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गौ सेवा से हुआ संत शिरोमणि परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के 82वें जन्मोत्सव का शुभारंभ
Published / 2026-08-01 18:23:01
गौ सेवा से हुआ संत शिरोमणि परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के 82वें जन्मोत्सव का शुभारंभ

टीम एबीएन, रांची। गुरुजी संत शिरोमणि परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के 82वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी सेवा धाम मंदिर परिसर मे स्थित प्रणामी गौशाला गोकुलधाम में शनिवार को गौ सेवा के साथ सेवा कार्यों का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम श्रद्धा, सेवा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रणामी गौशाला में विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ। मंदिर के पुजारी अरविंद पांडे ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गौ पूजन संपन्न कराया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने गौमाता को हरी घास,चारा,रोटी खिलाकर गौ सेवा की तथा खिचड़ी भोग अर्पित कर प्रसाद का वितरण किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गौ सेवा को भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए सेवा कार्य में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। मौके पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, संजय सर्राफ, सुनीता अग्रवाल, आशा मुंजाल, उर्मिला पाड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि संत शिरोमणि परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के मार्गदर्शन में देशभर में सेवा, गौ संरक्षण, मानव कल्याण एवं आध्यात्मिक जागरण के अनेक कार्य संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गुरुजी के सानिध्य में देशभर में 113 गौशालाओं का संचालन किया जा रहा है, जिनमें 80 हजार से अधिक गौवंश का संरक्षण एवं पालन-पोषण किया जा रहा है। यह कार्य सेवा, करुणा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने बताया कि गुरुजी का 82वां भव्य जन्मोत्सव 2 अगस्त को अपराह्न 2:30 बजे से श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में मनाया जायेगा। मौके पर निर्धन एवं जरूरतमंद लोगों के बीच वस्त्र वितरण, नि:शुल्क स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर, भजन-कीर्तन, मेहेर सागर के पाठ, सत्संग तथा महाप्रसाद का आयोजन किया जायेगा। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर सेवा एवं भक्ति के इस पावन आयोजन में सहभागी बनने का आग्रह किया है।

सावन और कांवर यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का देता है संदेश : संजय सर्राफ
Published / 2026-08-01 18:22:07
सावन और कांवर यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का देता है संदेश : संजय सर्राफ

बाबाधाम की ओर बढ़ते कदम एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि श्रावण मास हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इस पूरे माह शिवालयों में हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंजते हैं। देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए कांवर यात्रा पर निकलते हैं। झारखंड स्थित देवघर का प्रसिद्ध बैद्यनाथ धाम देश के प्रमुख शिव तीर्थों में विशेष स्थान रखता है। यहां सावन में होने वाली कांवर यात्रा आस्था, भक्ति, तपस्या और श्रद्धा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है। कांवर यात्रा में श्रद्धालु पवित्र नदियों और जलस्रोतों से जल भरकर उसे कांवर में लेकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करते हैं। झारखंड में सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कांवरिया इस यात्रा के दौरान कठिन नियमों और संयम का पालन करते हुए निरंतर बोल बम का जयघोष करते हैं।श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इसी परंपरा से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की धार्मिक मान्यता जुड़ी मानी जाती है।सावन के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु उपवास रखते हैं, शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। ॐ नम: शिवाय का जाप करते हुए भक्त भगवान शिव से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। देवघर का बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यहां भगवान शिव बैद्यनाथ या बाबा बैद्यनाथ के नाम से पूजे जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। शिव की आराधना और रावण से जुड़ी पौराणिक कथा के कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। सावन में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। कांवरियों की लंबी कतारें, भगवा वस्त्र, हाथों में कांवर और चारों ओर गूंजता बोल बम का उद्घोष वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना देता है।कांवर यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, त्याग और आत्मअनुशासन की यात्रा भी है। अनेक कांवरिया नंगे पैर लंबी दूरी तय करते हैं। वे यात्रा के दौरान सात्त्विक भोजन करते हैं और अपने आचरण में पवित्रता बनाए रखने का प्रयास करते हैं। रास्ते में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा कांवरियों के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा, विश्राम और अन्य सेवाओं की व्यवस्था की जाती है। सावन और कांवर यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी संदेश देती है। यात्रा के दौरान जाति, भाषा, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति का भेद मिट जाता है और सभी श्रद्धालु एक ही पहचान- बोल बम के साथ आगे बढ़ते हैं। सेवा शिविरों में स्थानीय लोग कांवरियों की सेवा को पुण्य कार्य मानकर सहयोग करते हैं। भगवान शिव की उपासना हमें त्याग, करुणा, धैर्य, संयम और लोककल्याण की प्रेरणा देती है। शिव स्वयं विष को धारण कर संसार की रक्षा करने वाले देव माने जाते हैं। इसलिए सावन की आराधना केवल मंदिर में पूजा करने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन में शिव के आदर्शों को अपनाने का अवसर भी है।सावन में बैद्यनाथ धाम की कांवर यात्रा श्रद्धा और साधना की ऐसी जीवंत परंपरा है, जिसमें भक्त कठिन मार्ग को भी आनंदपूर्वक स्वीकार करते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचता है। गंगाजल की एक-एक बूंद और हर-हर महादेव का प्रत्येक जयघोष भक्त और भगवान के बीच आस्था के अटूट संबंध का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि सावन आते ही संपूर्ण देवघर नगरी भक्ति, विश्वास और शिवमय ऊर्जा से भर उठती है।

परंपरा मेले के दूसरे दिन महिलाओ ने मनाया सावन सिंधारा
Published / 2026-07-31 19:24:40
परंपरा मेले के दूसरे दिन महिलाओ ने मनाया सावन सिंधारा

परंपरा मेले के दूसरे दिन महिलाओ ने मनाया सावन सिंधारामहिलाओ की प्रतिभा को देखने का अवसर मिला : दीपिका पांडेयराज्य मंत्री दीपिका पांडेय ने दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्तिथी से महिला उधमियों को प्रोत्साहित किया90 से अधिक स्टॉल पर महिला उद्यमियों के उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहेप्रातः 11 बजे से रात्रि 8 बजे तक खुला रहेगाटीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी सहायक समिति, रांची के सानिध्य में आयोजित चार दिवसीय "परंपरा" कला एवं विरासत मेले का आयोजन 30 जुलाई से 2 अगस्त तक हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन परिसर में किया जा रहा है।मेले के दूसरे दिन दोपहर 3:30 बजे से सावन सिंधारा कार्यक्रम का आयोजन महिलाओ के द्वारा रखा गया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज) दीपिका पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुयी।आयोजन समिति की ओर से माननीय राज्य मंत्री को पुष्प गुच्छ एवं अंग वस्त्र देकर उनका अभिनंदन और स्वागत किया गया।  द्वितीय दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती पांडेय ने कहा यहां आकर महिलाओ के त्यौहार परंपराओं को समझने का मौका मिला। महिला उधमियों को इस पारंपरिक परंपरा के  माध्यम से महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। समाज की महिलाओ की प्रतिभा परंपरा के माध्यम से देखने मिल रही है। महिला लघु उद्योग के माध्यम से सुंदर मेले का प्रायोजन किया गया है इससे कई लोगो को रोजगार भी मुहैया होगा। मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आईं महिला उद्यमियों ने 90 से अधिक स्टॉल लगाए हैं।इन स्टॉलों पर हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, गृह सज्जा की वस्तुएँ, हस्तनिर्मित उत्पाद, आभूषण, हर्बल बस्तुये ,सूती, सिल्क वस्त्रों के उत्पाद, खानपान की समुचित ब्यवस्था एवं अन्य रचनात्मक उत्पाद प्रदर्शित के साथ बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। खरीदारी के साथ-साथ लोग क्षेत्रीय खानपान का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं। मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। यह आयोजन भारतीय कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन, विपणन और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है। इससे महिलाओं के स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा मिल रही है।मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष पवन शर्मा सचिव विनोद जैन, आयोजन समिति के मुख्य संयोजक विनीता झुनझुनवाला नेशहरवासियों से आग्रह किया है कि वे अपने परिवार के साथ मेले में पहुँचकर महिला उद्यमियों का उत्साहवर्धन करें तथा अपनी गरिमामयी उपस्थिति से आयोजन को सफल बनाने में सहभागी बनें।प्रोजेक्ट चेयरमैन अरुण भरतिया ने बताया कि पूरे रांची शहर को भारतीय कला, संस्कृति के साथ बाहर से पधारे महिला उद्यमियों के द्वारा रचनात्मक उत्पाद मेले के स्टॉल पर रखा गया है। आयोजन से जुड़े मुख्य संयोजक विनीता झुनझुनवाला, मोनिका गोयनका, प्रियंका जैन, संयोजक खुशबू अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, शिखा जैन अग्रवाल, सुनीता लाठ द्वारा मेले की ब्यवस्था बेहतर और सुंदर बनाने का भरपूर प्रयास हो रहा है। कल शिव तांडव का संस्कृति कार्यक्रम सायं 5 बजे मारवाड़ी भवन में होगा।मारवाड़ी सहायक समिति, रांची के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल, किशन पोद्दार, अशोक लाठ, अजय खेतान, मनोज चौधरी, कौशल राजगढ़िया,अजय डीडवानिया, कमल शर्मा, निर्मल बुधिया,प्रमोद सारस्वत आयोजन में उपस्तिथ थे। उक्त जानकारी अध्यक्ष पवन शर्मा और सचिव विनोद जैन ने दी। 

बाल विवाह, बाल मजदूरी और मानव तस्करी के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान (2026-27) का आगाज
Published / 2026-07-30 21:06:27
बाल विवाह, बाल मजदूरी और मानव तस्करी के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान (2026-27) का आगाज

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन्स द्वारा नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 27 से 30 जुलाई तक 4-दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 782 जिलों में चलाया जाएगा राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन रांची के सचिव बैद्यनाथ कुमार ने अभियान में सक्रिय भागीदारी निभायी एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली/ रांची)। बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को समाप्त करने के उद्देश्य से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन्स द्वारा नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 27 से 30 जुलाई तक चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया गया। इस भव्य सम्मेलन में वर्ष 2026-27 के लिए एक विस्तृत नेशनल कैंपेन (राष्ट्रीय अभियान) की आधिकारिक शुरुआत की गयी। इस राष्ट्रीय अभियान का मुख्य उद्देश्य देश से बाल विवाह, बाल मजदूरी और मानव तस्करी जैसी कुरीतियों और अपराधों को पूरी तरह से समाप्त करना है। 36 राज्यों और 782 जिलों तक पहुंचेगा अभियान यह राष्ट्रीय अभियान भारत के सभी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 782 जिलों में व्यापक स्तर पर जागरूकता फैलाएगा। अभियान के तहत जमीनी स्तर पर विधिक सहायता, रोकथाम, संरक्षण और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के मॉडल पर काम किया जाएयेगा। झारखंड और देश के बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने का संकल्प कार्यक्रम में रांची से शामिल हुए चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के सचिव बैद्यनाथ कुमार ने अभियान में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि बाल विवाह, मानव तस्करी और बाल श्रम जैसी समस्याएं किसी भी सभ्य समाज के लिए अभिशाप हैं। जब तक हमारे देश का हर बच्चा सुरक्षित और शिक्षित नहीं होगा, तब तक एक सशक्त भारत का सपना अधूरा है। 2026-2027 का यह राष्ट्रीय अभियान हर जिले और गांव तक पहुंचकर बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकार दिलाने और उन्हें शोषण से बचाने में मील का पत्थर साबित होगा। झारखंड सहित पूरे देश में नागरिक समाज और प्रशासन मिलकर इसे सफल बनायेंगे। अभियान की मुख्य विशेषताएं बाल विवाह मुक्त भारत: देश में बाल विवाह की दरों में भारी कमी लाने और जागरूकता अभियानों के जरिए पंचायतों व स्थानीय स्तर पर बाल विवाह रोकथाम अधिकारियों की जवाबदेही तय करना। मानव तस्करी पर नकेल: संवेदनशील क्षेत्रों और तस्करी के शिकार बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करना एवं पुनर्वास की व्यवस्था करना। बाल श्रम का उन्मूलन: बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना। सामुदायिक सहभागिता: ग्राम स्तर पर बाल संरक्षण समितियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाना।

राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन राष्ट्रभाषा हिंदी के अमर प्रहरी: संजय सर्राफ
Published / 2026-07-30 13:47:01
राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन राष्ट्रभाषा हिंदी के अमर प्रहरी: संजय सर्राफ

राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन राष्ट्रभाषा हिंदी के अमर प्रहरी: संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती प्रत्येक वर्ष 1 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई जाती है। इस दिन राष्ट्र उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पण तथा राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में किए गए अद्वितीय कार्यों को स्मरण करता है। वे ऐसे महान राष्ट्रनायक थे जिन्होंने आजीवन सत्य, सादगी, स्वदेशी और भारतीय मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाया। उनके उत्कृष्ट व्यक्तित्व और त्यागमय जीवन के कारण उन्हें सम्मानपूर्वक "राजर्षि" की उपाधि से अलंकृत किया गया।पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 1 अगस्त 1882 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की तथा कुछ समय तक वकालत भी की। महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित कर दिया। असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन सहित अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय भाग लिया और कई बार कारावास भी भोगा।पुरुषोत्तम दास टंडन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में रहे तथा वर्ष 1950 में कांग्रेस के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए। वे हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने के लिए निरंतर संघर्षरत रहे। संविधान सभा में उन्होंने पूरे दृढ़ संकल्प के साथ हिंदी के पक्ष में अपनी बात रखी। उनके अथक प्रयासों के कारण हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान मिला। वे मानते थे कि अपनी भाषा ही किसी राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और आत्मगौरव की सबसे बड़ी आधारशिला होती है। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती का उद्देश्य नई पीढ़ी को देशभक्ति, राष्ट्रभाषा के सम्मान, भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा नैतिक जीवन के प्रति प्रेरित करना है। इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी संस्थानों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा संगोष्ठियों, विचार गोष्ठियों, भाषण प्रतियोगिताओं और हिंदी साहित्य से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1961 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान "भारत रत्न" से सम्मानित किया। 1 जुलाई 1962 को उनका निधन हो गया, किंतु उनके विचार, आदर्श और राष्ट्रभाषा के प्रति समर्पण आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की जयंती हमें यह संदेश देती है कि राष्ट्र की उन्नति अपनी भाषा, संस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता के संरक्षण से ही संभव है।

गुरु पूर्णिमा पर प्रणामी मंदिर में उमड़ी श्रद्धा, गुरु चरणों में भक्तों ने अर्पित की आस्था
Published / 2026-07-29 21:54:29
गुरु पूर्णिमा पर प्रणामी मंदिर में उमड़ी श्रद्धा, गुरु चरणों में भक्तों ने अर्पित की आस्था

एबीएन सोशल डेस्क। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव हर्षोल्लास, श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। गुरुजी संत शिरोमणि परमहंस डॉ. सदानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति, आध्यात्मिकता और गुरु भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुजी श्री मंगल दासजी महाराज, श्री श्री 108 संत गुरु राधिका दासजी महाराज एवं परमहंस डॉ. संत सदानंद जी महाराज का विधिवत पूजन एवं वंदन किया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्प एवं श्रद्धा अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान भक्तों ने गुरु के प्रति अपनी आस्था एवं समर्पण व्यक्त करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।महोत्सव के अवसर पर मंदिर में भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राधारानी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। आकर्षक श्रृंगार एवं मनोहारी दर्शन ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंदिर के पुजारी अरविंद पांडे द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। पूजा के उपरांत भगवान श्री राधा-कृष्ण को 51 किलो केसरिया खीर का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं द्वारा दीप प्रज्वलित किए गए तथा सामूहिक आरती में सभी ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर दीपों की रोशनी और भक्तिमय जयकारों से गूंज उठा। भजन-कीर्तन का भी आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर खूब झूमे। भक्तिमय गीतों और संकीर्तन से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।कार्यक्रम के समापन पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद वितरण के दौरान भी भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला।इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने गुरु पूर्णिमा की महत्ता पर अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु मनुष्य के जीवन में ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु का मार्गदर्शन जीवन को सही दिशा प्रदान करता है तथा सेवा, सदाचार, मानवता और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल गुरु पूजन का पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा, समर्पण एवं उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का पावन अवसर है। महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण, भक्त, ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

त्याग, शौर्य, समर्पण, राष्ट्रभक्ति व अनुशासन का प्रतिरूप है भगवा ध्वज : शशांक कुलकर्णी
Published / 2026-07-29 21:53:30
त्याग, शौर्य, समर्पण, राष्ट्रभक्ति व अनुशासन का प्रतिरूप है भगवा ध्वज : शशांक कुलकर्णी

टीम एबीएन, रांची। नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय होचर, कांके, रांची के सभागार में आषाढ़ पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरु पूजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची विभाग के  महाविद्यालय विद्यार्थी कार्य प्रमुख शशांक  कुलकर्णी ने कहा मानव जीवन के उद्देश्य का भाव को भरने वाला ही गुरु कहलाता है। भगवान और गुरु यदि एक साथ खड़े दिखाई पड़े तो पहले गुरु को नमन करने का भाव उत्पन्न होता है क्योंकि गुरु ही भगवान का स्वरूप का दर्शन कराते हैं। भगवा ध्वज त्याग, शौर्य, समर्पण, राष्ट्रभक्ति व अनुशासन का प्रतिरूप है, सनातन संस्कृति का प्रतीक है जो निरंतर चलते रहने का संदेश देता है। पूज्य डॉ केशवराव बलीराम हेडगेवार ने देश को परम वैभवशाली राष्ट्र निर्माण के प्रबल चिंतन के कारण ही देश को अपना परिवार मानकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में की थी, जिसका शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। मानव जीवन में हमेशा उनके भाव में परिवर्तन होता है, ऐसा समझकर ही आरएसएस ने सनातन संस्कृति के प्रतिक भगवा ध्वज को अपना गुरु माना है। कार्यक्रम में विद्यालय के निदेशक डॉ बिरेन्द्र साहु, सुजीत उपाध्याय, मनीष साहू, रामकिशोर साहू, विजय उरांव, चंदन सिंह, अनूप साहू सहित कई शिक्षकगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी सहायक शिक्षक मनीष साहु (79030 08847) ने दी।

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में कल मनेगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव
Published / 2026-07-28 20:53:48
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में कल मनेगा गुरु पूर्णिमा महोत्सव

एबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित रांची के पुंदाग स्थित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा महोत्सव हर्षोल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया जायेगा। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का विशेष संगम देखने को मिलेगा। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरुजी श्री मंगल दासजी महाराज, श्रीश्री 108 संत गुरु राधिका दासजी महाराज एवं परमहंस डॉ. संत सदानंदजी महाराज का विधिवत पूजन एवं वंदन किया जायेगा। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया जायेगा। महोत्सव के तहत श्री राधा रानी का दिव्य एवं अलौकिक श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके साथ ही दीप प्रज्वलन, भजन-कीर्तन एवंआध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिरस से सराबोर होगा। मौके पर भगवान श्री राधा-कृष्ण को 51 किलो केसरिया खीर का भोग अर्पित किया जायेगा। पूजा-अर्चना एवं भोग के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जायेगा। ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर गुरु पूर्णिमा महोत्सव को सफल बनाने का आग्रह किया गया है।

शिव आराधना का महापर्व सावन 30 जुलाई से, भक्ति और आस्था से गूंजेंगे शिवालय
Published / 2026-07-28 15:03:17
शिव आराधना का महापर्व सावन 30 जुलाई से, भक्ति और आस्था से गूंजेंगे शिवालय

शिव आराधना का महापर्व सावन 30 जुलाई से, भक्ति और आस्था से गूंजेंगे शिवालयभगवान शिव का स्वरूप त्याग, करुणा, समभाव और लोककल्याण का प्रतीक: संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भगवान शिव की आराधना, तप, साधना और भक्ति का पावन महीना श्रावण यानी सावन मास इस वर्ष श्रावण माह की शुरुआत 30 जुलाई दिन गुरुवार से प्रारंभ होकर 28 अगस्त तक रहेगा।सनातन धर्म में सावन को भगवान शिव का सर्वाधिक प्रिय महीना माना गया है। इस पूरे माह में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक-पुष्प आदि अर्पित कर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है। सावन के सोमवार का विशेष महत्व है। श्रद्धालु सोमवार को व्रत रखते हैं, मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं तथा ॐ नमः शिवाय का जाप कर सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि की कामना करते हैं।सावन की महिमा का संबंध समुद्र मंथन की प्रसिद्ध पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले अत्यंत घातक हलाहल विष निकला। उसके प्रभाव से समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई। देवताओं और समस्त जीवों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के कारण उनका कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर जल अर्पित किया। इसी मान्यता से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक की परंपरा को विशेष महत्व मिला। सावन केवल धार्मिक आस्था का महीना ही नहीं, बल्कि प्रकृति के नवजीवन का भी प्रतीक है।वर्षा से धरती हरियाली की चादर ओढ़ लेती है। पेड़-पौधों, नदियों और जलस्रोतों में नवचेतना आती है। ऐसे समय में शिव आराधना मनुष्य को प्रकृति के प्रति सम्मान,संयम और संरक्षण का संदेश भी देती है।श्रावण मास के सोमवार को भगवान शिव की पूजा और व्रत का विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और शिव मंदिर में जाकर जलाभिषेक एवं पूजन करते हैं। शिव-पार्वती की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक तथा शिव चालीसा का पाठ भी श्रद्धा से किया जाता है।सावन का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह माह मन, वचन और कर्म की शुद्धि का संदेश देता है। श्रद्धालुओं को सात्त्विक जीवन, वाणी में मधुरता, जरूरतमंदों की सेवा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा परोपकार को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिलती है। भगवान शिव का स्वरूप स्वयं त्याग, करुणा, समभाव और लोककल्याण का प्रतीक है।इस प्रकार सावन मास आस्था और अध्यात्म के साथ-साथ प्रकृति, सेवा, संयम और सद्भाव का पर्व है। हर हर महादेव के जयघोष से गूंजते शिवालय और श्रद्धा से किए गए जलाभिषेक भक्तों को यही संदेश देते हैं कि सच्ची शिवभक्ति मानव कल्याण, प्रकृति संरक्षण और परोपकार की भावना में निहित है।

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