टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद, पटना क्षेत्र (झारखंड- बिहार) की एक दिवसीय बैठक आज रांची स्टेशन रोड स्थित होटल ग्रीन होरिजन में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री व विशेष संपर्क केंद्रीय प्रमुख अंबरीश सिंह के विशेष उपस्थिति संपन्न हुई। बैठक में पटना क्षेत्र का तीनों प्रांतों के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी कार्यक्रम तय की गयी, जिसमें 17 से 22 अक्टूबर बाल्मीकि जयंती सप्ताह, 11 से 17 नवंबर तक हुतात्मा दिवस, 23 से 30 नवंबर तक संस्कार सप्ताह व रन फॉर हेल्थ कार्यक्रम, 12 से 18 दिसंबर तक शौर्य यात्रा, 7 से 15 जनवरी तक समरसता यात्रा कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया। केंद्रीय मंत्री अंबरीश सिंह ने कहा संगठन का विस्तार कार्यकर्ताओं के परस्पर विश्वास व भरोसा पर होता है। कार्यकर्ताओं को संगठन के प्रति नित्य सकारात्मक सोच के साथ प्रतिदिन कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा झारखंड एवं बिहार में रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या निरंतर बढ़ती जा रही है, जिससे कई स्थानों पर जनसंख्या संतुलन हो चुकी है जिससे जहां एक ओर सांस्कृतिक अवधारणाओं पर आघात पहुंच रही है।वहीं लव जिहाद एवं लैंड जिहाद जैसे कुकृतियों पर बल मिल रहा है। उन्होंने कहा कई ऐसे धरायें चल रही है जो हिंदू को हिंदू से अलग करने का कुचेष्टा कर रही है, हमें समरस भाव को जागते हुए समाज में हिंदुत्व भाव को बनाए रखने के लिए निरंतर सेवा का कार्य करते रहना होगा। बैठक में क्षेत्र मंत्री वीरेंद्र विमल, क्षेत्र संगठन मंत्री आनंद कुमार, क्षेत्र सहमंत्री डॉ वीरेंद्र साहू, क्षेत्र बजरंग दल संयोजक जन्मेजय कुमार, क्षेत्र धर्म प्रसार प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा, क्षेत्र विधि प्रमुख अशोक श्रीवास्तव, झारखंड प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, प्रांत संगठन मंत्री देवी सिंह, प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र, प्रांत सहमंत्री मनोज पोद्दार, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, उत्तर बिहार प्रांत अध्यक्ष संजीव कुमार, प्रांत मंत्री रणवीर कुमार, बजरंग दल प्रांत संयोजक प्रकाश पांडेय, प्रांत संगठन मंत्री नागेंद्र कुमार, दक्षिण बिहार मंत्री संजीव कुमार, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, झारखंड प्रांत प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप के झारखंड प्रांत सह प्रमुख, प्रचार प्रसार प्रकाश रंजन ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू परिसर में पापांकुशा एकादशी पर 24 घंटे का गायत्री महामंत्र का आनलाइन विश्व स्तरीय अखंड जप-अनुष्ठान, व्रत-उपवास की आज पूणार्हुति सोल्लास संपन्न हुई। नौदिवसीय नवरात्र अनुष्ठान की समीक्षात्मक विचार-विमर्श व विश्लेषण भी हुआ। यज्ञ उपाचार्य द्वारा पर्व, त्यौहार, व्रत-उपवास,अखंड जप-अनुष्ठान पर व्रियते इति व्रतम् पर प्रकाश डाला गया। बताया कि जिसका वरण, ग्रहण, आचरण, अनुष्ठान, अनुपालन किया जाये, उसे व्रत कहते हैं। पर्व त्यौहार अवसर पर व्रत- उपवास जप-अनुष्ठान करने के अनेक लाभ हैं। बताया कि व्रत, त्यौहार उपवास व उत्सव भारतीय संस्कृति के अंग-उपांग हैं। इन्हीं केंद्र बिन्दुओं के चारों ओर विचारों,भावनाओं, विश्वासों एवं धार्मिक आध्यात्मिक एवं आचार- व्यवहार का विस्तार होता है। आध्यात्मिक ऊर्जा हमारे देश के कण कण में समाविष्ट है। भारतीय पर्वों के मूल में आनंद और उल्लास का विशेष महत्व व अनुभव होता है। पर्वों का उद्देश्य मानव को सामाजिक बनाना भी है। हमारी संस्कृति में जीवन के प्रत्येक क्षण को उत्सव की तरह जीने का ध्येय है- सभी मिल बांटकर इसका आनन्द उठायें। पर्व मानव की भावनात्मक आवश्यकता की पूर्ति करते हैं व मन को असीम शांति और सुकुन देते हैं। कहा कि जीवन को अनुप्राणित करने और आनन्दमय तरीके से जीवन जीने और अभ्यास से भरपूर लाभान्वित होने का अनुभव करना चाहिए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक सह प्रचार-प्रसार प्रमुख जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली)। विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय संयुक्त महा मंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आज कहा है कि हिन्दू पर्व-त्योहारों या कुम्भ जैसे महान आयोजनों की शुचिता और पवित्रता बरकरार रख, पूज्य संतों व मातृ शक्ति के सम्मान की रक्षा हेतु सम्पूर्ण हिन्दू समाज कृत संकल्पित है। इन आयोजनों में विघ्न डालने वालों के विरुद्ध शासन-प्रशासन व समाज को सतर्क रहना होगा। इन उत्सवों व धार्मिक आयोजनों को अपवित्र करने वालों को हम बर्दस्त नहीं करेंगे। संपूर्ण देशवासियों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि मां दुर्गा से प्रार्थना है कि वे हमें वह शक्ति प्रदान करें जिससे हम राष्ट्र विरोधियों और हिंदू विरोधियों के षडयंत्रों को समाप्त कर भारत को विश्व का शीर्षस्थ देश बनाने का अपना संकल्प पूरा कर सकें।उन्होंने कहा कि हिंदू समाज की विशेषता है कि उसके उत्सव विभिन्न रंगों की छटाओं से भरे होते हैं। डांडिया नृत्य मां दुर्गा की आराधना का ही एक अनूठा आयोजन है। यह पूर्ण रूप से धार्मिक आयोजन है जिसमें वही भाग लेता है जो मां दुर्गा के प्रति समर्पित है। दुर्भाग्य से विकृत मानसिकता से ग्रस्त जेहादियों ने अपने गंदे इरादों के साथ डांडिया पंडालों में घुसना प्रारंभ कर दिया है। कल ही भाग्यनगर (हैदराबाद) के डांडिया पंडाल में एक जिहादी इरशाद खान ने एक हिंदू लड़की का हाथ पड़कर अश्लील हरकत करने की कोशिश की। परिवार का विरोध करने पर वह वहां से भाग गया लेकिन परिवार जनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी है।डॉ जैन ने यह ही कहा कि कामुकता से भरे इन जेहादियों की कई प्रकार की गंदी हरकतों के समाचार मिलते रहते हैं। कभी किसी हिंदू लड़की को छेड़ना तो कभी उनको रोकने पर लड़की पर तेजाब डाल देना कहां की सभ्यता है। पत्थर बाजी के समाचार भी मिलते रहते हैं। हमारी पूजा सामग्री व प्रसाद को भ्रष्ट करने का यह लोग हमेशा प्रयास करते ही हैं। इनकी पाशविक कामवासना, जिसको लव जिहाद का नाम दिया गया है, से पूरी दुनिया त्रस्त है। ऐसे में अगर विहिप, बजरंग दल व अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता दुर्गा पूजा के पंडालों में जेहादियों के आने पर रोक लगाते हैं तो क्या गलत करते हैं? क्या हम अपनी आस्था और बहन बेटी के शील और स्वाभिमान को बचाने का भी अधिकार नहीं रखते? दुर्घटना की प्रतीक्षा नहीं की जा सकती। हम जानते हैं कि सावधानी में ही बचाव है।बचाव या सुरक्षा के इस पुनीत कार्य में लगे हिन्दू युवकों को हिंदू धर्म रक्षक बताते हुए उन्होंने कहा कि इनका सम्मान होना चाहिए। दुर्भाग्य से सेकुलरिज्म से ग्रस्त कुछ लोग उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। हम उनसे पूछना चाहते हैं कि क्या उन्होंने कभी थूक जिहाद, जूस में पेशाब मिलने वाले, हिंदू उत्सवों पर पथराव करने वालों व हिंदू लड़कियों के टुकड़े-टुकड़े करने वालों के लिए जिहादी गुंडे कहने की हिम्मत दिखाई है जबकि वे फिलिस्तीन या जिहादी आतंकी संगठनों का झंडा हाथ में लेकर पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने में भी संकोच नहीं करते? अब समझ में आता है इन जेहादियों को कवर फायर कौन देता है।उन्होंने यह भी कहा कि ओवैसी जैसे कट्टरपंथी नेताओं और इन सेक्युलरिस्टों की शह पर ये जेहादी कुंभ के पावन अवसर की पवित्रता को भी भंग करने का कोई अवसर नहीं छोड़ेंगे। इसलिए साधु संतों ने कुंभ के मेले में जेहादियों के प्रवेश पर रोक की जो मांग की है वह एकदम उचित है। क्या हम अपनी आस्थाओं की पवित्रता की रक्षा करने के संवैधानिक अधिकार का उपयोग भी नहीं कर सकते? विहिप जेहादियों को चेतावनी देता है कि वे अपने कुछ मंसूबे त्याग दे तभी वे सह अस्तित्व की बात कर सकते हैं। स्मरण रहे कि सद्भाव एक तरफा नहीं हो सकता। उक्त जानकारी विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दी।
दीदी ने कहा- पूजा-पाठ तक सीमित न रहें, उपासना की गहराइयों तक पहुंचें एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार इकाई युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा रांची परिसर में महिला मंडल प्रतिनिधित्व में स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ। बताया गया कि परम सत्ता को मां के रूप में देखने और उस रूप में उसकी उपासना साधना आराधना करने का प्रचलन भारतीय संस्कृति की एक मौलिक विशेषता है, जिसकी मिसाल विश्व के अन्य धर्मों या आस्था परम्पराओं में दुर्लभ है। हर दृष्टि से यह भारत की ही विशेषता है।नवरात्र के रूप में इसकी उपासना-आराधना का विशिष्ट पर्व मनाया जाता है। इसे शक्ति पर्व भी कहा जाता है। भारत में आदिकाल से चला आ रही शक्ति पूजा का यह पर्व आज भी अगम्य आस्था के साथ जारी है। बताया कि हमारी संस्कृति का प्रत्येक कालखंड इसकी चर्चा, विवेचना एवं साधना से भरा पड़ा है। महाभारत युद्ध आरंभ होने से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने दुर्गा मां की उपासना अर्जुन से विजय के लिए करायी थी। दीदी ने कहा कि नवरात्र की ऋतु संधि की वेला स्वयं में विशेषता लिए होती है। इस समय समूची प्रकृति अपने चरम उत्कर्ष पर होती है।आध्यात्मिक साधनाओं के लिए इस ऋतुसंधि नवरात्र से बढ़कर और कोई अवसर नहीं हो सकता है। गुरुवर श्रीपूज्यवर की युग निर्माण योजना, विचार क्रांति अभियान व सत्संकल्प पाठ के सूत्रों के अनुसार बताया कि यदि इसके साथ युग-संधि का दुर्लभ सुयोग जुड़ जाये तो इसका महत्व सौ गुना हो जाता है। स्वाध्याय पाठ की चर्चा के उपरांत बताया कि गायत्री परिवार के नवरात्र महापर्व में लघु व्यक्तिगत जप-अनुष्ठान व समूह जप-अनुष्ठान, मंत्र लेखन, गायत्री चालीसा पाठ, सहस्र नाम पाठ की महत्ता, विशेषता व उपयोगिता तथा नियत समय नियम संयम पर प्रकाश डाल शांतिपाठ कर सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन और उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय कामना की। पीठ व्यवस्था के अनुसार कल सुबह आठ बजे से नवरात्र अनुष्ठान की महापूर्णाहुति विधिवत 24 कुंडीय हवन-यज्ञ विधान से और भोजन प्रसाद अमृताशन भंडारा से होगा। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हमारा भारत कृषि प्रधान देश के रूप में जाना जाता है अफसोस जनक वाली बात यह है कि हमारा भारतीय कृषि एक चौराहे पर खड़ी है जहां उसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो इसकी स्थिरता और विकास के लिए खतरा है। खास करके जब किसान अपनी फसल रोपाई से लेकर कटाई तक की व्यवस्था करते हैं लेकिन उसमें सभी फसलों के अपने-अपने गुण हैं जिसमें अनाज के भंडारण में किसानों को बहुत ज्यादा समस्या नहीं होती है क्योंकि उनके सड़ने या खराब होने में वक्त लगता है, लेकिन यही बात करें साग- सब्जियां और फलों को खेत से तुरंत बाजार तक पहुंचाना यह बड़ी चुनौतीपूर्ण है। किसानों के लिए मददगार वहीं मछुआरों के लिए भी उनकी मछलियां जब ट्रांसपोर्ट मे जाती है तो सड़े नहीं इसका भी उन्हें एक समस्या के रूप में होती है। क्योंकि फल, सब्जियों और मछलियों में बहुत जल्द खराब होने की संभावना बनती है क्योंकि ये हवा, नमी, रोशनी, तापमान और माइक्रोबॉयल ग्रोथ के संपर्क में आते हैं जिससे उनकी खराब होने की संभावना बहुत जल्द हो जाती है। इसी वजह से कई बार किसानों को अपनी सब्जियों और तोड़े गये फलों को गंतव्य मंडियों में पहुंचने से पहले दलालों के हाथों कम दामों में बेचना पड़ जाता है यदि ऐसा नहीं करेंगे तो सड़ने के कगार पर आ जाता है। इसलिए राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जो कि परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आता है उन किसानों को समर्पित किसानों की समस्या को समझते हुए उनके खेतों से मंडियों तक सफर होने में खराब न हो इसके लिए नयी तकनीक शीतल वाहक यंत्र का आविष्कार किया गया है। यह शीतल वाहक यंत्र जिसका नामकरण इन्होंने शिवाय रखा है। यह पूर्ण रूप से किसानों के फलों और सब्जियों तथा मछुआरों के मछलियों के प्रशीतित करता है। मछलियों के रख रखाव के मामले में खास बात यह है कि मछलियों के साथ बर्फ का कोई सीधा संपर्क नहीं होगा, इसलिए कोई संदूषण नहीं होगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में शिवाय भारत में वैज्ञानिक और खोजकर्ता लगातार बेहतर करने के लिए प्रयासरत है लेकिन इसमें एक सबसे बड़ी समस्या बीमारियों में इस्तेमाल में आने वाले टीके का ट्रांसपोर्ट से निकल कर आयी कि अखिर कैसे उसे उचित तापमान में मेंटेन करके उन हॉस्पिटल या स्टॉक तक पहुंचाया जाय इसी पर शोध करते शिवाय का प्रशीतन प्रणाली केंद्रित होकर बनाया गया है। तरल नाइट्रोजन आधारित परिवहन योग्य प्रशीतन प्रणाली- शीतल वाहक यंत्र शिवाय को किसी भी तापमान पर, माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तक, दवा उत्पादों (टीकों सहित) के परिवहन के लिए विकसित किया गया है। यह 1 हजार क्यूबिक फीट वॉल्यूम का है जो कि इस परिवहन को किसी भी ट्रक पर लगे इस रेफ्रिजरेटेड कंटेनर से किया जा सकता है या इसे किसी भी वाहन के चेसिस पर बनाया जा सकता है। इसे तरल नाइट्रोजन का उपयोग करके रेफ्रिजरेट किया जाता है। इस तकनीक को भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से बनाया गया है और इसका उद्देश्य उबड़-खाबड़ सड़कों पर यात्रा करते समय उच्च रखरखाव जैसी समस्याओं को हल करना है। यह प्रणाली टीके के भंडारण और परिवहन का दोहरा कार्य करती है और इस प्रकार यह एक अद्वितीय उत्पाद है, जो फार्मास्युटिकल कोल्ड चेन में उपलब्ध नहीं है। इसे अस्पताल की इमारत के बाहर भी रखा जा सकता है और यह काम करता रहता है। यह टैंक में तरल नाइट्रोजन को दोबारा भरे बिना 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 4 दिनों तक टीकों को संग्रहीत और परिवहन कर सकता है। इस तकनीक में ताजगी बनाये रखने के लिए तापमान, नमी और नाइट्रोजन वातावरण भी बनाये रखा जाता है। किफायत और पर्यावरण अनुकूल यह प्रणाली प्रशीतन के लिए न ही डीजल न ही बिजली और न सीएफसी का उपयोग करती है इसलिए 100% पर्यावरण के अनुकूल है। यह कोई प्रदूषक गैस या ध्वनि उत्पन्न भी नहीं करता है। कंटेनर किसी भी आकार का बनाया जा सकता है। परिवहन के दौरान सिस्टम को वाहन या ड्राइवर से किसी इनपुट की आवश्यकता नहीं होती है। उसी सिस्टम को ट्रेन या ट्रक जैसे किसी भी वाहक पर लोड और स्थानांतरित किया जा सकता है और इस प्रकार, यह वास्तव में एक मल्टी मॉडल सिस्टम है। इस प्रणाली का कुल वजन 30% कम है, अत: देखा जाय तो साफ तौर पर जगह की बचत है। कृषि उत्पादों के लिए यह तकनीक पूरी तरह से भारत के लिए विकसित की गयी है। यह तकनीक पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में पूंजी और परिचालन के लिहाज से अधिक किफायती है। इसके कंटेनर अत्यधिक मजबूत होते हैं क्योंकि इन्हें पंखे और वाल्व को छोड़कर कोई डायनेमिक हिस्सा नहीं होता है इसलिए कम से कम टूट-फूट और इसकी रखरखाव में बहुत परेशानी नहीं होती है। यह 100% पर्यावरण के अनुकूल तकनीक है क्योंकि इसमें कोई सीएफसी नहीं, कोई सीओसी2 नहीं, कोई कार्बन फुटप्रिंट नहीं और न ही कोई डीजल की आवश्कता होती है। इस सिस्टम का जीवन पारंपरिक रीफर कंटेनर से दो-तीन गुना अधिक होगा। इसके माडल की बात की जाये तो इसका 20 फीट शिवाय कंटेनर बनाया गया है और दूसरा इसका 20 फीट स्टेकबल मल्टी मॉडल कंटेनर है जिससे एक के ऊपर एक रख सकते हैं। इसकी विशेषता यह है कि तापमान, नमी और नाइट्रोजन वातावरण नियंत्रण के साथ रेफरीजरेशन लागत काफी कम है क्योंकि 1 किलोग्राम के परिवहन के लिए 1000 किलोमीटर तक 1 रुपये से कम लागत आती है। टीम का जताया आभार इस तकनीक की उपलब्धियां के बारे में बात करते हुए प्रशांत खरे (सीडीसीए विभाग के हेड) ने अपनी पूरी टीम को आभार कहते हुए बताया कि यह तकनीक लंबे समय का मेहनत है जो धरातल पर पूरी तरह से किसानों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए समर्पित है। साथ ही यह बताया कि इसे 3000 किलोमीटर के सड़क परीक्षण के बाद इस तकनीक को मेसर्स टाटा मोटर्स और मेसर्स फार्मेक इंजीनियर्स लिमिटेड इंदौर को हस्तांतरित कर दिया गया है। सीआईएफटी द्वारा विस्तृत गुणवत्ता परीक्षण किया गया जा चुका है जो की विकसित उपकरण भी विनिर्देशों के अनुसार कार्यरत है। इसे डीएसटी और भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी द्वारा स्वतंत्र भारत की 75 ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धियां में से एक के रूप में चुना गया है। हालांकि इस अनुसंधान को भारत और चीन में पेटेंट भी प्रदान कर दिया गया है।
चेतना और श्रेष्ठ समृद्ध भावना मिलकर मनुष्य को संवेदनशील बनाता है : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं राष्ट्रीय सनातन एकता मंच के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि चेतना तथा भावना का संयुक्त स्वरूप को संवेदना कहा जाता है। जीवंत एवं जागरूक ग्रहण करने को क्षमता और अनुभूति का मिश्रण यदि व्यक्तित्व में समावेश हो तो वह व्यक्ति चैतन्य के श्रेणी में आता है। वैसे तो प्राणी मात्र को सृष्टिकर्ता ने भावनाएं प्रदान की है जैसे कोई भी मादा जानवर अपने शिशु के लिए भावुक होती है और नर जानवर सुरक्षा देने का कार्य करता है। इसका यह कार्य ईश्वर प्रदत भावनाओं के वशीभूत ही होता है। परंतु मनुष्य में आकृत भावनाएं ईश्वर ने प्रदत की है। नकारात्मक भाव और सकारात्मक भाव से हम या तो सकारात्मक कार्य करते हैं या फिर नकारात्मक कार्य करते हैं। जब भावनाएं सकारात्मक हो और उदारता की श्रेष्ठ भावना अंतस में कार्य हो तो व्यक्ति भावना से समृद्ध रहता है। चेतना और श्रेष्ठ समृद्ध भावना मिलकर मनुष्य को संवेदनशील बनाता है। संवेदना का अर्थ इस प्रकार समझा जा सकता है कि किसी के दुख में दुखी हो जाना तथा किसी के सुख में खुश हो जाना दूसरे के अनुभूति को ध्यान रखने वाला व्यक्ति संवेदनशील व्यक्ति कहलाता है।जब हम आध्यात्मिक दृष्टि से अपने-अपने आराध्य से प्रार्थना याचना और आराधना करते हैं तो वास्तव में उनकी संवेदना का आकांक्षी होते हैं; क्योंकि पराशक्ति अति संवेदनशील होती है और अपने उपासक की अनुभूति को अनुभव करती है। उसकी संवेदना वरदान और आशीर्वाद के रूप में प्राप्त होता है जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता और उसके स्थायित्व का अनुपात हमारी संवेदना के समानुपात है। नवरात्रि के 9 दोनों में हम संवेदनशील होने का तप और साधना करते हैं। और इसका प्रतिफल हमें आशीर्वाद के रूप मे प्राप्त होता है।
भारत एक हिंदू राष्ट्र, हमें अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होना होगा, आएसएस चीफ मोहन भागवत का बयानएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत को हिंदू राष्ट्र बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भाषाई, जातीय और क्षेत्रीय विवादों को मिटाकर हिंदू समाज को अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होना होगा। भागवत ने शनिवार शाम को राजस्थान के बारां में स्वयंसेवक एकत्रीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, हम यहां प्राचीन काल से रह रहे हैं, भले ही हिंदू शब्द बाद में आया। हिंदू सभी को गले लगाते हैं। वे निरंतर संवाद के माध्यम से समरसता के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को भाषा, जाति और क्षेत्रीय विवादों को दूर कर अपनी सुरक्षा के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा, आचरण में अनुशासन, राज्य के प्रति कर्तव्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण आवश्यक गुण हैं। एक समाज केवल व्यक्तियों और उनके परिवारों से नहीं बनता है, बल्कि उन व्यापक चिंताओं पर विचार करने से बनता है जिनके माध्यम से कोई आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त कर सकता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, आरएसएस की कार्यप्रणाली यात्रिक नहीं बल्कि विचारों पर आधारित है। यह एक अद्वितीय संगठन है जिसके मूल्य समूह के नेताओं से लेकर स्वयंसेवकों, उनके परिवारों और बड़े पैमाने पर समाज से मिलते हैं। स्वयंसेवकों से समुदायों के भीतर व्यापक संपर्क बनाए रखने का अनुरोध करते हुए भागवत ने कहा कि समाज को सशक्त बनाकर सामुदायिक कमियों को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। भागवत ने कहा, सामाजिक समरसता, न्याय, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वावलंबन पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। स्वयंसेवकों को हमेशा सक्रिय रहना चाहिए और परिवारों के भीतर सौहार्द, पर्यावरण जागरूकता, स्वदेशी मूल्यों और नागरिक चेतना को बढ़ावा देना चाहिए, जो किसी समाज के बुनियादी घटक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक साख और प्रतिष्ठा का श्रेय इसकी ताकत को जाता है और इसके प्रवासियों की सुरक्षा तभी सुनिश्चित होती है जब उनका राष्ट्र मजबूत बने। कुल 3,827 आरएसएस स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसमें आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी रमेश अग्रवाल, जगदीश सिंह राणा, रमेश चंद मेहता और वैद्य राधेश्याम गर्ग भी शामिल हुए।
टीम एबीएन, रांची। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, रांची ने शास्त्र और शस्त्र पूजा का आयोजन महालया के मौके पर किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मां दुर्गा के चित्र पर पुष्प, आरती तथा शस्त्र पर पुष्प चंदन अर्पित कर पूजा के साथ कार्यक्रम शुरू किया गया। मौके पर भाजपा प्रदेश नेता सह महावीर मंडल नामकुम के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने सनातन धर्म के विषय में प्रकाश डालते हुए कहा कि जिसका आदि न अंत वही सनातन धर्म है। वेद, पुराण, उपनिषद, रामचरित मानस, गीता ये सभी धर्म के आधार हैं। जाति पाती से ऊपर उठकर इन शास्त्रों ने जीना सिखाया है। प्रभु श्रीराम का जूठ बेर खाना, केवट का पैर पाखरना, जाति धर्म से ऊपर के काम है। हमे सनातन संस्कृति शिक्षा देती है कि हम सब एक हैं। एक रहकर ही मानव का कल्याण हो सकता है। प्रभु श्री राम समस्त मानव के प्रेरणा श्रोत हैं। विश्व हिंदू परिषद के कैलाश केसरी ने कहा रामचरित मानस जीवन जीने की शिक्षा देती है। संचालन अरुण झा एवं अमर ठाकुर ने किया। जबकि सैनिक परिषद की मातृ शक्ति जिलाध्यक्ष मीरा देवी ने संगठन का विस्तार किया। मौके पर जिलाध्यक्ष नारायण प्रसाद, अक्षय मिश्रा, विकास सिंह, पंकज तिवारी, देवाशीष ठाकुर, शिल्पी शालिनी, इंदु देवी श्याम सिंह सहित काफी संख्या में लोग शामिल थे।
टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद्, प्रांत कार्यालय, शक्ति आश्रम, किशोरगंज में बैठक की गयी। जिसमें विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं केंद्रीय सेवा प्रमुख अजय पारीक का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि विहिप के स्थापना से सेवा कार्य किया जा रहा है। विहिप का स्वभाव सेवा कार्य का है। हर कार्यकर्ता एक सेवा कार्य चला सकता है। अपने घर अपने मोहल्ले में ही सेवा कार्य किया जा सकता है। सप्ताह में एक बार शिक्षा और संस्कार देने का कार्य किया जा सकता हैं। देश में 5000 से अधिक सेवा कार्य चल रहे है। जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में सुदूर क्षेत्र में 100 से ज्यादा छात्रावास चलाया जा रहा है, 300 से अधिक स्कूल और कॉलेज चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य में 5 अस्पताल चलाया जा रहा है, समाजिक और स्वालंबन के लिए मातृ शक्ति और दुर्गा वाहिनी के दीदी को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। श्री पारीक ने कहां कि विहिप का मुख्य कार्य है नर सेवा नारायण सेवा है, सेवा के लिए सेवा करना विश्व हिंदू परिषद् का कार्य नहीं है, आज समरसता के अभाव में भाई से भाई अलग हो रहे है, धरती बाट्टा जा रहा है, क्षेत्रीयता में बाट्टा जा रहा है। सेवा का मुख्य कार्य समरसता का भाव प्रकट करना है। सेवा से कार्यकर्ता का निर्माण किया जाता है, समाजिक जागरण और संगठन और धर्म जागरण करना विश्व हिंदू परिषद् का मुख्य कार्य है। बैठक में प्रांत अध्यक्ष चंद्रकांत रायपत, पटना क्षेत्र सहमंत्री बीरेंद्र साहू, उपाध्यक्ष गंगा प्रसाद यादव, सुनील गुप्ता, राजेंद्र मुंडा, प्रांत मंत्री देवी सिंह, प्रांत मंत्री मिथलेश्वर मिश्र, प्रांत सहमंत्री रंगनाथ महतो, प्रांत सेवा सहप्रमूख अशोक अग्रवाल, आचार्य पुरोहित संपर्क प्रमुख जुगल किशोर, प्रांत सह कोषाध्यक्ष साबू जी, धर्मप्रसार प्रयोजना सहप्रमुख रेणु अग्रवाल, प्रांत सह संयोजिका कीर्ति गौरव, महानगर कैलाश केशरी, अमर प्रसाद, बजरंग दल सह संयोजिक दीपक ठाकुर, बबीता हिन्दू, कुणाल कुमार, पारस, मंजू सिंह एवं अन्य लोग मौजूद थे। उक्त जानकारी विहिप झारखंड के प्रान्त प्रचार प्रसार सहप्रमुख प्रकाश रंजन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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