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कल होगा अखंड ज्योति दिव्य कलश रथदर्शन यात्रा का शुभारंभ
Published / 2024-12-03 20:43:23
कल होगा अखंड ज्योति दिव्य कलश रथदर्शन यात्रा का शुभारंभ

एबीएन सोशल डेस्क। अखंड ज्योति दिव्य कलश रथदर्शन यात्रा का शुभारंभ शान्तिकुञ्ज टीम प्रतिनिधित्व व मार्गदर्शन में कल बुधवार दोपहर दो बजे से शुभारंभ होगा।गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में आज सायंकालीन सत्र में बैठक हुई। इसमें ज्योति कलश रथ भ्रमण दर्शन कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार की गयी।इस कार्यक्रम में रांची के सभी समाचार मीडिया मान्यवर संपादन, प्रकाशन व फोटोग्राफी प्रभारी को सादर सूचित व आमंत्रित किया जा रहा है। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद और जटा शंकर झा ने दी।

छह दिसंबर को मनायी जायेगी विवाह पंचमी
Published / 2024-12-03 16:53:33
छह दिसंबर को मनायी जायेगी विवाह पंचमी

प्रेम और आदर्श का प्रतीक समाज में रिश्तों की सशक्तिकरण और समृद्धि के लिए एक प्रेरणा : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विवाह पंचमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष पंचमी तिथि 5 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 6 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार  6 दिसंबर को विवाह पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता की शादी की वर्षगाँठ मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य विवाह हुआ था। विवाह पंचमी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सनातन धर्म से जुड़े लोग विवाह पंचमी के पर्व के आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।धार्मिक मान्यता है कि मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। इसलिए इस तिथि पर विवाह पंचमी मनाई जाती है। साथ ही इस तिथि पर अन्न, धन और सोलह श्रृंगार का दान करना शुभ माना जाता है। इस दिन राम जी और माता सीता को प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए। विवाह पंचमी के दिन विशेष रूप से राम कथा का श्रवण और राम-सीता के विवाह के प्रसंग की पूजा की जाती है। विवाह पंचमी का महत्व इस बात से है कि यह भगवान राम और माता सीता के आदर्श वैवाहिक संबंधों का प्रतीक है। राम और सीता का विवाह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह धर्म, सत्य, प्रेम, और त्याग का अनुपम उदाहरण है। भगवान राम ने माता सीता के साथ अपने विवाह से यह संदेश दिया कि प्रेम और श्रद्धा से परिपूर्ण संबंध ही जीवन का सर्वोत्तम आधार हैं। वे दोनों ही अपने जीवन में प्रत्येक कर्तव्य को निभाने में समर्पित थे। राम ने हमेशा अपने धर्म और कर्तव्यों को प्राथमिकता दी, वहीं सीता ने भी अपने जीवन के प्रत्येक कदम में त्याग और सत्य के रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी। विवाह पंचमी हमें यह समझाती है कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। एक सफल विवाह संबंध के लिए दोनों पार्टनरों को एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान और त्याग की भावना से भरा होना चाहिए। भगवान राम और सीता के विवाह के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि एक अच्छा वैवाहिक जीवन त्याग, समझदारी और विश्वास पर आधारित होना चाहिए।इस दिन को मनाते हुए हम अपने जीवन में भी राम-सीता के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लें, ताकि हम अपने रिश्तों को सत्य, प्रेम, और आदर्श की नींव पर सशक्त बना सकें। विवाह पंचमी का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह समाज में रिश्तों के सशक्तीकरण और समृद्धि के लिए एक प्रेरणा भी है।

बंगाल में हिंदुओं पर अत्याचार पर गरम हुआ विहिप
Published / 2024-12-01 20:07:14
बंगाल में हिंदुओं पर अत्याचार पर गरम हुआ विहिप

बंग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास की अविलंब रिहाई व हिंदुओं पर लगातार उत्पीड़न विराम हेतु आगे आये विश्व समुदाय : विहिपटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत ने रांची के रेलवे स्टेशन, बगलामुखी हनुमान मंदिर में विरोध प्रदर्शन किया। विहिप झारखंड प्रांत के मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने बांग्लादेश प्रशासन से वहां के इस्कॉन मंदिर के मुख्य पुजारी की गिरफ्तारी पर चिंता व्यक्त करते हुए उसे वहां के प्रशासन की कायरतापूर्ण और अलोकतांत्रिक घटना बताया है। बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो ने कहा कि बंगला देश तत्कालीन सरकार के इस कायरता पूर्ण और अलोकतांत्रिक घटना का पुरजोर विरोध करती है। इस्कॉन संस्थान तथा हिंदू समाज के संगठनों ने अभी तक अपने बांगला देशी हिन्दु उत्पीड़न के विरोध में जितनी भी कार्यवाहियां की हैं, सभी लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन किया है।किसी भी प्रकार की हिंसा का उन्होंने प्रतिहिंसा के रूप में अभी तक कोई उत्तर नहीं दिया है। इस प्रकार के पूर्ण शांतिप्रिय और लोकतांत्रिक रूप से अपनी बात रखने वाले समाज के किसी नेतृत्त्व को, जो एक वर्ग का भी नेतृत्व करते हैं, इस प्रकार से अलोकतांत्रिक तरीके से गिरफ्तार करना, उनको बंद करना उनकी आवाज को दबाने की कुचेष्टा करना अलोकतांत्रिक है, अमानवीय है और हिंदू समाज के मानवाधिकारों का हनन भी है।विहिप के प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने कहा कि हम प्रारंभ से ही मांग कर रहे हैं कि बांग्लादेश में जो घटनाक्रम चल रहा है उसमें वामपंथी, इस्तामिक तत्वों के साथ मिलकर वहां के हिंदू समाज का दमन कर रहे हैं। दुर्भाग्य की बात है कि पूरे विश्व समुदाय ने वैश्विक संगठनों ने इस घटनाक्रम पर जितनी चिंता व्यक्त करनी चाहिए थी जैसी रोक लगानी चाहिए थी। ऐसी रोक नहीं लगायी है। विश्व हिंदू परिषद पूरे विश्व समुदाय से यह अपेक्षा करती है कि वहां पर हो रहे घटनाक्रम को ध्यान से देखे, उसकी गंभीरता को समझे और बांग्लादेश के प्रशासन पर दबाव बनाये कि हिंदुओं के मानवाधिकारों की रक्षा की जाये, सुरक्षा की जाये। विहिप प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह ने कहा कि भारत सरकार का  प्रत्युत्तर इस विषय में बहुत ही सावधानी पूर्वक और न्यूनतम रहा है। यह सही है कि एक संप्रभु देश की स्वायत्तता को किसी भी प्रकार से चुनौती देना दूसरे देश की सरकार के लिए ठीक नहीं है परंतु, एक बड़े हिंदू समुदाय का इस प्रकार का उत्पीड़न पूरा विश्व, सारे पड़ोसी देश, भारत सरकार सिर्फ देखते रहे और कुछ भी कार्यवाही नहीं करें यह भी एक सीमा तक तो स्वीकार्य है लेकिन लंबे समय तक यह भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि विश्व समुदाप इन सब घटनाओं को उनके संज्ञान में ले, बांग्लादेश के प्रशासन पर दबाव बनाए कि हिंदुओं के उत्पीड़न को रोके। हम तुरंत प्रभाव से इस्कॉन के मुख्य पुजारी श्री चिन्मय कृष्ण दास प्रभु जी की रिहाई की मांग करते हैं। किसी भी प्रकार के हिंदू नेता की, हिंदू पुजारी को, गुरु को बिना किसी कारण के गिरफ्तार करने की किसी भी प्रकार की मानसिकता से बांग्लादेश सरकार बचे, पह अपेक्षा भी करते हैं। आज के विरोध प्रदर्शन में झारखंड प्रांत रांची महानगर विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के पदाधिकारी समेत बड़ी संख्या में अन्य हिंदू संगठन एवं सामाजिक संगठनों के लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन (93344 33338) ने दी।

कोडरमा : बाल विवाह निषेध पर बच्चों को दिलायी गयी शपथ
Published / 2024-12-01 20:05:06
कोडरमा : बाल विवाह निषेध पर बच्चों को दिलायी गयी शपथ

बाल विवाह समाज के लिए अभिशाप : अश्विनी तिवारीटीम एबीएन, झुमरी तिलैया। आदर्श मध्य विद्यालय कोडरमा में बाल विवाह निषेध जागरूकता अभियान के तहत कम उम्र में विवाह नहीं करने का शपथ प्रधानाध्यापक अश्विनी तिवारी ने विद्यालय के बच्चे एवं बच्चियों को दिलायी। प्रधानाध्यापक श्री तिवारी ने संबोधित करते हुए बताया कि लड़कियों के विवाह का न्यूनतम उम्र 18वर्ष एवं लड़कों के विवाह का उम्र 21 वर्ष है। इससे कम उम्र में विवाह कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। कम उम्र में विवाह होने से लड़के एवं लड़कियों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। कभी कभी तो प्रस्वावस्था में लड़कियों की मौत भी हो जाती है। कम उम्र में विवाह होने से लड़कियों एवं लड़कों की पढ़ाई भी प्रभावित हो जाता है एवं रोजगार के अवसर का समुचित लाभ नहीं मिल पाता है। कम उम्र में विवाह के कारण जनसंख्या में वृद्धि एवं इसके कारण रहन सहन, संतुलित भोजन शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि कई तरह की भी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह समाज के लिए अभिशाप है। किसी भी स्थिति में कम उम्र में विवाह नहीं करनी चाहिए। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्षा प्रीती कुमारी वर्मा, उपाध्यक्ष पिंटू साव, सदस्य पूजा कुमारी, राधा यादव, छाया देवी, शिक्षक रजनी कुमारी, ईरशाद आलम, संजीत भारती, मंटू कुमार, प्रदीप कुमार सहित कई बच्चे मौजूद थे।

एक दिसम्बर को मनाया जायेगा विश्व एड्स दिवस
Published / 2024-11-29 19:56:15
एक दिसम्बर को मनाया जायेगा विश्व एड्स दिवस

एड्स एक वैश्विक समस्या, इसे लेकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। झारखंड अभिभावक मंच के प्रांतीय प्रवक्ता सह इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के आजीवन सदस्य संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुनियाभर में एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके फैलाव को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने का आह्वान करता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को एचआईवी और एड्स के बारे में जानकारी देना, समाज में फैली भ्रांतियों को समाप्त करना और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति और समर्थन बढ़ाना है। एड्स एक ऐसा रोग है, जो शरीर की इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है।एचआईवी वायरस के कारण यह रोग उत्पन्न होता है, जो शरीर में प्रवेश करने के बाद इम्यून सिस्टम की कार्यप्रणाली को नष्ट कर देता है। जब इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, तो शरीर कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता है, जैसे कि टीबी, कैंसर आदि। यह रोग किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन विशेष रूप से उन व्यक्तियों में इसका खतरा अधिक होता है, जो असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं।नशीली दवाओं का सेवन करते हैं और जिनके पास उपयुक्त चिकित्सा सुविधा नहीं होती। विश्व एड्स दिवस की शुरुआत 1988 में की गई थी और तभी से यह दिन वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा है। यह दिन सभी देशों के लिए एक अवसर है, ताकि वे एचआईवी और एड्स की रोकथाम के लिए बेहतर नीतियां बनाएं, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं और समाज में जागरूकता फैलाएं। भारत में भी इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि एचआईवी के मामले यहां काफी अधिक हैं। इसलिए भारत में एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे कि स्वास्थ्य शिविर, सेमिनार, और प्रचार अभियान।एचआईवी संक्रमण के प्रमुख कारणों में असुरक्षित यौन संबंध, रक्त का आदान-प्रदान, संक्रमित सुइयों का प्रयोग, और मां से बच्चे में संक्रमण का जोखिम शामिल है। इसलिए एड्स से बचाव के लिए सबसे प्रभावी उपाय सुरक्षित यौन संबंध बनाना, रक्त के सुरक्षित परीक्षण का पालन करना और संक्रमण से बचने के लिए उचित एहतियात बरतना है। इसके साथ ही एचआईवी और एड्स से संबंधित सबसे बड़ी समस्या यह है कि इससे जुड़ी हुई समाज में कई भ्रांतियां और अज्ञानता है। अक्सर लोग इस बीमारी को लेकर गलत धारणाओं का शिकार होते हैं। कुछ लोग यह मानते हैं कि एचआईवी केवल विशेष समूहों को ही प्रभावित करता है, जबकि यह गलत है। एड्स एक वैश्विक समस्या है, और इसे लेकर समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। विश्व एड्स दिवस का मुख्य संदेश यही है कि एड्स को फैलने से रोका जा सकता है, अगर हम सभी मिलकर इसके प्रति जागरूकता बढ़ाएं और संक्रमित व्यक्तियों के साथ सहानुभूति दिखाएं। इसके साथ ही, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एचआईवी और एड्स के मरीजों को समाज में समान अधिकार मिले और उनका सामाजिक बहिष्कार न हो। आखिरकार, यह हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम एचआईवी और एड्स के खिलाफ एकजुट होकर काम करें और इसे फैलने से रोकने में अपनी भूमिका निभाएं। तभी हम एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के समर्थन में झारखंड के हजारों लोगों ने ली शपथ
Published / 2024-11-28 20:37:57
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के समर्थन में झारखंड के हजारों लोगों ने ली शपथ

केंद्र सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के समर्थन में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) एलायंस के कार्यक्रमों में झारखंड में हजारों लोग हुए शामिल  पूरे राज्य में निकाले गए पैदल मार्च में बड़ी तादाद में शामिल बाल विवाह पीड़ितों, पुलिस अफसरों, शिक्षकों, अभिभावकों व पंचायत प्रतिनिधियों ने ली बाल विवाह की रोकथाम की शपथ जेआरसी एलायंस पूरे देश में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम कर रहे 250 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन है एलायंस में शामिल संगठनों ने देश में 2,50,000 से भी ज्यादा बाल विवाह रुकवाये हैं एबीएन सोशल डेस्क। केंद्र सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत के आह्वान पर झारखंड के बाजारों, स्कूलों, गांवों और कस्बों में हजारों लोग ढोल नगाड़ों के साथ सड़कों पर उतरे और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) एलायंस के जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल होकर इसका समर्थन किया। राज्य के 24 जिलों के 4450 गांवों में लोगों ने जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया और बाल विवाह के खिलाफ मशाल जुलूस निकाले एवं रैलियां की। एक सामाजिक उद्देश्य के लिए एकजुटता के अभूतपूर्व प्रदर्शन में, पुलिस स्टेशनों, अदालतों, पंचायत सदस्यों, धार्मिक नेताओं, स्कूली बच्चों, शिक्षकों, धर्मगुरुओं, हलवाइयों और बाल विवाह पीड़ितों ने इस बुराई को समाप्त करने और कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देने की शपथ ली। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस बाल विवाह के खात्मे के लिए झारखंड के 24 जिलों में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ काम कर रहा है। जेआरसी एलायंस ने कानूनी हस्तक्षेपों और परिजनों को समझा बुझा कर देश में 2,50,000 से अधिक बाल विवाह रोके हैं।इस दौरान पूरे राज्य में हुए कार्यक्रम प्रतिज्ञाओं से गूंज उठे, मैं बाल विवाह के खिलाफ हरसंभव प्रयास करने की शपथ लेता हूं। मैं यह सुनिश्चित करने की शपथ लेता हूं कि मेरे परिवार, पड़ोस या समुदाय में कोई बाल विवाह नहीं होगा। मैं बाल विवाह के किसी भी प्रयास की रिपोर्ट पंचायत और सरकारी अधिकारियों को करने की प्रतिज्ञा करता हूं।राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (एनएचएफएस 2019-21) के आंकड़ों के अनुसार देश में 18 से 24 आयु वर्ग की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का बाल विवाह हो जाता है जबकि झारखंड में यह आंकड़ा 32.2 प्रतिशत है। बाल विवाह की पीड़ित बच्ची का पूरा जीवन दासता में गुजरता है और उसके लिए स्वतंत्रता के सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं। साथ ही, बाल विवाह महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी नहीं होने के पीछे सबसे बड़ा कारण है।इस राष्ट्रव्यापी अभियान की सराहना करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) एलायं, के संस्थापक भुवन ऋभु ने देश से बाल विवाह के खात्मे के लिए शुरू किए गए इस अभियान को पूर्ण समर्थन देते हुए सरकार के प्रयासों में हरसंभव सहयोग का वादा किया। उन्होंने कहा, करोड़ों माताओं और बच्चियों की पीड़ा और विषम परिस्थितियों से जूझने की उनकी इच्छाशक्ति के साथ जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के हमारे 250 से भी ज्यादा संगठनों के सहकर्मियों के अनथक देशव्यापी प्रयासों से आज हम इस ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचे हैं। आज आगे बढ़ते हुए हम राज्य की सरकार से उम्मीद करते हैं कि सभी हितधारकों के साथ साझेदारियों का लाभ उठाते हुए बचाव, सुरक्षा और अभियोजन की एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देगी जो लोगों के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाने में सहायक होगा। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने 27 नवंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की शुरूआत करते हुए देश के नागरिकों से बाल विवाह के खात्मे के प्रयासों में सहभागिता का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने देशभर की पंचायतों व स्कूलों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलायी। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही शपथ लेने वालों की संख्या 25 करोड़ तक पहुंच जायेगी। आगामी महीनों में इस अभियान को झारखंड के एक-एक जिले, ब्लॉक और गांव तक पहुंचाने के लिए जेआरसी के सदस्य सरकार के साथ निकटता से कार्य करेंगे। गठबंधन को विश्वास है कि यह अभियान जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायतों के साथ मिलकर बाल विवाह के खिलाफ प्रयासों को और गति देगा तथा समाज के सभी हितधारकों के सहयोग से जनता को जागरूक कर इस अपराध के खात्मे में सहायक होगा।

बचाकर रखनी है ऊनी कपड़ों की लाइफ, तो अपनायें ये टिप्स
Published / 2024-11-28 20:26:02
बचाकर रखनी है ऊनी कपड़ों की लाइफ, तो अपनायें ये टिप्स

ऊनी कपड़ों को धोते समय भूल से भी न करें ये गलतियां, खराब हो जायेंगे आपके ब्रांडेड स्वेटरएबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्दियां आ गयी हैं। इस मौसम में ठंडी हवाएं चलने लगती हैं और तापमान कम होने के कारण ठंडक महसूस होती है। ठंड से बचने के लिए लोग इस मौसम में गर्म कपड़े पहनते हैं। ऊनी कपड़ों में स्वेटर, मफलर, टोपी, ऊनी दस्ताने आदि कई तरह के कपड़े शामिल हैं। इन कपड़ों का रखरखाव थोड़ा सावधानी से करना होता है, क्योंकि ऊनी कपड़ों में रोएं आ सकते हैं। इसके अलावा गर्म कपड़ों की रंगत जल्दी चली जाती है। आपके नए और ब्रांडेड स्वेटर सही रखरखाव न मिल पाने के कारण पुराने लगने लगते हैं। इसका एक कारण ऊनी कपड़ों को गलत तरीके से धोना है। अक्सर लोग ये गलती करते हैं कि गर्मियों वाले कपड़ों की तरह ही ऊनी कपड़ों को भी धो देते हैं। इससे कपड़े खराब हो जाते हैं। सर्दियों वाले कपड़ों को धोते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान देना चाहिए। यहां आपको वह गलतियां बतायी जा रही हैं जो ऊनी कपड़ों को धोते समय कभी नहीं करनी चाहिए। सर्दियों में गर्म पानी का उपयोग बढ़ जाता है। लोग नहाने से लेकर बर्तन और कपड़े धोने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि ऊनी कपड़ों को गर्म पानी से धोना सबसे बड़ी गलती होती है। ऊन काफी संवेदनशील होता है। इसे गर्म पानी से धोने से कपड़ा सिकुड़ जाता है और कपड़े का आकार छोटा हो सकता है। इसके अलावा गर्म पानी से स्वेटर या अन्य गर्म कपड़े धोने से कपड़े में दरार आ सकती है। इसलिए ऊनी कपड़ों को हमेशा ठंडे या गुनगुने पानी से धोना चाहिए। ऊनी कपड़ों और अन्य कपड़ों के फैब्रिक में काफी अंतर होता है। सूती या अन्य फैब्रिक के कपड़ों को आप किसी भी डिटर्जेंट व साबुन से धो सकते हैं लेकिन ऊनी कपड़े काफी संवेदनशील होते हैं। उन्हें धोने के लिए साधारण डिटर्जेंट नहीं, बल्कि माइल्ड, सॉफ्ट और लिक्विड डिटर्जेंट का उपयोग करें।वॉशिंग मशीन की बजाय ऊनी कपड़ों को हाथ से धोयें। ऊनी कपड़ों को उल्टा करके धोना चाहिए। स्वेटर, जैकेट आदि को धोते समय और सुखाते समय सीधा नहीं बल्कि कपड़े को उल्टा कर लें। इससे कपड़ा डायरेक्ट डिटर्जेंट या धूप के संपर्क में नहीं आता और कपड़े की रंगत नहीं जाती। इसके साथ ही ऊनी कपड़ों को धोते समय जोर से रगड़े या सुखाने के लिए मरोड़े नहीं। ऊनी कपड़े को हल्के हाथों से धोना और हल्के से पानी को निचोड़ना चाहिए। सबसे पहले तो प्रयास करें कि ऊनी कपड़े वॉशिंग मशीन में न डालें। इसके साथ ही सर्दियों में कपड़े सुखाने के लिए ड्रायर का उपयोग सामान्य है लेकिन गर्म कपड़ों को ड्रायर से न सुखाएं। गर्म हवा ऊनी कपड़ों के लिए हानिकारक होती है। कपड़े को धूप में सुखायें लेकिन सीधी धूप न पड़ने दें, बल्कि हल्के कपड़े को स्वेटर के ऊपर कवर करें ताकि धूप सीधी न पड़े। अधिकतर लोग गंदे कपड़ों को साफ करने के लिए उसे कुछ देर पानी में भिगोकर रख देते हैं। ऊनी कपड़ों को बहुत देर तक पानी में भिगाकर नहीं रखना चाहिए। इससे कपड़े खराब होने लगते हैं।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान सदियों पुरानी कुप्रथा के अंत की शुरुआत : जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस
Published / 2024-11-27 20:14:39
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान सदियों पुरानी कुप्रथा के अंत की शुरुआत : जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस

बाल विवाह के खात्मे के निर्णायक बिंदु तक पहुंचने के लिए 250 से भी अधिक गैरसरकारी के गठबंधन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस ने किया हरसंभव सहयोग का वादादेश के 26 राज्यों के 416 जिलों के 50,000 गांवों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे जेआरसी ने 2,50,000 से ज्यादा बाल विवाह रुकवायेबाल विवाह के खिलाफ जागरूकता के प्रसार और इसकी सूचना साझा करने के लिए जेआरसी सभी हितधारकों से तालमेल के साथ अभियान के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए करेगा कामएबीएन सोशल डेस्क। बाल विवाह के खात्मे के लिए देश के 26 राज्यों में काम कर रहे 250 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) एलायंस ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से शुरू किये गये बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को सही दिशा में उठाया गया एक बेहद दूरगामी कदम करार दिया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-2021) के आंकड़े बताते हैं कि देश में 20 से 24 साल की 23.3 प्रतिशत लड़कियों का विवाह उनके 18 वर्ष का होने से पूर्व ही हो गया था। ऐसे कोई दो राय नहीं कि सरकार के इस कदम से देश से बाल विवाह के खात्मे के प्रयासों को नयी गति और ऊर्जा मिलेगी। बताते चलें कि सरकार व स्थानीय प्रशासन के साथ करीबी समन्वय से देश के 416 जिलों में जमीनी स्तर पर काम कर रहे जेआरसी एलायंस ने प्रभावी कानूनी हस्तक्षेपों और परिजनों को समझाने बुझाने की रणनीति पर अमल करते हुए 2,50,000 से ज्यादा बाल विवाह रुकवाये हैं। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का उद्घाटन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने आज नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में किया। इस व्यापक अभियान का लक्ष्य बाल विवाह के खिलाफ समाज के हर तबके में जागरूकता पैदा करना है। यह अभियान बाल विवाह के खात्मे के लिए टिपिंग प्वाइंट यानी वह निर्णायक बिंदु जहां से समस्या अपने आप खत्म होने लगती है, तक पहुंचने के जेआरसी एलायंस के प्रयासों को नयी धार व ऊर्जा देगा। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस बुराई के खात्मे में साझीदारी व भागीदारी पर जोर देते हुए खास तौर से नागरिक समाज की अहमियत को रेखांकित किया।बाल विवाह के खिलाफ इस राष्ट्रव्यापी अभियान का पुरजोर समर्थन करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, बाल विवाह मुक्त भारत के सपने को पूरा करने के लिए काम कर रहे सभी लोगों के लिए आज एक नयी शुरुआत है। हम लंबी यात्रा तय कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं और महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी की इस पहल से हमारे प्रयासों को व्यापक रूप से मजबूती मिलेगी। हम बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाने के लिए सरकार के आभारी हैं क्योंकि हम जानते हैं कि यह देश से बाल विवाह की सदियों पुरानी कुप्रथा के अंत की शुरुआत है।अभियान के लक्ष्यों के साथ एकरूपता में जेआरसी के सहयोगी संगठन बाल विवाह के खिलाफ बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रहा है। गठबंधन का मानना है कि बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पंचायतों, धार्मिक नेताओं, सामुदायिक कार्यकर्ताओं, सामुदायिक नेताओं के साथ जमीनी स्तर पर उनके प्रयासों को और मजबूती देगा। गठबंधन बाल विवाह की रोकथाम के लिए नीतियों, कानून प्रवर्तन, सतत जागरूकता और तकनीक का इस्तेमाल जारी रखेगा।

फूड स्टाल पर लोगों को भा रहा झारखंड का व्यंजन
Published / 2024-11-26 20:17:45
फूड स्टाल पर लोगों को भा रहा झारखंड का व्यंजन

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के झारखंड पवेलियन में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा बढ़ा रही कौतूहलएबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। भगवान बिरसा मुंडा (धरती आबा) देश के प्रथमस्त स्वतंत्रता सेनानियों में माने जाते हैं। झारखंड प्रदेश में भगवान माने जाने वाले इस महान पुरुष को भारतीय जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक पुरुष और लोक नायक के रूप में मान्यता प्राप्त है। जिनका जन्म झारखंड के खूंटी जिले में 15 नवंबर 1875 को हुआ था। 19 के दशक के शुरुआती सालों में ही अपनी युवा अवस्था (25) में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध जो आंदोलन बनाया, उसको जनजातीय प्रजातियों में सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने अपने समुदाय के लोगों को धार्मिक क्रिया की तरह सोचने को तैयार किया और अपने अधिकारों को मांगने के लिए ब्रिटिश सरकार से लड़े। भगवान बिरसा मुंडा झारखंड प्रदेश में किसी भी काम के पहले याद किये जाते हैं। जिस कड़ी में 43वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय मेले के झारखंड पवेलियन में उनकी विशाल प्रतिमा स्थापित की गयी है। मेले में आने वाले लोग इस प्रतिमा को देख उत्सुकता से इनके विषय और कार्य की चर्चा कर रहे हैं। उनके जीवन पर कई साहित्य लिखे हैं और फिल्में भी बनायी जा चुकी हैं। इसके अलावा झारखंड पवेलियन से निकले के बाद लोग मेले में लगे फूड स्टाल में झारखंड के स्टाल में झारखंड के व्यंजन का भी लुत्फ उठा रहे हैं। लोगों को लिट्टी चोखा, मालपुआ, घुसका सब्जी, चिल्ला रोटी सब्जी, अनरसा, कुल्हड़ चाय काफी पसंद आ रहे हैं। स्टाल के संचालक राजेश ने बताया कि लोगों की भारी भीड़ झारखंड के व्यंजन को पसंद कर रहे हैं।

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