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लॉन्च से पहले भारत पहुंचे वनवेब के 36 उपग्रह
Published / 2022-09-21 10:10:14
लॉन्च से पहले भारत पहुंचे वनवेब के 36 उपग्रह

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत-ब्रिटेन की संयुक्त उद्यम उपग्रह संचार कंपनी वनवेब ने श्रीहरिकोटा से किये जाने वाले प्रक्षेपण से पहले सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-एसएचएआर) में 36 उपग्रहों के आगमन की घोषणा की। इस लॉन्च के साथ ही वनवेब के अपने जेन 1 एलईओ श्रृंखला के 70 प्रतिशत से अधिक उपग्रह कक्षा में स्थापित कर चुका होगा जो दुनिया भर में हाई स्पीड- लो लेटेंसी कनेक्टिविटी सेवाएं देने की ओर अग्रसर है। वनवेब ने इस प्रक्षेपण को सुविधाजनक बनाने के लिए भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) के साथ भागीदारी की है। यह प्रक्षेपण कंपनी का कुल 14वां प्रक्षेपण होगा और उपग्रहों को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सबसे भारी इसरो रॉकेट, जीएसएलवी-एमके 3 द्वारा कक्षा में स्थापित किया जायेगा। न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन डी ने कहा, भारत से जीएसएलवी-एमके3 पर 36 वनवेब उपग्रहों का प्रक्षेपण एनएसआईएल और इसरो के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

आज धरती के करीब से गुजरेगा एक बड़ा क्षुद्रग्रह, एक हफ्ते में आयेंगे चार एस्टेरॉयड
Published / 2022-09-18 06:52:39
आज धरती के करीब से गुजरेगा एक बड़ा क्षुद्रग्रह, एक हफ्ते में आयेंगे चार एस्टेरॉयड

एबीएन नॉलेज डेस्क। पृथ्वी के करीब से रविवार को एक विशाल एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) गुजरेगा। यह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से भी लगभग 210 मीटर बड़ा है। नासा की प्रयोगशाला (जेपीएल) के अनुसार, 2005 आरएक्स3 नामक एस्टेरॉयड 62,820 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हमारे ग्रह की ओर बढ़ रहा है। स्पेस एजेंसी के मुताबिक, यह एस्टेरॉयड करीब 17 साल (2005 में) पहले पृथ्वी के करीब से गुजरा था। तब से लेकर अब तक नासा की जेट प्रोपल्जन लैबोरेटरी इस पर नजर बनाये हुए है। नासा के मुताबिक, आरएक्स3 अगली बार मार्च 2036 में धरती के पास से गुजरेगा। नासा ने 10 सितंबर को चेतावनी जारी कर बताया था कि इस महीने एक सप्ताह में चार एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब आएंगे। इनमें से एक 2005 आरएक्स3 है। गुजर चुके हैं दो एस्टेरॉयड : • 2022 क्यूएफ : इसकी खोज अगस्त 2022 में हुई थी। यह 140 फुट चौड़ा एस्ट्रॉयड है, जो 11 सितंबर को धरती के सबसे नजदीक था। यह 30,384 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के 73 लाख किलोमीटर करीब आया था। • 2008 आरडब्ल्यू : इसे 2008 में खोजा गया था। यह 12 सितंबर को 36,756 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के 67 लाख किलोमीटर करीब आया था। यह लगभग 310 फुट बड़ा था। • 2020 पीटी4: 39,024 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के 71,89,673 किलोमीटर के करीब आयेगा। • 2022 क्यूडी1: 242 फुट बड़े इस एस्ट्रॉयड को अगस्त 2022 में खोजा गया था। नासा के अनुसार, यह 16 सितंबर को 34,200 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से धरती के 74 लाख किलोमीटर करीब आ जायेगा। • 2022 क्यूबी37 : 18 सितंबर को 2005 आरएक्स3 के साथ-साथ यह एस्टेरॉयड भी हमारे ग्रह के करीब से गुजरेगा। इसकी रफ्तार 33,192 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और पृथ्वी के 65 लाख किलोमीटर पास आ जायेगा। एस्टेरॉयड से टकराने के लिए तैयार है नासा : अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा इस महीने के अंत में अपना डार्ट (डबल एस्टेरॉयड रिडायरेक्शन टेस्ट) मिशन लॉन्च करने वाली है। इसके तहस नासा एस्टेरॉयड को टक्कर मारकर नष्ट करने की तैयारी कर रहा है। नासा का अंतरिक्ष यान 26 दिसंबर को करीब 7:14 बजे इस मिशन को लॉन्च करने वाला है। भारतीय समयानुसार यह 27 सितंबर की सुबह 4.44 बजे लॉन्च होगा। इस मिशन के तहत हमारे पृथ्वी को खतरा पैदा करने वाले किसी भी एस्टेरॉयड की दिशा को बदला जा सकेगा या उसे नष्ट किया जा सकेगा। इस अंतरिक्ष यान का इस्तेमाल करके एस्टेरॉयड की दिशा मोडने वाली इस प्रक्रिया को कायनेटिक इंपेक्ट मेथड कहा जा रहा है।

दुबई की धरती पर होगी "चांद" की लैंडिंग, खर्च होंगे 40,000 करोड़
Published / 2022-09-11 21:36:38
दुबई की धरती पर होगी "चांद" की लैंडिंग, खर्च होंगे 40,000 करोड़

एबीएन सेंट्रल डेस्क। खाड़ी के देशों में एक ऐसा शहर है, जो अपने नये-नये कारनामों से दुनिया को हैरान करता रहता है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं दुबई शहर की, जो अपने आर्किटेक्चर और अपने यहां मौजूद इमारतों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यहां पर मौजूद बुर्ज अल-खलीफा इमारत के बारे में शायद ही दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो ना जानता हो। दुबई के रेगिस्तान में खड़ी ये दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है। इस इमारत की ऊंचाई देख लोग दंग रह जाते हैं। वहीं, अब दुबई एक बार फिर से दुनिया को हैरान करने वाला है, क्योंकि इसने अपनी जमीन पर चांद को उतारने की तैयारी कर ली है। दरअसल, दुबई अब अपना खुद का चांद बना रहा है, जो चंद्रमा के आकार का एक रिजोर्ट होने वाला है। चांदनुमा रिजोर्ट का डिजाइन कनाडा की कंपनी मून वर्ल्ड रिजोर्ट इंक कर रही है। इस चांद का आकार 735 फीट होगा। यहां गौर करने वाली बात ये है कि इस चांद को बनाने में 5 अरब डॉलर लगने वाले हैं। भारतीय रुपये में इसकी तुलना करें, तो दुबई चांद को अपनी जमीन पर तैयार करने में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने वाला है। इसके अलावा, इस विशालकाय चांद को बनाने में 48 महीने का वक्त लगेगा, यानि की ये लोगों के लिए 4 साल में बनकर तैयार होगा। दुबई का चांद देखने पहुंचेंगे सालाना 25 लाख : दुबई में पहले से ही कई सारे लग्जरी और टूरिस्ट प्लेस मौजूद हैं, जिनमें दुबई मॉल और अटलांटिस पाम जुमारेह मौजूद है। इन लग्जरी होटलों और मॉल्स की लिस्ट में अब ये चांद भी जुड़ जायेगा। माना जा रहा है कि इस नए रिजॉर्ट में घूमने के लिए हर साल 25 लाख लोग पहुंचने वाले हैं। अरबियन बिजनेस से बात करते हुए मून वर्ल्ड रिजोर्ट इंक के को-फाउंडर माइकल आर हेंडरसन ने कहा, दुबई में चांद की थीम वाला ये होटल शहर की अर्थव्यवस्था को और जान देने वाला है। इससे हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट, एजुकेशन, टेक्नोलॉजी और स्पेस टूरिज्म जैसे सेक्टर्स को बढ़ावा मिलेगा। चांद पर होंगे 300 प्राइवेट स्काई विला : अरबियन बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई का चांद 10 एकड़ में फैला हुआ होगा, जिसमें वेलनेस सेंटर, नाइटक्लब, आवास (300 प्राइवेट स्काई विला) और होटल रूम मौजूद होंगे। ये जगह चांद की सतह से भी घिरी हुई होगी और इसमें एक लूनर कॉलोनी भी शामिल होगी। स्पेस टूरिज्म का सस्ते में मजा उठाने वाले लोगों के लिए ये एक शानदार जगह होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्काई विला के मालिक रिसॉर्ट में एक एक्सक्लूसिव प्राइवेट क्लब का मेंबर भी बन पायेंगे। फिलहाल कंपनी संभावित ग्राहकों को चांद पर जगह बेचने के लिए रोड शो भी कर रही है।

स्पेन के वैज्ञानिकों का खुलासा : जल्द "अमरत्व" पा सकेगा इंसान!
Published / 2022-09-09 16:36:32
स्पेन के वैज्ञानिकों का खुलासा : जल्द "अमरत्व" पा सकेगा इंसान!

एबीएन नॉलेज डेस्क। कहा जाता है कि इस धरती पर कुछ भी अनश्वर नहीं है, जो भी यहां आया है, उसे एक दिन जाना है। हमारे वेद पुराणों में भी अमरत्व को लेकर ऐसी चर्चा है। लेकिन, आज तक ऐसा कोई जवाब नहीं मिला, जो अमरता के रहस्य को खोल सके। देवी-देवताओं को छोड़ दें तो पुराणों में स्पष्ट लिखा है कि इंसान का शरीर नश्वर है, लेकिन इस दावे को स्पेन के वैज्ञानिक चुनौती देने जा रहे हैं। हाल ही में स्पेन की एक यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स ने जेलीफिश पर एक रिसर्च किया और उस रिसर्च के आधार पर उम्मीद की जा रही है कि वे बस अमरत्व से एक कदम की दूरी पर हैं। स्पेन की यूनिवर्सिटी आॅफ ओविएडो के डिपार्टमेंट आॅफ बायोकेमिस्ट्री एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के रिसर्चर ने धरती के इकलौते ऐसे जीव पर एक्सपेरिमेंट किया है, जिसे अमरत्व के करीब माना जाता है। वह जीव जेलीफिश है, जिसे टरीटॉप्सिस डोहरनी के नाम से भी जाता है। इस जीव में वापस युवावस्था में लौटने की क्षमता होती है, यानी कि जब इसके शरीर में कोई क्षति पहुंचती है तो वह खुद फिर से युवा बना लेता है। इस तरह से वह जब तक चाहे, तब तक जीवित रह सकता है। प्रोसीडिंग्स आॅफ द नेशनल एकेडमी आॅफ साइंसेज में प्रकाशित इस स्टडी को कंपैरेटिव जीनोमिक्स आॅफ मोर्टल एंड इम्मोर्टल निडेरियन्स अनवील्स नोवेल कीज बिहाइंड रिजुवेनेशन कहा जाता है। इस रिसर्च के जरिए वैज्ञानिकों ने उम्र को कम करने वाली जेलीफिश के जीनोम को अनुक्रमित किया और डीएनए के सटीक हिस्से को अलग करने में कामयाब रहे। इसी हिस्से का उपयोग करके जेलीफिश अपनी उम्र कम करके खुद को दोबारा युवा बना लेता है। यह रिसर्च यूनिवर्सिटी आॅफ ओविएडो के डॉ। कार्लोस लोपेज-ओटिन के नेतृत्व में हुआ। इनकी टीम ने जेलीफिश के आनुवंशिक अनुक्रम को उनकी लंबी उम्र के रहस्य का पता लगाने और मानव उम्र बढ़ाने के नए सुराग खोजने की उम्मीद को देखते हुए मैप किया। उन्होंने यह पता लगाया कि टी। डोहरनी के जीनोम में भिन्नताएं हैं जो इसे डीएनए की प्रतिलिपि बनाने और मरम्मत करने में बेहतर बना सकती हैं और वे टेलोमेरेस नामक गुणसूत्रों के सिरों को बनाए रखने में बेहतर प्रतीत होते हैं। वहीं, मनुष्यों में उम्र के साथ टेलोमेयर की लंबाई कम होती दिखाई गई है।

एयरटेल के सीईओ ने ग्राहकों को दी 5जी के असीमित प्रयोगों की जानकारी
Published / 2022-09-08 17:30:28
एयरटेल के सीईओ ने ग्राहकों को दी 5जी के असीमित प्रयोगों की जानकारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय दूरसंचार कंपनियां देश में 5जी नेटवर्क के रोलआउट की आधिकारिक घोषणा करने के लिए तैयारियां कर रही हैं, इससे ग्राहकों के लिए हाई डेटा स्पीड के साथ साथ मोबाइल का इस्तेमाल कई नए मामलों में करने के रास्ते खुल जाएंगे। ग्राहक 5जी नेटवर्क की शुरुआत होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे टेलीकॉम ग्राहकों में इसकी खूबियों को लेकर काफी उत्सुकता है। एयरटेल के सीईओ श्री गोपाल विट्ठल ने इस बाबत एक पत्र लिखकर उनके प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया है। श्री गोपाल विट्ठल ने अपने पत्र में लिखा है, पिछली बार जब मैंने आपको पत्र लिखा था, तब भारत एक कठिन कोविड लहर से होकर गुजर रहा था। आपके जीवन सुचारू रूप से चलाने में आपकी मदद करने के लिए टेलीकॉम का होना आवश्यक था। घर से काम करना हो, घर से पढ़ाई करना हो, मनोरंजन करना हो या ऑनलाइन शॉपिंग करना हो, हमको ऐसे समय में आपकी सेवा करने पर गर्व महसूस हुआ। हालांकि, आज मैं आपको पहले से बेहतर और खुशी की माहौल में लिखने के लिए उत्साहित हूं। कुछ ही हफ्तों में, हम अपनी अगली पीढ़ी की तकनीक एयरटेल 5जी को लॉन्च करना शुरू कर देंगे। आप में से कुछ ने मुझसे सवाल पूछा है कि 5G आपके लिए क्या करेगा और आप इसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं। आइए मैं आपके लिए इन सवालों के जवाब देने की कोशिश करता हूं। 1. एयरटेल 5जी आपके लिए क्या करेगा? एयरटेल 5जी नेटवर्क 4G की तुलना में कही अधिक हिग्ज स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह आज की गति से 20 से 30 गुना के बीच कहीं भी हो सकती है। यह आपको किसी एप्लिकेशन को बूट करने या कुछ ही समय में एक हेवी फ़ाइल डाउनलोड करने की अनुमति देगा। एयरटेल 5जी विशेष आवश्यकताओं के लिए डिफरेंशियल क्वालिटी को भी सक्षम करेगा, जिसे नेटवर्क स्लाइसिंग कहा जाता है। इसलिए, यदि आप एक गेमर हैं, और बिना किसी बाधा के उत्तम अनुभव चाहते हैं, तो हम आपके लिए नेटवर्क को स्लाइस करने में सक्षम होंगे। या यदि आप घर से काम कर रहे हैं और कनेक्टिविटी के मामले में स्थिरता वाला अनुभव चाहते हैं, तो हम इसे आपके लिए संभव करेंगे। 2. एयरटेल 5जी आपके लिए सर्वश्रेष्ठ क्यों है? एयरटेल 5जी नेटवर्क आपके स्मार्टफोन और आपको ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इज़के तीन स्पष्ट फायदे हैं। सबसे पहले, दो 5G तकनीकों में से, हमने आपके लिए एक विशिष्ट 5G तकनीक को चुना है जिसमें दुनिया में सबसे व्यापक इको-सिस्टम है। इसका मतलब है कि भारत में सभी 5G स्मार्टफोन बिना किसी त्रुटि के एयरटेल नेटवर्क पर काम करेंगे। यह तब भी लागू होगा जब आप अपने एयरटेल 5जी इनेबल्ड फोन के साथ विदेश यात्रा करेंगे। अन्य तकनीकों में, यह संभव है कि दस में से चार 5जी फोन 5जी को सपोर्ट न करें। दूसरा, हम आपको जो अनुभव प्रदान करते हैं, उस मानदंड को हम लगातार ऊंचा करेंगे इसके लिए हम आश्वस्त हैं। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे 4जी नेटवर्क को इंडिपेंडेंट रेटिंग एजेंसियों द्वारा लगातार स्पीड, वीडियो और गेमिंग अनुभव में सर्वश्रेष्ठ दर्जा दिया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका एयरटेल 5G अनुभव अद्वितीय है, अपने सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरों की विशेषज्ञता सामने लाने के लिए, अत्याधुनिक उपकरणों का निर्माण करने और कई शहरों में अपनी तरह का पहला परीक्षण करने और मामलों का उपयोग करने के लिए इस ताकत का लाभ उठाया है। अंत में, हम पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होंगे। हम सभी अब जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित बारिश से जूझ रहे हैं। यह समस्या अब वास्तविक है। इसलिए हमने अगले कुछ दशकों में अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर हस्ताक्षर किए हैं। नतीजतन, हमने जिस 5जी समाधान का चयन किय है, वह भारत में सबसे अधिक ऊर्जा संरक्षित करने वाला और कार्बन को कम करने में सक्षम होगा। 3. आप 5G का अनुभव लेना कब शुरू कर सकते हैं : हमें एक महीने के भीतर ही अपनी 5जी सेवाएं शुरू करने की उम्मीद है। दिसंबर तक हमें प्रमुख महानगरों में कवरेज मिलनी शुरू हो जाएगी। उसके बाद हम पूरे देश को कवर करने के लिए तेजी से विस्तार करेंगे। हम 2023 के अंत तक पूरे शहरी भारत को कवर करने की उम्मीद कर रहे हैं। यदि आप अपने शहर में 5जी की उपलब्धता जानना चाहते हैं, तो आप इसे एयरटेल थैंक्स ऐप पर देख पाएंगे और देख पाएंगे कि आपका फोन और शहर 5जी के लिए तैयार है या नहीं। यह सुविधा हमारे ऐप पर 5जी लॉन्च के साथ उपलब्ध होगी। 4. एयरटेल 5जी एक्सेस करने के लिए आपके लिए तीन आसान चरण : एक साल से ज्यादा पुराने ज्यादातर स्मार्टफोन में 5G चिपसेट नहीं होता है। हालांकि, भारत मे उपलब्ध नए स्मार्टफोन्स में ज्यादातर 5जी सक्षम हैं। यदि आप एक नया स्मार्टफोन खरीद रहे हैं, तो जांच लें कि यह 5जी सक्षम है या नहीं। फोन की 5G सेटिंग चालू करें : अपने फ़ोन पर 5जी सक्षम करने के लिए, सेटिंग टैब पर जाएं और कनेक्शन या मोबाइल नेटवर्क पर जाएं। आपको 4जी या LTE के अलावा 5जी चुनने का विकल्प दिखाया जायेगा। उस मोड का चयन करें और आप तैयार हैं। आपका एयरटेल सिम पहले से ही 5जी सक्षम है। तो यह आपके 5जी स्मार्ट फोन पर बिना किसी रुकावट के काम करेगा। मुझे आपके किसी भी सुझाव या प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है और हमें आपकी सेवा करने का विशेषाधिकार देने के लिए धन्यवाद।

डीआरडीओ के इस घातक मिसाइल से अब नहीं बचेगा दुश्मन का विमान
Published / 2022-09-08 09:03:30
डीआरडीओ के इस घातक मिसाइल से अब नहीं बचेगा दुश्मन का विमान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा सेना ने सतह से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन मिसाइल के शुक्रवार को छह परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए। ये परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में किये गये। परीक्षण मिसाइल की आकलन प्रक्रिया के तहत किये गये हैं। परीक्षण के दौरान तेज गति से उडने वाले लक्ष्यों पर निशाना साधा गया। इसका उद्देश्य विभिन्न परिद्दश्यों में मिसाइल की मारक क्षमता का पता लगाना था। ये परीक्षण दिन और रात के समय भी किये गये। सभी मिशनों के दौरान मिसाइल ने लक्ष्यों पर अचूक निशाना साधा और सभी मानकों को पूरा किया। परीक्षण के दौरान सभी स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने सफल परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी। डीआरडीओ अध्यक्ष ने कहा कि यह मिसाइल अब सेना में शामिल करने के लिए तैयार है।

अब बिना नेटवर्क भी एंड्रॉयड 14 से लगेगी कॉल, न कॉल ड्रॉप और न आवाज जाने की किच-किच
Published / 2022-09-05 08:04:35
अब बिना नेटवर्क भी एंड्रॉयड 14 से लगेगी कॉल, न कॉल ड्रॉप और न आवाज जाने की किच-किच

एबीएन नॉलेज डेस्क। बढ़ती आबादी और बढ़ते स्मार्टफोन यूज़र्स के कारण नेटवर्क न आना एक बड़ी समस्या बन गयी है। खराब नेटवर्क के चलते कॉल ड्रॉप, कॉल न लगने और नेट न चलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार इमरजेंसी में खराब नेटवर्क के चलते कॉल न लगने से लोग परेशानी में पड़ जाते हैं। लेकिन अब इस समस्या का हल भी आपको मिलने जा रहा है। टेक रिपोर्ट्स के मुताबिक अब एंड्रॉयड 14 में आप बिना नेटवर्क के भी कॉल कर सकेंगे। भविष्य में ऐसा संभव है कि एंड्रॉयड 14 में सैटेलाइट कनेक्टिविटी का फीचर मिल सकता है। अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक एप्पल भी अपने आईफोन 14 में ये फीचर दे सकता है। दोनों ही ओएस में अब यूजर्स को इसका मजा मिल सकता है। गूगल वाइस प्रेसिडेंट ने दी जानकारी : गूगल के वाइस प्रेसिडेंट हिरोशी ने टि्वटर पर ट्वीट करते हुए ये जानकारी दी है। हिरोशी की ट्वीट के मुताबिक सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स के साथ यूजर्स को बेहतर एक्सपीरिएंस मिलेगा। उन्होंने अपनी ट्वीट में आगे जानकारी दी है कि अब वो सैटेलाइट के लिए ओएस को डिजाइन कर रहे हैं। इसके लिए वो पार्टनर के साथ काम कर रहे हैं। एंड्रॉयड के अगले वर्जन में यूजर्स को सैटेलाइट कनेक्टिविटी मिल सकती है। एप्पल की लॉन्चिंग से पहले ऐलान : गूगल के वाइस प्रेसिडेंट ने सैटेलाइट कनेक्टिविटी की बात उस वक्त की है, जब कुछ ही दिनों में आईफोन 14 लॉन्च होने के लिए तैयार है। 7 सितंबर को अपने इवेंट में एप्पल आईफोन 14 को लॉन्च कर सकता है। सा माना जा रहा है कि एंड्रॉयड से पहले एप्पल अपने इस नए आईफोन में ये फीचर दे सकता है। इसलिए गूगल भी इस टेक्नोलॉजी के मामले में पीछे नहीं रहना चाहता है। एंड्रॉयड ने भी इस फीचर के आने से पहले इसकी लॉन्चिंग की बात कह दी है।

अब अगले साल ही शुरू हो सकेगी 5जी की सेवा
Published / 2022-09-03 17:30:30
अब अगले साल ही शुरू हो सकेगी 5जी की सेवा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में 5जी सेवाओं का मजा लेने वाले लोगों को साल 2023 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। दूरसंचार उपकरण निर्माताओं का कहना है कि शीर्ष 10 शहरों में 5जी नेटवर्क सेवाओं का उपयुक्त कवरेज तैयार होने में छह से आठ महीने लग सकते हैं। कवरेज की मात्रा दूरसंचार कंपनी की रणनीति के आधार पर अलग-अलग होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी किन शहरों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहती है। आमतौर पर कवरेज किसी शहर के एक चौथाई से आधे हिस्से तक अलग-अलग हो सकती है। यह कंपनियों पर निर्भर करेगा कि उनकी उनकी नजर अधिक कवरेज पर है या वह कम कवरेज के साथ अधिक शहरों में शुरू करना चाहती हैं। दूरसंचार गियर बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अनुमानित लक्ष्य शीर्ष 10 शहरों में उचित कवरेज देना है। इसके लिए 30 हजार टावरों पर रेडियो एवं उपकरण स्थापित करने की आवश्यकता होगीं। यह काम 6 से 8 माह में किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि कंपनियां फिलहाल इन दस शहरों में 5जी सेवाएं शुरू करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं क्योंकि इन शहरों में 4जी ग्राहकों की संख्या काफी है और ग्राहक 5जी सपोर्ट वाले मोबाइल फोन के साथ तैयार हैं। इसके बाद 5जी संभावित उपयोगकर्ताओं की संख्या आती है। इसका मतलब यह हुआ कि फिलहाल 2 से 24 लाख रेडियो उपकरणों की आपूर्ति करने की आवश्यकता है। दूरसंचार कंपनियां जिन शीर्ष 10 शहरों में 5जी सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही हैं, इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं।

चिंता का नया विषय बन रहे स्वचालित ड्रोन
Published / 2022-09-01 12:55:01
चिंता का नया विषय बन रहे स्वचालित ड्रोन

एबीएन सेंट्रल डेस्क (जैमिनी भगवती)। लीथल आॅटोनॉमस वीपंस सिस्टम्स (एलएडब्ल्यूएस या लॉज) पूरी तरह मशीन आधारित और सिस्टम नियंत्रित हथियार प्रणाली है जो चेहरे की पहचान और कृत्रिम मेधा पर आधारित होती है। ऐसे ड्रोन केवल लक्ष्य के बारे में अनुमानित जानकारी के आधार पर काम करते हैं और उनके हमले में कोई मानव हस्तक्षेप नहीं होता। इस विषय में मीडिया की अटकल है कि ऐसा पहला हमला लीबिया में मार्च 2020 में किया गया। यह विडंबना ही है कि इस हथियार प्रणाली का संक्षिप्त नाम लॉज है क्योंकि ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं है जो ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को सीमित करता हो या उसकी वजह देता हो। फिलहाल इन हथियारों की विश्वसनीयता के बारे में भी कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं है। हाल के दिनों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां सीमाओं के पार ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, हालांकि वह स्वचालित इस्तेमाल नहीं था। अमेरिकी सरकार ने 1 अगस्त को कहा कि मिस्र के सर्जन और अल कायदा के नेता अयमान अल जवाहिरी को काबुल में एक ड्रोन हमले में मार दिया गया। कहा गया कि इसके लिए एक ड्रोन से हेलफायर आर9एक्स मिसाइल दागी गई और इस हमले में कोई और जान नहीं गई। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस हमले के बारे में कहा, ह्यइससे फर्क नहीं पड़ता कि कितना समय लगता है, इससे भी कि आप कहां छिपे हैं, अगर आप हमारे लोगों के लिए खतरा हैं तो अमेरिका आपको खोज कर खत्म कर देगा।ह्ण जवाहिरी अगस्त 1998 में केन्या और तंजानिया के अमेरिकी दूतावासों में हमले के लिए कुख्यात था जिनमें 224 लोग मारे गए थे। वह 11 सितंबर, 2001 के न्यूयॉर्क हमलों में भी शामिल था जिसमें करीब 3,000 लोगों की जान गई थी। मीडिया में अटकलें हैं कि काबुल में जवाहिरी जिस ठिकाने पर रुका था उसकी जानकारी पाकिस्तान ने इस आशा में मुहैया कराई कि वह बदले में पाकिस्तान को भुगतान संकट से निपटने में मदद करेगा। करीब दो वर्ष से कुछ अधिक पहले 3 जनवरी, 2020 को ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी बगदाद हवाई अड्डे पर अमेरिका के रीपर ड्रोन हमले में मारे गए थे। सऊदी अरब के अरब न्यूज ने बताया था कि सुलेमानी के काफिले पर हमले में इस्तेमाल ड्रोन को कतर के अल उदीद एयर बेस से छोड़ा गया था जबकि इसके रिमोट कंट्रोल का संचालन अमेरिका के नेवाडा स्थित क्रीच एयरफोर्स बेस से किया गया था। सुलेमानी तत्कालीन इराकी प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल-माहदी से मिलने बगदाद आए थे। सुलेमानी के अलावा उस हमले में कम से कम चार अन्य ईरानी तथा पांच इराकी मारे गए थे। न्यायिक फैसले के बगैर इन हत्याओं पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिवेदक ने कहा था कि यह हत्याकांड अंतरराष्ट्रीय कानूनों का संभावित उल्लंघन था। असहाय इराकी सरकार का कहना था कि हमले ने उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन किया है। तकरीबन एक वर्ष पहले 29 अगस्त, 2021 को काबुल में हुए एक ड्रोन हमले में 10 अफगान नागरिक मारे गए थे जिनमें सात बच्चे शामिल थे। मरने वालों में सबसे छोटा बच्चा महज दो वर्ष का था। अमेरिकी जनरल केनेथ मैकिंजी जो अमेरिकी केंद्रीय कमान के मुखिया थे, ने आधिकारिक रूप से कहा था कि यह हमला एक गलती था। आज तक यह पता नहीं है कि इस ड्रोन हमले को मंजूरी देने वालों को कोई सजा सुनायी गई या नहीं। 27 नवंबर, 2020 को तेहरान से 70 किलोमीटर दूर अबसर्द में एक और सीमा पार हमले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े भौतिकीविद मोहसिन फखरीजादेह महाबादी को मार दिया गया। मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि यह हत्या इजरायल सरकार द्वारा स्वचालित सैटेलाइट संचालित गन के माध्यम से अंजाम दी गई। 2018 में तत्कालीन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि महाबादी एएमएडी नामक एक परियोजना के प्रमुख थे जो परमाणु हथियार विकसित करने के लिए बनी थी। उधर भारतीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने गत 18 अगस्त को जम्मू सीमा के निकट ड्रोन के माध्यम से हथियारों का जखीरा गिराया। ऐसा नहीं है कि केवल अमेरिका ने ही ऐसे ड्रोन विकसित किए हैं। तुर्की की सरकार द्वारा प्रवर्तित कंपनी सवुन्मा टेक्नोलॉजिलेरी मुहेंदिसिल्क (एसटीएम) ने कार्गू-2 नामक एक ड्रोन तैयार किया है जिसे सामान्य तरीके से भी चलाया जा सकता है और स्वचालित ढंग से भी। ड्रोन तैयार करने के मामले में भारत तुर्की और ईरान से भी पीछे है। आने वाले दिनों में ड्रोन का इस्तेमाल सीमा पार से भारत के ठिकानों पर भी किया जा सकता है ऐसे में अनुमान के आधार पर बचाव करना मुश्किल है। ड्रोन का इस्तेमाल दशकों से हो रहा है लेकिन इसका दायरा बढ़ रहा है। ये स्वचालित हो रहे हैं और इनके स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो रहा है जो विश्व स्तर पर चिंता का विषय होना चाहिए। इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र तथा रेडक्रॉस एवं प्रमुख स्वयंसेवी संगठनों ने बीते 10 वर्ष में लॉज से उत्पन्न खतरों को लेकर चर्चा की है और इनके इस्तेमाल पर रोक चाही है। खासतौर पर 13 दिसंबर, 2021 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने इन हथियारों के इस्तेमाल को सीमित और विनियमित करने के लिए नियमों का आह्वान किया। हालांकि लगता नहीं कि निकट भविष्य में इस दिशा में कोई खास प्रगति हो पाएगी। ऐसा तभी होगा जब दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां इस विषय पर सहमत हों। ऐसा नहीं है कि विभिन्न देशों ने अतीत में कभी किसी हथियार को गैर कानूनी नहीं बनाया। उदाहरण के लिए बायोलॉजिकल ऐंड टॉक्सिन वीपंस कन्वेंशन मार्च 1975 में हुआ था। 2022 के आरंभ तक 184 देश इस संधि का हिस्सा थे। जहां तक रासायनिक शस्त्र संधि की बात है तो यह अप्रैल 1997 में अस्तित्व में आया और 193 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। विरोधाभासी बात यह है कि फिलहाल ऐसी कोई अंतरराष्ट्रीय बाध्यकारी संधि नहीं है जो पारंपरिक ड्रोन तथा लॉज के घातक संस्करणों के इस्तेमाल का नियमन कर सके। 2023 में अगली जी 20 शिखर बैठक भारत में होनी है। अभी इसकी तारीख और जगह तय नहीं हुई है तथा यह भी स्पष्ट नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों में से किन देशों के प्रमुख इसमें आएंगे। अगर जी20 के सहमति दस्तावेज में सीमा पार से ड्रोन/लॉज के इस्तेमाल को सीमित करने या गैर कानूनी बनाने को लेकर कोई दस्तावेज हस्ताक्षरित होता है तो यह शेष विश्व पर भारत का उपकार ही होगा। अगर इस दौरान मानवरति बमवर्षक या लड़ाकू विमानों के विकास को सीमित करने की बात होती है तो और भी अच्छा होगा। (लेखक भारत के पूर्व राजदूत एवं वर्तमान में सेंटर फॉर सोशल ऐंड इकनॉमिक प्रोग्रेस के फेलो हैं)

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