Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 30
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

ज्ञान विज्ञान

View All
अब हाइड्रोजन ईंधन से दौड़ेंगी गाड़ियां
Published / 2023-07-30 00:12:47
अब हाइड्रोजन ईंधन से दौड़ेंगी गाड़ियां

उद्योग की स्थापना के लिए सीएम हेमंत सोरेन ने दी मंजूरीटीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जमशेदपुर में देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से जुड़े उद्योग की स्थापना के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री के इस पहल के बाद अब देश में पेट्रोल, डीजल और बैटरी साथ जल्द हाइड्रोजन ईंधन से भी वाहन चलेंगे। इसके लिए सीएम ने मंजूरी दे दी है।एम ओ यू के उपरांत जमशेदपुर में देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से जुड़े उद्योग के स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा। इस कार्य में हाइड्रोजन इंजन बनने की नवीनतम तकनीक का उपयोग किया जायेगा, जिसका लाभ आने वाले समय में पूरे देश को होगा।झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति 2021 के वर्गीकृत सॉफ्टवेयर मेगा प्रोजेक्ट के अनुसार उपर्युक्त परियोजना निर्माण से संबंध रखती है। ईकाई से प्राप्त निवेश तथा प्रत्यक्ष नियोजन के आधार पर ईकाई का वर्गीकरण मेगा श्रेणी के अंतर्गत किया गया है। इस ईकाई की प्रस्तावित क्षमता 4000+ हाइड्रोजन आईसी इंजन/ फ्यूल अग्नोस्टिक इंजिन एंड 10,000+बैटरी सिस्टम है, इसके लिए प्रस्तावित निवेश 354.28 करोड़ रुपए है। एक अनुमान के अनुसार इकाई 310 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष लोगों का नियोजन सुनिश्चित हो सकेगा।हाइड्रोजन ऐसा ईंधन है, जिसकी क्षमता अन्य ईंधनों के अपेक्षा अधिक होती है। इसका एनर्जी लेबल अधिक होता है। यह सस्ता और हल्का होता है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल के बीच इसे एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है। हाइड्रोजन ईंधन से प्रदूषण को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।भारतीय बाजार और विश्व स्तर पर हाइड्रोजन इंजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए 4000+ हाइड्रोजन आईसी इंजन/ईंधन एग्नोस्टिक इंजन और 10,000+ बैटरी सिस्टम की उत्पादन क्षमता के निर्माण आवश्यक जरूरतों की आपूर्ति और नई सहायक इकाइयों की स्थापना के लिए स्थानीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा।

कल सुबह 06.30 बजे एक और इतिहास रचेगा इसरो
Published / 2023-07-29 11:10:11
कल सुबह 06.30 बजे एक और इतिहास रचेगा इसरो

पीएसएलवी-सी56/डीएस-एसएआर मिशन के लिए उल्टी गिनती शुरूएबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन से रविवार को पीएसएलवी-सी56 से छह सह-यात्रियों के साथ सिंगापुर के डीएस-एसएआर विशेष वाणिज्यिक उपग्रह को प्रक्षेपित किये जाने की शनिवार से उल्टी गिनती शुरु हुई।44.4 मीटर लंबा चार चरण वाला वाहन पीएसएलवी-सी56, 228 टन भार के साथ रविवार सुबह 06.30 बजे शार रेंज से प्रथम लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा। इसरो ने कहा कि उल्टी गिनती शनिवार सुबह पांच बजे शुरू हो गयी।इसरो ने ट्वीट किया कि 30 जुलाई, 2023 को भारतीय समयानुसार सुबह 6:30 बजे लॉन्च की उलटी गिनती शुरू हो गयी है। उलटी गिनती के दौरान, चार चरणों वाले वाहन में प्रणोदक भरने का कार्य किया जायेगा।

नासा की भविष्यवाणी से बेचैनी में हैं वैज्ञानिक
Published / 2023-07-28 19:00:49
नासा की भविष्यवाणी से बेचैनी में हैं वैज्ञानिक

नासा ने बताया पृथ्‍वी पर गिरने वाला है सैटेलाइट, कब, कहां खत्‍म होगा, जानें पूरी जानकारीएबीएन नॉलेज डेस्क। धरती पर गिरने वाला है एक और सैटेलाइट! यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का एओलस उपग्रह इस सप्ताह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। अंतरिक्ष एजेंसी सैटेलाइट को नियंत्रित तरीके से नष्ट करने की पूरी कोशिश कर रही हैईएसए ने इसे अंतरिक्ष उड़ान के लिए मील का पत्थर बताया है। ऐसा कहा जाता है कि इससे पहले किसी भी उपग्रह को सहायक तरीके से डीऑर्बिट नहीं किया गया है। ऐसे तरीके आमतौर पर रॉकेट चरणों के लिए अपनाये जाते हैं, ताकि वे समुद्र में सुरक्षित रूप से उतर सकें।रिपोर्ट के मुताबिक, माना जा रहा है कि कल यानी 28 जुलाई को एयोलस उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करेगा और खत्म हो जायेगा। 1360 किलोग्राम वजनी इस सैटेलाइट को अगस्त 2018 में लॉन्च किया गया था। इसका मकसद धरती पर चलने वाली हवाओं का अध्ययन करना था। इस उपग्रह में केवल डॉपलर विंड लिडार लगा है, जिसकी मदद से वैज्ञानिकों को मौसम का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिली है। अपने जीवनकाल के दौरान, एओलस उपग्रह ने पृथ्वी से 320 किमी ऊपर से पृथ्वी की ओर आने वाली हवाओं का अवलोकन किया। ये मिशन 3 साल के लिए था। फिलहाल इस सैटेलाइट का ईंधन काफी कम हो गया है। यही वजह है कि अंतरिक्ष एजेंसी इसे नीचे ला रही है।आमतौर पर जब सैटेलाइट अपना मिशन पूरा कर लेते हैं तो वे अनियंत्रित होकर धरती पर गिर जाते हैं। ज्यादातर मामलों में इनकी दुर्घटनाएं समुद्री इलाकों में होती हैं। एयोलस उपग्रह के लिए भी कुछ ऐसा ही सोचा गया था, लेकिन अंतिम समय में मिशन टीम ने इसे नियंत्रित तरीके से समाप्त करने का निर्णय लिया। ईएसए का यह कदम दूसरे देशों खासकर चीन के लिए बड़ा संदेश है कि उसे ऐन वक्त पर अपने सैटेलाइट नहीं छोड़ने चाहिए। इन्हें नियंत्रित तरीके से ख़त्म करना चाहिए। एयोलस उपग्रह धीरे-धीरे नीचे आ रहा है। इसे 120 किमी तक नीचे लाया जायेगा, जिसके बाद यह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। ईएसए टीम को उम्मीद है कि उपग्रह अटलांटिक महासागर में प्रवेश करेगा। हालांकि सटीक स्थान अभी तक ज्ञात नहीं है।

चन्द्रयान-3 को और ऊंचाई पर पहुंचने की तैयारी में जुट इसरो
Published / 2023-07-25 18:03:12
चन्द्रयान-3 को और ऊंचाई पर पहुंचने की तैयारी में जुट इसरो

चंद्रयान-3 को और ऊंची परिक्रमा-कक्षा में पहुंचाने की कार्रवाई की इसरो नेएबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक अनुसंधान संगठन (इसरो) के मंगलवार को बताया कि उसके वैज्ञानिकों ने दूरस्थ नियंत्रण प्रणाली से एक और प्रयोग कर चंद्रयान-3 को और अधिक ऊंची कक्षा में पहुंचा दिया है।इसरो ने एक वक्तव्य में कहा कि चंद्रयान-3 को और ऊंची परिक्रमा-कक्षा में पहुंचाने के प्रयास (पृथ्वी से निकटतम कक्षा से प्रणोतदक-मोटर दाग कर की जाने वाली कार्यवाही) को बेंगलुरु में इसरो उपग्रह दूरमापी , निगरानी एवं नियंत्रण नेटवर्क (आईएसटीआरएसी/इसरो) से सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया।बयान में कहा गया है कि इस प्रकिया के पूरा होने से अब यह अंतरिक्ष यान 127609 किमी गुणा 236 किमी की कक्षा प्राप्त कर सकता है। इसरो ने कहा है कि चन्द्रयान-3 की आगे की स्थिति की निगरानी के बाद उसकी नयी कक्षा के बारे में पुष्टि की जायेगी।इसरो की ओर से इस तरह का अगला प्रयास ( ट्रांसलूनर इंजेक्शन) चंद्रयान-3 को धरती की कक्षा से चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए आगामी पहली अगस्त को मध्यरात्रि 12 बजे से एक बजे के बीच किये जाने की योजना है। गौरतलब है कि तय योजना के अनुसार चंद्रयान-3 का प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई को किया गया था। इस पर स्थापित लैंडर (अवतरण-यंत्र) और उसमें स्थित रोवर (चंद्रमा की सतह पर चल कर खोज करने वाले यंत्र) को 23 अगस्त या उसके एकाध दिन बाद चंद्रमा पर उतारा जा सकता है।

इसरो ने दिया चंद्रयान-3 को लेकर नया अपडेट
Published / 2023-07-20 20:35:09
इसरो ने दिया चंद्रयान-3 को लेकर नया अपडेट

चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की चौथी कवायद पूरी, इसरो ने बताया अब आगे क्या होगा...एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की चौथी कवायद सफलतापूर्वक पूरी की। यह कार्य यहां इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) से किया गया। अंतरिक्ष एजेंसी ने यहां कहा कि इस तरह की अगली कवायद 25 जुलाई को अपराह्न दो और तीन बजे के बीच किये जाने की योजना है। इसने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय चंद्रमा दिवस के अवसर पर चंद्रयान-3 को चंद्रमा के और करीब पहुंचा दिया है। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था। इसरो प्रमुख सोमनाथ एस ने इससे पहले कहा था, ...अंतरिक्ष यान चंद्रमा के सफर पर है। अगले कुछ दिनों में यह (लैंडर को चंद्रमा की सतह पर उतारने का कार्य) कर दिखायेगा। उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जागरूकता प्रशिक्षण (स्टार्ट) कार्यक्रम 2023 के उद्घाटन भाषण में यह बात की। उन्होंने कहा- मैं आश्वस्त हूं कि जहां तक विज्ञान की बात है, आप इस (चंद्रयान-3) मिशन के जरिये कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेंगे।

मंदिर में प्रवेश से पहले क्यों उतार देते हैं चप्पल, जानें वैज्ञानिक कारण...
Published / 2023-07-20 10:24:51
मंदिर में प्रवेश से पहले क्यों उतार देते हैं चप्पल, जानें वैज्ञानिक कारण...

एबीएन नॉलेज डेस्क। मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारणआरती के बाद सभी लोग दीये पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।मंदिर में घंटा लगाने का कारणजब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।भगवान की मूर्तिमंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।परिक्रमा करने के पीछे वैज्ञानिक कारणहर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 3, 5, 7 से  बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।

ऑस्ट्रेलियाई तट पर आखिर क्या देख भौंचक्के रह गये वैज्ञानिक
Published / 2023-07-19 14:19:18
ऑस्ट्रेलियाई तट पर आखिर क्या देख भौंचक्के रह गये वैज्ञानिक

ऑस्ट्रेलियाई समुद्र तट पर बहकर आया अंतरिक्ष मलबाइसरो करेगा अध्ययन, क्या पीएसएलवी का हिस्सा है?एबीएन नॉलेज डेस्क। जब भारतीय अपने चंद्रयान-3 के चांद पर उतरने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, तो ऐसे समय में ऑस्ट्रेलिया से आयी एक तस्वीर ने टेंशन पैदा कर दी। जी हां, ऑस्ट्रेलिया के समुद्री तट पर गुंबद के आकार की एक विशाल रहस्यमय वस्तु बहकर आयी है, हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह भारतीय अंतरिक्ष संस्थान (इसरो) के पीएसएलवी प्रक्षेपण यान का हिस्सा है या नहीं, जिसके इसरो ने कुछ समय पहले ही लॉन्च किया था।ऑस्ट्रेलिया की अंतरिक्ष एजेंसी ने एक ट्वीट में कहा, हम वर्तमान में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ज्यूरियन खाड़ी के पास एक समुद्र तट पर स्थित इस वस्तु के बारे में जांच कर रहे हैं। एजेंसी ने कहा, वस्तु किसी विदेशी अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान से संबंधित हो सकती है और हम वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ संपर्क कर रहे हैं जो अधिक जानकारी प्रदान करने में सक्षम हो सकते हैं।एजेंसी ट्वीट में कहा, अगर समुदाय को कोई और संदिग्ध मलबा दिखता है, तो उन्हें स्थानीय अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए और एसपीएसीई.एमओएनआईटीओआरआईएनजी@एसपीएसीई.जीओवी.एयू के माध्यम से ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी को सूचित करना चाहिए।ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि हम मलबा शमन सहित बाहरी अंतरिक्ष गतिविधियों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करना जारी रखेंगे।इस बीच अटकलें लगायी जा रही है कि ऑस्ट्रेलिया में मिला मलबा इसरो के पीएसएलवी प्रक्षेपण यान का हिस्सा हो सकता है। इसरो के सूत्र न तो इसकी पुष्टि की और न ही इससे इनकार किया कि ज्यूरियन खाड़ी के पास पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट पर बहकर आई विशाल वस्तु उसके पीएसएलवी रॉकेट का हिस्सा है या नहीं।सूत्रों ने कहा- इसे प्रत्यक्ष रूप से देखे बिना और इसकी जांच किये बिना कुछ भी नहीं कहा जा सकता (चाहे यह पीएसएलवी का मलबा है)। उन्होंने कहा कि हम इसे व्यक्तिगत रूप से देखे बिना और इसकी जांच किये बिना इसके बारे में किसी भी बात की पुष्टि या खंडन नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह तभी पता लगाया जा सकता है, जब ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी उस वस्तु का वीडियो भेजेगी। सूत्रों ने कहा- हमें यह देखना होगा कि क्या इस पर कोई निशान हैं। यदि आवश्यक हुआ, तो इसरो अधिकारी यह पुष्टि करने के लिए वहां जा सकते हैं कि यह भारतीय रॉकेट का है या नहीं।

चंद्रयान-3 : अब 23 अगस्त पर टिकी इसरो की निगाहें
Published / 2023-07-14 20:55:34
चंद्रयान-3 : अब 23 अगस्त पर टिकी इसरो की निगाहें

चंद्रमा की यात्रा के लिए निकला चंद्रयान-3इसरो प्रमुख सोमनाथ बोले- 23 अगस्त को होगी सॉफ्ट लैंडिंगएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने शुक्रवार को कहा कि भारत का तीसरा चंद्र अभियान चंद्रयान-3 चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास 23 अगस्त को करेगा। सॉफ्ट लैंडिंग को तकनीकी रूप से चुनौतिपूर्ण कार्य माना जाता है। सोमनाथ ने 600 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत वाले इस मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद संवाददाताओं से कहा कि चंद्रयान-3 को एक अगस्त से चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग 23 अगस्त को शाम पांच बजकर 47 मिनट पर किये जाने की योजना है।भारत ने शुक्रवार को यहां एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए अपने तीसरे चंद्र मिशन-चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया। सोमनाथ ने कहा कि शुक्रवार को प्रक्षेपण के बाद राकेट दीर्घ वृताकार चंद्र कक्षा में आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा- हमें चंद्रयान-3 को एक अगस्त से चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करने की उम्मीद है और इसके दो-तीन सप्ताह के बाद प्रणोदन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग होगा जो 17 अगस्त को होगा। सोमनाथ ने कहा कि अगर सभी चीजें निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप रहती हैं तो इसका अंतिम चरण 23 अगस्त को शाम पांच बजकर 47 मिनट पर किये जाने की योजना है। वर्ष 2019 में चंद्रयान-2 के बाद वर्तमान मिशन में हुई देरी के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह अध्ययन करने में एक वर्ष लग गया कि पिछले मिशन में क्या गलती हुई। उन्होंने कहा कि दूसरा हमने विचार किया कि इसे बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है और क्या-क्या गलत हो सकता है। सोमनाथ ने कहा कि इस बात पर भी विचार किया गया कि क्या कोई छिपी समस्या है और हमने इस आधार पर समीक्षा की और तीसरे वर्ष परीक्षण किया तथा अंतिम वर्ष एलवीएम3-एम4 रॉकेट को जोड़ने का रहा। उन्होंने कहा कि आज जो हुआ है, उसके लिए हजारों लोगों की बड़ी टीम थी।यह पूछे जाने पर कि वर्तमान मिशन के वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए दक्षिण ध्रुव को क्यों चुना गया। उन्होंने कहा- हमारा लक्ष्य चंद्रमा के सतह पर सभी भू भौतिकी एव रासायनिक विशेषताओं का पता लगाना है। दूसरा यह कि दक्षिण ध्रुव का अध्ययन अभी तक नहीं किया गया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों ने एलवीएम3-एम4 रॉकेट में कई बदलाव किये जिसमें इंजन की संख्या को पूर्ववर्ती पांच से घटाकर चार करना शामिल है। उन्होंने कहा- यह वाहन के वजन को कम करने के लिए किया गया। वहीं, चंद्रयान मिशन की लागत के बारे में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा- यह करीब 600 करोड़ रूपये है। केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का उल्लेख करते हुए सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले चार-पांच वर्षों में अंतरिक्ष से जुड़ी व्यवस्था तैयार करने में व्यक्तिगत तौर पर रूचि दिखायी है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से जुड़ी व्यवस्था को तैयार करने में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के साथ बड़ी संख्या में स्टार्टअप सहयोग कर रहे हैं। भारत को गौरवान्वित करने के लिए इसरो टीम की सराहना करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने श्रीहरिकोटा के द्वार खोलकर तथा भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को सक्षम करके इसे संभव बनाया है।

सफलतापूर्वक कक्ष में पहुंचा चंद्रयान-3
Published / 2023-07-14 16:29:43
सफलतापूर्वक कक्ष में पहुंचा चंद्रयान-3

लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल से लैसएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 को लॉन्च कर दिया गया है। चंद्रयान-3 ने दोपहर 2:35 बजे चंद्रमा की ओर उड़ान भरा। इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से छोड़ा गया है। 615 करोड़ की लागत से तैयार हुआ यह मिशन करीब 50 दिन की यात्रा के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंड करेगा। चंद्रयान-3 को भेजने के लिए एलवीएम-3 लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया है। अगर दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग होती है, तो भारत दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जायेगा। वहीं, पीएम मोदी ने ट्वीट कर शुभकामनाएं दीं और कहा कि आज का दिन सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.