श्री जैन श्वेताम्बर ओसवाल संघ का दिवाली मिलन समारोह आज मनाया गयाटीम एबीएन, रांची। जैन श्वेताम्बर ओसवाल संघ का दिवाली मिलन समारोह आज धूमधाम से डोरंडा कन्या पाठशाला में सम्पन्न हुआ! आज के कार्यक्रम में संघ के अध्यक्ष एवं गणमान्य लोगों के द्वारा दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत की गयी एवं समाज के सभी लोगों का स्वागत किया गया।कार्यक्रम में महिलाओ एवं बच्चों के द्वारा नृत्य, गीत आदि प्रस्तुत किये गए, जिनमे मुख्य रूप से श्रुति, खुशबु, गरिमा, रिद्धि, प्रेक्षा, भूमी, आयशा, इलियाना, नायरा आदि थे!मंच का संचालन ज्योति दस्सानी ने किया, घेवर चंद नाहटा ने अपने विचार रखे, रेणु पिंचा ने नवकार महामंत्र पर गीत प्रस्तुत किया।संघ के अध्यक्ष सुभाष बोथरा, सचिव घेवर चंद नाहटा, कोषाध्यक्ष अशोक सुराणा, सुरेश बोथरा, विमल दस्सानी, बालवीर बोथरा, राजेश पिंचा, पूनम चंद भंसाली, प्रकाश चंद नाहटा, शिव चरण विजयवर्गीय, अमित बैंगानी, राजू रामपुरिया, संजय कोठारी, आदि मुख्य रूप से शामिल हुए। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।
शहीद लिलु हिरु पटेल बाउरी का 49वां शहादत दिवस धूमधाम से मनाया गयाएबीएन न्यूज नेटवर्क, बोकारो। पिण्ड्राजोरा थाना अंतर्गत ग्राम जयतारा में शहीद लिलु हिरु पटेल बाउरी का आज 49 वां शहीद दिवस मनाया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर अखिल भारतीय बाउरी समाज कल्याण समिति के केंद्रीय अध्यक्ष गौर चन्द बाउरी मुख्य रूप से शामिल हुए और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। गौर चन्द बाउरी ने कहा कि शहीदों के बताए हुए मार्ग पर चलकर ही समाज का उत्थान और विकास किया जा सकता है। शहीदों ने अन्याय और शोषण के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हुए। इनकी शहादत को हमेशा याद किया जाएगा। मौके पर श्रीमंत बाउरी, समीर बाउरी, मानिक बाउरी, गणपति बाउरी, विष्णु बाउरी, गोपाल बाउरी, प्रहलाद बाउरी, आनंद बाउरी, लालू बाउरी, कन्हाई बाउरी, शैलेंद्र यादव, सैयद विकी, जितू बाउरी समेत सभी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
ठाकुरकुल्ही में दिल्ली के लोटस टेंपल की तर्ज पर बनेगा भव्य सूर्य मंदिरएक वर्ष में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य, नारियल फोड़कर हुआ शुभारंभएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। धैया स्थित ठाकुरकुल्ही छठ पूजा तालाब परिसर में भव्य सूर्य मंदिर निर्माण की दिशा में रविवार को शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि समाजसेवी कुम्भनाथ सिंह एवं श्रीराम सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने नारियल फोड़कर मंदिर निर्माण कार्य की विधिवत शुरुआत की। इस अवसर पर सूर्य मंदिर निर्माण समिति की ओर से मुख्य अतिथि कुम्भनाथ सिंह, उदय प्रताप सिंह, विकास कंधवे, विनोद गुप्ता एवं कुमार कौशल को अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता इंद्र सिंह ने की, जबकि संचालन पप्पू सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन बबलू सिंह ने किया। मौके पर कुम्भनाथ सिंह ने कहा कि ठाकुरकुल्ही में बनने वाले भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण एक वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मंदिर पूरे कोयलांचल के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। मंदिर का स्वरूप दिल्ली के प्रसिद्ध लोटस टेंपल की तर्ज पर अत्यंत सुंदर और भव्य होगा। मंदिर के गर्भगृह में सात घोड़ों के रथ पर विराजमान भगवान सूर्य की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने सूर्य मंदिर निर्माण समिति को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया। वहीं, उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण में गुणवत्ता और भव्यता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए अनुभवी इंजीनियरों एवं आर्किटेक्ट की मदद ली जाएगी। ठाकुरकुल्ही छठ तालाब परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि मंदिर और तालाब परिसर की सुंदरता में चार चांद लग सकें। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग और क्षेत्र के लोगों के सामूहिक सहयोग से इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक परियोजना को साकार किया जाएगा।कार्यक्रम में इंद्र सिंह, फौदार सिंह, पप्पू सिंह, बबलू सिंह, विकास कंधवे, विनोद गुप्ता, कुमार कौशल, भोला पांडेय, मोहन पांडेय, आचार्य राजेंद्र सिंह, विकास सिंह, विकास राय, प्रहलाद रजक, रिपु पासवान, सत्येंद्र मिश्रा, नुनु सिंह, सुशील सिंह, प्रसून पांडेय, दिवाकर शर्मा, शशिकांत पांडेय, निर्मल महतो, मदन मोहन सिंह, संतलाल महथा, उत्तम मन्ना, संजय सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
डीवीसी चंद्रपुरा थर्मल प्रबंधन ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 151वीं जयंतीएबीएन न्यूज नेटवर्क, चंद्रपुरा (बोकारो)। डीवीसी चंद्रपुरा थर्मल प्रबंधन ने लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 151वीं जयंती मनाई तथा उनके कार्यों को याद किया।तेजस भवन के सम्मेलन कक्ष में मुख्य महाप्रबंधक एवं परियोजना प्रधान रामकुमार अनुभवी सहित डीवीसी के अधिकारियों, कर्मचारियों ने सरदार पटेल की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पर डीजीएम नीरज सिन्हा, प्रताप सिंह, राजीव कुमार, राजीव रंजन ओझा, राजीव रंजन, तरुणेश्वर प्रसाद, कंचन स्मिता टोप्पो, आरपी सिंह आदि थे।
जहां तक जमीन खोखली हुई है, जांच कर बालू भराई कराए बीसीसीएल; 72 घंटे में कार्रवाई नहीं तो चक्का जाम: विनोद गोस्वामी27 तारीख के सत्याग्रह और उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन पर नहीं हुई कोई पहल, ग्रामीणों में भारी उबालकलाली फाटक ROB निर्माण की DGMS व IIT-ISM जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे प्रशासन, वरना काम होगा ठपसेलेक्टर में भू-धंसान प्रबंधन की नाकामी, ग्रामीणों को उजाड़ने का नोटिस वापस ले बीसीसीएलपिलर कटने से कतरास बाजार, सिजुआ, छाताबाद समेत दर्जनों बस्तियों और डीसी रेल लाइन पर भारी खतराविरोध पर हवाई फायरिंग करने वाले कोयला चोरों पर CISF और पुलिस मेहरबान होने का आरोपएबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास (धनबाद)। कतरास कोयलांचल में जारी अवैध खनन, पिलर कटाई से बने खतरनाक भूमिगत खोखलेपन और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ गुहीबांध में ग्रामीणों की एक विशाल महापंचायत आयोजित की गई। कोयलांचल बचाओ समिति के व पूर्व पार्षद विनोद गोस्वामी ने बैठक को संबोधित किया। बैठक में ग्रामीणों ने जोरदार आक्रोश जताते हुए कहा कि विगत 27 तारीख को समिति द्वारा एक दिवसीय सत्याग्रह आंदोलन कर कतरास थाना के माध्यम से उपायुक्त (DC) को विस्तृत मांग-पत्र सौंपा गया था। इतने दिन बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन और बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस लगातार उपेक्षा से स्थानीय जनता में भारी रोष व्याप्त है। तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए विनोद गोस्वामी ने कहा कि अंधाधुंध पिलर कटाई के कारण जमीन के नीचे भारी शून्य/खोखलापन बन चुका है। बीसीसीएल और DGMS तत्काल आधुनिक वैज्ञानिक जांच (GPR व बोरहोल मैपिंग) कराकर स्थिति स्पष्ट करें और सार्वजनिक करें कि जमीन किस गहराई तक तथा कहाँ-कहाँ खोखली हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक इन खोखले हिस्सों में स्लरी पाइपलाइन के जरिए वैज्ञानिक तरीके से बालू भराई नहीं कराई जाएगी, तब तक ऊपर से केवल मुहाना ढकने की खानापूर्ति का कोई औचित्य नहीं है।कलाली फाटक पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने मांग की कि DGMS और IIT-ISM द्वारा की गई सुरक्षा जांच रिपोर्ट को अविलंब सार्वजनिक किया जाए। यदि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती है, तो ग्रामीण मौके पर पहुंचकर पुल निर्माण कार्य को पूरी तरह ठप कराएंगे और अनिश्चितकालीन धरना देंगे। वहीं, सेलेक्टर क्षेत्र में भू-धंसान को प्रबंधन की नाकामी बताते हुए उन्होंने ग्रामीणों को घर खाली करने के लिए दिए गए नोटिस को तुरंत निरस्त करने की मांग की।बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि कतरास बाजार, गोविंदपुर, कलाली फाटक, गुहीबांध, केशलपुर, पंचगढ़ी बाजार, रानी बाजार, लिटिल धौड़ा, छाताबाद, सिजुआ और अंगारपथरा जैसी घनी बस्तियों के साथ-साथ डीसी रेल लाइन के नीचे भी अवैध कोयला कटाई बेरोकटोक जारी है। परसों जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो कोयला तस्करों व अपराधियों ने दहशत फैलाने के लिए कई राउंड हवाई फायरिंग की। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की और राष्ट्रीय संपत्ति की दिनदहाड़े हो रही लूट पर सीआईएसएफ (CISF) भी मूकदर्शक बनी हुई है।श्री गोस्वामी और ग्रामीणों ने ऐलान किया कि कल बीसीसीएल एरिया 3 और एरिया 4 के महाप्रबंधक (GM) को पुनः मांग-पत्र सौंपा जाएगा। यदि अगले 72 घंटे के भीतर छाताबाद, केशलपुर और सेलेक्टर के मुहानों की डोजरिंग शुरू नहीं की गई, बालू भराई की ठोस पहल नहीं हुई, अवैध खनन पर पूर्ण रोक नहीं लगी और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर बीसीसीएल का पूर्ण चक्का जाम किया जाएगा।महापंचायत में मुख्य रूप से अनुज सिंह, शैलेंद्र सिंह, शौकत खान, मांगनी सिंह, पप्पू सिंह, निजाम अंसारी, शमशेर आलम, नवाब शेख, अमृत चौहान, रोहित शर्मा, रणजीत कुमार, लड्डू सिंह, महफूज अंसारी, सुमित कुमार, गुड्डू अंसारी, किशन शर्मा, असित सिंह, कन्हैया चौहान, महताब आलम, बैलून रवानी, किशन पंडित सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
सादगी, संघर्ष और समाजसेवा की प्रतिमूर्ति थे प्रो. विष्णुचरण महतो40वीं पुण्यतिथि पर विशेषमृत्युंजय प्रसादटीम एबीएन, रांची। प्रो. विष्णुचरण महतो केवल एक शिक्षाविद्, अधिवक्ता और राजनेता ही नहीं थे, बल्कि वे सादगी, संघर्ष, सामाजिक समर्पण और उच्च आदर्शों के प्रतीक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, सामाजिक उत्थान, गरीबों के अधिकारों और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित कर दिया था। झारखंड के सामाजिक एवं राजनीतिक इतिहास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।साधारण किसान परिवार में जन्म, असाधारण व्यक्तित्वप्रो. विष्णुचरण महतो का जन्म 23 फरवरी 1926 को रांची जिले के सिल्ली प्रखंड अंतर्गत कांटाडीह गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। आर्थिक परिस्थितियां सामान्य होने के बावजूद बचपन से ही वे अत्यंत मेधावी और प्रतिभाशाली विद्यार्थी थे। उन्होंने रांची जिला स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए पटना गये, जहां से आईए और बीए की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, लेकिन कानून के प्रति विशेष रुचि के कारण पटना में विधि की पढ़ाई पूरी की।विधि शिक्षा प्राप्त करने के बाद उनकी नियुक्ति पटना उच्च न्यायालय में हुई, लेकिन वकालत और समाजसेवा के प्रति लगाव उन्हें वापस रांची ले आया। रांची में रहकर उन्होंने वकालत के साथ-साथ छोटानागपुर विधि महाविद्यालय में अध्यापन का कार्य भी किया। वे कानून के गहरे जानकार थे और अपने ज्ञान का उपयोग हमेशा समाज के कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए करते थे।झारखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिकाझारखंड की अलग पहचान और अधिकारों के लिए चले आंदोलन में भी प्रो. महतो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। मरांग गोमके जयपाल सिंह के आह्वान पर वे झारखंड आंदोलन से जुड़े और पूरे समर्पण के साथ आंदोलन में भाग लिया। वे केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि झारखंड के सामाजिक, सांस्कृतिक और भाषाई अस्तित्व की रक्षा के लिए भी लगातार प्रयासरत रहे।उन्होंने सिल्ली विधानसभा क्षेत्र से झारखंड पार्टी के टिकट पर वर्ष 1952 और 1957 में विधानसभा चुनाव लड़ा। दोनों ही चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती दी। हालांकि उन्हें मामूली मतों से पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन चुनावी हार कभी उनके उत्साह और संघर्षशील व्यक्तित्व को कमजोर नहीं कर सकी। उनका मानना था कि राजनीति सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और क्षेत्र की सेवा का सशक्त साधन होनी चाहिए।शिक्षा को मानते थे सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यमप्रो. महतो शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उनका स्पष्ट मानना था कि शिक्षा के बिना किसी भी समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है। वे विशेष रूप से गरीब परिवारों के बच्चों और लड़कियों की शिक्षा पर जोर देते थे।वे लोगों को प्रेरित करते हुए कहा करते थे कि सूखी रोटी खाकर और साधारण भोजन करके जीवन गुजारा जा सकता है, लेकिन अपने बच्चों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। उनका संदेश था कि परिवार की आर्थिक स्थिति चाहे जैसी हो, बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षित बनाना प्रत्येक अभिभावक की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।नारी शिक्षा के प्रति भी उनका दृष्टिकोण अत्यंत प्रगतिशील था। उनका मानना था कि शिक्षित महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी।सिल्ली के विकास में ऐतिहासिक योगदानसिल्ली प्रखंड प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किये। उन्होंने अपने गांव कांटाडीह तक श्रमदान से सड़क बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। गांव में बिजली पहुंचाने के लिए प्रयास किया तथा किसानों की सिंचाई समस्या के समाधान के लिए लिफ्ट इरिगेशन योजना के माध्यम से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने में योगदान दिया।क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी उन्होंने निरंतर प्रयास किया। तत्कालीन जिला बोर्ड के उपाध्यक्ष पॉल दयाल के सहयोग से सिल्ली क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को शिक्षक के रूप में नौकरी दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।उनकी उदारता और सामाजिक प्रतिबद्धता का एक उदाहरण मुरी स्थित भारत माता अस्पताल के निर्माण के लिए अपनी जमीन दान करना भी है। इससे स्पष्ट होता है कि उनके लिए समाजसेवा केवल भाषणों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे अपने संसाधनों को भी जनहित में लगाने से पीछे नहीं हटते थे।कुरमाली भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए आजीवन संघर्षप्रो. विष्णुचरण महतो का सबसे महत्वपूर्ण योगदान कुरमाली भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में भी रहा। वे कुरमाली भाषा को केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की पहचान और सांस्कृतिक विरासत मानते थे।उन्होंने जीवनभर कुरमाली भाषा के विकास के लिए काम किया। युवाओं को अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूक किया तथा कुरमाली साहित्य और लोक परंपराओं पर शोध करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से कई लोगों ने कुरमाली लोक-साहित्य एवं लोक-संस्कृति पर शोध कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।रांची विश्वविद्यालय में कुरमाली भाषा की पढ़ाई प्रारंभ कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे चाहते थे कि कुरमाली भाषा को शैक्षणिक और सामाजिक स्तर पर उचित सम्मान मिले तथा आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व कर सकें।कुरमी समाज को पुनः अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल कराने के लिए भी उन्होंने जीवनपर्यंत संघर्ष किया। इस विषय पर उनका प्रयास सामाजिक अधिकारों और पहचान की लड़ाई का हिस्सा था।प्रतिभाओं को पहचानने और आगे बढ़ाने वाले मार्गदर्शकप्रो. महतो की एक बड़ी विशेषता यह थी कि वे अपने क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं की सफलता को अपनी सफलता मानते थे। वे युवाओं को प्रोत्साहित करते, उनका मार्गदर्शन करते और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे।सिल्ली क्षेत्र के जबला गांव निवासी नंदलाल महतो जब बिहार लोक सेवा आयोग की 27वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उपसमाहर्ता पद के लिए अंतिम रूप से चयनित हुए, तब वे प्रो. महतो से मिलने पहुंचे। नंदलाल महतो उस समय यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में हेड कैशियर के पद पर कार्यरत थे और उनकी पदोन्नति भी होने वाली थी। लेकिन प्रो. महतो ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि समाज को योग्य और शिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता है। उनके प्रोत्साहन से नंदलाल महतो ने बैंक की नौकरी छोड़कर बिहार प्रशासनिक सेवा में योगदान दिया।इसी प्रकार सोनाहातू प्रखंड के पांडुडीह निवासी डॉ. हलधर महतो मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए रांची कॉलेज में नामांकन लेना चाहते थे। उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। यह जानकर प्रो. महतो ने उन्हें पत्र लिखकर रांची आने और उनसे मिलने को कहा। उन्होंने आश्वस्त किया कि आर्थिक कठिनाई उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर वे लोगों से चंदा एकत्र कर उनकी पढ़ाई का खर्च उठायेंगे।उनका मानना था कि किसी गरीब परिवार की प्रतिभा आर्थिक अभाव के कारण समाप्त नहीं होनी चाहिए। यही सोच उन्हें एक शिक्षक से बढ़कर समाज का सच्चा मार्गदर्शक बनाती थी।सादगीपूर्ण जीवन और प्रेरणादायी व्यक्तित्वप्रो. विष्णुचरण महतो का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था। वे पद, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से अधिक समाज के हित को महत्व देते थे। उनकी भाषा में सरलता, विचारों में स्पष्टता और व्यवहार में आत्मीयता थी। वे जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति के भेदभाव से ऊपर उठकर लोगों की सहायता करते थे।उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि जो भी व्यक्ति उनसे मिलता, उनके विचारों और व्यवहार से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था। वे शिक्षा, सामाजिक एकता, भाषाई अस्मिता और युवाओं के भविष्य को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे।एक दीपक जो दीपावली के दिन बुझ गयाऐसे महान शिक्षाविद्, समाजसेवी और दूरदर्शी व्यक्तित्व का निधन 1 नवंबर 1986 को दीपावली के दिन एचईसी प्लांट अस्पताल में हो गया। विडंबना देखिए कि जिस दिन पूरा देश दीपावली के अवसर पर दीप जलाकर खुशियां मना रहा था, उसी दिन झारखंड ने अपना एक अनमोल दीपक खो दिया।आज प्रो. विष्णुचरण महतो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संघर्ष, सामाजिक योगदान और शिक्षा के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।वास्तव में, किसी व्यक्ति की महानता उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि समाज के लिए किये गये कार्यों और लोगों के जीवन में छोड़ी गयी सकारात्मक छाप से आंकी जाती है। इस कसौटी पर प्रो. विष्णुचरण महतो का जीवन एक आदर्श उदाहरण है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व सदैव स्मरणीय रहेगा। विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।
12 घंटे के मजदूर आंदोलन के बाद झुका कंपनी प्रबंधनबकाया वेतन से लेकर PF-ESI, नियुक्ति पत्र एवं वेतन वृद्धि तक सभी मांगों पर लिखित सहमतिदेवेन्द्र नाथ महतो की चेतावनी – झारखंड में कंपनियों को ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा रवैया छोड़ना होगा, मजदूरों का शोषण बर्दाश्त नहीं होगामजदूरों का शोषण बर्दास्त नहीं करेंगे : देवेन्द्र नाथ महतोटीम एबीएन, रांची। राँची के इरबा स्थित SFK Manufacturer / J1 कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरों के बकाया वेतन एवं श्रमिक अधिकारों की मांग को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो के नेतृत्व में शनिवार सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक लगातार 12 घंटे जोरदार आंदोलन किया गया। आंदोलन में JLKM के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया।आंदोलन के दौरान कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मजदूरों के शोषण, 3–4 महीने से वेतन भुगतान नहीं होने, नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, वेतन पर्ची, PF, ESI एवं कार्यस्थल पर सुरक्षा सुविधाओं के अभाव को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया गया। लगातार 12 घंटे के आंदोलन के बाद देर रात कंपनी प्रबंधन की ओर से प्रबंधक आदर्श तिवारी के साथ वार्ता हुई। वार्ता के बाद मजदूरों की प्रमुख मांगों पर लिखित समझौता हुआ, जिसके पश्चात आंदोलन स्थगित किया गया।लिखित समझौते में इन मांगों पर बनी सहमति बकाया वेतन भुगतान: सितंबर 2026 तक का संपूर्ण बकाया वेतन 4 से 5 नवंबर 2026 तक सभी मजदूरों को भुगतान किया जाएगा। इसमें वर्तमान में कार्यरत एवं नौकरी छोड़ चुके (रिजाइन दे चुके) मजदूर भी शामिल होंगे।अक्टूबर महीने का वेतन: अक्टूबर 2026 का वेतन 15 नवंबर 2026 तक भुगतान किया जाएगा।समय पर मासिक वेतन: आगे से प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक सभी मजदूरों का वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।बुनियादी श्रमिक दस्तावेज एवं सुविधाएं : एक महीने के अंदर सभी मजदूरों को नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, वेतन पर्ची तथा पात्रता के अनुसार PF एवं ESI की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।साप्ताहिक छुट्टी: मजदूरों को सप्ताह में एक दिन अवकाश दिया जाएगा। छुट्टी के दिन काम कराने तथा निर्धारित आठ घंटे से अधिक काम लेने की स्थिति में समझौते के अनुसार डबल हाजिरी दी जाएगी।मोबाइल क्षतिपूर्ति : आंदोलन के दौरान कंपनी के पदाधिकारियों द्वारा एक वाहन का मोबाइल तोड़े जाने के मामले में कंपनी प्रबंधन ने नया मोबाइल उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है।कौशल के आधार पर वेतन वृद्धि एवं पदोन्नति : श्रम विभाग द्वारा निर्धारित नियमों एवं लागू प्रावधानों के अनुसार अनस्किल्ड से सेमी-स्किल्ड, सेमी-स्किल्ड से स्किल्ड तथा स्किल्ड से हाईली स्किल्ड श्रेणी में योग्यता एवं कार्य के आधार पर ग्रेड प्रमोशन तथा वेतन वृद्धि की जाएगी।आंदोलनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं : आंदोलन में शामिल किसी भी मजदूर या आंदोलनकारी को चिह्नित कर प्रतिशोध की भावना से नौकरी से हटाने, प्रताड़ित करने अथवा किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने पर सहमति बनी है। उक्त सभी बिंदुओं पर लिखित समझौते के बाद मजदूरों ने अपना आंदोलन स्थगित किया।आंदोलन में शामिल JLKM के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताइस आंदोलन में प्रमुख रूप से JLKM केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो, अल्पसंख्यक मोर्चा केंद्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद साकिर अंसारी, शाबिर अंसारी, आदिल अनवर, राँची जिला केंद्रीय महासचिव मार्सल महतो, बिराट महतो, जिला सचिव गजेंद्र महतो, राँची जिला वरीय उपाध्यक्ष रिहान अंसारी, प्रवक्ता महावीर साहू, ओरमांझी प्रखंड अध्यक्ष रामसेवक महतो, जगन्नाथ महतो, संतोष महतो, सुधांशु महतो, कोषाध्यक्ष राजू महतो सहित अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सैकड़ों मजदूर शामिल हुए।देवेन्द्र नाथ महतो ने कंपनियों को दी कड़ी चेतावनीआंदोलन के बाद देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि झारखंड में उद्योग और कंपनियाँ चलाने वाले मालिकों एवं प्रबंधन को ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा रवैया छोड़ना होगा। यह आजाद भारत है, जहाँ प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन तक सभी कानून के दायरे में आते हैं। फिर कंपनियाँ कानून से ऊपर कैसे हो सकती हैं?उन्होंने कहा कि झारखंड के जल-जंगल-जमीन और मेहनतकश मजदूरों के श्रम से कंपनियाँ मुनाफा कमाती हैं, लेकिन उन्हीं मजदूरों को समय पर वेतन, न्यूनतम मजदूरी, बोनस, PF, ESI और सम्मानजनक कार्य वातावरण से वंचित रखना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।उन्होंने स्पष्ट कहा कि झारखंड में संचालित प्रत्येक कंपनी को श्रम विभाग द्वारा निर्धारित कानूनों एवं लागू श्रम संहिताओं का पालन करना होगा। मजदूरों को समय पर वेतन, उचित न्यूनतम मजदूरी, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल और सम्मानजनक व्यवहार देना कंपनी प्रबंधन की जिम्मेदारी है।देवेन्द्र नाथ महतो ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो कंपनियाँ श्रम कानूनों का पालन नहीं करेंगी और मजदूरों का शोषण जारी रखेंगी, उनके विरुद्ध व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो ऐसी कंपनियों के खिलाफ तालाबंदी का आंदोलन भी किया जाएगा और उन्हें झारखंड छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि मजदूरों का पसीना और मेहनत ही उद्योगों की असली पूँजी है। मजदूरों के अधिकारों से समझौता करके कोई भी कंपनी झारखंड में अपना कारोबार नहीं चला सकती।
केंद्र ने जनगणना तिथि घोषित की, लेकिन सरना धर्म कोड शामिल नहीं, यह आदिवासी अस्मिता और मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला : सांसद सुखदेव भगत एबीएन सेंट्रल डेस्क (लोहरदगा/ नयी दिल्ली)। केंद्र सरकार ने जनगणना की तिथि की घोषणा कर दी है। यह जनगणना 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक होगी। लेकिन अफसोस की बात है कि केंद्र सरकार ने अभी तक जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड को शामिल नहीं किया है। इसको लेकर लोहरदगा सांसद सह छत्तीसगढ़ प्रभारी सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सांसद श्री भगत ने कहा कि सरना धर्म कोड के लिए वे बरसों से इस लड़ाई को लड़ते आ रहे हैं।जब मैं विधायक था, तब मैंने इस मामले को विधानसभा में पुरजोर ढंग से उठाया था। जब मैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष था, तब मैंने सरना धर्म कोड के मुद्दे को कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करवाया था। दिल्ली में जाकर मैंने स्वयं रजिस्ट्रार जनरल आॅफ इंडिया से मिलकर जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड शामिल करने की मांग की थी। सांसद ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जनता से वादा किया था कि अगर मैं सांसद बना तो संसद में मेरा सबसे पहला प्रश्न जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड शामिल करने का होगा। सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने वादे के मुताबिक संसद में सबसे पहले यही मांग उठायी। संसद में अपने वक्तव्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है और संविधान आदिवासी अस्मिता का रक्षक है। भारत में करोड़ों आदिवासी निवास करते हैं, जिनकी धार्मिक परंपरा, पहचान और आस्था अलग है। सरकार द्वारा इसे मान्यता न देना उनके मौलिक अधिकार का हनन है। जनगणना में जब सभी धर्मों का कॉलम दिया गया है, तो आदिवासी जो प्रकृति के पुजारी हैं, जिनकी आस्था, पूजा पद्धति, विशेष रीति-रिवाज, परंपरा और संस्कृति है, उनकी रक्षा के लिए सरना धर्म कोड को क्यों शामिल नहीं किया गया? सांसद ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहाकिएक ओर सरकार जंगली जानवर, बाघ-शेरों की गिनती करती है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों आदिवासियों की धार्मिक पहचान को मिटाने पर तुली है। यह दोहरी नीति नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष आदरणीय राहुल गांधी ने भी लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के चुनावी दौरे में स्पष्ट कहा था कि केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार बनते ही जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड शामिल किया जाएगा। झारखंड में महागठबंधन की सरकार ने विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज भी दिया है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई पहल नहीं की है। श्री भगत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनगणना शुरू होने में अब कुछ ही महीने बचे हैं। उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया है। आदिवासियों की अस्मिता, उनकी पूजा पद्धति, रीति-रिवाज, परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। मैं इस मुद्दे को अब व्यापक स्तर पर संसद में फिर से उठाऊंगा। अगर केंद्र सरकार ने 25 जनवरी 2027 से शुरू हो रही जनगणना में सरना धर्म कोड लागू नहीं किया, तो पूरे देश में आदिवासी समाज भाजपा कि केंद्र सरकार को इसका करारा जवाब देगा।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, गढ़वा। जिले में अपराधियों का मनोबल सातवें आसामन पर है। जिले के सदर थाना क्षेत्र के प्रतापपुर गांव में देर रात एक युवक पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गयी। घटना में राघवेंद्र सिंह उर्फ राजा बाल-बाल बच गये। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। जानकारी के अनुसार, राजा सिंह मोटरसाइकिल से जा रहे थे। इसी दौरान एक स्कॉर्पियो वाहन ने उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी, जिससे वह सड़क पर गिर गये। इसके बाद स्कॉर्पियो सवार मौके से फरार हो गया। राजा सिंह मोटरसाइकिल उठाकर घर लौटे और देर रात अपने वाहन से स्कॉर्पियो की तलाश में निकल पड़े। तलाश के दौरान जैसे ही वह नावाडीह गांव पहुंचे, मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। राजा सिंह किसी तरह मौके से बचकर निकल गये। घटना के बाद दोनों आरोपी दोबारा घटनास्थल पर पहुंचे और वहां गिरी अपनी मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गये। घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने सदर थाने पहुंचकर दो युवकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। एसडीपीओ ने बताया कि प्रतापपुर में गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची थी। मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
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