लॉन्च के कुछ ही पल बाद आसमान में फट गया स्पेस एक्स का रॉकेट, दूसरा प्रयास भी फेलएबीएन नॉलेज डेस्क। स्पेस एक्स ने गुरुवार को अंतरिक्ष में एक नया इतिहास रचने से चूक गया। अमेरिका के टेक्सास शहर से अब तक का सबसे बड़ा रॉकेट स्टारशिप लॉन्च हुआ, लेकिन कुछ ही समय बाद यह विफल हो गया। ये रॉकेट एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स ने बनाया है। यह स्टारशिप का पहला आर्बिटल टेस्ट था।इस रॉकेट को भारतीय समयानुसार शाम 7 बजकर 3 मिनट पर टेक्सास के बोका चिका फेसिलिटी से टेस्ट फ्लाइट के लिए लॉन्च किया गया था। लॉन्च के बाद शुरुआत में तो सब ठीक लग रहा था, लेकिन आर्बिट में जाने से पहले ही इसमें कुछ खराबी आयी जिससे यह ब्लास्ट हो गया।इस ब्लास्ट की वजह से रॉकेट के हवा में ही चिथड़े उड़ गये। कंपनी के एक अधिकारी ने कहा है कि स्टारशिप के साथ वह हुआ है जिसमें वह रेपिड अनप्लांड डिसेम्बली कहते हैं। अब इस रॉकेट लांचिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।इसमें साफ दिख रहा है कि लॉन्चिंग के बाद यह रॉकेट जमीन से बहुत ऊंचाई पर पहुंच चुका था। लेकिन अचानक ही इसमें विस्फोट हो गया। इसे एलन मस्क से लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। हालांकि इस स्टारशिप के असफल लांचिग के बाद भी स्पेसएक्स ने इस प्रयास को सराहा है। कंपनी ने कहा कि टीम डेटा को रिव्यू करना जारी रखेंगीं और अगले फ्लाइट टेस्ट की दिशा में काम करेंगी। स्टारशिप के फेल होने के बाद भी स्पेसएक्स हेडक्वार्टर में एम्प्लॉइज खुशी मनाते दिखाई दिए क्योंकि रॉकेट का लॉन्चपैड से उड़ना ही बड़ी सफलता है।स्पेस-एक्स के स्टारशिप को पहले 17 अप्रैल को भारतीय समयानुसर शाम 6 बजकर 50 मिनट पर लॉन्च किया जाना था, लेकिन कुछ तकनीकी खराबी के चलते इसकी लॉन्चिंग टाल दी गई थी। स्पेस-एक्स के स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट और इस बड़े रॉकेट को मिलाकर इन्हें स्टारशिप नाम दिया गया है। ये स्टारशिप 100 लोगों को एक साथ मंगल ग्रह पर ले जाने में सक्षम होगा। ये इंसानों को दुनिया के किसी भी कोने में एक घंटे से कम समय में पहुंचाने में सक्षम होगा। इस स्टारशिप को दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट बताया जाता है। इसकी ऊंचाई 394 फीट और व्यास 29.5 फीट है। यह रॉकेट दो हिस्से में बंटा हुआ है। ऊपर वाले हिस्से की ऊंचाई 164 फीट है। इसके अंदर 1200 टन ईंधन आता है। दूसरा हिस्से की ऊंचाई 226 फीट है। ये रीयूजेबल है। यानी यह स्टारशिप को एक ऊंचाई तक ले जाकर वापस आ जायेगा। इसके अंदर 3400 टन ईंधन आता है। इसे 33 रैप्टर इंजन ऊर्जा प्रदान करते हैं। 2 साल पहले स्पेसएक्स ने चालक दल के चंद्र लैंडर के रूप में स्टारशिप का उपयोग करने के लिए नासा से लगभग 3 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया था। नासा के आर्टेमिस मून प्रोग्राम के तहत स्टारशिप का उपयोग किया जायेगा। स्पेसएक्स और नासा मिलकर एसएलएस रॉकेट और ओरियन कैप्सूल के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचायेंगे।
एबीएन नॉलेज डेस्क। साल का पहला सूर्य ग्रहण शुरू हो चुका है। साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और न ही देश पर इसका कोई प्रभाव देखने को मिलेगा।ऑस्ट्रेलिया में यह सूर्य ग्रहण दिखना शुरू हो चुका है। ग्रहण सुबह 7 बजकर 4 मिनट से शुरू हो चुका है और दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर खत्म होगा। इस सूर्य ग्रहण की अवधि 5 घंटे 24 मिनट की होगी। बता दें कि आज वैशाख अमावस्या भी है। कहां-कहां दिखेगा सूर्य ग्रहणयह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। यह कंबोडिया, चीन, अमेरिका, माइक्रोनेशिया, मलेशिया, फिजी, जापान, समोआ, सोलोमन, बरूनी, सिंगापुर, थाईलैंड, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, ताइवान, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर जैसी जगहों पर ही दिखाई देगा।
दुनिया का सबसे बड़ा रॉकेट आज होगा लॉन्चएबीएन नॉलेज डेस्क। यह अब तक बनाये गये रॉकेट सबसे ऊंचा है। 395 फीट लंबा है। स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग 90 फीट अधिक लंबा है। इस रॉकेट बूस्टर में सबसे ज्यादा इंजन भी लगाये गये हैं। सुपर हेवी को नीचे की तरफ लगाया गया है, चंद्रमा और मंगल ग्रह पर इंसानों को भेजने का एलन मस्क ने सपना देखा है, जिसे साकार करने के लिए वो लगातार कोशिशों में जुटे हुए हैं।इस बीच मस्क की कंपनी स्पेसएक्स आज बड़ा कारनामा करने जा रही है। वह दुनिया के सबसे बड़े रॉकेट स्टारशिप को लॉन्च करेगी। यह स्टारशिप रॉकेट अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले किसी अन्य व्हीकल से अधिक शक्तिशाली है। इसको लेकर एलन मस्क ने ऐलान कर दिया है कि यह लॉन्चिंग की कोशिश सोमवार को की जायेगी। एलन मस्क ने रविवार रात ट्विटर यूजर्स के साथ एक ऑडियो बातचीत में कहा कि वह हम वास्तव में इस रॉकेट को लॉन्च करने के लिए उत्साहित हैं।दरअसल, पहला संयुक्त स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट और सुपर हेवी बूस्टर टेक्सास के बोका चिका से स्टारबेस फैसिलिटी से लॉन्च किया जायेगा। इसका स्थानीय समय सुबह 7 बजे है। अगर भारतीय समय की बात की जाये तो शाम 5 बजकर 30 मिनट पर लॉन्च होगा। स्पेसएक्स ने बताया है कि लॉन्चिंग का लाइव प्रसारण किया जायेगा। इस रॉकेट के मदद से इंसान किसी दूसरे ग्रह पर जा सकेगा। एलन मस्क का सपना है कि साल 2029 तक इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजा जाये और वहां पर बस्ती बसायी जाये। यही वजह है कि संयुक्त स्टारशिप और सुपर हेवी की पहली टेस्ट फ्लाइट तैयार है, जो कि 395 फीट लंबा (120 मीटर) है। नासा ने 2025 में आर्टेमिस 3 मिशन पर उपयोग किए जाने वाले मून लैंडर एस्ट्रोनॉट बनने के लिए स्टारशिप को चुना है। 1972 के बाद से चंद्रमा पर उतरने वाला पहला चालक दल होगा, लेकिन पहले स्पेसएक्स को डिजाइन को ठीक करना होगा। यह अब तक बनाये गए रॉकेट सबसे ऊंचा है। 395 फीट लंबा है। स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग 90 फीट अधिक लंबा है। इस रॉकेट बूस्टर में सबसे ज्यादा इंजन भी लगाये गये हैं। सुपर हेवी को नीचे की तरफ लगाया गया है, जोकि ऊपरी स्टारशिप व्हीकल को ऑर्बिट में ले जायेगा। इसमें स्पेसएक्स के 33 शक्तिशाली रैप्टर इंजन हैं। ये 16 मिलियन पाउंड का थ्रस्ट जनरेट करेंगे, जो अपोलो एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा तक ले जाने वाले सैटर्न "वी" से कहीं अधिक है। स्टारशिप को पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल करने के लिहाज से डिजाइन किया गया है।
सुरजीत दास गुप्ताएबीएन नॉलेज डेस्क। अंतरिक्ष आधारित संचार के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन के विवादास्पद मसले पर दूरसंचार विभाग और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के बीच मतभेद सामने आये हैं। दूरसंचार विभाग अपने इस रुख पर अड़ा हुआ है कि अंतरिक्ष आधारित संचार के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी की जानी चाहिए और उसने नियामक से इसके तौर-तरीकों पर काम करने का अनुरोध किया है। हालांकि कुछ दिन पहले अंतरिक्ष आधारित संचार के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन शीर्षक से एक परामर्श पत्र जारी करने वाले ट्राई ने हितधारकों से इन सवालों का जवाब देने के लिए कहा है कि क्या अंतरिक्ष आधारित संचार के लिए स्पेक्ट्रम बैंड की नीलामी की जानी चाहिए या प्रशासनिक तरीके से पेश किया जाना चाहिए अथवा क्या कोई अन्य विकल्प हो सकता है। इस प्रकार इस मसले को व्यापक रूप से खुला छोड़ा जा रहा है। ज्यादातर दूरसंचार कंपनियों ने यह कहते हुए सरकार द्वारा तय कीमतों पर स्पेक्ट्रम की पेशकश करने का विरोध किया है कि समान सेवाओं के लिए समान अवसर होना चाहिए। उनका तर्क है कि चूंकि वे नीलामी में स्पेक्ट्रम खरीदते हैं, इसलिए अंतरिक्ष संचार आधारित ब्रॉडबैंड की भी नीलामी की जानी चाहिए, जो ग्राहकों के लिए उसी तरह की सेवा होती है। लेकिन सुनील मित्तल द्वारा संचालित वनवेब जैसी उपग्रह कंपनियों ने इस कदम का यह संकेत करते हुए विरोध किया है कि विश्व स्तर पर अंतरिक्ष संचार के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की जाती है और देश इसे सरकार द्वारा तय मूल्य तंत्र के रूप में प्रदान करते हैं। इस मसले की शुरुआत सितंबर 2021 में हुई थी, जब दूरसंचार विभाग ने उपयुक्त आवृत्ति बैंड, ब्लॉक आकार, आरक्षित मूल्य और अंतरिक्ष आधारित संचार सेवाओं के लिए नीलामी की जाने वाली स्पेक्ट्रम की मात्रा की सिफारिश करने के लिए ट्राई को सुझाव भेजा था। ट्राई ने स्पष्टीकरण मांगा, जिस पर दूरसंचार विभाग ने कहा कि 5जी की तैनाती की आवश्यकता के कारण नियामक अंतरिक्ष आधारित संचार पर सिफारिशों को बाद में ले सकता है, क्योंकि उनकी प्रतिक्रिया में समय लगेगा। पिछले साल अगस्त में दूरसंचार विभाग ने ट्राई से अंतरिक्ष संचार सेवाओं की मांग का आकलन करने के लिए परामर्श करने और उसके अनुसार प्रत्येक बैंड में नीलामी के लिए रखे जाने वाले स्पेक्ट्रम की मात्रा पर सिफारिशें प्रदान करने का दोबारा अनुरोध किया था। इसने यह भी कहा कि उसने विशेष आधार पर अंतरिक्ष स्पेक्ट्रम की नीलामी की परिकल्पना की है। तथा ट्राई से उपग्रह और स्थलीय नेटवर्क जैसे कई सेवा लाइसेंधारकों के बीच नीलामी वाले स्पेक्ट्रम को साझा करने की व्यावहारिकता को देखने के लिए कहा। अक्टूबर 2022 में एक पत्र में ट्राई ने दूरसंचार विभाग से स्पष्टीकरण मांगा था कि नीलामी के जरिये अंतरिक्ष आधारित संचार के लिए किस प्रकार की लाइसेंस वाली सेवाओं और स्पेक्ट्रम की परिकल्पना की गई है। दूरसंचार विभाग ने जवाब दिया कि ट्राई विस्तृत जांच के बाद अंतरिक्ष आधारित प्रत्येक संचार सेवाओं के लिए उपयुक्त सिफारिशें प्रदान कर सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ट्विटर ब्लू टिक को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। दरअसल, ट्विटर के सीईओ एलन मस्क ने ऐलान किया है कि इस माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट पर सत्यापित ब्लू टिक धारकों के अकाउंट से अब 20 अप्रैल के बाद ब्लू टिक हट जायेंगे। ट्वीट में उन्होंने जानकारी देते हुए कहा है कि लेगेसी ब्लू चेकमार्क 20 अप्रैल से हटा दिये जायेंगे।20 अप्रैल के बाद अब वहीं केवल से ब्लू टिक चेकमार्क रख पाएंगे जो ट्विटर ब्लू के सदस्य होंगे। इसकी शुरुआत साल 2009 में हुई थी।जिसके जरिए मशहूर हस्तियों जैसे पॉलिटिकल लीडर्स, सिलेब्रिटीज आदि के अकाउंट को वेरिफाइड दिखाने वाला ब्लू टिक दिया गया।हालांकि कंपनी पहले ब्लू टिक के लिए चार्ज नहीं लेती थी पर एलन मस्क के आते ही कीबड़े बदलाव हुए जिसमें उन्होंने ट्विटर की इस सर्विस के लिए फीस वसूलने का ऐलान कर दिया था।इतना ही नहीं एलन मस्क ने कुछ दिनों पहले ट्विटर के लोगों की आइकॉनिक ब्लू बर्ड को हटाकर कुत्ते का लोगो लगा दिया था। इसके साथ कई बड़ी संख्या में ट्विटर से कर्मचारियों की छंटनी भी करनी पड़ी थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गूगल की एक गलती उसी पर भारी पड़ गयी है। इससे गूगल को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की संभावना जतायी जा रही है। गूगल पे एक पॉपुलर इंस्टैंट यूपीआइ पेमेंट प्लेटफॉर्म है, जिससे कुछ यूजर्स की मौज करा दी। दरअसल गूगल पे प्लेटफॉर्म ने एक टेक्निकल ग्लिच की वजह से यूजर्स के अकाउंट में 800 रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक ट्रांसफर कर दिये। जब यूजर्स को इसकी जानकारी मिली, तो उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कुछ यूजर्स ने तो इन पैसों को तुरंत खर्च कर दिया। साथ ही कुछ यूजर्स ने पैसों को दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया। गूगल पे की गलती से भेजे गये पैसों को क्या कंपनी की तरफ से वापस लिया जायेगा? आटोमेटिक तरीके से वसूले जायेंगे पैसे दरअसल गूगल ने साफ किया है कि जिनके अकाउंट में गलती से पैसे ट्रांसफर हो गये हैं, उसके अकाउंट से आॅटोमेटिक तरीके से पैसे वसूले जायेंगे। इसके लिए यूजर्स को कुछ करने की जरूरत नहीं हैं। गूगल पे खुद ब खुद पैसे वापस ले लेगा। लेकिन अगर आपने उन पैसों को खर्च कर दिया है, तो गूगल की ओर एस उन पैसों की वसूली नहीं की जायेगी। कंपनी ने साफ किया कि ऐसे यूजर्स के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जायेगी। कैसे ट्रांसफर हो गये पैसे गूगल की टेक्निकल ग्लिच की वजह से पैसे ट्रांसफर हो गये। वहीं जब तक गूगल को इस खबर की भनक लगती, तब तक देर हो चुकी थी। अब तक कई यूजर्स के अकाउंट में टेक्निकल ग्लिच की वजह से पैसे ट्रांसफर हो गये थे। गूगल पे ने समय रहते इस टेक्निकल ग्लिच को दूर कर लिया है। साथ ही इस मामले में गूगल ने अपनी गलती भी मान ली है। कई यूजर्स को ट्रांसफर हुए पैसे पत्रकार मिशाल रहमान ने ट्विटर पर लिखा कि उन्हें गूगल पे अकाउंट में 46 डॉलर मिले। साथ ही रहमान ने बताया कि उसको 1072 डॉलर फ्री में दिये गये हैं। इनकी तरफ से इस पेमेंट का स्क्रीनशाट भी शेयर किया गया था।
जानिये भारत में कहां- कहां देगा दिखाई... कितना पड़ेगा प्रभावएबीएन नॉलेज डेस्क। साल का पहला सूर्य ग्रहण वैशाख अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। इस बार सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल को लगेगा। यह सूर्य ग्रहण सुबह 7 बजकर 4 मिनट से प्रारंभ होगा और दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषों के मुताबिक सूर्य ग्रहण न तो भारत में दिखेगा और न ही इसका कोई प्रभाव भारत में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा। इस बार का सूर्य ग्रहण बेहद खास रहने वाला है क्योंकि ये सूर्य ग्रहण तीन रूपों में देखने को मिलेगा, इनमें आंशिक, पूर्ण और कुंडलाकार सूर्य ग्रहण शामिल होंगे। वैज्ञानिकों ने इसे हाइब्रिड सूर्य ग्रहण का नाम दिया है। हाइब्रिड सूर्य ग्रहण 100 साल में एक ही बार लगता है।आंशिक सूर्य ग्रहण- जब चंद्रमा सूर्य के किसी छोटे हिस्से के सामने आकर रोशनी रोकता है, तब आंशिक सूर्य ग्रहण होता है।कुंडलाकार सूर्य ग्रहण- जब चंद्रमा सूर्य के बीचोंबीच आकर रोशनी रोकता है, तब चारों तरफ एक चमकदार रोशनी का गोला बनता है, इसे रिंग ऑफ फायर कहते हैं।पूर्ण सूर्य ग्रहण- जब पृथ्वी, सूर्य तथा चंद्रमा एक सीधी रेखा में होते हैं, इसके कारण पृथ्वी के एक भाग पर पूरी तरह से अंधेरा छा जाता है, तब पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है।आंशिक, पूर्ण और कुंडलाकार सूर्य ग्रहण का मिश्रण होता है। यह सूर्य ग्रहण लगभग 100 साल में एक ही बार देखने को मिलता है। इस सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा की धरती से दूरी न तो ज्यादा होती है और न कम।यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा। यह सूर्य ग्रहण कंबोडिया, चीन, अमेरिका, माइक्रोनेशिया, मलेशिया, फिजी, जापान, समोआ, सोलोमन, बरूनी, सिंगापुर, थाईलैंड, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, ताइवान, पापुआ न्यू गिनी, इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण हिंद महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर जैसी जगहों पर ही दिखाई देगा।
90% प्रश्नों का झट से देगा उत्तरएबीएन नॉलेज डेस्क। अब कंप्यूटर आपके हर प्रश्न का उत्तर मिनटों में देंगे और इसी लर्गिंग मशीन इतनी तेजी से काम करेगी की कि आप भी हैरान रह जायेंगे। जी हां, अल्फाबेट इंक गूगल ने दावा किया है कि उसने दुनिया का सबसे तेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सुपरकंप्यूटर बनाया है।गूगल का दावा है कि यह एनवीडिया सिस्टम की तुलना में तेज और अधिक कुशल है, इतना ही नहीं इसका लर्निंग मॉडल टेक भी काफी स्ट्रांग है। गूगल ने टेन्सर प्रोसेसिंग यूनिट (टीपीयू) नामक अपनी कस्टम चिप तैयार की है। यह कृत्रिम एआई प्रशिक्षण पर कंपनी के 90% से अधिक मानव प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम है। कंपनी की तरफ से बताया गया कि उसने टेन्सरफ्लो, जैक्स और लिंग्वो में एमएल मॉडल का इस्तेमाल करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। चार मॉडल को तीस सेकेंड के प्रशिक्षित किया गया है। इस परिप्रेक्ष्य में साल 2015 में उपलब्ध सबसे उन्नत हार्डवेयर एक्सीलेरेटर पर इनमें से किसी एक मॉडल को प्रशिक्षित करने में तीन हफ्ते से अधिक का समय लगा है। गूगल ने कहा कि उसने एआई मॉडल को चलाने और प्रशिक्षित करने के लिए डिज़ाइन किये गये कस्टम घटकों के साथ 4,000 से अधिक टीपीयू के साथ एक प्रणाली का निर्माण किया था। यह 2020 से चल रहा है, और इसका उपयोग गूगल के पीएएलएम मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया गया था, जो 50 दिनों में ओपन एएल के जीपीटी मॉडल के साथ प्रतिस्पर्धा करता है।
नासा ने इन चार एस्ट्रोनॉट्स के नाम किये फाइनलएबीएन नॉलेज डेस्क। नासा ने सोमवार को चार एस्ट्रोनॉट्स के नाम अनाउंस किए हैं जो कि 50 सालों बाद चांद की यात्रा करेंगे। क्रिस्टीना कोच, विक्टर ग्लोवर, रीड वाइजमैन और जेरेमी हैनसन अपोलो मिशन के खत्म होने के बाद यह चार एस्ट्रोनॉट्स पहले ह्यूमन्स होंगे, जो चांद से वापस लौटेंगे। यह चारों एस्ट्रोनॉट्स अर्टिमस – 2 के साथ चांद की यात्रा करेंगे। अमेरिका इस मिशन को 2024 के लिए तैयार कर रहा है।
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