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13 मार्च को मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे ग्रहोंं के सेनापति मंगल
Published / 2023-02-20 15:24:15
13 मार्च को मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे ग्रहोंं के सेनापति मंगल

एबीएन नॉलेज डेस्क। पंचांग मुताबिक मंगल ग्रह मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं, जिससे 3 राशि के जातकों के अच्छे दिन शुरू हो सकते हैं।मंगल ग्रह करेंगे मिथुन में प्रवेश : वैदिक ज्योतिष अनुसार ग्रह एक निश्चित समय अंतराल बाद गोचर करते हैं। जिसका असर मानव जीवन और उनकी जीवनशैली पर पड़ता है। आपको बता दें कि शौर्य और साहस के दाता मंगल ग्रह 13 मार्च को मिथुन राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसलिए इस गोचर का प्रभाव 12 सभी राशियों पर पड़ेगा। लेकिन 3 राशियांं ऐसी हैं, जिनको मंगल के गोचर से अच्छा धनलाभ हो सकता है। आइए जानते हैं ये राशियांं कौन सी हैं।वृष राशि : आप लोगों के लिए मंगल ग्रह का गोचर शुभ फलदायी साबित हो सकता है। क्योंकि मंगल ग्रह आपकी राशि से दूसरे भाव में करेंगे। इसलिए इस समय  आर्थिक मामलों में भी आपको इस समय अच्छे अवसर मिल सकते हैं। कारोबार में प्रगति करेंगे। पूर्व में जो आपने निवेश किया होगा उससे भी लाभ पाएंगे। साथ ही इस समय आपकी वाणी में प्रभाव आएगा। जिससे लोग आपसे प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही इस अवधि में कारोबारियों को उधार दिया हुआ धन वापस मिल सकता है। साथ ही इस समय आपके कार्य की सिद्धि हो सकती है।कन्या राशि : मंगल ग्रह का गोचर कन्या राशि के जातकों को अनुकूल सिद्ध हो सकता है। क्योंकि मंगल ग्रह आपकी राशि से कर्म भाव पर विचरण करेंगे। इसलिए इस समय बेरोजगार लोगों नई जॉब का प्रस्ताव आ सकता है। साथ ही जो छात्र प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उनको किसी परीक्षा में सफलता मिल सकती है।साथ ही पैतृक पक्ष और पिता एवं पिता समान व्यक्तियों से आपको सहयोग और लाभ की प्राप्ति होगी। धार्मिक कार्यों में आपकी रुचि हो सकती है। वहीं व्यापारियों को इस समय अच्छा धनलाभ हो सकता है। साथ ही इस अवधि नौकरीपेशा लोगों के प्रमोशन और इंक्रीमेंट की बात चल सकती है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है।आप लोगोंं के लिए मंगल ग्रह का राशि परिवर्तन शुभ साबित हो सकता है। क्योंकि मंगल ग्रह आपकी राशि से भाग्य स्थान में विचरण करेंगे। इसलिए इस समय आपको भाग्य का साथ मिल सकता है। साथ ही इस समय जो छात्र विदेश में रहकर पढ़ना चाहते हैं, उनकी मुराद पूरी हो सकती है। साथ ही इस अवधि में आपके अटके हुए काम बनेंगे। कार्यक्षेत्र की बात करें तो अधिकारियों के साथ तालमेल बढ़िया होगा। साथ ही कोर्ट- कचहरी के मामलों में आपको सफलता मिल सकती है।

भारत के पहले हाइब्रिड रॉकेट की सफल लॉन्चिंग
Published / 2023-02-19 21:02:18
भारत के पहले हाइब्रिड रॉकेट की सफल लॉन्चिंग

5 हजार बच्चों ने बनाये हैं ये सैटेलाइट्सएबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के पहले हाइब्रिड रॉकेट मिशन का रविवार को चेन्नई में सफल प्रक्षेपण किया गया। इसमें दोबारा इस्तेमाल होने वाली प्रक्षेपण यान तकनीकी का इस्तेमाल किया गया है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (एसएलवी) मिशन-2023 नाम से किये गये इस प्रक्षेपण में, रॉकेट 150 पीआईसीओ उपग्रहों को ले गया है जिन्हें देशभर के 6 से 12वीं कक्षा तक के 5,000 छात्रों ने डिजाइन और विकसित किया है। मार्टिन फाउंडेशन ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन (एकेआईएफ) और स्पेस जोन इंडिया के साथ मिलकर यह मिशन किया है। उपग्रहों को साउंडिंग रॉकेट का उपयोग करके भी प्रक्षेपित किया गया। साउंडिंग उपग्रहों के प्रक्षेपण की सुविधा केलमबक्ककम उपनगरीय इलाके के पट्टीपुलम में है और इस जगह से हाइब्रिड रॉकेट के नाम से भी जाने जाने वाली साउंडिग रॉकेट का प्रक्षेपण किया गया है। एकेआईएफ की स्थापना दिवंगत राष्ट्रपति और प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ अब्दुल कलाम के पौत्रों ने की थी। स्पेस जोन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ डॉ आनंद मेगालिंगम ने बताया कि रॉकेट लगभग 5-6 किमी की ऊंचाई तक उड़ गया और उसके बाद समुद्र में गिर गया। पूरा मिशन साढ़े आठ मिनट तक चला। इस दौरान हर सेकेंड का डाटा उपग्रह से रिकॉर्ड कर लिया गया। उपग्रहों की सुरक्षित लैंडिग के लिए पैराशूट की मदद ली गई और उतरने के बाद सभी उपग्रह बरामद किए गए और सभी उनसे डेटा एकत्र किया जायेगा। इन उपग्रहों को दोबारा इस्तेमाल किया जायेगा।

भारत बनेगा दूरसंचार प्रौद्योगिकी का प्रमुख निर्यातक
Published / 2023-02-18 23:36:47
भारत बनेगा दूरसंचार प्रौद्योगिकी का प्रमुख निर्यातक

4जी-5जी पर केंद्रीय मंत्री ने किया संबोधितएबीएन सेंट्रल डेस्क। दूरसंचार प्रौद्योगकी के क्षेत्र में भारत लगातार बेहतर हो रहा है। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को कहा कि कहा कि अपनी स्वदेशी 4जी/5जी तकनीक से अपनी ताकत साबित कर दी है। इतना ही नहीं, आने वाले तीन सालों में भारत दुनिया के लिए दूरसंचार प्रौद्योगिकी का प्रमुख निर्यातक बन जायेगा। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने रेलवे को लेकर भी बड़ा बयान दिया। अश्विनी वैष्णव  ने कहा कि रेलवे के निजीकरण की कोई योजना नहीं है।  सबसे तेज गति से हो रहा 5जी सुविधा का प्रसार : केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 5जी सेवाओं की शुरुआत देश में एक अक्टूबर, 2022 को हुई थी। इसके 100 दिन के भीचर 200 से ज्यादा शहरों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है। इस रफ्तार से 5जी के प्रसार से लिए दुनियाभर के कई लोगों ने  प्रशंसा भी की है। इतना ही नहीं, कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे दुनिया में 5जी का सबसे तेज प्रसार बताया गया है।

700 घरों की के लिए जरूरी बिजली की आपूर्ति करेगा बादलों के ऊपर बना बांध
Published / 2023-02-10 21:27:57
700 घरों की के लिए जरूरी बिजली की आपूर्ति करेगा बादलों के ऊपर बना बांध

बादलों के ऊपर बिजली पैदा करने वाला बन रहा बांध, 3 गुना ज्यादा फायदा! जानिए कैसे करेगा काम एबीएन सेंट्रल डेस्क। स्विट्जरलैंड में काफी ऊंचाई पर एक बांध है- लेक मट्जे डैम (मुत्तसी झील बांध)। यह कोई सामान्य डैम नहीं है। यह एक सोलर डैम है। बादलों की ऊंचाई पर बना यह डैम उस मौसम, खासकर सर्दियों में बिजली पैदा करता है, जब बाकी जगह बिजली का उत्पादन ठंडा पड़ जाता है। यह समुद्र तल से 8000 फीट की ऊंचाई पर बना है। इस प्रोजेक्ट का नाम आल्पिनसोलर है, जिसे एनर्जी कंपनी आक्स्पो चला रही है। 700 घरों की जरूरत के बराबर बिजली: स्विस ऊर्जा फर्म एक्सपो ने देश के सबसे लंबे बांध पर लगभग 5,000 के करीब सौर पैनल स्थापित किये हैं। ये पैनल सर्दियों के मौसम में भी स्वच्छ बिजली पैदा करेंगे, जब बारिश और पानी की कमी से पनबिजली का उत्पादन कम हो जाता है। यह बांध हर घंटे 33 लाख किलोवाट बिजली पैदा कर सकता है। इतनी बिजली 700 घरों के लिए काफी है। तीन गुना फायदा कैसे? सोलर पैनल की यह दीवार बादलों के ऊपर है, इसलिए सर्दियों में भी यह अच्छी धूप हासिल करती है और ऐसे में बहुत सारी बिजली पैदा होती है। पहाड़ों पर जमी बर्फ भी धूप को परावर्तित कर इन सोलर पैनलों पर भेजती है। ऐसे में धूप का असर बढ़ जाता है और बिजली तीन गुना ज्यादा बनती है। कंपनी का क्या कहना है? एक्सपो के प्रवक्ता जीनेट श्रांज ने का कहना है कि अल्पाइन सौर संयंत्रों के गुणों में से एक यह प्रोजेक्ट विशेष रूप से सर्दियों में मिडलैंड्स की तुलना में तीन गुना अधिक बिजली का उत्पादन करते हैं। फ्यूचर प्लान: पिछले साल, स्विट्जरलैंड की संसद ने सर्दियों के दौरान बिजली की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद के लिए नई सौर परियोजनाओं की मंजूरी को स्वीकृति दी थी। पिछले साल ही इस बांध का निर्माण पूरा हुआ है। 2030 तक यहां 4,200 पैनल और लगाए जाने का लक्ष्य है, ताकि हर साल करीब 1.2 गीगावाट सोलर बिजली और पैदा होगी। कंपनी 30 हजार से अधिक घरों को इस तरह तैयार बिजली देना चाहती है।

पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के भंडार
Published / 2023-02-10 21:26:39
पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के भंडार

भारत के हाथ लग गया किस्मत बदलने वाला खजाना, नये युग की होगी शुरुआत एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के इतिहास में पहली बार जम्मू-कश्मीर के रियासी में लिथियम के भंडार पाये गये हैं। माइंस के सचिव विवेक भारद्वाज ने बताया कि पहली बार लिथियम के भंडार मिले हैं और वह भी जम्मू और कश्मीर में। इस भंडार के 60 लाख टन के होने की संभावना है। खजाना कहे जाने वाला लिथियम का भंडार मिलने को नई युग की शुरूआत माना जा रहा है।  हालांकि, इससे पहले कर्नाटक के मांड्या जिले में 1600 टन का लिथियम भंडार पाया गया था, लेकिन वह किसी भी कमर्शियल इस्तेमाल के लिए नहीं था। आस्ट्रेलिया, चिली और चीन लिथियम के तीन सबसे बड़े उत्पादक और निर्यातक हैं। लिथियम एक ऐसी धातु जिसके बड़ी मात्रा में मिलने से देशों के भाग्य तक बदल जाते हैं। अब भारत में भी जब इसका भंडार मिला है तो आने वाले समय में कई दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। भारत में लिथियम के मिलने से माना जा रहा है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों के सेक्टर को बूस्ट मिल सकता है। लिथियम की बैटरियों का इस्तेमाल ईवी में किया जाता है और पेट्रोल व डीजल के महंगे होने के चलते कार कंपनियां इन दिनों ईवी कारों पर काफी जोर दे रहे हैं। देश-दुनिया की सभी प्रमुख कार कंपनियां नई-नई ईवी कारें लॉन्च कर रही हैं। अभी तक भारत लीथियम के इम्पोर्ट के लिए आस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना पर निर्भर रहा है। रिचार्जेबल बैटरी में लिथियम एक प्रमुख तत्व है जो स्मार्टफोन और लैपटॉप, साथ ही इलेक्ट्रिक कारों जैसे कई गैजेट्स के लिए बहुत ही जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह खोज ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए कार्बन उत्सर्जन में कटौती के प्रयासों के तहत 2030 तक प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों की संख्या में 30 फीसदी की वृद्धि करने में भारत की मदद कर सकती है।

नया कीर्तिमान : इसरो ने की सबसे छोटे रॉकेट एसएसएलवी-डी2 की सफल लॉन्चिंग
Published / 2023-02-10 11:57:43
नया कीर्तिमान : इसरो ने की सबसे छोटे रॉकेट एसएसएलवी-डी2 की सफल लॉन्चिंग

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी-डी2) की दूसरी विकासात्मक उड़ान को सफलतापूर्व लॉन्च किया। इसरो ने सुबह 09 बजकर 18 मिनट पर सबसे छोटे रॉकेट एसएसएलवी-डी2 को लॉन्च किया। एसएसएलवी-डी2, प्राथमिक पेलोड के रूप में पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस-07) और दो अन्य सह उपग्रह, जानुस-1 और आजादी एटी-2 (आजादी एटी-2) को आसमान में ले जाएगा। एसएसएलवी-डी2 15 मिनट की उड़ान अवधि के बाद ईओएस-07, जानुस-1 और आजादीएटी-2 उपग्रहों को 450 किलोमीटर गोलाकार कक्षा में स्थापित करेगा। ईओएस-07 को इसरो द्वारा डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया है। नए प्रयोगों में एमएम-वेव ह्यूमिडिटी साउंडर और स्पेक्ट्रम मॉनिटरिंग पेलोड शामिल हैं। जानुस -1 अतंरिक्ष अमेरिका से संबंधित है और आजादी एटी-2 स्पेस किड्ज़ इंडिया, चेन्नई में देशभर की लगभग 750 छात्राओं का संयुक्त प्रयास है। पिछले साल अगस्त में पहला एसएसएलवी मिशन असफल साबित हुआ और कंपन गड़बड़ी के कारण उपग्रहों को सही कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका।

इसरो-नौसेना ने किया क्रू मॉड्यूल रिकवरी मॉडल का शुरुआती परीक्षण
Published / 2023-02-09 17:38:38
इसरो-नौसेना ने किया क्रू मॉड्यूल रिकवरी मॉडल का शुरुआती परीक्षण

2024 में जायेगा गगनयानएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने नौसेना के साथ अपने गगनयान मिशन के तहत वॉटर सर्वाइवल टेस्ट फैसिलिटी (डब्ल्यूएसटीएफ) में क्रू मॉड्यूल रिकवरी मॉडल के शुरुआती परीक्षण को पूरा कर लिया है। अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से कहा गया है कि यह परीक्षण गगनयान मिशन के लिए क्रू मॉड्यूल रिकवरी ऑपरेशंस की तैयारी का हिस्सा थी, जो कि भारतीय जल में किया जायेगा। बता दें, गगनयान मिशन के पूरे रिकवरी ऑपरेशंस का नेतृत्व भारतीय नौसेना कर रहा है। इस परीक्षण के दौरान क्रू मॉड्यूल की रिकवरी के लिए आवश्यक संचालन का क्रम पूरा किया गया।तीन दिन के लिए भेजा जायेगा चालक दल : इसरो ने बताया, गगनयान मिशन के तहत तीन सदस्यीय चालक दल को तीन दिवसीय मिशन के लिए 400 किमी की कक्षा में लॉन्च करके और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाया जायेगा। उन्हें भारतीय समुद्री जल उतारा जायेगा। अंतरिक्ष एजेंसी के बयान में कहा गया है कि चालक दल की सुरक्षित वापसी किसी भी सफल मानव अंतरिक्ष उड़ान का अंतिम चरण है। बयान में कहा गया है कि वॉटर सर्वाइवल टेस्ट फैसिलिटी भारतीय नौसेना की एक अत्याधुनिक सुविधा है जो विभिन्न परिस्थितियों और क्रैश परिदृश्यों के तहत विमान से बचने के लिए एयरक्रू को वास्तविक प्रशिक्षण प्रदान करती है।कोरोना के कारण मिशन में हुई देरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में 2022 में इसे प्राप्त करने के एक अस्थायी लक्ष्य के साथ गगनयान मिशन की घोषणा की थी। हालांकि, कोविड महामारी के कारण कई देरी हुई और पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के 2024 के अंत या 2025 की शुरुआत में अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान शुरू करने की संभावना है।

ट्विटर का सर्वर डाउन, लॉगिन करने में भी आ रही थी समस्या
Published / 2023-02-09 11:05:20
ट्विटर का सर्वर डाउन, लॉगिन करने में भी आ रही थी समस्या

फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब पर भी हुई परेशानीएबीएन सेंट्रल डेस्क। ट्विटर का सर्वर डाउन हो गया है। कई यूजर्स को अपने अकाउंट को लॉगिन करने में समस्या आ रही है। ट्वीटडेक भी काम नहीं कर रहा है। यूजर्स ट्वीट डेक लॉगइन नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा कई यूजर्स ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के सर्वर को लेकर भी शिकायत की है। कुछ यूजर्स ने यूट्यूब में भी परेशानी आने की बात कही है। हालांकि, अब धीरे-धीरे यह परेशानी ठीक की जा रही है। इस बीच ट्विटर की ओर कहा गया है कि कुछ लोग ट्विटर पर परेशानी का सामनाकर रहे हैं। इसके लिए कंपनी को खेद है। इसे जल्द से जल्द ठीक करने के प्रयास किये जा रहे हैं। बुधवार की रात को ट्विटर यूजर्स को माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसमें ट्वीट करने, डायरेक्ट मैसेज भेजने या प्लेटफॉर्म पर नये अकाउंट्स को फॉलो करने में असमर्थता शामिल है। नये ट्वीट पोस्ट करने का प्रयास करने वाले कुछ उपयोगकर्ताओं को एक पॉप-अप मिला, जिसमें लिखा था- आप ट्वीट भेजने की दैनिक सीमा पार कर चुके हैं। अन्य ट्विटर उपयोगकर्ताओं को एक पॉप-अप प्राप्त हुआ, जिसमें लिखा था कि हमें खेद है, हम आपका ट्वीट भेजने में सक्षम नहीं थे। ट्विटर उपयोगकर्ता जो माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर अन्य खातों को फॉलो करने का प्रयास कर रहे थे, उन्हें एक संदेश मिला, जिसमें कहा गया था कि सीमा पूरी हो गयी है। आप इस समय अधिक लोगों को फॉलो करने में असमर्थ हैं।

...आखिर इस कमरे में क्यों एक घंटा भी नहीं बिता सकता है इंसान?
Published / 2023-02-04 22:48:39
...आखिर इस कमरे में क्यों एक घंटा भी नहीं बिता सकता है इंसान?

ये है दुनिया का सबसे शांत कमराएबीएन नॉलेज डेस्क। क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे शांत कमरा कहां है?  कहा जाता है कि इस कमरे में इतना सन्नाटा है कि यहां एक घंटे से अधिक समय कोई भी नहीं बिता सकता। इस कमरे के अंदर आप अपने धड़कन की भी आवाज साफ-साफ सुन सकते हैं।शांत माहौल में रहना भला किसे पसंद नहीं, पर आमतौर पर ऐसा हो नहीं पाता। अगर ऑफिस में हैं तो कुछ न कुछ शोर-शराबा तो होगा ही और घर भी जाने के बाद कुछ ऐसे ही हालात होते हैं। अगर घर सड़क किनारे है, फिर तो शोर-शराबे से आप कतई बच नहीं सकते, पर क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक जगह ऐसी भी है, जो बिल्कुल शांत है। वहां सन्नाटा इतना अधिक है कि आप अपने धड़कन की भी आवाज साफ-साफ सुन सकते हैं। जी हां, यह जगह अमेरिका के वॉशिंगटन में है। असल में यह एक कमरा है, जो अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस में है। इसे धरती का सबसे शांत कमरा माना जाता है।वॉशिंगटन के रेडमंड परिसर स्थित माइक्रोसॉफ्ट के मुख्यालय में बने इस शांत कमरे की आवाज माइनस 20.3 डेसीबल मापी गई है। कहा जाता है कि यह कमरा इतना शांत है कि यहां एक घंटे से अधिक समय कोई भी नहीं बिता सकता। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा इस कमरे को दुनिया के सबसे शांत कमरे के रूप में मान्यता दी गई है।कमरे में नहीं पहुंच पाती बाहर की आवाजमिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों द्वारा बनाया गया यह शांत कमरा पूरी तरह कंपन रोधी है। यह कमरा 6 ठोस दीवारों के भीतर बना है और हर दीवार 1 फीट मोटी है। यही वजह है कि बाहर की कोई भी आवाज इस कमरे के अंदर पहुंच ही नहीं पाती है। 21-21 फीट की लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई वाले इस कमरे की खास बात ये भी है कि इसके अंदर आवाज गूंजती भी नहीं है। असल में कमरे की दीवारों, फर्श और छत को फाइबर ग्लास से बनाया गया है। इसीलिए अंदर आवाज नहीं गूंजती।कहते हैं कि इस कमरे के अंदर इतना सन्नाटा है कि आप अपने खून के प्रवाह की आवाज भी सुन सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक इस कमरे में 45 मिनट से अधिक कोई भी खड़ा नहीं रह पाया है। जिस शख्स ने इतना समय बिताने का साहस किया था, उसके मुताबिक उसे कमरे में ठीक से खड़े होने में समस्या हो रही थी और उसे भटकाव जैसा भी अनुभव हो रहा था।

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