कर्नाटक पर कांग्रेस में बनी सहमति खरगे के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की फोटो सामने आया एबीएन सेंट्रल डेस्क। कई दिनों की जद्दोजहद के बाद पार्टी आज आधिकारिक रूप से कर्नाटक सीएम के लिए सिद्धारमैया के नाम का ऐलान करेगी। दिनभर बैठकों का जोर रहेगा। शाम को जब ऐलान होगा तो आलाकमान मीडिया के सामने दोनों नेताओं को एक साथ लाकर एकता का संदेश देने की कोशिश करेगी। खरगे के आवास पहुंचे सिद्धारमैया और डीके शिवकुमारसिद्धारमैया और डीके शिवकुमार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर पहुंचे हैं। इससे पहले दोनों की केसी वेणुगोपाल के घर पर बैठक हुई। शिवकुमार के भाई ने कहा- मैं पूरी तरह से खुश नहीं : शिवकुमार के भाई और कांग्रेस नेता डीके सुरेश ने शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के पार्टी के फैसले पर कहा कि मुझे नहीं लगता है कि मैं पूरी तरह से खुश हूं। मगर कर्नाटक के हित के लिए पार्टी और डीके शिवकुमार और सभी को ये स्वीकार करना होगा। 20 मई को होगा शपथ ग्रहण समारोह, कांग्रेस दिखाएगी अपनी ताकत : 20 मई को सिद्धारमैया सीएम पद की शपथ लेंगे। उनके कैबिनेट में शामिल होने वालों के नाम भी लगभग तय हो गये हैं। आलाकमान की मुहर लगनी बाकी है। बाकी शपथ ग्रहण समरोह में पूरा गांधी परिवार शामिल होगा। ये एक तरह का शक्ति प्रदर्शन भी है। कांग्रेस इस जीत के साथ अगले साल होने जा रहे लोकसभा चुनाव में नजरें गड़ाए हुए है।
दिग्गज कारोबारी और हिंदुजा भाइयों में सबसे बड़े एसपी हिंदुजा का बुधवार को निधन हो गया। वह 87 साल के थेएबीएन सेंट्रल डेस्क। हिंदुजा भाइयों में सबसे बड़े और हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन एसपी हिंदुजा का 87 साल की उम्र में लंदन में निधन हो गया। हिंदुजा परिवार के प्रवक्ता ने बुधवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने कहा कि एसपी हिंदुजा कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि गोपीचंद, प्रकाश, अशोक और पूरे हिंदुजा परिवार को आज हमारे परिवार के संरक्षक और हिंदुजा ग्रुप के चेयरमैन एसपी हिंदुजा के निधन की घोषणा करते हुए भारी दुख हो रहा है। वह परिवार के मेंटर थे। उन्होंने अपने मेजबान देश यूके और अपने देश भारत के बीच मजबूत संबंध बनाने में अपने भाइयों के साथ बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।ग्रुप के पास 14 अरब डॉलर की संपत्तिदेश में ट्रक बनाने के कारोबार के अलावा हिंदुजा ग्रुप बैंकिंग, केमिकल्स, पावर, मीडिया और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा है। ग्रुप की कंपनियों में आॅटो कंपनी अशोक लीलैंड और इंडसइंड जैसे बड़े ब्रांड शामिल हैं। हिंदुजा बंधु चार भाई हैं। ग्रुप के पास 14 अरब डॉलर की संपत्ति है।साल 1914 में हुई थी हिंदुजा ग्रुप की स्थापनाहिंदुजा ग्रुप की स्थापना साल 1914 में श्रीचंद परमानंद ने की थी। हिंदुजा समूह का कारोबार दुनिया के 38 देशों में फैला है और कंपनी में करीब डेढ़ लाख कर्मचारी काम करते हैं। श्रीचंद परमानंद के चार बेटे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड में पतरातू प्रखंड में जल शोधन संयंत्र का निर्माण कार्य पूरा होने की बुधवार को सराहना की और कहा है कि इससे उस इलाके में महिलाओं का जीवन आसान होगा। श्री मोदी ने इस संयंत्र के बारे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद जयंत सिन्हा के ट्वीट को टैग करते हुए लिखा कि बहुत ही सराहनीय प्रयास! स्वच्छ पानी की यह सुविधा झारखंड में पतरातू की हमारी माताओं और बहनों के जीवन को बहुत आसान बनाने वाली है। श्री सिन्हा ने इस संयंत्र के चित्रों के साथ ट्वीट किया कि रामगढ़ के पतरातु प्रखंड की पंचायतों में जलापूर्ति हेतु 50 करोड़ रुपये से वाटर फिल्टर प्लांट व जलमीनार के निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है। उन्होंने इसी ट्वीट में कहा है कि इससे उस क्षेत्र में अब जलापूर्ति में अत्यंत सुविधा होगी। उन्होंने लिखा है कि क्षेत्र में जलापूर्ति सुनिश्चित करने हेतु जलमीनर बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक में नये मुख्यमंत्री का नाम तय करने की जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व को मिलने के बाद यहां कांग्रेस मुख्यालय में गहमा गहमी है और हाईकमान दोनों पक्षों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए सहमति बनाने के फार्मूले पर काम कर रहा है।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। पार्टी ने रविवार को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे सहित तीन पर्यवेक्षक विधायक दल की बैठक से पहले कर्नाटक भेजे जिसमें सर्वसम्मति से नये मुख्यमंत्री बनने का दायित्व पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपा गया था।इस बीच श्री सिद्दारमैया दिल्ली पहुंच गये हैं और वह कांग्रेस आलाकमान से अगले मुख्यमंत्री के मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार का आज जन्मदिन भी है और उनके भी दिल्ली आकर आलाकमान से बातचीत करने की उम्मीद जतायी जा रही है।उन्होंने सोमवार को हालांकि बेंगलुरु में यह भी कहा कि कांग्रेस आलाकमान उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपेगा वह उसका पालन करेंगे।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 135 सीटों पर विजय हासिल की है। एक आदमी में भी नेतृत्व की क्षमता होती है और वह मैंने साबित कर दिखाया है।साल 2019 में जब कांग्रेस के विधायक गठबंधन सरकार छोड़कर जा रहे थे तो मैंने हिम्मत नहीं हारी और पूरी ताकत के साथ कांग्रेस की मजबूती के लिए काम करता रहा।
कांग्रेस में चल रही खींचतान के बीच शिवकुमार को बुलाया नई दिल्लीकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ हुआ नोटिस जारीएबीएन सेंट्रल डेस्क। नई दिल्ली साइबर अपराधों से निपटने में अपनी विशेषज्ञता के लिए पहचाने जाने वाले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के नए निदेशक प्रवीण सूद और कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार के बीच अच्छे संबंध नहीं थे। प्रवीण सूद तब सुर्खियों में आए जब कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख डीके शिवकुमार ने उन पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पक्ष लेने का आरोप लगाया।शिवकुमार ने इस साल मार्च में सूद को नालायक कहा था और कथित तौर पर कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की धमकी दी थी।शिवकुमार ने भाजपा के साथ कथित संबद्धता के लिए सूद की आलोचना की, यह सवाल करते हुए कि वह एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्यों को पूरा करने के बजाय कब तक पार्टी सदस्य के रूप में सेवा करते रहेंगे। शिवकुमार के अनुसार, सूद ने भाजपा नेताओं के खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं करते हुए कांग्रेस नेताओं के खिलाफ लगभग 25 मामले दर्ज किए हैं।व्यक्तिगत जीवन : 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी 22 साल की उम्र में अधिकारी बने। सूद हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के रहने वाले हैं। उनके पिता ओम प्रकाश सूद, दिल्ली सरकार में क्लर्क रहे, जबकि उनकी मां कमलेश सूद दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थीं। दिल्ली के एक सरकारी स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, सूद ने आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।आईपीएस करियर : सूद 22 साल की उम्र में आईपीएस अधिकारी बने। 1986 में वे कर्नाटक कैडर में शामिल हुए।इस क्षमता में सेवा करते हुए, उन्होंने आईआईएम बैंगलोर से पब्लिक पुलिस मैनेजमेंट में एमबीए किया। अपनी पुलिस सेवा के शुरूआती सालों में, उन्होंने बेल्लारी और रायचूर में पुलिस अधीक्षक के साथ-साथ बेंगलुरु और मैसूर में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) जैसे पदों पर कार्य किया।पदक और सम्मान : उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए, सूद को 1996 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री द्वारा स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। 2002 में, उन्होंने पुलिस पदक प्राप्त किया, इसके बाद 2011 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक मिला। जून 2020 में, सूद को कर्नाटक में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजीपी) के रूप में नियुक्त किया गया।सूद मॉरीशस सरकार के पुलिस सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं।बेटी की शादी ने खींचा ध्यान : प्रवीण सूद की शादी सामाजिक उद्यमी विनीता सूद से हुई है। दंपति की दो बेटियां हैं। उनकी एक बेटी अशिता सूद के पास लॉ में पोस्टग्रेजुएट की डिग्री है। 2022 में अशिता ने क्रिकेटर मयंक अग्रवाल से शादी की। एक क्रिकेटर से उनकी बेटी की शादी ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं।संकट में फंसे लोगों के लिए उम्मीद की किरण : बेंगलुरु पुलिस आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, सूद ने नम्मा 100 नामक एक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शुरू की। यह 100 लाइनों वाली एक बहुभाषी प्रणाली थी और चौबीसों घंटे 276 आपातकालीन वाहनों के साथ संचालित थी। इस प्रणाली को 15 मिनट के भीतर कॉल का जवाब देने के लिए डिजाइन किया गया था।इसके अलावा, सूद ने ओशरा पिंक होयसला नामक एक सुरक्षा ऐप लॉन्च करके महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में, कर्नाटक में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में सेवारत सूद अपनी नई भूमिका के लिए अनुभव और विशेषज्ञता का खजाना लेकर आये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। तमिलनाडु के विल्लुपुरम और चेंगलपट्टू जिलों में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से तीन महिलाओं सहित 10 लोगों की मौत हो गयी। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि विल्लुपुरम जिले के मरक्कनम के पास एकियारकुप्पम के रहने वाले छह लोगों की रविवार को मौत हो गयी।आगे अधिकारियों ने कहा कि चेंगलपट्टू जिले के मदुरंथगम में शुक्रवार को दो लोगों की मौत हो गई और रविवार को एक दंपति की मौत हो गई, इन सभी चारों की मौत जहरीली शराब के सेवन से हुई है। वर्तमान में, दो दर्जन से अधिक लोगों का इलाज चल रहा है और जानकारी के मुताबिक वे ठीक हैं।पुलिस महानिरीक्षक (उत्तर) एन कन्नन ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया और कहा कि सभी 10 पीड़ितों ने संभवत: इथेनॉल-मेथनॉल पदार्थों के साथ जहरीली शराब का सेवन किया था। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के उत्तरी क्षेत्र में जहरीली शराब से मौत की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आयी हैं और अभी तक पुलिस को दोनों घटनाओं के बीच संबंध का कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन पुलिस किसी भी संभावित लिंक का पता लगाने के लिए कई एंगल से जांच कर रही है।उन्होंने बताया कि दोनों जिलों में नकली शराब की दो घटनाएं सामने आई हैं। विल्लुपुरम जिले में छह लोगों को उल्टी, आंखों में जलन और चक्कर आने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से कई की मौत हो गयी। घटना के संबंध में एक आरोपी अमरन को गिरफ्तार कर लिया गया है और नकली शराब जब्त की गयी है।
आरके सिन्हा एबीएन एडिटोरियल डेस्क। आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हरेक विधनासभा और नगर निगम चुनाव पर सारे देश की निगाहें रहने वाली हैं। इस परिप्रेक्ष्य में कर्नाटक विधानसभा और उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव का नतीजा देखना होगा। कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी को निराशा हाथ लगी लेकिन उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव ने पार्टी को जश्न मनाने का पूरा मौका दिया है। अभी देश में सिर्फ और सिर्फ कर्नाटक चुनाव की ही चर्चा हो रही है। जबकि, उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव में कर्नाटक में जितने मतदाताओं ने भाग लिया उससे कहीं ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। अत: मैं तो आज उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव की ही चर्चा करूंगा। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व जीत हासिल करते हुए सभी 17 नगर निगम में अपना परचम लहराया है। इसके अतिरिक्त सभी अन्य निकाय में भाजपा का प्रदर्शन अत्यंत ही प्रभावशाली रहा है। सपा, कांग्रेस और बसपा का सूपड़ा साफ हो गया, ऐसा कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। बेशक, इस चुनाव परिणाम से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं का तो हौसला बढ़ेगा ही, ताज्जुब नहीं की लोकसभा चुनाव प्रचार में योगी के उत्तर प्रदेश मॉडल की गूंज सुनाई दे। सर्वाधिक लोकसभा सीट वाले प्रदेश उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव की तैयारियों के तौर पर देखा जा रहा था। चाहे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल हों, विपक्षी दल समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी या कांग्रेस हों। प्रत्येक राजनीतिक दल के लिए यह निकाय चुनाव उतना ही मायने रखता था। सभी दल अपने-अपने हिसाब से जोर भी खूब लगा रहे थे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए निकाय चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। क्योंकि यह पहला चुनाव था, जो अकेले योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी लड़ रही थी। योगी के ऊपर पूरे चुनाव का दारोमदार था। ऐसे में जीत का श्रेय भी योगी आदित्यनाथ को ही मिलना स्वाभाविक है। उत्तर प्रदेश नगर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व जीत हासिल करते हुए सभी 17 नगर निगमों में अपना परचम लहराया है। 2017 के विधानसभा चुनाव से लेकर उत्तर प्रदेश में हुए अब तक के हर चुनाव पर नजर डालें तो योगी की छवि कद्दावर नेता के तौर पर उभरी है। 2017 में योगी आदित्यनाथ जब भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री बनाए गए तो उनकी अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी ने पहला चुनाव, नगर निकाय का ही लड़ा था। उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कुल 14 नगर निगमों में जीत हासिल की थी, यही नहीं 70 नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायतों में 100 सीटों पर जीत के साथ बढ़िया प्रदर्शन किया था। भले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद इस परिणाम के बाद योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम की प्रशंसा की थी लेकिन चुनावी पंडितों ने जीत की वजह मोदी मैजिक को ही बताया था। इसके पांच साल बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए दोबारा उत्तर प्रदेश की सत्ता हासिल की। इस प्रचंड जीत से योगी की बेहतर प्रशासक की छवि पुष्ट हुई। लेकिन राजनीतिक पंडित अभी भी इस सवाल से जूझ रहे थे कि क्या योगी अकेले पार्टी की चुनावी नैया पार लगा सकते हैं? कर्नाटक विधानसभा और उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव एक साथ हुए। चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी की पूरी केंद्रीय टीम ने कर्नाटक में ताकत झोंक रखी थी। योगी आदित्यनाथ निकाय चुनाव में अकेले ही मोर्चे पर डटे रहे। वह अपने मंत्रियों, विधायकों के साथ राज्य भारतीय जनता पार्टी टीम की अगुवाई कर रहे थे। निकाय चुनाव की योगी के लिए क्या अहमियत थी इसका अंदाजा चुनावी रैलियों से लगाया जा सकता है। योगी आदित्यनाथ ने महज 13 दिन में संवाद का अर्धशतक लगाया, 50 रैलियां की। सपा मुखिया अखिलेश यादव से लेकर तमाम दूसरी पार्टियों की तुलना में योगी ने चुनाव प्रचार में कहीं ज्यादा पसीना बहाया। हर दिन वो अलग-अलग जिलों के दौरे पर रहे। इतना ही नहीं निकाय चुनाव के बीच में तीन दिन कर्नाटक में भी चुनाव प्रचार किया। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक चुनावी रैली में उत्तर प्रदेश ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता, उत्तर प्रदेश में नये मेडिकल कॉलेज, हाइवे समेत इंफ्रास्ट्रक्चर एवं चौतरफा विकास पर खूब बोला । लेकिन सबसे ज्यादा जोर अपराधियों के खिलाफ एक्शन पर दिया। पूरे चुनाव में माफियाओं को मिट्टी में मिला देंगे वाला बयान सर्वाधिक चर्चा में रहा। उमेश पाल हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार का बुलडोजर एक्शन से लेकर शूटर्स का एनकाउंटर हो या माफिया अतीक अहमद और उसके भाई की पुलिस कस्टडी में हत्या। भारतीय जनता पार्टी ने हाल के इन घटनाक्रमों को इस तरह से पेश किया जैसे योगी सरकार में ही यह संभव था। अतीक-अशरफ की हत्या के बाद प्रयागराज पहुंचे योगी आदित्यनाथ ने किसी का नाम लिए बिना कहा भी था कि यहां की धरती अत्याचार बर्दाश्त नहीं करती। प्रकृति न्याय जरूर करती है। जो जैसा करेगा, उसको वैसा ही फल मिलता है। जिन लोगों ने अन्याय किया था प्रकृति ने उनके साथ न्याय कर दिया। इसी निकाय चुनाव के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने दुर्दांत गैंगस्टर अनिल दुजाना को एनकाउंटर में मार गिराया, जिसकी खूब चर्चा हुई। अपनी रैलियों में योगी ने नो कर्फ्यू, नो दंगा, उत्तर प्रदेश में सब चंगा। और रंगदारी न फिरौती, अब उत्तर प्रदेश नहीं है किसी की बपौती, जैसे लोकप्रिय नारे गढ़े। योगी आदित्यनाथ ने तो नगर निकाय चुनाव को देवासुर संग्राम तक कह डाला था। सहारनपुर की जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा था कि यह चुनाव देवासुर संग्राम से कम नहीं है। चुनाव में दानव के रूप में भ्रष्टाचारी हैं, दुराचारी हैं और अपराधी प्रवृत्ति के लोग हैं। जनता की मदद से निकाय चुनाव में ऐसी ताकतों को किनारे लगा देना है। सहारनपुर में बसपा उम्मीदवार इमरान मसूद चुनाव को हिंदू-मुसलमान में बांटने की कोशिश करते रहे। पर वे नाकाम रहे। वे हारे, भारतीय जनता पार्टी जीती। योगी सरकार एक तरफ चौतरफा विकास पर ध्यान दे रही है तो वहीं दूसरी तरफ कानून व्यवस्था की बेहतरी पर प्राथमिकता से ध्यान दे रही है। दुर्दांत माफिया पर नकेल कसने के साथ सतत पुलिस सुधारों की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके सकारात्मक परिणाम अब दिखने लगे है। कानून व्यवस्था की स्थिति सुधरने की वजह से निवेश बढ़ा है। कभी बीमारू राज्यों में गिना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज न केवल घरेलू बल्कि विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित कर रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में मुकेश अंबानी, कुमार मंगलम बिडला, टाटा समूह के एन चंद्रशेखर से लेकर ज्यूरिख एयरपोर्ट एशिया के सीईओ डेनियल बिचर समेत उद्योगजगत के दिग्गजों की उपस्थिति इसका प्रमाण था। कुल 33 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये। भारतीय जनता पार्टी को पता है कि उत्तर प्रदेश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मैं मानता हूं कि जनता विकास और तरक्की चाहती है, न कि जातपात का जहर। माफिया से पूरा उत्तर प्रदेश मुक्ति चाहता है। इसलिए कुछ राजनीतिक दल भले ही बुलडोजर कार्रवाई की निंदा करें लेकिन योगी अपने पथ पर अडिग चले जा रहे हैं। (लेखक, वरिष्ठ संपादक, स्तंभकार और पूर्व सांसद हैं।)
सोशल मीडिया पर नहीं है कोई प्रोफाइल जानिए कौन हैं पर्दे के पीछे से काम करने वाले सुनील कानुगोलू?एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक के सभी विधानसभा सीटों की गिनती अभी पूरी नहीं हुई है। लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से हिमाचल प्रदेश के अलावा कांग्रेस कोई चुनाव नहीं जीत पायी थी। कर्नाटक में मिली बढ़त के पीछे कांग्रेस की रणनीति का बड़ा योगदान माना जा रहा है। पार्टी ने बतौर चुनाव रणनीतिकार सुनील कानुगोलू को रखा था। 2018 के विधानसभा चुनाव में कानुगोलू ने भाजपा के लिए काम किया था।इंडियन एक्सप्रेस ने एक कांग्रेस नेता के हवाले से बताया है कि पार्टी ने पिछले आठ महीनों में पांच सर्वे किये थे। अंत में कुछ सीटों को छोड़कर, उम्मीदवारों को मुख्य रूप से सुनील कानुगोलू की टीम द्वारा किये गये इन सर्वेक्षणों के आधार पर चुना गया था। उन सर्वेक्षणों के आधार पर लगभग 70 हॉट सीटों की पहचान की गई थी। उन सीटों पर अकउउ (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) के देश भर से आए पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया था। कर्नाटक में कोई उन्हें बाहरी कह खारिज नहीं कर सकता था क्योंकि उनका जन्म राज्य के बल्लारी जिले में हुआ है और उन्होंने मिडिल स्कूल तक पढ़ाई भी कर्नाटक में ही रहकर की है।2024 लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के साथ होंगे कानुगोलूपिछले मई में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कानुगोलू को पार्टी के 2024 लोकसभा चुनाव टास्क फोर्स का सदस्य नामित किया था। इस टास्क फोर्स में पी चिदंबरम, मुकुल वासनिक, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, अजय माकन, प्रियंका गांधी वाड्रा और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे दिग्गज नेता भी शामिल हैं। सुरजेवाला को बतौर लीडर कर्नाटक का प्रभारी भी बनाया गया था। कांग्रेस ने पहले यह आफर प्रशांत किशोर को दिया था। उनके मना करने के कुछ सप्ताह बाद कानुगोलू कांग्रेस टास्क फोर्स का हिस्सा बन गये। कानुगोलू की कोई सोशल मीडिया प्रोफाइल नहीं है। 2014 में अलग होने से पहले किशोर और कानुगोलू एक साथ काम कर चुके हैं हालांकि दोनों के तौर-तरीके में काफी अलग हैं।प्रशांत किशोर से अलग होने के बाद कानुगोलू ने अपने दम पर 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले डीएमके प्रमुख और वर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के अभियान नामक्कु नामे को डिजाइन किया था। इस अभियान ने स्टालिन के पब्लिक इमेज को बड़ा बनाया। हालांकि डीएमके जीतने में विफल रही। तब तीसरे मोर्चे ने वोटों को बांट दिया था और एआईएडीएमके सत्ता में बनी रही थी। हालांकि तब भी एक कांग्रेस नेता कहा था, डीएमके हार गयी लेकिन स्टालिन एक नेता के रूप में उभरे। इसके बाद कानुगोलू ने फरवरी 2018 तक दिल्ली में अमित शाह के साथ मिलकर काम किया।2019 चुनाव में डीएमके के लिए किया काम2019 के लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक कानुगोलू डीएमके खेमे में लौट आये और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को राज्य के 39 संसदीय क्षेत्रों में से 38 जीतने में मदद की। लेकिन स्टालिन द्वारा किशोर से मदद मांगने के बाद 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी से नाता तोड़ लिया। उन्होंने पाला बदल लिया और एआइडीएमके के लिए काम किया लेकिन उसे सत्ता से बेदखल होने से नहीं रोक सके। उसी वर्ष, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ बैठक करने के बाद कांग्रेस ने कर्नाटक के लिए कानुगोलू की कंपनी माइंडशेयर एनालिटिक्स की सर्विस ली।कांग्रेस ने कानुगोलू को क्यों चुना?कांग्रेस ने चुनावी रणनीतिकार के तौर पर कानुगोलू को ही क्यों चुना? इसका एक कारण यह था कि वह लो प्रोफाइल है। एक कांग्रेसी नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, कानुगोलू इतने लो प्रफाइल हैं कि सोशल मीडिया उनकी तस्वीर बताकर जो शेयर की जाती है, वह भी उनके भाई की है। इससे आप उनकी कार्यशैली को समझ सकते हैं। वह पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं। मेरा मानना है कि वह अपने विचारों को पार्टी पर नहीं थोपते। हर पार्टी की अपनी ताकत और कमजोरियां होती हैं। हर पार्टी के काम करने का तरीका अलग होता है। वह इसे समझते हैं और पार्टी के साथ काम करने की कोशिश करते हैं।कानुगोलू 40 साल के भी नहीं हैं, लेकिन अब तक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के लिए एक दर्जन से अधिक चुनावों की रणनीति बना चुके हैं। लगभग एक दशक के करियर में उन्होंने एक दर्जन से अधिक मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया है। भाजपा से लेकर ऊटङ और अब कर्नाटक में कांग्रेस तक, कानुगोलू प्रशांत किशोर की तरह ही एक लोकप्रिय चुनाव रणनीतिकार बनते जा रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव अभियान को आकार देने की जिम्मेदारी भी कांग्रेस ने सुनील कनुगोलू को ही दी है।
सोशल मीडिया पर नहीं है कोई प्रोफाइल जानिए कौन हैं पर्दे के पीछे से काम करने वाले सुनील कानुगोलू?एबीएन सेंट्रल डेस्क। कर्नाटक के सभी विधानसभा सीटों की गिनती अभी पूरी नहीं हुई है। लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनेगी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से हिमाचल प्रदेश के अलावा कांग्रेस कोई चुनाव नहीं जीत पायी थी। कर्नाटक में मिली बढ़त के पीछे कांग्रेस की रणनीति का बड़ा योगदान माना जा रहा है। पार्टी ने बतौर चुनाव रणनीतिकार सुनील कानुगोलू को रखा था। 2018 के विधानसभा चुनाव में कानुगोलू ने भाजपा के लिए काम किया था।इंडियन एक्सप्रेस ने एक कांग्रेस नेता के हवाले से बताया है कि पार्टी ने पिछले आठ महीनों में पांच सर्वे किये थे। अंत में कुछ सीटों को छोड़कर, उम्मीदवारों को मुख्य रूप से सुनील कानुगोलू की टीम द्वारा किये गये इन सर्वेक्षणों के आधार पर चुना गया था। उन सर्वेक्षणों के आधार पर लगभग 70 हॉट सीटों की पहचान की गई थी। उन सीटों पर अकउउ (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) के देश भर से आए पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया था। कर्नाटक में कोई उन्हें बाहरी कह खारिज नहीं कर सकता था क्योंकि उनका जन्म राज्य के बल्लारी जिले में हुआ है और उन्होंने मिडिल स्कूल तक पढ़ाई भी कर्नाटक में ही रहकर की है।2024 लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के साथ होंगे कानुगोलूपिछले मई में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कानुगोलू को पार्टी के 2024 लोकसभा चुनाव टास्क फोर्स का सदस्य नामित किया था। इस टास्क फोर्स में पी चिदंबरम, मुकुल वासनिक, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, अजय माकन, प्रियंका गांधी वाड्रा और रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे दिग्गज नेता भी शामिल हैं। सुरजेवाला को बतौर लीडर कर्नाटक का प्रभारी भी बनाया गया था। कांग्रेस ने पहले यह आफर प्रशांत किशोर को दिया था। उनके मना करने के कुछ सप्ताह बाद कानुगोलू कांग्रेस टास्क फोर्स का हिस्सा बन गये। कानुगोलू की कोई सोशल मीडिया प्रोफाइल नहीं है। 2014 में अलग होने से पहले किशोर और कानुगोलू एक साथ काम कर चुके हैं हालांकि दोनों के तौर-तरीके में काफी अलग हैं।प्रशांत किशोर से अलग होने के बाद कानुगोलू ने अपने दम पर 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले डीएमके प्रमुख और वर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के अभियान नामक्कु नामे को डिजाइन किया था। इस अभियान ने स्टालिन के पब्लिक इमेज को बड़ा बनाया। हालांकि डीएमके जीतने में विफल रही। तब तीसरे मोर्चे ने वोटों को बांट दिया था और एआईएडीएमके सत्ता में बनी रही थी। हालांकि तब भी एक कांग्रेस नेता कहा था, डीएमके हार गयी लेकिन स्टालिन एक नेता के रूप में उभरे। इसके बाद कानुगोलू ने फरवरी 2018 तक दिल्ली में अमित शाह के साथ मिलकर काम किया।2019 चुनाव में डीएमके के लिए किया काम2019 के लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक कानुगोलू डीएमके खेमे में लौट आये और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को राज्य के 39 संसदीय क्षेत्रों में से 38 जीतने में मदद की। लेकिन स्टालिन द्वारा किशोर से मदद मांगने के बाद 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी से नाता तोड़ लिया। उन्होंने पाला बदल लिया और एआइडीएमके के लिए काम किया लेकिन उसे सत्ता से बेदखल होने से नहीं रोक सके। उसी वर्ष, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ बैठक करने के बाद कांग्रेस ने कर्नाटक के लिए कानुगोलू की कंपनी माइंडशेयर एनालिटिक्स की सर्विस ली।कांग्रेस ने कानुगोलू को क्यों चुना?कांग्रेस ने चुनावी रणनीतिकार के तौर पर कानुगोलू को ही क्यों चुना? इसका एक कारण यह था कि वह लो प्रोफाइल है। एक कांग्रेसी नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, कानुगोलू इतने लो प्रफाइल हैं कि सोशल मीडिया उनकी तस्वीर बताकर जो शेयर की जाती है, वह भी उनके भाई की है। इससे आप उनकी कार्यशैली को समझ सकते हैं। वह पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते हैं। मेरा मानना है कि वह अपने विचारों को पार्टी पर नहीं थोपते। हर पार्टी की अपनी ताकत और कमजोरियां होती हैं। हर पार्टी के काम करने का तरीका अलग होता है। वह इसे समझते हैं और पार्टी के साथ काम करने की कोशिश करते हैं।कानुगोलू 40 साल के भी नहीं हैं, लेकिन अब तक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के लिए एक दर्जन से अधिक चुनावों की रणनीति बना चुके हैं। लगभग एक दशक के करियर में उन्होंने एक दर्जन से अधिक मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया है। भाजपा से लेकर ऊटङ और अब कर्नाटक में कांग्रेस तक, कानुगोलू प्रशांत किशोर की तरह ही एक लोकप्रिय चुनाव रणनीतिकार बनते जा रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव अभियान को आकार देने की जिम्मेदारी भी कांग्रेस ने सुनील कनुगोलू को ही दी है।
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