जगह की कमी, सरकार के सामने मुश्किलएबीएन सेंट्रल डेस्क। बालासोर ट्रेन हादसे के बाद ओडिशा सरकार के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों में ऐसे शवों का ढेर लगा है जिनकी अभी शिनाख्त नहीं हो पायी है या जिन्हें लेने के लिए कोई दावेदार सामने नहीं आये हैं। ऐसे लावारिस शवों की संख्या इतनी अधिक है कि मुर्दाघरों में जगह कम पड़ गई है। बड़ी संख्या में ऐसे शवों से निपटने में असमर्थ ओडिशा सरकार ने बालासोर से 187 शवों को भुवनेश्वर भिजवाया लेकिन यहां भी जगह की कमी शवगृह प्रशासकों के लिए परेशानी खड़ी कर रही है।भुवनेश्वर एम्स में 100 शव रखे गये हैं जबकि बाकी शव कैपिटल अस्पताल, अमरी अस्पताल, सम अस्पताल एवं अन्य निजी अस्पतालों में भेजे गये हैं। भुवनेश्वर एम्स के एक अधिकारी ने कहा- यहां भी शवों को संभालकर रखना हमारे लिए एक असल चुनौती है क्योंकि हमारे यहां अधिकतम 40 शवों को रखने की सुविधा है।उन्होंने कहा कि शरीर रचना विभाग में अतिरिक्त इंतजाम किये गये हैं। भुवनेश्वर एम्स के प्रशासन ने शवों की पहचान होने तक उन्हें संभालकर रखने के लिए बड़ी संख्या में ताबूत, बर्फ और फार्मलिन रसायन खरीदा है। सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने शनिवार को दुर्घटनास्थल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के दौरान उनके सामने शवों को संभालकर रखने के सिलसिले में उत्पन्न स्थिति की ओर ध्यान आकृष्ट किया।अधिकारी ने कहा- गर्मी के इस मौसम में शवों को संभालकर रखना वाकई मुश्किल है। सूत्रों ने बताया कि दुर्घटनास्थल से ही प्रधानमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से बात की तथा इन शवों को भुवनेश्वर एम्स में रखवाने का इंतजाम करवाने को कहा। मांडविया तत्काल रात में ही भुवनेश्वर आये और उन्होंने यहां कई बैठकें की।ओडिशा के मुख्य सचिव पी के जेना ने कहा कि शनिवार को 85 एम्बुलेंस से शव भुवनेश्वर लाये गये और अन्य 17 शव रविवार को लाये गये। ओडिशा की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव शालिनी पंडित ने पीटीआई-भाषा से कहा कि सभी शव (मुर्दाघरों की कमी के कारण) प्रशीतन भंडारण गृह में रखे गये हैं।मुख्य सचिव ने कहा कि प्रशासन के लिए इन शवों की शिनाख्त एक बड़ी चुनौती है क्योंकि दुर्घटना में मारे गये लोग विभिन्न राज्यों के हैं। उन्होंने कहा कि इन यात्रियों का ब्योरा तीन वेबसाइटो विशेष राहत आयुक्त, भुवनेश्वर नगर निगम और ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइटों पर डाल दिया गया है।उन्होंने कहा कि इन मृत यात्रियों की फोटो युक्त सूची भी वेबसाइटों पर अपलोड कर दी गयी है ताकि उनकी पहचान करने में सहूलियत हो। मुख्य सचिव ने कहा कि बालासोर रेल हादसे के मृतकों की तस्वीरें केवल उनकी पहचान के लिए डाली गयी है क्योंकि ये तस्वीरें मन विचलित कर देने वाली हैं।उन्होंने कहा कि किसी को भी विशेष राहत आयुक्त (ओडिशा) की अनुमति के बगैर इन तस्वीरों को किसी भी रूप में प्रकाशित या प्रसारित नहीं करना चाहिए। एक डाक्टर ने पीटीआई को बताया- शव क्षत विक्षत हालत में हैं । मैंने एक व्यक्ति का केवल सिर देखा, उसके शरीर के बाकी अंगों के नाम पर कुछ नहीं था।इस बीच भुवनेश्वर नगर निगम के कार्यालय में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। लोग इस कार्यालय से संपर्क कर शवों के बारे में सूचनाएं हासिल कर सकते हैं और उनकी शिनाख्त में मदद कर सकते हैं। इस हादसे में कम से कम 288 लोग मारे गये हैं और 1100 से अधिक घायल हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लगातार दूसरे दिन रविवार को ओडिशा के बालासोर ट्रेन दुर्घटनास्थल पर चल रहे मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ट्रेन हादसे की वजह के बारे में भी बताया। रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने मामले की जांच की है। हादसे के कारण का पता लग गया है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान भी कर ली गई है। रेल मंत्री ने खुलासा किया कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण यह दुर्घटना हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए निर्देशों पर तेजी से काम चल रहा है। शनिवार रात एक ट्रैक का काम लगभग पूरा हो गया। आज एक ट्रैक की पूरी मरम्मत करने की कोशिश रहेगी। सभी डिब्बों को हटा दिया गया है। शवों को निकाल लिया गया है। कार्य तेजी से चल रहा है। कोशिश है कि बुधवार की सुबह तक सामान्य रूट चालू हो जाए। रेल मंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मरम्मत कार्य को देखने के लिए दुर्घटना स्थल पर मौजूद हैं। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि रेस्क्यू काम पूरा हो चुका है। बता दें कि ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार शाम 7 बजे हुए रेल हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 288 तक पहुंच गई है। 1175 घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओडिशा के बालासोर मे बड़ा रेल हादसा हुआ है। बालासोर से करीब 40 किलोमीटर आगे कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन की टक्कर एक मालगाड़ी से हो गयी। टक्कर के बाद कोरोमंडल ट्रेन की स्लीपर बोगी के 10 से 12 डिब्बे पटरी से उतर गये। ट्रेन हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 238 पर पहुंच गयी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के लिए रवानाप्रधानमंत्री के कार्यालय यानी पीएमओ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा के लिए रवाना हो रहे हैं, जहां वे बालासोर रेल हादसे के मद्देनजर स्थिति की समीक्षा करेंगे।अब तक 261 लोगों की मौतदक्षिण पूर्व रेलवे ने बताया कि अब तक मिली जानकारी के मुताबिक 261 लोगों की मौत हुई है। घायल यात्रियों को गोपालपुर, खंटापारा, बालासोर, भद्रक और सोरो के अस्पतालों में ले जाया गया है।
कहा- मार्ग पर कवच प्रणाली उपलब्ध नहींएबीएन सेंट्रल डेस्क। रेलवे ने ओडिशा में हुए भीषण ट्रेन हादसे की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है, जिसकी अध्यक्षता दक्षिण-पूर्वी प्रखंड के रेलवे सुरक्षा आयुक्त करेंगे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। रेलवे सुरक्षा आयुक्त नागर विमानन मंत्रालय के अधीन काम करता है और इस प्रकार के सभी हादसों की जांच करता है। भारतीय रेलवे के एक प्रवक्ता ने शनिवार को कहा कि एसई (दक्षिण-पूर्वी) प्रखंड के सीआरएस (रेलवे सुरक्षा आयुक्त) ए एम चौधरी हादसे की जांच करेंगे। रेलवे ने बताया कि रेलगाड़ियों को टकराने से रोकने वाली प्रणाली कवच इस मार्ग पर उपलब्ध नहीं है। ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार शाम कोरोमंडल एक्सप्रेस और बेंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन के पटरी से उतरने और एक मालगाड़ी से टकराने से जुड़े रेल हादसे में मृतक संख्या शनिवार को बढ़कर 261 हो गयी। इस हादसे में 900 से अधिक यात्री घायल हुए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हादसा किस वजह से हुआ, लेकिन सूत्रों ने संकेत दिया है कि इसका संभावित कारण सिग्नल में गड़बड़ी होना है। भारतीय रेलवे के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने कहा कि बचाव अभियान पूरा हो गया है। हम अब बहाली प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। इस मार्ग पर कवच प्रणाली उपलब्ध नहीं थी। रेलवे अपने नेटवर्क में कवच प्रणाली उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में है, ताकि रेलगाड़ियों के टकराने से होने वाले हादसों को रोका जा सके।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ओडिशा के बालासोर जिले में बहानागा रेलवे स्टेशन के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। हादसे में 900 यात्री घायल हो गये। घायलों का इलाज चल रहा है और 233 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी है। बालासोर जिले के बहांगा स्टेशन पर दो ट्रेनें पटरी से उतर गयी।बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस के पटरी से उतरे दो डिब्बों की चपेट में आने से कोरोमंडल एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गये। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा ट्रेन हादसे दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि ओडिशा में ट्रेन हादसे से व्यथित। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। घायल जल्द स्वस्थ हों। वहीं हादसे के संबंध में पीएम मोदी ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की। पीएम ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी बात की। दुर्घटनास्थल पर बचाव कार्य जारी है और प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता दी जा रही है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट किया कि ओडिशा के बालासोर में हुई रेल दुर्घटना बेहद पीड़ादायक है। एनडीआरएफ की टीम पहले ही दुर्घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदना, घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का शिकार हो गयी है। ओडिशा के बालासोर जिले में कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हुई है। जानकारी के मुताबिक, कोरोमंडल एक्सप्रेस मालगाड़ी से टकरा गयी, जिसके बाद ट्रेन की कई बोगियां पटरी से उतर गयी है। कोरोमंडल एक्सप्रेस हावड़ा से चेन्नई जा रही थी। इसी दौरान बालासोर जिले में बहनगा के पास ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गयी। बताया जा रहा है कि ट्रेन हादसे में कई लोग घायल हो गये हैं। फिलहाल मौके पर रेलवे और रेस्क्यू टीम मौजूद है। वहीं, घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। मौके पर पांच एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, बोगियों को काटकर यात्रियों को बाहर निकाला जा रहा है। अभी तक 15 घायलों को बोगियों से निकाल जा चुका है। वहीं, कई यात्रियों को निकालने का काम जारी है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। वहीं, पुलिस और रेलवे की टीम लोगों से शांति बनाये रखने की अपील कर रहे हैं। घटनास्थल पर एनडीआरएफ की टीम भी मौजूद है। रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया है। रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर जारी किये हैं : बालासोर : 8249591559, 7978418322 हावड़ा : 033-26382217 खड़गपुर : 8972073925, 9332392339 जानकारी के मुताबिक, एक ही ट्रैक पर मालगाड़ी और ट्रेन के आने से यह हादसा हुआ है। हालांकि, रेलवे की ओर से अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गयी है। रेलवे ने जांच के आदेश दे दिये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में आज का दिन महोत्सव के तौर पर मनाया जा रहा है। जब छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था उसमें स्वराज की ललकार और राष्ट्रीयता की जय जयकार समाहित थी। पीएम मोदी ने कहा कि आज एक भारत श्रेष्ठ भारत के विजन में छत्रपति शिवाजी महाराज के विचारों का ही प्रतिबिंब देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक दिवस नयी चेतना, नयी ऊर्जा लेकर आया है। छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक उस कालखंड का एक अद्भुत और विशिष्ट अध्याय है। राष्ट्र कल्याण और लोक कल्याण उनकी शासन व्यवस्था के मूल तत्व रहे हैं। मैं आज छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं। महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर नागपुर में शिवराज्याभिषेक उत्सव धूमधाम से मनाया गया।
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में इमोशनल हुए राहुल गांधी एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब वह राजनीति में आये थे, तब उन्होंने नहीं सोचा था कि उन्हें लोकसभा सदस्यता से कभी अयोग्य घोषित किया जायेगा, हालांकि इससे उन्हें लोगों की सेवा करने का बड़ा मौका मिला है। राहुल अमेरिका के तीन शहरों की यात्रा पर हैं। कैलिफोर्निया में प्रतिष्ठित स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी परिसर में भारतीय छात्रों के सवालों के जवाब में उन्होंने यह बात कही। गौरतलब है कि सूरत की एक अदालत ने 2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी से जुड़े मामले में राहुल को इस साल की शुरूआत में आपराधिक मानहानि का दोषी ठहराते हुए दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के ऐलान के बाद, कांग्रेस नेता को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। वह केरल के वायनाड से सांसद थे। कभी नहीं सोचा था कि ऐसी स्थिति का सामना करना होगा। राहुल ने कहा कि जब वह वर्ष 2000 में राजनीति में आये थे, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि आज वह जो कुछ भी होता देख रहे हैं, वह उससे एकदम अलग है, जैसा कि उन्होंने राजनीति में कदम रखते समय सोचा था। संसद सदस्य के रूप में लोकसभा से अपनी अयोग्यता पर राहुल (52) ने कहा कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी कि ऐसा कुछ होगा। राहुल ने कहा, मैं शायद भारत में मानहानि के मामले में सबसे ज्यादा सजा पाने वाला व्यक्ति हूं। उन्होंने कहा कि मैंने कभी सोचा नहीं था कि कभी ऐसा कुछ होगा।राजनीति ऐसी ही होती है राहुल ने कहा कि लेकिन फिर मुझे लगता है कि इसने मुझे वास्तव में एक बड़ा अवसर दिया है। शायद बेहद बड़ा अवसर। राजनीति ऐसी ही होती है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह नाटक वास्तव में करीब छह महीने पहले शुरू हुआ। हम संघर्ष कर रहे थे। पूरा विपक्ष भारत में संघर्ष कर रहा है। सारा धन चुनिंदा वर्ग के पास है। संस्थाओं पर कब्जा हो रखा है। हम अपने देश में लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। राहुल ने कहा कि उन्होंने उस समय ही भारत जोड़ो यात्रा शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में भारतीय छात्रों और भारतीय मूल के शिक्षाविदों के साथ बातचीत के दौरान कहा, मैं एकदम स्पष्ट हूं कि हमारी लड़ाई हमारी है। हालांकि, यहां भारत के युवा छात्रों का एक समूह है। मैं उनके साथ संबंध बनाना चाहता हूं और उनसे बात करना चाहता हूं। ऐसा करना मेरा अधिकार है। कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि विदेश यात्रा के जरिये वह किसी से कोई समर्थन नहीं मांग रहे हैं। स्टेनफोर्ड में खचाखच भरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच राहुल ने कहा कि मेरी समझ में नहीं आता कि प्रधानमंत्री यहां क्यों नहीं आते और ऐसा क्यों नहीं करते। भारत के कई नेताओं ने अमेरिका में भारतीय छात्रों से की बातचीत इस पर कार्यक्रम संचालक ने कहा कि प्रधानमंत्री का किसी भी समय स्टेनफोर्ड आने और छात्रों तथा शिक्षाविदों के साथ बातचीत करने के लिए स्वागत है। सभागार खचाखच भरा होने के कारण कुछ छात्रों को प्रवेश नहीं मिला। कार्यक्रम शुरू होने से दो घंटे पहले ही छात्र कतार में लग गए थे। गौरतलब है कि पिछले डेढ़ साल में भारत के कई नेताओं ने अमेरिका में भारतीय छात्रों से बातचीत की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हाल के महीनों में कई बार दूध की कीमतों में वृद्धि जहां आम आदमी का बजट बढ़ाने वाली साबित हुई है, वहीं देश के खाद्य पदार्थों के भाव में वृद्धि से सरकार के महंगाई कम करने के प्रयास भी बाधित हुए हैं। यह विडंबना ही है कि दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश भारत अपने नागरिकों की दूध की मांग पूरी करने में मुश्किल महसूस कर रहा है। कोरोना काल में दूध आपूर्ति बाधित होने से उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ा। वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार लंपी के चलते दो लाख से अधिक गौधन की क्षति हुई। स्वतंत्र पर्यवेक्षक इसकी संख्या कहीं ज्यादा बताते हैं। बहरहाल, इन आपदाओं से हुई क्षति की वजह से दूध उत्पादन में गिरावट आना स्वाभाविक था। जिसके चलते दूध उत्पादों के आयात के कयास लगाये जा रहे हैं। हालांकि, यदि बाहर से सस्ता दूध आता है तो कीमत युद्ध से देश के दुग्ध उत्पादकों का संरक्षण करना भी एक चुनौती होगा। उल्लेखनीय है कि दुनिया का चौबीस फीसदी दूध उत्पादन भारत में होता है। बीते साल 22 करोड़ टन से अधिक दूध उत्पादन के आंकड़े हैं। लेकिन उसी अनुपात में दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश में दूध की मांग में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। यह वृद्धि आठ से दस फीसदी बतायी जा रही है। कोरोना काल व बाद में लंपी के चलते दूध उत्पादन में जो गिरावट आयी है, उससे इस साल कुल उत्पादन में गिरावट या स्थिर रहने के आसार हैं। तभी डेयरी उत्पाद मसलन मक्खन व घी के आयात की बात कही जा रही है। वहीं इस परिस्थितिजन्य संकट के अलावा राजनीतिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिये दूध के मुद्दे पर भी अब खूब सियासत होने लगी है। कर्नाटक चुनाव से पहले दो दुग्ध उत्पादक ब्रांड्स को लेकर जमकर राजनीति हुई। अब यह मुद्दा तमिलनाडु में जा पहुंचा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि आविन के मिल्क शेड क्षेत्र में अमूल की दूध खरीद पर रोक लगायी जाये। उल्लेखनीय है कर्नाटक चुनाव में अमूल की एंट्री को लेकर जमकर राजनीति हुई थी। कांग्रेस व जेडीएस ने यहां तक आरोप लगाया था कि गुजरात से आने वाला अमूल लोकल ब्रांड नंदिनी को खत्म करने की साजिश कर रहा है। यहां तक कि एक होटल संगठन ने बाकायदा अमूल उत्पादों के बहिष्कार की घोषणा की। गुजरात कोआपरेटिव मिल्क फेडरेशन अपने ब्रांड अमूल के व्यवस्थित कारोबार के लिये जाना जाता है। जिसके चलते सहकारी दुग्ध उत्पादकों के जीवन में खासा सकारात्मक बदलाव भी आया है। वहीं ब्रांड चुनने की उपभोक्ता को आजादी है और इसके लिये बेहतर प्रबंधन भी एक शर्त है।एक पहलू यह भी है कि देश में पशुओं के चारे के दाम में खासी तेजी आयी है और दुग्ध उत्पादकों का मुनाफा कम हुआ है। जिसके चलते हरियाणा समेत कई राज्यों में पशुपालक इस व्यवसाय से अपना हाथ खींच रहे हैं। यही वजह है कि मांग व आपूर्ति में असंतुलन से इसकी कीमतों में उछाल आ रहा है। कोरोना व लंपी के बाद जहां उत्पादन गिरा, वहीं मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि, विदेशों से दूध का आयात लाभकारी नहीं हो सकता है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें मजबूत बनी हुई हैं। बेहतर होगा कि सरकार भी सहकारी क्षेत्र के दूध उत्पादन के आंकड़ों के साथ ही निजी व असंगठित क्षेत्र के उत्पादन का भी मूल्यांकन करे, ताकि देश की जरूरतों का न्यायसंगत मूल्यांकन हो सके। वहीं दूसरी ओर सरकार को चारे की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का भी नियमन करके दूध उत्पादकों को राहत देने प्रयास करना चाहिए। कोशिश हो कि चारे की फसल के रकबे में भी वृद्धि की जाये। साथ ही डेयरी क्षेत्र के सालाना उत्पादन व मांग में संतुलन स्थापित करने के भी गंभीर प्रयास हों। यदि दुग्ध उत्पादक किसानों की दशा सुधरेगी तो उत्पादन में सुधार निश्चित रूप से महसूस किया जायेगा। सरकार को ध्यान रहे कि देश की एक बड़ी शाकाहारी आबादी के स्वास्थ्य के लिये दूध कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत भी है।
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