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नौ को भक्ति और उल्लास से सजेगा सावन सिंधारा उत्सव
Published / 2026-07-27 23:18:02
नौ को भक्ति और उल्लास से सजेगा सावन सिंधारा उत्सव

नौ को भक्ति और उल्लास से सजेगा सावन सिंधारा उत्सवजीण माता प्रचार समिति ने किया पोस्टर का विमोचनटीम एबीएन, रांची। श्री जीण माता प्रचार समिति, रांची द्वारा सावन माह के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य सावन सिंधारा उत्सव की तैयारियां उत्साहपूर्वक प्रारंभ हो गयी हैं। इसी क्रम में 9 अगस्त 2026 को मारवाड़ी भवन, हरमू रोड, रांची में आयोजित होने वाले उत्सव के पोस्टर का विधिवत विमोचन सोमवार, 27 जुलाई को प्रात: 10:30 बजे स्थानीय मारवाड़ी भवन में किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष का सिंधारा उत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक वैभव एवं भक्तिभाव का अनुपम संगम होगा। कार्यक्रम में गुजरात की सुप्रसिद्ध भजन गायिका दीदी आशा वैष्णव तथा पुरुलिया की प्रसिद्ध भजन गायिका दीदी शीतल कटारुका अपनी मधुर एवं भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर करेंगी। आयोजन स्थल पर आकर्षक धार्मिक वातावरण का निर्माण किया जायेगा, जिससे श्रद्धालु सावन की आध्यात्मिक अनुभूति का आनंद ले सकें। समिति ने बताया कि इस वर्ष मां श्री जीण भवानी के सिंधारा उत्सव को विशेष एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया जायेगा। उत्सव के दौरान मां की चौसठ योगिनी का मनोहारी एवं दिव्य स्वरूप प्रस्तुत किया जायेगा। इसके साथ ही विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। पोस्टर विमोचन एवं आयोजित बैठक में समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल, उपाध्यक्ष विजय पालड़ीवाल, सचिव नारायण विजयवर्गीय, कोषाध्यक्ष बजरंग सोमानी, सह सचिव प्रदीप शर्मा, संदीप विजयवर्गीय, संदीप शर्मा, कृष्णा अग्रवाल, पवन अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, सुनीता मित्तल, कविता सोमानी, शीतल अग्रवाल तथा नेहा सिंघानिया सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित उत्सव में भाग लेकर मां जीण भवानी का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया। उक्त जानकारी श्री जीण माता प्रचार समिति रांची के सचिव नारायण विजयवर्गीय (7543801778) ने दी।

रांची : पहाड़ी मंदिर में सावन की तैयारी को लेकर हिंदू जागृत मंच ने बनायी रणनीति
Published / 2026-07-27 19:11:07
रांची : पहाड़ी मंदिर में सावन की तैयारी को लेकर हिंदू जागृत मंच ने बनायी रणनीति

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 27 जुलाई दिन सोमवार को हिंदू जागृत मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक पहाड़ी मंदिर में सावन की तैयारी एवं सहायता शिविर लगाने को लेकर आयोजित की गयी। बैठक में तय किया गया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पहाड़ी मंदिर के मुख्य द्वारा पर मंच द्वारा सहायता शिविर लगाया जायेगा। जिसके लिए प्रभारी अर्पित सिंह एवं सुरेंद्र यादव को बनाया गया। इस कार्य के लिए सहयोग समिति भी बनायी गयी, जिसमें अमरजीत कुमार, धनंजय चंद्रवंशी, नितिन ओझा, चंदन सिंह, कन्हैया शाह, गौतम बर्मन, अभिजीत मिश्रा, कपिल गोप को जिम्मेदारी दी गयी। बैठक के उपरांत मंच की टीम ने वासन की तैयारी को देखते हुए पहाड़ी मंदिर का निरीक्षण किया निरीक्षण में पाया गया कि मंदिर परिसर में शौचालय की सही व्यवस्था नहीं है। एक है भी तो जंगल के बीच में जहां न तो लाइट है और न हीं पानी अंधेरा होने की वजह से सांप बिच्छू का भी खतरा है। पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। काली मंदिर के बगल में शेड टूटा हुआ है। भीड़ में किसी भक्त को चोट लग सकती है। दूसरे शहर या राज्य से जल चढ़ाने आने वाले कांवरियों जो कि रविवार की रात को आते हैं और सुबह जल चढ़ाते हैं उनके रुकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें बारिश में मंदिर के बाहर खुले में रात बितानी होगी। इसके लिए व्यवस्था आवश्यक है। मंदिर के सामने मुख्य सड़क कई जगह पर काफी क्षतिग्रस्त है, जिसके कारण प्रतिदिन वहां कोई न कोई गाड़ी सवार गिरता है। सावन में लाखों की भीड़ में बड़ी दुर्घटना हो सकती है, इसका तत्काल मरम्मत आवश्यक है। इन सब कमियों को ठीक करने के लिए मंच भी रांची के डीसी, एसडीओ, नगर आयुक्त निगम के मेयर और डिप्टी मेयर को आवेदन दिया जायेगा। आज की इस बैठक में सुजीत सिंह, निशांत यादव, चंदन मिश्रा, विपुल मिश्रा, रंजय वर्मा, अजय जयसवाल, रवि सिन्हा, विकास सिंह, शशिकांत मिश्रा, अमित अग्रवाल, सुनील वर्णवाल, ऋषभ सिंह, वेद सिंह, अनीश वर्मा, उजाला केसरी, अनीश केसरी, अभिषेक मिश्रा, सुमित सोनी, चंदन सिंह, गौतम पोद्दार, सुरेंद्र यादव, कन्हैया शाह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को
Published / 2026-07-27 19:00:42
गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को

गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा,ज्ञान और संस्कार का महापर्व : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का विशेष स्थान है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई दिन बुधवार को मनायी जायेगी। यह दिन ज्ञान, संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और गुरु के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। भारतीय परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है। इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने चारों वेदों का संकलन, अठारह पुराणों की रचना तथा महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना कर मानव समाज को अमूल्य ज्ञान प्रदान किया। इसलिए इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। देशभर के आश्रमों, गुरुकुलों, विद्यालयों और धार्मिक संस्थानों में महर्षि वेदव्यास तथा अपने-अपने गुरुओं का पूजन कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत प्रतीक है। जीवन में शिक्षक, माता-पिता, आध्यात्मिक गुरु तथा वे सभी व्यक्ति गुरु के समान हैं, जो हमें सही मार्ग दिखाते हैं। गुरु व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, उसमें नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं तथा उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही मनुष्य ज्ञान, विवेक, अनुशासन और सफलता प्राप्त करता है। इस पर्व का प्रमुख उद्देश्य गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करना है। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है और सच्चा ज्ञान केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन से ही प्राप्त होता है। गुरु पूर्णिमा आत्ममंथन, आत्मशुद्धि तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का भी अवसर प्रदान करती है। इस दिन अनेक श्रद्धालु अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं, सत्संग, ध्यान, योग, भजन-कीर्तन तथा सेवा कार्यों में भाग लेते हैं। आज के आधुनिक और तकनीकी युग में भी गुरु का महत्व पहले की तरह ही बना हुआ है। शिक्षा, विज्ञान, कला, साहित्य, समाज और आध्यात्मिक जीवन-हर क्षेत्र में गुरु का मार्गदर्शन सफलता की आधारशिला है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी प्रदान करते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में कहा गया है-गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर:। गुरु पूर्णिमा हमें यह प्रेरणा देती है कि हम अपने गुरुओं के प्रति सदैव सम्मान, आस्था और कृतज्ञता बनाये रखें तथा उनके बताए आदर्शों और मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दें। यही इस पावन पर्व का वास्तविक महत्व और संदेश है।

276वें अन्नपूर्णा सेवा में उमड़ा आस्था का सागर, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
Published / 2026-07-26 20:36:48
276वें अन्नपूर्णा सेवा में उमड़ा आस्था का सागर, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद

276वें अन्नपूर्णा सेवा में उमड़ा आस्था का सागर, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसादअन्नपूर्णा मैया की महिमा जग में सबसे न्यारी..राधे राधे बोल मनवा, राधे राधे बोल, राधा नाम अमृत है प्यारा..टीम एबीएन, रांची। परम पूज्य डॉ. संत शिरोमणि स्वामी सदानंद महाराज जी के पावन सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम मंदिर एवं श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर एव श्री राधा-कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में रविवार को 276 वें श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का भव्य एवं श्रद्धामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर संपूर्ण मंदिर परिसर भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण से सराबोर रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया तथा महाप्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया। कार्यक्रम के दौरान भगवानश्री राधा-कृष्ण का दिव्य श्रृंगार किया गया।विशेष रूप से श्री राधारानी को आकर्षक एवं मनोहारी आभूषणों तथा पुष्पों से अलंकृत किया गया।जिसकी भव्यता ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे दिन श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर जारी रहा।दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडेय द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ भगवान को महाप्रसाद अर्पित किया गया। पूजा-अर्चना के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ। महाप्रसाद में मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, ताजगी से भरपूर मैंगो शरबत,  एवं आलू चिप्स का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित लगभग दो हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक महाप्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के सुप्रसिद्ध भजन गायक मनीष सोनी ने अपने मधुर कंठ से एक से बढ़कर एक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी। उनके गाए भजनों- राधे-राधे बोल मनवा, राधे-राधे बोल,राधा नाम अमृत है प्यारा, जीवन कर दे अनमोल.. बारस के दिन राधे-कृष्ण की ज्योति जले, हर मन मंदिर में,प्रेम,दया और सेवा बरसे, जन-जन के अंतर में.. की मधुर स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा वातावरण राधा-कृष्ण की भक्ति में डूब गया। भजन-संध्या के उपरांत सामूहिक महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक स्वर में प्रभु का गुणगान कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि सुबह से लेकर देर शाम तक पांच हजार से अधिकश्रद्धालुओं ने भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि मंदिर में प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक अन्नपूर्णा सेवा के अंतर्गत वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है, जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। यह सेवा मानवता, परोपकार और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सुदृढ़ करने का एक निरंतर प्रयास है। इस अवसर पर- डूंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल,मनोज चौधरी, सज्जन पाड़िया, पूरणमल सर्राफ, सुरेश अग्रवाल, शिवभगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदीया संजय सर्राफ, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार,सुरेश भगत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ट्रस्ट सदस्य उपस्थित रहे।

वन बंधु परिषद का रांची चैप्टर बना देश का वाइब्रेंट चैप्टर
Published / 2026-07-24 17:19:42
वन बंधु परिषद का रांची चैप्टर बना देश का वाइब्रेंट चैप्टर

वन बंधु परिषद का रांची चैप्टर बना देश का वाइब्रेंट चैप्टरटीम एबीएन, रांची। ​​​​​वन बंधु परिषद के रांची चैप्टर के अध्यक्ष अंचल किंगर ने बताया कि रायपुर में आयोजित नेशनल कॉन्फ्रेंस में वन बंधु परिषद  (एफ टी एस) रांची चैप्टर को देश का वाईब्रेंट चैप्टर का अवॉर्ड मिला। रायपुर में वन बंधु परिषद का नेशनल कांफ्रेंस कान्हा आनन्द वनम में आयोजित हुआ।तीन दिवसीय नेशनल कांफ्रेंस में पूरे देश से वन बंधु परिषद के सदस्यों ने भाग लिया। इस राष्ट्रीय अधिवेशन की अध्यक्षता वनबंधु परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश माहेश्वरी ने की।रायपुर के इस अधिवेशन में पदम भूषण दा जी,स्वामी विज्ञानंद्ध जी एवं केंद्रीय कोयला मंत्री शडॉ जी शेट्टी भी शामिल हुए एवं पूरे देश से आए प्रतिनिधियों को संबोधित किया।इस कांफ्रेंस में वन बंधु परिषद के अगले वर्ष के कार्यों की रूपरेखा बनी एवं पिछले वर्षों के कार्यों की समीक्षा हुई इस नेशनल कांफ्रेंस में एफसीएस के बड़े दानदाताओं को भी सम्मानित किया गया और उन्हें दानदाता से सहयोगी बनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। रांची से रमेश धारणीधरका एवं नरेश केजरीवाल को सम्मानित किया गया।इस राष्ट्रीय कांफ्रेंस में रांची से रेखा जैन, रमेश धरणीधरका, अंचल किंगर अजयदीप वाधवा, उत्सव पाराशर, विशेष केडिया, अभिनव मित्तल शामिल हुए थे। उक्त जानकारी संगठन के अंचल किंगर (9234609126) ने दी।

हुटूप गौशाला धाम : गोसेवा, संरक्षण और सामाजिक सहयोग का प्रेरणादायी केंद्र
Published / 2026-07-24 16:34:31
हुटूप गौशाला धाम : गोसेवा, संरक्षण और सामाजिक सहयोग का प्रेरणादायी केंद्र

हुटूप गौशाला धाम : गोसेवा, संरक्षण और सामाजिक सहयोग का प्रेरणादायी केंद्रएबीएन सोशल डेस्क। रांची की गौशाला न्यास समिति द्वारा संचालित हुटूप गौशाला धाम आज केवल गोवंश के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुका है। एक शताब्दी से भी अधिक पुरानी गोसेवा की इस परंपरा ने समाज के सहयोग से ऐसा स्वरूप ग्रहण किया है, जो प्रत्येक गोभक्त के लिए प्रेरणा का विषय है। गौशाला न्यास समिति के संचालन का शुभारंभ वर्ष 1904 में हुआ। समय के साथ गोवंश की संख्या में निरंतर वृद्धि होने लगी। ऐसी स्थिति में वृद्ध, लाचार एवं दूध न देने वाली गायों के संरक्षण के लिए वर्ष 1966 में हुटूप गौशाला की स्थापना की गई। इस पवित्र कार्य के लिए समाजसेवी श्री नारायण साबू ने अपनी भूमि का एक हिस्सा अनुदान स्वरूप प्रदान किया, जिसने इस गौधाम की मजबूत आधारशिला रखी। इसके बाद अनेक दानदाताओं, गोभक्तों एवं समाजसेवियों के सहयोग से गौशाला का निरंतर विस्तार होता गया। आज हुटूप गौशाला लगभग 76 एकड़ के विशाल परिसर में विकसित हो चुकी है। प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह गौधाम वर्तमान में लगभग 350 गोवंश का विधिवत पालन-पोषण कर रहा है। यहाँ विशेष रूप से दूध न देने वाली, वृद्ध, बीमार, असहाय तथा प्रशासन द्वारा पकड़े गए निराश्रित गोवंश की सेवा एवं संरक्षण किया जाता है।रांची गौशाला न्यास समिति की तीन प्रमुख इकाइयाँ संचालित हैं-रांची गौशाला (हरमू रोड), सुकुरहुटू गौशाला (कांके) तथा हुटूप गौशाला (ओरमांझी)। इन तीनों केंद्रों के माध्यम से गोसेवा का व्यापक कार्य निरंतर संचालित किया जा रहा है। कुछ वर्ष पूर्व तक हुटूप गौशाला अनेक मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही थी। गोवंश के लिए पर्याप्त गौहाल नहीं थे तथा पानी की भी भारी समस्या थी। किंतु पिछले दो वर्षों में समाज के विभिन्न वर्गों, दानदाताओं एवं गोभक्तों के सहयोग से यहाँ उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला है। नए गौहालों का निर्माण, परिसर का सुंदरीकरण, व्यापक वृक्षारोपण, कृषि कार्य तथा जल संकट दूर करने के लिए बोरिंग की व्यवस्था जैसी अनेक विकास योजनाओं ने गौधाम का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया है।आज यह गौधाम केवल गोवंश का आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति का केंद्र भी बन गया है। प्रतिदिन अनेक श्रद्धालु यहाँ पहुँचकर गौ माता की सेवा करते हैं, उन्हें भोग अर्पित करते हैं तथा प्राकृतिक वातावरण में आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं। लोग अपने विवाह की वर्षगांठ, बच्चों के जन्मदिन तथा अन्य शुभ एवं मांगलिक अवसरों पर यहाँ आकर गौपूजन करते हैं और गौ माता से सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भारतीय संस्कृति में गौ माता को अत्यंत पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि गौ माता में 56 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए गौसेवा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और प्रकृति संरक्षण का भी श्रेष्ठ माध्यम है। गौधाम के संचालन एवं व्यवस्थापन का दायित्व गौशाला न्यास समिति द्वारा श्री वासुदेव भाला एवं श्री मुकेश काबरा को सौंपा गया है। उनके मार्गदर्शन में अनेक गोभक्त मिलकर गौधाम के विकास और गोसेवा के कार्य को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। गौशाला के विकास में रांची के सांसद एवं केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ,राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं दानदाताओं का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उनके सहयोग से गौहाल निर्माण सहित अनेक विकास कार्य निरंतर जारी हैं कृषि के क्षेत्र में लगातार विकास जारी है।वर्तमान में गौशाला न्यास समिति के अध्यक्ष श्री पुनीत पोद्दार एवं सचिव श्री प्रदीप राजगढ़िया है। गौशाला की तीनों इकाइयों में गोवंश के लिए हरे चारे का उत्पादन किया जाता है। इसके अतिरिक्त आम, लीची सहित अनेक फलदार वृक्ष तथा विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती भी की जा रही है।जिनका लाभ प्रत्येक वर्ष गौधाम एवं श्रद्धालुओं को प्राप्त होता है।भविष्य में गौशाला परिसर में बच्चों के लिए पार्क, आध्यात्मिक स्थल, तालाब निर्माण तथा औषधीय एवं जड़ी-बूटी आधारित खेती जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएँ प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं के पूर्ण होने से हुटूप गौशाला धाम गोसंरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक कृषि एवं आध्यात्मिक पर्यटन का एक आदर्श केंद्र बनकर उभरेगा।निस्संदेह, हुटूप गौशाला धाम यह संदेश देता है कि जब समाज सेवा, श्रद्धा और सहयोग एक साथ जुड़ते हैं, तब किसी भी पुण्य कार्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। गौ माता की सेवा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और इस पवित्र अभियान में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बन सकती है। उक्त जानकारी मुकेश काबरा (+91 93344 59081) ne दी। 

56वीं कांवर यात्रा 25 जुलाई को
Published / 2026-07-23 17:25:05
56वीं कांवर यात्रा 25 जुलाई को

56वीं कांवर यात्रा 25 जुलाई कोटीम एबीएन, रांची। श्री सरस सत्संग मंडल द्वारा 56 वीं कांवर यात्रा 25 जुलाई को राँची गोड्डा एक्सप्रेस से दोपहर 2:30 बजे सुल्तान गंज के लिए प्रस्थान करेगी। इसके पूर्व 24 जुलाई को रात्री 8 बजे से भगवान दास काबरा के पिंजरा पोल स्थित आवास में भजन संध्या के साथ बाबा का जागरण किया जायेगा। मंडल के संयोजिका राजकुमारी काबरा के नेतृत्व में 131 कांवरियो की जत्था प्रस्थान करेगी , जिसमें 31 महिला कांवरियां एवं 100 पुरुष कावरियों की जत्था उपस्थित रहेंगे। सर्वप्रथम श्री पहाड़ी बाबा की पूजन श्रृंगार आरती दोपहर 12 बजे होगी। जत्था कावरियां सुल्तान गंज से जल भरकर पूरे रास्ते भक्तिमय भजन कीर्तन मदन सोनी एवं उनके टीम द्वारा की जायेगी। इस कांवरिया में विशेष रुप से राजकुमारी कावरा, उदय शर्मा, गोकुल काबरा, राहुल अग्रवाल, गोविंद अग्रवाल, विनीता चांडक, राधिका काबरा, कृष्णा काबरा एवं सीमा अग्रवाल एवं अन्य लोग शामिल होंगे। यह जानकारी मंडल के उदय चौधरी ने दी। 

ढाई सौ लोगों का जत्था बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी के लिए करेगी कूच : रंगनाथ महतो
Published / 2026-07-23 17:13:22
ढाई सौ लोगों का जत्था बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी के लिए करेगी कूच : रंगनाथ महतो

ढाई सौ लोगों का जत्था बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी के लिए करेगी कूच : रंगनाथ महतोटीम एबीएन, रांची। बजरंग दल के केंद्रीय योजनानुसार झारखंड से आगामी 18 अगस्त 2026 को जम्मू कश्मीर के पूंछ जिला अंतर्गत श्री बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी की यात्रा हेतु संबलपुर जम्मूतवी एक्सप्रेस से लगभग 250 श्रद्धालु जम्मू स्थित भगवती नगर बेस कैम्प के लिए रवाना होंगे। विदित हो कि यह यात्रा वर्ष 2005 ई. से चल रही है जिसमें बजरंग दल के आह्वान पर देशभर से बड़ी संख्या में बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी के दर्शन के लिए लोग पहुंचते हैं। इस यात्रा का शुभारंभ वर्ष 1996 ई. से माना जाता है तब बाबा अमरनाथ बर्फानी की यात्रा को लेकर पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने धमकी दी थी कि अमरनाथ यात्री यदि यहां आते हैं तो कोई यात्री जीवित नहीं लौटेंगे तब इस चुनौती को बजरंग दल ने स्वीकार करते हुए देश भर से 50 हजार से ऊपर बजरंगी युवा यात्रा में गए थे।यात्रा सुगमतापूर्वक पूर्ण हुई थी। तब से बजरंग दल देशभर में साहसिक यात्रा प्रारंभ की और इसी कड़ी में यह यात्रा प्रारंभ हुई। कहते हैं कि बाबा अमरनाथ बर्फ़ानी की यात्रा तब तक अधुरी है जब तक आप बाबा बूढ़ा अमरनाथ चट्टानी की दर्शन नहीं कर लेते हैं। भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को अमरत्व की कथा इसी मन्दिर स्थान से प्रारम्भ हुई थी। यह यात्रा महज एक यात्रा नहीं है, बल्कि यह यात्रा धार्मिक के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व की भी है। सीमा पर प्रहरी के रूप में खड़े सेवा के जवानों के प्रति सम्मान और गौरव के दर्शन की भी यात्रा है। इस यात्रा के परिणाम स्वरूप यात्रा मार्ग में आने वाले सभी हिंदू धर्म स्थलों का संरक्षण हुआ है। तथा पाकिस्तान से लगी भारत की सीमा पर रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं में "पलायन नहीं पराक्रम" का भाव जागृत हुआ है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष 16 अगस्त से यह यात्रा प्रारंभ होकर 27 अगस्त 2026 तक चलेगी।इस वर्ष की यात्रा में झारखंड से अभी तक 322 लोगों ने पंजीकरण कराया है, वहीं 226 लोगों ने अभी तक आने-जाने का टिकट भी कर लिया है। यात्रा में लगभग 250 लोग शिरकत करेंगे जिसमें काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। उक्त जानकारी बजरंग दल के प्रान्त संयोजक रंगनाथ महतो ने दी। 

देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश का पावन पर्व
Published / 2026-07-22 18:06:14
देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश का पावन पर्व

देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु के योगनिद्रा में प्रवेश का पावन पर्वआत्म चिंतन,आस्था, संयम और साधना का देता है संदेश : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि देवशयनी एकादशी जिसे हरिशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी अथवा पद्मा एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई दिन शनिवार को मनाई जाएगी। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आने वाला यह पर्व भगवान श्रीहरि विष्णु के क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से चातुर्मास का शुभारंभ होता है, जो कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक चलता है। धार्मिक मान्यताओं केअनुसार देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में चले जाते हैं।इस अवधि में मांगलिक एवं वैवाहिक कार्य सामान्यतः स्थगित कर दिए जाते हैं तथा साधना, जप, तप, व्रत, दान, सत्संग और सेवा जैसे आध्यात्मिक कार्यों का विशेष महत्व बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने तथा गरीबों एवं जरूरतमंदों की सेवा करने से मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।देवशयनी एकादशी का उल्लेख पद्म पुराण, स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार यह व्रत पापों का नाश करने वाला, मन को पवित्र बनाने वाला तथा मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु का पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप एवं नैवेद्य से पूजन किया जाता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता तथा विष्णु मंत्रों का जप करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन एवं जागरण का आयोजन भी करते हैं।इस एकादशी का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सदाचार, सेवा, करुणा और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होना है। चातुर्मास के दौरान व्यक्ति अपने आचरण में पवित्रता, सादगी और अनुशासन अपनाने का संकल्प लेता है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, जीवों के प्रति दया, सात्विक जीवनशैली तथा सामाजिक समरसता का भी संदेश देता है। आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में देवशयनी एकादशी हमें आत्मचिंतन, संयम और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा का संदेश देती है। यह पर्व बताता है कि भौतिक उन्नति के साथ आध्यात्मिक विकास भी उतना ही आवश्यक है। श्रद्धा, भक्ति और सेवा के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को सार्थक बनाकर समाज में प्रेम,सद्भाव और सकारात्मकता का संचार कर सकता है।

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