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खुशहाली और समृद्धि का त्योहार धनतेरस 29 को
Published / 2024-10-26 20:26:48
खुशहाली और समृद्धि का त्योहार धनतेरस 29 को

धनतेरस खुशहाली समृद्धि और सेहतमंद जीवन का माना जाता है प्रतीक : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि इस साल धनतेरस 29 अक्टूबर दिन मंगलवार को मनाया जायेगा। धनतेरस का शुभ मुहूर्त 29 अक्टूबर को प्रात: 11 बजे से प्रारंभ होकर 30 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट बजे तक रहेगा। धनतेरस के देवता धन्वंतरि है। तथा धन्वंतरी भगवान विष्णु के तेरहवें अवतार है। धनतेरस के त्योहार का मुख्य संबंध यमराज की आराधना से है आयुर्वेद के प्रवर्तक धनवंतरी की जयंती भी इसी दिन होती है। एक तरफ वैद्य समाज धनवंतरी की पूजन कर सभी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है तो गृहस्थ दीप जलाकर यमराज से अकाल मृत्यु टालने की प्रार्थना करते हैं। दीपावली भले ही एक दिन मनाई जाती है लेकिन यह पर्व 5 दोनों का होता है यानी धनतेरस से यम द्वितीया तक, शास्त्रों में इन पांच दिनों को यम पंचक कहा जाता है। इन पांच दिनों में यमराज, वैद्यराज धनवंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान जी, मां काली और भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विशेष विधान है। धनतेरस का त्योहार दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है। यह त्योहार खुशहाली समृद्धि और सेहतमंद जीवन का प्रतीक माना जाता है। धनतेरस कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनतेरस जिसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। धनतेरस का नाम धन और तेरस से बना है जिसमें धन का मतलब संपत्ति और समृद्धि है और तेरस का अर्थ हिंदू कैलेंडर की 13वीं तिथि है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ ही यह दिन कुबेर और लक्ष्मी माता की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार समुद्र-मंथन से जो चौदह रत्न प्रकट हुए उनमें आरोग्य के देवता धन्वंतरि के अलावा धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी प्रमुख हैं। पांच दिवसीय ज्योति पर्व का प्रथम दिन धनत्रयोदशी या धनतेरस भी दीपावली की तरह समृद्धि की कामना को समर्पित रहता है। इसी दिन से लक्ष्मीजी का आवाह्न शुरू हो जाता है।और शाम को 5 (कुछ लोग तेरस होने के कारण 13 दीये जलाते हैं) नये मिट्टी के दीपकों में तेल भर कर उन्हें प्रकाशित कर खील से पूजा जाता है । फिर एक दीपक आंगन में, एक रसोई में, एक तिजोरी के पास, एक तुलसी में और एक मुख्य द्वार पर रखा जाता है। बहुत लोग धनतेरस को ही लक्ष्मीजी की पूजा कर लेते हैं।धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, गहने या अन्य कीमती सामान खरीदने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन जो भी चीज खरीदी जाती है। उस घर में समृद्धि और धन का आगमन करती है। लोग इस दिन नए वाहन संपत्ति या अन्य महत्वपूर्ण चीजों की भी खरीदारी करते हैं। इसके साथ ही आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक्स और नए उपकरण धनतेरस पर खरीदना शुभ माना जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से बिहार में बाल विवाह के खात्मे की उम्मीदों को लगे पंख
Published / 2024-10-26 20:25:23
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से बिहार में बाल विवाह के खात्मे की उम्मीदों को लगे पंख

नये दिशा-निर्देशों से उत्साहित 180 से भी ज्यादा गैरसरकारी संगठनों के गठबंधन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस ने 2030 से पहले ही बिहार को बाल विवाह मुक्त बनाने का विश्वास जताया सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे के लिए विभिन्न मंत्रालयों को जारी किये दिशा-निर्देश एलायंस बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का समर्थक है जिसके सहयोगियों की याचिका पर आया सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला एबीएन सोशल डेस्क। बाल विवाह की रोकथाम के लिए सुप्रीम कोर्ट के नये दिशा-निर्देशों के बाद नई उर्जा से लैस बिहार के नागरिक समाज संगठनों ने इसके खात्मे में राज्य सरकार के सभी प्रयासों को हरसंभव सहयोग देने का वादा किया है। बाल विवाह की 40.8 प्रतिशत दर के साथ बिहार इस मामले में देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन और प्रयास जेएसी सोसायटी जैसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस (जेआरसीए) के तमाम सहयोगी गैरसरकारी संगठन राजधानी पटना में इकट्ठा हुए और बाल विवाह के खात्मे के लिए रणनीतियों और उन पर प्रभावी अमल के तरीकों पर चर्चा की। इन संगठनों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से पंचायतों के साथ मिलकर काम करने, जागरूकता के प्रसार और बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे के लिए विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं को साथ जोड़ने जैसे उनके जमीनी कार्यों को और गति व मजबूती मिलेगी।गैरसरकारी संगठनों का गठबंधन जेआरसीए बाल विवाह के खिलाफ बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का समर्थक है जिसके सहयोगी सदस्य और संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी के नतीजे में सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह के खात्मे के लिए ऐतिहासिक फैसले में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये। जेआरसीए के समर्थन से चल रहा यह अभियान पहले से ही बाल विवाह के खात्मे के लिए पिकेट (पीआईसीकेईटी) रणनीति पर अमल कर रहा है और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों में इसकी छाप स्पष्ट है। पिकेट रणनीति का खाका बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) अभियान के संस्थापक भुवन ऋभु ने अपनी किताब व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज में पेश किया था। यह एक समग्र रणनीति है जिसमें नीति, संस्थान, समन्वय या सम्मिलन, परिवेश और तकनीक जैसी सभी चीजें समाहित हैं। इस रणनीति पर अमल करते हुए सीएमएफआई ने पिछले एक साल में 120,000 से ज्यादा बाल विवाह रुकवाये हैं।मीडिया से बातचीत के दौरान बिहार सरकार के प्रयासों में हरसंभव सहयोग का वादा करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस के संयोजक रवि कांत ने कहा, बाल विवाह बच्चों से बलात्कार है। यह बच्चों से उनके अधिकार और उनकी स्वतंत्रता छीन लेता है। एलायंस के सहयोगी इस अपराध के खात्मे के लिए काम कर रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों से हमारे संकल्प को मजबूती मिली है। जेआरसीए बिहार से 2030 तक इस घृणित अपराध के खात्मे के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार का हरसंभव सहयोग व समर्थन करेगा। हमारे लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि भारत इस घृणित अपराध के खात्मे की लड़ाई में सबसे अगली कतार में है और इसकी नीतियों व न्यायिक फैसलों ने दुनिया के सामने नजीर पेश की है। एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन के मुख्तारुल हक ने भी इस राय से सहमति जताते हुए कहा, हम इस बात के गवाह हैं कि किस तरह सभी हितधारकों के प्रयासों में समन्वय व संम्मिलन, जागरूकता और शिक्षा एक ऐसे परिवेश के निर्माण की कुंजी हैं जहां बाल विवाह की गुंजाइश खत्म हो जाती है। हम सभी इन मोर्चों पर काम कर रहे हैं और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसकी अहमियत को रेखांकित किया है। हम आश्वस्त हैं कि इन दिशा-निर्देशों पर तत्काल और प्रभावी अमल से हम 2030 से पहले ही बाल विवाह के खात्मे के निर्णायक बिंदु तक पहुंच जायेंगे। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रयास जेएसी सोसायटी के मुख्य समन्वयक अधिकारी जितेंदर कुमार सिंह ने कहा, यह एक ऐतिहासिक फैसला है जो भारत से बाल विवाह के खात्मे का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस फैसले ने सभी की जवाबदेही तय की है और यह सुनिश्चित किया है कि पंचायत से लेकर पुलिस तक सभी इस अपराध के खात्मे में अपनी भूमिका व जिम्मेदारी को समझें। हम राज्य सरकार के साथ खड़े हैं और जैसे भी संभव होगा, उसकी मदद करेंगे। बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) अभियान के गठबंधन सहयोगियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर को एक ऐतिहासिक फैसले में ग्रामीण समुदायों की लामबंदी पर जोर देते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए। इन दिशानिदेर्शों में बच्चों के सशक्तीकरण, उनके अधिकारों के संरक्षण, यौन शिक्षा और समुदाय केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देने के साथ ही बाल विवाह की रोकथाम के लिए पंचायतों, स्कूलों और बाल विवाह निषेध अधिकारियों की जवाबदेही तय की गयी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 पर प्रभावी तरीके से अमल के लिए बचाव, संरक्षण व अभियोजन की रणनीति पर काम करते हुए कानूनी कार्रवाई को आखिरी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाये।

वृद्धा आश्रम नगरी को जसोवा ने किया सम्मानित
Published / 2024-10-24 21:15:43
वृद्धा आश्रम नगरी को जसोवा ने किया सम्मानित

टीम एबीएन, रांची। विहार समाज कल्याण संस्थान द्वारा संचालित वृद्धा आश्रम नगरी के समाजिक कार्य और आश्रम संचालन करने के लिए जसोवा द्वारा सम्मानित किया गया। जसोवा आईएएस आफिसर वाइफ एसोसिएशन द्वारा संचालित किया जाता हैं जो कि समाजिक कार्य किया जाता है और हर वर्ष दिवाली उत्सव मेला का आयोजन करती है। इस वर्ष मोरहाबादी में 23 अक्टूबर 2024 को इसका शुभ आरंभ किया गया। इस अवसर पर राज्य के चीफ सेक्रेटरी एल खियांगते ने विहार समाज कल्याण संस्थान को 50,000/ का चेक दिया। विहार समाज कल्याण संस्थान विगत 30 वर्ष से समाज में कार्य कर रही हैं। 1998 में संस्था के संस्थापक सचिव स्वर्गीय लक्ष्मी नारायण सिन्हा जी द्वारा रांची जिला के नगरी प्रखंड में वृद्धाश्रम चलाना शुरू किया जो की 25 बेड का था। वर्तमान में पांच एकड़ जमीन पर या आश्रम संचालित किया जा रहा है। इसके सचिव पंकज सिन्हा हैं और आश्रम में 50 वृद्ध की रहने की व्यवस्था है। वृद्ध आश्रम निशुल्क है जहां रहने वाले वृद्ध को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होता है। श्री सिन्हा ने जसोवा की पूरी टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के सम्मान से कार्य को ऊर्जा मिलती हैं। मौके पर संस्था के सदस्य प्रकाश रंजन के सम्मान ग्रहण किया। श्री रंजन ने सम्मान ग्रहण करने के बाद कहा कि समाज में बदलाव आ रहा है। लोग अच्छे काम करने वाले को खोज कर सम्मानित कर रहें हैं जिससे समाज के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा साथ ही अच्छे काम करने वाले की संख्या बढ़ेगी। उन्होने जसोवा की पूरी टीम को धन्यवाद दिया।

राज्यहित में हिंदू समाज करे शत-प्रतिशत मतदान : विहिप
Published / 2024-10-23 21:03:38
राज्यहित में हिंदू समाज करे शत-प्रतिशत मतदान : विहिप

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत कार्यकारिणी की एक दिवसीय बैठक पूर्वाह्न 10 से 5 बजे तक बैठक दो सत्रों में स्टेशन रोड स्थित होटल ग्रीन होरिजन में की गयी। जिसमें विगत माहों में संपन्न हुए कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी। साथ ही आगामी कार्यक्रमों की योजना बनायी गयी। बैठक में 9 नवंबर को गोपाष्टमी तथा 15 दिसंबर से 31 दिसंबर तक धर्मरक्षा दिवस कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया। झारखंड के सभी जिलों के विद्यालयों से संपर्क कर नैतिक शिक्षा के तहत रामायण ज्ञान की पुस्तकों को पढ़ाकर बच्चों को भगवान राम जी के जीवनमूल्यों से परिचय कराने पर बल दिया गया। बैठक में लोकतंत्र के महापर्व में समस्त हिंदू समाज को राज्यहित में शत-प्रतिशत मतदान करने का आह्वान किया गया। इस महापर्व को सफल बनाने के लिए सभी स्तरीय कार्यकर्ताओं को गांव-गांव तक जोड़कर संपन्न करने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा सनातन हिंदू समाज की संस्कृति एवं परंपरा निरंतर निर्बाध रूप से भारतीय भू-धरा पर बनी रहे इसके लिए राष्ट्रीय चिंतन करने वाले समूह को अपना मतदान करें। बैठक में क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, झारखंड प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, सुनील गुप्ता, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, रामनरेश सिंह, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, प्रांत मातृशक्ति प्रमुख दीपा रानी कुंज, विशेष संपर्क प्रांत प्रमुख अरविंद सिंह, प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख युगल किशोर, मंदिर अर्चक पुरोहित प्रांत प्रमुख देवेन्द्र गुप्ता, धर्मप्रसार प्रान्त प्रमुख संजय चौरसिया, सहित सभी विभाग मंत्री, विभाग संगठन मंत्री, जिलाध्यक्ष, जिला मंत्री उपस्थित थे। उक्त जानकारी झारखंड प्रांत के प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र और प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन (93344 33338, 99737 53052) ने दी।

24 अक्टूबर को मनायी जायेगी अहोई अष्टमी
Published / 2024-10-22 19:43:57
24 अक्टूबर को मनायी जायेगी अहोई अष्टमी

माताएं संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करती है निर्जला व्रत : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता सह रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म मे अहोई अष्टमी पर्व का बहुत अधिक महत्व है। अहोई अष्टमी पर्व भारतवर्ष मे करवा चौथ के बाद एवं दीपावली से 8 दिन पहले कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष 24 अक्टूबर दिन बृहस्पतिवार को अहोई अष्टमी का उपवास रखा जायेगा। अहोई अष्टमी तिथि की शुरुआत 23 अक्टूबर को रात 1 बजकर 18 मिनट पर होगी तथा 24 अक्टूबर को रात 1 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। इस तिथि के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को होगा। अहोई अष्टमी को अहोई आठे भी कहते हैं। इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु सुख- समृद्धि एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जिसका पारण रात को तारों को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार अहोई अष्टमी के दिन माता पार्वती के अहोई स्वरूप की पूजा की जाती है। जिससे देवी प्रसन्न होती है और संतान की खुशहाल जीवन की आशीर्वाद देती है। इस साल अहोई अष्टमी पर साध्य योग और पुष्प नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। इस योग में कुछ उपाय करने से संतान के जीवन में खुशियों का वास बना रहता है साथ ही सभी समस्याएं भी दूर होती है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की सलामती के लिए निर्जला उपवास कर अहोई अष्टमी की पूजा करती है। अहोई की पूजा में दीवार पर आठ कोष्टक वाली अहोई माता की तस्वीर बनाई जाती है उनके पास साही और उसके बच्चों की तस्वीर बनाई जाती है। इसके बाद महिलाएं कलश में जल भरकर और हाथ में चावल लेकर अहोई मां की कथा सुनती है। उन्हें दूध और चावल का भोग लगाया जाता है।

खूंटी : राजस्थान भवन में विहिप के क्षेत्रीय पूर्णकालिक वर्ग का समापन
Published / 2024-10-19 20:51:30
खूंटी : राजस्थान भवन में विहिप के क्षेत्रीय पूर्णकालिक वर्ग का समापन

एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी/रांची। विश्व हिन्दू परिषद पटना क्षेत्र की बैठक खूंटी के राजस्थान भवन में संपन्न हुई। बैठक में उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार एवं झारखंड के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं ने चार दिवसीय वर्ग में लिया भाग। वर्ग में सभी कार्यकर्ताओं की गुणवत्ता में विकास हेतु इस प्रकार के वर्ग होते हैं। जहां विषयवार कालांशश: अनेक बिंदुओं पर प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा तथा केन्द्रीय अधिकारियों द्वारा कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन दिया जाता है। आज के समापन सत्र को संबोधित करते हुए पटना क्षेत्र के संगठन मंत्री ने कहा कि कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र में दायित्वनुसार नि:स्वार्थ भाव से अपने दायित्व का निर्वहन करने की जरूरत है। जिस तरह अभी देश में हिन्दू समाज के समक्ष चुनौतियां हैं उनसे सामना करने के लिए ही ऐसे वर्गों की आवश्यकता पड़ती है। आज हमारे ही लोगों को हमारे सामने शत्रु बनाकार खड़ा किया जा रहा है पर हमें ऐसे षड्यंत्रों को योजनाव बद्ध तरीके से समाधान निकालने पर बल दिया। कहा अपने मान बिन्दुओं की रक्षार्थ हम सर्वस्व न्यौछावर करने लिए सदैव तत्पर रहने की आवश्यकता है और यही सच्ची देशभक्ति है। कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि अभी लोकतंत्र का पर्व आने वाला है राजनैतिक पार्टियां अनेक प्रलोभन देकर, जातीय मतभेद, क्षेत्रवाद आदि मुद्दों पर भटकाने की कोशिश करेंगे इन सभी समस्याओं का हम स्वविवेक से हल निकालें और राष्ट्रविरोधियों के मंसूबे पर पानी फेर दें। समापन कार्यक्रम के बाद महर्षि बाल्मीकि जयंती भी मनायी गयी, जिसमें मंदिरों के अर्चक-पुरोहित, स्थानीय पाहन-पुजारी एवं शहर के गणमान्य लोग भी उपस्थित हुए। धन्यवाद ज्ञापन खूंटी जिलाध्यक्ष विनोद जयसवाल ने एवं संचालन जिला कोषाध्यक्ष प्रवीण जयसवाल ने किया। मौके पर पटना क्षेत्र मंत्री वीरेन्द्र विमल, प्रान्त संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रान्त मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, धर्मप्रसार प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा, मंदिर अर्चक पुरोहित प्रमुख मनोज पांडेय, खूंटी जिला अध्यक्ष विनोद जयसवाल, जिला उपाध्यक्ष विकास मिश्रा, शिवराज सिंह, जिला मंत्री राजीव कुमार झा, जिला संयोजक अभिषेक कुमार, कोषाध्यक्ष प्रवीण जयसवाल, सामाजिक समरसता प्रमुख बीरेंद्र सोनी, जिला विशेष सम्पर्क प्रमुख सह नगर अध्यक्ष मुकेश जयसवाल, नगर मंत्री सचित मिश्रा, श्री शेखर कुमार, संजय गुप्ता, प्रकाश अधिकारी आदि अनके कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उक्त जानकारी विहिप के प्रचार-प्रसार प्रांत सहप्रमुख प्रकाश रंजन (9334433338) ने दी।

20 को मनाया जायेगा करवा चौथ
Published / 2024-10-17 20:39:32
20 को मनाया जायेगा करवा चौथ

करवा चौथ दांपत्य जीवन में लेकर आता है अपार खुशियां : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सनातन धर्म में सुहागिनों द्वारा रखे जाने वाला करवा चौथ का पर्व बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर वर्ष करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखने का विधान है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है। वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना के लिए करवा चौथ का व्रत करती है यह व्रत निर्जला रखा जाता है। रात के समय चांद देखकर इस व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन महिलाएं चांद निकलने तक अन्न, जल का त्याग करती है उसके बाद शाम को छलनी से चांद देखकर और पति की आरती उतार कर अपना व्रत खोलती है। साथ ही मां पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा की जाती है। इस वर्ष कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि 19 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 17 मिनट पर आरंभ हो रहा है। और 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में करवा चौथ का व्रत रविवार 20 अक्टूबर को किया जायेगा। करवा चौथ का व्रत की परंपरा सदियों पुरानी है। शास्त्रों के अनुसार माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था इस व्रत के बाद ही उनका विवाह शिवजी से हुआ। इसके बाद से ही करवा चौथ व्रत की शुरूआत हुई। एक अन्य मान्यता के अनुसार एक बार जब देवताओं का राक्षसों के साथ युद्ध चल रहा था तो उस समय सभी राक्षस देवताओं पर भारी पड़ रहे थे। तो सभी देवी ब्रह्मा देव के पास पहुंचते हैं और उन्हें सारी बात बतायी और उनसे कहा कि वह अपनी पतियों की रक्षा के लिए क्या कर सकती है। तब ब्रह्मा देव ने उन्हें करवा चौथ का व्रत रखने का सुझाव दिया। ब्रह्मा देव के बताये अनुसार सभी महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा जिस वजह से देवताओं की रक्षा हो सकी। तभी से करवा चौथ का व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है इसलिए सुहागिन महिलाएं चंद्रमा से अपनी पति की सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना करते हुए चंद्रमा की पूजन करती है यह व्रत दांपत्य जीवन में अपार खुशियां लेकर आता है। तथा इस व्रत को रखने से पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं।

आज रात 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करेगा चंद्रमा
Published / 2024-10-16 18:59:28
आज रात 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करेगा चंद्रमा

आज शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की करता है बरसात: संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि आश्विन माह के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत की बरसात करता है। इसलिए इस रात में खीर को खुले आसमान में रखा जाता है और सुबह उसे प्रसाद मानकर खाया जाता है। दिलचस्प बात है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास होता है।  इस रात को कोजागिरी भी कहते हैं, खुले आसमान तले रात भर जागकर लक्ष्मी जी के अवतरण के रात देवताओं ने मां लक्ष्मी का आगमन के समय शंख बजा कर श्री शुक्त के मंत्रो से मा लक्ष्मी का स्वागत किया। श्री सूक्त का पाठ करने से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी  लक्ष्मी को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम उपाय है। अगर आप गरीबी आर्थिक समस्या से निपटने के लिए नित्य श्रीयंत्र जो प्राण प्रतिष्ठा हो, लक्ष्मी का वास श्री यंत्र में है। नित्य प्रति श्री यंत्र की पूजा कर श्री सुक्त का पाठ शुद्ध रूप से श्रद्धा भक्ति के साथ करने से आर्थिक लाभ जरूर होगा। लोग अक्सर पूर्णिमा और स्नान-दान की तारीख को लेकर असमंजस में रहते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं शरद पूर्णिमा और स्नान दान के लिए मुहूर्त क्या रहने वाला है। पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर को रात 08 बजकर 40 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 17 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में शरद पूर्णिमा बुधवार, 16 अक्टूबर को मनाई जायेगी। इस दिन पूर्णिमा का व्रत भी रखा जायेगा। आश्विन पूर्णिमा का समापन 17 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। इसलिए स्नान-दान 17 अक्टूबर को किया जायेगा। शरद पूर्णिमा के रात मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ और देवताओं ने मां लक्ष्मी का स्वागत ऋग्वेद के श्री सूक्त स्तोत्र से स्वागत किया, श्री सूक्त स्त्रोत्र का पाठ करने से लक्ष्मी बहुत जल्दी प्रसन्न होती हैं और धन धान्य से परिपूर्ण कर देती हैं। अगर शुद्ध उच्चारण से श्री सूक्त स्त्रोत्र का पाठ करने से जीवन में धन का लाभ होता है।शास्त्रों के मुताबिक इस दिन अगर अनुष्ठान किया जाए तो ये सफल होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। वहीं शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर बैठकर भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी का भ्रमण करने आती हैं। इसलिए आसमान पर चंद्रमा भी सोलह कलाओं से चमकता है। शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में जो भक्त भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी और उनके वाहन की पूजा करते हैं।ऐसा विश्वास है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत भर जाता है और ये किरणें हमारे लिए बहुत लाभदायक होती हैं। इन दिन सुबह के समय घर में माँ लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन प्रात: काल स्नान करके आराध्य देव को सुंदर वस्त्राभूषणों से सुशोभित करके आवाहन, आसान, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, सुपारी, दक्षिणा आदि से उनका पूजन करना चाहिए। रात्रि के समय गौदुग्ध (गाय के दूध) से बनी खीर में घी तथा चीनी मिलाकर अर्द्धरात्रि के समय भगवान को अर्पण (भोग लगाना) करना चाहिए। पूर्ण चंद्रमा के आकाश के मध्य स्थित होने पर उनका पूजन करें। खीर का नैवेद्य अर्पण करके, रात को खीर से भरा बर्तन खुली चांदनी में रखकर जाली से ढक कर दूसरे दिन उसका भोजन करें। सबको उसका प्रसाद दें।

शान्तिकुञ्ज का विचार क्रांति अभियान : संदेश लेकर गांव की ओर चला गायत्री परिवार
Published / 2024-10-15 21:21:52
शान्तिकुञ्ज का विचार क्रांति अभियान : संदेश लेकर गांव की ओर चला गायत्री परिवार

एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार के 30 से अधिक सक्रिय भाई बहनों ने मिलकर कांके ब्लॉक के पतराटोली गांव में घर-घर जा संपर्क किया। शांतिकुंज हरिद्वार का संदेश विचार क्रांति अभियान, मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण का संदेश बताते हुए पूज्य गुरुदेवश्री द्वारा रचित युग साहित्य, युग निर्माण योजना, अखंड ज्योति पत्रिका, हारिये न हिम्मत, गायत्री चालीसा, युग निर्माण सत्संकल्प पाठ, सनबोर्ड पर लगा हुआ देव स्थापना तसवीर, प्रत्येक घर में उस साहित्य का स्थापन महत्व बताते हुए प्रदान किया गया। बुढ़मू ब्लॉक के गांव सोसइ, उमेडंडा, छोटका मुरू, अकतन, अनातू तथा पतराटोली, कांके ब्लॉक में पतराटोली गांव के 52 घरों में  संपर्क किया गया। 40 सार्वजनिक जगहों पर सद्ववाय स्टीकर लगाया गया। गांव के 11 से अधिक घर के अभिभावक द्वारा अखंड ज्योति पत्रिका प्रतिमाह लेने के लिए सहमति व संकल्प किये गये। लगभग 20 तुलसी एवं चंदन के पौधे का भी  वितरण कर पौधरोपण किया गया। साथ ही सभी ने शान्तिकुञ्ज के 21 वीं सदी के युग निर्माण योजना के जयकारों, जयघोषों से पूरा ग्रामीण इलाका को गुंजायमान किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख दीपक दयाल प्रसाद और जय नारायण प्रसाद ने दी।

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