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि यदि उन्हें अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने को कहा जाता है तो वह विधायकों को सूचित करेंगे। मंत्री ने बताया कि इसके साथ ही गहलोत ने विधायकों को विधानसभा सत्र के बारे में निर्देश दिये। विधायकों को दिया जायेगा दिल्ली पहुंचने का आदेश : खाद्य आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि वो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरेंगे तो विधायकों को नयी दिल्ली पहुंचने के लिये संदेश आयेगा। उन्होंने कहा कि बैठक में विधानसभा के मौजूदा सत्र व बजट की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब मुख्यमंत्री गहलोत बुधवार को दिल्ली जा रहे हैं। इस तरह की अटकलें हैं कि वह कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। हालांकि बैठक में इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया। दिल्ली में हैं अशोक गहलोत : खाचरियावास ने संवाददाताओं से कहा, उन्होंने (मुख्यमंत्री ने) इस संबंध में निर्देश दिये कि विधानसभा में कैसे क्या करना है. मुख्यमंत्री जी दिल्ली जायेंगे और तीन दिन बाद वापस आयेंगे… तो उन्होंने विधानसभा के बारे में पूरे निर्देश दिये। गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरे जाने की अटकलों पर खाचरियावास ने कहा, मुख्यमंत्री जी खुद वरिष्ठ नेता हैं, वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन भरेंगे, नहीं भरेंगे, क्या होगा, ये सब बात गहलोत जी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी व कांग्रेस आलाकमान आपस में बैठकर तय करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को बड़ी राहत दी है। रिजर्व बैंक ने मंगलवार को एलान किया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन फ्रेमवर्क (पीसीएएफ) की की निगरानी सूची से हटा दिया दिया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया देश का इकलौता सरकारी बैंक है, जो पिछले 5 साल से पीसीए के दायरे में था। सेंट्रल बैंक को साल 2017 में पीसीए के दायरे में लाया गया था। बैंक ने रिजर्व बैंक को लिखित में भरोसा दिलाया कि वह सभी नियमों का पालन करेगा। वह मिनिमम रेगुलेटरी कैपिटल, नेट एनपीए और लेवरेज रेशियों को दायरे में रखेगा। सेंट्रल बैंक इंडिया पीसीए के दायरे में लाए गए सभी बैंकों में आखिरी बचा हुआ था। बैंक के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) काफी बढ़े हुए थे, जबकि रिटर्न ऑन एसेट्स बेहद कम थे। सेंट्रल बैंक को साल 2017 में पीसीए के दायरे में लाया गया था। बैंक ने रिजर्व बैंक को लिखित में भरोसा दिलाया कि वह सभी नियमों का पालन करेगा। वह मिनिमम रेगुलेटरी कैपिटल, नेट एनपीए और लेवरेज रेशियों को दायरे में रखेगा। सेंट्रल बैंक इंडिया पीसीए के दायरे में लाए गए सभी बैंकों में आखिरी बचा हुआ था। बैंक के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) काफी बढ़े हुए थे, जबकि रिटर्न ऑन एसेट्स बेहद कम थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को पार्टी का फिर से अध्यक्ष बनाए जाने की मांग जोर-शोर से उठ रही है। इस बीच खबर आ रही है कि राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। न्यूज एजेंसी ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से इस खबर की पुष्टि की है। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा कि सांसद राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि वह भारत जोड़ो यात्रा के बीच से दिल्ली नहीं लौटेंगे। राहुल गांधी की यात्रा मौजूदा वक्त में केरल में है और 29 सितंबर को कर्नाटक में प्रवेश करेगी। नामांकन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। ऐसे में उन खबरों पर विराम लग गया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि राहुल गांधी ही अगले पार्टी के अध्यक्ष होंगे। इससे पहले झारखंड कांग्रेस ने राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया था। गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान समेत कई राज्यों की कांग्रेस इकाइ ने राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने को लेकर प्रस्ताव पहले ही पास कर दिया था। राहुल गांधी को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर अब विराम लग चुका है। ऐसे में अगर अन्य कांग्रेसी नेताओं की बात करे तो शशि थरूर और अशोग गहलोत सहित कई अन्य नेताओं के चुनाव लड़ने की संभावना है। सोमवार को वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुनाव लड़ने की अपनी इच्छा जाहिर की थी। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी चुनावी मैदान में उतरने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। 137 साल पुराने राजनीतिक दल के लिए पढ़े-लिखे शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए बेजोड़ लेकिन बेहद दिलचस्प विकल्प नजर आयेंगे, खासकर ऐसे वक्त, जब पार्टी अस्तित्व संकट के इस मोड़ पर खड़ी है। तिरुवनंतपुरम से तीन बार लोकसभा सदस्य रहे थरूर ने कांग्रेस की विचारधारा के सबसे मुखर नेताओं में से एक के तौर पर अपनी धाक जमाई है। सक्रिय राजनीति में बमुश्किल 13 सालों की अपेक्षाकृत कम अवधि में उन्होंने निश्चित उद्देश्य के साथ अपनी अलग पहचान और कांग्रेस में अपने लिए अलग जगह बनाई, और फिर भी वे गांधी परिवार से अच्छे रिश्ते कायम रखने में कामयाब रहे। अपने पूर्ववर्ती जी-23 समूह के अधिक बागी सहयोगियों के विपरीत, जिसने अगस्त 2020 में मरणासन्न कांग्रेस पार्टी संगठनात्मक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग करते हुए विद्रोह का झंडा बुलंद किया, थरूर यह धारणा बनाने में सफल रहे हैं कि उनका सैद्धांतिक रुख वास्तविक दृढ़ विश्वास से पैदा हुआ था न कि पार्टी में किसी भी तरह की उपेक्षा की भावना से। उन्होंने बिना किसी डर के अपने मन की बात कह दी है, लेकिन जब भी आलाकमान ने इन्हें पार्टी की लक्ष्मण रेखा को संभावित रूप से तोड़ने के करीब देखा, तो उन्होंने अपने कदम पीछे ले लिये। उदाहरण के तौर पर, जब उन्हें धर्मनिरपेक्षता पर सीपीएम के सेमिनार में शामिल नहीं होने के लिए कहा गया, जहां उन्हें आमंत्रित किया गया था, तो उन्होंने चुपचाप पार्टी की इच्छा को स्वीकार कर लिया। इसी तरह, जब उन्होंने एआईसीसी प्रतिनिधियों की मतदाता सूची में कथित अस्पष्टता के बारे में अपनी आपत्ति जताई तो लेखक-राजनेता ने तुरंत स्वीकार किया कि वे कांग्रेस के चुनाव प्रबंधकों से संतुष्ट हैं। यकीनन समकालीन राजनीति के बेहतरीन वक्ता शशि थरूर आम तौर पर अशिक्षित कांग्रेसी नेताओं से अलग हैं। वे महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन अपनी सीमाओं को जानते हैं। अधिकांश कांग्रेस नेताओं के विपरीत संगठन में समर्थन आधार के संदर्भ में थरूर पार्टी में अपना कद बढ़ाने की तलाश में नहीं रहते हैं। वे एक लोकसभा सदस्य के रूप में काफी सहज हैं। गैर-टकराववादी नेता : प्लोमेट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले थरूर ने संयुक्त राष्ट्र में अपने शुरूआती दिनों में सार्थक संवादों के माध्यम से समझाने की कला सीखी। थरूर टकराव की राजनीति से घृणा करते हैं। हिंदू धर्म के इतिहास और समकालीन राजनीति पर उनकी किताबें भी संवाद के माध्यम से संघर्ष का समाधान करने के मध्य मार्ग का दृढ़ता से समर्थन करती हैं। लेखक के रूप में वे जहां कहीं भी प्रथम व्यक्ति के रूप में पुस्तकों में हस्तक्षेप करते हैं, गैर-टकराव के लिए उनका मजबूत पक्ष कायम रहता है। अध्यक्ष पद चुनाव के लिए उनकी तैयारी में भी यह विशेषता दिखाई देती है। डॉ। थरूर ने अगस्त में मैदान में उतरने की इच्छा व्यक्त की, जब यह स्पष्ट हो गया कि राहुल गांधी ने उन्हें पद स्वीकार करने के लिए मनाने के सभी प्रयासों को विफल कर दिया। कहीं ऐसा न हो कि उनके निर्णय को गांधी परिवार के विरुद्ध विद्रोह समझ लिया जाए, थरूर ने अपनी चुनावी महत्वाकांक्षा के लिए सोनिया गांधी से उचित स्वीकृति मांगी। यह पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष था कि कांग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष चुनाव दूरी बनाए रखेंगे। फिर भी, दोनों नेताओं के बीच बैठक ने सौहार्दपूर्ण प्रदर्शन के लिए जमीन तैयार की है। 20 साल में कांग्रेस की कमान संभालने वाले पहले गैर-गांधी? कांग्रेस के लिए 20 से अधिक सालों में पहली बार गैर-गांधी अध्यक्ष होना तय है। गांधी परिवार के वफादार अशोक गहलोत के पार्टी अध्यक्ष के लिए शशि थरूर के खिलाफ चुनाव लड़ने की संभावना है, जो पार्टी में उन लोगों में शामिल हैं जो बड़े आंतरिक सुधार चाहते हैं। नरसिम्हा राव सरकार के सत्ता से बाहर होने के लगभग दो साल बाद, अंतिम गैर-गांधी कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी रहे, जिनसे सोनिया गांधी ने मार्च 1998 में पदभार संभाला। कांग्रेस की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण सोनिया गांधी ने घोषणा की कि वह पार्टी में शामिल होंगी। भले ही थरूर 23 असंतुष्ट कांग्रेसी नेताओं के समूह जी-23 का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन वे पार्टी के भीतर सुधार लाने के लिए मुखर रहे हैं। मलयालम दैनिक मातृभूमि के लिए एक लेख में थरूर ने लिखा है कि नये अध्यक्ष का चुनाव उस नये जीवन की शुरूआत होगी जिसकी पार्टी को सख्त जरूरत है। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया तीन दिन में शुरू हो जायेगी। यह चुनाव पिछले वर्ष के दौरान कई प्रमुख नेताओं के पार्टी से बाहर निकलने की पृष्ठभूमि में होगा। आखिरी बार पार्टी छोड़कर जाने वाले नेता वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद थे, जिनके बाहर निकलने का अनुकरण पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई के ज्यादातर नेताओं ने किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि विकास के लिए भारत को किसी दूसरे देश का अनुसरण करने की बजाए भारत बनकर ही रहना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हम चीन, रूस, अमेरिका बनने का प्रयास करेंगे, तो वह नकल करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर लोग तमाशा देखने जरूर आयेंगे लेकिन वह भारत का विकास नहीं होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास तथा उसके धन एवं रण गौरव को निरंतर गलत बताने वाले लोगों पर विश्वास करना गलती थी और विकास के दीर्घकालिक लक्ष्य को हासिल करने के लिये भूगोल की जानकारी एवं इतिहास पर गर्व करना जरूरी है। भागवत ने कनेक्टिंग विद द महाभारत पुस्तक का विमोचन करते हुए यह बात कही। सरसंघचालक ने कहा, कुछ लोगों ने प्रयत्न किये कि हम अपने देश को, अपने इतिहास को भूल जाएं। वे हमें बता रहे थे कि हमारे इतिहास में कुछ नहीं है, कोई धन गौरव, रण गौरव नहीं है। वे हमारे ग्रंथों को गलत बता रहे थे। भागवत ने कहा कि ऐसे लोग इस तरह की बातें इसलिये कह रहे थे क्योंकि उन्हें स्वार्थ साधना था। उन्होंने कहा कि महाभारत, रामायण को कविता, कहानी बताया गया। लेकिन यह समझना जरूरी है कि क्या कोई कल्पना इतनी लम्बी चलती है? भागवत ने कहा कि वेद व्यास को सिंहासन की आस नहीं थी और वे एक ऋषि थे, ऐसे में महाभारत में व्यास गलत क्यों बोलेंगे? उन्होंने कहा कि सुख और दुख आने जाने वाली बात है और हमें अपने धर्म पर कायम रहना चाहिए। यही महाभारत का बोध है। सरसंघचालक ने कहा कि भारत को किसी दूसरे देश का अनुसरण करने की बजाए भारत बनकर ही रहना होगा। उन्होंने कहा कि अगर हम चीन, रूस, अमेरिका बनने का प्रयास करेंगे, तो वह नकल करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर लोग तमाशा देखने जरूर आयेंगे लेकिन वह भारत का विकास नहीं होगा। भागवत ने कहा कि हमारी गाड़ी अब विकास की ओर मुड़ गई है और हम उस ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस उद्देश्य के लिये एक लम्बा लक्ष्य लेकर चलना होगा और उस पर आगे बढ़ते रहना होगा। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इसके लिये इतिहास और भूगोल की जानकारी चाहिए तथा अपने इतिहास पर गौरव होना चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में होने वाले दो दिवसीय राष्ट्रीय महापौर सम्मेलन का डिजिटली उद्घाटन करते हुए कहा कि आजादी के अमृत काल में अगले 25 साल के लिए भारत के शहरी विकास का एक रोड मैप बनाने में इस सम्मेलन की बड़ी भूमिका है। पीएम मोदी ने कहा कि शहरों के विकास को लेकर लोगों को भाजपा पर पूरा भरोसा है। कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि सामान्य नागरिक का संबंध अगर सरकार नाम की किसी व्यवस्था से आता है तो पंचायत से आता है, नगर पंचायत से आता है, नगरपालिका से आता है, महानगर पालिका से आता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश के नागरिकों ने बहुत लंबे अरसे से शहरों के विकास को लेकर भाजपा पर विश्वास रखा है। उसे निरंतर बनाए रखना, उसे बढ़ाना हम सभी का प्रमुख दायित्व है। इस सम्मेलन का आयोजन भाजपा के सुशासन प्रकोष्ठ द्वारा किया जा रहा है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी इस सम्मेलन में शिरकत करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल होंगे। भाजपा नेता ने कहा, फडणवीस शहरी विकास के लिए अपने दृष्टिकोण को साझा करेंगे और पुरी शहरी स्थानीय निकायों के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली से सटे नोएडा के पॉश इलाके में अपार्टमेंट की बाउंड्री वाल गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है। फिलहाल, जेसीबी मशीन मौके पर मंगवाई गई है और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गये हैं। नोएडा के सेक्टर 21 में जलवायु विहार की यह घटना है। दमकल विभाग की गाड़ियां भी मौके पर पहुंची हैं। जानकारी के मुताबिक यह बॉउंड्री वाल 100 मीटर लंबी थी। आशंका जताई जा रही है कि हादसे में मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है। पुलिस प्रशासन, फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मौके पर आलाधिकारियों के साथ-साथ डॉक्टर्स व एम्बुलेंस भी मौजूद है। डीएम सुहास एलवाई ने बताया कि जलवायु बिहार अपार्टमेंट के नाली की रिपेयरिंग का काम चल रहा था, तभी यह बॉउंड्री वॉल गिरी। अभी तक मलबे में से चार लोगों को निकाला गया है। दो मौतें जिला अस्पताल और एक की मौत कैलाश अस्पताल में होने की सूचना मिली है। एक घायल का इलाज चल रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। डीएम ने कहा कि घटना क्यों हुई, इसकी जांच करवाई जायेगी। उन्होंने कहा कि नोएडा अथॉरिटी की तरफ से ठेके पर काम करवाया जा रहा था। नाली की ईंटें निकालते समय यह हादसा हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। डीएम और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर तत्काल पहुंचने के सीएम ने निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की राहत राशि देने के भी निर्देश दिये। सभी घायलों का समुचित उपचार कराये जाने के लिए भी मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में बीते 24 घंटे में 4043 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं। इसे मिलाकर देश में अब तक कोरोना के कुल केस बढ़कर 4,45,43,089 हो गए हैं। वहीं, सक्रिय मामले घटकर 47,379 हो गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अपडेट आंकड़ों के अनुसार 15 और मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 6 मौतें केरल ने पुरानी जोड़ी हैं। इसके साथ ही कुल मौत का आंकड़ा बढ़कर 5,28,370 हो गया। सक्रिय केस कुल संक्रमितों के मात्र 0.11 फीसदी है। वहीं, कोविड से ठीक होने वालों की दर 98.71 फीसदी है। बीते 24 घंटे में सक्रिय केस में 648 कम हुए हैं।
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