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अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह
Published / 2025-11-09 17:03:49
अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, झारखंड की प्रांत टोली बैठक रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ग्रीन एकर्स में प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें प्रांत पदाधिकारी, आयामों के प्रमुख सभी विभागों के  मंत्री एवं संगठन मंत्री उपस्थित थे। बैठक में विगत कार्यक्रमों की समीक्षा एवं आगामी कार्यक्रमों की योजना बनाई गई। बैठक में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सह  विशेष संपर्क प्रमुख श्री अंबरीश सिंह एवं क्षेत्र संगठन मंत्री श्री आनंद पांडे उपस्थित थे। अपने संबोधन में श्री अंबरीश सिंह ने कहा  परिषद के कार्यकर्ता कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण हिंदू समाज के बीच संगठन का कार्य स्थापित करें। समाज में किस प्रकार समरसता का भाव बढ़े, गौ माता की रक्षा हो, मठ मंदिरों की सुरक्षा हो, मतांतरण रुके, सेवा, सत्संग  ऐसे अनेक कार्यों में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता लगे हुए हैं।संगठन का एक ही लक्ष्य है अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना। प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने पूर्ण निष्ठा के साथ परिषद के कार्यों को सफल बनाने का आह्वान किया। प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा  15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस , 24-25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर बलिदान दिवस, 1 दिसंबर से 7 दिसंबर गीता जयंती शौर्य दिवस, 26 दिसंबर वीर बाल दिवस तथा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक धर्म रक्षा दिवस का कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद द्वारा सभी प्रखंडों में किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जिला बैठकें 8, 9 और 10 नवंबर तथा प्रखंड बैठकें 11 नवंबर से 16 नवंबर के बीच आयोजित की जाएंगी। बैठक में प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, राजेंद्र सिंह मुंडा, प्रांत सह मंत्री मनोज पोद्दार, प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, धर्म प्रसार प्रांत प्रमुख संजय चौरसिया, प्रांत सत्संग प्रमुख रंजन कुमार सिन्हा, सह प्रमुख गणेश शंकर विद्यार्थी, प्रांत मंदिर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख देवेंद्र गुप्ता, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख अरविंद सिंह, सह प्रमुख प्रिंस अजमानी, धर्माचार्य संपर्क सह प्रमुख अवतार सिंह गांधी, सेवा सह प्रमुख अशोक अग्रवाल, विनय कुमार, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख अमर प्रसाद, सिंहभूम विभाग मंत्री अरुण सिंह, धनबाद विभाग मंत्री श्री राजेश दुबे, गुमला विभाग मंत्री केशव चंद्र साय सहित अन्य विभाग मंत्री एवं विभाग संगठन मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।

अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य :  अम्बरीश सिंह
Published / 2025-11-07 19:47:32
अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य : अम्बरीश सिंह

अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करना विहिप का उद्देश्य :  अम्बरीश सिंहटीम एबीएन रांची। विश्व हिंदू परिषद, झारखंड की प्रांत टोली बैठक रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ग्रीन एकर्स में प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें प्रांत पदाधिकारी, आयामों के प्रमुख सभी विभागों के  मंत्री एवं संगठन मंत्री उपस्थित थे। बैठक में विगत कार्यक्रमों की समीक्षा एवं आगामी कार्यक्रमों की योजना बनाई गई।बैठक में मुख्य रूप से विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री सह  विशेष संपर्क प्रमुख श्री अंबरीश सिंह एवं क्षेत्र संगठन मंत्री श्री आनंद पांडे उपस्थित थे। अपने संबोधन में श्री अंबरीश सिंह ने कहा  परिषद के कार्यकर्ता कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण हिंदू समाज के बीच संगठन का कार्य स्थापित करें। समाज में किस प्रकार समरसता का भाव बढ़े, गौ माता की रक्षा हो, मठ मंदिरों की सुरक्षा हो, मतांतरण रुके, सेवा, सत्संग  ऐसे अनेक कार्यों में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता लगे हुए हैं। संगठन का एक ही लक्ष्य है अजेय हिंदू शक्ति खड़ा कर देश ,धर्म और संस्कृति की रक्षा करना। प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत ने पूर्ण निष्ठा के साथ परिषद के कार्यों को सफल बनाने का आह्वान किया। प्रांत मंत्री श्री मिथिलेश्वर मिश्र ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा  15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा जयंती जनजातीय गौरव दिवस , 24-25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर बलिदान दिवस, 1 दिसंबर से 7 दिसंबर गीता जयंती शौर्य दिवस, 26 दिसंबर वीर बाल दिवस तथा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक धर्म रक्षा दिवस का कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद द्वारा सभी प्रखंडों में किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जिला बैठकें 8, 9 और 10 नवंबर तथा प्रखंड बैठकें 11 नवंबर से 16 नवंबर के बीच आयोजित की जाएंगी।बैठक में प्रांत संगठन मंत्री श्रीमान देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष श्री गंगा प्रसाद यादव ,श्री राजेंद्र सिंह मुंडा ,प्रांत सह मंत्री श्री मनोज पोद्दार,  प्रांत संयोजक श्री रंगनाथ महतो, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, धर्म प्रसार प्रांत प्रमुख श्री संजय चौरसिया, प्रांत सत्संग प्रमुख श्री रंजन कुमार सिन्हा, सह प्रमुख श्री गणेश शंकर विद्यार्थी, प्रांत मंदिर अर्चक पुरोहित संपर्क प्रमुख श्री देवेंद्र गुप्ता, प्रांत विशेष संपर्क प्रमुख श्री अरविंद सिंह, सह प्रमुख श्री प्रिंस अजमानी, धर्माचार्य संपर्क सह प्रमुख श्री अवतार सिंह गांधी, सेवा सह प्रमुख श्री  अशोक अग्रवाल ,श्री विनय कुमार, प्रांत विद्यार्थी प्रमुख श्री अमर प्रसाद, सिंहभूम विभाग मंत्री श्री अरुण सिंह, धनबाद विभाग मंत्री श्री राजेश दुबे, गुमला विभाग मंत्री श्री केशव चंद्र साय सहित अन्य विभाग मंत्री एवं विभाग संगठन मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन ने दी।

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली
Published / 2025-11-05 20:46:12
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर, पुंदाग में कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली का पावन पर्व अत्यंत हर्षोल्लास एवं धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया था। भक्तों की भीड़ सुबह से ही दर्शन एवं पूजन के लिए उमड़ पड़ी। चारों ओर राधे कृष्ण के जयघोष और भक्ति संगीत की मधुर ध्वनियों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। पर्व के शुभ अवसर पर श्री राधा कृष्ण का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसमें फूलों, वस्त्रों एवं आभूषणों से भगवान का मनोहारी स्वरूप सजाया गया। भक्तों ने दर्शन कर अपने जीवन को धन्य माना। संध्या आरती से पूर्व मंदिर परिसर में 101 घी के दीपक प्रज्ज्वलित किये गये, जिससे पूरा वातावरण दीपमालाओं की उज्ज्वल आभा से आलोकित हो उठा। दीपों की रोशनी में देव दीपावली का दृश्य अत्यंत मनमोहक एवं आध्यात्मिक अनुभूति देने वाला रहा। मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडे ने विधिवत पूजा-अर्चना, भोग अर्पण एवं आरती संपन्न करायी। भगवान को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों- खीर, पूड़ी, लड्डू, पंचामृत एवं फल मिष्ठान का भोग लगाया गया। इसके पश्चात भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तजन हरे कृष्ण, राधे श्याम जैसे मधुर भजनों पर भावविभोर होकर झूम उठे। तत्पश्चात सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद भोग का वितरण किया गया। प्रणामी सेवा धाम में स्थित गौशाला में भी विशेष गौ सेवा का आयोजन किया गया। भक्तों ने गौमाताओं को चारा खिलाया एवं सेवा का पुण्य अर्जित किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा का पर्व भगवान के प्रति भक्ति, दान और सेवा का प्रतीक है। दीप जलाना केवल रोशनी का नहीं, बल्कि भीतर की अंधकार रूपी अज्ञानता को दूर करने का प्रतीक है। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा कि देव दीपावली भगवान की अनुकंपा का पर्व है।इस दिन हम सभी को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि प्रणामी सेवा धाम सदैव समाज में भक्ति, सेवा और संस्कारों के प्रसार के लिए कार्यरत रहेगा। पूरे आयोजन ने भक्तिभाव, आस्था और एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम मे ट्रस्ट के पदाधिकारियों, सदस्यों, सेवादारों एवं बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।

गुरु नानक देव जयंती 5 नवंबर को
Published / 2025-11-03 16:19:52
गुरु नानक देव जयंती 5 नवंबर को

गुरु नानक जयंती मानवता, समानता, प्रेम और सत्य का उत्सव : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में गुरु नानक देव जी का स्थान अत्यंत ऊँचा है।वे न केवल सिख धर्म के संस्थापक थे, बल्कि एक ऐसे संत, समाज सुधारक और मानवतावादी थे जिन्होंने पूरे विश्व को सत्य, करुणा और समानता का संदेश दिया। गुरु नानक देव जी की जयंती, जिसे गुरुपर्व या प्रकाश पर्व भी कहा जाता है, हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस वर्ष यह पावन पर्व 5 नवंबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा। इस साल गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती होगी गुरु नानक देव जी का जन्म सन् 1469 ईस्वी में पंजाब के तलवंडी गाँव (अब पाकिस्तान में ननकाना साहिब) में हुआ था। उनके पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम माता तृप्ता था। बचपन से ही वे अत्यंत बुद्धिमान, सत्यनिष्ठ और करुणामयी थे। सांसारिक वैभव से दूर, वे हमेशा ईश्वर की भक्ति और मानवता की सेवा में लीन रहते थे। यह जयंती गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन सिख समुदाय और उनके अनुयायी उनकी शिक्षाओं को स्मरण करते हुए कीर्तन, भजन, लंगर और सेवा के माध्यम से प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं। गुरु नानक देव जी ने समाज में फैले भेदभाव, अंधविश्वास और पाखंड का विरोध किया तथा एक ओंकार सतनाम का उपदेश दिया-अर्थात् ईश्वर एक है और वह सबमें विद्यमान है।गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ तीन मूल सिद्धांतों पर आधारित थीं-नाम जपना-ईश्वर का स्मरण करना,किरत करना-ईमानदारी से जीवनयापन करना,वंड छकना- दूसरों के साथ बाँटकर खाना, उनके विचारों ने न केवल सिख धर्म की नींव रखी, बल्कि पूरी मानवता को सत्य, करुणा और समानता का मार्ग दिखाया। गुरुपर्व से दो दिन पहले नगाड़ा कीर्तन यात्रा निकाली जाती है, जिसमें नगर की गलियाँ गुरुवाणी से गूंज उठती हैं। गुरुद्वारों को पुष्पों और दीपों से सजाया जाता है। अखंड पाठ (48 घंटे का निरंतर गुरुग्रंथ साहिब पाठ) आयोजित होता है। जयंती के दिन प्रभात फेरी, भजन-कीर्तन, गुरु का लंगर और सेवा का माहौल अद्भुत शांति और सौहार्द का अनुभव कराता है। लंगर में सभी धर्मों और वर्गों के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, जो समानता का प्रतीक है। कहा जाता है कि एक दिन नानक देव जी स्नान के लिए नदी में गए और तीन दिन तक लापता रहे। जब वे लौटे तो बोले, ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। इसी अनुभव के बाद उन्होंने संसार में प्रेम, सच्चाई और सेवा का संदेश फैलाना शुरू किया।गुरु नानक देव जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, समानता और सत्य का उत्सव है। उनकी शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी 500 वर्ष पूर्व थीं। उन्होंने हमें सिखाया कि ईश्वर की सच्ची उपासना सेवा, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने में है।इसलिए हर वर्ष यह पर्व हमें याद दिलाता है-मानव सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।

बड़ागाँई देवोत्थान जतरा मेला हर्षोल्लास के साथ मेला संपन्न
Published / 2025-11-02 19:56:12
बड़ागाँई देवोत्थान जतरा मेला हर्षोल्लास के साथ मेला संपन्न

अच्छी फसल के उल्हास पर परिवार मिलन का माध्यम है जतरा मेला : राम टहल चौधरीपारंपरिक नृत्य-गान व वेशभूषा से झलकती है झारखंड की संस्कृति : डॉ बिरेन्द्र साहुटीम एबीएन, रांची। बड़ागाँई देवोत्थान धाम परिसर में आयोजित देवोत्थान जतरा मेला हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर सैकड़ो श्रद्धालुओं ने सुबह से ही पंक्तिबद्ध होकर भगवान शिव का पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने का आशीष प्राप्त किये। देवोत्थान जतरा मेला का शुभारम्भ बड़ागाँई के ग्राम पुजारी रवि पहान, पूर्व सांसद रामटहल चौधरी, विश्व हिंदू परिषद झारखण्ड-बिहार के क्षेत्र मंत्री व मेला के संरक्षक डॉ बिरेन्द्र साहू, मुख्य संरक्षक डॉ रुद्र नारायण महतो, संरक्षक बनु पहान व बालसाय महतो, अध्यक्ष नेपाल महतो, सचिव प्रेम लोहार, कोषाध्यक्ष अजय महतो सहित कई आगंतुक अतिथियों के द्वारा विधि- विधान से भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद राम टहल चौधरी ने कहा बड़ागांई -बूटी देवोत्थान धाम पर जहां एक और अपने ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती है वहीं दूसरी ओर इस स्थल पर श्रद्धालुओं का अटूट श्रद्धा बसती है। उन्होंने कहा जतरा मेला वर्ष में एक बार परिवार मिलन का पुरातन परंपरागत व्यवस्था है। झारखंड की संस्कृति संपूर्ण देश में नहीं अपितु विश्व को पर्यावरण संरक्षण के सार्थक पहल के लिए जाना जाता है। झारखंडी संस्कृति को बचाए रखने के लिए युवाओं का विशेष भागीदारी होना चाहिए। विश्व हिंदू परिषद झारखण्ड-बिहार के क्षेत्र मंत्री व मेला के संरक्षक डॉ बिरेन्द्र साहू ने कहा जतरा मेला हमारी प्राचीन परम्परा व संस्कृतिक धरोहर है। पारंपरिक नृत्य-गान व वेशभूषा से झारखंड की संस्कृति झलकती है। उन्होंने कहा यह जतरा देवोत्थान/ प्रबोधिनी एकादशी को भगवान विष्णुजी के जगने को लेकर 1931 में जूठन कविराज के नेतृत्व में  निर्मित बूढ़ा महादेव / देवोत्थान धाम परिसर में मनाने का परंपरागत धरोहर है। इस पावन स्थल पर लोग शिवरात्रि पूजन, शादी- विवाह, मुंडन संस्कार के साथ साथ प्रत्येक माह अनेक कार्यक्रम करते रहते हैं, जो इस स्थल की महत्ता को बढ़ाती है।जतरा मेला में बड़ागांई पहान टोली, बड़ागांई मुंडा टोली, बेड़ो, बाँधगाडी, खिजूरटोला, बूटी, किशुनपुर, महुरम टोली, लेम, लापुंग, आरा बाड़ाम  आदि गांवों के खोड़हा ( नृतक दल) अपने-अपने पारंपरिक वेशभूषा एवं वाद्य यंत्रों के साथ भगवान शिव का आराधना करते हुए अलग-अलग स्थान पर नृत्यगान प्रस्तुत कर मेले में आए सैकड़ो गांवों के लगभग 50 हजार से अधिक लोगों का मनोरंजन किये। लोगों ने पारंपरिक नचनी नृत्य का भी आनंद लिया। युवा- युवतियों ने आधुनिक आर्केस्ट्रा एवं नागपुरी गीत कलाकारों के द्वारा गाए हुए गीतों पर भी घंटों झूमते रहे। बच्चों ने झूला का भरपूर आनंद लिया वही पारंपरिक मिठाई, खिलौना, गुपचुप, आइसक्रीम, ईख, सौंदर्य प्रसाधनों इत्यादि की जमकर खरीदारी हुई।मेला में मुख्य संरक्षक डॉ रुद्रनारायण महतो व बनु पहान, संरक्षक डॉ बिरेन्द्र साहु, अध्यक्ष नेपाल महतो, सचिव प्रेम लोहार, कोषाध्यक्ष अजय कुमार महतो, बालसाय महतो, विनोद महतो, रवि पाहन, बबलू पहान, संदीप मुंडा, रणधीर चौधरी, अंतू तिर्की, रणधीर रजक, संजय महतो, रमेश तिर्की, दशरथ महतो, अशोक खलखो, सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार, डॉ हेमलाल महतो, सुनील टोप्पो, अवधेश बैठा  सुरेंद्र मुंडा, अमित पहान, महावीर मुंडा, दिलीप पहान आदि की मुख्य भूमिका रही। उक्त जानकारी देवदेवोत्थान जतरा मेला समिति, बड़ागांई-बूटी के सचिव प्रेम लोहार (9835425981) ने दी।

श्रद्धा, स्नान और दान का महापर्व कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर को
Published / 2025-11-02 19:21:14
श्रद्धा, स्नान और दान का महापर्व कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर को

कार्तिक पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में शुद्धता, त्याग, प्रकाश और भक्ति का है संगम : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 5 नवंबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म मे कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर को प्रातः काल 10:36 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 5 नवंबर को सायं काल 6:48 बजे तक रहेगी ऐसे में उदया तिथि के अनुसार इस साल कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व 5 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक पूर्णिमा का पर्व  इस दिन को देव दीपावली, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान पर्व के नाम से भी जाना जाता है।मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार धारण कर सृष्टि की रक्ष की थी। साथ ही यह भी कहा जाता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक तीन राक्षसों का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी, इसलिए इसे त्रिपुरी पूर्णिमा कहा जाता है। यही कारण है कि यह तिथि भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी लक्ष्मी-तीनों की आराधना के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है।कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में स्नान, विशेषकर पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा या किसी तीर्थ सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व है। इसे कार्तिक स्नान कहा जाता है। स्नान के उपरांत भगवान विष्णु और लक्ष्मीजी का पूजन कर दीपदान किया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन दीप जलाने से पिछले सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।कार्तिक पूर्णिमा का व्रत रखने और इस दिन लक्ष्मी नारायण की विधिवत पूजा करने से घर में सुख, संपत्ति और खुशहाली बनी रहती है।इस दिन किया गया दान-पुण्य, तुलसी पूजन, हवन और दीपदान सामान्य दिनों की तुलना में अनेक गुना अधिक फलदायी होता है। कई स्थानों पर रात्रि में दीपावली की भाँति दीप प्रज्वलित कर देव दीपावली मनाई जाती है। वाराणसी में गंगा घाटों पर हजारों दीपों की रौशनी से सुसज्जित दृश्य अद्भुत और दिव्य प्रतीत होता है। कार्तिक पूर्णिमा केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का भी प्रतीक है। यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और असत्य से सत्य की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है। इस दिन समाज में दया, दान और करुणा की भावना जागृत होती है। तीर्थ स्थलों, मेलों और घाटों पर भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ता है, जिससे यह पर्व लोक-आस्था और एकता का प्रतीक बन जाता है। कार्तिक पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में शुद्धता, त्याग, प्रकाश और भक्ति का संगम है। यह दिन मानवता को यह सिखाता है कि जीवन में भक्ति, सेवा और सच्चे कर्म का प्रकाश ही सबसे बड़ा दीपक है। गंगा स्नान, दीपदान और दान-पुण्य के माध्यम से व्यक्ति अपने मन, वचन और कर्म को पवित्र कर परम आनंद की अनुभूति करता है। इस प्रकार कार्तिक पूर्णिमा केवल एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना का उज्ज्वल पर्व है, जो हर हृदय में दिव्यता का दीप प्रज्वलित करता है।

स्वावलंबन की लौ जला रही है सेवा भारती
Published / 2025-11-02 19:14:45
स्वावलंबन की लौ जला रही है सेवा भारती

टीम एबीएन रांची। सेवा भारती, रांची महानगर भाग - 3 के तत्वावधान में मेन रोड, रांची के कडरू मोड़ स्थित कुजारा भवन में सिलाई प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के तीन स्वावलंबन केदों से प्रशिक्षित 45 प्रशिक्षुओं को सिलाई-कटाई का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर सेवा भारती, रांची महानगर के अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा भारती के माध्यम से अभावग्रस्त, सेवा बस्तियों की महिलाओं को स्वावलंबन का प्रशिक्षण देकर आर्थिक-सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रेरणादायक कार्य किया जा रहा है। समाज में सेवा भारती स्वालंबन की लौ जला रही है। महिलाएं परिवार एवं राष्ट्र की एक शक्ति है। मौके पर सेवा भारती की न्यासी श्रीमती पूनम आनंद ने कहा कि आत्मनिर्भर महिलाएं समाज को दिशा देने का कार्य करती है। आज के इस भौतिक युग में महिलाओं की आत्मनिर्भरता ही उनकी ताकत है। सिलाई प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में सेवा भारती की सह प्रांत महिला प्रमुख श्रीमती नीतू सिन्हा ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि महिलाओं को कहीं नौकरी करने के बजाय हाथ का कोइ न कोई हुनर लेकर हमें स्वरोजगार से जुड़ना चाहिए। मौके पर प्रशिक्षणार्थियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेवा भारती केवल स्वावलंबन प्रशिक्षण ही नहीं देती है, यहां संस्कार, कुशल व्यवहार एवं सामाजिक दायित्व निर्वहन सम्बन्धित ज्ञान भी मिलता है।कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए सेवा भारती, रांची महानगर के सचिव श्याम टोरका ने कहा कि संस्था की ओर से रांची नगर में प्रतिवर्ष 300 महिलाएं सिलाई- कटाई का प्रशिक्षण लेती हैं, उनमें से लगभग 225 महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। इस कार्यक्रम में परमानंद कुजारा, प्रदीप केडिया, मदन सेन, रश्मि मिश्रा, पुष्पा देवी, चंद्रमनी देवी, शोभा देवी, फूलमनी देवी, सुशीला शर्मा सहित 55 महिलाओं की उपस्थिति रही।

माता मोर्वी क आंगणियो मं लियो अवतार बैठयो रांची मं लगाकर दरबार श्याम धणी राज करे...
Published / 2025-11-01 19:55:23
माता मोर्वी क आंगणियो मं लियो अवतार बैठयो रांची मं लगाकर दरबार श्याम धणी राज करे...

एबीएन सोशल डेस्क। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मन्दिर में दिनांक 01 नवम्बर 2025 को कार्तिक शुक्ला देवोत्थान एकादशी के पावन दिन कलयुग अवतारी श्री श्याम प्रभु का जन्मोत्सव अत्यन्त धूमधाम के साथ भक्तिभाव के वातावरण में आयोजित किया गया। ज्ञातत्व हो कि द्वापर में माता मोर्वी के आंगन में कार्तिक शुक्ला एकादशी को श्री श्याम प्रभु ने अवतार लिया और शिशदान के पश्चात श्री कृष्ण से वर पाकर कलयुग में खाटू धाम में प्रगट हुए।  मौके पर सर्व प्रथम प्रात: 10:30 श्री लक्ष्मी वेंकटश्वर अन्नपूर्णा सेवा तिरुपति मंदिर द्वारा संचालित अन्नपूर्णा सेवा में श्री श्याम मंडल द्वारा अन्नपूर्णा सेवा का कार्यक्रम का किया गया। साथ ही आज के एकादशी के उपलक्ष्य में पूरे मन्दिर परिसर को विद्युत की रंगीन लड़ियों, रंगीन बैलून व फूलों से अत्यन्त कलात्मक ढंग से सजाया गया।  अहले प्रात: काल में श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर 21 प्रजातियों विशेष कर गुलाब, जूही, बेला, मोगरा, जरबेरा, आर्किड, गैंदा के ताजे फूलों से अद्भुत मनभावन श्रृंगार किया गया साथ ही मंदिर में विराजमान बजरंगबली एवं शिव परिवार का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया।  मुख्य कार्यक्रम रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु के जय जयकारों के बीच अखण्ड ज्योत प्रज्वलित की गई और उपस्थित भक्तगण श्री श्याम प्रभु के जयकारों से मन मयूर नाच उठा। श्री श्याम मंडल के सदस्यों द्वारा सर्वप्रथम गणेश वन्दना के साथ संगीतमय संकीर्तन प्रारम्भ किया गया।  माता मोर्वी क आंगणियों मं श्याम लियो अवतार बैठ्यो रांची मं लगाकर दरबार श्याम धनी राज करे हारा हूं बाबा बस तुझपे भरोसा है जीतूंगा एक दिन, मेरा दिल ये कहता है जिस के घर में खाटू वाले की तस्वीर लगाई जाती है जिस घर में नीले वाले की नित जोत जगाई जाती है खाटू वाले श्याम जी कमाल हो गया, बंदा तेरा बाबा, मालामाल हो गया ग्यारस चांदण की आई भगता मिल ज्योत जगाई झांझ मजीरा बाजे आंगणे इत्यादि भजनों की लय पर श्याम भक्तगण श्याम मस्ती में झूम रहे थे। इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को श्री श्याम प्रभु का प्रिय खीर चूरमा का भोग, छप्पन भोग अर्पित कर विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा, केसरिया दूध, मगही पान का भोग अर्पित किया गया।  रात्रि 1 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया साथ आज के इस कार्यक्रम का श्याम मंडल, रांची के अपने यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया।  आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश सारस्वत, गोपी किशन ढांढनीयां, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, बालकिशन परसरामपुरिया, प्रदीप अग्रवाल, प्रमोद बगड़िया, अमित जलान, विकास पाड़िया, नितेश केजरीवाल, ज्ञान प्रकाश बागला, प्रियांश पोद्दार, महेश सारस्वत का विशेष सहयोग रहा।उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी। नोट- कल दिनांक 2 नवंबर को  द्वादशी के उपलक्ष में संध्या 5 बजे श्याम बाबा को खीर चूरमा का भोग अर्पित कर भक्तों के बीच वितरण किया जायेगा।

देव उठनी एकादशी पर आश्रम में मंदबुद्धि निराश्रितों की सेवा एवं कराया गया भोजन
Published / 2025-11-01 19:52:23
देव उठनी एकादशी पर आश्रम में मंदबुद्धि निराश्रितों की सेवा एवं कराया गया भोजन

आश्रम में समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। परमहंस डा० संत शिरोमणी श्री श्री 108 स्वामी सदानंद महाराज के सान्निध्य में श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में संचालित विगत 22 माह से चल रहे पीड़ित मानव सेवा के पावन तीर्थ स्थल मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम पुंदाग के प्रांगण में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार) रांची में आज देव उठानी एकादशी के पावन अवसर पर दोपहर का भोजन ऋषभ कुमार एवं कनिष्क कुमार तथा रात का भोजन कनिष्क नारायण के सौजन्य से आश्रम में रह रहे 42 मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रहकर उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों के बीच विभिन्न व्यंजनों के साथ अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसादी का विधिवत आश्रम के किचन में भोजन बनवाकर भोजन खिलाया गया। अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि 7 अक्टूबर से 1 नवंबर तक 26 दिनों मे 5340 निराश्रित प्रभुजी एवं उनकी देखभाल करने वाले सेवादार साथियों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम सदगुरू कृपा अपना घर (सत्य-प्रेम सभागार) में-रिलायंस क्लब, अद्वित झा, निशि शरण, आशा श्रेष्ठ, शिवा सिंह, सुनीता चौधरी, विकास पटानी जयपुर, संजय साहू, शंकर लाल मोदी, अमरेश आर्य, ज्ञानचंद शर्मा, दिलीप गुप्ता, पीआर मोदी, विजय कुमार अग्रवाल, कविता वेंकट, अलका रंजन, राहुल आनंद, सुजीत गोस्वामी, राकेश दास, निर्मल छावनिका, संजय अग्रवाल, स्व० रामचंद्र रुंगटा, स्व० सुरेश पोद्दार, सुरेखा साहू के सौजन्य से सभी निराश्रित प्रभुजी को भोजन प्रसादी खिलाकर सेवा की गयी। सभी ने ट्रस्ट के सदस्यों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं अपना अमूल्य आशीर्वाद दिया। प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि ठंड के मौसम को देखते हुए ब्लेयर अपार्टमेंट सुपर 9 ग्रुप के सौजन्य से 51 कंबल, तथा दिनेश सर्राफ के सौजन्य से 50 ट्रैक सूट आश्रम में रह रहे सभी निराश्रित, मंदबुद्धि, दीनबंधुओं को प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि सेवा कार्यों को समाज के हर वर्ग का सहयोग और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। अन्नपूर्णा सेवा के पुनीत कार्य में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया,पवन कुमार पोद्दार, विष्णु सोनी सहित अन्य सदस्यगण उपस्थित थे। उक्त जानकारी सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम और श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।

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