रामगढ़ में 4 अक्टूबर से बहेगी श्रीमद्भागवत कथा की अमृतधारारामगढ़ के जिमखाना क्लब रिसोर्ट में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन, मंगल कलश शोभायात्राटीम एबीएन, रांची। श्रीमद्भागवत कथा के पावन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रामगढ़ के जिमखाना क्लब रिसोर्ट में आगामी 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन स्वर्गीय रामचंद्र रूंगटा जी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन का शुभारंभ 4 अक्टूबर, रविवार को प्रातः 10 बजे भव्य मंगल कलश शोभायात्रा के साथ होगा। इसके पश्चात प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 7 बजे तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाएगा। प्रथम दिवस श्रीमद्भागवत महात्म्य एवं मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ होगा। सात दिवसीय इस आध्यात्मिक आयोजन में श्रीधाम वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथाव्यास एवं भागवत मर्मज्ञ पूज्य आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे। आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज के दासत्व, भोग एवं सेवा अधिकारी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं तथा श्रीमद्भागवत कथा के श्रेष्ठ एवं प्रसिद्ध वक्ताओं में उनकी विशेष प्रतिष्ठा है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, सदाचार, सेवा, प्रेम एवं मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त होगी। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेश और जीवन के मूल्यों पर आधारित कथा श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक एवं आत्मिक आनंद का अवसर बनेगी। आयोजन समिति के अनुसार, श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और मानवीय मूल्यों से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। सात दिनों तक कथा स्थल पर भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालु कथा श्रवण कर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने की प्रेरणा प्राप्त करेंगे। आयोजन समिति की ओर से श्रीमती माया रूंगटा ने रांची, रामगढ़ सहित पूरे झारखंड के श्रद्धालु भक्तों से इस पावन आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सपरिवार , इस्टमित्रो के साथ कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा के अमृतमय वचनों का श्रवण करने तथा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की अपील की है। आयोजन समिति ने बताया कि कथा को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजन को भव्य एवं व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। रामगढ़ की कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं सहित कई धर्म प्रेमियों, अतिविशिष्ट ब्यक्तियो का कथा के सफल आयोजन में पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। उक्त जानकारी रांची के प्रमोद सारस्वत ने दी।
रांची : बोडैया का मदन मोहन मन्दिर प्राचीन वास्तुकला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासतटीम एबीएन, रांची। रांची के बोरिया में स्थित 361 साल पुराना मदन मोहन राधा कृष्ण मंदिर प्राचीन वास्तुकला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को समान रूप से आकर्षित करता है। राजधानी की तमाम चकाचौध आकर्षण के बावजूद यह वास्तुकला और प्राचीन कलाकृतियों का साक्षात नमूना है, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग का भी बेहद सफलतापूर्ण प्रदर्शन किया गया है। लोगों की मानें तो मंदिर की कम ऊंचाई होने के बावजूद परिसर में कभी जल जमाव जैसी स्थिति नहीं आती। साथ ही पास पड़ोस के सभी नलकूप गर्मी में सूखने के बावजूद मंदिर परिसर स्थित जल स्रोत कभी नहीं सूखते, जिसे लोग आस्था से भी जोड़ते हैं।
जितिया मातृप्रेम, त्याग और संतान की दीर्घायु की मंगलकामना का पर्व : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय सनातन संस्कृति में अनेक पर्व और व्रत ऐसे हैं जिनमें पारिवारिक सुख, संतान की मंगलकामना और मातृप्रेम की अद्भुत अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। इन्हीं महत्वपूर्ण पर्वों में जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया अथवा जिउतिया व्रत भी कहा जाता है, विशेष स्थान रखता है। इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाएगा।जीवित्पुत्रिका व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, आरोग्य, सुख-समृद्धि, उन्नति एवं सुरक्षित जीवन की मंगलकामना से करती हैं। यह अत्यंत कठिन व्रत माना जाता है, जिसमें अनेक महिलाएं पूरे दिन और रात्रि तक निर्जला उपवास रखती हैं। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित अनेक क्षेत्रों में यह पर्व विशेष श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाया जाता है। नेपाल में भी यह जितिया व्रत के रूप में लोकप्रिय है। जीवित्पुत्रिका व्रत की प्रसिद्ध कथा राजा जीमूतवाहन, पक्षीराज गरुड़ और नाग शंखचूड़ से जुड़ी है। कथा के अनुसार नागवंश को गरुड़ के भय से बचाने के लिए जीमूतवाहन ने शंखचूड़ के स्थान पर स्वयं को बलिदान के लिए प्रस्तुत कर दिया। गरुड़ ने जीमूतवाहन को नाग समझकर उठा लिया, किंतु उनके अद्भुत त्याग और परोपकार से प्रभावित होकर सत्य का ज्ञान हुआ। इसके बाद गरुड़ ने नागों को अभय प्रदान किया और पूर्व में मारे गए नागों को अमृत के प्रभाव से पुनर्जीवन मिला।यह कथा त्याग, करुणा, परोपकार, साहस और प्राणीमात्र के प्रति दया का संदेश देती है। इसी कारण जीवित्पुत्रिका व्रत को संतान की रक्षा और दीर्घायु की कामना से जुड़े पवित्र व्रत के रूप में श्रद्धापूर्वक देखा जाता है। व्रती महिलाएं प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करती हैं और संकल्प लेकर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं। भगवान वासुदेव की पूजा, व्रत-कथा का श्रवण तथा पारंपरिक रूप से जीवित्पुत्रिका से संबंधित पूजन किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा-विधि और प्रसाद में अंतर भी देखने को मिलता है। जीवित्पुत्रिका व्रत केवल उपवास या धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां के त्याग, वात्सल्य, विश्वास और संतान के प्रति अटूट प्रेम की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह पर्व परिवार में संस्कार, श्रद्धा और पारस्परिक स्नेह को मजबूत करने का संदेश देता है। माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और मंगलमय जीवन के लिए कठिन तपस्या करती हैं, जो भारतीय संस्कृति में मातृत्व की गरिमा को रेखांकित करता है।अतः जीवित्पुत्रिका व्रत भारतीय लोकपरंपरा और सनातन आस्था का ऐसा पर्व है, जिसमें मां की प्रार्थना, त्याग और संतान के प्रति असीम स्नेह एक साथ दिखाई देता है। यह पर्व हमें परोपकार, करुणा, संयम और परिवार के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।
मानव सेवा की मिसाल बना सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम, दो असहाय व्यक्तियों को दिया आश्रयअब आश्रम में निराश्रितों की संख्या 45 हुईटीम एबीएन, रांची। परमहंस डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के मार्गदर्शन एवं सहयोग से संचालित एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, रांची के अंतर्गत श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम, पुंदाग द्वारा जनवरी 2024 से मंदबुद्धि, दिव्यांग, मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं निराश्रित लोगों की नि:शुल्क सेवा की जा रही है। संस्था जरूरतमंदों को आश्रय, भोजन, चिकित्सा और अपनत्व प्रदान कर मानव सेवा का अनुकरणीय कार्य कर रही है। सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि बुधवार को आश्रम की टीम ने दो असहाय मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को रेस्क्यू कर आश्रय प्रदान किया। सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति रांची रेलवे स्टेशन के समीप तथा दूसरा नगड़ी के लालगुटवा क्षेत्र में लावारिस अवस्था में भटक रहा है। दोनों की स्थिति अत्यंत दयनीय एवं अस्वच्छ थी। सूचना मिलते ही आश्रम के सेवा साथी मुकुंद यादव, परमेश्वर प्रमाणिक एवं सूरज प्रमाणिक ने तत्परता दिखाते हुए दोनों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद अस्पताल में उनकी चिकित्सकीय जांच करायी गयी और उन्हें सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) में लाकर आश्रय दिया गया। दोनों व्यक्तियों के नाम, पते एवं परिवार के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। उनकी याददाश्त भी प्रभावित है। आश्रम प्रबंधन ने उनकी देखभाल के लिए एक व्यक्ति का नाम बंसीलाल तथा दूसरे का नाम बंशीधर रखा है। संजय सर्राफ ने बताया कि गुरुजी स्वामी सदानंद जी महाराज के सहयोग से आश्रम में रह रहे सभी निराश्रितों को घर जैसा वातावरण, भोजन, चिकित्सा, स्नेह एवं सम्मान देने का प्रयास किया जाता है। दो दिन पूर्व भी एक निराश्रित को आश्रम में लाया गया था। अब आश्रम में रहने वाले निराश्रितों की संख्या बढ़कर 45 हो गयी है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों की सहायता करना समाज का नैतिक दायित्व है। मानव सेवा से बढ़कर कोई सेवा कार्य नहीं है। संस्था इसी भावना के साथ निरंतर सेवा कार्य में जुटी हुई है। उक्त जानकारी एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, रांची के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर को जितिया मातृप्रेम, त्याग और संतान की दीघार्यु की मंगलकामना का पर्व : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में अनेक पर्व और व्रत ऐसे हैं जिनमें पारिवारिक सुख, संतान की मंगलकामना और मातृप्रेम की अद्भुत अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। इन्हीं महत्वपूर्ण पर्वों में जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया अथवा जिउतिया व्रत भी कहा जाता है, विशेष स्थान रखता है। इस वर्ष जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जायेगा। जीवित्पुत्रिका व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, आरोग्य,सुख-समृद्धि, उन्नति एवं सुरक्षित जीवन की मंगलकामना से करती हैं। यह अत्यंत कठिन व्रत माना जाता है, जिसमें अनेक महिलाएं पूरे दिन और रात्रि तक निर्जला उपवास रखती हैं। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित अनेक क्षेत्रों में यह पर्व विशेष श्रद्धा एवं आस्था के साथ मनाया जाता है। नेपाल में भी यह जितिया व्रत के रूप में लोकप्रिय है। जीवित्पुत्रिका व्रत की प्रसिद्ध कथा राजा जीमूतवाहन, पक्षीराज गरुड़ और नाग शंखचूड़ से जुड़ी है। कथा के अनुसार नागवंश को गरुड़ के भय से बचाने के लिए जीमूतवाहन ने शंखचूड़ के स्थान पर स्वयं को बलिदान के लिए प्रस्तुत कर दिया। गरुड़ ने जीमूतवाहन को नाग समझकर उठा लिया, किंतु उनके अद्भुत त्याग और परोपकार से प्रभावित होकर सत्य का ज्ञान हुआ। इसके बाद गरुड़ ने नागों को अभय प्रदान किया और पूर्व में मारे गए नागों को अमृत के प्रभाव से पुनर्जीवन मिला। यह कथा त्याग, करुणा, परोपकार, साहस और प्राणीमात्र के प्रति दया का संदेश देती है। इसी कारण जीवित्पुत्रिका व्रत को संतान की रक्षा और दीघार्यु की कामना से जुड़े पवित्र व्रत के रूप में श्रद्धापूर्वक देखा जाता है। व्रती महिलाएं प्रात: स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करती हैं और संकल्प लेकर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं। भगवान वासुदेव की पूजा, व्रत-कथा का श्रवण तथा पारंपरिक रूप से जीवित्पुत्रिका से संबंधित पूजन किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा-विधि और प्रसाद में अंतर भी देखने को मिलता है। जीवित्पुत्रिका व्रत केवल उपवास या धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां के त्याग, वात्सल्य, विश्वास और संतान के प्रति अटूट प्रेम की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह पर्व परिवार में संस्कार, श्रद्धा और पारस्परिक स्नेह को मजबूत करने का संदेश देता है। माताएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और मंगलमय जीवन के लिए कठिन तपस्या करती हैं, जो भारतीय संस्कृति में मातृत्व की गरिमा को रेखांकित करता है। अत: जीवित्पुत्रिका व्रत भारतीय लोकपरंपरा और सनातन आस्था का ऐसा पर्व है, जिसमें मां की प्रार्थना, त्याग और संतान के प्रति असीम स्नेह एक साथ दिखाई देता है। यह पर्व हमें परोपकार, करुणा, संयम और परिवार के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराता है।
सजल श्रद्धा गुरुमाता भगवती देवी का जन्म शताब्दी दिवस साधकों ने श्रद्धा व उत्साहपूर्वक मनायासद्गुरु की कृपा से ही शिष्य को तत्व बोध की प्राप्ति होती है : आजादी सिंहएबीएन सोशल डेस्क (रांची)। अखिल विश्व गायत्री परिवार शान्तिकुञ्ज युग महर्षि वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ गुरुदेवश्री पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी की धर्मपत्नी सजल श्रद्धा, जगत जननी स्वरूपा गुरुमाता भगवती देवी का आज आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्थी को श्रद्धापूर्वक जन्म शताब्दी दिवस 5 कुण्डीय महायज्ञ व दीपयज्ञ विधान सहित सेक्टर टू शक्तिपीठ में मनाया गया। इसके अतिरिक्त धूर्वा बस स्टैंड प्रज्ञापीठ, अलकापुरी शक्तिपीठ, टाटीसिल्वे, बुण्डु तमाड़, खलारी, डकरा, नवाडीह व बेड़ो चरणपीठ तथा प्रज्ञामंडलो में एवं गृहे गृहे परिसरों में गायत्री परिवार के साधक भाई-बहनों ने माताजी के स्थापित मूर्ति व तस्वीर पर श्रद्धा-सुमन पुष्पांजलि अर्पित कर विशेष पूजा-पाठ,गायत्री महामंत्र का विशेष जप और यज्ञीय अनुष्ठान किया गया। सेक्टर टू पीठ पर गुरुमाताजी के जीवन वृतांत पर प्रकाश डालते हुए सहायक जोन समन्वयक आजादी सिंहजी ने शान्तिकुञ्ज से आकर वहां का विशेष संदेश सुनाया। पूरे झारखंड तथा उपजोन रांची के सभी जिलों में समन्वय समितिगठन को, मंडलों व पंचायतों को मजबूत, सशक्त बनाने, इस वर्ष नई दिल्ली, शान्तिकुञ्ज सहित पूरे भारत में मनाए व चलाए जाने वाले जन्म शताब्दी की शान्तिकुञ्ज के अनुयाज कार्यक्रम पर चर्चा की। इस अवसर पर सिंहजी ने कहा कि सद्गुरु की कृपा से ही शिष्य को तत्व बोध की प्राप्ति होती है।सद्गुरु की कृपा अपरंपार होती है। बताया कि उन्होंने ही अपने जीवन काल मे नारी जागरण, युग परिवर्तन के अनेक सूत्रीय आन्दोलन और उज्जवल भविष्य की मंगलमय घोषणा की थी। सबके स्वस्थ जीवन, समाज कल्याण, विश्व कल्याण की मंगल कामनाएँ करते व धन्यवाद देते हुए जिला समन्वयक जेएनपी ने बताया कि *वन्दनीया माता जी की चेतना-सत्ता व जीवन वृत्तान्त की महिमा व महत्ता अवर्णनीय है।कहा कि माताजी ने करोड़ों साधक-शिष्यों को सन्मार्ग पर चलाया और विश्व मंगल हेतु जो महानतम पुरुषार्थ किया वो युगों युगों तक स्मरणीय रहेगा। उनके जीवन वृतांत पर इस वर्ष की सितम्बर माह युग निर्माण पत्रिका के विशिष्ट प्रकाशन पर भी चर्चा की।इस कार्यक्रम के पूर्व संध्या पर हर एक इकाई में अखंड जप-अनुष्ठान किया गया। कई शाखाओं में शाम में आज दीपयज्ञीय कार्यक्रम भी किया गया। साथ ही प्रज्ञा गीत के माध्यम से उद्गार भाव प्रकट किया। आज आनलाइन गायत्री-परिवार अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक अखंड जप-अनुष्ठान व यज्ञीय अनुष्ठान भी किए गए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार, रांची शक्तिपीठ सेक्टर टू के जय नारायण प्रसाद और प्रमोद कुमार ने दी।
12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम के दर्शन कर कोडरमा पहुंचे अजय विश्वकर्मा404 दिनों की स्केटिंग यात्रा के बाद हुआ जोरदार स्वागत404 दिनों में 19 हजार किमी की स्केटिंग यात्रा पूरी कर लौटे अजय, विश्वकर्मा समाज ने किया स्वागतएबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरी तिलैया। डोमचांच प्रखंड के फुलवरिया निवासी अजय कुमार विश्वकर्मा ने स्केटिंग के जरिए 404 दिनों में करीब 19 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर कोडरमा लौटे। कोडरमा पहुंचने पर झुमरी तिलैया स्थित महाराणा प्रताप चौक के श्रीश्री भगवान विश्वकर्मा मंदिर परिसर में विश्वकर्मा समाज के लोगों ने उनका फूल-माला पहनाकर एवं मिठाई खिलाकर जोरदार स्वागत किया।अजय कुमार विश्वकर्मा, पिता संजय विश्वकर्मा, ने अपनी इस अनोखी यात्रा के दौरान देश के 19 राज्यों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने स्केटिंग करते हुए 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम समेत कई प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन किए। 404 दिनों तक स्केटिंग के जरिए हजारों किलोमीटर का सफर तय कर वापस लौटना उनके साहस, जुनून और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।अजय विश्वकर्मा ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य खासकर युवाओं के बीच सकारात्मक और धार्मिक संदेश पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि युवा अपनी बुरी आदतों को छोड़कर धार्मिक एवं अच्छे कार्यों में ध्यान लगाएं और अपने लक्ष्य व भविष्य पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि युवाओं में सकारात्मक सोच और अनुशासन को बढ़ावा देना भी उनकी यात्रा का एक उद्देश्य रहा।कोडरमा लौटने पर विश्वकर्मा समाज के लोगों ने अजय की इस उपलब्धि की सराहना की। समाज के लोगों ने कहा कि उनकी यह यात्रा समाज के साथ-साथ क्षेत्र के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। अजय ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर यह अनोखी यात्रा पूरी की है।स्वागत कार्यक्रम में सूरज विश्वकर्मा, कामेश्वर विश्वकर्मा, आतिश ओबेरॉय उर्फ सोनू विश्वकर्मा, विपिन विश्वकर्मा, राजन विश्वकर्मा, कृष्णा विश्वकर्मा, विशाल विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, मनोहर विश्वकर्मा, मनोज विश्वकर्मा, हीरो विश्वकर्मा, छोटेलाल विश्वकर्मा, परवीन विश्वकर्मा, धर्मेंद्र विश्वकर्मा, दिलीप विश्वकर्मा और चंदन विश्वकर्मा समेत विश्वकर्मा समाज के कई लोग मौजूद थे।
कोडरमा : आईलेक्स मल्टीप्लेक्स में युवाओं ने देखी हनुमान अंश फिल्मआईलेक्स मल्टीप्लेक्स में हनुमान अंश फिल्म का विशेष प्रदर्शन, युवाओं को मिला संस्कार और सेवा का संदेशएबीएन न्यूज नेटवर्क, झुमरी तिलैया (कोडरमा)। उजाला कॉम्प्लेक्स स्थित आईलेक्स मल्टीप्लेक्स में संत नीम करौरी बाबा के जीवन एवं उनके आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित फिल्म हनुमान अंश का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर अग्रवाल समाज के बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ फिल्म देखने पहुंचे। कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं बुजुर्गों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। विशेष रूप से बच्चों एवं युवाओं में फिल्म को लेकर काफी उत्साह नजर आया।फिल्म प्रदर्शन से पूर्व श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके पश्चात विधिवत आरती की गयी और भगवान हनुमान के जयकारों के बीच फिल्म का शुभारंभ हुआ। आध्यात्मिक वातावरण और पारिवारिक माहौल ने पूरे कार्यक्रम को विशेष बना दिया।कार्यक्रम के प्रायोजक व संयोजक मुकेश भालोटिया ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल फिल्म का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि समाज में भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा एवं भारतीय संत परंपरा के प्रति प्रेम को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कार एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ना बेहद आवश्यक है। फिल्म के माध्यम से युवाओं में सेवा, संस्कार, सदाचार, अनुशासन और सकारात्मक जीवन-दृष्टिकोण को विकसित करने का संदेश देने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के परियोजना निर्देशक अरविंद चौधरी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के सामने अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे में भारतीय संस्कृति और संत परंपरा से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंग उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म के माध्यम से युवाओं को अच्छे विचारों को अपने जीवन में अपनाने, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान करने, जरूरतमंदों की सहायता करने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने का संदेश देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि संत नीम करौरी बाबा का जीवन सेवा, सरलता, भक्ति और मानव कल्याण की प्रेरणा देता है। हनुमान अंश के माध्यम से इन्हीं जीवन मूल्यों को नयी पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।फिल्म के दौरान मल्टीप्लेक्स का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक एवं पारिवारिक नजर आया। समाज के बुजुर्गों के साथ युवा-युवतियां और बच्चे भी एक साथ फिल्म का आनंद लेते दिखाई दिये। कई दर्शकों ने फिल्म के प्रेरणादायी प्रसंगों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी फिल्मों के माध्यम से मनोरंजन के साथ-साथ संस्कार एवं सकारात्मक सोच का संदेश भी समाज तक पहुंचता है।मौके पर अग्रवाल समाज के अध्यक्ष कैलाश चौधरी, सचिव संजीव खेतान, जयंती संयोजक मनोज पिलानिया, अंकित चौधरी, सारिका लड्ढा, नेहा हिसारिया ने कहा कि हनुमान अंश केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, भक्ति और सेवा भाव से जुड़ा प्रेरणादायी संदेश है। उन्होंने कहा कि फिल्म के माध्यम से भगवान हनुमान के आदर्शों तथा संत परंपरा के जीवन मूल्यों को समाज और विशेषकर युवाओं तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया गया है।कार्यक्रम में श्याम सुंदर सिंघानिया, महेश दारूका, जगदीश संघई, दीपक सिंघानिया, मनोज केंडिया, मुन्ना सुल्तानिया, दीनदयाल केडिया, संजय दारूका, सुजीत परशुरामपुरिया, संजय खेमानी, सुरेंद्र गुप्ता, संजीव अग्रवाल, रवि केडिया, रमेश भालोटिया, संजय अग्रवाल, राकेश सुरेका, मनोज लड्ढा, गोपाल मोदी, सुनील लोहिया, प्रदीप बंसल, प्रेम फतेसरिया अनूप सरावगी, विनीत संघई, आयुष पोद्दार, सोनु भालोटिया, बबीता केडिया, ज्योति संघई, उमा बजाज, शालु चौधरी, मिहिर खेतान, हर्षित सिंघानिया, विजय बजाज, अंकित खेतान, केशव चौधरी, अमित सिंघानिया सहित कई लोग उपस्थित थे।कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालु भक्तों के बीच हनुमान चालीसा की पुस्तिकाएं एवं प्रसाद वितरित किया गया। उपस्थित लोगों ने भगवान हनुमान के जयकारे लगाये और समाज में सेवा, संस्कार एवं सद्भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों को नयी पीढ़ी से जोड़ने के साथ-साथ परिवार और समाज के बीच आपसी जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं। हनुमान अंश का यह विशेष प्रदर्शन झुमरी तिलैया में भक्ति, संस्कार और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला एक यादगार आयोजन बन गया।
संपूर्ण समाज को जोड़ना ही सेवा कार्य का उद्देश्य : गुरुशरण प्रसाद टीम एबीएन, रांची। सेवा भारती, झारखंड का तीन दिवसीय सेवा सारथी कार्यशाला सह किशोरी विकास प्रशिक्षण वर्ग सेवा धाम, जोन्हा,रांची में सपन्न हुआ। समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सेवा भारती के न्यासी गुरुशरण प्रसाद ने कहा कि अपने प्रेम और व्यवहार से संपूर्ण समाज को जोड़ने के लिए सेवा कार्य किया जा रहा है। सेवा आयाम स्वयं सहायता समूह शक्ति का केंद्र है। सेवा भारती के सेवा सारथी इसे अधिक बलशाली और परिणामकारी बना रहे हैं। आज प्रत्येक महिलाओं के हाथ में कौशल,कोई न कोई कला होना आवश्यक है। मौके पर उन्होंने किशोरियों को अनावश्यक मोबाईल उपयोग से बचने की बात कही साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यक्तिगत रूप से एक पेड़ लगाने,जल बचाव एवं स्वच्छता पर अधिक ध्यान आकृष्ट किया। कार्यशाला में बीसीसीएल के पूर्व सीएमडी अजय सिंह ने योगासन और ध्यान मुद्रा के विभिन्न प्रकार का अभ्यास कराया। वर्ग में सेवा सारथी कार्यकर्ताओं ने अपने क्षेत्र में कार्य विस्तार की योजना बनायी। समापन कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सेवा भारती की न्यासी सोनी मेहता बताया कि अपनी घर- गृहस्थी देखते सेवा भारती के सेवा सारथी विभिन्न सेवा कार्यों के रथ को निरंतर आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। तीन दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय सेवा भारती की न्यासी श्रीमती शिल्पा वर्णेकर, प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख रमाकांत दूबे आदि कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस वर्ग में सेवा सारथी, किशोरी एवं प्रमुख कार्यकर्ताओं सहित 95 की संख्या थी।
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