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श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी उत्पन्ना एकादशी
Published / 2025-11-15 18:59:31
श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी उत्पन्ना एकादशी

टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 15 नवंबर  2025 को उत्पन्ना एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा व भक्तिमय वातावरण में आयोजित किया गया। प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर कर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर गुलाब, रजनीगंधा, बेला, जरबेरा, आर्किड, गैंदा, तुलसी व ताजे एवं खुशबूदार फूलों से श्री श्याम प्रभु का दिव्य शीश का अनुपम श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर परिसर में विराजमान बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया। प्रात: काल में श्रृंगार आरती से ही भगतों की भीड़ श्री श्याम दर्शन के लिए आतुर थी।  रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु की पावन ज्योत प्रज्वलित कर श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने सर्वप्रथम गणेश वंदना के साथ श्याम रस से ओतप्रोत संगीतमय संकीर्तन का शुभारंभ किया। मौके पर मन मस्त हुआ मेरे श्याम दरस तेरा पा करके, धन घड़ी भाग्य हमारा लीले चढ़ श्री श्याम पधारया, अनोखा जो भी हुआ श्याम के द्वार हुआ, मोर छड़ी लहराई रे रसिया ओ संवारा, श्याम तेरे भरोसे मेरा ये परिवार है... इत्यादि भजनों की लय पर झूमते हुए भक्तगण ज्योत में आहुति प्रदान कर रहे थे। मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा, रबड़ी व केसरिया दूध का भोग निवेदित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, ओम जोशी, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, विवेक ढांढनीयां, विकास पाडिया, नितेश केजरीवाल, जीतेश अग्रवाल, अनुराग पोद्दार, नितेश लाखोटिया, ज्ञान प्रकाश बागला का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

15 से अभाविप शुरू करेगा भगवान बिरसा संदेश यात्रा
Published / 2025-11-13 20:56:40
15 से अभाविप शुरू करेगा भगवान बिरसा संदेश यात्रा

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर अभाविप शुरू करेगा भगवान बिरसा संदेश यात्रा टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद झारखंड के द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर भगवान बिरसा संदेश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातु, खूंटी से प्रारंभ होकर देहरादून में आयोजित हो रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 71वें में राष्ट्रीय अधिवेशन में 27 नवंबर को पहुंचेगी। यात्रा के संदर्भ में जानकारी देते हुए अभाविप झारखंड के प्रदेश मंत्री मनोज सोरेन ने बताया कि 15 नवंबर को उलिहातु में भव्य कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री गोविंद नायक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष आर्यनमान उपस्थित रहेंगे।

श्री राधा- कृष्ण प्रणामी मंदिर का परिवर्तित समय सारणी जारी : संजय सर्राफ
Published / 2025-11-11 21:21:59
श्री राधा- कृष्ण प्रणामी मंदिर का परिवर्तित समय सारणी जारी : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित अरगोड़ा कटहल मोड़ रोड पुंदाग में स्थित झारखंड का सबसे बड़ा सुप्रसिद्ध श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम में प्रतिदिन सैकड़ो श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। तथा भव्य आकर्षक एवं अनूठा मंदिर को देख मंत्र मुग्ध होकर उत्साहित हो रहे हैं। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि ठंड के मौसम को देखते हुए मंदिर की समय सारणी में थोड़ा परिवर्तन किया गया है। प्रबंध कमेटी के आदेशानुसार सोमवार से रविवार तक मंदिर का पट खुलने का समय प्रतिदिन प्रात: 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक तथा दोपहर 3 बजे से रात्रि 8 बजे तक, मंदिर बंद होने का समय प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से दोपहर 3 बजे तक, तथा आरती का समय प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे तथा रात्रि में 7 बजे रहेगा। प्रत्येक रविवार को दोपहर 12:00 बजे से अन्नपूर्णा प्रसाद भंडारा एवं भजन- संध्या का आयोजन किया जाता है। तथा प्रत्येक शुक्रवार को अपराह्न 3 बजे से महिला समिति द्वारा भजन सत्संग का आयोजन होता है। मंदिर में वृंदावन के पुजारी पंडित अरविंद पांडे है जो दिन रात भगवान श्री राधा कृष्ण के सेवा में कार्यरत है। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

श्री राणी सती दादी जी की मंगसीर बदी नवमी 13 नवंबर को
Published / 2025-11-10 18:08:50
श्री राणी सती दादी जी की मंगसीर बदी नवमी 13 नवंबर को

दादी जी को साहस, निष्ठा, त्याग और आशीर्वाद की देवी माना जाता है: संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है श्री राणी सती दादी जी का मंगसीर बदी नवमी 13 नवंबर दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। यह तिथि श्री राणी सती दादी जी का जन्मोत्सव एवं प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।मारवाड़ी समाज विशेष समर्पण के साथ दादी जी का पर्व मनाता है। दादी जी की सभी मंदिरों में मंगसीर नवमी का महोत्सव चार दिनों तक बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। राणी सती दादी जी जिन्हें नारायणी देवी के नाम से भी जाना जाता है, संस्कृति और धर्म में साहस, त्याग और निष्ठा का प्रतीक मानी जाती हैं। उनको कथा प्रेरणादायक और मार्मिक है, जो उनकी अमर गाथा को सजीव करती है। मंगसीर बदी नवमी का दिन उनके बलिदान और उनकी दिव्य शक्ति को स्मरण करने के लिए विशेष महत्व रखता है। यह कथा महाभारत काल से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि नारायणी देवी का पूर्वजन्म वीर अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के रूप में हुआ था।महाभारत के युद्ध में जब अभिमन्यु वीरगति को प्राप्त हुए, तब उत्तरा ने उनके साथ सती होने की इच्छा व्यक्त की। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सती होने से रोका और कहा कि भविष्य में उन्हें यह पुण्य कर्म करने का अवसर मिलेगा। उत्तरा ने पुनर्जन्म लिया और नारायणी के रूप में जन्म लिया। उनका विवाह झुंझुनू (राजस्थान) के निवासी ठाकुर तांवर जी से हुआ। नारायणी देवी और तांबर जी का दांपत्य जीवन प्रेम और निष्ठा से परिपूर्ण था। यह पर्व प्रेम, निष्ठा और धर्म के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक था। उन्होंने भगवान से यह वरदान मांगा कि भविष्य में वे सभी श्रद्धालु भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करेंगी। मंगसीर बदी नवमी का दिन उनके बलिदान और त्याग को समर्पित है। इस दिन झुंझुनू स्थित राणी सती मंदिर सहित पूरे देश के दादी के मंदिरों में विशाल महोत्सव का आयोजन होता है। जिसमें राजस्थानी महिलाएं, पुरुष द्वारा मंदिरों में राणी सती दादी जी की विशेष पूजा की जाती है। मंदिरों में झांकियां और श्रृंगार दादी जी की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कर भव्य झांकी सजाई जाती है। दिन भर भजन-कीर्तन, मंगल पाठ और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। महिलाओं द्वारा चुनरी-मेहंदी, सुघा सुहाग की कामना की जाती है इस दिन सुहागिनें विशेष रूप से भाग लेती है क्योंकि इसे अपने सुहाग की रक्षा, परिवार की मंगल कामना और कुलदेवी की आराधना का अवसर माना जाता है। आज यह पर्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक सांस्कृतिक उत्सव बन गया है जहां विभिन्न नगरों मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिलती है यह आयोजन मारवाड़ी समाज के लिए अपनी पहचान आस्था तथा संयुक्त पूजा- व्रत के माध्यम से एकता का प्रतीक बन गया है। सती दादी जी का सम्मान समारोह न केवल उनकीअदम्य निष्ठा, भक्ति और त्याग की स्मृति प्रस्तुत करता है बल्कि यह हमें धर्म, संस्कार और परिवार कल्याण के उन मूल्यों को याद भी दिलाता है।उनके भक्त जीवन के कठिन समय में उनका आह्वान करते हैं। ऐसा विश्वास है कि उनकी पूजा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। राणी सती दादी जी की कथा हमें यह सिखाती है कि प्रेम और निष्ठा जीवन के मूलभूत मूल्य हैं। मंगसीर बदी नवमी का दिन उनके त्याग और शक्ति को स्मरण करने के लिए मनाया जाता है। यह दिन सभी भक्तों के लिए दादी जी से आशीर्वाद प्राप्त करने का सुनहरा अवसर होता है।

अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह
Published / 2025-11-09 17:42:53
अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, झारखंड की प्रांत टोली बैठक रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ग्रीन एकर्स में प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें प्रांत पदाधिकारी, आयामों के प्रमुख सभी विभागों के  मंत्री एवं संगठन मंत्री उपस्थित थे। बैठक में विगत कार्यक्रमों की समीक्षा एवं आगामी कार्यक्रमों की योजना बनाई गई। बैठक में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सह  विशेष संपर्क प्रमुख श्री अंबरीश सिंह एवं क्षेत्र संगठन मंत्री श्री आनंद पांडे उपस्थित थे। अपने संबोधन में श्री अंबरीश सिंह ने कहा  परिषद के कार्यकर्ता कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण हिंदू समाज के बीच संगठन का कार्य स्थापित करें। समाज में किस प्रकार समरसता का भाव बढ़े, गौ माता की रक्षा हो, मठ मंदिरों की सुरक्षा हो, मतांतरण रुके, सेवा, सत्संग  ऐसे अनेक कार्यों में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता लगे हुए हैं।संगठन का एक ही लक्ष्य है अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना। प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने पूर्ण निष्ठा के साथ परिषद के कार्यों को सफल बनाने का आह्वान किया। प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा  15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस , 24-25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर बलिदान दिवस, 1 दिसंबर से 7 दिसंबर गीता जयंती शौर्य दिवस, 26 दिसंबर वीर बाल दिवस तथा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक धर्म रक्षा दिवस का कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद द्वारा सभी प्रखंडों में किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जिला बैठकें 8, 9 और 10 नवंबर तथा प्रखंड बैठकें 11 नवंबर से 16 नवंबर के बीच आयोजित की जाएंगी। बैठक में प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, राजेंद्र सिंह मुंडा, प्रांत सह मंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, धर्म प्रसार प्रांत प्रमुख संजय चौरसिया, प्रांत सत्संग प्रमुख रंजन कुमार सिन्हा, सह प्रमुख गणेश शंकर विद्यार्थी, प्रांत मंदिर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख देवेंद्र गुप्ता, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख अरविंद सिंह, सह प्रमुख प्रिंस अजमानी, धर्माचार्य संपर्क सह प्रमुख अवतार सिंह गांधी, सेवा सह प्रमुख अशोक अग्रवाल, विनय कुमार, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख अमर प्रसाद, सिंहभूम विभाग मंत्री अरुण सिंह, धनबाद विभाग मंत्री श्री राजेश दुबे, गुमला विभाग मंत्री केशव चंद्र साय सहित अन्य विभाग मंत्री एवं विभाग संगठन मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।

अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह
Published / 2025-11-09 17:03:49
अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, झारखंड की प्रांत टोली बैठक रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ग्रीन एकर्स में प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें प्रांत पदाधिकारी, आयामों के प्रमुख सभी विभागों के  मंत्री एवं संगठन मंत्री उपस्थित थे। बैठक में विगत कार्यक्रमों की समीक्षा एवं आगामी कार्यक्रमों की योजना बनाई गई। बैठक में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सह  विशेष संपर्क प्रमुख श्री अंबरीश सिंह एवं क्षेत्र संगठन मंत्री श्री आनंद पांडे उपस्थित थे। अपने संबोधन में श्री अंबरीश सिंह ने कहा  परिषद के कार्यकर्ता कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण हिंदू समाज के बीच संगठन का कार्य स्थापित करें। समाज में किस प्रकार समरसता का भाव बढ़े, गौ माता की रक्षा हो, मठ मंदिरों की सुरक्षा हो, मतांतरण रुके, सेवा, सत्संग  ऐसे अनेक कार्यों में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता लगे हुए हैं।संगठन का एक ही लक्ष्य है अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना। प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने पूर्ण निष्ठा के साथ परिषद के कार्यों को सफल बनाने का आह्वान किया। प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा  15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस , 24-25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर बलिदान दिवस, 1 दिसंबर से 7 दिसंबर गीता जयंती शौर्य दिवस, 26 दिसंबर वीर बाल दिवस तथा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक धर्म रक्षा दिवस का कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद द्वारा सभी प्रखंडों में किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जिला बैठकें 8, 9 और 10 नवंबर तथा प्रखंड बैठकें 11 नवंबर से 16 नवंबर के बीच आयोजित की जाएंगी। बैठक में प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, राजेंद्र सिंह मुंडा, प्रांत सह मंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, धर्म प्रसार प्रांत प्रमुख संजय चौरसिया, प्रांत सत्संग प्रमुख रंजन कुमार सिन्हा, सह प्रमुख गणेश शंकर विद्यार्थी, प्रांत मंदिर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख देवेंद्र गुप्ता, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख अरविंद सिंह, सह प्रमुख प्रिंस अजमानी, धर्माचार्य संपर्क सह प्रमुख अवतार सिंह गांधी, सेवा सह प्रमुख अशोक अग्रवाल, विनय कुमार, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख अमर प्रसाद, सिंहभूम विभाग मंत्री अरुण सिंह, धनबाद विभाग मंत्री श्री राजेश दुबे, गुमला विभाग मंत्री केशव चंद्र साय सहित अन्य विभाग मंत्री एवं विभाग संगठन मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।

अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य :  अम्बरीश सिंह
Published / 2025-11-07 19:47:32
अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह

अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य :  अम्बरीश सिंहटीम एबीएन रांची। विश्व हिंदू परिषद, झारखंड की प्रांत टोली बैठक रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ग्रीन एकर्स में प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें प्रांत पदाधिकारी, आयामों के प्रमुख सभी विभागों के  मंत्री एवं संगठन मंत्री उपस्थित थे। बैठक में विगत कार्यक्रमों की समीक्षा एवं आगामी कार्यक्रमों की योजना बनाई गई।बैठक में मुख्य रूप से विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सह  विशेष संपर्क प्रमुख श्री अंबरीश सिंह एवं क्षेत्र संगठन मंत्री श्री आनंद पांडे उपस्थित थे। अपने संबोधन में श्री अंबरीश सिंह ने कहा  परिषद के कार्यकर्ता कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण हिंदू समाज के बीच संगठन का कार्य स्थापित करें। समाज में किस प्रकार समरसता का भाव बढ़े, गौ माता की रक्षा हो, मठ मंदिरों की सुरक्षा हो, मतांतरण रुके, सेवा, सत्संग  ऐसे अनेक कार्यों में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता लगे हुए हैं। संगठन का एक ही लक्ष्य है अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश ,धर्म और संस्कृति की रक्षा करना। प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत ने पूर्ण निष्ठा के साथ परिषद के कार्यों को सफल बनाने का आह्वान किया। प्रांत मंत्री श्री मिथिलेश्वर मिश्र ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा  15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस , 24-25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर बलिदान दिवस, 1 दिसंबर से 7 दिसंबर गीता जयंती शौर्य दिवस, 26 दिसंबर वीर बाल दिवस तथा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक धर्म रक्षा दिवस का कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद द्वारा सभी प्रखंडों में किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जिला बैठकें 8, 9 और 10 नवंबर तथा प्रखंड बैठकें 11 नवंबर से 16 नवंबर के बीच आयोजित की जाएंगी।बैठक में प्रांत संगठन मंत्री श्रीमान देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष श्री गंगा प्रसाद यादव ,श्री राजेंद्र सिंह मुंडा ,प्रांत सह मंत्री श्री मनोज पोद्दार,  प्रांत संयोजक श्री रंगनाथ महतो, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, धर्म प्रसार प्रांत प्रमुख श्री संजय चौरसिया, प्रांत सत्संग प्रमुख श्री रंजन कुमार सिन्हा, सह प्रमुख श्री गणेश शंकर विद्यार्थी, प्रांत मंदिर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख श्री देवेंद्र गुप्ता, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख श्री अरविंद सिंह, सह प्रमुख श्री प्रिंस अजमानी, धर्माचार्य संपर्क सह प्रमुख श्री अवतार सिंह गांधी, सेवा सह प्रमुख श्री  अशोक अग्रवाल ,श्री विनय कुमार, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख श्री अमर प्रसाद, सिंहभूम विभाग मंत्री श्री अरुण सिंह, धनबाद विभाग मंत्री श्री राजेश दुबे, गुमला विभाग मंत्री श्री केशव चंद्र साय सहित अन्य विभाग मंत्री एवं विभाग संगठन मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली
Published / 2025-11-05 20:46:12
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली का पावन पर्व अत्यंत हर्षोल्लास एवं धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था। भक्तों की भीड़ सुबह से ही दर्शन एवं पूजन के लिए उमड़ पड़ी। चारों ओर राधे कृष्ण के जयघोष और भक्ति संगीत की मधुर ध्वनियों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। पर्व के शुभ अवसर पर श्री राधा कृष्ण का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसमें फूलों, वस्त्रों एवं आभूषणों से भगवान का मनोहारी स्वरूप सजाया गया। भक्तों ने दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना। संध्या आरती से पूर्व मंदिर परिसर में 101 घी के दीपक प्रज्ज्वलित किये गये, जिससे पूरा वातावरण दीपमालाओं की उज्ज्वल आभा से आलोकित हो उठा। दीपों की रोशनी में देव दीपावली का दृश्य अत्यंत मनमोहक एवं आध्यात्मिक अनुभूति देने वाला रहा। मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधिवत पूजा-अर्चना, भोग अर्पण एवं आरती संपन्न करायी। भगवान को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों- खीर, पूड़ी, लड्डू, पंचामृत एवं फल मिष्ठान का भोग लगाया गया। इसके पश्चात भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तजन हरे कृष्ण, राधे श्याम जैसे मधुर भजनों पर भावविभोर होकर झूम उठे। तत्पश्चात सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद भोग का वितरण किया गया। प्रणामी सेवा धाम में स्थित गौशाला में भी विशेष गौ सेवा का आयोजन किया गया। भक्तों ने गौमाताओं को चारा खिलाया एवं सेवा का पुण्य अर्जित किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा का पर्व भगवान के प्रति भक्ति, दान और सेवा का प्रतीक है। दीप जलाना केवल रोशनी का नहीं, बल्कि भीतर की अंधकार रूपी अज्ञानता को दूर करने का प्रतीक है। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा कि देव दीपावली भगवान की अनुकंपा का पर्व है।इस दिन हम सभी को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि प्रणामी सेवा धाम सदैव समाज में भक्ति, सेवा और संस्कारों के प्रसार के लिए कार्यरत रहेगा। पूरे आयोजन ने भक्तिभाव, आस्था और एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम मे ट्रस्ट के पदाधिकारियों, सदस्यों, सेवादारों एवं बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

गुरु नानक देव जयंती 5 नवंबर को
Published / 2025-11-03 16:19:52
गुरु नानक देव जयंती 5 नवंबर को

गुरु नानक जयंती मानवता, समानता, प्रेम और सत्य का उत्सव : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में गुरु नानक देव जी का स्थान अत्यंत ऊँचा है।वे न केवल सिख धर्म के संस्थापक थे, बल्कि एक ऐसे संत, समाज सुधारक और मानवतावादी थे जिन्होंने पूरे विश्व को सत्य, करुणा और समानता का संदेश दिया। गुरु नानक देव जी की जयंती, जिसे गुरुपर्व या प्रकाश पर्व भी कहा जाता है, हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 5 नवंबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा। इस साल गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती होगी गुरु नानक देव जी का जन्म सन् 1469 ईस्वी में पंजाब के तलवंडी गाँव (अब पाकिस्तान में ननकाना साहिब) में हुआ था। उनके पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम माता तृप्ता था। बचपन से ही वे अत्यंत बुद्धिमान, सत्यनिष्ठ और करुणामयी थे। सांसारिक वैभव से दूर, वे हमेशा ईश्वर की भक्ति और मानवता की सेवा में लीन रहते थे। यह जयंती गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन सिख समुदाय और उनके अनुयायी उनकी शिक्षाओं को स्मरण करते हुए कीर्तन, भजन, लंगर और सेवा के माध्यम से प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं। गुरु नानक देव जी ने समाज में फैले भेदभाव, अंधविश्वास और पाखंड का विरोध किया तथा एक ओंकार सतनाम का उपदेश दिया-अर्थात् ईश्वर एक है और वह सबमें विद्यमान है।गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ तीन मूल सिद्धांतों पर आधारित थीं-नाम जपना-ईश्वर का स्मरण करना,किरत करना-ईमानदारी से जीवनयापन करना,वंड छकना- दूसरों के साथ बाँटकर खाना, उनके विचारों ने न केवल सिख धर्म की नींव रखी, बल्कि पूरी मानवता को सत्य, करुणा और समानता का मार्ग दिखाया। गुरुपर्व से दो दिन पहले नगाड़ा कीर्तन यात्रा निकाली जाती है, जिसमें नगर की गलियाँ गुरुवाणी से गूंज उठती हैं। गुरुद्वारों को पुष्पों और दीपों से सजाया जाता है। अखंड पाठ (48 घंटे का निरंतर गुरुग्रंथ साहिब पाठ) आयोजित होता है। जयंती के दिन प्रभात फेरी, भजन-कीर्तन, गुरु का लंगर और सेवा का माहौल अद्भुत शांति और सौहार्द का अनुभव कराता है। लंगर में सभी धर्मों और वर्गों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जो समानता का प्रतीक है। कहा जाता है कि एक दिन नानक देव जी स्नान के लिए नदी में गए और तीन दिन तक लापता रहे। जब वे लौटे तो बोले, ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। इसी अनुभव के बाद उन्होंने संसार में प्रेम, सच्चाई और सेवा का संदेश फैलाना शुरू किया।गुरु नानक देव जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, समानता और सत्य का उत्सव है। उनकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी 500 वर्ष पूर्व थीं। उन्होंने हमें सिखाया कि ईश्वर की सच्ची उपासना सेवा, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने में है।इसलिए हर वर्ष यह पर्व हमें याद दिलाता है-मानव सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।

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