एचइसी में बने लांच पैड और क्रेन की मदद से होगी चंद्रयान-3 की लांचिंगएबीएन नॉलेज डेस्क। चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण और उसकी सफलता का सभी को इंतजार है। चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। शुक्रवार (14 जुलाई 2023) को 14 जुलाई को दोपहर 2:35 बजे इसका प्रक्षेपण होगा। इसके लिए कई कंपनियों ने विभिन्न कल-पुर्जों और उपकरणों की आपूर्ति की है। किसी भी सैटेलाइट की लांचिंग के लिए जरूरी लांच पैड और सैटेलाइट को संभालने वाले क्रेन का निर्माण झारखंड की राजधानी रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचइसी) में हुआ है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए एचइसी ने इसे बनाया था सैटेलाइट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में भी इसका इस्तेमाल होता है। इसे मोबाइल लांचिंग पैड कहते हैं। मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज एचइसी में दूसरा मोबाइल लांचिंग पैड भी तैयार हो रहा है। एचइसी के अलावा लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने भी कई पुर्जों की आपूर्ति की है।
वैज्ञानिकों ने खोजा सूर्य से 90 लाख गुना बड़ा ब्लैक होल, जानें क्या है इसका नामएबीएन नॉलेज डेस्क। वैज्ञानिकों को हमारे सूर्य से 90 लाख गुना बड़ा ब्लैक होल मिला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अब तक का सबसे पुराना और विशालकाय ब्लैक होल है। उनका मानना है कि इसके अलावा और भी कई विशालकाय ब्लैक होल ऐसे हैं, जिन्हें जेम्स वेब टेलीस्कोप की नजरें अभी तक ढूंढ नहीं पायी हैं।यह ब्लैक होल अब तक की खोजी गयी सबसे शुरुआती आकाशगंगा में से एक के अंदर मिला है, जो मध्यम अवस्था में है। इसमें केंद्रक के उत्सर्जन हावी नहीं होते। पहले इसका नाम इजीएसवाई8पी7 था, अब इसे सीईईआरएस1019 नाम दिया गया है। यह खोज शुरुआती ब्रह्माण्ड की सबसे उलझी पहेली को सुलझाने में मददगार हो सकता है।सबसे पुराना ब्लैक होलबिग बैंग की घटना के केवल 57 करोड़ साल के बाद के समय में देखा गया यह विशालकाय ब्लैक होल अब तक का खोजा गया सबसे पुराना ब्लैक होल है। ऑस्टिन की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की खगोलभौतिविद रेबैका लार्सन की अगुआई में किये गये शोध के मुताबिक, सीईईआरएस1019 का अध्ययन शुरुआती ब्रह्माण्ड में तारों के निर्माण से बने प्रकाश की जांच के हिस्से के रूप में किया जा रहा है।
निवेशक आयें और हमारे साथ भागीदारी करें : आर के सिंह एबीएन सेंट्रल डेस्क। हरित हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन हैं। केंद्रीय बिजली, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने निवेशकों को देश में स्वच्छ ऊर्जा स्रोत में निवेश का आग्रह करते हुए यह बात कही है। सिंह ने हरित हाइड्रोजन पर पहले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-2023 को संबोधित करते हुए बुधवार को यहां निवेशकों से कहा कि हम आपको हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के विकास में मदद करेंगे। आप आयें और हमारे साथ भागीदारी करें। सम्मेलन में 2,500 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। सिंह ने कहा कि निवेशक इलेक्ट्रोलाइजर के विकास, हरित हाइड्रोजन के परिवहन तंत्र, हरित इस्पात और सीमेंट के विनिर्माण में हरित हाइड्रोजन के इस्तेमाल जैसे क्षेत्रों में भागीदारी कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। केंद्रीय बिजली मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की तरह भारत हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में भी अगुवा बन सकता है। उन्होंने बताया कि ऐसे उद्योग हैं जिन्होंने हरित हाइड्रोजन की बड़ी क्षमता स्थापित करने के लिए काम करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि ये लोग भूमि अधिग्रहण के लिए विभिन्न राज्यों के साथ काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने जनवरी, 2023 में 19,744 करोड़ रुपए के खर्च के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी थी। इसका लक्ष्य भारत को हरित हाइड्रोजन के विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी करफड की ओर से चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, इसरो चीफ ने ये साफ कर दिया गया है कि चंद्रयान-3 अपनी उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है। यही नहीं इसके साथ ही उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि किस दिन अंतरिक्ष में चंद्रयान-3 उड़ान भरने जा रहा है। दरअसल, बीते लंबे वक्त से इसरो के इस बहुप्रतिक्षित अभियान को लेकर हर किसी की नजरें टिकी हुई हैं। मिशन चंद्रयान-2 की सफलता में जरा सी कमी के बाद से ही इसके अलग कदम को लेकर कई उम्मीदें लगायी जा चुकी हैं। इस दिन लॉन्च होगा मिशन चंद्रायन-3 मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग डेट को लेकर इसरो के प्रमुख ने खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि अगले महीने यानी जुलाई की 13 तारीख को मिशन लॉन्च किया जा रहा है। करफड ने ये भी बताया कि चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग कहां से की जायेगी। इसरो के मुताबिक चंद्रयान-3 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा केंद्र से दोपहर 2.30 बजे लॉन्च किया जायेगा। कब लॉन्च हुआ था चंद्रयान-2 इससे पहले इसरो के मिशन चंद्रयान-2 को लेकर भी देश और दुनिया में खासा उत्साह देखने को मिला था। हालांकि जरा चूक के चलते ये मिशन कामयाब नहीं हो पाया था। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को लॉन्च किया गया था। इसके बाद भी वो 2 महीने तक अपने मिशन पर ठीक से काम कर रहा था। 7 सितंबर को इसे चंद्रमा के दक्षिण पोल पर भी उतारने में काफी हद तक सफलता मिल गई थी। हालांकि लैंडिंग के दौरान विक्रम लैंडर दुर्घटना का शिकार हो गया और मिशन को बड़ा नुकसान हुआ। इन बातों का रखना होगा ध्यान इसरो के प्रमुख सोमनाथ की मानें तो इस बार चंद्रयान-3 में कोई दिक्कत न आये इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। खास तौर पर इसकी लॉन्चिंग तभी की जायेगी, जब ये सभी टेस्टों में पूरी तरह सफल होगा। इसके लिए चंद्रयान के हार्डवेयर से लेकर सॉफ्टवेयर और सेंटर सभी स्तर पर पूरी तरह ध्यान रखा जायेगा।
वैज्ञानिकों ने खतरे को लेकर किया आगाहएबीएन नॉलेज डेस्क। सूर्य की किरणें धीरे-धीरे मारक होती जा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है धरती पर सूर्य की किरणों का हमला उसके आकलन से कहीं ज्यादा होने वाला है। हालात बता रहे हैं कि इस बार का सौर तूफान धरती के जीव-जंतु के लिए भी काफी खतरनाक हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अंदेशा जताया है सूर्य का तापमान अपने शिखर पर पहुंच गया है।विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये साल सूर्य अपना सबसे खतरनाक असर दिखा सकता है। साल 2023 के अंत तक सूर्य का प्रकोप बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस खतरे का आकलन कुछ समय के बाद लगाया गया था, लेकिन यह समय से पहले ही दिख रहा है।क्यों बदले हालातजानकारी के मुताबिक सौरमंडल में हर 11 साल के बाद ऐसी स्थिति आती है। सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन आता है। उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव में बदल देता है। इस उलटफेर के चलते सूर्य की रोशनी तीक्ष्ण हो जाती है। रोशनी से अग्नि जैसी गर्मी निकलती है।क्या होता है नुकसानसौरमंडल के ये हालात पृथ्वी के लिए खतरनाक माने जाते हैं। सौर तूफानों से संचार माध्यम प्रभावित होने का खतरा रहता है। बिजली के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हो सकता है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों पर बुरा प्रभाव होता है।कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि अगला सौर तूफान जल्द आ सकता है। संभव है इसके बारे में जैसा अनुमान लगाया गया है, उससे अधिक शक्तिशाली हो सकता है।समय से पहले खतरा क्योंवैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की थी कि वर्तमान सौर चक्र 2025 में चरम पर होने वाला था लेकिन सनस्पॉट, सौर तूफान और दुर्लभ सौर घटनाओं को देखते हुए अनुमान को बदलना पड़ा है। ये खतरा इसी साल के अंत तक देखने को मिल सकता है।वैसे वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं है कि सूर्य का चक्र इतने लंबे समय तक क्यों चलता है। यूके में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के सौर भौतिक विज्ञानी एलेक्स जेम्स का कहना है कि यह सब सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र पर निर्भर करता है। जैसे ही सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र सक्रिय होता है उसके सुरक्षा घेरे पर असर होता है, जिससे प्रचंड रोशनी निकलती है। इसे सौर ज्वाला कहा जाता है।कितना अलग है सौर 2025अप्रैल 2019 में नासा ने सौर चक्र 25 के लिए अपना पूर्वानुमान जारी किया था और चेतावनी भी जारी की थी। इससे पहले 2014 के मध्य और 2016 की शुरुआत के बीच सौर चक्र चरम पर था, लेकिन आने वाले सौर चक्र के मुकाबले वह कमजोर था।वैज्ञानिकों के मुताबिक दिसंबर 2022 में सूर्य 8 साल के सनस्पॉट शिखर पर पहुंच गया था और जनवरी 2023 में ही वैज्ञानिकों ने नासा की भविष्यवाणी के मुकाबले दोगुने से भी अधिक सनस्पॉट देखे। जिसके अगले महीनों में ही यह संख्या फिर बढ़ गयी। कुल मिलाकर लगातार 27 महीनों में देखे गये सौर धब्बों की संख्या अनुमानित संख्या से अधिक हो गयी।
21 जून साल का सबसे लंबा दिन, 12 की बजाए होंगे 14 घंटे...खुद की परछाई भी नहीं आती नजरएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत सहित दुनिया भर में 21 जून को योग दिवस का त्यौहार मनाया जाता है और सभी इसमें बढ़ चढ़कर शिरकत करते हैं। 21 जून के दिन की एक खासियत है कि यह वर्ष के 365 दिन में सबसे लंबा दिन होता है और योग के निरंतर अभ्यास से व्यक्ति को लंबा जीवन मिलता है इसलिए इस दिन को योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया गया। 21 जून साल का सबसे बड़ा दिन होता है और इस दिन एक पल ऐसा भी आता है जब परछाई तक साथ छोड़ जाती है। जी हां साल के 365 दिनों में 21 जून इतना लंबा और बड़ा होता है कि समय जल्दी नहीं कटता और रात छोटी होती है। इस दिन को ग्रीष्म अयनांत भी कहते हैं।बाकी दिनों में पृथ्वी की प्रक्रिया सामान्य होती है। पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने के साथ अपने अक्ष पर भी घूमती है। वह अपने अक्ष में 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इसकी वजह से सूरज की रोशनी धरती पर हमेशा एक जैसी नहीं पड़ती और दिन रात की अवधि में अंतर आता है।21 जून को सूरज उत्तरी गोलार्द्ध से चलकर भारत के मध्य से गुजरी कर्क रेखा में आ जाता है। इसलिए सूर्य की किरणें ज्यादा समय तक धरती पर पड़ती हैं। दोपहर के समय सूरज काफी ऊंचाई पर आ जाता है इसलिए आज का दिन लंबा होता है। 21 सितंबर के आसपास दिन व रात की अवधि बराबर हो जाती है जिसके बाद रातें बड़ी होने लगती हैं और दिन छोटे। दिन-रात की अवधि का यह चक्र 23 दिसंबर तक जारी रहता है। जिस वजह से 23 दिसंबर की रात सबसे लंबी और दिन छोटा होता है।सूर्य जब कर्क रेखा के ऊपर होता है तो एक पल ऐसा भी आता है जब परछाई भी साथ छोड़ जाती है। इस दिन सूर्य की किरणें करीब 15 से 16 घंटे तक पृथ्वी पर पड़ती हैं। इस दिन दक्षिणी गोलार्द्ध में ठीक इसका उलटा होता है। जहां उत्तरी गोलार्द्ध में रह रहे लोगों के लिए 21 जून को गर्मी की शुरुआत कहा जाता है, वहीं दक्षिणी गोलार्द्ध में रह रहे लोगो के लिए ये सर्दी की शुरुआत मानी जाती है।हालांकि ऐसा नहीं है कि 21 जून को ही सबसे बड़ा दिन हो। यह 20 या 22 जून को भी हो सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक साल 1975 में 22 जून को साल का सबसे बड़ा दिन आया था और अब 2203 में ऐसा होगा जब 21 को नहीं 22 जून को सबसे लंबा दिन होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ट्विटर को टक्कर देने के लिए इंस्टाग्राम एक बड़ी योजना पर कार्य चल रहा है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कई सारे बड़े कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मेटा इस प्रोग्राम की टेस्टिंग कर रही है, ताकि लोगों के इंटरेस्ट पता चले, सेलिब्रिटीज के इंटरेस्ट पता चले और ट्विटर का विकल्प दिया जा सके। बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां रोज संघर्ष कर रही हैं मार्केट में बने रहने के लिए और एक दूसरे से आगे निकलने के लिए। जैसा कि हम सबको पता है एक तरफ फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा न केवल फेसबुक बल्कि इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे बड़े सफल एप्लीकेशंस को लीड करती है, वहीं शॉर्ट मेसेजिंग प्लेटफार्म के तौर पर ट्विटर ने बेहद मजबूत पकड़ बना ली है। अकेले ट्विटर एक बड़े इनफ्लुएंसर प्लेटफार्म के तौर पर उभर आया है। चाहे किसी मुद्दे पर चर्चा हो, ट्रेंड हो ट्विटर ने अपना एक अलग मार्केट में स्थान बनाया है। अब जाहिर तौर पर ये दोनों सोशल मीडिया कंपनियां हैं और इसलिए एक दूसरे के साथ उठापटक जारी रहती है। इस कड़ी में मेटा प्लेटफार्म का इंस्टाग्राम इसी तरह का एक एप्लीकेशन लाने के तैयारी में है। जी हां आप सही सुन रहे हैं ट्विटर को टक्कर देने के लिए इंस्टाग्राम एक बड़ी योजना पर कार्य चल रहा है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कई सारे बड़े कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मेटा इस प्रोग्राम की टेस्टिंग कर रही है, ताकि लोगों के इंटरेस्ट पता चले, सेलिब्रिटीज के इंटरेस्ट पता चले और ट्विटर का विकल्प दिया जा सके। कुछ रिपोर्ट में यह भी बताया जा रहा है कि यह एक इंस्टाग्राम से अलग होगा हालांकि इंटरकनेक्टिविटी बनी रहेगी। इसका मतलब कि जिस प्रकार से आप फेसबुक और इंस्टाग्राम में इंटरकनेक्टिविटी देखते हैं, कुछ कुछ वैसी ही नये ऐप के साथ भी होगी। अभी तक जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक यह एप्लीकेशन लोगों को टेक्स्ट शेयर किये गये लिंक फोटो एवं वीडियो के जरिये अपने दोस्तों से जुड़ने का मौका देगा। इसके अलावा फैन और फॉलोवर सिर्फ एक क्लिक पर प्रभावशाली लोगों से जुड़ सकेंगे। तो अब इंतजार है इंस्टग्राम के इस नए सुविधा को जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह ट्विटर को टक्कर देने वाला है।
चीन ने बनायी दुनिया की पहली उड़न तश्तरीएबीएन नॉलेज डेस्क। मानव निर्मित इस उड़न तश्तरी का हाल ही में चीन के दक्षिणी शहर शेनझेन में परीक्षण भी हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह इलेक्ट्रानिक उड़न तश्तरी हवा तथा जमीन दोनों से टैक आफ और लैंडिंग करने में सक्षम है। आसमान में उड़न तश्तरी के बारे में आपने सुना होगा, कई बार इन्हें ऐसा स्पेस शिप बताया जाता है जिस पर एलियन सवार हैं, हालांकि इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई, न ही कोई इसे पास से देख सका, लेकिन आने वाले समय में ये ख्वाहिश पूरी हो सकती है, चीन ने दुनिया की पहली उड़न तश्तरी बना ली है।मानव निर्मित इस उड़न तश्तरी का हाल ही में चीन के दक्षिणी शहर शेनझेन में परीक्षण भी हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह इलेक्ट्रानिक उड़न तश्तरी हवा तथा जमीन दोनों से टैक आफ और लैंडिंग करने में सक्षम है। चीन में निर्मित यह उड़न तश्तरी ईवीटीओएल यानी इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक आफ और लैंडिंग की तर्ज पर बनाया गया है। यानी 15 मिनट की उड़ान में ही यह 656 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसे शेनझेल शहर की यूएफओ पावर टेक्नोलॉजी ने विकसित किया है। इसमें 12 प्रोपेलर लगे हैं, पायलट की सीट इनके बीच में डिजाइन की गयी है। चीन में इस उड़न तश्तरी को विकसित करने में तीन साल का समय लगा। चीनी मीडिया के मुताबिक यह उड़न तश्तरी को ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह पानी या जमीन कहीं से भी उड़ान भर सकती है। कंपनी की ओर से जो वीडियो जारी किया गया है, उसमें यह शेनझेल झील के ऊपर उड़ान भरती नजर आ रही है। हालांकि कंपनी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि आम लोगों के लिए इसे कब से शुरू किया जायेगा। उड़न तश्तरी के सफल परीक्षण के बाद अब चीन उड़ने वाली कार बनाने जा रहा है, एक एयरोस्पेस कंपनी ने ये दावा किया है, कंपनी का दावा है कि अगले दो साल में उड़ने वाली कार बाजार में उतार दी जायेगी। इसकी कीमत तकरीबन 3 लाख 50 हजार डॉलर रहने की संभावना है। इससे पहले इजरायल ने हाल ही फ्लाइंग टैक्सी का परीक्षण किया था। यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा था, दो लोगों ने फ्लाइंग टैक्सी में बैठकर 30 किलोमीटर तक की यात्रा भी पूरी की थी। इजरायल की पर्यटन मंत्री ने दावा किया था कि जल्द ही आम लोगों की सुविधा के लिए इसे शुरू किया जायेगा।
दुनिया की सबसे दुर्लभ आंखों का रंग क्याएबीएन नॉलेज डेस्क। दुनियाभर में लोगों की आंखें अलग अलग रंगों की होती हैं। काली, भूरी, नीली, पीली, हरी। क्या आपको मालूम है कि दुनियाभर में आंखों का सबसे दुर्लभ रंग क्या है। क्यों ये दुर्लभ है। क्या ये बात आपको हैरान नहीं करती कि मानव आंखें अलग अलग रंगों की क्यों होती हैं। भारत में आमतौर पर लोगों की आंखें काली और भूरी होती हैं लेकिन जब हम नीली या दूसरी रंगों की आंखों वाले लोगों को देखते हैं तो बरबस उनकी आंखें हमें आकर्षित करती हैं। वैसे मानव आंखों में रंगों का गजब की विविधता दुनियाभर में पायी जाती है। अगर आप ये समझते हैं कि बच्चे की आंखों का रंग वैसा ही होगा, जैसा माता-पिता का होगा तो ये गलत साबित हो सकता है। माता-पिता की आंखों के रंग के आधार पर बच्चे की आंखों के रंग का अनुमान नहीं लगा सकते। हमारी आंख के बीच में पुतली लगभग हमेशा काले रंग की होती है, इसके चारों ओर रंगीन वलय, जिसे परितारिका कहा जाता है, कितने भी रंगों की हो सकती है पारितारिका को अंग्रेजी में आइरिश भी कहते हैं। सबसे आम परितारिका का रंग भूरा है। इसका मतलब है कि पृथ्वी पर किसी भी अन्य रंग की तुलना में अधिक लोगों की आंखें भूरी हैं लेकिन सबसे दुर्लभ आंखों का रंग क्या है? हरे रंग को दुनिया का सबसे दुर्लभ आंखों का रंग बताया गया है। 2014 के अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के सर्वेक्षण में पाया गया कि सिर्फ 9 प्रतिशत लोगों की आंखें हरी हैं, जबकि 45 प्रतिशत की आंखें हल्के भूरे रंग की हैं। 18 प्रतिशत की भूरी आंखें हैं और 27 प्रतिशत की नीली आंखें हैं। कभी कभी लोगों की आंखें लाल या गुलाबी होती हैं लेकिन ऐल्बिनिज्म जैसे रोग का परिणाम हो सकता है। इन मामलों में आंख के अंदर की रक्त वाहिकाएं उन्हें गुलाबी या लाल रूप देती हैं। हेटरोक्रोमिया नामक एक अन्य दुर्लभ स्थिति में लोगों की दोनों आंखों का रंग अलग अलग हो सकता है। उनकी एक भूरी आंख और एक नीली आंख हो सकती है। हेटरोक्रोमिया वाले अधिकांश लोग इसके साथ पैदा होते हैं आपकी आंखों का रंग विभिन्न जीनों से तय होता है, जो आपको विरासत में मिला है। आंखों के रंग का आनुवंशिकी एक जटिल विज्ञान है जो एक बच्चे के माता-पिता की आंखों के रंग से परे जाता है। उदाहरण के तौर पर नीली आंखों वाले दो माता-पिता भूरी आंखों वाला बच्चा पैदा कर सकते हैं। ज्यादातर समय, लोगों की आंखों का रंग जीवनभर एक जैसा रहता है। नीली आंखों वाले बच्चे की आंखें उनके पहले वर्ष या यहां तक कि उनके पहले कुछ वर्षों में काली हो सकती हैं हालांकि, ऐसी कई स्थितियां हैं जिनके कारण किसी व्यक्ति की आंखों का रंग बदल जाता है। उदाहरण के लिए, मोतियाबिंद आंखों को धुंधला बना सकता है। चोट लगने से भी आंखों के रंग में बदलाव आ सकता है।
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