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क्या सचमुच मरते हैं तारे... नासा की तस्वीरों ने सबको चौंकाया
Published / 2023-03-15 19:02:09
क्या सचमुच मरते हैं तारे... नासा की तस्वीरों ने सबको चौंकाया

नासा के वेब स्पेस टेलीस्कोप ने मृत्यु के कगार पर पहुंचे तारे की खींचीं दुर्लभ तस्वीरें एबीएन नॉलेज डेस्क। द वेब स्पेस टेलीस्कोप ने दम तोड़ने कगार पर पहुंचे एक तारे के दुर्लभ और क्षणिक चरण को कैद किया है। नासा ने मंगलवार को इसकी तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में तारों के बीच धूल और गैस जैसी चीजें उड़ती दिख रही हैं।मृत्यु के कगार पर पहुंचे तारे का आधिकारिक नाम डब्ल्यूआर-124 है। यह सूर्य से लगभग 30 गुणा विशाल था। परियोजना में शामिल यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी की वैज्ञानिक मैकारेना गार्सिया मारिन ने कहा कि हमने इससे पहले कभी ऐसा नहीं देखा। यह वास्तव में रोमांचक है। द वेब स्पेस टेलीस्कोप 2021 के अंत में स्थापित की गई थी, जिसके बाद से यह उसका पहला प्रेक्षण है।

ग्लोबल वार्मिंग : सूखा और बाढ़ की घटनाओं में दिख रही तेजी
Published / 2023-03-15 19:00:40
ग्लोबल वार्मिंग : सूखा और बाढ़ की घटनाओं में दिख रही तेजी

20 साल के प्राप्त डाटा पर किया शोधएबीएन सेंट्रल डेस्क। धरती के कई हिस्सों में भीषण सूखा, अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की घटनाओं में लगातार तेजी आ रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के नेचर वॉटर जर्नल में प्रकाशित नवीन अध्ययन में यह जानकारी सामने आयी है। अध्ययन में कहा गया है कि वैज्ञानिक धरती के गर्म होने और जलवायु परिवर्तन के चलते सूखे और बाढ़ की घटनाओं की निरंतरता और गंभीरता की भविष्यवाणी करते रहते हैं, लेकिन क्षेत्रीय और महाद्वीपीय पैमाने पर इसे साबित करना मुश्किल होता है।नासा के दो वैज्ञानिकों के शोध ने पूर्व में किये गये अनुमानों और भविष्यवाणियों को पुख्ता कर दिया है। नासा के दो वैज्ञानिकों रोडेल व बेलिंग ली के नासा/जर्मन ग्रेस और ग्रेस-एफओ उपग्रहों के माध्यम से 2002 से 2021 तक 1,056 अत्यधिक बारिश व शुष्क घटनाओं के अध्ययन में यह जानकारी सामने आयी है। इन उपग्रहों से जल भंडारण विसंगतियों का पता लगाने के लिए पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का मापांकन किया गया है।

गगनयान की सुरक्षा के लिए इसरो ने किया रेलवे ट्रेक पर पैराशूट का परीक्षण
Published / 2023-03-07 20:11:14
गगनयान की सुरक्षा के लिए इसरो ने किया रेलवे ट्रेक पर पैराशूट का परीक्षण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान की सुरक्षा के लिए रेलवे ट्रैक पर पैराशूट का परीक्षण किया है। ये परीक्षण 1 और 3 मार्च को चंडीगढ़ में टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी में किया गया। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि क्लस्टर कॉन्फ़िगरेशन में गगनयान पायलट और एपेक्स कवर सेपरेशन (एसीएस) पैराशूट का रॉकेट स्लेज परिनियोजन परीक्षण किया गया। इसरो ने बताया कि इन पायलट पैराशूटों का इस्तेमाल गगनयान मिशन में किया जाता है। पहला परीक्षण दो पायलट पैराशूटों की क्लस्टर तैनाती का अनुकरण करता है। परीक्षण के दौरान पैराशूट प्रवाह की स्थिति में न्यूनतम कोण के बारे में जानकारी हासिल की गयी। दूसरा पैराशूट प्रवाह के संबंध में अधिकतम कोण के अधीन था। एक रॉकेट स्लेज यानी बगैर पहियों की गाड़ी जैसा टेस्ट प्लेटफॉर्म है जो रॉकेट के जरिये पटरियों के एक सेट के साथ फिसलता है।परीक्षण के दौरान चालक दल मॉड्यूल के लिए हमले की स्थिति के 90 डिग्री कोण पर क्लस्टर परिनियोजन का भी अनुकरण किया गया। क्रू मॉड्यूल पर लगे एपेक्स कवर को अलग करने के लिए एसीएस पैराशूट का इस्तेमाल गगनयान मिशन में किया जाता है। गगनयान पैराशूट सिस्टाम का विकास विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र तिरुवनंतपुरम और एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट आगरा की संयुक्त कोशिशों के जरिए किया गयादरअसल, गगनयान कार्यक्रम का मकसद पृथ्वी की निचली कक्षा में मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन शुरू करने की कोशिश है। इसके लिए पैराशूट सिस्टम का फुल प्रूफ होना बेहद जरूरी है। इस परीक्षण का मकसद पैराशूट की ताकत और उसकी क्षमता को आंकना था, ताकि भविष्य में गगनयान के क्रू मॉड्यूल की लैंडिंग कराते वक्त किसी तरह की परेशानी न हो। इस परीक्षण के जरिए एक पैराशूट के खराब होने के हालातों में दूसरे पैराशूट के क्रू मॉड्यूल की सही और सुरक्षित लैंडिंग कराने की काबिलियत के बारे में जाना गया।

खतरे की आशंका... 12 साल पुराने मेघा ट्रॉपिक्स-1 को प्रशांत महासागर में गिरायेगा इसरो
Published / 2023-03-06 19:05:22
खतरे की आशंका... 12 साल पुराने मेघा ट्रॉपिक्स-1 को प्रशांत महासागर में गिरायेगा इसरो

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपना जीवनकाल पूरा कर चुके मेघा ट्रॉपिक्स-1 (एमटी1) उपग्रह को 7 मार्च को पृथ्वी की निचली कक्षा में पुन: प्रवेश कराने के चुनौतीपूर्ण अभियान को अंजाम देने की तैयारी कर रहा है। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कराने के बाद इस उपग्रह को प्रशांत महासागर में गिराया जायेगा। इसरो और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनइसी ने उष्णकटिबंधीय मौसम और जलवायु अध्ययन के लिए 12 अक्टूबर 2011 को संयुक्त रूप से एमटी1 का प्रक्षेपण किया था। बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार को एक बयान में कहा कि इस उपग्रह का जीवनकाल मूल रूप से तीन साल का था, लेकिन यह 2021 तक क्षेत्रीय और वैश्विक जलवायु मॉडल के साथ एक दशक से अधिक समय तक अहम डेटा सेवाएं उपलब्ध कराता रहा। बयान के अनुसार, नियंत्रित तरीक से इसे पृथ्वी के वायुमंडल में एक सुरक्षित क्षेत्र में पुन: प्रवेश कराया जायेगा। करीब 1,000 किलोग्राम वजनी इस उपग्रह में तकरीबन 125 किलोग्राम इंधन बचा है जिससे इसके दुर्घटनावश टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। आम तौर पर बड़े उपग्रह/रॉकेट को पुन: प्रवेश नियंत्रित तरीके से कराया जाता है ताकि जमीन पर किसी के हताहत होने का जोखिम सीमित किया जा सके। इस उपग्रह को गिराने के लिए प्रशांत महासागर में एक निर्जन स्थान को चुना गया है।

क्या 20 साल में धरती पर पहुंच जायेंगे एलियन? जानिये ब्रम्हाण्ड का ये रहस्य...
Published / 2023-03-06 15:43:49
क्या 20 साल में धरती पर पहुंच जायेंगे एलियन? जानिये ब्रम्हाण्ड का ये रहस्य...

एबीएन नॉलेज डेस्क। एलियन की मौजूदगी को लेकर समय-समय पर कई तरह के वैज्ञानिकी दावे सामने आते हैं। इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने एक बार फिर दावा किया है कि वे अगले 10-20 साल में एलियन की मौजूदगी का पता लगा लेंगे। इसके लिए हजारों प्लैनेट को एक्सप्लोर किया जायेगा और उम्मीद है कि उसके बाद एलियन के मौजूदगी की पुष्टि हो पायेगी। बताया जा रहा है कि शक्तिशाली टेलिस्कोप के माध्यम से सैकड़ों लाइट यर दूर स्थित ग्रहों पर क्या है और क्या इस दुनिया के अलावा भी कोई दुनिया है… इसका पता लगाने में मदद मिलेगी। वैज्ञानिक यह मानते हैं कि इस दुनिया के अलावा भी दुनिया हो सकती है और ब्रह्मांड में हम अकेले नहीं हैं, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों को सबूत की तलाश है।ब्रिटेन, अमेरिका और स्विट्जरलैंड के कुछ एक्सपर्ट्स ने एक ऑरिजिन फेडरेशन लॉन्च की है, जिससे एक्स्ट्रा टेरिटेरियल लाइफ की खोज की जायेगी। वे मानते हैं कि मॉडर्न टेलिस्कोप बायोसिग्नेचर की पहचान कर सकता है- जैसे कार्बन डायऑक्साइड और ऑक्सीजन जैसे गैसों की मौजूदगी की पुष्टि कर सकता है। वैज्ञानिक बताते हैं कि अभी तक सिर्फ अर्थ पर ही बायोसिग्नेचर मिले हैं, लेकिन आने वाले 10-20 सालों में हमारे पास ऐसे हजारों ग्रह होंगे। कैम्ब्रिज की एक वैज्ञानिक एमिली मिशेल मानती हैं कि इस ब्रह्मांड में और भी ग्रहों पर लाइफ है, जिसका पता लगाया जा रहा है और सबूत जुटाने की कोशिश की जा रही है। वह इस खोज में है कि क्या लाइफ सिर्फ इसी ग्रह पर है और अगर ऐसा नहीं है, तो क्या अन्य ग्रहों पर भी उसी प्रोसेस से लाइफ शुरू हुआ या फिर कारण कुछ और है। ऑरिजिन फेडरेशन, जो कि वाशिंगटन में लॉन्च किया गया है… इस बात का भी पता लगायेगा कि आखिर लाइफ का ऑरिजिन क्या है? रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने अबतक 5000 ग्रहों की पहचान की है, जो ब्रम्हाण्ड में सूर्य का चक्कर लगा रहे हैं, जहां दो ग्रहों पर पानी भी मौजूद हैं। डॉक्टर मिशेल कहती हैं कि अगर आपके पास ऑक्सीजन, पानी और मिथेन है, तो आप कह सकते हैं कि वहां लाइफ मौजूद है।

भारतीय नौसेना ने किया ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण
Published / 2023-03-05 21:19:32
भारतीय नौसेना ने किया ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण

दुश्मन पल में होगा नेस्तनाबूदएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय नौसेना ने रविवार को अरब सागर में ब्रह्मोस मिसाइल का सफल परीक्षण किया। नौसेना के अधिकारियों ने इसके बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इसमें रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा डिजाइन किया गया स्वदेशी सीकर और बूस्टर लगाया गया है।नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि मिसाइल ने अरब सागर में सफलता पूर्वक सटीक हमला किया। ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण कोलकाता श्रेणी के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत से किया गया। मिसाइल में स्वदेशी सामग्री बढ़ाने पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस लगातार काम कर रहा है। मिसाइल का सफल परीक्षण आत्मनिर्भरता के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

आखिर आजतक वैज्ञानिक क्यों नहीं सुलझा पाये दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान का ये रहस्य...
Published / 2023-03-05 15:29:39
आखिर आजतक वैज्ञानिक क्यों नहीं सुलझा पाये दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान का ये रहस्य...

एबीएन नॉलेज डेस्क। आमतौर पर रेगिस्तान का नाम सुनते ही अक्सर दिमाग में राजस्थान का थार मरुस्थल आता है, जिसे ग्रेट इंडियन डेजर्ट के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि ये तो भारत का रेगिस्तान है, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा मरुस्थल है, जो अफ्रीका महाद्वीप में स्थित है, पर क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे छोटा रेगिस्तान कौन सा है और कहां है? आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान के रहस्य को आजतक कोई भी सुलझा नहीं पाया है। दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान का नाम कारक्रॉस डेजर्ट है, जो कनाडा के युकोन में स्थित है। ये रेगिस्तान महज एक वर्ग मील में फैला हुआ है, जिसे आप चाहें तो पैदल चलकर भी माप सकते हैं, जबकि आमतौर पर रेगिस्तान इतने विशाल होते हैं कि पैदल चलकर उन्हें नापना को किसी इंसान के बस की बात ही नहीं होती। इस रेगिस्तान के पास ही कारक्रॉस नाम का गांव है, जिसके बारे में कहा जाता है कि करीब 4500 साल पहले यह गांव आबाद हुआ था, जहां आज भी लोग रहते हैं। यहां के लोगों के लिए भी कारक्रॉस डेजर्ट एक पहेली ही बना हुआ है। खास बात ये है कि यह रेगिस्तान काफी ऊंचाई पर स्थित है। आमतौर पर रेगिस्तान में तो भयंकर गर्मी पड़ती है और सर्दी के मौसम में भी यहां का तापमान दूसरी जगहों के मुकाबले ज्यादा ही रहता है, लेकिन दुनिया के सबसे छोटे रेगिस्तान में सर्दियों में जमकर बर्फ पड़ती है। यही वजह है कि इस मौसम में यहां घूमने वालों की संख्या काफी बढ़ जाती है। एडवेंचर के शौकीन लोग यहां काफी संख्या में पहुंचते हैं। बर्फीले इलाके में आखिर ये छोटा सा रेगिस्तान कैसे बन गया, ये अब तक एक रहस्य ही है। कुछ लोगों का मानना है कि झील सूखने की वजह से ये रेगिस्ताना बना है, तो कुछ का कहना है कि रेतीली हवाओं की वजह से इतनी ऊंचाई पर रेगिस्तान बना है, पर सच्चाई असल में क्या है, ये किसी को भी नहीं पता। हालांकि वैज्ञानिक इसको लेकर लगातार रिसर्च कर रहे हैं।

बोकारो, देवघर और हजारीबाग में भी शुरू हुई रिलायंस जिओ की 5जी सेवा
Published / 2023-02-22 18:38:16
बोकारो, देवघर और हजारीबाग में भी शुरू हुई रिलायंस जिओ की 5जी सेवा

टीम एबीएन, रांची। रिलायंस जिओ ने देश के 20 नये शहरों और 11 यूनियन टेरिटरीज में 5जी सेवा की शुरुआत की घोषणा की। इन 20 नए शहरों में झारखंड के बोकारो, देवघर और हजारीबाग के नाम शामिल हैं। रिलायंस जियो के के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि इसके साथ अब रिलायंस जिओ सर्वाधिक 277 शहरों में 5जी सेवा उपलब्ध कराने वाला एकलौता 5जी नेटवर्क बन गया है। अब बोकारो के लोगों को जिओ 5जी के क्रांतिकारी स्पीड से बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। 5जी सेवा से बोकारो शहर में बेहतरीन नेटवर्क और हाई स्पीड इंटरनेट का मजा आप ले पायेंगे। 5जी सेवा का सबसे सफल उपयोग शिक्षा, ई-गवर्नेंस, वेबसाइट, गेमिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विभिन्न सेक्टर में देखने को मिलेंगे। जिओ वेलकम आफर के तहत ग्राहकों को 1जीबी पीएस डाटा की 5जी स्पीड निशुल्क प्राप्त कर पाएंगे। बोकारो शहर में 5जी सेवा शुरू होने से मुख्य रूप से प्रभावशाली बदलाव देखने को मिलेंगे। जहां लोग कुछ चंद सेकंड पर पूरी एचडी क्वालिटी की फिल्म और बड़ी और हैवी फाइल्स को कुछ मिनटों में ही अपलोड और डाउनलोड कर पाएंगे। इसके साथ ही लोगों को सफलतापूर्वक 20 जीबीपीएस से 10 जीबीपीएस की हाई क्वालिटी इंटरनेट स्पीड मिलेगी। यह स्पीड 4जी इंटरनेट स्पीड के मुकाबले 10 गुना अधिक तेज होगी। 5जी के हाई क्वालिटी स्पेक्ट्रम बैंड के माध्यम से घर-घर तक तेज 5जी स्पीड का लुफ्त उठा पायेंगे।

जियो ट्रू 5जी 277 शहरों में पहुंचा
Published / 2023-02-22 13:22:37
जियो ट्रू 5जी 277 शहरों में पहुंचा

20 और शहरों में हुई सेवाएं शुरूएबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो तेजी से 5G सर्विस का जाल पूरे देश में बिछा रही है। कंपनी ने मंगलवार को 20 नए शहरों में जिओ 5जी सर्विस लॉन्च की है। जियो की 5जी कनेक्टिविटी से जुड़ने वाले शहरों की संख्या अब बढ़कर 277 हो गयी है। कंपनी जियो 5जी से कनेक्ट होने वाले शहरों में फ्री 5जी सर्विस भी ऑफर कर रही है। आज जियो ट्रू 5 जी से जुड़ने वाले शहरों में असम के चार शहर बोंगईगांव, उत्तरी लखीमपुर, शिवसागर तथा तिनसुकिया, उत्तर प्रदेश के तीन शहर अयोध्या, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर, बिहार के भागलपुर तथा कटिहार, झारखंड के बोकारो स्टील सिटी, देवघर और हजारीबाग शामिल हैं। इनके इलावा मोरमुगाओ (गोवा), दीव (दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव), गांधीधाम (गुजरात), रायचूर (कर्नाटक), सतना (मध्य प्रदेश), चंद्रपुर तथा इचलकरंजी (महाराष्ट्र), थौबल (मणिपुर) में भी आज से जियो की ट्रू 5जी सेवाओं की शुरुआत हो गयी है।मिलेगा फ्री 5जी डेटा : रिलायंस जियो इनमें से ज्यादातर शहरों में 5जी सर्विस शुरू करने वाला पहला और एकमात्र ऑपरेटर बन गया है। इन शहरों के जियो यूजर्स को जियो वेलकम ऑफर के तहत इनवाइट किया जायेगा। आमंत्रित यूजर्स को बिना किसी एक्स्ट्रा कॉस्ट के 1 जीबीपीएस+ स्पीड पर अनलिमिटेड डेटा मिलेगा।11 राज्यों के 20 नये शहरों में जिओ 5जी : इस मौके पर जियो प्रवक्ता ने कहा कि 11 राज्यों के 20 नए शहरों में जियो ट्रू 5जी लॉन्च कर हम बेहद उत्साहित हैं। जियो के ट्रू जी से जुड़ने वाले शहरों की कुल संख्या 277 हो गई है। इस लॉन्च की बदौलत, 277 शहरों में जियो यूजर्स नए साल 2023 में जियो ट्रू जी के परिवर्तनकारी लाभों का आनंद ले सकेंगे। ये शहर महत्वपूर्ण पर्यटन और कमर्शियल लोकेशन के साथ-साथ हमारे देश के प्रमुख एजुकेशन सेंटर भी हैं।उन्होंने कहा कि ट्रू 5जी सर्विस के लॉन्च के साथ, इन क्षेत्रों के यूजर्स को न केवल सबसे अच्छा टेलीकॉम नेटवर्क मिलेगा बल्कि ई-गवर्नेंस, शिक्षा, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गेमिंग, एसएमई, हैल्थकेयर, कृषि, आईटी के क्षेत्रों में विकास के अनंत अवसर भी मिलेंगे।राज्य सरकारों का जताया आभार : जियो प्रवक्ता ने आगे कहा कि हम असम, बिहार, गोवा, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के आभारी हैं, जिन्होंने इन क्षेत्रों को जल्दी डिजिटाइज करने के हमारे प्रयास का निरंतर सहयोग और समर्थन किया है। हमने देश भर में ट्रू 5जी रोलआउट की स्पीड बढ़ा दी है और दिसंबर 2023 तक पूरा देश जियो ट्रू 5 जी से जुड़ जायेगा।जियो ट्रू 5जी भारत का एकमात्र ट्रू 5जी नेटवर्क है क्योंकि यह 4जी नेटवर्क पर शून्य निर्भरता के साथ स्टैंड-अलोन 5जी आर्किटेक्चर पर चलता है। यही नहीं, जियो के पास 700 मेगाहर्ट्ज, 3500 मेगाहर्ट्ज और 26 गीगाहर्ट्ज बैंड में 5जी स्पेक्ट्रम का सबसे बड़ा और बेहतरीन मिक्स है जो इसे बहुत मजबूती देता है।

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