Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 339
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

ज्ञान विज्ञान

View All
मंगलयान : गया था छह महीने के लिए और पूरे किये आठ साल, अब बैटरी-ईंधन, संपर्क सब खत्म
Published / 2022-10-03 05:59:52
मंगलयान : गया था छह महीने के लिए और पूरे किये आठ साल, अब बैटरी-ईंधन, संपर्क सब खत्म

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत के मंगलयान की विदाई हो गई है। इसमें मौजूद ईंधन और बैटरी भी समाप्त हो चुकी है। इसके बाद ये अटकलें तेज हो गई हैं कि देश के पहले अंतर्ग्रहीय मिशन का 8 साल का सफर समाप्त हो गया। 450 करोड़ रुपये की लागत वाला मार्स ऑर्बिटर मिशन 5 नवंबर 2013 को पीएसएलवी-सी25 से प्रक्षेपित किया गया था और वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष यान को पहले ही प्रयास में 24 सितंबर 2014 को सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया था। इसरो के सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, अब, कोई ईंधन नहीं बचा है। उपग्रह की बैटरी खत्म हो गई है। संपर्क खत्म हो गया है। हालांकि, इसरो की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसरो पहले एक आसन्न ग्रहण से बचने के लिए यान को एक नयी कक्षा में ले जाने का प्रयास कर रहा था। बैटरी-ईंधन सब समाप्त : अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, लेकिन हाल ही में एक के बाद एक ग्रहण लगा, जिनमें से एक ग्रहण तो साढ़े सात घंटे तक चला। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा, चूंकि उपग्रह बैटरी को केवल एक घंटे और 40 मिनट की ग्रहण अवधि के हिसाब से डिजाइन किया गया था, इसलिए एक लंबा ग्रहण लग जाने से बैटरी लगभग समाप्त हो गयी। इसरो के अधिकारियों ने कहा कि मार्स ऑर्बिटर यान ने लगभग आठ वर्षों तक काम किया, जबकि इसे छह महीने की क्षमता के अनुरूप बनाया गया था। उन्होंने कहा, इसने अपना काम बखूबी किया और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिणाम प्राप्त किये। 8 साल पहले मंगल पर भेजा गया सबसे यह सस्ता मिशन था : 24 सितंबर 2014 को वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष यान को पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया था। इसके साथ ही भारत विश्व में अपने पहले प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश और दुनिया का चौथा देश बन गया था। उस समय मंगल पर भेजा गया यह सबसे सस्ता मिशन था। भारत, एशिया का भी ऐसा करने वाला पहला देश बन गया था क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे।

5जी नेटवर्क किसानों के लिए खोलेगा तरक्की के द्वार, जानें कैसे...
Published / 2022-10-02 11:37:07
5जी नेटवर्क किसानों के लिए खोलेगा तरक्की के द्वार, जानें कैसे...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के प्रगति मैदान में इंडिया मोबाइल कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने देश में 5जी नेटवर्क सर्विस की शुरुआत की है। जिसे देश के लिए क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है। माना जा रहा है कि देश में 5जी नेटवर्क की शुरुआत होने से कई सेक्टरों में आमूल-चूल परिवर्तन हाेगा। 5जी नेटवर्क से प्रभावित होने वाले सेक्टरों में कृषि सेक्टर भी शामिल है। जिस तरह की 5 जी नेटवर्क की खूबियां हैं, उससे कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव होने की उम्मीद है। मसलन, मानव सभ्यता का सबसे पुराना व्यवसाय, जो कई कारणों से पिछड़ा हुआ था, वह 5जी नेटवर्क के बाद स्मार्ट होने की तरफ बढ़ेगा। वहीं 5 जी नेटवर्क किसानों के लिए भी तरक्की के दरवाजे खुलेगा। 5 जी नेटवर्क कैसे कृषि को प्रभावित करेगा और इससे किसानों को कैसे फायदा होगा। देश-दुनिया में ड्रोन तकनीक बेशक नई है। इस बीच भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में भी ड्रोन तकनीक को अपनाने का फैसला लिया है, जिसके तहत मौजूदा समय में कीटनाशकों व उर्वरकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन, 5 जी नेटवर्क के आ जाने के बाद के कृषि में ड्रोन का दायरा बढ़ जायेगा। एक तरफ 5 जी नेटवर्क से कीटनाशाकों और उर्वरकों के छिड़काव में सटीकता आयेगी। तो वहीं इंटरनेट स्पीड के बढ़ने से मैपिंग भी सटीक हो सकेगी। इसके साथ ही ड्रोन का प्रयोग खेतों की लाइव निगरानी के लिए भी किया जा सकेगा, जिससे अमूल्य मानव श्रम का बचाव होगा। भारत गेहूं और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो दुनिया का प्रमुख खाद्य प्रधान है. तो वहीं भारत दुनिया के कई देशों को खाद्यान्न की आपूर्ति करता है। दुनिया के देशों को खाद्यान्न आपूर्ति की शुरुआत फसलों की बुवाई से ही शुरु हो जाती है। जिसके तहत बुआई और उत्पादन के अनुमान के आधार पर खाद्यान्न के बाजार की तैयारियां की जाती है। अभी तक अनुमान के लिए जिस तकनीक प्रयोग होता है, उसके आधार पर मिलने वाले आंकड़ों में कई बार समस्याएं होती हैं। वहीं 5 जी नेटवर्क के आने से इन अनुमान में सटीकता आयेगी। जिससे देश के खाद्यान्नों को सहींं समय पर बाजार मिल सकेगा और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे। कृषि व्यवसाय में लगे किसानों को तरक्की तब होती है, जब उनकी फसल को बेहतर दाम मिलता है। इसके लिए किसानों को अपनी फसलों को खेतों से मंडियों तक पहुंचाना पड़ता है। मसलन, मौजूदा समय में मंडी में विशेष व्यापारियों का एकाधिकार और उतार-चढ़ाव किसानों को प्रभावित करते हैं। इस वजह से किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ई-नाम पोर्टल शुरू किया हुआ है। लेकिन, कई किसानों के लिए यह डिजिटल बाजार अभी भी दूर की कोड़ी है। 5 जी नेटवर्क शुरू होने से किसान, बेहतर स्पीड के साथ अपने ही खेत से अपनी फसल बेच सकेंगे। तो वहीं ई-नाम पोर्टल पर बेहतर स्पीड के साथ फसल की गुणवत्ता के आधार पर किसान अपनी फसल के दाम तय करवा सकेंगे। खेती मौसम आधारित व्यवसाय है। मसलन मौसम के पूर्वानुमान ही खेती का दशा-दिशा तय करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मानसून है। जिसका सटीक पूर्वानुमान खरीफ सीजन की फसलों का उत्पादन तय करता है। 5 जी नेटवर्क से मौसम के पूर्वानुमान में भी सटीकता आने का अनुमान है, तो वहीं 5 जी नेटवर्क के माध्यम से किसानों को सही और सटीक समय पर किसानों को मौसम की जानकारी मिल सकेगी, जिससे मौसम से होने वाला उनका नुकसान कम हो जायेगा।

एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने किया माइक्रो एटीएम लॉन्च, नकद निकासी हुई आसान
Published / 2022-10-01 17:25:59
एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने किया माइक्रो एटीएम लॉन्च, नकद निकासी हुई आसान

एबीएन नॉलेज डेस्क। एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने माइक्रो एटीएम लॉन्च करने की घोषणा की है। इस माइक्रो एटीएम से बड़े महानगरों और शहरों से बाहर रहने वाले ग्रामीण इलाकों के डेबिट कार्ड उपयोगकर्ता भी आसानी से नकद निकासी कर सकेंगे। इस पहल के माध्यम से उपयोगकतार्ओं को आसान नकद निकासी तक पहुंच प्रदान करने के लिए बैंक पूरे भारत में 500,000 से अधिक बैंकिंग प्वाइंट्स के अपने मजबूत नेटवर्क का लाभ उठाएगा। माइक्रो एटीएम लेनदेन की सुविधा के लिए, एयरटेल पेमेंट्स बैंक अब नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन आॅफ इंडिया (एनपीसीआई) - नेशनल फाइनेंसियल स्विच (एनएफएस) के साथ इंटीग्रेट किया गया है। किसी भी बैंक के ग्राहक अब अपने पड़ोस में स्थित एयरटेल पेमेंट्स बैंक के बैंकिंग प्वाइंट पर माइक्रो एटीएम सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। उपयोगकर्ता निर्दिष्ट बैंकिंग प्वाइंट से किसी भी बैंक के डेबिट कार्ड का उपयोग करके अब तत्काल नकद निकासी कर सकते हैं और अपने खाते की शेष राशि की जांच कर सकते हैं। उपयोगकर्ता माइक्रो एटीएम के माध्यम से प्रति लेनदेन 10,000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं।

कहां मिलेगा 5जी सिम? आपका मोबाइल कैसे पकड़ेगा 5जी नेटवर्क? यहां जानें...
Published / 2022-10-01 10:08:49
कहां मिलेगा 5जी सिम? आपका मोबाइल कैसे पकड़ेगा 5जी नेटवर्क? यहां जानें...

एबीएन नॉलेज डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में रिमोट का बटन दबाकर भारत में 5जी इंटनरेट सेवाओं का आगाज कर दिया है। पहले फेज में सर्विस को 13 शहर में रोल आउट किया जायेगा। इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गांधीनगर, गुरुग्राम, हैदराबाद, जामनगर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे शामिल हैं। इसके बाद 5जी को देश के हर हिस्से में पहुंचाया जायेगा। उल्लेखनीय है की 5जी सर्विस शुरू होने से पहले 5जी स्मार्टफोन बाजार में आ चुके हैं और सर्विस चालू होते ही लोग सुपर फास्ट 5जी इंटरनेट का मजा ले पायेंगे। हालांकि, सवाल यह उठता है कि 5जी नेटवर्क आने के बाद 5जी सिम कैसे मिलेगी? और 5जी सिम कार्ड पर अपना पुराना नंबर कैसे यूज किया जायेगा, तो चलिए अब आपको बताते हैं कि 5जी स्मार्टफोन पर 5जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। सिम के साइज में नहीं होगा बदलाव : इस समय बाजार में 2जी, 3जी और 4जी सिम मौजूद हैं। इस वक्त फीचर फोन यूजर्स जहां 2जी सिम यूज करते हैं, वहीं स्मार्टफोन यूजर्स 3जी और 4जी दोनों तरह के सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। अगर बात करें 5जी सिम की, तो यह मौजूदा 4जी सिम की तरह ही होगी। जानकारी के अनुसार 4जी सिम के साइज या शेप में कोई भी बदलाव नहीं किया जायेगा। 5G नेटवर्क भी पकड़ेगी 4जी सिम : आप फिलहाल जिस भी कंपनी की 4जी सिम इस्तेमाल रहे हैं, वह 5जी नेटवर्क भी पकड़ सकेगी। हालांकि ऐसा कैसे संभव होगा। इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। दरअसल, सिम के अंदर कोई तकनीक नहीं होती है। सिम के माध्यम से आपको सिर्फ एक यूनिक आईडी दी जाती है और उसी आईडी के हिसाब से आपके नंबर पर प्लान एक्टिव किया जाता है। ऐसे में हो सकता है कि आपको नई सिम लेने की जरूरत न पड़े। किन मोबाइल फोन्स में चलेगी 5जी सिम? 5जी सिम का इस्तेमाल सिर्फ 5जी फोन पर ही किया जा सकेगा। साथ ही जो मोबाइल यूजर्स 5जी फोन खरीद चुके हैं हो सकता हैं उन्हें अलग से 5जी सिम खरीदने की जरूरत न पड़े। ग्राहक अपनी 4जी सिम पर ही 5जी नेटवर्क कनेक्ट कर सकेंगे।

नई शुरुआत : आज से 5जी युग मे कदम रखने जा रहा देश, पीएम मोदी बनेंगे गवाह
Published / 2022-10-01 05:41:21
नई शुरुआत : आज से 5जी युग मे कदम रखने जा रहा देश, पीएम मोदी बनेंगे गवाह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत आज से 5जी युग में कदम रखने जा रहा है। कुछ ही घंटों बाद 4जी से अपग्रेड होकर हम 5जी सर्विस तक पहुंच जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार 1 अक्टूबर को इंडियन मोबाइल कांग्रेस में 5जी सर्विस को लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही भारत में आज से इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 5जी सर्विस भी शुरू होंगी। केंद्रीय मंत्री ने सभी टेलीकॉम सर्विस को रोल-आउट के लिए तैयार रहने को कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी आज सुबह 10 बजे 5जी सर्विसेस को लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही जियो और एयरटेल की भी 5जी सर्विस लॉन्च हो सकती है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाला ये इवेंट 4 अक्टूबर तक चलेगा। इस चार दिवसीय कार्यक्रम में 5जी इवेंट के अलावा कई दूसरे इवेंट भी होंगे।पीएम मोदी अगले महीने चार दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जहां रिलायंस जियो, एयरटेल, वोडाफोन आइडिया सहित प्रमुख दूरसंचार कंपनियां देश के लिए अपनी 5जी नेटवर्क योजनाओं के बारे में बताएंगे।रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कहा कि लगभग एक महीने बाद यानी दिवाली तक वह दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में 5जी सर्विस शुरू कर देंगे। वहीं अगले साल दिसंबर तक पूरे भारत में अपनी 5जी नेटवर्क शुरू करने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये निवेश करेंगे। भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो सिटी सहित कई प्रमुख शहरों में इस दिवाली 2022 तक जिओ 5 जी को रोल आउट करने की योजना बनाई है।

5जी की शुरुआत से बढ़ता दूरसंचार का दायरा
Published / 2022-09-30 06:46:32
5जी की शुरुआत से बढ़ता दूरसंचार का दायरा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस दीवाली पर हम एक नए दूरसंचार युग में होंगे और उसकी उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। 5जी सेवाएं शुरू होने के बाद आने वाले बदलाव में न केवल इंटरनेट की गति में काफी अ​धिक इजाफा होगा ब​ल्कि प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह एक ऐसा मानक है जो दूरसंचार कंपनियों और दूरसंचार क्षेत्र की सेहत को परखता है। भारत में प्रति माह एआरपीयू दुनिया में सबसे कम वाली श्रेणी में रहा है और दूरसंचार कंपनियों ने लगातार को​शिश की है कि इसमें सुधार करके इस क्षेत्र को नये सिरे से संवारा जा सके। इस तमाम बातचीत के बावजूद दूरसंचार कंपनियों के लिए एआरपीयू में इजाफा निहायत कम रहा है। इसकी वजह यह डर है कि प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतें कम होने से उपभोक्ता दूर होंगे। दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने शुल्क दरों में मामूली इजाफा करने की दिशा में छोटे कदम भी नहीं उठाए। देश की बड़ी दूरसंचार कंपनियों के लिए भी प्रति माह एआरपीयू 200 रुपये से कम है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्रा​धिकरण के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2022 में उद्योग जगत का औसत 127.12 रुपये प्रति माह था। रिलायंस और भारती समूहों के वित्तीय नतीजों के मुताबिक जून में समाप्त तिमाही में जियो का एआरपीयू 175.7 रुपये और एयरटेल का 183 रुपये प्रति माह था। शीर्ष दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो का एआरपीयू पिछले साल की समान अव​धि की तुलना में केवल 4.8 फीसदी बढ़ा। दूरसंचार क्षेत्र के प्रमुख कारोबारियों के बीच हो रही चर्चाओं से लगता है कि 5जी की शुरुआत होने के बाद यह तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। वरिष्ठ अ​धिकारी शुल्क दरों और एआरपीयू से संबं​धित गणित लगाने में लगे हैं क्योंकि 5जी की शुरुआत बस होने ही वाली है। इनमें से कुछ कंपनियों का अनुमान है कि प्रति माह एआरपीयू में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है क्योंकि उपभोक्ता अ​धिक से अ​धिक डेटा की खपत करेंगे। अगर यह सब कंपनियों के अनुमान के मुताबिक हुआ तो यह उच्च राजस्व के लिए उचित मॉडल होगा, वह भी कंपनियों द्वारा बिना शुल्क में इजाफा किए। अब तक के संकेत तो यही हैं कि 5जी शुल्क दरें संभवत: 4जी से बहुत अलग न हों, दूरसंचार कंपनियां अभी इस विषय पर किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी हैं। हकीकत में शुल्क दरों को लेकर काफी संघर्ष देखने को मिल सकता है। यदि एआरपीयू 5जी के साथ 25 प्रतिशत से अधिक होता है तो एयरटेल और जियो दोनों के लिए 200 रुपये का स्तर पार करना मु​श्किल होगा। अभी तक दूरसंचार उद्योग इसी फॉर्मूले पर काम कर रहा है कि डेटा का उपयोग कई गुना बढ़ जाएगा क्योंकि 5जी तकनीक में इंटरनेट की गति काफी तेज होगी। हालांकि प्रति जीबी लागत में शायद बहुत बदलाव न आए। डेटा की खपत में इजाफे को लेकर यह आशावादी विचार मौजूदा खपत के रुझान पर आधारित है। हमने काफी पहले एक बात सुनी थी कि आने वाले समय में डेटा की मांग तेल की तरह होगी। अब 5जी के आगमन के पहले चर्चा है कि सबस्क्राइबर डेटा की खपत एकदम पानी की तरह करेंगे। केवल तेल और पानी के साथ तुलना की जगह और भी कई तरह के आकलन हैं। इस क्षेत्र पर नजर बनाए हुए अ​धिकारी कदम दर कदम आगे बढ़ रहे हैं ताकि बेहतर शुल्क दर और एआरपीयू आंकड़ा हासिल किया जा सके। मौजूदा रुझान से संकेत मिलता है कि यूट्यूब और ऑनलाइन गेमिंग फोन डेटा के इस्तेमाल में शीर्ष पर हैं। अनुमान है कि उपभोक्ता यूट्यूब पर एक्स फ्रेम का इस्तेमाल कर रहा है और 5जी तकनीक आने के बाद वह उसका तीन गुना फ्रेम इस्तेमाल करने लगेगा। फ्रेम प्रति सेकंड यानी एफपीएस एक इकाई है जो यूट्यूब या ऑनलाइन वीडियो गेम में वीडियो कैप्चर का आकलन करता है। एफपीएस में सुधार के साथ वीडियो और अ​धिक सहज ढंग से चलेंगे। दूरसंचार कंपनियां 5जी वीडियो कॉल से भी उम्मीद लगा रही हैं कि उसमें काफी इजाफा होगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि 5जी के आगमन के बाद इस क्षेत्र में उपभोक्ता 20 जीबी डेटा प्रतिमाह से बढ़कर 50-60 जीबी डेटा प्रतिमाह तक पहुंच सकते हैं। जाहिर है इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं मौजूद हैं क्योंकि आने वाले समय में उपभोक्ता कारोबार से लेकर कृ​षि तक काफी कुछ इंटरनेट से संचालित होने की उम्मीद बढ़ रही है। हालांकि उद्योग जगत के अंदरूनी स्रोतों की मानें तो चिप की कमी एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस कमी के कारण ही दूरसंचार कंपनियां एक साथ 5जी सेवाओं को देशव्यापी स्तर पर शुरू नहीं कर पा रही हैं। मेट्रो शहरों में 5जी सेवा शुरू होने वाली है जबकि शेष भारत को अभी इसके लिए प्रतीक्षा करनी होगी। डेटा की खपत बढ़ने से जहां एआरपीयू 200 रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है, वहीं शायद दूरसंचार कंपनियों के लिए 5जी तकनीक पर किए गए निवेश की लागत निकालने के लिए इतना काफी न हो। इसके अलावा काफी कुछ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि 4जी से कितने उपभोक्ता 5जी में जाते हैं और इस प्रक्रिया में कितना समय लगता है? उपयोग के मामलों से ही इस बदलाव की दर निर्धारित होगी लेकिन एक शीर्ष अ​धिकारी का कहना है कि करीब दो तिहाई 4जी उपभोक्ता बहुत जल्दी 5जी का रुख कर लेंगे। इस बीच भारतीय मोबाइल कांग्रेस की आगामी बैठक यानी भारतीय दूरसंचार उद्योग की अहम ​शिखर बैठक में भी हमें 5जी के भविष्य की झलक अवश्य देखने को मिलेगी। आशा की जा रही है कि एक बार फिर मुकेश अंबानी और सुनील मित्तल एक साथ मंच पर होंगे और इस निर्णायक घड़ी में दूरसंचार क्षेत्र की ओर से कोई बड़ा संदेश जारी करेंगे।

एयरटेल ने आपके घर के लिए एक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली एक्ससेफ किया लॉन्च
Published / 2022-09-27 09:33:55
एयरटेल ने आपके घर के लिए एक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली एक्ससेफ किया लॉन्च

एबीएन नॉलेज डेस्क। जब आप घर से दूर होते हैं तो अपने बुजुर्ग माता-पिता, छोटे बच्चे या यहां तक कि अपने प्यारे पालतू जानवर की सुरक्षा के बारे में चिंतित रहते हैं? अब चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत की अग्रणी कम्युनिकेशन्ससॉल्यूशनप्रोवाइड, भारती एयरटेल (एयरटेल) ने आज एक सहज, एंड-टू-एंड होम सर्विलांससॉल्यूशनएक्ससेफ के लॉन्च की घोषणा की है, जो एक एंड-टू-एंड होम सर्विलांससिस्टम है और उपयोग में बेहद आसान है। इसमें कई तरह के वाई-फाईबेस्डएडवांस्ड कैमरे हैं, जो ग्राहकों को घर से दूर रहने पर भी उन्हें अपने घरों से जोड़े रखते हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है। ग्राहक https://www.airtel.in/xsafe/ पर जाकर या एयरटेल थैंक्सऐप में लॉग-इन करके मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बैंगलोर, चेन्नई और कोलकाता सहित 40 शहरों में उपलब्ध एक्ससेफडिवाइस अपने लिए बुक कर सकते हैं। भारती एयरटेल के सीईओहोम्स वीर इंदर नाथ ने इस नई गृह सुरक्षा प्रणाली एक्ससेफके लॉन्च के अवसर पर बोलते करते हुए कहा, हम लगातार अपने ग्राहकों के फीडबैक पर ध्यान देते हैं और महामारी के बाद उनमें से कई ने अपने प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। ऐसे ग्राहक जो अपने घर से दूर रहते हैं, उन ग्राहकों के लिए, एक्ससेफ एक आदर्श विकल्प है। ग्राहक इस यूजरफ्रेंडली, एंड-टू-एंड होम सर्विलांससॉल्यूशन के साथ अपने प्रियजनों को देख सकते हैं। कैमरे में मौजूद दोतरफा संचार प्रणाली के माध्यम से, वे घर के सदस्यों के साथ कहीं से भी संवाद करने में सक्षम होंगे।

इंटरनेट पर लाइव दिखेगा उल्का से नासा के डार्ट की टक्कर
Published / 2022-09-25 09:39:12
इंटरनेट पर लाइव दिखेगा उल्का से नासा के डार्ट की टक्कर

एबीएन नॉलेज डेस्क। उल्का पिंड पृथ्वी से टकरा कर जीवन खत्म कर सकते हैं, वैज्ञानिकों को यह चिंता हमेशा रही है। इस खतरे से निपटने के लिए नासा का अंतरिक्ष यान डार्ट धरती से 68 लाख किमी दूर एक उल्का पिंड डिमोर्फोस से टकराने जा रहा है। यह पिंड 525 फुट की डाइडिमोस नामक चट्टानी उल्का की परिक्रमा करता है। टकराव से उल्काओं का मार्ग बदलने की उम्मीद है। इसीलिए इसे डबल एस्ट्रॉयड री-डायरेक्शन टेस्ट यानी डार्ट नाम मिला है। यह टक्कर इंटरनेट पर लाइव देखी जा सकेगी। टक्कर भारतीय समयानुसार 27 सितंबर को सुबह 4:44 बजे होगी। इस दौरान यान की गति 22,500 किमी प्रति घंटा होगी। क्यों पड़ी इस परीक्षण की जरूरत : दोनों उल्काएं वैसे तो पृथ्वी के लिए खतरा नहीं है। फिर भी परखा जा रहा है कि भविष्य में कोई उल्का अगर सच में पृथ्वी की ओर आई तो क्या हम उसका मार्ग बदल सकते हैं? इसे पृथ्वी की सुरक्षा का परीक्षण मिशन कहा जा रहा है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि टक्कर से उल्काओं का मार्ग बदलेगा। दोनों उल्काओं के पथ पर वैज्ञानिकों की नजर लंबे समय से है। टक्कर के बाद बदलाव का पता दूरबीनों से लगाया जायेगा। 2,500 करोड़ रुपये का डार्ट, उपग्रह भी साथ : • 24 नवंबर 2021 में धरती से प्रक्षेपित डार्ट पर 2,500 करोड़ खर्च। • ड्रेको उल्का इस टक्कर के हर सेकंड की तस्वीरें लेने में मदद करेगा। • एक छोटा उपग्रह लाइट इटैलियन क्यूबसैट भी भेजा गया है, जो टकराव से पहले यान से अलग होकर पूरी घटना का गवाह बनेगा। • इससे टकराव की 3 मिनट बाद तक की बेहद साफ तस्वीरें ली जायेंगी।

आखिर क्यों कटा होता है मोबाइल सिम का एक किनारा? जानें इसका सीक्रेट
Published / 2022-09-25 08:11:29
आखिर क्यों कटा होता है मोबाइल सिम का एक किनारा? जानें इसका सीक्रेट

एबीएन नॉलेज डेस्क। मोबाइल सिम कार्ड के एक किनारे पर कट का निशान होता है, पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है। मोबाइल नेटवर्क कंपनियों ने इसे खास मकसद से बनाया है, जानिए, इसका क्या काम है... समय के साथ तकनीक में भी कई बदलाव आ रहे हैं। मोबाइल से लेकर सिम के आकार तक में बदलाव हुआ है। नतीजा, अब यूजर्स को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। मोबाइल सिम कार्ड की बात करें तो पहले सामान्य सिम आते थे जो आयताकार होते हैं। इसके बाद सिम के आकार में थोड़ा बदलाव किया गया, जो चौंकाने वाला था। सामान्य सिम के एक किनारे को काट दिया गया। इतना ही नहीं, उस सिम को जहां पर लगाया गया उस स्लॉट में भी वही डिजाइन दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि ज्यादातर लोगों को यह नहीं मालूम कि आखिर सिम में बदलाव क्यों किया गया? उसके एक किनारे पर कट क्यों बनाया गया और मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के ऐसा करने से यूजर पर क्या असर पड़ा? इन सवालों के समुचित जवाब यहां हैं। इसलिए सिम में कट लगाने की नौबत आई : शुरुआती दौर में ऐसे फोंस आते थे जिसमें सिम लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी, इन्हें पोस्टपेड फोन कहा जाता था। फिर प्रीपेड फोन का चलन शुरू हुआ और कंपनियों ने सिम बनाने शुरू किये। सिम के चारों कोने बराबर बनाए जाते थे, इसलिए लोगों को इसे स्लॉट में लगाते समय में यह समझ नहीं आता था कि वो सीधा लगा रहे हैं या उल्टा। ठीक से न लगने पर वो बार-बार इसे लगाने की कोशिश करते थे। ज्यादातर मामलों में सिम उल्टा लगाने के कारण वो या तो फंस जाता था या फिर सिम में लगी चिप खराब हो जाती थी। इस समस्या का हल ढूंढने के लिए कंपनियों ने सिम की डिजाइन में बदलाव करने की योजना बनाई। बदलाव के बाद ऐसा सिम बनाया जो एक किनारे पर कटा हुआ था। कितने काम का साबित हुआ यह बदलाव : कंपनियों ने सिम के एक हिस्से पर कट लगाकर रिलीज करना शुरू किया। सिम की डिजाइन में बदलाव के कारण कंपनियों को मोबाइल में लगाई जाने वाली सिम ट्रे को भी बदलना पड़ा। इसके बाद इसे मोबाइल में लगाना आसान हुआ। सिम ट्रे में बने आकार में सिम को फिट करना आसान हो गया। इस तरह सिम के खराब होने या इसकी चिप खराब होने के मामले बंद हो गये। कट मार्क के कारण यूजर को इसे ट्रे में लगाने का तरीका ज्यादा आसान लगा। सिम कार्ड का नया आकार दुनियाभर में इतना पॉपुलर हुआ कि इसे लगभग सभी कंपनियों ने अपनाया। इतना ही नहीं इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आइएसओ ओर से भी मान्यता मिली। वर्तमान में सिम कार्ड बनाने वाली फ्रांस की कंपनी आइडिमिया दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। अब आइडिमिया भारत को दुनिया का सिम कार्ड हब बनाने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आइडिमिया कंपनी भारत में सिम कार्ड के प्रोडक्शन का विस्तार करने की तेयारी में है।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.