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31 को धूमधाम से निकलेगी भगवान महावीर की शोभायात्रा
Published / 2026-03-25 21:18:20
31 को धूमधाम से निकलेगी भगवान महावीर की शोभायात्रा

31 को धूमधाम से निकलेगी भगवान महावीर की शोभायात्राटीम एबीएन, रांची। श्री जैन श्वेतांबर संघ, रांची भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य मे शोभायात्रा जैन श्वेतांबर मंदिर डोरंडा से दिनांक 31-मार्च को सुबह 8 बजे धूमधाम से निकालेगी।जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर श्री भगवान महावीर का 2625वां जन्म कल्याणक महोत्सव 31/03/2026 को है। इसलिए मंगलवार को सुबह 8.30 बजे श्रीजैन श्वेतांबर मंदिर डोरंडा से भगवान की शोभायात्रा धूमधाम गाजे बाजे के साथ निकलेगी, जो तुलसी चौक, मेकॉन चौक, हाइकोर्ट होते हुए वापस 10.30 बजे मंदिर पहुंचेगी।तत्पश्चात भगवान महावीर से जुड़े धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन सुबह 10:30 बजे से किया गया है ओर 1 बजे से स्वामी वात्सल्य का कार्यक्रम है। रांची की वर्तमान मेयर श्रीमती रोशनी खलखो एवं पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप मे भाग लेंगे।श्री जैन श्वेताम्बर संघ के संरक्षक सम्पत लाल रामपुरिया, अध्यक्ष सुभाष बोथरा, सचिव विमल दस्सानी, उपाध्यक्ष घेवर चंद नाहटा के द्वारा समाज के सभी लोगो को समय से पहुंच कर कार्यक्रम मे अधिक से अधिक संख्या मे भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आग्रह किया गया है। इसके संरक्षक संपत लाल रामपुरिया, अध्यक्ष सुभाष बोथरा और सचिव विमल दस्सानी हैं। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में प्रतिदिन अन्नपूर्णा वेजिटेबल खिचड़ी भोग का वितरण
Published / 2026-03-25 21:09:27
श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में प्रतिदिन अन्नपूर्णा वेजिटेबल खिचड़ी भोग का वितरण

श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में प्रतिदिन अन्नपूर्णा वेजिटेबल खिचड़ी भोग का वितरणएबीएन सोशल डेस्क। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में विगत 3 माह से प्रतिदिन खिचड़ी भोग प्रसाद का वितरण किया जा रहा है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल एवं प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में विगत 20 दिसंबर 2025 से प्रत्येक दिन अन्नपूर्णा वेजिटेबल खिचड़ी भोग का वितरण दोपहर 12:30 बजे से 2 बजे तक किया जाता है, प्रतिदिन खिचड़ी प्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडेय लगाते हैं। तत्पश्चात श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी भोग का वितरण किया जायेगा। ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ बताया कि ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी डॉ सदानंद जी महाराज के सानिध्य मे प्रतिदिन मंदिर परिसर में अन्नपूर्णा खिचड़ी भोग सेवा चलाया जा रहा है। जहां प्रतिदिन लगभग 400 लोग वेजिटेबल खिचड़ी भोग ग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट द्वारा विगत 5 वर्षों से मंदिर मे प्रत्येक रविवार को श्री कृष्णा प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद भंडारा का आयोजन किया जाता है। तथा मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

श्री हनुमान मंडल, रांची का 48वां वार्षिक महोत्सव 29 को
Published / 2026-03-24 20:29:51
श्री हनुमान मंडल, रांची का 48वां वार्षिक महोत्सव 29 को

श्री हनुमान मंडल, रांची का 48वां वार्षिक महोत्सव 29 कोछप्पन भोग, सवामनी का भोग  भक्तों के द्वारा अर्पित किया जायेगाश्री गणेश पूजन एवम सुंदरकांड के सामूहिक पाठ के साथ महोत्सव की होगी शुरुआतटीम एबीएन, रांची। रांची की धार्मिक व सामाजिक संस्था श्री हनुमान मंडल, रांची का एक दिवसीय 48 वा वार्षिक महोत्सव 29 मार्च को श्री राणी सती मंदिर परिसर रातू रोड के हनुमान बक्स पोद्दार सत्संग भवन के सभागार में बड़े ही धूमधाम से मनाया जायेगा। श्री हनुमान मंडल के अध्यक्ष सज्जन पाड़िया व मंत्री श्रवण अग्रवाल ने उपरोक्त जानकारी प्रेसवार्ता के माध्यम से दी।उन्होंने बताया एक दिवसीय महोत्सव  प्रात: 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक सत्संग भवन के सभागार में मनाया जायेगा। प्रात: 7 बजे मुख्य यजमान के द्वारा श्री गणेश पूजन के साथ महोत्सव की शुरूआत की जायेगी। प्रात: 8:30 बजे श्री बालाजी महाराज की अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित के साथ प्रात: 8:30 बजे से सामूहिक सुंदरकांड का पाठ सुरेश बजाज के सानिध्य में सैकड़ों बाला जी के भक्तों के साथ सामूहिक रूप में किया जायेगा। मौके पर श्री बाला जी का भव्य दरबार,  नैनाभिराम झांकी, फूलों के अलौकिक श्रृंगार के साथ आप दर्शन कर सकेंगे। दोपहर में श्री बाला जी के भक्तों के द्वारा छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया जायेगा।साथ ही रांची की धार्मिक संस्था श्री श्याम मंडल, श्री श्याम परिवार और श्री दुर्गा जागरण मंडली रातू रोड के भक्तों द्वारा भजनों की गंगा प्रवाह की जायेगी। इस उपलक्ष्य पर दिल्ली से पधारी भावना स्वराजली एवं बरेली के  डी के राजा जो भजनों के सम्राट माने जाते है उनके द्वारा श्री बालाजी महाराज के भजनों की अमृत वर्षा का लाभ आप ले सकेंगे, जो रात्रि तक चलेगा। रात्रि 9 बजे महाआरती के संग प्रसाद का वितरण भी सामूहिक रूप से किया जायेगा। आयोजन को सफल बनाने के लिए मंडल के कई सदस्य दिन-रात लगे हुए हैं। प्रचार मंत्री निर्मल बुधिया ने बताया की जो लोग भी बाबा को छप्पन भोग व सवामनी प्रसाद अर्पित करना चाहते हैं। सज्जन पाड़िया एवं श्रवण अग्रवाल से संपर्क कर अपना नाम लिखवा सकते हैं। साथ ही साथ 29 मार्च को प्रात: 8:30 बजे से पाठ वाचक सुरेश बजाज के सानिध्य में होने वाले सामूहिक सुंदरकांड पाठ में जो भी धर्म प्रेमी भाग लेना चाहते हैं वह सुंदरकांड पाठ का कार्ड अवश्य प्राप्त कर ले। सजन पाड़िया व श्रवण अग्रवाल ने वार्षिक महोत्सव में रांची के सभी धर्म प्रेमियों को सपरिवार आमंत्रित किया है। उन्होंने अपील की है एक दिवसीय वार्षिक महोत्सव के सभी कार्यक्रमों में भाग लेकर  आप पुण्य अर्जित करने का कार्य करें।प्रेस वार्ता में अध्यक्ष सजन पाड़िया, मंत्री श्रवण अग्रवाल, कोषाध्यक्ष शिव भावसिंहका, निर्मल बुधीया, नवल टिबड़ेवाल, निरंजन केडिया, प्रकाश धेलिया, विभोर डागा, नरेंद्र डीडवानिया, रमन बगड़िया, नितिन भावसिंहका, विजय खोवाल, नारायण अग्रवाल, अरुण बाजोरिया, प्रवीण मोदी, हनुमान बेड़िया, सहित कई लोग उपस्थित थे। उक्त जानकारी अध्यक्ष साजन पड़िया और प्रचार मंत्री निर्मल बुधिया ने दी।

रामनवमी महापर्व 27 मार्च को
Published / 2026-03-24 15:00:01
रामनवमी महापर्व 27 मार्च को

रामनवमी महापर्व 27 मार्च कोभारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व जो आस्था, मर्यादा और आदर्शों का देता है संदेश: संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में अनेक पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें महा रामनवमी का विशेष स्थान है। यह पावन पर्व भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष रामनवमी का पर्व 27 मार्च को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है, जो हिंदू नववर्ष के आरंभिक दिनों में पड़ता है और नए संकल्पों, धर्म एवं सत्य के पालन का संदेश देता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ के यहां लंबे समय तक संतान नहीं थी। उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसके फलस्वरूप उनके यहां चार पुत्रों का जन्म हुआ, जिनमें भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को हुआ। भगवान राम को विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है, जिन्होंने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए जन्म लिया। उनका जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्शों का अनुपम उदाहरण है।रामनवमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा भी है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में हर रिश्ते और कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। उन्होंने एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई और आदर्श राजा के रूप में समाज को दिशा दी। आज के युग में जब नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है, तब रामनवमी हमें सत्य, न्याय और अनुशासन का पालन करने की प्रेरणा देती है।रामनवमी के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और रामचरितमानस का पाठ होता है। विशेष रूप से अयोध्या में इस दिन भव्य आयोजन होते हैं, जहां सरयू नदी में स्नान कर भक्त भगवान राम के जन्मोत्सव में भाग लेते हैं। जब राम जन्म का मुहूर्त होता है, मंदिरों में घंटा-घड़ियाल बजाकर और जयकारों के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।इस दिन शोभायात्राएं निकाली जाती हैं, झांकियां सजाई जाती हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। कई स्थानों पर रामलीला का मंचन भी किया जाता है, जिससे लोगों को भगवान राम के जीवन की प्रेरणादायक घटनाओं से परिचित कराया जाता है।आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में रामनवमी का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह पर्व हमें अपने जीवन में संयम, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा अपनाने की सीख देता है। भगवान राम का जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। महारामनवमी भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो आस्था, मर्यादा और आदर्शों का संगम है। यह न केवल भगवान राम के जन्म का उत्सव है, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का अवसर भी है। यदि हम उनके जीवन के सिद्धांतों को अपनाएं, तो समाज में शांति, सद्भाव और नैतिकता का विस्तार संभव है। यही इस महान पर्व का वास्तविक उद्देश्य है।

डॉ राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे : संजय सर्राफ
Published / 2026-03-23 23:56:17
डॉ राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे : संजय सर्राफ

डॉ राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे : संजय सर्राफ टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि राम मनोहर लोहिया जयंती हर वर्ष 23 मार्च को मनाई जाती है। यह दिन भारत के महान समाजवादी चिंतक, स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर वक्ता डॉ. लोहिया के जन्म (23 मार्च 1910) की स्मृति में समर्पित है। डॉ लोहिया का जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर मे हुआ था। डॉ लोहिया जयंती के अवसर पर देशभर में उनके विचारों, सिद्धांतों और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया जाता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं में से एक थे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभायी, लेकिन बाद में समाजवादी विचारधारा को मजबूत करने के लिए स्वतंत्र मार्ग अपनाया। वे सामाजिक समानता, आर्थिक न्याय और जातिवाद के विरोध के प्रबल समर्थक थे। लोहिया जयंती मनाने का मुख्य उद्देश्य उनके आदर्शों और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने सप्त क्रांति का सिद्धांत दिया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, लैंगिक और राजनीतिक असमानताओं को समाप्त करने का आह्वान किया गया। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब समाज विभिन्न प्रकार की असमानताओं से जूझ रहा है। डॉ. लोहिया का मानना था कि सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिले। उन्होंने ग्रामीण विकास, महिलाओं के अधिकार और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर विशेष जोर दिया। उनका जीवन सादगी, संघर्ष और जनसेवा का अद्भुत उदाहरण रहा है।लोहिया जयंती के अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक मंचों पर विचार गोष्ठियों, सेमिनारों और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।आज के दौर में जब समाज में असमानता, बेरोजगारी और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, तब डॉ. लोहिया के विचार मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। उनका संदेश स्पष्ट था-समाज में न्याय, समानता और भाईचारे की स्थापना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। अत: लोहिया जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प दिवस है।

रांची : गणगौर महोत्सव हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया
Published / 2026-03-21 20:51:24
रांची : गणगौर महोत्सव हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया

टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में मारवाड़ी एवं राजस्थानी समाज द्वारा मनाया जाने वाला पारंपरिक पर्व गणगौर महोत्सव इस वर्ष भी हर्षोल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने अपने-अपने घरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता गणगौर की विधिवत पूजा-अर्चना की।सुबह से ही महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधानों-लहंगा, ओढ़नी और आभूषणों से सुसज्जित होकर माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतीक गणगौर कीप्रतिमाओं का श्रृंगार किया। घर-घर में मंगल गीतों की गूंज सुनाई दी और सुहागिन महिलाओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना की, वहीं अविवाहित युवतियों ने मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए पूजा की।संध्या समय शहर के विभिन्न तालाबों एवं जलाशयों के किनारे महिलाओं का समूह एकत्रित हुआ, जहां पारंपरिक लोकगीतों और नृत्य के बीच गणगौर की प्रतिमाओं का विधिपूर्वक विसर्जन किया गया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि गणगौर महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को भी सुदृढ़ करता है। इस पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।इस प्रकार रांची सहित पूरे झारखंड में गणगौर महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ, जिसने शहर के सांस्कृतिक वातावरण को और भी समृद्ध बना दिया।

नव संवत्सर पर संस्कार भारती का साहित्यिक कार्यक्रम
Published / 2026-03-20 18:41:42
नव संवत्सर पर संस्कार भारती का साहित्यिक कार्यक्रम

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति के नवोदय का प्रतीक : डॉ अंकन संस्कार भारती का भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर साहित्यिक कार्यक्रम संपन्न  टीम एबीएन, रांची। भारतीय नववर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के अवसर पर संस्कार भारती, रांची महानगर ने एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसका शुभारंभ सुजाता मजूमदार एवं उनकी टीम ने ध्येय गीत एवं सरस्वती वंदना से की। दीप प्रज्ज्वलन झारखंड प्रांत अध्यक्ष डॉ. सुशील अंकन ने किया। डॉ. अंकन ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा भारतीय संस्कृति के नवोदय का प्रतीक है और ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त करते हैं। संगीत प्रस्तुति में सुजाता मजूमदार, जेपी सिंह, इंदु पराशर, बबीता शर्मा, मृदुला पाठक एवं विजय खोवाला ने मधुर गायन प्रस्तुत किया्। तबले पर अनूप कुमार ने अपना सहयोग दिया। भरतनाट्यम नृत्यांगना गार्गी शोम ने देवी के विभिन्न स्वरूपों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। काव्य गोष्ठी में कवियों ने नववर्ष की अपनी मंगल भावनाएं व्यक्त की आशुतोष प्रसाद— नव अरुणिम आभा लेकर, फिर वर्ष नया मुस्काया है... जवाहरलाल— चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा का हुआ आगमन... रेणु झा रेणुका— जगमग ज्योत देख, आये तेरे द्वार है दुर्गा महारानी... ऋतुराज वर्षा- जप लो श्रीराम का नाम सुनीता अग्रवाल— हे मर्यादा पुरुषोत्तम राम... रंजना वर्मा उन्मुक्त— मन-मन दीप जला दो आज... विभा वर्मा— शिवांगी बन भवानी मां... रेणु बाला धार— नव वर्ष अभिनंदन... निर्मला कर्ण— सजा है माता का दरबार... खुशबू बरनवाल सीपी— शुद्ध रखो मन वंदन को... आदि ने अपनी स्वरचित रचनाओं को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में अध्यक्ष रामानुज पाठक ने कहा कि भारतीय नववर्ष हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक है। भूतपूर्व सदस्य जेपी श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का संचालन शशिकला पौराणिक ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन आशुतोष प्रसाद ने दिया।इस अवसर पर डॉ. सुजाता मजूमदार, अनूप मजूमदार, बिंदिया कुमारी, अंश सिद्धार्थ, अभिनव सिद्धार्थ, नवेन्दु उन्मेष, कुमकुम गौड़, मिथिलेश पाठक एवं शिव कुमार पाठक सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

वासंतिक नवरात्र : मां की विशेष कृपा पाने के लिए चढ़ायें ये फूल...
Published / 2026-03-19 18:25:44
वासंतिक नवरात्र : मां की विशेष कृपा पाने के लिए चढ़ायें ये फूल...

नवरात्रि के 9 दिनों में देवी मां को चढ़ाएं ये खास नौ फूल, मिलेगी विशेष कृपा एबीएन सोशल डेस्क। आज यानी 19 मार्च 2026, गुरुवार से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व 27 मार्च को राम नवमी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर दिन उन्हें विशेष फूल अर्पित करने का महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही फूलों से पूजा करने पर माता रानी जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। आइये जानते हैं नौ दिनों तक किस देवी को कौन सा फूल अर्पित करना चाहिए। नौ दिनों तक देवी मां को अर्पित करें ये खास फूल।  पहला दिन मां शैलपुत्री नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें सफेद कनेर और गुड़हल का फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। इस दिन उन्हें चमेली या कोई भी सफेद फूल अर्पित करना शुभ और लाभकारी माना जाता है, जिससे साधक को तप, संयम और आत्मबल की प्राप्ति होती है। तीसरा दिन मां चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें कमल या शंखपुष्पी का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे साहस, शांति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की प्राप्ति होती है। चौथा दिन मां कुष्मांडा नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें गेंदे के फूल और पीले रंग के पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। पांचवां दिन मां स्कंदमाता नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें पीला गुलाब या चंपा का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे भक्तों को संतोष, सुख और संतान से जुड़ी खुशियों की प्राप्ति होती है। छठा दिन मां कात्यायनी नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। इस दिन उन्हें लाल गुलाब या लाल गेंदे के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे साहस, शक्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने की क्षमता प्राप्त होती है। सातवां दिन मां कालरात्रि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें कृष्ण कमल या रात की रानी के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और भय व बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आठवां दिन मां महागौरी नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन उन्हें मोगरा या बेला के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में शांति, सौंदर्य और पवित्रता का संचार होता है। नौवां दिन मां सिद्धिदात्री नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन उन्हें लाल कमल या चंपा के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे भक्तों को सिद्धि, सफलता और मनचाही इच्छाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आप नवरात्रि के किसी भी दिन माता रानी को लाल गुलाब अर्पित कर सकते हैं। इसे प्रेम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

हिंदू नववर्ष विक्रम संवत परंपरा, आस्था और नवचेतना का प्रतीक : संजय सर्राफ
Published / 2026-03-19 18:21:12
हिंदू नववर्ष विक्रम संवत परंपरा, आस्था और नवचेतना का प्रतीक : संजय सर्राफ

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि नयी ऊर्जा, नयी आशाओं और नए संकल्पों का आरंभ होता है। हिंदू नववर्ष, जिसे विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष विक्रम संवत 2083 के रूप में मनाया जायेगा। यह पावन पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है, इस वर्ष नवसंवत्सर 19 मार्च से प्रारंभ हो रहा है तथा इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार नवसंवत्सर का विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन सृष्टि की रचना भगवान ब्रह्मा द्वारा की गयी थी, इसलिए इसे सृष्टि का प्रथम दिवस भी माना जाता है।साथ ही, यह भी कहा जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त कर विक्रम संवत की स्थापना की थी, जिसके कारण यह कालगणना भारतीय परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित है। नववर्ष का यह पर्व भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादि, कश्मीर में नवरेह और सिंधी समाज में चेटीचंड के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। इन सभी उत्सवों में एक समान भाव है- नयी शुरुआत और सकारात्मकता का स्वागत, नवसंवत्सर का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में अनुशासन,संयम और आत्मचिंतन का संदेश देता है। इस दिन लोग प्रात:काल स्नान कर घरों में ध्वज या पताका लगाते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं। यह दिन यह भी सिखाता है कि बीते वर्ष की गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। इस पर्व की महत्ता सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह लोगों को एकजुट करता है, आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देता है तथा भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का कार्य करता है। नववर्ष के अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और समृद्धि, सुख-शांति की कामना करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस अवधि में प्रकृति में परिवर्तन होता है। वसंत ऋतु अपने चरम पर होती है, पेड़-पौधों में नई कोंपलें फूटती हैं और वातावरण में नवजीवन का संचार होता है। यह प्रकृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है, जो मानव जीवन में भी नयी ऊर्जा भरता है। अत: हिंदू नववर्ष विक्रम संवत केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई, आस्था और जीवन दर्शन का प्रतीक है। यह हमें हर वर्ष नयी शुरुआत करने, सकारात्मक सोच अपनाने और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता है।

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