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मारवाड़ी भवन मारवाड़ महोत्सव में दूसरे दिन भी लोगों की उमड़ी भीड़
Published / 2026-01-17 21:44:43
मारवाड़ी भवन मारवाड़ महोत्सव में दूसरे दिन भी लोगों की उमड़ी भीड़

मारवाड़ महोत्सव के दूसरे दिन लोगों ने जमकर की मस्ती, कठपुतली डांस ने लोगों का मन मोहा टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन एवं मारवाड़ी सहायक समिति के संयुक्त तत्वावधान में मारवाड़ी भवन में चल रहे तीन दिवसीय मारवाड़ महोत्सव के दूसरे दिन भी अच्छी भीड़ उमड़ी। लोगों को राजसी परंपराएं, जीवंत संस्कृति मारवाड़ी गौरव का भव्य संगम देखने को मिल रहा है। राजस्थान से पधारे 40  राजस्थानी कलाकारों द्वारा लोक कला, लोकगीत, नृत्य, कठपुतली नृत्य, हास्य और पारंपरिक रंग तथा राजस्थान की समृद्ध संस्कृति एवं स्वादिष्ट व्यंजनों की भरपूर आनंद दे रहे हैं तथा महोत्सव में लोग राजस्थानी व्यंजन चोखी धाणी में 30 से भी अधिक राजस्थानी स्वादिष्ट व्यंजन का लुत्फ उठा रहे हैं। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में घूमर नृत्य, कालबेलिया, लोकगीत, लोकनाट्य महोत्सव  में राजस्थान की जीवित परंपराओं को जीवंत कर दिया है। साथ ही साथ मेहंदी रचनी-पारंपरिक डिजाइनों से सजे हाथ, अपनी संस्कृति ने जाणो-मारवाड़ी परंपरा और विरासत की प्रस्तुति, मारवाड़ री मंच-लोक कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, रंग भरो राजस्थान- रंगीली और रंगों की रचनात्मक छंटा, घूमर डांस- राजस्थानी लोक नृत्य की शान, कुण है फुतारो-पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता, अपणी माटी रो गीत- मिट्टी से जुड़े मधुर लोकगीत, पगड़ी रो पेंच-मारवाड़ी शान और पगड़ी बांधने की कला, हंस लो सा-हास्य से भरपूर मनोरंजन, के साथ-साथ हुक्का, कुएं में पानी का सेल्फी प्वाइंट, भाग्य बताते तोता पंडित, निशानेबाजी, बैलून फोड़ना, कठपुतली डांस से जीवंतता प्रदान करने का प्रयास, जयपुर से आये सुनील भट्ट की 24 सदस्य टीम ने ढोलक की थाप से लोकगीत, कलाकारों द्वारा मारवाड़ी वेशभूषा में नृत्य संगीत गीत की अलग-अलग अनूठे अंदाज में प्रस्तुत कर लोगों को खूब झुमाया। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने बताया कि मारवाड़ी भवन में राजस्थान की खुशबू रांची में देर रात तक चला तथा मारवाड़ महोत्सव में झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, महामंत्री विनोद कुमार जैन, वरीय उपाध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार, मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, आयोजन समिति के अरुण भरतीया,अनुज अग्रवाल, विकास मोदी, अभिषेक झाझरिया, डॉली केजरीवाल, शशांक बजाज, मोनिका अग्रवाल, विनीता सिंघानिया, कुणाल जालान, शैलेश अग्रवाल, निकुंज पोद्दार, रमन बोड़ा, अशोक नारसरिया, मनोज चौधरी,कौशल राजगढ़िया, सज्जन पाड़िया, निर्मल बुधिया, अनिल अग्रवाल, किशन पोद्दार,संजय सर्राफ, सुनील पोद्दार, अमर अग्रवाल, नारायण विजयवर्गीय, भरत बगड़िया, कमल शर्मा एवं दोनों संस्थाओं के पदाधिकारियों एंव सदस्यगण अहम भूमिका निभा रहे हैं। अंतिम दिन 18 जनवरी रविवार को शाम 5 से बजे से नानी बाई को मायरो का जीवंत नृत्य नाटिका का भव्य आयोजन किया गया है।

झारखंड चित्रांश विचार मंच ट्रस्ट ने हरमू हॉस्पिटल एंड रिचर्स सेंटर को दिया मर्चरी फ्रीजर बॉक्स
Published / 2026-01-17 18:44:21
झारखंड चित्रांश विचार मंच ट्रस्ट ने हरमू हॉस्पिटल एंड रिचर्स सेंटर को दिया मर्चरी फ्रीजर बॉक्स

टीम एबीएन, रांची। मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए झारखंड चित्रांश विचार मंच ट्रस्ट के सौजन्य से आज हरमू हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, रांची को एक मर्चरी फ्रीजर बॉक्स प्रदान की गयी। यह मर्चरी फ्रीजर बॉक्स अस्पताल में मृतकों के पार्थिव शरीर के संरक्षण हेतु अत्यंत उपयोगी साबित होगी, जिससे शोकाकुल परिजनों को आवश्यक समय और सुविधा मिल सकेगी। उक्त जानकारी मंच की ओर से देते हुए राजीव सहाय ने कहा कि सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत यह सहयोग समाज के प्रति संस्था की संवेदनशीलता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचायक है। ट्रस्ट का मानना है कि कठिन समय में परिवारों को गरिमा और सुविधा प्रदान करना भी समाज सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंच द्वारा भविष्य में भी जनहित में ऐसे कार्य निरंतर किये जाते रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर कोई भी व्यक्ति अस्पताल के नंबर (90310 56363/0651-2245544) पर संपर्क करके यह मर्चरी फ्रीजर बॉक्स उपयोग में ले सकता है। इस मानवीय पहल में जिन प्रमुख लोगों का योगदान रहा, उनमें राजीव सहाय, डॉ. सुहाष तेतरवे, प्रखर जयपुरियार, संजय पिपरवाल, अमरेश श्रीवास्तव, डॉ अनल सिन्हा, श्रीकांत शरण, आनंद श्रीवास्तव, साकेत बिहारी शरण प्रमुख हैं। अस्पताल प्रबंधन ने झारखंड चित्रांश विचार मंच ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुविधा अस्पताल की सेवाओं को और अधिक मानवीय एवं व्यवस्थित बनायेगी। उक्त जानकारी राजीव सहाय ने दी।

लायंस क्लब रांची समर्पण की लायन रूपम झा ने मकर संक्रांति पर करवायी गंगा आरती
Published / 2026-01-15 22:53:50
लायंस क्लब रांची समर्पण की लायन रूपम झा ने मकर संक्रांति पर करवायी गंगा आरती

लायंस क्लब रांची समर्पण द्वारा, लायन रूपम झा के प्रायोजन से मकर संक्रांति की  संध्या पर भव्य गंगा आरती का आयोजनटीम एबीएन, रांची। लायन रूपम झा के प्रायोजन से, लायंस क्लब रांची समर्पण द्वारा मकर संक्रांति की पावन पूर्व संध्या पर दुर्गा मंदिर, मोरहाबादी में एक भव्य एवं आध्यात्मिक गंगा आरती का आयोजन किया गया।इस पावन आयोजन में लगभग 500 श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। गंगा आरती का विधिवत संचालन पियूष पाठक टीम द्वारा किया गया, जिनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई।इस अवसर पर लायन सुमिता बेदी, एमजेएफ लायन सीमा सिंह, लायन रीना अग्रवाल, लायन सिंधु बाला एवं लायन नीलम कुमारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। गंगा आरती के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।कार्यक्रम का नेतृत्व लायंस क्लब रांची समर्पण की अध्यक्ष एमजेएफ लायन रीना अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक सद्भाव एवं सेवा भावना को सुदृढ़ करते हैं।मकर संक्रांति की संध्या पर आयोजित यह गंगा आरती श्रद्धा, भक्ति एवं सामाजिक समरसता का प्रेरणादायक उदाहरण बनी।

एआई आधारित टूल रक्षा से ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों को वापस ला सकता है झारखंड
Published / 2026-01-15 21:53:40
एआई आधारित टूल रक्षा से ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों को वापस ला सकता है झारखंड

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित टूल रक्षा के देशव्यापी लांच से बाल विवाह और इंटरनेट पर बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (सी-सीम) के चिंताजनक प्रसार पर काबू पाने में झारखंड सरकार के प्रयासों को एक प्रभावी औजार मिल सकता है जो उसे बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों से निपटने के उपायों को गति दे सकता है। यह एक तथ्य है कि झारखंड के आर्थिक रूप से कमजोर व हाशिये के परिवारों के बच्चे ट्रैफिकिंग गिरोहों के चंगुल में फंस जाते हैं। इन बच्चों को खतरनाक उद्योगों में झोंक दिया जाता है या फिर लड़कियों की किसी अधेड़ से शादी कर दी जाती है। दुनिया में अपनी तरह के इस अनूठे प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने विकसित किया है जो उन्नत एआई क्षमताओं का उपयोग कर देश भर के आंकड़ों का विश्लेषण कर वास्तविक समय में बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, संवेदनशील बच्चों और समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग जैसे मुनाफे वाले संगठित अपराध में शामिल गिरोहों की निगरानी, उसके स्रोत और गंतव्य बिंदुओं की ट्रैकिंग, तथा शोषण के उभरते रुझानों व नए केंद्रों का पता लगाने में सक्षम बनाता है।  दुनिया में अपनी तरह के इस अनूठे प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल रक्षा को प्रॉस्पेरिटी फ़्यूचर्स : चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट में लांच किया गया, जो एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम है। यह सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने अपने रणनीतिक साझेदार इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के साथ मिलकर आयोजित किया। बाल संरक्षण के लिए अपनी तरह के इस पहले टूल रक्षा की सराहना करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन सबसे संवेदनशील तबकों और लोगों की सुरक्षा में निहित है। बच्चे हमारे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि जिस डिजिटल दुनिया और कृत्रिम मेधा (एआई) को वे विरासत में पायें, वह सुरक्षित, समावेशी और सशक्त करने वाली हो। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन की ओर से बच्चों की सुरक्षा, सशक्तीकरण और संरक्षण के लिए एआई-आधारित प्लेटफॉर्म की शुरुआत एक क्रांतिकारी कदम है। बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के 250 से भी ज्यादा सहयोगी संगठन 451 जिलों में काम कर रहे हैं। अकेले झारखंड में ही नेटवर्क के 22 सहयोगी संगठन राज्य के 24 जिलों में काम कर रहे हैं। बाल विवाह, बाल मजदूरी और आनलाइन यौन शोषण जैसे बच्चों के खिलाफ अपराधों के खात्मे के लिए समय रहते हस्तक्षेप और अदृश्यता सबसे अहम पहलू हैं। ऐसे में एआई आधारित यह टूल कानून लागू करने वाली एजेंसियों, समुदायों और जमीन पर काम कर रहे संगठनों के लिए करामाती साबित हो सकता है। हालांकि, झारखंड देश के उन चंद राज्यों में है जहां पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार कमी देखने को मिली है लेकिन रक्षा राज्य के बाल सुरक्षा तंत्र को और मजबूती देने के साथ समय रहते हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में सहायक होगा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2023 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 2021 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1867 और 2022 में 1917 मामले दर्ज किये गये। लेकिन 2023 में यह संख्या घटकर 1626 रह गयी।  इस बात को रेखांकित करते हुए कि रक्षा किस प्रकार बाल संरक्षण के पूरे ईको-सिस्टम को रूपांतरित कर सकता है, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ करने और बच्चों की सुरक्षा व समृद्धि को आगे बढ़ाने में एआई के उपयोग में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। तकनीक के उपयोग से दुनिया का सबसे समग्र बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में रक्षा भारत के वैश्विक नेतृत्व का एक ऐतिहासिक पड़ाव है। रक्षा का एक मंच के रूप में उपयोग करते हुए भारत तकनीक के सहारे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे और हर संवेदनशील परिवार की पहचान और निगरानी कर सकता है। आंकड़ों को ज्ञान और ठोस कार्रवाई में रूपांतरित कर यह दृष्टिकोण न्याय तक पहुंच का विस्तार कर रहा है, संवेदनशील परिवारों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार ला रहा है और बच्चों के सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ कर रहा है। साथ मिलकर हम हर बच्चे के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। रक्षा का फोकस अपने तीन लक्ष्य केंद्रित टूल के जरिए बाल सुरक्षा तंत्र में पूर्वानुमान, बचाव व सुरक्षा पर है। पहला टूल व्यापक स्तर पर परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर रोकथाम पर काम करता है, विशेषकर बाल विवाह के विरुद्ध। दूसरा टूल ट्रैफिकिंग जैसे संगठित आर्थिक अपराध से निपटता है। यह अपराध के घटित होने से पहले ही उसका पूवार्नुमान और रोकथाम, व दूसरी ओर पैसे के लेनदेन की पड़ताल कर संगठित आपराधिक गिरोहों की जड़ों और उनके विस्तार की पहचान करने पर केंद्रित है। तीसरा टूल डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त करता है और यह बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, उसके अपलोड, डाउनलोड और देखने से जुड़े आनलाइन हीट जोन और आईपी पतों का पता लगाने, उनके विश्लेषण और मानचित्रण में सक्षम है। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

17 को मारवाड़ी सम्मेलन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक रांची में
Published / 2026-01-14 20:43:32
17 को मारवाड़ी सम्मेलन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पहली बैठक रांची में

17 जनवरी को अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की प्रथम बैठक रांची के मारवाड़ी भवन में टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में 17 जनवरी 2026 शनिवार को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की बैठक का आयोजन किया जा रहा है। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के आतिथ्य में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की एक दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक रांची हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन के बहुउद्देशीय सभागार में पूर्वाह्न- 11 बजे से प्रारंभ होगी। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल एवं महामंत्री विनोद कुमार जैन ने संयुक्त रूप से बताया कि यह बैठक कई दृष्टियों से ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 40 वर्षों के उपरांत झारखंड के रांची शहर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की मेजबानी का अवसर प्राप्त हो रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका, राष्ट्रीय महामंत्री केदारनाथ गुप्ता सहित देश के विभिन्न राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, दिल्ली, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों से आये प्रतिनिधि भाग लेंगे। बैठक में समाज से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों, संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण, सामाजिक एकता, शिक्षा, सेवा एवं विकास से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जायेगा।साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर भावी नीतियों के निर्धारण पर भी गंभीर चर्चा की जायेगी। उन्होंने बताया कि यह आयोजन न केवल झारखंड, बल्कि पूरे मारवाड़ी समाज के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि इस बैठक से समाज को नयी दिशा और ऊर्जा मिलेगी। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी। उन्होंने समाज के सभी प्रबुद्धजनों एवं प्रतिनिधियों से इस आयोजन को सफल बनाने की अपील की है। 

श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी षटतिला एकादशी
Published / 2026-01-14 20:42:25
श्री श्याम मंदिर में धूमधाम से मनी षटतिला एकादशी

टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में आज दिनांक 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी उत्सव अत्यंत श्रद्धा भक्ति के साथ उत्साह पूर्वक आयोजित किया गया। मौके पर श्री श्याम देव को प्रात: नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर गुलाब, जरबेरा, गुलदाऊदी, तुलसी दल, गेंंदा से मनमोहक श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार और बजरंगबली का भी विशेष श्रृंगार किया गया तथा मकर संक्रांति और वर्ष की पहली एकादशी पर प्रात: से ही भक्तों की कतार बाबा के दर्शन करने हेतु लगने लगी। भक्तगण अपनी हाथों में लाल गुलाब और प्रसाद श्री श्याम प्रभु को अर्पित करने में लगे हुए थे।  रात्रि 9 बजे पावन ज्योत प्रज्वलित कर भक्तगण कतार में लगकर पावन ज्योत में आहुति प्रदान कर मनोवांछित फल की कामना कर रहे थे। श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने गणेश वंदना के साथ संगीतमय संकीर्तन प्रारंभ किया। मौके पर आयो सांवलियो सरकार, हमें तो जो भी दिया श्याम बाबा ने दिया, दरबार है निराला खाटू के श्याम का, खाटू को श्याम रंगीलो रे खाटू को, किस्मत वालों को मिलता है श्याम तेरा दरबार... इत्यादि भजनों की पर भक्तगण झूमते रहे। मौके पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा, रबड़ी व मगही पान का भोग अर्पित किया गया। साथ ही मकर संक्रांति पर श्याम प्रभु को शुद्ध घी में बने घेवर, रेवड़ी, तिलकुट, तिल के लड्डू का विशेष भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। आज के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, गोपी किशन ढांढनीयां, राजेश सारस्वत, प्रियांश पोद्दार,  विकास पाड़िया, विवेक ढांढनीयां, नितेश केजरीवाल, ज्ञान प्रकाश बागला, जितेश अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।

भारत में लांच हुआ बच्चों की सुरक्षा के लिए दुनिया का अपनी तरह का पहला एआई आधारित टूल रक्षा
Published / 2026-01-13 21:18:01
भारत में लांच हुआ बच्चों की सुरक्षा के लिए दुनिया का अपनी तरह का पहला एआई आधारित टूल रक्षा

एबीएन सोशल डेस्क। भारत ने बच्चों को निशाना बनाकर किए जाने वाले अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में स्वयं को अग्रिम पंक्ति में स्थापित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित अपनी तरह का पहला और अनोखा प्रौद्योगिकी सक्षम टूल रक्षा पेश किया है जिसे बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह तथा बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सी-सीम) की प्रभावी रोकथाम के लिए तैयार किया गया है। एआई आधारित इस टूल को 16 से 20 फरवरी 2026 के बीच आयोजित होने वाले भारत सरकार के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले लांच किया गया है। बच्चों की सुरक्षा के लिए विकसित इस क्रांतिकारी प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल रक्षा को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने प्रॉस्पेरिटी फ्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट में लांच किया, जो भारत सरकार के एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम है। यह सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने अपने रणनीतिक साझेदार इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के साथ मिलकर आयोजित किया। बच्चों की सुरक्षा के लिए इस टूल रक्षा को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने तैयार किया है जिसके 250 से अधिक सहयोगी नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम, पहचान और प्रभावी प्रतिक्रिया को सशक्त बनाने के लिए देश के 451 जिलों में जमीन पर काम कर रहा है। रक्षा देशभर के बच्चों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण करता है और उन्नत एआई क्षमताओं का उपयोग कर वास्तविक समय में बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, संवेदनशील बच्चों और समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग जैसे मुनाफे वाले संगठित अपराध में शामिल गिरोहों की निगरानी, उसके स्रोत और गंतव्य बिंदुओं की ट्रैकिंग तथा शोषण के उभरते रुझानों व नए केंद्रों का पता लगाने में सक्षम बनाता है। बाल सुरक्षा पर अपनी तरह के पहले सम्मेलन को डिजिटली संबोधित करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन सबसे संवेदनशील तबकों व लोगों की सुरक्षा में निहित है। बच्चे हमारे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि जिस डिजिटल दुनिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को वे विरासत में पाएं, वह सुरक्षित, समावेशी और उन्हें सशक्त करने वाली हो। यह जानकर मुझे प्रसन्नता है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बच्चों की सुरक्षा, सशक्तीकरण और संरक्षण के लिए एआई-आधारित टूल की शुरुआत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आगे कहा कि रक्षा टूल बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के मूल्यों को समाहित करने के साथ और एक सुदृढ़ बाल संरक्षण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन को इस जिम्मेदारी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने और एआई व प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से देश के बच्चों के सुरक्षित वर्तमान व समृद्ध भविष्य पर रचनात्मक विमर्श के लिए सभी पक्षों व हितधारकों को एक मंच पर लाने व इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। इस बात को रेखांकित करते हुए कि रक्षा किस प्रकार बाल संरक्षण के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित कर सकता है, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ करने और बच्चों की सुरक्षा व समृद्धि को आगे बढ़ाने में एआई के उपयोग में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। तकनीक के उपयोग से दुनिया का सबसे समग्र बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में रक्षा भारत के वैश्विक नेतृत्व का एक ऐतिहासिक पड़ाव है।रक्षा का एक मंच के रूप में उपयोग करते हुए, भारत तकनीक के सहारे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे और हर संवेदनशील परिवार की पहचान और निगरानी कर सकता है। आंकड़ों को ज्ञान और ठोस कार्रवाई में रूपांतरित कर यह दृष्टिकोण न्याय तक पहुंच का विस्तार कर रहा है, संवेदनशील परिवारों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार ला रहा है, और बच्चों के सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ कर रहा है। साथ मिलकर हम हर बच्चे के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम में एआई की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब कोई भविष्य का वादा नहीं रही, बल्कि मौजूदा समय की सच्चाई बन चुकी है। यह इस बात को आकार दे रही है कि हम कैसे सीखते हैं, शासन करते हैं, काम करते हैं और इससे आगे बढ़कर यह भी तय कर रही है कि हमारे बच्चे किससे और कैसे जुड़ते हैं। एआई हमें प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर रोकथाम की ओर, नुकसान के महज दस्तावेजीकरण से आगे बढ़कर जोखिम का पूवार्नुमान लगाने की क्षमता देती है। भौगोलिक परिस्थितियों, प्रवासन, स्कूलों में उपस्थिति और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों से जुड़ी बाल-संवेदनशीलता के पैटर्न पहले से ही समेकित डेटा प्रणालियों में मौजूद हैं। एआई इन बिंदुओं को जोड़कर समय से पूर्व चेतावनियां और ऐसे हस्तक्षेप संभव बनाती है, जिनसे नुकसान होने से पहले ही उसे रोका जा सके। ऐसे तंत्र मानवीय विवेक का स्थान नहीं लेते, बल्कि उसे सशक्त करते हैं, क्योंकि रोकथाम केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि एक नैतिक अनिवार्यता है। हमारे सामने मौजूद चुनौती सरकार, तकनीक विशेषज्ञों, नागरिक समाज, शिक्षा जगत और समुदायों के बीच सहयोग की मांग करती है। लावू एमपी ज फॉर चिल्ड्रेन के संयोजक हैं जो बच्चों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाला मंच है। रक्षा को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर रोकथाम और जांच एजेंसियों- दोनों को सुदृढ़ करे। इसके लिए यह तीन लक्ष्य केंद्रित टूल का उपयोग करता है। पहला टूल व्यापक स्तर पर परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर रोकथाम पर काम करता है, विशेषकर बाल विवाह के विरुद्ध। दूसरा टूल ट्रैफिकिंग जैसे संगठित आर्थिक अपराध से निपटता है। यह एक तरफ अपराध के घटित होने से पहले ही उसका पूवार्नुमान और रोकथाम, व दूसरी ओर पैसे के लेनदेन की पड़ताल कर संगठित आपराधिक गिरोहों की जड़ों और उनके विस्तार की पहचान करने पर केंद्रित है। तीसरा टूल डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त करता है और यह बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, उसके अपलोड, डाउनलोड और देखने से जुड़े आनलाइन हीट जोन और आईपी पतों का पता लगाने, उनके विश्लेषण और मानचित्रण में सक्षम है। यह शिखर सम्मेलन चार पूर्ण सत्रों में विभाजित था, जिनमें सामाजिक परिवर्तन में एआई की भूमिका, रक्षा: बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल स्पेस की रूपरेखा, टेक फॉर गुड तथा एआई, जागरूकता और कार्रवाई: भविष्य के लिए संप्रेषण और विमर्श शामिल थे। इन सत्रों के दौरान वक्ताओं ने पूर्वानुमान आधारित रोकथाम, व्यवहार विश्लेषण में एआई की भूमिका, कानून और जमीनी कार्रवाइयों के साथ उसके समन्वय, तथा डिजिटल युग में बच्चों के लिए जोखिमों, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। दिन-भर चले इस शिखर सम्मेलन में दया शंकर, उप सचिव एवं निदेशक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय; प्रियंका ऋभु, प्रमुख, सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियरल चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब); मैथिल्द सेरियोली, मुख्य वैज्ञानिक, एवरीवन एआई, परिषद सदस्य, चैटजीपीटी; नोमिशा कुरियन, सहायक प्रोफेसर, वारविक विश्वविद्यालय; जी. के. गोस्वामी, अपर महानिदेशक एवं निदेशक, फॉरेंसिक संस्थान, उत्तर प्रदेश; हर्षवर्धन, पुलिस अधीक्षक, तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो; धनंजय टिंगल, कार्यकारी निदेशक, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन; अनिल रघुवंशी, संस्थापक एवं अध्यक्ष, चाइल्डसेफनेट; बैली सैपल, विकास प्रमुख, वी प्रोटेक्ट ग्लोबल एलायंस; अनुप्रिया मोहता, पब्लिक पॉलिसी मैनेजर, यूट्यूब; डॉ. ई. खलियाराज, निदेशक, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अनुसंधान परिषद; मयंक, अपर महानिदेशक, रेलवे पुलिस बल; व संपूर्णा बेहुरा, कार्यकारी निदेशक, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, गौरव मित्तल, प्रिंसिपल अप्लाइड साइंटिस्ट, माइक्रोसॉफ्ट यूएस और अतुल अग्रवाल, सीईओ एस्प्रिफाई एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड मौजूद थे। नीति आयोग के साथ साझेदारी में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अकेले 2025 में आर्थिक रूप से संवेदनशील 20 लाख से ज्यादा परिवारों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा,  198,628 बाल विवाह रोके और ट्रैफिकिंग व शोषण के शिकार 55,146 बच्चों को मुक्त कराया। जेआरसी की याचिका पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार सामग्री देखने, डाउनलोड करने व साझा करने को अपराध घोषित किया और चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द की जगह बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार सामग्री शब्द के उपयोग का आदेश दिया। नेटवर्क ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय से सी-सीम के 73,258 मामलों में कार्रवाई शुरू की। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के साथ समझौते के तहत यह रेल के जरिए बच्चों की ट्रैफिकिंग की रोकथाम व उन्हें मुक्त कराने में उसके साथ करीबी समन्वय से काम करता है। भारत सरकार 16 से 20 फरवरी तक इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट का आयोजन कर रही है जो ग्लोबल साउथ में अपनी तरह का पहला आयोजन है। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेता, सीईओ और नीति निमार्ता कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इस पर विमर्श को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करेंगे। इससे पहले भारत सरकार के सहयोग से एआई पर इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क कर सकते हैं।

सारंग संस्था के संस्थापिका रानी राज को प्राइड ऑफ यंग हिंदुस्तान अवॉर्ड
Published / 2026-01-13 12:41:51
सारंग संस्था के संस्थापिका रानी राज को प्राइड ऑफ यंग हिंदुस्तान अवॉर्ड

एबीएन सोशल डेस्क। सारंग संस्था के संस्थापिका रानी राज को प्राइड ऑफ यंग हिंदुस्तान अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मुम्बई में मेज़र पवन थपालियाल के हाथों प्रदान किया गया। कार्यक्रम यंगिस्तान फाउंडेशन फाउंडेशन के मिथिलेश झा के अध्यक्षता में आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न राज्यों में समाजसेवा, जनहित एवं राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे 15 युवा समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।सारंग संस्था की संस्थापिका रानी ने कहा कि सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, प्रेरणा का माध्यम है। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह अवॉर्ड केवल एक ट्रॉफी या प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उन समाजसेवियों के प्रति कृतज्ञता, सराहना और प्रेरणा का प्रतीक है, जो बिना किसी अपेक्षा के समाज के लिए कार्य करते हैं। गौरतलब है कि सारंग संस्था द्वारा सुदूर इलाके के असहाय बच्चे एवं ड्राप ऑउट बच्चे के लिए काम करती है साथ हीं भाषा-संस्कृति संरक्षण , पर्यावरण, नशामुक्ति अभियान, अंधविश्वास जैसे विषयों पर काम करती है।रानी राज वर्तमान में बिहार सरकार में ऑडिट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।

सामाजिक सद्भाव बैठक में समाज की समसामयिक चुनौतियों पर गंभीर मंथन
Published / 2026-01-12 21:01:05
सामाजिक सद्भाव बैठक में समाज की समसामयिक चुनौतियों पर गंभीर मंथन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माननीय सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने सामाजिक समरसता एवं सेवा कार्यों पर दिया विशेष मार्गदर्शन टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का 12 जनवरी को रांची आगमन हुआ। इस अवसर पर सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न संगठनों, जाति-बिरादरी एवं समुदायों के 600 से  अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक का उद्देश्य समाज में व्याप्त समसामयिक समस्याओं पर संवाद स्थापित करना तथा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विचार करना था। 1. प्रथम सत्र : सामाजिक कार्यों एवं चुनौतियों की प्रस्तुति बैठक के प्रथम सत्र में समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किये जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने अपने कार्यों के दौरान सामने आ रही सामाजिक चुनौतियों को भी साझा किया। इनमें प्रमुख रूप से धर्मांतरण, घुसपैठ, नशाखोरी, अशिक्षा, अंधविश्वास, परस्पर सहयोग की कमी, बाल-विवाह, लव-जिहाद जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया। 2. द्वितीय सत्र : माननीय दत्तात्रेय जी का मार्गदर्शन द्वितीय सत्र में दत्तात्रेय होसबाले जी ने समाज के प्रतिनिधियों द्वारा उठाये गये प्रश्नों एवं विषयों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किये। धर्मांतरण पर विचारधर्मांतरण विषय पर बोलते हुए उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया।  झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र, दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्य उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों में साजिशन ढंग से चर्च से जुड़े लोगों का प्रवेश कराया गया तथा हिंदू धर्मगुरुओं को रोकने का प्रयास हुआ। गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास को उन्होंने धर्मांतरण के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में तथाकथित थ्री-डी समस्या का उल्लेख किया, जिसमें धर्मांतरण, डीजे संस्कृति और दारू को शामिल बताया। धर्मांतरण की समस्या को कम करने के उपायों पर बोलते हुए उन्होंने समाज में परस्पर सहयोग, छुआछूत एवं जातिगत भेदभाव से दूरी, ऊंच-नीच की भावना त्यागने तथा हिंदू समाज की जनसंख्या सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने घर-वापसी के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा। जातिवाद और सामाजिक समानता जातिगत समस्या पर चर्चा करते हुए माननीय दत्तात्रेय जी ने कहा कि हमारा जन्म किस परिवार या जाति में होगा, यह हमारे हाथ में नहीं होता, फिर हम जातिवाद क्यों करते हैं? किसी भी जाति को नीचा या ऊंचा नहीं समझना चाहिए। महिला सम्मान एवं समानता उन्होंने महिलाओं-बहनों के सम्मान पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पुरुष-महिला समानता आज की आवश्यकता है। जब पुरुष और महिलाएं साथ-साथ कार्य कर रहे हैं, तो उनके बीच असमानता का कोई औचित्य नहीं है। सोशल मीडिया, संस्कृति और बच्चे दत्तात्रेय जी ने कहा कि आज सोशल मीडिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के कंटेंट से भरा हुआ है। बच्चों को इसके नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए बच्चों के साथ संवाद की प्रक्रिया अपनाने पर उन्होंने बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि मंदिर जाने से अहंकार दूर होता है और मन को शांति की प्राप्ति होती है। सामाजिक आडंबर और खर्च उन्होंने विभिन्न पर्वों पर बनाये जाने वाले पंडालों में अत्यधिक खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे मनोरंजन की प्रवृत्ति से जोड़कर देखने की आवश्यकता बतायी। स्वामी विवेकानंद के विचार स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए माननीय दत्तात्रेय जी ने भारतीय युवाओं से उनके कथन Think little less, Act little more को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। हिंदू समाज के करणीय कार्य : उन्होंने हिंदू समाज के करणीय कार्यों के रूप में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर दियासेवा कार्यों का विस्तार : सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना गरीबी, अशिक्षा एवं अभावग्रस्तता से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना : उन्होंने पारसी समुदाय का उदाहरण देते हुए मेहनत के बल पर आगे बढ़ने की बात कही और बताया कि आजादी के समय पारसी समाज ने सरकार से किसी प्रकार के आरक्षण की मांग नहीं की थी। दिव्यांग बच्चों और समाज की भूमिका : दत्तात्रेय ने दिव्यांग बच्चों को समाज के आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों द्वारा गोद लेने का आग्रह किया तथा समाज के विभिन्न समूहों से ऐसे बच्चों की सहायता करने की अपील की। बांग्लादेशी घुसपैठ पर चिंता : बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठ के माध्यम से लंबे समय तक राजनीतिक लाभ उठाया जाता रहा है। आज बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि सीमा पर फेंसिंग एक बड़ी चुनौती है और कई बार हमारे ही लोग घुसपैठियों को शरण देते हैं। सरकार रकफ सहित विभिन्न माध्यमों से इस समस्या के समाधान हेतु प्रयास कर रही है। आपसी सम्मान और सहयोग का आह्वान : बैठक के अंत में माननीय दत्तात्रेय होसबाले जी ने हिंदू समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों से अपने-अपने समुदाय के विकास के साथ-साथ आपसी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने एक-दूसरे के कार्यक्रमों में सहभागिता, परस्पर आदर-सम्मान, कमजोर समुदायों की सहायता तथा हम सभी हिंदू हैं इस भाव को सदैव स्मरण रखने की अपील की 3. तृतीय सत्र: संत महात्मा बैठक इस सत्र में माननीय दत्तात्रेय होसबोले जी ने झारखंड प्रांत के लगभग 78+ संतों के साथ आध्यात्मिक-धार्मिक विषयों पर चर्चा की। इस बैठक में धारा 342 पर चर्चा हुई जिसमें धर्मांतरण के उपरांत जनजाति वर्ग के स्टेटस में कोई बदलाव नहीं आता तथा धर्मांतरण के उपरांत ईसाई या मुस्लिम बनने के बाद भी जनजातियों को प्रदत्त सुविधाओं का लाभ मिलता रहता है। अगर इस धारा को समाप्त कर दिया जाए तो धर्मांतरण बहुत हद तक समाप्त हो जायेगा। इस सत्र में गुरुकुल की स्थापना जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। 4. चतुर्थ सत्र:  सामाजिक अध्यात्मिक संगठन बैठक  समाज की सामाजिक, आध्यात्मिक संस्थाओं ने सेवा, साहित्य, कला, धार्मिक आदि क्षेत्रों में कार्य किया है। हजारों वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है। ऐसा एक महान लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकारें भी कई कार्यों में योगदान देती रही हैं। लेकिन बहुत सारे करणीय कार्य परिवार की भी होती हैं, जैसे— अपने बच्चों को संस्कार देना, उन्हें बड़े-बुजुर्गों का आदर करना सिखाना आदि। समाज की एकता आवश्यक है। जंजीर की प्रत्येक कड़ी स्वयं मजबूत रहें और एक कड़ी दूसरे कड़ी से जुड़े रहे, यह जरूरी है। सरकार के समक्ष  याचना की स्थिति में हमारे युवा न रहें, ऐसे समाज निर्माण पर बल देना चाहिए। संस्कृत के उपयोग पर भी जोर दिया गया। भारत का विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ना जारी है, लेकिन स्लम की समस्या, पर्यावरण की समस्या आदि सामाजिक दृष्टि के अभाव को परिलक्षित करता है। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना चाहिए। विदेशों की व्यवस्था से तुलना कर अपने  यहां सुधार की बात कर सकते हैं। महिलाओं की दशा में सुधार करना आवश्यक है। अत: भारत को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाना तो आवश्यक है, लेकिन ऊपर सुझाए विभिन्न सामाजिकझ्रआध्यात्मिक मसलों पर मजबूती की उतनी ही जरूरत है।

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