टीम एबीएन, रांची। राजधानी रांची के पंडरा थाना क्षेत्र के पिस्का मोड़ के पास तेल मिल गली में शनिवार की रात गोलीबारी की घटना हुई। खाने-पीने के दौरान आपसी वर्चस्व को लेकर दो गुटों के बीच झड़प के बाद हुई फायरिंग में दो युवकों को गोली लगी है। बताया जा रहा है कि एक गुट संदीप थापा का है, जबकि दूसरा गुट सुरेंद्र सिंह का बताया जा रहा है। काफी समय से दोनों गुटों के बीच तनाव चल रहा था। गोलीबारी में जख्मी युवकों की पहचान मोगली व विकास के रूप में की गई है।घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाये हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही पंडरा थाना पुलिस और वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से खोखे बरामद किये हैं। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के आतिथ्य में अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की एक दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक रांची के हरमू रोड स्थित मारवाड़ी भवन के बहुउद्देशीय सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवन कुमार गोयनका ने की। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आये प्रांतीय अध्यक्षों, पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। बैठक का शुभारंभ राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका, राष्ट्रीय महामंत्री केदारनाथ गुप्ता, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया, झारखंड प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल एवं प्रांतीय महामंत्री विनोद जैन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। प्रारंभिक उद्बोधन में झारखंड प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि लगभग 36 वर्षों के अंतराल के बाद झारखंड में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन होना प्रदेश के मारवाड़ी समाज के लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। अपने अध्यक्षीय संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने सम्मेलन की भावी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय स्थायी समिति के गठन हेतु अनुमोदन, संगठन के विस्तार, विभिन्न प्रांतों की सक्रिय भूमिका तथा समाज को संगठित और सशक्त बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता, सेवा, शिक्षा और विकास ही मारवाड़ी सम्मेलन के मूल उद्देश्य हैं, जिन्हें साकार करने के लिए सभी प्रांतों को मिलकर कार्य करना होगा।राष्ट्रीय महामंत्री केदारनाथ गुप्ता ने अपने संबोधन में विगत कार्यकाल के दौरान किये गये कार्यकलापों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, दिल्ली, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आये प्रांतीय अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभायी। बैठक के दौरान समाज से जुड़े राष्ट्रीय मुद्दों, संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण, सामाजिक समरसता, शिक्षा, सेवा कार्यों तथा विकास से संबंधित विषयों पर गंभीर एवं सार्थक विचार-विमर्श किया गया। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर भावी नीतियों के निर्धारण पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष, महामंत्री सहित सभी आगंतुक अतिथियों को पुष्पगुच्छ, शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। बैठक को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ सुभाष अग्रवाल, विनोद तोदी, राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री पवन कुमार बंसल, राष्ट्रीय संगठन मंत्री बसंत कुमार सुराना, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अनिल कुमार मलावत, झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार, प्रांतीय महामंत्री विनोद कुमार जैन, मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष पवन शर्मा सहित विभिन्न राज्यों एवं जिलों से आए प्रतिनिधियों ने संबोधित किया तथा संगठन को और अधिक मजबूत बनाने पर बल दिया।बैठक में राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर पर किये जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिये गये। धन्यवाद- ज्ञापन मारवाड़ी सम्मेलन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया ने प्रस्तुत किया। यह बैठक मारवाड़ी समाज को एकजुट कर संगठन को नयी दिशा देने की दृष्टि से अत्यंत सफल और प्रेरणादायी रही। अंत में राष्ट्रीय गान के साथ बैठक का समापन हुआ। बैठक में गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया, संजय हरलालका, ओम प्रकाश अग्रवाल, राजकुमार केडिया, अशोक नारसरिया, चंडी प्रसाद डालमिया, कमल कुमार केडिया, मनोज चौधरी, डॉ ओमप्रकाश प्रणव, कौशल राजगढ़िया, संजीव विजयवर्गीय, निर्मल काबरा, सज्जन पाड़िया, पवन पोद्दार, अनिल अग्रवाल, निर्मल बुधिया, संजय सर्राफ, प्रमोद सारस्वत, संतोष अग्रवाल, कमल नोपानी, कृष्णा अग्रवाल, मुकेश मित्तल, सुमेर सेठी, रमन बोडा, विजय खोवाल, अजय डीडवानिया, नरेश बंका, कमल शर्मा सहित विभिन्न राज्यों से आये 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने दी।
अच्छी पहल : सरस्वती चतुर्थी पर्व शिक्षा प्रेमियों और विद्यार्थियों से पुस्तक खरीद 38 साल पहले लोहरदगा में शुरू हुए इस अभियान को झारखंड के साथ बिहार में भी मिल रहा है बाल एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। सरस्वती चतुर्थी की परम्परा अपेक्षाकृत नयी है, मगर आज अत्यंत सामयिक और सार्थक है। ज्ञान और विद्या की विकास धारा सरस्वती की अविरल यात्रा है। उक्त बातें लोहरदगा बलदेव साहू कॉलेज से सेवानिवृत अंग्रेजी विभागाध्यक्ष रहे डॉ राम भगवान सिंह ने कहीं। वर्तमान में डॉ सिंह पटना के न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी में रहते हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से सर्वमंगलकारी गणेश की पूजा-अर्चना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रही है, इसे महामना बाल गंगाधर तिलक ने गणेश चतुर्थी के रुप में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व का स्वरुप प्रदान किया था। उसी तरह ज्ञान और संस्कार को संवर्धित करने की दिशा में सरस्वती की साधना को धार्मिक अनुष्ठान की तरह प्रतिष्ठित करने की अपेक्षा है। संभवत: ऐसी ही अंत:प्रेरणा से सन 1988 में मेरे मन में यह विचार आया कि जिस तरह दीपावली के पूर्व धनतेरस के अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है, क्या ही अच्छा हो कि हम वसंत पंचमी के एक दिन पूर्व सरस्वती चतुर्थी की नेक परंपरा का श्रीगणेश करें। इस दिन हर विद्या प्रेमी पुस्तक खरीदें। कोई भी पुस्तक, कहीं से भी अपनी अभिरुचि और आवश्यकता के अनुसार। इससे पुस्तक संस्कृति का विकास होगा। साथ में सरस्वती पूजन में एक नया व सार्थक आयाम जुड़ेगा। वसंत पंचमी के पूर्व सरस्वती चतुर्थी की अवधारण इसलिए अनुकूल है, क्योंकि वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा मनायी जाती है। स्कूल-कॉलेजों में, शहर-देहात में जगह जगह वीणापाणि ज्ञान देवी सरस्वती की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। उनकी पूजा की जाती है। इस तरह पुस्तक खरीदने की अनुशंसा तो स्वमेव स्पष्ट है; पुस्तकें तो स्वयं सरस्वती स्वरूपा हैं। पुस्तक प्रेम सरस्वती की पूजा है और वंदगी है। साथ ही, आज कई पुरानी परम्पराएं निर्जीव और बेमानी हो गई हैं, जिन्हें सार्थक और उपयोगी परंपराओं से स्थानापन्न करने की जरूरत है। ऐसे में वसंत पंचमी के एक दिन पूर्व सरस्वती चतुर्थी की नेक परम्परा हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रख सकती है। इसे प्रचारित और प्रसारित करने का आग्रह डॉ राम भगवान सिंह ने आम शिक्षा प्रेमियों और विद्यार्थियों से की है। फोटो संकेत : सरस्वती चतुर्थी के दिन पुस्तक खरीदने की परंपरा के जनक डॉ राम भगवान सिंह।
टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 17 जनवरी 2026 को आजसू छात्र संघ के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से मांग रखी गयी कि सत्र 2022-25 के बैक/अनुत्तीर्ण छात्रों के लिए पुन: स्पेशल परीक्षा आयोजित की जाये। उल्लेखनीय है कि सत्र 2022-25 के सेमेस्टर 1 से 6 तक में जिन छात्रों का किसी विषय में बैक लग गया था, उनके लिए विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में एक स्पेशल परीक्षा का आयोजन किया गया था। किंतु कुछ छात्र अपरिहार्य कारणवश उस परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सके तथा कुछ छात्र परीक्षा में अनुत्तीर्ण रह गये। ऐसे सभी छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह अत्यंत आवश्यक है कि उनके लिए पुन: एक स्पेशल परीक्षा आयोजित की जाये, ताकि वे अपनी शैक्षणिक बाधा को दूर कर आगे की पढ़ाई जारी रख सकें। यह भी ध्यान देने योग्य है कि इनके बाद के सत्र से नई शिक्षा नीति (एनईपी) लागू हो चुकी है, जिसके अंतर्गत पाठ्यक्रम पूर्व की सीबीसीएस प्रणाली से पूर्णत: भिन्न है तथा पाठ्यक्रम की अवधि भी चार वर्षों की कर दी गयी है। इस कारण पुराने सत्र के छात्रों का नये पाठ्यक्रम में समायोजन संभव नहीं हो पा रहा है। अत: विश्वविद्यालय प्रशासन से विनम्र अनुरोध किया गया कि उपर्युक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 2022-25 सत्र के सभी बैक/अनुत्तीर्ण छात्रों के लिए शीघ्र पुन: स्पेशल परीक्षा आयोजित करने की कृपा की जाए, ताकि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके। इसके लिए समस्त छात्रगण विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति सदैव आभारी रहेंगे। इस अवसर पर छात्र संघ के विश्वविद्यालय संयोजक रवि रोशन, रोशन नायक, शिवम सिंह, बिट्टू वर्मा, आशीष कुमार, मानस, नितेश शर्मा, राज, योगेश सहित अन्य छात्र प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
रांची में रक्षा संपदा उप-कार्यालय का उद्घाटन, राज्यपाल ने बताया दूरदर्शी निर्णय टीम एबीएन, रांची। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शनिवार को रांची में रक्षा संपदा उप-कार्यालय का उद्घाटन किया। मौके पर उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय का यह निर्णय राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय है। इससे झारखंड में सेना की जमीन से जुड़े काम अब ज्यादा जल्दी और आसानी से हो सकेंगे। राज्यपाल ने बताया कि पहले झारखंड के सभी जिलों और सैन्य इलाकों की जमीन का काम बिहार के दानापुर से देखा जाता था। अब रांची में उप-कार्यालय खुलने से सेना की जमीन से जुड़े मामलों का समाधान यहीं स्थानीय स्तर पर हो सकेगा। इससे राज्य प्रशासन और सेना के बीच बेहतर तालमेल भी बनेगा।उन्होंने भारतीय सेना के जवानों की तारीफ करते हुए कहा कि सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ आपदा के समय भी लोगों की मदद करते हैं। उनका जीवन नेशन फर्स्ट यानी देश सबसे पहले की भावना को दिखाता है। राज्यपाल ने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आतंक और देश पर हमला करने वालों को कड़ा जवाब देना भी जानता है। उन्होंने आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि यह नये भारत की पहचान है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की सुरक्षा और सैनिकों की भलाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है और आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र को मजबूत किया जा रहा है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, रांची। बुंडू टोल प्लाजा की घेराबंदी से यात्री बेहद परेशान रहे। इस दौरान बुंडू के एसडीएम, डीएसपी, सीओ और थाना प्रभारी लोगों को समझाते रहे। अंत में करीब 5 घंटे बाद 3 बजकर 20 मिनट के करीब प्रदर्शनकारी टोल प्लाजा से हट गये। अब एनएच पर गाड़ियों का आवाजाही शुरू हो गयी है। लेकिन पांच घंटे तक जाम की वजह से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। आम यात्री पानी और भोजन के लिए तरसते रहे। क्योंकि बुंडू नगर पंचायत की दुकानें बंद थीं। हालांकि इस दौरान सिर्फ एंबुलेंस और सेना की गाड़ी को जाने दिया जा रहा था।
झारखंड में कानून का शासन ध्वस्त हो गया, संजय सेठ बोले- हेमंत सरकार राज्य में शासन करने में असमर्थ टीम एबीएन, रांची। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने आरोप लगाया कि झारखंड में कानून का शासन ध्वस्त हो गया है और सरकार राज्य में शासन करने में असमर्थ है। सेठ ने जमशेदपुर स्थित उद्योगपति देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के रहस्यमय रूप से लापता होने के मामले में उनके परिवार से मुलाकात की और घटना को बहुत दुखद बताया। सरकार कानून-व्यवस्था बनाये रखने में विफल रही श्री सेठ ने संवाददाताओं से कहा कि मौजूदा हालात से संकेत मिलता है कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाये रखने में विफल रही है। राज्य में आपराधिक गतिविधि रोजमर्रा की बात हो गयी है। उन्होंने झारखंड सरकार से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदर्शों से सीख लेकर अपराधियों पर लगाम लगाने का आग्रह किया। सेठ ने दावा किया कि नीतीश कुमार और गृह मंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में सुशासन कायम रहा। रांची में हाल ही में दो बच्चों के अपहरण का जिक्र करते हुए, सेठ ने उन्हें सुरक्षित वापस लाने के पुलिस के प्रयासों की सराहना की। हालांकि, उन्होंने घोटालों में शामिल व्यक्तियों को कथित तौर पर संरक्षण देने और स्वतंत्र जांच एजेंसियों को कमजोर करने के लिए पुलिस की आलोचना की और रांची में प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी के घेराव का उदाहरण दिया।
ग्राम प्रधान की हत्या के विरोध में झारखंड बंद का मिला-जुला असर, आदिवासी संगठनों ने सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। जिले में इस महीने की शुरुआत में एक ग्राम प्रधान की हत्या के विरोध में बंद के आह्वान के बीच शनिवार को आदिवासी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कई जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। राजधानी रांची में बंद का खास प्रभाव नहीं दिखा इस दौरान आदिवासी बहुल जिलों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए जगह-जगह टायर जलाये। झारखंड बंद का व्यापक असर शनिवार सुबह खूंटी, सिमडेगा, चाईबासा और गुमला जिलों में देखने को मिला। इन क्षेत्रों में दुकानें पूरी तरह बंद रहीं और सड़कों से सार्वजनिक परिवहन नदारद रहा।इसके साथ ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में स्कूल भी बंद रहे। हालांकि, राज्य की राजधानी रांची में बंद का खास प्रभाव नहीं दिखा क्योंकि यहां बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सामान्य रूप से खुले रहे तथा लोग अपने कार्यस्थलों पर जाते हुए नजर आये। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य प्रशासन ने सभी जिलों में शांति बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है तथा राजधानी रांची में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किये गये हैं। गिरफ्तारी मात्र पुलिस का दिखावा झारखंड बंद को लेकर प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं आदिवासी नेता लक्ष्मी नारायण मुंडा ने कहा कि आज के बंद में 20 से अधिक आदिवासी संगठन भाग ले रहे हैं। हम सोमा मुंडा के लिए न्याय की मांग करते हैं। खूंटी थाना क्षेत्र के जियारप्पा गांव में 3.16 एकड़ जमीन के विवाद को लेकर सात जनवरी को आदेल सांगा पड़हा राजा (22 गांवों के पारंपरिक मुखिया) सोमा मुंडा की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। आदिवासी उलगुलान मंच (एयूएम) के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा की गयी गिरफ्तारियां दिखावा मात्र हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य शूटर और आरोपी अब भी फरार हैं। हम उनकी तत्काल गिरफ्तारी चाहते हैं। पुलिस ने इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। सोमा मुंडा ने 2024 के विधानसभा चुनाव में खूंटी सीट से अबुआ झारखंड पार्टी (एजेपी) के टिकट पर चुनाव लड़े थे।
मारवाड़ महोत्सव में रामायण पर आधारित नृत्य-नाटिका ने मोहा मनटीम एबीएन, रांची। रांची में आयोजित मारवाड़ महोत्सव के अंतर्गत सांस्कृतिक संध्या में कोलकाता से पधारी कलाकारों की टीम द्वारा रामायण पर आधारित जीवंत राम कथा की अत्यंत भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। नृत्य-नाटिका के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, मर्यादा, त्याग और धर्म की महिमा को सजीव रूप में मंच पर उतारा गया।आकर्षक वेशभूषा, सशक्त भाव-भंगिमाएं, मनोहारी संगीत और प्रभावशाली नृत्य संयोजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के पात्रों का जीवंत अभिनय दर्शकों के हृदय को स्पर्श कर गया। विशेष रूप से राम-सीता वनगमन, हनुमान मिलन और विजय प्रसंग की प्रस्तुति ने भावनात्मक वातावरण बना दिया। संपूर्ण प्रस्तुति के दौरान दर्शक भाव-विभोर होकर कथा से जुड़ते चले गए और अंत में कलाकारों को जोरदार तालियों से सम्मानित किया गया। यह प्रस्तुति महोत्सव की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान करने वाली रही। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, राज्यसभा सांसद महुआ मांझी, विधायक सरयू राय भी उपस्थित थे।
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