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हिमाचल : 70,000 पर्यटक और 15,000 पर्यटक वाहन सुरक्षित निकाले गये
Published / 2023-07-15 21:23:36
हिमाचल : 70,000 पर्यटक और 15,000 पर्यटक वाहन सुरक्षित निकाले गये

हिमाचल त्रासदीप्राकृतिक आपदा के बाद जारी राहत व बचाव अभियान खत्मएबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में भारी वर्षा के कारण आई प्राकृतिक आपदा में फंसे लोगों और पर्यटकों को निकालने का अभियान खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज शिमला में राहत व बचाव अभियान पूरा होने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने लगभग 70000 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला है। अब लगभग 500 पर्यटक ही हिमाचल प्रदेश में स्वेच्छा से रुके हैं। उन्हें खाने पीने और अन्य जरूरी चीजों उपलब्ध करवाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़े पैमाने पर बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बचाव कार्य आरंभ किये गये और सभी के सहयोग से इसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश से लगभग 15000 पर्यटक गाड़ियों को सुरक्षित वापस भेजा गया है। उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी और मोबाइल सेवाओं को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया है।आवश्यक सेवाएं बहाल करने के प्रयासमुख्यमंत्री ने कहा कि बचे हुए क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों, एनडीआरएफ, भारतीय सेना आदि द्वारा इस आपदा में राहत एवं बचाव कार्यों को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए उनके प्रयासों की प्रशंसा भी की।सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आपदा बहुत बड़ी है और बाढ़ से राज्य में लगभग 8000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। राज्य के लोग इसका मजबूती के साथ सामना कर रहे हैं और राज्य सरकार पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य सरकार की उदारता के साथ मदद करने का आग्रह किया।

साहित्य अकादमी में डॉ जगमोहन शर्मा की पुस्तकों का लोकार्पण
Published / 2023-07-15 17:50:25
साहित्य अकादमी में डॉ जगमोहन शर्मा की पुस्तकों का लोकार्पण

वक्ताओं ने कहा, आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा की सबसे अद्भुत कृति  "श्रीमद्भगवद्गीता" के दोहानुवाद को घर-घर पहुंचाना जरूरीएबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय साहित्य अकादेमी के सभागार में प्रख्यात दोहाकार डॉ. जगमोहन शर्मा की पुस्तकों श्रीमद्भगवद्गीता-दोहा रूपांतरण और महाकवि कालिदास के मेघदूत पर आधारित यक्षप्रिया की पाती का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रभात प्रकाशन और हंसराज कॉलेज लिटरेरी सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रधानाचार्य और वरिष्ठ साहित्यकार प्रो रमा ने की जबकि विशिष्ट वक्ता के रूप में दोहापुरुष कहे जाने वाले नरेश शांडिल्य और वरिष्ठ दोहाकार सोमदत्त शर्मा ने अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन हंसराज कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रभांषु ओझा ने किया। इस दौरान सुधी पाठकों को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के सान्निध्य का लाभ भी प्राप्त हुआ। समारोह के शुरू में अपनी पुस्तकों से परिचय कराते हुए डॉ जगमोहन शर्मा ने कहा कि भारतीय मेधा जटिलता को स्वीकार नहीं करती। यहां गूढ़ से गूढ़ बातों को सरल, संक्षिप्त भाषा में कहने और समझाने की परंपरा रही है। इसीलिए समाज में दोहों की इतनी व्यापक स्वीकृति है। संस्कृत के इन महाकाव्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इसके दोहांतरण की आवश्यकता और दोहा परंपरा पर उन्होंने कहा- दोहा संतों की विधा है, कथनी करनी एक। शुद्ध हृदय मन आत्मा, दोहे लिखो अनेक।कार्यक्रम की अध्यक्ष एवं हंसराज कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रो. रमा ने कहा कि गीता सबके लिए संजीवनी है। इसमें जीवन प्रबंधन के सारे मंत्र हैं। आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो ऐसे में भारतीय ज्ञान परंपरा की सबसे अद्भुत कृति श्रीमद्भगवद्गीता का भी घर-घर पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा- आजकल कविता का शिल्प बदल रहा है। गीता जैसे विशुद्ध ज्ञान के ग्रंथ जिसके एक-एक श्लोक पर पुस्तकें लिखी जा सकती हैं, उसका इतना सरल और स्पष्ट दोहांतरण कर डॉ जगमोहन शर्मा ने गागर में सागर भरने का काम किया है। संस्कृत के इन महाकाव्यों के गूढ़ ज्ञान को दोहों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का यह अनुकरणीय कार्य वर्षों की साधना का परिणाम है। इन किताबों की विशिष्टता इसमें है कि दोहांतरण के दौरान भी इन कृतियों के मूल कथातत्त्व को उन्होंने अपने अनुवाद में अक्षुण्ण रखा है। विशिष्ट वक्ता और दोहों का आधुनिक कबीर कहे जाने नरेश शांडिल्य ने कहा, यक्षप्रिया की पाती प्रेम और विरह का अद्भुत ग्रंथ है। यहां कवि की कल्पनाशीलता विलक्षण है। रामटेक से अलकापुरी तक की जो यात्रा है, वह एक करुण वृत्तांत है। प्रेम विरह के बिना पूर्ण हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा, हिंदी साहित्य के आलोचकों का एक धड़ा प्रेम को खारिज करता है। लेकिन प्रेम से बचा कैसे जा सकता है। मेघदूत के प्रेम और विरह के छंदों के अनुवाद में दोहाकार की कलम खुल कर चली है।उन्होंने कहा कि वे खुद भी श्रीमद्भगवद्गीता दोहांतरण कर रहे हैं, ऐसे में यह पुस्तक उनके लिए प्रसाद है। विशिष्ट वक्ता सोमदत्त शर्मा ने कहा, श्रीमद्भगवद्गीता के विशुद्ध ज्ञान को दोहे में उतार देना असाधारण साहस का काम है। यक्ष प्रिया की पाती में दोहाकार ने पूरी मौलिकता और तन्मयता के साथ इसमें डूब कर लिखा है। इतनी स्पष्टता और लावण्य विरल है। किसी कृति की सफलता इसमें है कि वह पाठक को अपनी कल्पना शक्ति के उपयोग के लिए मजबूर करे और यक्ष प्रिया की पाती में कवि इसमें पूरी तरह सफल हुए हैं। उन्होंने कहा, यक्ष प्रिया की पाती में दोहों की तेरह और ग्यारह मात्राओं का शब्दश: पालन करते हुए भी डॉ जगमोहन शर्मा ने कविता का आनंद और सौंदर्य अक्षुण्ण रखा है। यह दोहे की विधा पर उनकी असाधारण पकड़ और उनके रचनात्मक सामर्थ्य को रेखांकित करता है। उक्त जानकारी जितेंद्र परमार (8595950825) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

हो सकता है कि अब भविष्य में हम चांद पर भी रहने लगें : मोदी
Published / 2023-07-14 19:50:26
हो सकता है कि अब भविष्य में हम चांद पर भी रहने लगें : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी चन्द्रयान-3 के लिए देशवासियों को शुभकामनाएंएबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के लिए देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए आज कहा कि यह मिशन भारत की आशाओं एवं सपनों को आगे बढ़ायेगा।मोदी ने ट्वीटर पर कई ट्वीट के माध्यम से जारी संदेश में कहा कि जहां तक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र का सवाल है, 14 जुलाई 2023 हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा। चंद्रयान-3, हमारा तीसरा चंद्र मिशन, अपनी यात्रा शुरू करेगा। यह उल्लेखनीय मिशन हमारे देश की आशाओं और सपनों को आगे बढ़ायेगा।उन्होंने कहा कि कक्षा उत्थान प्रक्रिया के बाद चंद्रयान-3 को चंद्र स्थानांतरण प्रक्षेप पथ में डाला जायेगा। 300,000 किमी से अधिक की दूरी तय करते हुए, यह आने वाले हफ्तों में चंद्रमा पर पहुंचेगा। जहाज पर मौजूद वैज्ञानिक उपकरण चंद्रमा की सतह का अध्ययन करेंगे और हमारे ज्ञान को बढ़ायेंगे।श्री मोदी ने वैज्ञानिकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा- हमारे वैज्ञानिकों को धन्यवाद, अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का इतिहास बहुत समृद्ध है। चंद्रयान-1 को वैश्विक चंद्र मिशनों में एक पथप्रदर्शक माना जाता है क्योंकि इसने चंद्रमा पर पानी के अणुओं की मौजूदगी की पुष्टि की है। यह दुनिया भर के 200 से अधिक वैज्ञानिक प्रकाशनों में प्रकाशित हुआ था।उन्होंने कहा कि चंद्रयान-1 तक, चंद्रमा को एक हड्डी-सूखा, भूवैज्ञानिक रूप से निष्क्रिय और निर्जन खगोलीय पिंड माना जाता था। अब, इसे पानी और उप-सतह बर्फ की उपस्थिति के साथ एक गतिशील और भूवैज्ञानिक रूप से सक्रिय निकाय के रूप में देखा जाता है। हो सकता है कि भविष्य में इस पर संभावित रूप से निवास किया जा सके।उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 भी उतना ही अग्रणी था क्योंकि इससे जुड़े ऑर्बिटर के डेटा ने पहली बार रिमोट सेंसिंग के माध्यम से क्रोमियम, मैंगनीज और सोडियम की उपस्थिति का पता लगाया था। इससे चंद्रमा के जादुई विकास के बारे में अधिक जानकारी भी मिलेगी।प्रधानमंत्री ने कहा कि चंद्रयान 2 के प्रमुख वैज्ञानिक परिणामों में चंद्र सोडियम के लिए पहला वैश्विक मानचित्र, क्रेटर आकार वितरण पर ज्ञान बढ़ाना, आईआईआरएस उपकरण के साथ चंद्र सतह के पानी की बर्फ का स्पष्ट पता लगाना और बहुत कुछ शामिल है। यह मिशन लगभग 50 प्रकाशनों में प्रकाशित हुआ है।श्री मोदी ने चंद्रयान-3 मिशन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा- मैं आप सभी से इस मिशन और अंतरिक्ष, विज्ञान और नवाचार में हमने जो प्रगति की है, उसके बारे में और अधिक जानने का आग्रह करता हूं। इससे आप सभी को बहुत गर्व महसूस होगा।

इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड ने शुरू किया ऑनलाइन बाल शोषण के खिलाफ संघर्ष
Published / 2023-07-14 16:40:13
इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड ने शुरू किया ऑनलाइन बाल शोषण के खिलाफ संघर्ष

मध्य प्रदेश सरकार के साथ विचार-विमर्श कियाबच्चों के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड ने मध्य प्रदेश सरकार को दिये अहम सुझावएबीएन सेंट्रल डेस्क। राज्य में बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण के मामलों को देखते हुए इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) ने इससे निपटने के तरीकों को लेकर मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल कल्याण विभाग के साथ शुक्रवार को भोपाल में एक परिचर्चा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम  महिला और बाल कल्याण विभाग के निदेशक विशाल नाडकर्णी, मध्य प्रदेश के पूर्व डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला, आईसीपीएफ के सीईओ व उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह और शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक मनीषा सेंथिया मौजूद थीं। इस दौरान राज्य में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटीरियल (सीसैम) के बढ़ते खतरे और इसकी रोकथाम के उपायों पर विस्तार से विचार विमर्श किया गया।  यह बैठक मध्य प्रदेश में बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराध के बढ़ते मामलों के मद्देनजर खासी अहम है। कोराना महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं के कारण बच्चों की मोबाइल फोन व लैपटाप तक पहुंच तो हो गई लेकिन साथ ही इससे नए खतरे पैदा हुए हैं। हालिया वर्षों में बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण की घटनाओं में तेजी से इजाफा देखने को मिला है। आईसीपीएफ द्वारा अप्रैल 2020 में जारी की गई एक रपट के अनुसार देश के सौ शहरों में हर महीने औसतन पचास लाख बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्रियां या चाइल्ड एब्यूज सेक्सुअल मैटीरियल (सीसैम) सर्च किये गये। यह आंकड़ा सिर्फ सार्वजनिक वेब का है, जबकि डार्क वेब में यह संख्या इससे बहुत ज्यादा हो सकती है।बच्चों के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए मध्य प्रदेश महिला व बाल विकास विभाग के निदेशक विशाल नाडकर्णी ने कहा, ऐसे मामलों में बच्चों की मदद के लिए हमारे पास कड़े कानून, एजेंसियां और विशेषज्ञ हैं। लेकिन इन सबके बीच प्रमुख संरक्षक हमेशा परिवार ही होता है। इसे देखते हुए यह महत्वपूर्ण है कि हम जमीनी स्तर पर परिवारों के बीच जागरूकता पैदा करें, जिससे वे पहचान सकें कि क्या उनके बच्चे किसी तरह के ऑनलाइन यौन उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं?वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने कहा, गांवों में इंटरनेट पहुंचने के साथ यौन उत्पीड़न के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। ऑनलाइन बाल यौन उत्पीड़न का समाधान आसान नहीं है। इसमें पूरे समाज का योगदान चाहिए। यह बहुत अच्छी बात है कि इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड (आईसीपीएफ) राज्यों में इस मुद्दे को ले जा रहा है।ऑनलाइन खतरों से बच्चों की सुरक्षा की दिशा में देश में इस तरह की साझा पहलों व कार्रवाइयों को बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी बताते हुए आईसीपीएफ के सीईओ व उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा- ऑनलाइन बाल यौन उत्पीड़न तेजी से बढ़ रहा है और यह एक संगठित अपराध है। इसे आतंकवाद की तरह ही देखा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों सहित अलग-अलग जगहों पर हमारे बच्चियों का यौन उत्पीड़न किया जाता है और इसमें बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन होता है। इसे देखते हुए गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध जांच व अभियोजन होना महत्वपूर्ण है।विचार विमर्श के दौरान यह बात सामने आई कि चाइल्ड एब्यूज सेक्सुअल मैटीरियल (सीसैम) के मामलों की तह में जाने के लिए जो सबसे बड़ी चुनौती है, वह है सीडी फार्मेट में मिले सोर्स डाटा को डिकोड करना। भोपाल के डीसीपी विनीत कपूर ने कहा कि आम तौर पर ई-सीडी में सीसैम के 600 से 800 मामले होते हैं। हमारे पास इस सीडी से डाटा निकालने का कोई तरीका नहीं है। इसे मैन्युअल तरीके से करना पड़ता है जिससे जांच में देरी होती है और पीड़ित बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए मामलों की तेजी से जांच के लिए हमें खास किस्म के साफ्टवेयर की जरूरत है ताकि सोर्स डाटा की तह तक जाकर अपराधी की शिनाख्त की जा सके।वहीं, इस अवसर पर शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक मनीषा सेंथिया ने कहा- हालिया वर्षों में डिजिटल एप्लिकेशन का इस्तेमाल बढ़ा है। करीब 20 लाख बच्चे खतरे में हैं। इसे देखते हुए साइबर हाइजीन और सुरक्षा जागरूकता पैदा करना मौजूदा समय की मांग है। इसे स्कूली पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाना चाहिए और विभाग भी इस पर काम करेगा।आईसीपीएफ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और खास तौर से ऑनलाइन बाल यौन शोषण के खतरों से निपटने के लिए अरसे से काम कर रहा है। इस मुद्दे पर जागरूकता पैदा करने के लिए वह खास तौर से बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच काम कर रहा है। साथ ही बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण के खतरे से बचाने के लिए वह देश की तमाम कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिल कर भी काम कर रहा है।इस कार्यक्रम में आईसीपीएफ की कार्यकारी निदेशक संपूर्णा बेहुरा, डब्ल्यूसीडी के सहायक निदेशक यज्ञ मेदा, भोपाल के डीसीपी विनीत कपूर, पुलिस विभाग के वैभव श्रीवास्तव व एसके सोमावंशी सहित आईसीपीएफ, सरकार और पुलिस विभाग के अन्य गणमान्य प्रतिनिधि मौजूद थे। अधिक जानकारी के लिए कृपया जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो में मना जश्न
Published / 2023-07-14 16:33:30
चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो में मना जश्न

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चंद्रयान-3 के कक्षा में सफल प्रक्षेपण के बाद इसरो में जश्न मनाया गया। चंद्रयान-3 परियोजना के निदेशक पी वीरमुथुवेल और इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने एलवीएम3-एम 4 वाहन के सफलतापूर्वक कक्षा में लॉन्च करने के बाद अपनी खुशी साझा की। इसरो ने कहा कि चंद्रयान-3 ने अपनी सटीक कक्षा में चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है। अंतरिक्ष यान का स्वास्थ्य सामान्य है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रयान-3 चंद्रमा मिशन लॉन्च किया। चंद्रयान-3 एक लैंडर, एक रोवर और एक प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैस है। इसका वजन करीब 3,900 किलोग्राम है।

आगे बढ़कर आतंकवाद से लड़ रहा भारत : डोभाल
Published / 2023-07-11 23:17:48
आगे बढ़कर आतंकवाद से लड़ रहा भारत : डोभाल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा है कि भारत आतंकवाद और चरमपंथ को बढावा देने वाली ताकतों के खिलाफ आगे बढकर लड़ाई लड़ रहा है। श्री डोभाल ने मंगलवार को यहां इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव मुहम्मद बिन अब्दुल करीम इस्सा से मुलाकात के बाद यह बात कही।

सबसे अमीर महिलाओं की लिस्ट में भारतीय मूल की 4 महिलाएं
Published / 2023-07-11 20:36:58
सबसे अमीर महिलाओं की लिस्ट में भारतीय मूल की 4 महिलाएं

अपने दम पर हासिल किया मुकाम...एबीएन सोशल डेस्क। भारतीय मूल की चार महिलाएं फोर्ब्स की अपना मुकाम खुद हासिल करने वाली 100 सबसे अमीर महिलाओं की सूची में जगह बनाने में कामयाब रही हैं। भारतीय मूल की इन चारों महिलाओं की संपत्तियां सामूहिक रूप से 4.06 अरब डॉलर हैं।फोर्ब्स की इस सूची में कंप्यूटर नेटवर्किंग फर्म अरिस्टा नेटवर्क्स की अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी जयश्री उल्लाल, आईटी परामर्श और आउटसोर्सिंग फर्म सिंटेल की सह-संस्थापक नीरजा सेठी, क्लाउड कंपनी कॉन्फ्लूएंट की सह-संस्थापक एवं पूर्व मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी नेहा नारखेड़े और पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन एवं सीईओ इंद्रा नूयी शामिल हैं। शेयर बाजारों में जारी तेजी के बीच फोर्ब्स की 100 अमीर महिलाओं की सूची में शामिल महिला उद्यमियों की कुल संपदा एक साल पहले की तुलना में 12 प्रतिशत बढ़कर 124 अरब डॉलर पर पहुंच गई है। जयश्री उल्लाल सूची में 15वें स्थान पर हैं और उनकी कुल संपदा 2.4 अरब डॉलर है। वह 2008 से सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाले अरिस्टा नेटवर्क्स की अध्यक्ष और सीईओ हैं। अरिस्टा ने 2022 में लगभग 4.4 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया। वह क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनी स्नोफ्लेक के निदेशक मंडल में भी हैं। सूची में 25वें स्थान पर मौजूद 68 वषीर्या सेठी की कुल संपत्ति 99 करोड़ डॉलर है। सेठी और उनके पति भरत देसाई द्वारा 1980 में सह-स्थापित सिंटेल को अक्टूबर, 2018 में फ्रांसीसी आईटी फर्म एटोस एसई ने 3.4 अरब डॉलर में खरीदा था। सेठी को अपनी हिस्सेदारी के लिए अनुमानित तौर पर 51 करोड़ डॉलर मिले थे। वहीं 38 वषीर्या नारखेडे 52 करोड़ डॉलर की संपदा के साथ सूची में 38वें स्थान पर हैं। पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन एवं सीईओ नूयी कंपनी के साथ 24 साल तक रहने के बाद 2019 में सेवानिवृत्त हुई थीं। उनकी कुल संपदा 35 करोड़ डॉलर आंकी गयी है और वह सूची में 77वें स्थान पर हैं। इस सूची में एबीसी सप्लाई की सह-संस्थापक डेन हेंड्रिक्स लगातार छठी बार पहले स्थान पर रही हैं। हेंड्रिक्स की कुल संपदा 15 अरब डॉलर है।

पीएम मोदी ने की भारी बरसात से बनी स्थिति की समीक्षा
Published / 2023-07-11 20:35:29
पीएम मोदी ने की भारी बरसात से बनी स्थिति की समीक्षा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यहां देश के कई हिस्सों में हो रही भारी बरसात के कारण बाढ़ और उससे जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस बैठक में केन्द्रीय मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्री और शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने देश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा के मद्देनजर बन रही स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्थानीय प्रशासन, राष्ट्रीय आपदामोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदामोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों द्वारा प्रभावित लोगों को बचाने एवं उन्हें राहत सुनिश्चित करने के लिए योगदान की भी जानकारी ली।

भारी बारिश ने दो दिन में ले ली 37 लोगों की जान
Published / 2023-07-11 20:34:31
भारी बारिश ने दो दिन में ले ली 37 लोगों की जान

बाढ़ के मुहाने पर दिल्ली, उत्तराखंड-हिमाचल में गिरते पहाड़एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्यासी धरती को तर करने के लिए आये मानसून ने उत्तर भारत में कई जगहों पर अब काल का रूप ले लिया है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में ये बारिश तीन दिन से थमने का नाम नहीं ले रही है। पुल पत्तों की तरह बिखर रहे हैं। गाड़ियां कागज की नावों की तरह डूबी हुई दिखाई दे रही हैं। शहरों ने मानों झील का रूप ले लिया है, जहां टापुओं की तरह मकान उभरे हुए दिखाई दे रहे हैं। करोड़ों के नुकसान से इतर कई लोग भी इस तेज बारिश के कारण आई आपदाओं का शिकार हो चुके हैं। तीन दिन से उत्तर भारत में बादल बारिश की जगह आफत बनकर बरस रहे हैं। भारी बारिश के कारण महज दो दिनों में ही उत्तर भारत में 37 लोग मारे जा चुके हैं। बारिश के कहर के कारण हिमाचल में ही 18, पंजाब-हरियाणा में 9, राजस्थान में 7 और उत्तर प्रदेश के तीन लोग काल के गाल में समा चुके हैं। भारी बारिश से जूझ रहे इन प्रदेशों में सेना की टुकड़ियां राहत और बचाव कार्य के लिए उतरी हैं। 60 घंटे से भी ज्यादा समय से हिमाचल में आसमान से आफत बरस रही है। इस बारिश के चलते मची तबाही ने कहीं बाढ़ तो कहीं भूस्खलन का रूप लेकर दो दिनों में ही 18 लोगों की जान ले ली है। राजधानी शिमला में ही भूस्खलन की चपेट में एक मकान आ गया, जिसमें चार लोग मारे गए। यूनेस्को हैरिटेज साइट में शामिल शिमला-कालका ट्रेन को मंगलवार तक के लिए रद्द कर दिया गया है। इसकी पटरियों पर भी कई जगह लैंडस्लाइड हुआ है। शिमला-कालका नेशनल हाई वे, चंडीगढ़-मनाली हाई वे और शिमला-किन्नौर की सड़कें भी कई जगहों पर लैंडस्लाइड के कारण बाधित हो गया है।

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