एबीएन सेंट्रल डेस्क। तुर्की ने स्वदेश में निर्मित परीक्षण रॉकेट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है। तुर्की अंतरिक्ष एजेंसी ने जानकारी दी है। अंतरिक्ष एजेंसी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा- अंतरिक्ष तक पहुंचने के हमारे देश के प्रयासों के तहत, घरेलू और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकियों से विकसित परीक्षण रॉकेट को इग्नेडा से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। इस रॉकेट को प्रमुख तुर्की हथियार और मिसाइल निमार्ता रोकेटसन द्वारा विकसित किया गया है। तुर्की अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि रॉकेट का इच्छित लक्ष्य 550 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच रहा है।
इसरो ने दी बधाई; कहा- अंतरिक्ष यात्रा में एक और मुलाकातएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत के बाद अब रूस ने भी लूनर मिशन लूना-25 लॉन्च कर दिया है। 47 साल बाद रूस ने अपना यान भेजा है। शुक्रवार को लॉन्च किये जाने वाले इस चंद्रयान मिशन के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रूसी अंतरिक्ष एजेंसी को बधाई दी। इसरो ने यह भी कामना की कि चंद्रयान-3 और लूना-25 दोनों मिशन अपने लक्ष्य हासिल करें।रूसी अंतरिक्ष एजेंसी को दी बधाईइसरो ने कहा कि लूना-25 के सफल लॉन्च पर रोस्कोस्मोस को हमारी तरफ से बधाई। हमारी अंतरिक्ष यात्रा में एक और मुलाकात होना अद्भुत है। उसने कहा कि चंद्रयान-3 और लूना-25 मिशनों को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए शुभकामनाएं। बता दें कि रोस्कोस्मोस रूसी अंतरिक्ष एजेंसी है।47 साल बाद रूस ने भेजा अपना यानशुक्रवार को लॉन्च किये जाने वाले लूना-25 मिशन के बारे में रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने भी पुष्टि की है। इससे पहले रोस्कोस्मोस ने साल 1976 में लूना-24 को लॉन्च किया था। 47 साल बाद रूस ने अपना यान भेजा है। मॉस्को से करीब 5500 किलोमीटर पूर्व में स्थित अमूर ओब्लास्ट के वोस्तोनी कॉस्मोड्रोम से लूना 25 की लॉन्चिंग की गयी। कहा जा रहा है कि भारत के चंद्रयान-3 से पहले रूस का लूना-25 चांद पर कदम रखेगा।7-10 दिनों तक चांद के चक्कर लगायेगा रूसी लैंडररूसी मीडिया के अनुसार, शुक्रवार 11 अगस्त को सुबह 4.40 बजे रूस के वोस्तोनी कॉस्मोड्रोम से लूना- 25 लैंडर की लॉन्चिंग की। लूना- 25 को सोयुज 2.1 बी रॉकेट में चांद पर भेजा गया है। इसे लूना-ग्लोब मिशन का नाम दिया गया है। रॉकेट की लंबाई करीब 46.3 मीटर है, वहीं इसका व्यास 10.3 मीटर है। रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस का कहना है कि लूना-25 चांद की ओर निकल चुका है। पांच दिनों तक यह चांद की तरफ बढ़ेगा। इसके बाद 313 टन वजनी रॉकेट 7-10 दिनों तक चांद का चक्कर लगायेगा। उम्मीद है कि 21 या 22 अगस्त को यह चांद की सतह पर पहुंच जायेगा।नासा ने किया था पानी मिलने का दावारूसी मीडिया के अनुसार, रूस की योजना है कि लैंडर को चांद के दक्षिणी पोल पर उतरेगा। जानकारों का कहना है कि चांद के इसी पोल पर पानी मिलने की संभावना है। बता दें, 2018 में नासा ने कहा था कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी है। लूना- 25 में रोवर और लैंडर हैं। इसका लैंडर करीब 800 किलो का है। लूना- 25 सॉफ्ट लैंडिंग की प्रैक्टिस करेगा। लैंडर में एक खास यंत्र है, जो सतह की छह इंच की खुदाई करेगा। लूना- 25 पत्थर और मिट्टी के सैंपल जमा करेगा। इससे जमे हुए पानी की खोज हो सकती है। रूस का मकसद है कि भविष्य में जब भी इंसान चांद पर अपना बेस बनाये तो उसके लिए पानी की समस्या न हो।चंद्रयान- 3 से पहले रूस कर सकता है चांद पर लैंडउम्मीद जतायी जा रही है कि 21 या 22 अगस्त को यह चांद की सतह पर पहुंच जायेगा। वहीं, चंद्रयान-3 भारत ने 14 जुलाई को लॉन्च किया था, जो 23 अगस्त को चांद पर लैंड करेगा। लूना- 25 और चंद्रयान-3 के चांद पर उतरने का समय करीब-करीब एक ही होगा। लूना कुछ घंटे पहले चांद की सतह पर लैंड करेगा। रूस इससे पहले 1976 में चांद पर लूना-24 उतार चुका है। विश्व में अबतक जितने भी चांद मिशन हुए हैं, वे चांद के इक्वेटर पर पहुंचे हैं। लेकिन अगर लूना-25 सफल हुआ तो ऐसा पहली बार होगा कि कोई देश चांद के साउथ पोल पर लैंड करे।
इसरो ने दी बड़ी अपडेट, अब बस इतना सफर बाकीएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत का तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह के और भी करीब पहुंच गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार दोपहर को चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान की कक्षा को और कम करने और इसे चंद्रमा की सतह के और भी करीब ले जाने के लिए एक और महत्वपूर्ण पैंतरेबाज़ी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। कक्षा को और कम करने के लिए दूसरा ऑपरेशन 13:00 से 14:00 बजे के बीच किया गया। इसरो ने एक ट्वीट में कहा कि चंद्रयान-3 मिशन चंद्रमा की सतह के और भी करीब।अगला ऑपरेशन 14 अगस्त, 2023 कोइसरो ने कहा कि आज किये गये युद्धाभ्यास के बाद चंद्रयान-3 की कक्षा घटकर 174 किमी x 1437 किमी रह गयी है। इसरो ने कहा कि अगला ऑपरेशन 14 अगस्त, 2023 को 11:30 से 12:30 बजे IST के बीच निर्धारित है। 5 अगस्त को चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान को चंद्र कक्षा में स्थापित किये जाने के बाद, रविवार की देर रात इसने नियोजित कक्षा कटौती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था।चंद्रमा की सतह के और करीब चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान इंजनों की रेट्रोफायरिंग ने अंतरिक्ष यान को चंद्रमा की सतह के 170 X 4313 किमी के करीब ला दिया है। यह युद्धाभ्यास चंद्रयान-3 की कक्षा को धीरे-धीरे कम करने और इसे चंद्र ध्रुवों पर स्थापित करने के लिए योजनाबद्ध युद्धाभ्यासों की श्रृंखला में पहला था। चंद्र बाउंड ऑर्बिट पैंतरेबाज़ी रविवार रात 22:30 बजे से 23:30 बजे के बीच की गयी।एंटीना से की जा रही है निगरानीइसरो ने कहा कि जैसे-जैसे मिशन आगे बढ़ रहा है, चंद्रयान-3 की कक्षा को धीरे-धीरे कम करने और इसे चंद्र ध्रुवों पर स्थापित करने के लिए कई युक्तियों की योजना बनायी गयी है। कुछ युद्धाभ्यासों के बाद, प्रणोदन मॉड्यूल कक्षा में रहते हुए लैंडर से अलग हो जायेगा। इसके बाद, 23 अगस्त को चंद्रमा के अब तक अनछुए दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सॉफ्ट लैंडिंग की सुविधा के लिए जटिल ब्रेकिंग युद्धाभ्यास की एक श्रृंखला को अंजाम दिया जायेगा। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि चंद्रयान-3 की सेहत सामान्य है। पूरे मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यान के स्वास्थ्य की लगातार इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) में मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), बेंगलुरु के पास बयालू में इंडियन डीप स्पेस नेटवर्क (आईडीएसएन) एंटीना से निगरानी की जा रही है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत का मिशन चंद्रयान-3 कामयाबी की नयी इबारत लिखने को तैयार है। चांद की दहलीज अब महज चंद कदम दूर है। पांच अगस्त को चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक लूनर ऑर्बिट में दाखिल हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं, लैंडिंग से पहले चंद्रयान-3 से करीब इक्कीस सौ (2100) किलोग्राम वजन छू-मंतर हो जायेगा। अब आप पूछेंगे कि ऐसा कैसा हो जायेगा? बता दें कि चंद्रयान का कुल वजन करीब 3 हजार 900 किलोग्राम है। वजन के मुताबिक हम इसे तीन हिस्सों में बांट लेते हैं; पहला प्रोपल्शन मॉड्यूल, दूसरा लैंडर और तीसरा रोवर। इन तीनों हिस्सों में प्रोपल्शन मॉड्यूल का वजन सबसे ज्यादा है, यानी 2148 (इक्कीस सौ अड़तालीस) किलोग्राम। लैंडर मॉड्यूल का वजन 1752 किलोग्राम जबकि रोवर प्रज्ञान का वजन महज 26 किलोग्राम है। लैंडिंग से पहले चंद्रयान का प्रोल्शन मॉड्यूल अलग हो जायेगा, यानि 2100 किलोग्राम वजन कम हो जायेगा। गौरतलब है कि 5 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद की ऑर्बिट में दाखिल हो चुका है। इसरो ने बेहद रोचक अंदाज में चंद्रयान-3 के इस पड़ाव की जानकारी दी। इसरो के ट्वीट के मुताबिक चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चांद की कक्षा में दाखिल हो चुका है। चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने के बाद उन्होंने ट्वीट करके अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि चंद्रयान-3 को अब चांद की ग्रेविटी महसूस होने लगी है।तय समय पर लैंड करेगा चंद्रयान-3स्पेस एजेंसी ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि की है। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-3 सही गति से आगे बढ़ रहा है और तय प्लान के मुताबिक इसका रोवर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंड करेगा। लेकिन इससे पहले कई जटिल प्रक्रिया बाकी हैं। सबसे पहले इसको ऑर्बिट बदलकर पेरील्यून तक पहुंचाना है। बता दें कि पेरील्यून का मतलब चांद की सबसे करीबी कक्षा से है। इसकी शुरुआत 6 अगस्त की रात 11 बजे से होनी है। इसरो का मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क चंद्रयान के हर मूवमेंट पर नजर बनाये हुए है। यहीं से उसे कमांड भेजकर स्पीड को कंट्रोल किया जायेगा। कई जटिल प्रक्रियाओं के बाद 23 अगस्त 2023 को ये चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव इलाके में सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।चंद्रयान-3 में किये गये हैं कई बदलावइसरो के सूत्रों के हवाले से बताया है कि चंद्रयान 3 को चंद्रमा के करीब लाने के लिए अभी और चार मैनूवर, यानी प्रक्रिया करनी होगी, जिसके तहत चंद्रयान-3 को 6 अगस्त को पेरील्यून में इस्टैब्लिश किया जायेगा। उसके बाद 17 अगस्त तक तीन और प्रक्रिया होंगी जिसके बाद लैंडिंग मॉड्यूल, जिसमें लैंडर और रोवर शामिल हैं, प्रपल्शन मॉड्यूल से अलग हो जायेगा। इसके बाद चंद्रमा पर अंतिम लैंडिंग से पहले लैंडर पर डी-ऑर्बिटिंग प्रक्रिया होगी।
देश में चलेगी खास ट्रेन, इस डबल डेकर ट्रेन में 20 कोच होंगे। इस डबल डेकर ट्रेन में 20 कोच होंगे एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में आपको जल्द ही ऐसी ट्रेन पटरियों पर दौड़ती नजर आयेगी, जिसके ऊपरी डेक पर यात्री बैठे होंगे और नीचे के डिब्बे में सामान भरा होगा। यानी एक ही ट्रेन में दो तरह का काम- पैसेंजर और सामान की ढुलाई साथ-साथ। इस डबल डेकर ट्रेन का निर्माण रेल कोच फैक्टरी कपूरथला में हो रहा है।बैली फ्रेट कॉन्सेप्ट के तहत चलाई जाने वाली इन ट्रेनों के कोच का ट्रायल इसी महीने के आखिर तक होने की उम्मीद है। शुरू में दो डबल डेकर ट्रेन बनाने की योजना है। ट्रेन के ऊपरी कोच में 46 यात्रियों के लिए जगह होगी तो नीचे के डिब्बे में 6 टन तक माल आ सकेगा। इन टू इन वन डबल डेकर ट्रेनों को चलाने का सुझाव कोरोना महामारी के दौरान आया था जब यात्री आवागमन बिल्कुल ठप हो गया था। रेल कोच फैक्टरी कपूरथला के एक अधिकारी ने बताया कि रेलवे बोर्ड को तीन डिजाइन सुझाये गए थे। इनमें से एक को पास किया गया है। एक कोच के निर्माण पर 2.70 करोड़ से 3 करोड़ के बीच खर्च आयेगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, आरसीएफ कपूरथला के जनरल मैनेजर आशीष अग्रवाल का कहना है कि रेल कोच फैक्टरी में पहली कार्गो लाइनर ट्रेन बनाई जा रही है। इस ट्रेन के कोच के इसी महीने रोल आउट होने की पूरी संभावना है। अग्रवाल का कहना है कि इस ट्रेन का डिजाइन काफी अनूठा है और यह पूरी पूर्ण रूप से वातानूकुलित होगी। अग्रवाल का कहना है कि इस ट्रेन के कोच का प्रोटोटाइप जल्द बन जायेगा। फिर इसे रेलवे मंत्रालय के शोध और विकास संगठन, रिसर्च डिजाइन एंड स्टैडर्ड्स आगेर्नाइजेशन के पास ट्रायल के लिए भेजा जायेगा। ट्रायल के सफल होने पर आरसीएफ और कोचेच का निर्माण करेगा। एक ट्रेन में होंगे 20 कोच सूत्रों का कहना है कि रेलवे की योजना शुरूआत में दो टू इन वन डबल डेकर ट्रेनें चलाने की है। हर एक ट्रेन में 20 कोच होंगे। इन ट्रेनों को कार्गो लाइनर कॉन्सेप्ट पर रोल आउट किया जाएगा और ये निर्धारित रूट रेगुलर चलेंगी। यह ट्रेन अलग-अलग तरह के सामान ढो सकती है। दो स्टेशनों के बीच जिन सामानों की ढुलाई का आॅर्डर मिलेगा, वे सभी सामान यह डबल डेकर ट्रेन लेकर चलेगी। साथ में यात्री भी सफर करेंगे।
सौर मंडल के बाहर कर रहा काम, वैज्ञानिक भी हैरानएबीएन नॉलेज डेस्क। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के सुदूर यान वॉयेजर 2 ने धरती पर संकेत भेजे हैं। गौरतलब है कि नासा का वॉयेजर से संकेत कट गया था और अब नासा के वैज्ञानिकों की कोशिशों से फिर से यान से संपर्क स्थापित किया गया तो वैज्ञानिकों को वॉयेजर 2 ने फिर से संकेत पृथ्वी पर भेजे हैं।वॉयेजर ने धरती पर फिर भेजे संकेतबता दें कि नासा ने साल 1977 में अन्य ग्रहों का पता लगाने और हमारे ब्रह्मांड के बाहर मानवता के प्रतीक के रूप में वॉयेजर 2 यान को अंतरिक्ष में लॉन्च किया था। अब यह यान पृथ्वी से 12.3 बिलियन मील दूर है और हमारे सौर मंडल से भी परे है। नासा की जेट प्रोपेल्शन लेबोरेट्री ने बताया कि वॉयेजर 2 को भेजे गये नियोजित आदेशों की एक श्रृंखला के चलते इसका एंटीना अनजाने में पृथ्वी से दो डिग्री दूर चला गया। इसके कारण वॉयेजर से नासा का संपर्क टूट गया।मंगलवार को नासा के विशेषज्ञों की टीम ने वायेजर 2 से संपर्क साधने के अंतिम प्रयास के तहत डीप स्पेस नेटवर्क की मदद ली और चमत्कारिक रूप से वॉयेजर 2 से फिर से संपर्क स्थापित हो गया और उसने धरती पर संकेत भेजे। इससे साफ हो गया कि वॉयेजर 2 अभी भी काम कर रहा है।वॉयेजर 2 ने कई ग्रहों को खोजावॉयेजर 2 ने सौर मंडल छोड़ने से पहले बृहस्पति और शनि गृह की खोज की और यूरेनस और नेपच्यून ग्रहों जाने वाला पहला स्पेसक्राफ्ट बना। नासा का वॉयेजर 2 यान अंतरतारकीय माध्यम (इंटरस्टेलर मीडियम) में प्रवेश कर चुका है और धरती से करीब 15 बिलियन मील दूर है। वॉयेजर 2 यान में 12 इंच की सोने की परत चढ़ी तांबे की प्लेट लगी हैं। इनका उद्देश्य आलौकिक लोगों को हमारी दुनिया की कहानी सुनाना है। साथ ही इस यान में हमारे सौर मंडल का नक्शा, रेडियोएक्टिव घड़ी के रूप में एक यूरेनियम का टुकड़ा है, जो यह बताता है कि यान किस तारीख में लॉन्च हुआ। साथ ही यान में प्रतीकात्मक निर्देश हैं, जो यह बताते हैं कि रिकॉर्ड को कैसे चलाना है।मशहूर अंतरिक्ष विज्ञानी कार्ल सेगन की अध्यक्षता में एक समिति ने यह तय किया था कि यान के साथ क्या-क्या भेजा जायेगा। वॉयेजर 2 का पावर बैंक कुछ समय बात खत्म हो जायेगा, जिसकी वजह से वॉयेजर 2 करीब साल 2025 तक संचालित होगा लेकिन उसके बाद भी यह यान आकाशगंगा में घूमता रहेगा।
इंसान के शरीर में पैदा हुआ था टोको, अब लाखों रुपये खर्च और सर्जरी के बाद बन गया कुत्तारितिका कमठानएबीएन नॉलेज डेस्क। जापान में एक आदमी ने बेहद अलग काम किया है। इस शख्स ने लाखों रुपये में सिर्फ अपना शौक पूरा करने के लिए ऐसा काम किया है जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। इसने ऐसा काम किया है कि इसका पूरा स्वरूप ही बदल गया है। ये दुनिया सिर्फ सात आजूबों से ही नहीं बल्कि कई अजीब लोगों से भी भरी पड़ी है जिनके अनोखे शौक उन्हें आम लोगों से बिलकुल अलग बनाते है। कई लोग ऐसे होते हैं जो नया और अनोखा करने के चक्कर में हर काम करने को तैयार हो जाती है। कई लोग बेहद ही अलग-अलग कदम उठाते हैं जिससे वो चर्चा के विषय बन जाते हैं। कोई पूरे शरीर पर टैटू बनवाता है तो कोई नाखूनों को बढ़ाकर उनके जरिए चर्चा में आता है। मगर जापान में एक व्यक्ति ऐसा है जिसने वो काम किया है कि उसके इंसान होने का अस्तित्व ही मिट गया है। जापान में एक शख्स ने खुद को कुत्ते में बदल लिया है। इस व्यक्ति का नाम टोको है, जिसने 22 हजार डॉलर सिर्फ एक कुत्ता बनने के लिए खर्च कर दिये हैं। ये राशि लगभग 18 लाख रुपये होती है। इस व्यक्ति द्वारा 18 लाख रुपये कुत्ता बनने के लिए खर्च करने पर काफी हैरानी भी जतायी जा रही है। हर कोई इस व्यक्ति के इस कदम की चर्चा कर रहा है। जानकारी के मुताबिक इस व्यक्ति को इंसान से कुत्ता बनने में जेपपेट नामक कंपनी ने मदद की है। इस पूरी प्रक्रिया में 40 दिनों का समय लगा है। इस व्यक्ति ने कोल्ली ब्रीड के कुत्ते के तौर पर नया रूप धारण किया है। ये व्यक्ति टोको बिलकुल असली कुत्ते की तरह ही दिखता है और उसकी तरह ही चलता भी है।कुत्ता बनना था सपनाजापान के इस व्यक्ति ने बताया कि इंसान की जगह कुत्ता बनना उसका असल में सपना था। वर्षों से वो इसके लिए इंतजार कर रहा था। इस संबंध में व्यक्ति ने अपने यूट्यूब चैनल पर भी वीडियो अपलोड किया है जिसमें उसने बताया कि आई वांट टू बी एन एनिमल, जिसे 1 मिलियन से अधिक लोग देख चुके हैं। वीडियो में ये व्यक्ति गले में पट्टा डालकर सैर के लिए निकला है। इंसान से कुत्ता बना ये व्यक्ति अन्य कुत्तों की तरह पार्क में की चीजें सूंघ रहा है और फर्श पर लोटता हुआ भी दिख रहा है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार को चंद्रयान-3 अंतरिक्षयान को पृथ्वी की कक्षा से निकालकर सफलतापूर्वक चांद की कक्षा की तरफ रवाना किया। इसरो ने बयान में कहा कि चंद्रयान-3 ने पृथ्वी की कक्षा का चक्कर पूरा कर लिया है और अब यह चांद की तरफ बढ़ रहा है।पांच अगस्त का दिन अहमइसरो ने बताया कि ISTRAC (ISRO Telemetry, Tracking and Command Network) सफलतापूर्वक पेरिजी फायरिंग की गयी। जिसके बाद अंतरिक्षयान ने चांद की अपनी यात्रा शुरू कर दी है। अगल कदम चांद है। पांच अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 अंतरिक्षयान चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा।इसके बाद 16 अगस्त तक अंतरिक्षयान चांद की कक्षा में चक्कर लगायेगा। 17 अगस्त को चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैंडर अलग होगा। 23 अगस्त को शाम 5.47 बजे चंद्रयान-3 को चांद की सतह पर लैंडिंग करनी है।चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा चंद्रयान-3इसरो ने 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से दोपहर दो बजकर 35 मिनट पर अपनी महत्वकांक्षी योजना चंद्रयान-3 अंतरिक्षयान को रवाना किया था। चंद्रयान-3 में लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल हैं। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरेंगे और 14 दिन तक वहां प्रयोग करेंगे। इस मिशन के जरिए इसरो पता लगायेगा कि चांद की सतह पर भूकंप कैसे आते हैं। साथ ही चंद्रमा की मिट्टी का अध्ययन भी करेगा।
खराब मौसम में भी काम करने में सक्षमएबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार सुबह सिंगापुर के डीएस-सार उपग्रह सहित सात उपग्रहों को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसरो का रॉकेट पीएसएलवी सी56 श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह साढ़े छह बजे इन उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष की ओर रवाना हुआ। बाद में इसरो ने घोषणा की है कि मिशन सफल रहा है और सिंगापुर के ये सात उपग्रह सफलतापूर्वक निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गए हैं। इसरो ने कहा कि उड़ान भरने के लगभग 23 मिनट बाद प्रमुख उपग्रह अलग हो गया और उसके बाद छह अन्य सह-यात्री उपग्रह अलग हुए, जिन्हें क्रमानुसार निर्धारित कक्षाओं में स्थापित किया गया है। उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण पर इसरो ने ट्विटर पर लिखा, पीएसएलवी-सी56/डीएस-एसएआर मिशन: मिशन पूरी तरह सफल रहा। ढरछश्-उ56 रॉकेट ने सभी सात उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में सटीक रूप से प्रक्षेपित किया। अनुबंध के लिए एनएसआईएल इंडिया और सिंगापुर को धन्यवाद।उपग्रहों के बारे में जानें...डीएस-सार : सिंगापुर का यह उपग्रह सिंथेटिक अपर्चर रडार (सार) उपकरण से युक्त है जिसे इस्राइल की अंतरिक्ष तकनीक क्षेत्र की कंपनियों ने बनाया है। यह उपग्रह हर मौसम व रात में भी काम करते हुए धरती की 1 मीटर सतह तक का डाटा उपलब्ध करवायेगा।वेलॉक्स-एएम : 23 किलो का यह माइक्रो उपग्रह तकनीक प्रदर्शन के लिए भेजा रहा है। आर्केड एटमॉस्फियर कपलिंग व डायनेमिक एक्सप्लोरर : यह एक प्रायोगिक उपग्रह है।स्कूब-2 : यह 3यू नैनो सैटेलाइट एक तकनीक प्रदर्शक उपकरण से युक्त है।ग्लासिया-2 : यह भी 3यू नैनो सैटेलाइट है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में परिक्रमा करेगा।ओआरबी-12 स्ट्राइडर : यह उपग्रह अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बना है।
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