एबीएन नॉलेज डेस्क। प्लैनेटरी सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीएसआई) ने मंगलवार को कहा कि पृथ्वी बुधवार की रात सूर्य के सबसे निकटतम बिंदु पर पहुंचेगी। पीएसआई के निदेशक एन रघुनंदन कुमार ने कहा कि पृथ्वी कल रात .44 बजे अपनी वार्षिक दीर्घवृत्तीय कक्षा में सूर्य के निकटतम बिंदु पर 0.8329एयू यानी सूर्य से 14,70,98,928 किलोमीटर दूर पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में चक्कर लगाती है, जिस कारण एक वर्ष में एक समय पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है और एक समय सबसे दूर होती है।
आने वाले वर्ष 2023 से भी है ढेरों उम्मीदेंएबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 2023 में विज्ञान प्रयोगों पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। इस साल सूर्य को समर्पित आदित्य और चंद्रमा को समर्पित चंद्रयान-3 मिशनों पर काम किया जायेगा। दूसरी ओर स्टार्ट-अप सेक्टर अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित अनुप्रयोगों के मामले में ऊंची उड़ान भरने के लिए तैयार है। आगामी वर्ष भारत की पहली मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान परियोजना गगनयान से संबंधित प्रयोगों की एक श्रृंखला का भी गवाह बनेगा।प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस महीने संसद को बताया था कि इसरो अगले साल की शुरुआत में कर्नाटक के चित्रदुर्ग में एयरोनॉटिकल परीक्षण स्थल से पुन: प्रक्षेपित होने वाले वाहन का पहला रनवे लैंडिंग प्रयोग (आरएलवी-एलईएक्स) करने की योजना बना रहा है। इस साल भारतीय स्टार्टअप ने भी अंतरिक्ष क्षेत्र में दस्तक दी है। एक ओर स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-एस रॉकेट का प्रक्षेपण किया, जो किसी निजी कंपनी द्वारा किया गया पहला रॉकेट प्रक्षेपण था, तो दूसरी ओर पिक्सल नामक कंपनी ने अप्रैल में स्पेसएक्स कंपनी के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए अपने हाइपरस्पेक्ट्रल उपग्रह शकुंतला का प्रक्षेपण किया।वहीं, नवंबर में पिक्सल ने इसरो के पीएसएलवी के जरिए आनंद नामक हाइपरस्पेक्ट्रल उपग्रह प्रक्षेपित किया। निजी रूप से विकसित भारत के पहले रॉकेट को नवंबर में प्रक्षेपित करने वाली कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस अगले साल एक ग्राहक के लिए उपग्रह कक्षा में भेजने की योजना पर काम कर रही है, जबकि आईआईटी-मद्रास कैंपस में शुरू हुआ स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस भी अपने अग्निबाण रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए तैयार है। पिक्सल के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवैस अहमद ने कहा कि हम छह वाणिज्यिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजरी उपग्रह विकसित कर रहे हैं, जो अगले साल प्रक्षेपण के लिए तैयार होंगे।अहमद ने कहा कि दुनिया भर में कई और रॉकेट कंपनियां प्रक्षेपण करेंगी, जिससे रॉकेट प्रक्षेपण की दौड़ को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने की दौड़ में कुछ ही कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां देश में विशाल अंतरिक्ष अनुप्रयोग बाजार पर नजर गड़ाए हुए हैं, जिसपर अब तक इसरो का ही दबदबा रहा है। ये कंपनियां पृथ्वी अनुसंधान क्षेत्र, छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए रॉकेट विकसित करने, उपग्रहों के लिए सस्ता ईंधन उपलब्ध कराने और पर्यटकों को अंतरिक्ष यात्रा पर ले जाने तक की योजना पर काम कर रही हैं। ध्रुवस्पेस के मुख्य वित्तीय अधिकारी चैतन्य डोरा सुरापुरेड्डी ने बताया कि नवोन्मेषी अंतरिक्ष अनुप्रयोगों की संभावना बहुत अधिक है।खासकर अगर स्थापित अंतरिक्ष कंपनियां पारंपरिक रूप से अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम नहीं करने वालीं दवा निर्माता और कृषि कंपनियों के साथ साझेदारी या कारोबार करती हैं, तो इस क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या पहले ही 100 को पार कर चुकी है और इन स्टार्टअप ने 24.535 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की धनराशि जुटाई है। वर्ष 2022 में अंतरिक्ष उद्योग को कुछ मील के पत्थर हासिल करते हुए देखा गया।इस साल न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) ने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) द्वारा गठित अंतरिक्ष समूह को मंजूरी प्रदान की। साथ ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने अगले पांच पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (सीएसएलवी) के व्यावसायिक विकास के लिए 860 करोड़ रुपये का अनुबंध किया। कुल मिलाकर यह साल अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए उपलब्धियों भरा रहा। अगले साल में भी इस क्षेत्र में इसी तरह की उपलब्धियां हासिल करने की उम्मीद की जा रही है।
टाटा स्टील एवं टूटर हाइपरलूप ने टेक्नोलोजी विकास के लिए मिलाया हाथभविष्य में यातायात में क्रांतिकारी बदलाव बनेगा हाईपरलूप टेक्नोलॉजीटीम एबीएन, जमशेदपुर/ रांची। टाटा स्टील एवं टूटर हाइपरलूप ने संयुक्त रूप से बड़े पैमाने पर हाइपरलूप टेक्नोलॉजी को विकसित एवं नियोजित करने के लिए गत 23 दिसंबर, 2022 को आईआईटी मद्रास में एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किया। इसमें अनुसंधान का मुख्य क्षेत्र डिजाइन की मुख्य चुनौतियों और सामग्रियों के चयन पर केंद्रित होगा। हाइपरलूप यात्रियों एवं कार्गो दोनों के लिए उच्च गति, कम लागत, टिकाऊ परिवहन प्रणाली का भविष्य का विकल्प है। हाइपरलूप सिस्टम में ट्यूब, पॉड, प्रोपल्शन सिस्टम एवं ट्रैक जैसे प्रमुख तत्व होते हैं। आॅटोनोमस, लेविटैटेड पॉड्स एक इवैकुएटेड ट्यूब्स के एक नेटवर्क के जरिए गुजरते हैं। यह सड़क परिवहन और विमानन की तुलना में 10 गुना अधिक ऊर्जा-दक्षता का वादा करता है तथा रेल एवं सड़क की तुलना में 2-3 गुना कम जगह का उपयोग करता है, तथा विमानन की तुलना में कम यात्रा अवधि को सक्षम बनाता है। घरेलू टेक्नोलोजी को बढ़ावा देना टाटा स्टील का लक्ष्य : डॉ देबाशीष डॉ. देबाशीष भट्टाचार्य, वाइस प्रेसिडेंट, टेक्नोलॉजी एंड न्यू मैटेरियल्स बिजनेस, टाटा स्टील ने कहा, हम घरेलू टेक्नोलॉजिज को प्रोत्साहित एवं बढ़ावा देते हैं तथा उन्हें व्यावसायिक सफलता की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वैश्विक स्तर पर, हाइपरलूप में भविष्य के हाई स्पीड वाले सस्टेनेबल परिवहन के लिए काफी संभावनाएं है। हमारा मानना है कि यह डिसरप्टिव मोबिलिटी टेक्नोलॉजी टूटर हाइपरलूप एवं टाटा स्टील के ठोस प्रयासों के माध्यम से अपनी मूल क्षमताओं का लाभ उठाते हुए अपने घोषित उद्देश्य को प्राप्त कर सकती है। सस्टेनेबल व्यवसाय के लिए प्रतिबद्ध मैटेरियल कंपनी के रूप में, हम अपनी अनुसंधान एवं विकास क्षमताओं तथा टाटा पारिस्थितिकी तंत्र का लाभ उठाकर हाइपरलूप यात्रा में महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान खोजने में योगदान देंगे। हाइपर लूप टेक्नोलोजी को वैश्विक बेंचमार्क बनायेंगे : बाला जी आर बालाजी, को-फाउंडर एवं सीईओ, टूटर हाइपरलूप ने कहा, हम इस महत्वपूर्ण परियोजना पर टाटा स्टील के साथ काम करके प्रसन्न हैं। हम वर्तमान में हाइपरलूप प्रौद्योगिकी समाधान को लागत एवं दक्षता के मामले में वैश्विक बेंचमार्क बनाने के लिए विभिन्न विकल्पों का विकास एवं परीक्षण कर रहे हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए हमें टाटा स्टील जैसे वैश्विक लीडर्स की क्षमताओं का लाभ उठाने की जरूरत है। टाटा स्टील के साथ साझेदारी हमें सामग्री एवं डिजाइन संबंधी चुनौतियों को हल करने तथा हाइपरलूप को वास्तविकता बनाने में सक्षम बनाएगी।आइआइटी मद्रास से निकला एक डीपटेक स्टार्ट अप है टूटर टाटा स्टील के पास स्टील एवं कंपोजिट मैटेरियल्स की डिजाइन एवं विकास में खास विशेषज्ञता है। भविष्य के लिए तैयार सस्टेनेबल व्यवसाय को विकसित करने के अपने रणनीतिक इरादे के अनुरूप, टाटा स्टील ने हाइपरलूप की पहचान भविष्य की गतिशीलता के क्षेत्र में एक उपयुक्त महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के रूप में की है। टूटर, आईआईटी मद्रास, भारत से निकला एक डीपटेक स्टार्टअप है, जो इस क्षेत्र में अग्रणी है तथा अपने प्रमुख मूल्य प्रस्ताव के रूप में कम लागत वाले हाइपरलूप समाधान का वादा करती है। टूटर में पॉड एवं प्रोपल्शन सिस्टम डिजाइन में अद्वितीय ताकत है। टाटा स्टील एवं टूटर व्यावसायीकरण के लिए प्रौद्योगिकी को संयुक्त रूप से डिजाइन, विकसित और स्केल करने का लक्ष्य रखते हैं। पहले चरण का काम आईआईटी मद्रास में 50 मीटर टेस्ट ट्रैक पर होगा। 10 किलोमीटर के ट्रैक को हासिल करने के बाद के काम को चरण कक और ककक में पूरा किया जाएगा, जिसमें आॅटोमोटिव, कंस्ट्रक्शन एवं इंजीनियरिंग क्षेत्रों के अन्य उद्योग भागीदारों का एक कंजोर्टियम शामिल होगा। टूटर हाइपरलूप के बारे में जानिये टूटर हाइपरलूप एक डीपटेक स्टार्टअप है जो हाइपरलूप टेक्नोलॉजी को विकसित करने पर केंद्रित है। इसका प्रयास ग्राहकों को तेज एवं विश्वसनीय आॅन-डिमांड परिवहन प्रदान करना है जो परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में सस्ता और हरित दोनों है। वर्तमान में, भारत का (और एशिया का) पहला हाइपरलूप परीक्षण ट्रैक आईआईटी मद्रास के डिस्कवरी परिसर में कार्यान्वयन के अधीन है। टूटर आईआईटी मद्रास के साथ अपनी साझेदारी और भारत के सबसे बड़े डीप टेक इकोसिस्टम के साथ अपने सह-स्थान का लाभ उठाना चाहता है ताकि सस्ती हाइपरलूप टेक्नोलॉजी के विकास को उत्प्रेरित किया जा सके जो माल की आवाजाही के संबंध में विभिन्न उद्योगों की समस्याओं को हल करके उनकी उत्पादकता बढ़ाने में मदद करती हैं।
सबूत के तौर पर हैकर ने दिया सलमान, नासा और डब्ल्यूएचओ का डेटाएबीएन सेंट्रल डेस्क। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर के लगभग 40 करोड़ यूजर्स का डाटा चोरी हो गया है। यह डाटा एक हैकर्स ने चोरी किया है और डार्क वेब पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। चोरी हुए डाटा में यूजर्स के नाम, ईमेल आईडी, फॉलोअर्स की संख्या और यूजर्स के फोन नंबर तक शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डाटा लीक में भारतीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अकाउंट्स का डाटा भी शामिल है। बता दें कि इससे पहले ट्विटर के करीब 5.4 मिलियन यानी 54 लाख यूजर्स का निजी डाटा लीक हुआ था।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स ने हाई प्रोफाइल लोगों के साथ सलमान खान, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, स्पेस एक्स और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) आदि अकाउंट्स का डाटा भी चोरी किया है। हैकर ने अपनी पोस्ट में लिखा ट्विटर या एलन मस्क जो भी ये पढ़ रहें हैं, आप पहले ही 5.4 करोड़ से अधिक यूजर्स के डेटा लीक होने पर जीडीपीआर के जुर्माने का रिस्क झेल हैं। ऐसे में आप अब 40 करोड़ यूजर्स के डेटा लीक होने के जुर्माने के बारे में सोचिये। इसके साथ ही हैकर ने डेटा को बेचने कोई भी डील दी है। उसने कहा कि वो किसी बिचौलिये के जरिए डील करने के लिए तैयार है। इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये डेटा लीक एपीआई में आई कोई कमी की वजह से हो सकता है। हैकर ने बिचौलिये के जरिए चोरी किये गये डाटा को बेचने की पेशकश की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एपीआई में कोई कमी होने के कारण डाटा लीक हो सकता है। बता दें कि हाल ही में ट्विटर के पूर्व सुरक्षा प्रमुख योएल रोथ ने मस्क की लीडरशिप में ट्विटर को असुरक्षित बताया था और यूजर्स के डाटा पर भी खतरा बताया था।उन्होंने कहा था कि सेफ्टी को सुनिश्चित करने के लिए कंपनी के पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। कंपनी ने अपने ज्यादातर कर्मचारियों का बर्खास्त कर दिया है, जिससे यूजर्स के डाटा पर भी खतरा बढ़ सकता है।डेटा लीक का ये मामला पहला नहीं है। इससे पहले भी ट्विटर के 5.4 करोड़ यूजर का डेटा हैकर्स ने चोरी कर लिया था। जानकारी के मुताबिक, इस डेटा को इंटरनल बग के चलते चोरी किया गया था। फिलहाल, इस डेटा लीक की जांच चल रही है जिसकी घोषणा आयरलैंड के डेटा प्रोटेक्शन कमीशन (डीपीसी) ने की थी।अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन (एफटीसी) ने ट्विटर के प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी के मैथड की जांच बढ़ा दी है। दरअसल, इस बात की आशंका पहले से ही थी कि ट्विटर अमेरिकी रेगुलेटर के साथ हुए एक समझौते का पालन करने में नाकाम हो सकता है जिसमें कंपनी ने अपने प्राइवेसी से जुड़े सिस्टम्स में सुधार करने की सहमति दी थी। प्राइवेसी में सुधार न होने की वजह से ही लोगों का डेटा हैकर्स चुरा रहे हैं।
दो बाल वैज्ञानिकों न कुत्तों पर किया शोधएबीएन सेंट्रल डेस्क। टैगोर पब्लिक स्कूल की कक्षा आठवीं की दो छात्राओं आख्या मालवीय और राधिका सेठ ने पिछले छह महीने के अपने लघु शोध पर यह निष्कर्ष निकाला है कि आवारा कुत्ते ग्लोबल वॉर्मिंग एवं दिनों-दिन बढ़ते तापमान के कारण ज्यादा आक्रामक हो रहे हैं। ऐसा अनुभव में पाया गया है कि पिछले 2-3 वर्षों से कुत्तों में काटने की प्रवृत्ति और आक्रामकता बहुत ज्यादा बढ़ी है।इस समस्या के बढ़ने के कारणों की खोज के लिए इन छात्राओं ने अपने मार्गदर्शक शिक्षक संजय श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक लघुशोध किया। जिसके लिए उन्होंने अपने आवास के आसपास का मुट्ठीगंज, बलुवाघाट, मालवीय नगर और अतरसुइया क्षेत्र को शोध में शामिल किया। दोनों छात्राओं ने इन सभी क्षेत्रों के 50-50 ऐसे घरों का सर्वे किया, जिनके घरों में पालतू कुत्ते थे और आम नागरिकों से पूर्व निर्धारित प्रश्नों के माध्यम से आम लोगों से कुत्तों में बढ़ती आक्रामकता के सम्बंध में विचार जाने। अपने सर्वे में छात्राओं ने पाया कि पालतू कुत्तों की तुलना में आवारा कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो रहें हैं। क्योंकि आवारा कुत्तों की जनसंख्या अधिक होने के कारण उनमें भोजन, पानी, रहने और ब्रीडिंग के समस्या की स्पर्धा बनी रहती है। अपनी इन आवश्यकताओं के लिए आपस में लड़ते रहते हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण पृथ्वी का दिनों-दिन बढ़ता तापमान भी इनमें बेचैनी उत्पन्न कर रहा है। दरअसल, जो पालतू कुत्ते हैं, अपेक्षाकृत उनको इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। क्योंकि कुत्ता पालक उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं और इन सब चीजों के लिए उन्हें परेशान नहीं होना पड़ता। यद्यपि अलग-अलग नस्ल के कुत्तों के लिए अलग-अलग तापमान की जरुरत होती है। लेकिन आवारा कुत्तों को सर्दी-गर्मी और बरसात की विपरीत परिस्थितियों में भी रहना पड़ता है। आम लोगों के द्वारा इन्हें बहुत कम ही खाने पीने की चीजें उपलब्ध करायी जाती हैं। जिससे इनमें आक्रामकता बढ़ रही हैं।उल्लेखनीय है कि जून से नवम्बर माह के बीच तेज बहादुर सप्रू, मेडिकल और कालविन अस्पताल में प्रतिदिन 80-100 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए आते थे। इन दोनों बाल वैज्ञानिकों ने मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नानक शरण से मुलाकात कर इन आक्रामक कुत्तों के काटने से होने वाले प्रमुख बीमारी रेबीज रोग एवं उनकी चिकित्सा के बारे में जानकारी मांगी।सीएमओ ने बताया कि हर एक कुत्ते के काटने से रैबीज नहीं होता। लेकिन यदि किसी को कुत्ता काट ले तो सुरक्षा की दृष्टि से एंटी रैबीज वैक्सीन जरूर लगवा लेना चाहिए।कुत्तों की बढ़ती जनसंख्या के नियंत्रण के लिए नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉ बिजय अमृत राज ने बताया कि स्थानीय स्तर इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। इन शोधर्थियों ने नगर निगम को इस समस्या के निदान के लिए अपने सुझाव भी लिखित रूप से दिये। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के प्रदेश स्तर पर होने वाले आयोजन में इन बाल वैज्ञानिकों को अपना शोध पत्र प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा।इनकी इस सफलता पर विद्यालय के प्रबंधक डॉ आरके टंडन, प्रधानाचार्या अर्चना तिवारी और वरिष्ठ रसायन शास्त्र शिक्षक एवं मार्गदर्शक संजय श्रीवास्तव ने हार्दिक बधाई दी है।
डॉक्टर क्यों देते हैं मोटा अनाज खाने की सलाह, जानें इसके सेवन के अनेक फायदेएबीएन सोशल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल की बैठक में बेहतर स्वास्थ्य के लिए मोटे अनाज और खेलों की अहमियत पर बल दिया और सांसदों से इन्हें प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करने को कहा। वहीं, संसद भवन में दोपर के भोजन के रूप में सांसदों के लिए मोटे अनाज के व्यंजन परोसे गये। दरअसल, सरकार का मानना है कि मोटे अनाज खाने से जहां लोग स्वस्थ्य रहेंगे। वहीं इसकी खेती करने वाले किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी। यही वजह है कि केंद्र सरकार मोटे अनाज के उपयोग पर फोकस कर रही है। ऐसे भी घर के बड़े-बुजुर्ग सर्दी में मोटा अनाज खाने की सलाह देते हैं। वहीं, आयुर्वेद विशेषज्ञ कहते हैं कि ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने में भोजन भी अहम रोल अदा करता है। खाने की तासीर भी शरीर को ठंड से बचाने में मदद करती है। इसके लिए मोटा अनाज खाने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ किरण गुप्ता कहती हैं, मोटे अनाज में जौ, बाजरा, मक्का आदि शामिल होता है। इस अनाज की तासीर गर्म होती है। ये शरीर में पहुंचकर गर्माहट देते हैं। सर्दी में मोटा अनाज खाने की सबसे बड़ी वजह यही है। इनमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। जैसे- फायबर। यह पेट के लिए सबसे बेहतर और सबसे जरूरी है। सर्दियों की डाइट में मक्का, ज्वार, बाजरा और रागी को जरूर शामिल करना चाहिए। इनसे कई तरह की डिश बनाई जा सकती हैं। जैसे- दलिया, रोटी और डोसा। इसके अलावा बाजरे का खीचड़ा, बाजरे की रोटी भी खानपान में शामिल की जा सकती है। खास बात है कि मोटे अनाज में फायबर अधिक होता है और वजन को भी कंट्रोल करने में मदद करते हैं। हालांकि इसमें घी का इस्तेमाल सीमित रखें। भारत सरकार के अनुसार, मिलेट (ज्वार, बाजरा, रागी आदि) में देश की पोषण संबंधी सुरक्षा में योगदान देने की बहुत अधिक क्षमता है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि मोटे अनाजों में न केवल पोषक तत्त्वों का भंडार है बल्कि ये जलवायु लचीलेपन वाली फसलें भी हैं और इनमें अद्भुत पोषण संबंधी गुणों का भी भंडार है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। टेक्नोलॉजी कंपनी गूगल ने पिछले महीने हजारों यूट्यूब चैनलों को हटा दिया है। इन चैनलों में 7,599 चैनल, एक एडसेंस अकाउंट और तीन ब्लॉगर अकाउंट्स शामिल हैं. ये चीन से जुड़े हैं। चीन के अकाउंट के संबंध में जांच चल रही है, जिसके तहत इन अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया है। इस बात का ध्यान रखें कि सस्पेंड किये गये चैनल और ब्लॉग्स ने मुख्य तौर पर एंटरटेनमेंट, म्यूजिक और लाइफस्टाइल कंटेंट होता है। कंपनी के मुताबिक, इनमें चीनी और अंग्रेजी भाषा में बेहद कम कंटेंट ही चीन और अमेरिकी मामलों पर उपलब्ध होता है।इसके अलावा कंपनी ने तीन यूट्यूब चैनल के कंटेंट को भी हटा दिया है, जो चीनी भाषा में संवेदनशील कंटेंट शेयर करते हैं। यह कंटेंट यूक्रेन में युद्ध और ताइवान के बीच संबंधों और यूक्रेन में युद्ध से जुड़ा था। अब तक कंपनी ने जांच के तहत 515 यूट्यूब चैनलों को हटाया है, जो अजरबेजान के मामलों के साथ जुड़े थे और 57 ब्राजील के मामलों पर थे।गूगल ने कहा कि उन्होंने एक एडसेंस अकाउंट को हटा दिया है। और एक डोमेन को गूगल न्यूज पर दिखने से मना कर दिया है। यह एक्शन कंपनी की जांच-पड़ताल के तहत ही किया गया है। वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने जुलाई और सितंबर 2022 के महीनों में अपने प्लेटफॉर्म से 5.6 मीलियन वीडियो को हटाया है। यह कार्रवाई उन्होंने कम्युनिटी गाइडलाइंस के उल्लंघन का हवाला देकर की है। प्लेटफॉर्म को दो महीनों के दौरान 271,000 अपील हटाने के संबंध में मिली है। यूट्यूब ने अपने लेटेस्ट ब्लॉग में बताया है कि कंटेंट को रिव्यू करने के बाद उसने करीब 29,000 अपीलों को स्वीकार किया है। यूट्यूब के मुताबिक, इस साल जुलाई से सितंबर के बीच, हर 10,000 व्यू में से, 10 से 11 में ऐसा कंटेंट मौजूद था, जिसने कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है।
चीन ने बनाया अपना नया तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशनएबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास पूरी क्षमताओं वाला एक अंतरिक्ष स्टेशन है जिसका नाम तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन है। यह नासा के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (एसएसएस) का प्रतिस्पर्धी होगा। चीन इस पर काफी सालों से काम कर रहा था। अब कोई भी इंसान चीन के तियांगोंग में भी रह सकता है। वहीं अब अपना स्पेस स्टेशन बनाने के बाद चीन की अमेरिका और रूस जैसी दुनिया की दो शीर्ष अंतरिक्ष शक्तियों के बीच मजबूत उपस्थिति होगी।एक समय में चीन के छह अंतरिक्ष यात्री एकसाथ : पिछले महीने चीन ने तीन अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष भेजा था जो घंटें में अपने गंतव्य तक पहुंच गये थे, इसके बाद से शेंजू मिशन को काफी सफल माना जा रहा था। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में गये तीन अंतरिक्ष यात्री वहां पहले से मौजूद दल की जगह लेंगे, जिसने स्टेशन के निर्माण में मदद की है। ऐसा पहली बार था जब चीन के छह अंतरिक्ष यात्री एक ही समय में अंतरिक्ष में थे। तियांगोंग पूरी तरह से चीन द्वारा निर्मित और संचालित है : वहीं इस मिशन के सफल होने के साथ ही, चीन अपना स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन चलाने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। बता दें कि तियांगोंग मंदारिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब स्वर्ग का महल होता है। अमेरिक के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के विपरीत, तियांगोंग पूरी तरह से चीन द्वारा निर्मित और संचालित है। हालांकि रूस का स्पेस स्टेशन कई देशों के साथ मिलकर बनाई गई परियोजना है।पाकिस्तान इस परियोजना में साथ आ सकता है : तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन के तैयार हो जाने पर यह पाकिस्तान जैसे चीन के करीबी सहयोगियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए भी उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके तैयार हो जाने पर चीन एकमात्र देश होगा जिसके पास अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) कई देशों की सामूहिक परियोजना है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। कोविड-19 महामारी के सबसे खराब प्रभाव के बाद अब हम काम और छुट्टियां दोनों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भारी उछाल देख रहे हैं। वास्तव में, भारत ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में तीन गुनी छलांग देखी है, जो अगले वर्ष दोगुनी होने की संभावना है। एक-दूसरे से जुड़े रहने को आसान, सहज और सम्मोहक बनाने के लिए, एयरटेल ने एयरटेल वर्ल्ड पास लॉन्च किया है। वर्ल्ड पास सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रा के अनुभव में क्रांति लाता है क्योंकि यह 184 देशों में निर्बाध रूप से काम करता है। तो भले ही आप किसी हवाई अड्डे पर रास्ते में हों या दो या दो से अधिक देशों की यात्रा कर रहे हों, यह एक पैक अब आपकी सभी रोमिंग जरूरतों को पूरा करता है। यह बदलाव एयरटेल द्वारा किए गए व्यापक ग्राहक अनुसंधान के आधार पर आया है, जिसमें दिखाया गया है कि कई ग्राहक पूरे वैश्विक टेल्को उद्योग में सामान्य रूप से भ्रमित करने वाले अंतर्राष्ट्रीय रोमिंग पैक पाते हैं। नतीजतन, कई लोग जब चाहते हैं तब जुड़े नहीं होते हैं। या वे विदेश में अस्थायी कनेक्शन के जटिल विकल्प तलाशते हैं। एयरटेल ने अब एयरटेल वर्ल्ड पास के लॉन्च के साथ इस समस्या को संरचनात्मक रूप से हल कर लिया है। एयरटेल वर्ल्ड पास के लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए शाश्वत शर्मा, डायरेक्टर कंज्यूमर बिजनेस, भारती एयरटेल ने कहा, ह्लएयरटेल में हमारा मिशन ग्राहकों की समस्याओं को हल करना है, ताकि वह हमारा अनुभव खुद बयां करे। अंतर्राष्ट्रीय यात्रा संबंधी चिंताओं पर हमने जो प्रतिक्रिया सुनी है, उसने हमें अपने ग्राहकों के लिए एक परिभाषित प्रस्ताव - एयरटेल वर्ल्ड पास लॉन्च करने के लिए मजबूर किया है। यह हमारे ग्राहकों को अधिक वैल्यू के साथ दुनिया के लिए एक पैक प्रदान करता है और वे ऐप पर क्या उपयोग करते हैं, उन्हें नियंत्रित करने की अनुमति भी देता है, पैक समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक आपातकालीन डेटा उपयोग की अनुमति देता है।
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