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नासा का अंतरिक्ष यान उल्कापिंड से टकराने के बाद 10,000 किमी तक बिखरा मलबा
Published / 2022-10-06 07:06:26
नासा का अंतरिक्ष यान उल्कापिंड से टकराने के बाद 10,000 किमी तक बिखरा मलबा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नासा के डार्ट अंतरिक्ष यान द्वारा इरादतन टक्कर मारकर जिस उल्कापिंड को तोड़ा था उसका मलबा हजारों किलोमीटर के दायरे में फैला है। इसके बारे में चिली के एक टेलीस्कोप द्वारा ली गई एक नई तस्वीर से पता चला है। जानकारी के अनुसार डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (डार्ट) के अंतरिक्षयान ने इरादतन डाइमॉरफोस नाम के उल्कापिंड को 26 सितंबर को टक्कर मारी थी। डाइमॉरफोस वास्तव में डिडमोस नाम के क्षुद्रग्रह का पत्थर था। यह पहला ग्रह रक्षा परीक्षण था जिसमें एक अंतरिक्ष यान के प्रभाव ने एक क्षुद्रग्रह की कक्षा को बदलने का प्रयास किया था। डार्ट की टक्कर के दो दिन बाद खगोलविदों ने चिली में 4.1-मीटर दक्षिणी खगोल भौतिकी अनुसंधान (एसओएआर) टेलीस्कोप का उपयोग क्षुद्रग्रह की सतह से उड़ी धूल और मलबे के विशाल ढेर की तस्वीरों को लेने के लिये किया। नई तस्वीरों में धूल के निशान को दिखाती है - इजेक्टा जिसे सूर्य के विकिरण दबाव से दूर धकेल दिया गया है, जैसे धूमकेतु की पूंछ - केंद्र से देखने के क्षेत्र के दाहिने किनारे तक फैली हुई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि जिस समय यह तस्वीरें ली गई उस समय डिडमोस की पृथ्वी से दूरी टक्कर के बिंदु से कम से कम 10,000 किमी के बराबर होगी। लोवेल वेधशाला के टैडी कारेटा ने कहा, यह अद्भुत है कि हम टक्कर के बाद के दिनों में संरचना और उसकी सीमाओं की इतनी स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम थे।

इस महीने के अंत तक 36 वनवेब सैटेलाइट्स लॉन्च करेगा इसरो
Published / 2022-10-06 06:57:33
इस महीने के अंत तक 36 वनवेब सैटेलाइट्स लॉन्च करेगा इसरो

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस महीने के अंत तक 36 सैटेलाइट्स को लॉन्च करेगा। इसरो ने गुरुवार को कहा कि वह यूनाइटेड किंगडम के ग्लोबल कम्युनिकेशन नेटवर्क वनवेब के 36 सैटेलाइट्स को अपने सबसे भारी लॉन्चर एलवीएम3 या लॉन्च व्हीकल मार्क III पर लॉन्च करेगा। खास बात यह है कि वनवेब इंडिया-1 मिशन/एलवीएम3 एम2 के तहत लॉन्च होने वाले ये उपग्रह एलवीएम3 के ग्लोबल कॉमर्शियल लॉन्च सर्विस मार्केट में एट्री को चिह्नित करेंगे। दरअसल, पिछले महीने उपग्रह संचार कंपनी वनवेब ने प्रस्तावित प्रक्षेपण से पहले 36 सैटेलाइट्स के आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचने की घोषणा की थी। कंपनी ने एक बयान में कहा था कि इस प्रक्षेपण के साथ, वनवेब के पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में प्रथम पीढ़ी के उपग्रहों के समूह का 70 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो जायेगा। उसने कहा था कि वह दुनिया भर में उच्च गति वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराने में प्रगति कर रही है। बयान में कहा गया था कि यह कंपनी का 14वां प्रक्षेपण होगा और उपग्रहों को इसरो के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क3 के जरिये उनकी कक्षा में भेजा जायेगा। बता दें कि यह सहयोग इसरो की कॉमर्शियल शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के दो सेवा अनुबंधों का परिणाम है, जो लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) ब्रॉडबैंड संचार सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए वन वेब के साथ हस्ताक्षरित है। वहीं, इसरो ने कहा है कि अनुबंध के तहत आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 36 सैटेलाइट्स को एक एलवीएम3 द्वारा कक्षा में स्थापित किया जायेगा। लॉन्च के साथ, वनवेब के पास अपने नियोजित जेन 1 एलईओ तारामंडल का 70 प्रतिशत से अधिक कक्षा में होगा क्योंकि यह सरकारों, व्यवसायों और समुदायों के लिए उच्च गति, कम विलंबता कनेक्टिविटी देने की तैयारी करता है। इसरो ने अपने ट्विटर हैंडल पर लॉन्च की तैयारियों के बारे में डिटेल्स शेयर किया है। इस डिटेल्स में बताया गया है कि आने वाले दिनों में लॉन्च वाहन के क्रायोजेनिक ऊपरी चरण का एकीकरण होगा। साथ ही 36 सैटेलाइट्स के साथ पेलोड फेयरिंग का एकीकरण भी होगा। इसके बाद यह इस महीने के तीसरे या चौथे हफ्ते तक लॉन्च के लिए तैयार हो जायेगा। वनवेब – 648 लियो उपग्रहों के एक समूह द्वारा संचालित एक वैश्विक संचार नेटवर्क है। इसका मुख्यालय लंदन में है। वनवेब को फरवरी 2019 में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य लियो उपग्रहों के एक समूह के कार्यान्वयन के माध्यम से दुनिया भर में हर जगह कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

गूगल ट्रांसलेशन हुआ इतिहास,  सेवाएं बंद
Published / 2022-10-04 11:37:26
गूगल ट्रांसलेशन हुआ इतिहास, सेवाएं बंद

एबीएन नॉलेज डेस्क। गूगल ने 2010 में चीन के अंदर सर्च इंजन सेवा को बंद कर दिया था। इसकी बड़ी वजह पड़ोसी देश की सरकार द्वारा इंटरनेट सामग्री को बड़े पैमाने पर सेंसर किया जाना था। हालांकि, 2017 में गूगल ने एक समर्पित वेबसाइट और ऐप के जरिए चीन में ट्रांसलेशन सर्विस की शुरुआत की। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने चीन में ट्रांसलेट सर्विस को बंद कर दिया है। इस कदम से पड़ोसी देश में कंपनी की सेवाओं का दायरा और भी छोटा हो गया है। चीन में ट्रांसलेट वेबसाइट खुलने पर अब एक जेनेरिक गूगल सर्च बार दिख रहा है। इस पर क्लिक करते ही यूजर्स हांगकांग की गूगल ट्रांसलेशन वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। हालांकि चीनी यूजर्स हांगकांग की ट्रांसलेशन वेबसाइट का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में अमेरिकी टेक कंपनी ने ट्रांसलेशन सर्विस को कम इस्तेमाल किये जाने के कारण बंद कर दिया है। चीन में गूगल ट्रांसलेश सर्विस के अचानक बंद होने का असर कुछ चीनी एप्लिकेशन पर भी पड़ा है। ये ऐसी एप्लिकेशन हैं, जो गूगल की ट्रांसलेट सर्विस के ऊपर निर्भर हैं। टेकक्रंच के मुताबिक अमेरिकी कंपनी के इस कदम से को रीडर डॉक्यूमेंट रीडर जैसी सर्विस का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं। बता दें कि 2006 में गूगल ने चीन में गूगल सर्च का चीनी वर्जन पेश किया था, लेकिन लोकल सर्च इंजन बैडु से इसे कड़ी टक्कर मिली। 2010 में गूगल ने चीन में अपनी सर्च इंजन सेवा बंद कर दी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, 2010 में गूगल ने कहा था कि चीन में हैकर्स ने उसके कुछ सोर्स कोड को चुराया है और कुछ चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के जीमेल अकाउंट को भी छेड़ा है। इंटरनेट सामग्री पर चीनी सरकार की कड़ी निगरानी को देखते हुए गूगल ने पड़ोसी देश में सर्च इंजन सर्विस को बंद कर दिया। कम उपयोग के कारण बंद : गूगल के प्रवक्ता ने कहा है कि कंपनी ने चीन में कम उपयोग के कारण गूगल ट्रांसलेट को बंद कर दिया है। अगस्त में सबसे बड़ी ट्रांसलेशन सर्विस को चीन में 5.35 करोड़ हिट मिले हैं। गूगल ने 2017 में चीन के अंदर ट्रांसलेशन ऐप लॉन्च की थी। चीनी यूजर्स को रिझाने के लिए कंपनी ने मशहूर चीनी-अमेरिकी रैपर एमसी जिन से एड भी कराया था।

मंगलयान : गया था छह महीने के लिए और पूरे किये आठ साल, अब बैटरी-ईंधन, संपर्क सब खत्म
Published / 2022-10-03 05:59:52
मंगलयान : गया था छह महीने के लिए और पूरे किये आठ साल, अब बैटरी-ईंधन, संपर्क सब खत्म

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत के मंगलयान की विदाई हो गई है। इसमें मौजूद ईंधन और बैटरी भी समाप्त हो चुकी है। इसके बाद ये अटकलें तेज हो गई हैं कि देश के पहले अंतर्ग्रहीय मिशन का 8 साल का सफर समाप्त हो गया। 450 करोड़ रुपये की लागत वाला मार्स ऑर्बिटर मिशन 5 नवंबर 2013 को पीएसएलवी-सी25 से प्रक्षेपित किया गया था और वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष यान को पहले ही प्रयास में 24 सितंबर 2014 को सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया था। इसरो के सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, अब, कोई ईंधन नहीं बचा है। उपग्रह की बैटरी खत्म हो गई है। संपर्क खत्म हो गया है। हालांकि, इसरो की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसरो पहले एक आसन्न ग्रहण से बचने के लिए यान को एक नयी कक्षा में ले जाने का प्रयास कर रहा था। बैटरी-ईंधन सब समाप्त : अधिकारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, लेकिन हाल ही में एक के बाद एक ग्रहण लगा, जिनमें से एक ग्रहण तो साढ़े सात घंटे तक चला। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा, चूंकि उपग्रह बैटरी को केवल एक घंटे और 40 मिनट की ग्रहण अवधि के हिसाब से डिजाइन किया गया था, इसलिए एक लंबा ग्रहण लग जाने से बैटरी लगभग समाप्त हो गयी। इसरो के अधिकारियों ने कहा कि मार्स ऑर्बिटर यान ने लगभग आठ वर्षों तक काम किया, जबकि इसे छह महीने की क्षमता के अनुरूप बनाया गया था। उन्होंने कहा, इसने अपना काम बखूबी किया और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परिणाम प्राप्त किये। 8 साल पहले मंगल पर भेजा गया सबसे यह सस्ता मिशन था : 24 सितंबर 2014 को वैज्ञानिकों ने इस अंतरिक्ष यान को पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में स्थापित कर दिया था। इसके साथ ही भारत विश्व में अपने पहले प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश और दुनिया का चौथा देश बन गया था। उस समय मंगल पर भेजा गया यह सबसे सस्ता मिशन था। भारत, एशिया का भी ऐसा करने वाला पहला देश बन गया था क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे।

5जी नेटवर्क किसानों के लिए खोलेगा तरक्की के द्वार, जानें कैसे...
Published / 2022-10-02 11:37:07
5जी नेटवर्क किसानों के लिए खोलेगा तरक्की के द्वार, जानें कैसे...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के प्रगति मैदान में इंडिया मोबाइल कांग्रेस का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने देश में 5जी नेटवर्क सर्विस की शुरुआत की है। जिसे देश के लिए क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है। माना जा रहा है कि देश में 5जी नेटवर्क की शुरुआत होने से कई सेक्टरों में आमूल-चूल परिवर्तन हाेगा। 5जी नेटवर्क से प्रभावित होने वाले सेक्टरों में कृषि सेक्टर भी शामिल है। जिस तरह की 5 जी नेटवर्क की खूबियां हैं, उससे कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव होने की उम्मीद है। मसलन, मानव सभ्यता का सबसे पुराना व्यवसाय, जो कई कारणों से पिछड़ा हुआ था, वह 5जी नेटवर्क के बाद स्मार्ट होने की तरफ बढ़ेगा। वहीं 5 जी नेटवर्क किसानों के लिए भी तरक्की के दरवाजे खुलेगा। 5 जी नेटवर्क कैसे कृषि को प्रभावित करेगा और इससे किसानों को कैसे फायदा होगा। देश-दुनिया में ड्रोन तकनीक बेशक नई है। इस बीच भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में भी ड्रोन तकनीक को अपनाने का फैसला लिया है, जिसके तहत मौजूदा समय में कीटनाशकों व उर्वरकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन, 5 जी नेटवर्क के आ जाने के बाद के कृषि में ड्रोन का दायरा बढ़ जायेगा। एक तरफ 5 जी नेटवर्क से कीटनाशाकों और उर्वरकों के छिड़काव में सटीकता आयेगी। तो वहीं इंटरनेट स्पीड के बढ़ने से मैपिंग भी सटीक हो सकेगी। इसके साथ ही ड्रोन का प्रयोग खेतों की लाइव निगरानी के लिए भी किया जा सकेगा, जिससे अमूल्य मानव श्रम का बचाव होगा। भारत गेहूं और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो दुनिया का प्रमुख खाद्य प्रधान है. तो वहीं भारत दुनिया के कई देशों को खाद्यान्न की आपूर्ति करता है। दुनिया के देशों को खाद्यान्न आपूर्ति की शुरुआत फसलों की बुवाई से ही शुरु हो जाती है। जिसके तहत बुआई और उत्पादन के अनुमान के आधार पर खाद्यान्न के बाजार की तैयारियां की जाती है। अभी तक अनुमान के लिए जिस तकनीक प्रयोग होता है, उसके आधार पर मिलने वाले आंकड़ों में कई बार समस्याएं होती हैं। वहीं 5 जी नेटवर्क के आने से इन अनुमान में सटीकता आयेगी। जिससे देश के खाद्यान्नों को सहींं समय पर बाजार मिल सकेगा और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे। कृषि व्यवसाय में लगे किसानों को तरक्की तब होती है, जब उनकी फसल को बेहतर दाम मिलता है। इसके लिए किसानों को अपनी फसलों को खेतों से मंडियों तक पहुंचाना पड़ता है। मसलन, मौजूदा समय में मंडी में विशेष व्यापारियों का एकाधिकार और उतार-चढ़ाव किसानों को प्रभावित करते हैं। इस वजह से किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ई-नाम पोर्टल शुरू किया हुआ है। लेकिन, कई किसानों के लिए यह डिजिटल बाजार अभी भी दूर की कोड़ी है। 5 जी नेटवर्क शुरू होने से किसान, बेहतर स्पीड के साथ अपने ही खेत से अपनी फसल बेच सकेंगे। तो वहीं ई-नाम पोर्टल पर बेहतर स्पीड के साथ फसल की गुणवत्ता के आधार पर किसान अपनी फसल के दाम तय करवा सकेंगे। खेती मौसम आधारित व्यवसाय है। मसलन मौसम के पूर्वानुमान ही खेती का दशा-दिशा तय करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मानसून है। जिसका सटीक पूर्वानुमान खरीफ सीजन की फसलों का उत्पादन तय करता है। 5 जी नेटवर्क से मौसम के पूर्वानुमान में भी सटीकता आने का अनुमान है, तो वहीं 5 जी नेटवर्क के माध्यम से किसानों को सही और सटीक समय पर किसानों को मौसम की जानकारी मिल सकेगी, जिससे मौसम से होने वाला उनका नुकसान कम हो जायेगा।

एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने किया माइक्रो एटीएम लॉन्च, नकद निकासी हुई आसान
Published / 2022-10-01 17:25:59
एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने किया माइक्रो एटीएम लॉन्च, नकद निकासी हुई आसान

एबीएन नॉलेज डेस्क। एयरटेल पेमेंट्स बैंक ने माइक्रो एटीएम लॉन्च करने की घोषणा की है। इस माइक्रो एटीएम से बड़े महानगरों और शहरों से बाहर रहने वाले ग्रामीण इलाकों के डेबिट कार्ड उपयोगकर्ता भी आसानी से नकद निकासी कर सकेंगे। इस पहल के माध्यम से उपयोगकतार्ओं को आसान नकद निकासी तक पहुंच प्रदान करने के लिए बैंक पूरे भारत में 500,000 से अधिक बैंकिंग प्वाइंट्स के अपने मजबूत नेटवर्क का लाभ उठाएगा। माइक्रो एटीएम लेनदेन की सुविधा के लिए, एयरटेल पेमेंट्स बैंक अब नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन आॅफ इंडिया (एनपीसीआई) - नेशनल फाइनेंसियल स्विच (एनएफएस) के साथ इंटीग्रेट किया गया है। किसी भी बैंक के ग्राहक अब अपने पड़ोस में स्थित एयरटेल पेमेंट्स बैंक के बैंकिंग प्वाइंट पर माइक्रो एटीएम सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। उपयोगकर्ता निर्दिष्ट बैंकिंग प्वाइंट से किसी भी बैंक के डेबिट कार्ड का उपयोग करके अब तत्काल नकद निकासी कर सकते हैं और अपने खाते की शेष राशि की जांच कर सकते हैं। उपयोगकर्ता माइक्रो एटीएम के माध्यम से प्रति लेनदेन 10,000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं।

कहां मिलेगा 5जी सिम? आपका मोबाइल कैसे पकड़ेगा 5जी नेटवर्क? यहां जानें...
Published / 2022-10-01 10:08:49
कहां मिलेगा 5जी सिम? आपका मोबाइल कैसे पकड़ेगा 5जी नेटवर्क? यहां जानें...

एबीएन नॉलेज डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में रिमोट का बटन दबाकर भारत में 5जी इंटनरेट सेवाओं का आगाज कर दिया है। पहले फेज में सर्विस को 13 शहर में रोल आउट किया जायेगा। इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गांधीनगर, गुरुग्राम, हैदराबाद, जामनगर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और पुणे शामिल हैं। इसके बाद 5जी को देश के हर हिस्से में पहुंचाया जायेगा। उल्लेखनीय है की 5जी सर्विस शुरू होने से पहले 5जी स्मार्टफोन बाजार में आ चुके हैं और सर्विस चालू होते ही लोग सुपर फास्ट 5जी इंटरनेट का मजा ले पायेंगे। हालांकि, सवाल यह उठता है कि 5जी नेटवर्क आने के बाद 5जी सिम कैसे मिलेगी? और 5जी सिम कार्ड पर अपना पुराना नंबर कैसे यूज किया जायेगा, तो चलिए अब आपको बताते हैं कि 5जी स्मार्टफोन पर 5जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। सिम के साइज में नहीं होगा बदलाव : इस समय बाजार में 2जी, 3जी और 4जी सिम मौजूद हैं। इस वक्त फीचर फोन यूजर्स जहां 2जी सिम यूज करते हैं, वहीं स्मार्टफोन यूजर्स 3जी और 4जी दोनों तरह के सिम कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। अगर बात करें 5जी सिम की, तो यह मौजूदा 4जी सिम की तरह ही होगी। जानकारी के अनुसार 4जी सिम के साइज या शेप में कोई भी बदलाव नहीं किया जायेगा। 5G नेटवर्क भी पकड़ेगी 4जी सिम : आप फिलहाल जिस भी कंपनी की 4जी सिम इस्तेमाल रहे हैं, वह 5जी नेटवर्क भी पकड़ सकेगी। हालांकि ऐसा कैसे संभव होगा। इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। दरअसल, सिम के अंदर कोई तकनीक नहीं होती है। सिम के माध्यम से आपको सिर्फ एक यूनिक आईडी दी जाती है और उसी आईडी के हिसाब से आपके नंबर पर प्लान एक्टिव किया जाता है। ऐसे में हो सकता है कि आपको नई सिम लेने की जरूरत न पड़े। किन मोबाइल फोन्स में चलेगी 5जी सिम? 5जी सिम का इस्तेमाल सिर्फ 5जी फोन पर ही किया जा सकेगा। साथ ही जो मोबाइल यूजर्स 5जी फोन खरीद चुके हैं हो सकता हैं उन्हें अलग से 5जी सिम खरीदने की जरूरत न पड़े। ग्राहक अपनी 4जी सिम पर ही 5जी नेटवर्क कनेक्ट कर सकेंगे।

नई शुरुआत : आज से 5जी युग मे कदम रखने जा रहा देश, पीएम मोदी बनेंगे गवाह
Published / 2022-10-01 05:41:21
नई शुरुआत : आज से 5जी युग मे कदम रखने जा रहा देश, पीएम मोदी बनेंगे गवाह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत आज से 5जी युग में कदम रखने जा रहा है। कुछ ही घंटों बाद 4जी से अपग्रेड होकर हम 5जी सर्विस तक पहुंच जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार 1 अक्टूबर को इंडियन मोबाइल कांग्रेस में 5जी सर्विस को लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही भारत में आज से इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 5जी सर्विस भी शुरू होंगी। केंद्रीय मंत्री ने सभी टेलीकॉम सर्विस को रोल-आउट के लिए तैयार रहने को कहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी आज सुबह 10 बजे 5जी सर्विसेस को लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही जियो और एयरटेल की भी 5जी सर्विस लॉन्च हो सकती है। 1 अक्टूबर से शुरू होने वाला ये इवेंट 4 अक्टूबर तक चलेगा। इस चार दिवसीय कार्यक्रम में 5जी इवेंट के अलावा कई दूसरे इवेंट भी होंगे।पीएम मोदी अगले महीने चार दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे, जहां रिलायंस जियो, एयरटेल, वोडाफोन आइडिया सहित प्रमुख दूरसंचार कंपनियां देश के लिए अपनी 5जी नेटवर्क योजनाओं के बारे में बताएंगे।रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कहा कि लगभग एक महीने बाद यानी दिवाली तक वह दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में 5जी सर्विस शुरू कर देंगे। वहीं अगले साल दिसंबर तक पूरे भारत में अपनी 5जी नेटवर्क शुरू करने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये निवेश करेंगे। भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो सिटी सहित कई प्रमुख शहरों में इस दिवाली 2022 तक जिओ 5 जी को रोल आउट करने की योजना बनाई है।

5जी की शुरुआत से बढ़ता दूरसंचार का दायरा
Published / 2022-09-30 06:46:32
5जी की शुरुआत से बढ़ता दूरसंचार का दायरा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इस दीवाली पर हम एक नए दूरसंचार युग में होंगे और उसकी उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। 5जी सेवाएं शुरू होने के बाद आने वाले बदलाव में न केवल इंटरनेट की गति में काफी अ​धिक इजाफा होगा ब​ल्कि प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह एक ऐसा मानक है जो दूरसंचार कंपनियों और दूरसंचार क्षेत्र की सेहत को परखता है। भारत में प्रति माह एआरपीयू दुनिया में सबसे कम वाली श्रेणी में रहा है और दूरसंचार कंपनियों ने लगातार को​शिश की है कि इसमें सुधार करके इस क्षेत्र को नये सिरे से संवारा जा सके। इस तमाम बातचीत के बावजूद दूरसंचार कंपनियों के लिए एआरपीयू में इजाफा निहायत कम रहा है। इसकी वजह यह डर है कि प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतें कम होने से उपभोक्ता दूर होंगे। दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने शुल्क दरों में मामूली इजाफा करने की दिशा में छोटे कदम भी नहीं उठाए। देश की बड़ी दूरसंचार कंपनियों के लिए भी प्रति माह एआरपीयू 200 रुपये से कम है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्रा​धिकरण के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2022 में उद्योग जगत का औसत 127.12 रुपये प्रति माह था। रिलायंस और भारती समूहों के वित्तीय नतीजों के मुताबिक जून में समाप्त तिमाही में जियो का एआरपीयू 175.7 रुपये और एयरटेल का 183 रुपये प्रति माह था। शीर्ष दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो का एआरपीयू पिछले साल की समान अव​धि की तुलना में केवल 4.8 फीसदी बढ़ा। दूरसंचार क्षेत्र के प्रमुख कारोबारियों के बीच हो रही चर्चाओं से लगता है कि 5जी की शुरुआत होने के बाद यह तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। वरिष्ठ अ​धिकारी शुल्क दरों और एआरपीयू से संबं​धित गणित लगाने में लगे हैं क्योंकि 5जी की शुरुआत बस होने ही वाली है। इनमें से कुछ कंपनियों का अनुमान है कि प्रति माह एआरपीयू में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है क्योंकि उपभोक्ता अ​धिक से अ​धिक डेटा की खपत करेंगे। अगर यह सब कंपनियों के अनुमान के मुताबिक हुआ तो यह उच्च राजस्व के लिए उचित मॉडल होगा, वह भी कंपनियों द्वारा बिना शुल्क में इजाफा किए। अब तक के संकेत तो यही हैं कि 5जी शुल्क दरें संभवत: 4जी से बहुत अलग न हों, दूरसंचार कंपनियां अभी इस विषय पर किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी हैं। हकीकत में शुल्क दरों को लेकर काफी संघर्ष देखने को मिल सकता है। यदि एआरपीयू 5जी के साथ 25 प्रतिशत से अधिक होता है तो एयरटेल और जियो दोनों के लिए 200 रुपये का स्तर पार करना मु​श्किल होगा। अभी तक दूरसंचार उद्योग इसी फॉर्मूले पर काम कर रहा है कि डेटा का उपयोग कई गुना बढ़ जाएगा क्योंकि 5जी तकनीक में इंटरनेट की गति काफी तेज होगी। हालांकि प्रति जीबी लागत में शायद बहुत बदलाव न आए। डेटा की खपत में इजाफे को लेकर यह आशावादी विचार मौजूदा खपत के रुझान पर आधारित है। हमने काफी पहले एक बात सुनी थी कि आने वाले समय में डेटा की मांग तेल की तरह होगी। अब 5जी के आगमन के पहले चर्चा है कि सबस्क्राइबर डेटा की खपत एकदम पानी की तरह करेंगे। केवल तेल और पानी के साथ तुलना की जगह और भी कई तरह के आकलन हैं। इस क्षेत्र पर नजर बनाए हुए अ​धिकारी कदम दर कदम आगे बढ़ रहे हैं ताकि बेहतर शुल्क दर और एआरपीयू आंकड़ा हासिल किया जा सके। मौजूदा रुझान से संकेत मिलता है कि यूट्यूब और ऑनलाइन गेमिंग फोन डेटा के इस्तेमाल में शीर्ष पर हैं। अनुमान है कि उपभोक्ता यूट्यूब पर एक्स फ्रेम का इस्तेमाल कर रहा है और 5जी तकनीक आने के बाद वह उसका तीन गुना फ्रेम इस्तेमाल करने लगेगा। फ्रेम प्रति सेकंड यानी एफपीएस एक इकाई है जो यूट्यूब या ऑनलाइन वीडियो गेम में वीडियो कैप्चर का आकलन करता है। एफपीएस में सुधार के साथ वीडियो और अ​धिक सहज ढंग से चलेंगे। दूरसंचार कंपनियां 5जी वीडियो कॉल से भी उम्मीद लगा रही हैं कि उसमें काफी इजाफा होगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि 5जी के आगमन के बाद इस क्षेत्र में उपभोक्ता 20 जीबी डेटा प्रतिमाह से बढ़कर 50-60 जीबी डेटा प्रतिमाह तक पहुंच सकते हैं। जाहिर है इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं मौजूद हैं क्योंकि आने वाले समय में उपभोक्ता कारोबार से लेकर कृ​षि तक काफी कुछ इंटरनेट से संचालित होने की उम्मीद बढ़ रही है। हालांकि उद्योग जगत के अंदरूनी स्रोतों की मानें तो चिप की कमी एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस कमी के कारण ही दूरसंचार कंपनियां एक साथ 5जी सेवाओं को देशव्यापी स्तर पर शुरू नहीं कर पा रही हैं। मेट्रो शहरों में 5जी सेवा शुरू होने वाली है जबकि शेष भारत को अभी इसके लिए प्रतीक्षा करनी होगी। डेटा की खपत बढ़ने से जहां एआरपीयू 200 रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है, वहीं शायद दूरसंचार कंपनियों के लिए 5जी तकनीक पर किए गए निवेश की लागत निकालने के लिए इतना काफी न हो। इसके अलावा काफी कुछ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि 4जी से कितने उपभोक्ता 5जी में जाते हैं और इस प्रक्रिया में कितना समय लगता है? उपयोग के मामलों से ही इस बदलाव की दर निर्धारित होगी लेकिन एक शीर्ष अ​धिकारी का कहना है कि करीब दो तिहाई 4जी उपभोक्ता बहुत जल्दी 5जी का रुख कर लेंगे। इस बीच भारतीय मोबाइल कांग्रेस की आगामी बैठक यानी भारतीय दूरसंचार उद्योग की अहम ​शिखर बैठक में भी हमें 5जी के भविष्य की झलक अवश्य देखने को मिलेगी। आशा की जा रही है कि एक बार फिर मुकेश अंबानी और सुनील मित्तल एक साथ मंच पर होंगे और इस निर्णायक घड़ी में दूरसंचार क्षेत्र की ओर से कोई बड़ा संदेश जारी करेंगे।

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