अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु की अनंत सत्ता, सुख-समृद्धि और संकल्प का पावन पर्व : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन हिंदू धर्म में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी अथवा अनंत चौदस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन अनेक स्थानों पर गणेशोत्सव का समापन गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होता है। अनंत का अर्थ है जिसका न आदि है, न अंत। भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना को समर्पित यह पर्व जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और अखंड मंगल की कामना से जुड़ा है। इस दिन भगवान विष्णु, शेषनाग और माता यमुना की पूजा करने तथा अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा है। अनंत सूत्र सामान्यतः कच्चे सूत से तैयार किया जाता है और इसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। धार्मिक मान्यता में ये गांठें चौदह लोकों का प्रतीक मानी जाती हैं। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु इसे अपनी भुजा पर धारण करते हैं। यह सूत्र भगवान के प्रति श्रद्धा, संकल्प और जीवन में धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा का प्रतीक माना जाता है। अनंत चतुर्दशी से जुड़ी प्रसिद्ध व्रत-कथा ऋषि कौंडिन्य और उनकी पत्नी सुशीला से संबंधित है। लोकमान्यता के अनुसार सुशीला ने अनंत भगवान का व्रत एवं पूजन कर अनंत सूत्र धारण किया। इससे उनके परिवार में सुख-समृद्धि आई। बाद में कौंडिन्य ऋषि ने अनंत सूत्र की महत्ता को समझे बिना उसका अनादर कर दिया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा। अंततः उन्हें अपनी भूल का बोध हुआ और उन्होंने भगवान अनंत की श्रद्धापूर्वक आराधना की। भगवान की कृपा से उनके कष्ट दूर हुए। यह कथा श्रद्धा, विश्वास, संयम और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है। इस दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। पूजा स्थल को स्वच्छ कर भगवान विष्णु की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित कर पुष्प, फल, धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं। अनंत भगवान का पूजन करने के बाद अनंत सूत्र धारण किया जाता है। अनेक श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं।अनंत चतुर्दशी का उद्देश्य केवल सुख-समृद्धि की कामना करना नहीं, बल्कि सत्य, संयम, श्रद्धा, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन में अपनाना भी है। यह पर्व मनुष्य को याद दिलाता है कि जीवन की परिस्थितियां परिवर्तनशील हैं, लेकिन धर्म, आस्था और सद्कर्म के प्रति संकल्प दृढ़ रहना चाहिए। इस प्रकार अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की उपासना, पारिवारिक मंगल, सुख-समृद्धि, आत्मसंयम और आध्यात्मिक संकल्प का पावन पर्व है। वहीं गणेशोत्सव के समापन के कारण यह दिन भक्ति और उत्सव की दो महत्वपूर्ण परंपराओं के संगम के रूप में भी विशेष महत्व रखता है।
साध्वी गोपिका जी ने सुनाया भागवत का अमृत प्रसंग एबीएन सोशल डेस्क। डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन सान्निध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी ने भक्तों को प्रह्लाद चरित्र से लेकर श्रीकृष्ण प्राकट्य और नंदोत्सव तक के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन सुनाया। कथा के दौरान सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं को प्रसंगों से आत्मीय रूप से जोड़ दिया। साध्वी गोपिका जी ने भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी सच्ची भक्ति और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास को कोई शक्ति डिगा घूम गया गाड़ी तो चलो ठीक है वही निकलेंगे नहीं सकती। हिरण्यकशिपु द्वारा अनेक प्रकार की यातनाएं दिए जाने के बावजूद प्रह्लाद ने भगवान का स्मरण नहीं छोड़ा। अंतत: भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर भक्त की रक्षा की। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति, विश्वास और धर्म के मार्ग पर दृढ़ रहने की प्रेरणा दी।समुद्र मंथन और वामन अवतार का मनोहारी प्रसंग कथा में समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए देवताओं और असुरों द्वारा किए गए मंथन तथा उससे प्राप्त विभिन्न दिव्य रत्नों का वर्णन किया गया। इसके बाद भगवान वामन के अवतार और राजा बलि के प्रसंग को प्रस्तुत करते हुए साध्वी जी ने बताया कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेते हुए भी अंतत: उनका कल्याण करते हैं। वामन अवतार का संदेश त्याग, विनम्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण का है। श्रीराम अवतार से श्रीकृष्ण प्राकट्य तक भक्तिरस श्रीराम अवतार की कथा के माध्यम से मयार्दा, सत्य और धर्म के आदर्शों को उजागर किया गया। इसके बाद जब श्रीकृष्ण प्राकट्य का प्रसंग आया तो पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। श्रीकृष्ण जन्म की सजीव झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ ही भक्तों ने उल्लासपूर्वक नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भजनों एवं जयघोषों के साथ वातावरण को कृष्णमय बना दिया। श्रीकृष्ण प्राकट्य के बाद नंदोत्सव का मनोहारी प्रसंग प्रस्तुत किया गया। साध्वी गोपिका जी ने अपने सुमधुर एवं मनमोहक भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भक्ति संगीत, कथा प्रसंग और सजीव झांकियों के समन्वय से मंदिर परिसर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।इस अवसर पर श्री राधा रानी श्यामा जी का आकर्षक जड़ित आभूषणों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। कथा के अंत में सामूहिक आरती हुई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के पंचम दिवस श्रीकृष्ण बाल लीला, माखन चोरी लीला, दामोदर लीला एवं गौचारण लीला के प्रसंग सुनाए जाएंगे। कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक हो रही है। इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, संजीव विजयवर्गीय, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडेय, मनीष सोनी, विष्णु सोनी, पवन अग्रवाल, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, पवन पोद्दार, संजय सर्राफ, विद्या देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, सुनीता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शीला मुरारका, शकुंतला केजरीवाल, सरिता अग्रवाल, सुमन चौधरी, आशा मुंजाल, रामादेवी डोकानिया, अमिता जालान, दीपिका मोतीका, नीलम गोयल, नंद रानी पाठक, आशा सिंह, उषा देवी, ललिता पोद्दार, किरण पोद्दार, ललिता अग्रवाल, भगवती देवी, लाल देवी, सुनीता देवी, आशा मिश्रा, किरण बरनवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे।
रांची के आसपास के क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश से सभी फॉल और डैम उफान पर, पर्यटकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी टीम एबीएन, रांची। रांची और आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जोन्हा, हुंडरू, दशम फॉल एवं सीता फॉल, रिमिक्स फॉल एवं अन्य सभी जलप्रपातों (डैम) में उफान पर है, जिसको लेकर पर्यटकों के लिए सुरक्षा चेतावनी, जलप्रपात अपनी पूर्ण उफान पर हैं। इन जलप्रपातों में जलधारा की प्रबल गति और चट्टानों से टकराने वाली धाराएं प्रकृति की अपार शक्ति का प्रदर्शन कर रही हैं। हालांकि यह दृश्य आकर्षक और मनोरम है, लेकिन यह अत्यंत खतरनाक भी है। एक छोटी सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है। वर्तमान में जलप्रपातों के आसपास का क्षेत्र घूमने जाने के समय सावधानी रखें जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने पर्यटकों, आगंतुकों और स्थानीय लोगों से जोन्हा और हुंडरू जलप्रपातों के आसपास के क्षेत्रों में जाने पर अतिसावधानी बरतने की अपील की है। वर्तमान में जलप्रपातों के आसपास का क्षेत्र अत्यंत जोखिम भरा है। तेज जलधारा, फिसलन भरी चट्टानें और अचानक जलस्तर बढ़ने की संभावना पर्यटकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। जिला प्रशासन की ओर से सुझाव पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अनुरोध है कि वे जलप्रपातों के पास न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें। स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें। मौसम और जलप्रपातों की स्थिति के बारे में स्थानीय समाचारों और प्रशासनिक सूचनाओं पर नजर रखें। जलप्रपातों जैसे जोखिम भरे क्षेत्रों से दूर रहें अत्यधिक बारिश के समय डैम में बोटिंग बिल्कुल न करें। नशा-पान करके जल-प्रपात न घूमे एवं नशा पान करके बोटिंग न करें। पर्यटन विभाग के सभी अनुदेशों का पालन करें तथा पर्यटक मित्र की बात को ध्यान से सुनें और मानें।
टीम एबीएन, रांची। श्याम मंडल, रांची द्वारा अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में आज दिनांक 23 सितंबर 2026 को खाटू नरेश श्याम बाबा को चांदन द्वादशी के पावन अवसर पर संध्या 4:30 बजे श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया गया। आज के भोग के मुख्य यजमान शिव कटारुका ने अपने पूरे परिवार के साथ श्याम बाबा को खीर चूरमा का भोग अर्पित किया जिसमें मीना कटारूका, सिद्धार्थ कटारुका एवं इशिका कटारुका शामिल थे। सर्वप्रथम मंडल के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश बागला, मंत्री धीरज बंका एवं यजमान द्वारा गणेश पूजन कर मंदिर में विराजे वीर बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी पूजन कर विभिन्न प्रकार के फल एवं मिष्ठान अर्पित कर श्री श्याम प्रभु को खीर चूरमे का भोग अर्पित किया। इस अवसर पर पूरा मन्दिर परिसर हारे के सहारे की जय - लखदातार की जय जयकारों के गूंज उठा। द्वाशी के दिन श्री श्याम प्रभु का प्रिय भोग खीर चूरमा को लेने भक्तगण कतारबद्ध होकर प्राप्त कर रहे थे साथ ही श्री श्याम मण्डल के कार्यकर्ता आए हुए भक्तजनों को शुद्ध पिय जल का वितरण कर रहे थे तथा उनके चरण पादुका को रखने की उत्तम व्यवस्था बना हुआ था। आज के खीर चूरमा का भोग श्री श्याम मंदिर में ही निर्मित किया गया तथा 700 से ज्यादा भक्तजनों प्रसाद प्राप्त किया। आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रदीप अग्रवाल, जितेश अग्रवाल, गोपु सारस्वत, बालकिशन परसरामपुरिया, सर्वेश बागला, विवेक ढांढनीयां का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन मार्ग रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
देशभर से जुटेंगे मंच के सदस्य, चार दिवसीय आयोजन में होगा मारवाड़ महोत्सव नये राष्ट्रीय अध्यक्ष का होगा चुनाव, बिरसा मुंडा की धरती पर दूसरी बार आयोजित होगा राष्ट्रीय अधिवेशन टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के राष्ट्रीय नेतृत्व में दिसंबर माह में आयोजित होने वाला कारवां 2.0 राष्ट्रीय अधिवेशन इस बार मारवाड़ी युवा मंच, रांची शाखा के आतिथ्य में आयोजित किया जायेगा। चार दिवसीय इस राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर की विभिन्न शाखाओं से मंच के सदस्य एवं पदाधिकारी रांची पहुंचेंगे। राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी होगा। देशभर से आए प्रतिनिधि इस चुनावी प्रक्रिया में भाग लेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के कारण यह अधिवेशन संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहेगा। चैम्बर भवन में हुई प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश एम जैन ने कहा कि वर्ष 2008 में मंच के सानिध्य में कारवां का ऐतिहासिक आयोजन हुआ था। बिरसा मुंडा की पावन धरती रांची पर यह दूसरी बार होगा जब अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। इससे झारखंड एवं रांची के लिए इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह भी कहा कि अधिवेशन के दौरान झारखंड की समृद्ध संस्कृति और मारवाड़ी समाज की गौरवशाली परंपराओं को देशभर के प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से विभिन्न सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। आयोजन का प्रमुख आकर्षण मारवाड़ महोत्सव रहेगा, जिसमें मारवाड़ी संस्कृति, परंपरा, कला, लोकाचार एवं खान-पान की विशेष झलक देखने को मिलेगी। चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न सत्रों, सामाजिक गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं अन्य विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले मंच के सदस्यों के माध्यम से रांची को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी संस्कृति, आतिथ्य एवं सामाजिक विरासत प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। मंच के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि देशभर में हमारी 8000 शाखाएं समाज सेवा के कार्य में संलग्न हैं। समाज की युवा पीढ़ी सामाजिक कार्य करते हुए देश निर्माण में अपना योगदान दें इस उद्देश्य से युवा मंच कार्यरत है। अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच ऐसा विश्वविद्यालय है जो आनेवाली पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के लिए तैयार करता है। मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष विशाल पाडिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे राष्ट्र में झारखंड प्रांत हर क्षेत्रों में अव्वल प्रयास कर रहा है। झारखंड प्रांत को इस ऐतिहासिक अधिवेशन का आतिथ्य मिलना गौरव की बात है। इस आयोजन को भव्य रूप से आयोजित किया जायेगा। कारवां 2.0 राष्ट्रीय अधिवेशन में लगभग 3,000 सदस्यों एवं प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजन को भव्य एवं यादगार बनाने के लिए मारवाड़ी युवा मंच रांची शाखा एवं झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी युवा मंच द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं। उक्त जानकारी मंच के प्रांतीय संयोजक अमित शर्मा ने देते हुए कहा कि कारवां 2.0 केवल एक राष्ट्रीय अधिवेशन नहीं, बल्कि देशभर के मारवाड़ी युवा मंच के सदस्यों के बीच संवाद, संगठनात्मक सहभागिता, सामाजिक सरोकार और सांस्कृतिक जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। रांची में होने वाला यह आयोजन झारखंड की मेहमाननवाजी और मारवाड़ी समाज की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा। साथ ही उन्होंने इस आयोजन में समाज के सभी वर्ग के लोगों से बढ़ चढ़कर शामिल होने की अपील की।प्रेस वार्ता के दौरान अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राहुल अग्रवाल, हेल्थ साथी चेयरमैन ललित जैन, झारखंड प्रांत के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष विनय अग्रवाल, विशेष आमंत्रित सदस्य अर्जुन सिंघानिया, मोनिका गोयनका, विनीता सिंघानिया, रांची शाखा के अध्यक्ष विकास अग्रवाल, सचिव मुकेश शर्मा और कोषाध्यक्ष अनीश सरावगी, उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रांतीय संयोजक अमित शर्मा ने दी।
श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में उमड़ा श्रद्धासागर भगवान का स्मरण और सत्संग मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का करता है संचार : गोपिका जी एबीएन सोशल डेस्क। डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में एमआरएस श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का सुंदर संगम देखने को मिला। वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी ने व्यास पीठ से ध्रुव चरित्र, जड़ भरत, भारतवर्ष की महिमा तथा अजामिल कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।साध्वी गोपिका जी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि बालक ध्रुव ने अपमान और प्रतिकूल परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। दृढ़ संकल्प, तपस्या और भगवान श्रीहरि के प्रति अटूट भक्ति के बल पर उन्होंने परम पद प्राप्त किया। ध्रुव चरित्र यह संदेश देता है कि सच्ची निष्ठा और दृढ़ संकल्प के सामने कठिन परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन सकतीं। जड़ भरत प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से सावधान रहते हुए परमात्मा की प्राप्ति को जीवन का लक्ष्य बनाना चाहिए। इसके बाद भारतवर्ष की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि यह भूमि ऋषियों, संतों और भक्तों की तपोभूमि रही है। मानव जीवन को दुर्लभ बताते हुए उन्होंने धर्म, सत्कर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। अजामिल प्रसंग के माध्यम से साध्वी गोपिका जी ने भगवान के नाम-स्मरण की महिमा बतायी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवनभर सदाचार एवं भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए। कथा प्रसंग यह प्रेरणा देता है कि भगवान का स्मरण और सत्संग मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। कथा के दौरान साध्वी गोपिका जी ने श्री राधा रानी एवं श्रीकृष्ण के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे एवं श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। इस अवसर पर श्री राधा रानी श्यामा जी का मोतियों से जड़ित आभूषणों से मनोहारी श्रृंगार किया गया। कथा प्रारंभ होने से पूर्व साध्वी गोपिका जी ने कृष्ण प्रणामी महिला समिति के सदस्यों के साथ मंदिर परिसर स्थित प्रणामी गौ सेवा धाम पहुंचकर गौसेवा की। उन्होंने गायों को गुड़-रोटी एवं चारा खिलाया और गौसेवा का महत्व बताया। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गयी तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण हुआ। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कथा के चतुर्थ दिवस प्रह्लाद चरित्र, समुद्र मंथन, वामन अवतार, श्रीराम अवतार, श्रीकृष्ण प्राकट्य एवं नंदोत्सव प्रसंग सुनाए जाएंगे। कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक हो रही है। इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल,शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडेय, मनीष सोनी, विष्णु सोनी,पवन अग्रवाल, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, पवन पोद्दार, संजय सर्राफ, विद्या देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, सुनीता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शीला मुरारका, शकुंतला केजरीवाल, सरिता अग्रवाल, सुमन चौधरी आशा मुंजाल, रामादेवी डोकानिया, अमिता जालान, दीपिका मोतीका, नीलम गोयल, नंद रानी पाठक, आशा सिंह, उषा देवी, ललिता पोद्दार, किरण पोद्दार, ललिता अग्रवाल, भगवती देवी, लाल देवी, सुनीता देवी, आशा मिश्रा, किरण बरनवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे।
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में निराश्रितों को कराया गया भोजनजरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में एम.आर.एस.श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट रांची के द्वारा संचालित विगत 33 माह से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम रांची पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) में रह रहे 45 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा मे समर्पित सेवादारों को प्रतिदिन तीनों समय विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन बनवाकर भोजन खिलाया जा रहा है।सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 23 अगस्त से 22 सितंबर तक 31 दिनों में लगभग 6700 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादारों को भोजन कराया गया। उन्होंने बताया कि आश्रम के रसोई घर में पूरी स्वच्छता एवं सात्विकता के साथ विभिन्न प्रकार के पौष्टिक व्यंजन तैयार किया जाते हैं। प्रत्येक निराश्रित प्रभुजन को सम्मान पूर्वक, स्नेह और आत्मीयता के साथ भोजन कराया जाता है। इस सेवा में कई लोगों ने सहयोग देते हुए स्वयं भोजन सेवा का दायित्व निभाया, इसके अलावे कई लोगों द्वारा आश्रम में रह रहे निराश्रितो, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं के लिए खाद्य सामग्री एवं जरूरत के समान प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इस आश्रम में सत्यनारायण पोद्दार चैरिटेबल ट्रस्ट, बाबूलाल प्रेमसंस ग्रुप का पूर्ण सहयोग निरंतर मिलता है। उन्होंने कहा कि मानव प्रभु सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। जरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची अराधना है। अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में चैरिटेबल ट्रस्ट के निदेशक पंकज पोद्दार, कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ,शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नन्द किशोर चौधरी, मनीष साहू, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, अंजनी अग्रवाल, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, अरविंद अग्रवाल,सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
करमा पूर्व संध्या पर झारखंड में दिखी लोक संस्कृति की रंगत टीम एबीएन, रांची। प्रकृति और संस्कृति के महापर्व करमा की पूर्व संध्या पर सोमवार को झारखंड के विभिन्न हिस्सों में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। रांची समेत राज्य के कई स्थानों पर अखरा, कॉलेजों और सांस्कृतिक मंचों को विशेष रूप से सजाया गया। देर शाम तक ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप पर पारंपरिक नृत्य-गान का दौर चलता रहा। 22 सितंबर को मुख्य करम पूजा मनायी जायेगी। करमा पूर्व संध्या के कार्यक्रमों में झारखंड की समृद्ध लोक और जनजातीय संस्कृति की झलक देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों और छात्र-छात्राओं ने मांदर, ढोल और बांसुरी की धुन पर सामूहिक करमा नृत्य की प्रस्तुति दी। गीत-संगीत और नृत्य के बीच पूरा माहौल उत्सवमय नजर आया। कार्यक्रमों में कुड़ुख, मुंडारी, हो, संथाली, नागपुरी और खोरठा सहित विभिन्न क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं में पारंपरिक करम गीत प्रस्तुत किये गये। इन गीतों के जरिए प्रकृति, सामाजिक परंपराओं और भाई-बहन के रिश्ते से जुड़े भावों को अभिव्यक्त किया गया। युवा पीढ़ी ने भी पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में हिस्सा लिया।
भजनों से भक्तिमय हुआ श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर, महिला समिति ने आश्रम में निराश्रितों को कराया भोजन मनुष्य को परमात्मा की भक्ति और सत्य के मार्ग को अपनाना चाहिए : गोपिका टीम एबीएन, रांची। डॉ संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा पुंदाग स्थित श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर में श्री राधाष्टमी महोत्सव के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस श्रद्धा एवं भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। वृंदावन की सुप्रसिद्ध कथा वाचिका साध्वी गोपिका जी ने व्यास पीठ से मंगलाचरण के माध्यम से कथा का शुभारंभ करते हुए श्रीमद्भागवत के सार तथा व्यास श्री सुखदेव जी के जन्म प्रसंग की विस्तृत एवं भावपूर्ण कथा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, भक्ति, सदाचार और आत्मज्ञान की दिशा प्रदान करने वाला दिव्य ग्रंथ है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, विवेक और वैराग्य का भाव जागृत होता है। साध्वी गोपिका जी ने सुखदेव जी के जन्म प्रसंग के माध्यम से बताया कि संसार में रहते हुए भी मनुष्य को मोह-माया से ऊपर उठकर परमात्मा की भक्ति और सत्य के मार्ग को अपनाना चाहिए। सुखदेव जी जन्म से ही ब्रह्मज्ञानी एवं वैराग्य भाव से संपन्न थे। उनके जीवन का प्रसंग यह संदेश देता है कि वास्तविक ज्ञान वही है, जो मनुष्य को अहंकार, मोह और सांसारिक बंधनों से मुक्त कर परमात्मा के चरणों की ओर ले जाए। कथा के मध्य साध्वी गोपिका जी ने श्री राधा रानी एवं श्रीकृष्ण के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भजनों के दौरान पूरा मंदिर परिसर राधे-राधे और श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आये। इस अवसर पर श्री राधा रानी श्यामा जी का आभूषणों से अलौकिक एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। कथा के समापन पर सामूहिक आरती की गयी तथा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। श्रीमद् भागवत कथा के अवसर पर श्री कृष्ण प्रणामी महिला समिति द्वारा सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम में रह रहे निराश्रित प्रभु जनों को भोजन कराया गया। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि तृतीय दिवस की कथा में ध्रुव चरित्र,जड़ भारत, भारत वर्ष की महिमा, अजामिल कथा प्रसंग पर प्रस्तुति होगी। कथा प्रतिदिन अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित हो रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा में शामिल होकर श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेश का लाभ लेने का आग्रह किया। इस अवसर पर डूंगरमल अग्रवाल, विजय अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया, नंदकिशोर चौधरी, अरविंद अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल, विशाल जालान, पुजारी अरविंद पांडेय, मनीष सोनी, विष्णु सोनी,पवन अग्रवाल, सुरेश भगत, ज्ञान प्रकाश शर्मा, पवन पोद्दार, संजय सर्राफ, विद्या देवी अग्रवाल, उर्मिला पाड़िया, सुनीता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शीला मुरारका, शकुंतला केजरीवाल, सरिता अग्रवाल, सुमन चौधरी आशा मुंजाल, रामादेवी डोकानिया, अमिता जालान, दीपिका मोतीका, नीलम गोयल, नंद रानी पाठक, आशा सिंह, उषा देवी, ललिता पोद्दार, किरण पोद्दार, ललिता अग्रवाल, भगवती देवी, लाल देवी, सुनीता देवी, आशा मिश्रा, किरण बरनवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे।
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