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Published / 2022-09-08 17:30:28
एयरटेल के सीईओ ने ग्राहकों को दी 5जी के असीमित प्रयोगों की जानकारी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय दूरसंचार कंपनियां देश में 5जी नेटवर्क के रोलआउट की आधिकारिक घोषणा करने के लिए तैयारियां कर रही हैं, इससे ग्राहकों के लिए हाई डेटा स्पीड के साथ साथ मोबाइल का इस्तेमाल कई नए मामलों में करने के रास्ते खुल जाएंगे। ग्राहक 5जी नेटवर्क की शुरुआत होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे टेलीकॉम ग्राहकों में इसकी खूबियों को लेकर काफी उत्सुकता है। एयरटेल के सीईओ श्री गोपाल विट्ठल ने इस बाबत एक पत्र लिखकर उनके प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया है। श्री गोपाल विट्ठल ने अपने पत्र में लिखा है, पिछली बार जब मैंने आपको पत्र लिखा था, तब भारत एक कठिन कोविड लहर से होकर गुजर रहा था। आपके जीवन सुचारू रूप से चलाने में आपकी मदद करने के लिए टेलीकॉम का होना आवश्यक था। घर से काम करना हो, घर से पढ़ाई करना हो, मनोरंजन करना हो या ऑनलाइन शॉपिंग करना हो, हमको ऐसे समय में आपकी सेवा करने पर गर्व महसूस हुआ। हालांकि, आज मैं आपको पहले से बेहतर और खुशी की माहौल में लिखने के लिए उत्साहित हूं। कुछ ही हफ्तों में, हम अपनी अगली पीढ़ी की तकनीक एयरटेल 5जी को लॉन्च करना शुरू कर देंगे। आप में से कुछ ने मुझसे सवाल पूछा है कि 5G आपके लिए क्या करेगा और आप इसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं। आइए मैं आपके लिए इन सवालों के जवाब देने की कोशिश करता हूं। 1. एयरटेल 5जी आपके लिए क्या करेगा? एयरटेल 5जी नेटवर्क 4G की तुलना में कही अधिक हिग्ज स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। यह आज की गति से 20 से 30 गुना के बीच कहीं भी हो सकती है। यह आपको किसी एप्लिकेशन को बूट करने या कुछ ही समय में एक हेवी फ़ाइल डाउनलोड करने की अनुमति देगा। एयरटेल 5जी विशेष आवश्यकताओं के लिए डिफरेंशियल क्वालिटी को भी सक्षम करेगा, जिसे नेटवर्क स्लाइसिंग कहा जाता है। इसलिए, यदि आप एक गेमर हैं, और बिना किसी बाधा के उत्तम अनुभव चाहते हैं, तो हम आपके लिए नेटवर्क को स्लाइस करने में सक्षम होंगे। या यदि आप घर से काम कर रहे हैं और कनेक्टिविटी के मामले में स्थिरता वाला अनुभव चाहते हैं, तो हम इसे आपके लिए संभव करेंगे। 2. एयरटेल 5जी आपके लिए सर्वश्रेष्ठ क्यों है? एयरटेल 5जी नेटवर्क आपके स्मार्टफोन और आपको ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इज़के तीन स्पष्ट फायदे हैं। सबसे पहले, दो 5G तकनीकों में से, हमने आपके लिए एक विशिष्ट 5G तकनीक को चुना है जिसमें दुनिया में सबसे व्यापक इको-सिस्टम है। इसका मतलब है कि भारत में सभी 5G स्मार्टफोन बिना किसी त्रुटि के एयरटेल नेटवर्क पर काम करेंगे। यह तब भी लागू होगा जब आप अपने एयरटेल 5जी इनेबल्ड फोन के साथ विदेश यात्रा करेंगे। अन्य तकनीकों में, यह संभव है कि दस में से चार 5जी फोन 5जी को सपोर्ट न करें। दूसरा, हम आपको जो अनुभव प्रदान करते हैं, उस मानदंड को हम लगातार ऊंचा करेंगे इसके लिए हम आश्वस्त हैं। पिछले कुछ वर्षों में, हमारे 4जी नेटवर्क को इंडिपेंडेंट रेटिंग एजेंसियों द्वारा लगातार स्पीड, वीडियो और गेमिंग अनुभव में सर्वश्रेष्ठ दर्जा दिया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका एयरटेल 5G अनुभव अद्वितीय है, अपने सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरों की विशेषज्ञता सामने लाने के लिए, अत्याधुनिक उपकरणों का निर्माण करने और कई शहरों में अपनी तरह का पहला परीक्षण करने और मामलों का उपयोग करने के लिए इस ताकत का लाभ उठाया है। अंत में, हम पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होंगे। हम सभी अब जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी और अप्रत्याशित बारिश से जूझ रहे हैं। यह समस्या अब वास्तविक है। इसलिए हमने अगले कुछ दशकों में अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर हस्ताक्षर किए हैं। नतीजतन, हमने जिस 5जी समाधान का चयन किय है, वह भारत में सबसे अधिक ऊर्जा संरक्षित करने वाला और कार्बन को कम करने में सक्षम होगा। 3. आप 5G का अनुभव लेना कब शुरू कर सकते हैं : हमें एक महीने के भीतर ही अपनी 5जी सेवाएं शुरू करने की उम्मीद है। दिसंबर तक हमें प्रमुख महानगरों में कवरेज मिलनी शुरू हो जाएगी। उसके बाद हम पूरे देश को कवर करने के लिए तेजी से विस्तार करेंगे। हम 2023 के अंत तक पूरे शहरी भारत को कवर करने की उम्मीद कर रहे हैं। यदि आप अपने शहर में 5जी की उपलब्धता जानना चाहते हैं, तो आप इसे एयरटेल थैंक्स ऐप पर देख पाएंगे और देख पाएंगे कि आपका फोन और शहर 5जी के लिए तैयार है या नहीं। यह सुविधा हमारे ऐप पर 5जी लॉन्च के साथ उपलब्ध होगी। 4. एयरटेल 5जी एक्सेस करने के लिए आपके लिए तीन आसान चरण : एक साल से ज्यादा पुराने ज्यादातर स्मार्टफोन में 5G चिपसेट नहीं होता है। हालांकि, भारत मे उपलब्ध नए स्मार्टफोन्स में ज्यादातर 5जी सक्षम हैं। यदि आप एक नया स्मार्टफोन खरीद रहे हैं, तो जांच लें कि यह 5जी सक्षम है या नहीं। फोन की 5G सेटिंग चालू करें : अपने फ़ोन पर 5जी सक्षम करने के लिए, सेटिंग टैब पर जाएं और कनेक्शन या मोबाइल नेटवर्क पर जाएं। आपको 4जी या LTE के अलावा 5जी चुनने का विकल्प दिखाया जायेगा। उस मोड का चयन करें और आप तैयार हैं। आपका एयरटेल सिम पहले से ही 5जी सक्षम है। तो यह आपके 5जी स्मार्ट फोन पर बिना किसी रुकावट के काम करेगा। मुझे आपके किसी भी सुझाव या प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है और हमें आपकी सेवा करने का विशेषाधिकार देने के लिए धन्यवाद।

Published / 2022-09-08 09:03:30
डीआरडीओ के इस घातक मिसाइल से अब नहीं बचेगा दुश्मन का विमान

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा सेना ने सतह से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन मिसाइल के शुक्रवार को छह परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए। ये परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में किये गये। परीक्षण मिसाइल की आकलन प्रक्रिया के तहत किये गये हैं। परीक्षण के दौरान तेज गति से उडने वाले लक्ष्यों पर निशाना साधा गया। इसका उद्देश्य विभिन्न परिद्दश्यों में मिसाइल की मारक क्षमता का पता लगाना था। ये परीक्षण दिन और रात के समय भी किये गये। सभी मिशनों के दौरान मिसाइल ने लक्ष्यों पर अचूक निशाना साधा और सभी मानकों को पूरा किया। परीक्षण के दौरान सभी स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ के अध्यक्ष ने सफल परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी। डीआरडीओ अध्यक्ष ने कहा कि यह मिसाइल अब सेना में शामिल करने के लिए तैयार है।

Published / 2022-09-05 08:04:35
अब बिना नेटवर्क भी एंड्रॉयड 14 से लगेगी कॉल, न कॉल ड्रॉप और न आवाज जाने की किच-किच

एबीएन नॉलेज डेस्क। बढ़ती आबादी और बढ़ते स्मार्टफोन यूज़र्स के कारण नेटवर्क न आना एक बड़ी समस्या बन गयी है। खराब नेटवर्क के चलते कॉल ड्रॉप, कॉल न लगने और नेट न चलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार इमरजेंसी में खराब नेटवर्क के चलते कॉल न लगने से लोग परेशानी में पड़ जाते हैं। लेकिन अब इस समस्या का हल भी आपको मिलने जा रहा है। टेक रिपोर्ट्स के मुताबिक अब एंड्रॉयड 14 में आप बिना नेटवर्क के भी कॉल कर सकेंगे। भविष्य में ऐसा संभव है कि एंड्रॉयड 14 में सैटेलाइट कनेक्टिविटी का फीचर मिल सकता है। अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक एप्पल भी अपने आईफोन 14 में ये फीचर दे सकता है। दोनों ही ओएस में अब यूजर्स को इसका मजा मिल सकता है। गूगल वाइस प्रेसिडेंट ने दी जानकारी : गूगल के वाइस प्रेसिडेंट हिरोशी ने टि्वटर पर ट्वीट करते हुए ये जानकारी दी है। हिरोशी की ट्वीट के मुताबिक सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स के साथ यूजर्स को बेहतर एक्सपीरिएंस मिलेगा। उन्होंने अपनी ट्वीट में आगे जानकारी दी है कि अब वो सैटेलाइट के लिए ओएस को डिजाइन कर रहे हैं। इसके लिए वो पार्टनर के साथ काम कर रहे हैं। एंड्रॉयड के अगले वर्जन में यूजर्स को सैटेलाइट कनेक्टिविटी मिल सकती है। एप्पल की लॉन्चिंग से पहले ऐलान : गूगल के वाइस प्रेसिडेंट ने सैटेलाइट कनेक्टिविटी की बात उस वक्त की है, जब कुछ ही दिनों में आईफोन 14 लॉन्च होने के लिए तैयार है। 7 सितंबर को अपने इवेंट में एप्पल आईफोन 14 को लॉन्च कर सकता है। सा माना जा रहा है कि एंड्रॉयड से पहले एप्पल अपने इस नए आईफोन में ये फीचर दे सकता है। इसलिए गूगल भी इस टेक्नोलॉजी के मामले में पीछे नहीं रहना चाहता है। एंड्रॉयड ने भी इस फीचर के आने से पहले इसकी लॉन्चिंग की बात कह दी है।

Published / 2022-09-03 17:30:30
अब अगले साल ही शुरू हो सकेगी 5जी की सेवा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में 5जी सेवाओं का मजा लेने वाले लोगों को साल 2023 तक का इंतजार करना पड़ सकता है। दूरसंचार उपकरण निर्माताओं का कहना है कि शीर्ष 10 शहरों में 5जी नेटवर्क सेवाओं का उपयुक्त कवरेज तैयार होने में छह से आठ महीने लग सकते हैं। कवरेज की मात्रा दूरसंचार कंपनी की रणनीति के आधार पर अलग-अलग होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी किन शहरों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहती है। आमतौर पर कवरेज किसी शहर के एक चौथाई से आधे हिस्से तक अलग-अलग हो सकती है। यह कंपनियों पर निर्भर करेगा कि उनकी उनकी नजर अधिक कवरेज पर है या वह कम कवरेज के साथ अधिक शहरों में शुरू करना चाहती हैं। दूरसंचार गियर बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अनुमानित लक्ष्य शीर्ष 10 शहरों में उचित कवरेज देना है। इसके लिए 30 हजार टावरों पर रेडियो एवं उपकरण स्थापित करने की आवश्यकता होगीं। यह काम 6 से 8 माह में किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि कंपनियां फिलहाल इन दस शहरों में 5जी सेवाएं शुरू करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं क्योंकि इन शहरों में 4जी ग्राहकों की संख्या काफी है और ग्राहक 5जी सपोर्ट वाले मोबाइल फोन के साथ तैयार हैं। इसके बाद 5जी संभावित उपयोगकर्ताओं की संख्या आती है। इसका मतलब यह हुआ कि फिलहाल 2 से 24 लाख रेडियो उपकरणों की आपूर्ति करने की आवश्यकता है। दूरसंचार कंपनियां जिन शीर्ष 10 शहरों में 5जी सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही हैं, इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं।

Published / 2022-09-01 12:55:01
चिंता का नया विषय बन रहे स्वचालित ड्रोन

एबीएन सेंट्रल डेस्क (जैमिनी भगवती)। लीथल आॅटोनॉमस वीपंस सिस्टम्स (एलएडब्ल्यूएस या लॉज) पूरी तरह मशीन आधारित और सिस्टम नियंत्रित हथियार प्रणाली है जो चेहरे की पहचान और कृत्रिम मेधा पर आधारित होती है। ऐसे ड्रोन केवल लक्ष्य के बारे में अनुमानित जानकारी के आधार पर काम करते हैं और उनके हमले में कोई मानव हस्तक्षेप नहीं होता। इस विषय में मीडिया की अटकल है कि ऐसा पहला हमला लीबिया में मार्च 2020 में किया गया। यह विडंबना ही है कि इस हथियार प्रणाली का संक्षिप्त नाम लॉज है क्योंकि ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं है जो ऐसे हथियारों के इस्तेमाल को सीमित करता हो या उसकी वजह देता हो। फिलहाल इन हथियारों की विश्वसनीयता के बारे में भी कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं है। हाल के दिनों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां सीमाओं के पार ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, हालांकि वह स्वचालित इस्तेमाल नहीं था। अमेरिकी सरकार ने 1 अगस्त को कहा कि मिस्र के सर्जन और अल कायदा के नेता अयमान अल जवाहिरी को काबुल में एक ड्रोन हमले में मार दिया गया। कहा गया कि इसके लिए एक ड्रोन से हेलफायर आर9एक्स मिसाइल दागी गई और इस हमले में कोई और जान नहीं गई। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस हमले के बारे में कहा, ह्यइससे फर्क नहीं पड़ता कि कितना समय लगता है, इससे भी कि आप कहां छिपे हैं, अगर आप हमारे लोगों के लिए खतरा हैं तो अमेरिका आपको खोज कर खत्म कर देगा।ह्ण जवाहिरी अगस्त 1998 में केन्या और तंजानिया के अमेरिकी दूतावासों में हमले के लिए कुख्यात था जिनमें 224 लोग मारे गए थे। वह 11 सितंबर, 2001 के न्यूयॉर्क हमलों में भी शामिल था जिसमें करीब 3,000 लोगों की जान गई थी। मीडिया में अटकलें हैं कि काबुल में जवाहिरी जिस ठिकाने पर रुका था उसकी जानकारी पाकिस्तान ने इस आशा में मुहैया कराई कि वह बदले में पाकिस्तान को भुगतान संकट से निपटने में मदद करेगा। करीब दो वर्ष से कुछ अधिक पहले 3 जनवरी, 2020 को ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी बगदाद हवाई अड्डे पर अमेरिका के रीपर ड्रोन हमले में मारे गए थे। सऊदी अरब के अरब न्यूज ने बताया था कि सुलेमानी के काफिले पर हमले में इस्तेमाल ड्रोन को कतर के अल उदीद एयर बेस से छोड़ा गया था जबकि इसके रिमोट कंट्रोल का संचालन अमेरिका के नेवाडा स्थित क्रीच एयरफोर्स बेस से किया गया था। सुलेमानी तत्कालीन इराकी प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल-माहदी से मिलने बगदाद आए थे। सुलेमानी के अलावा उस हमले में कम से कम चार अन्य ईरानी तथा पांच इराकी मारे गए थे। न्यायिक फैसले के बगैर इन हत्याओं पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिवेदक ने कहा था कि यह हत्याकांड अंतरराष्ट्रीय कानूनों का संभावित उल्लंघन था। असहाय इराकी सरकार का कहना था कि हमले ने उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन किया है। तकरीबन एक वर्ष पहले 29 अगस्त, 2021 को काबुल में हुए एक ड्रोन हमले में 10 अफगान नागरिक मारे गए थे जिनमें सात बच्चे शामिल थे। मरने वालों में सबसे छोटा बच्चा महज दो वर्ष का था। अमेरिकी जनरल केनेथ मैकिंजी जो अमेरिकी केंद्रीय कमान के मुखिया थे, ने आधिकारिक रूप से कहा था कि यह हमला एक गलती था। आज तक यह पता नहीं है कि इस ड्रोन हमले को मंजूरी देने वालों को कोई सजा सुनायी गई या नहीं। 27 नवंबर, 2020 को तेहरान से 70 किलोमीटर दूर अबसर्द में एक और सीमा पार हमले में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े भौतिकीविद मोहसिन फखरीजादेह महाबादी को मार दिया गया। मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि यह हत्या इजरायल सरकार द्वारा स्वचालित सैटेलाइट संचालित गन के माध्यम से अंजाम दी गई। 2018 में तत्कालीन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि महाबादी एएमएडी नामक एक परियोजना के प्रमुख थे जो परमाणु हथियार विकसित करने के लिए बनी थी। उधर भारतीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने गत 18 अगस्त को जम्मू सीमा के निकट ड्रोन के माध्यम से हथियारों का जखीरा गिराया। ऐसा नहीं है कि केवल अमेरिका ने ही ऐसे ड्रोन विकसित किए हैं। तुर्की की सरकार द्वारा प्रवर्तित कंपनी सवुन्मा टेक्नोलॉजिलेरी मुहेंदिसिल्क (एसटीएम) ने कार्गू-2 नामक एक ड्रोन तैयार किया है जिसे सामान्य तरीके से भी चलाया जा सकता है और स्वचालित ढंग से भी। ड्रोन तैयार करने के मामले में भारत तुर्की और ईरान से भी पीछे है। आने वाले दिनों में ड्रोन का इस्तेमाल सीमा पार से भारत के ठिकानों पर भी किया जा सकता है ऐसे में अनुमान के आधार पर बचाव करना मुश्किल है। ड्रोन का इस्तेमाल दशकों से हो रहा है लेकिन इसका दायरा बढ़ रहा है। ये स्वचालित हो रहे हैं और इनके स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो रहा है जो विश्व स्तर पर चिंता का विषय होना चाहिए। इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र तथा रेडक्रॉस एवं प्रमुख स्वयंसेवी संगठनों ने बीते 10 वर्ष में लॉज से उत्पन्न खतरों को लेकर चर्चा की है और इनके इस्तेमाल पर रोक चाही है। खासतौर पर 13 दिसंबर, 2021 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने इन हथियारों के इस्तेमाल को सीमित और विनियमित करने के लिए नियमों का आह्वान किया। हालांकि लगता नहीं कि निकट भविष्य में इस दिशा में कोई खास प्रगति हो पाएगी। ऐसा तभी होगा जब दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां इस विषय पर सहमत हों। ऐसा नहीं है कि विभिन्न देशों ने अतीत में कभी किसी हथियार को गैर कानूनी नहीं बनाया। उदाहरण के लिए बायोलॉजिकल ऐंड टॉक्सिन वीपंस कन्वेंशन मार्च 1975 में हुआ था। 2022 के आरंभ तक 184 देश इस संधि का हिस्सा थे। जहां तक रासायनिक शस्त्र संधि की बात है तो यह अप्रैल 1997 में अस्तित्व में आया और 193 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। विरोधाभासी बात यह है कि फिलहाल ऐसी कोई अंतरराष्ट्रीय बाध्यकारी संधि नहीं है जो पारंपरिक ड्रोन तथा लॉज के घातक संस्करणों के इस्तेमाल का नियमन कर सके। 2023 में अगली जी 20 शिखर बैठक भारत में होनी है। अभी इसकी तारीख और जगह तय नहीं हुई है तथा यह भी स्पष्ट नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों में से किन देशों के प्रमुख इसमें आएंगे। अगर जी20 के सहमति दस्तावेज में सीमा पार से ड्रोन/लॉज के इस्तेमाल को सीमित करने या गैर कानूनी बनाने को लेकर कोई दस्तावेज हस्ताक्षरित होता है तो यह शेष विश्व पर भारत का उपकार ही होगा। अगर इस दौरान मानवरति बमवर्षक या लड़ाकू विमानों के विकास को सीमित करने की बात होती है तो और भी अच्छा होगा। (लेखक भारत के पूर्व राजदूत एवं वर्तमान में सेंटर फॉर सोशल ऐंड इकनॉमिक प्रोग्रेस के फेलो हैं)

Published / 2022-08-31 14:13:03
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा : एशिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्लांट पर हुआ मिसाइल अटैक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन में रूसी-नियंत्रित जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सैटेलाइट तस्वीर सामने आई है। जिसमें साफ तौर पर हमले की झलक दिख रही है। न्यूक्लियर रिएक्टर के कुछ ही मीटर दूर फ्यूल स्टोर की बिल्डिंग की छत पर मिसाइल अटैक की वजह से हुए छेंद दिख रहे हैं। उन सुरागों को देखकर क्लियर हो रहा है कि यह गोलाबारी के ही हैं। उनके चारों पर गहरे रंग के झुलसने के निशान भी दिख रहे हैं। रूसी अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन के मिसाइल अटैक की वजह से फ्यूल टैंक की छत क्षतिग्रस्त हो गई है। अगर न्यूक्लियर प्लांट पर मिसाइल गिरी होती तो सबके सामने बहुत ही खतरनाक मंजर होता। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार महीने से जंग जारी है। इस बीच कई बार रूसी-नियंत्रित जापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास गोलाबारी हो चुकी है। इस मामले को लेकर मास्को और कीव दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। जापोरिज्जिया एशिया का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। हालांकि इस समय ये रूस के कब्जे में है और यूक्रेन के कर्मचारी इसे चला रहे हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों के दल के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र पहुंचने से पहले कीव में उनकी तैयारियों का जायजा लिया। आईएईए के विशेषज्ञों का एक दल यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र जा रहा है, जहां विकिरण का रिसाव होने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने कहा कि उन्हें यूरोप के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र की निगरानी के लिए यूक्रेन में एक स्थायी मिशन स्थापित करने की उम्मीद है। ग्रोसी ने निगरानी मिशन के रवाना होने से पहले स्थिति का मुआयना करते हुए यूक्रेन की राजधानी कीव में कहा, यह काफी जटिल अभियान है। हम युद्ध क्षेत्र में जा रहे हैं। हम कब्जे वाले क्षेत्र में जा रहे हैं और इसके लिए न केवल रूस की बल्कि यूक्रेन गणराज्य से भी स्पष्ट गारंटी की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ह्यहमने उसे हासिल कर लिया है, इसलिए अब हम आगे बढ़ रहे हैं। यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के शीघ्र बाद रूसी सैन्यबलों ने जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र पर कब्जा कर लिया था। यूक्रेन के ऊर्जा मंत्री जर्मन गलुशचेंको ने कहा कि कीव इस क्षेत्र को सैनिकों के कब्जे से मुक्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की मांग करता है। गलुशचेंको ने कहा कि उन्हें लगता है कि साल के अंत तक संयंत्र को यूक्रेनी सरकार के नियंत्रण में वापस लाने के लिए यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, हमें जानकारी मिली है कि वे अब अपनी सैन्य उपस्थिति छिपाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए उन्हें इसकी भी जांच करनी चाहिए।

Published / 2022-08-29 06:12:14
क्या चांद पर फिर जायेगा इंसान! आज NASA करेगा आर्टिमिस-1 प्रोग्राम लॉन्च

एबीएन नॉलेज डेस्क। विज्ञान की दुनिया के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि आज से एक बार फिर से इंसानों को चंद्रमा पर भेजने का मिशन लॉन्च हो रहा है और पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक घटना का साक्षी बनेगी, क्योंकि आज से करीब 53 साल पहले पहली बार इंसानों ने चंद्रमा की सतह पर कदम रखा था, जब नील आर्मस्ट्रॉंग को चंद्रमा पर भेजा गया था और अब एक बार फिर से नासा इंसानों को चंद्रमा पर भेजने वाला है, जिसके लिए सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और मिशन का पार्ट-1 आज लॉन्च होने वाला है। दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट अपने लॉन्च पैड पर पहुंच चुका है और आज आर्टिमिश मिशन-1 का पहला पार्ट लॉन्च होने वाला है। अमेरिका के फ्लोरिडा स्थिति लॉन्च पैड से नासा अपने आर्टिमिश मिशन-1 के पहले पार्ट को लॉन्च करेगा, जिसके तहत एक खाली कैप्सूल को चांद की सतह पर उतारा जायेगा। मिशन के पहले पार्ट में किसी इंसान को चांद पर नहीं भेजा जायेगा और इस खाली कैप्सूल का नाम आरोयन (Orion) है, जो 6 फीट लंबा है। ओरायन कैप्सूल इस मिशन मे काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और ये 42 दिनों के वापस धरती पर लौट आयेगा। ओरायन कैप्सूल इसलिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जरिये सिस्टम और प्रक्रिया पर परीक्षण किया जायेगा और 42 दिनों के बाद 10 अक्टूबर को धरती पर इसकी वापसी होगी। आर्टेमिस -1 फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा और एक बार पार्ट-1 कामयाब होने के बाद पार्ट-2 की तैयारी शुरू हो जायेगी। स्पेस लॉन्च डेल्टा 45 से जुड़े मौसम विज्ञानियों ने सोमवार को लॉन्च के लिए अनुकूल मौसम की 70 प्रतिशत संभावना की भविष्यवाणी की है। हालांकि, नासा ने 2 घंटे का लॉन्चिंग विंडो रखा है और अगर मौसम खराब होती है, तो नासा के पास कुछ एक्स्ट्रा टाइम भी होगा। 29 अगस्त को दो घंटे की लॉन्च विंडो में अंतरिक्ष यान के पहले प्रक्षेपण को लक्षित किया जा रहा है। लिफ्ट-ऑफ वर्तमान में सोमवार यानि 29 को सुबह 8:33 बजे EDT या शाम 6 बजे IST के लिए निर्धारित है। इसके उड़ान को नासा के आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। नासा का ये रॉकेट 322 फुट यानि 98 मीटर का है और अपोलो मिशन के 50 सालों के बाद चंद्रमा के दूर इलाके में इसे उतारा जाएगा। नासा के हाईटेक, स्वचालित ओरियन कैप्सूल का नाम नक्षत्र के नाम पर रखा गया है, जो रात के आसमान में सबसे चमकीला है। ये अपोलो के कैप्सूल की तुलना में काफी विशाल है, जिसमें तीन के बजाए चार अंतरिक्ष यात्री बैठ सकते हैं। नासा का लक्ष्य साल 2025 में दो अंतरिक्षयात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है।

Published / 2022-08-24 17:07:15
आखिर ऊंचाई, अंधेरा और पानी से क्यों लगता है इंसानों को डर...

एबीएन नॉलेज डेस्क। दुनिया के हर इंसान को किसी न किसी चीज से डर तो जरूर लगता है। चाहे किसी को पानी से डर तो किसी को अंधेरे से डर… दुनिया के ज्यादातर इंसानों को किसी न किसी चीज से डर लगता है। डर लगने पर उन्हें घबराहट होती है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है या फिर इंसान बेहद गंभीर रूप से सहम जाता है। पर ऐसा होता क्यों है और हालात इतने क्यों बिगड़ जाते हैं, कभी सोचा है आपने। पिछले कुछ समय से वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे। उन्होंने अब इस गुत्थी को सुलझा लिया है। सेल जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट कहती है, डर क्यों लगता है और दिमाग में ऐसा क्या घटता है जो इंसान को बेचैन करता देता है। इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने मिनीस्कोप (Miniscope) नाम की डिवाइस का प्रयोग किया। यह डिवाइस दिमाग में मौजूद न्यूरॉन्स की गतिविधि का पता लगाते हैं। रिसर्च के दौरान सामने आया कि डर की असल वजह क्या है। चूहों पर हुए प्रयोग में सामने आया कि जब चूहों के दिमाग को मिनीस्कोप से जोड़ा गया तो उनके दिमाग में कई बदलाव दिखाई दिए। मिनीस्कोप से कनेक्ट करने के बाद चूहों को उन चीजों के सम्पर्क में रखा गयाा जिससे वो काफी डरते हैं। जैसे- उनके पैर में करंट का झटका दिया गया। गड़गड़ाहट की आवाज सुनवाई गई। रिसर्च रिपोर्ट कहती है, जब ऐसी चीजों से चूहों का सामना हुआ तो उनके दिमाग में कुछ बदलाव देखने को मिले। वैज्ञानिकों का कहना है, दिमाग में दो ऐसे सर्किट पाए जाते हैं जो डर पैदा करने का काम करते हैं। उनका कहना है कि कैल्सीटोनिन जीन-रिलेटेड पेप्टाइड (CGRP) न्यूरॉन्स दिमाग के एमिगडाला (Amygdala) वाले हिस्से मिलकर डर पैदा करते हैं। रिसर्च के दौरान सामने आया कि इस तरह के न्यूरॉन्स की गतिविध तब बढ़ी जब चूहों को डराया गया। जैसे- लोमड़ी के मल से चूहे डरते हैं, तेज आवाज से डरते हैं और कुनैन के घोल से वो पीछे भागते हैं। ऐसे सभी प्रयोग उन्हें डराने के लिए किए गए और उसी दौरान मिनीस्कोप की मदद से उनके न्यूरॉन्स का लेवल चेक किया, जो बढ़ा हुआ मिला।

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