एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के नोडल अधिकारी डॉ सिद्धार्थ विश्वास ने कहा कि रासायनिक खाद और हाइब्रिड बीज से उत्पादित फसलें शरीर के लिए काफी नुकसानदायक हैं। डॉ विश्वास ने शुक्रवार को गव्य विकास निदेशालय द्वारा प्रशिक्षण एवं प्रसार केंद्र, धुर्वा में आयोजित कामधेनु अमृत कृषि कार्यशाला में कहा कि वहीं, जैविक खेती से उत्पादित फसलों में पौष्टिक तत्वों की उपलब्धता रहती है, जो कुपोषण दूर कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। फसलों की गुणवत्ता बनी रहे, इस हेतु जैविक कृषि, प्राकृतिक कृषि की तकनीक अपनाने की जरूरत है। डॉ विश्वास ने कहा कि रासायनिक खादों के इस्तेमाल से शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियों की आशंका बनी रहती है। इसलिए हाइब्रिड बीज के बदले देसी बीज का उपयोग करना ज्यादा फायदेमंद हैं। गोबर और गोमूत्र द्वारा तैयार किए गए खाद और कीटनाशक की चर्चा करते हुए डॉ.विश्वास ने कहा कि गोबर का वर्मी कंपोस्ट तैयार करने और गोमूत्र का उपयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता है। गोमूत्र मिट्टी में मिलने से कीड़े-मकोड़े समाप्त हो जाते हैं। इसलिए जैविक कृषि में गोबर और गोमूत्र का उपयोग करने से फसलों की पौष्टिकता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र की ब्रांडिंग हो, तो जैविक कृषि को इससे बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने राज्य सरकार को भी इस दिशा में ठोस पहल करने की सलाह दी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 100 शहरों के लिए किसान ड्रोन को हरी झंडी दी। अपने वर्चुअली कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि यह एक ऐसी योजना है, जो खेती-किसानी में एक नई क्रांति ला देगी। कीटनाशकों के छिड़काव से लेकर दूसरी अन्य सुविधाएं इससे मिलेंगी। पीएम मोदी ने कहा कि यह 21 वीं सदी की आधुनिक कृषि सुविधाओं की दिशा में एक नया अध्याय है। मुझे विश्वास है कि यह शुरुआत न केवल ड्रोन सेक्टर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी बल्कि असीमित संभावनाओं के लिए भी आकाश खोल देगी। बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022-23 की घोषणा के दौरान कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़े प्रोत्साहन की घोषणा की। बजट सत्र में सीतारमण ने कहा कि केंद्र वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान देश भर में किसानों को डिजिटल और उच्च तकनीक सेवाओं के वितरण के लिए किसान ड्रोन, रासायनिक मुक्त प्राकृतिक खेती, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही उन्होंने प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर देते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि फसल मूल्यांकन, भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और कीटनाशकों और पोषक तत्वों के छिड़काव के लिए किसान ड्रोन को देश में बढ़ावा दिया जाएगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जनवरी में कृषि श्रमिकों और ग्रामीण मजदूरों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर क्रमश: 5.49 फीसदी और 5.74 फीसदी हो गई। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार इस में इजाफा कुछ निश्चित खाद्य पदार्थों की महंगी कीमतों की वजह से रहा है। इससे पहले दिसंबर 2021 में कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एएल) के आधार पर महंगाई की दर 4.78 फीसदी और ग्रामीण श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आरएल) के आधार पर की दर 5.03 फीसदी रही थी। श्रम मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार जनवरी 2021 में सीपीआई-एएल पर आधारिक महंगाई की दर 2.17 फीसदी और सीपीआई-आरएल 2.35 फीसदी रही थी। कृषि श्रमिकों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति जनवरी 2022 में 4.15 फीसदी और ग्रामीण मजदूरों के लिए 4.33 फीसदी रही, जो पिछले महीने में क्रमशः 2.99 फीसदी और 3.17 फीसदी थी। एक साल पहले समान अवधि में कृषि श्रमिकों के लिए खाद्य मुद्रास्फीति 1.02 फीसदी और ग्रामीण मजदूरों के लिए 1.22 फीसदी थी। दिसंबर 2021 के मुकाबले जनवरी 2022 में पूरे देश में सीपीआई-एएल में दो अंकों की और सीपीआई-आरएल में एक अंक की कमी आई है। ये दोनों जनवरी 2021 में क्रमश: 1095 और 1105 पर रहे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक उपभोक्ता सर्वेक्षण में 55 प्रतिशत से अधिक घर खरीदारों ने वर्ष 2022 में आवास कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और संपत्ति सलाहकार एनारॉक के इस सर्वेक्षण में कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि को देख खरीदारों ने यह संभावना जताई है। यह सर्वे जुलाई, 2021 और दिसंबर, 2021 के बीच किया गया। इसमें पहली, दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में 5,210 प्रतिभागियों ने विभिन्न डिजिटल मंचों के जरिए अपनी राय व्यक्त की है। एनारॉक ने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, सर्वेक्षण में 56 प्रतिशत प्रतिभागियों ने निर्माण के कच्चे माल में वृद्धि और डेवलपर्स के लिए कुल परिचालन लागत में बढ़ोतरी के कारण 2022 में आवास कीमतों में वृद्धि की संभावना जताई है। इसमें कहा गया है कि घरों की कीमतों में 10 प्रतिशत से कम की वृद्धि का प्रभाव ज्यादा नहीं होगा लेकिन 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का खरीदार की भावना पर अधिक गहरा असर होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में कोरोना के नए मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटों में भारत में कोरोना के 25,920 नए मामले सामने आए हैं, जो कि गुरुवार के मुकाबले 4,837 कम हैं। वहीं, इस दौरान 66,254 कोविड-19 से ठीक हुए हैं, जिसके बाद इस बीमारी से कुल ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 4,19,77,238 हो गई है। हालांकि, पिछले 24 घंटों में 492 लोगों की कोरोना वायरस से मौत भी हुई है। देश में अभी भी 2,92,092 मामले एक्टिव हैं, जबकि कुल वैक्सीनेशन का आंकड़ा 1,74,64,99,461 हो गया है। यही नहीं, दैनिक पॉजिटिविटी रेट भी 2.07 प्रतिशत है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। महाराष्ट्र के ठाणे में 100 मुर्गियों की अचानक मौत ने जिला प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत से जिले में फिर से बर्ल्ड फ्लू की आशंका गहराने लगी है। ऐसे में यहां 25 हजार से ज्यादा मुर्गियों को मारने के आदेश दिए गए हैं। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ठाणे की शाहपुर तहसील के वेहलोली गांव स्थित एक पोल्ट्री फार्म में 100 मुर्गियों की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने मृत मुर्गियों के सैंपल पुणे स्थित लैब में भेजे हैं। ठाणे के जिला कलेक्टर राजेश जे नार्वेकर ने शुक्रवार को बताया कि संक्रमण की आशंका को देखते हुए पोल्ट्री फार्म से एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले 25 हजार से ज्यादा पक्षियों को मारने का आदेश दिया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के स्टील प्लांट में गैस लीक होने के कारण तीन लोगों की मौत हुई है। शुक्रवार को दुर्गापुर स्टील प्लांट में गैस रिसाव के बाद तीन मजदूरों की मौत हो गई। तीन मृतक मजदूरों की पहचान सजल चौहान, सिंटू यादव और संतोष चौहान के तौर पर हुई है। पांच कर्मचारियों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद से प्लांट के बाकी कर्मचारी दहशत में हैं। हादसे के लिए प्लांट प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। श्रमिक संघों ने सवाल उठाया है कि प्लांट में बार-बार गैस रिसाव की घटनाएं क्यों हो रही थीं? प्रबंधन ने जानकारी दी है कि इस मामले में गहन जांच की जाएगी। शुक्रवार को तीन लोगों की मौत के साथ, पिछले पांच वर्षों में संयंत्र में गैस रिसाव के कारण मरने वालों की कुल संख्या नौ हो गई है। मजदूर संघों का दावा है कि पिछले कई वर्षों से प्लांट में आधुनिकीकरण का काम नहीं हुआ है। मजदूर प्रबंधन की लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि संविदा कर्मियों को नियुक्ति के समय पर्याप्त सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है। ट्रेड यूनियन नेता, शेख साहबुद्दीन, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हैं। उन्होंने दुर्गापुर स्टील प्लांट गैस लीक मामले में निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के प्री प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी और केजी कक्षा में पढ़ने वाले करीब 51 हजार बच्चों को भी अब मिड-डे मील मिलेगा। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने पहली से आठवीं कक्षा तक वितरित किए जाने वाले मिड-डे मील का दायरा बढ़ाकर अब प्री प्राइमरी तक कर दिया है। वीरवार को मुख्य सचिव रामसुभग सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में नर्सरी-केजी को भी दोपहर के भोजन की योजना में शामिल करने को मंजूरी दी गई। इस दौरान नर्सरी से आठवीं कक्षा तक 130 करोड़ का वार्षिक बजट प्लान केंद्र सरकार को भेजने को भी मंजूरी दी गई। केंद्र सरकार ने मिड-डे मील योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना कर दिया है। वीरवार को हुई बैठक में सरकारी स्कूलों के करीब सवा पांच लाख विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन पर आने वाले खर्च और मिड-डे मील वर्करों के मानदेय को लेकर चर्चा की गई। हिमाचल सरकार ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए केंद्र सरकार से 130 करोड़ के वार्षिक बजट की मांग रखने का फैसला लिया है। निजी स्कूलों का मुकाबले करने के लिए सरकारी स्कूलों में नर्सरी और केजी कक्षा को शुरू किया गया है। साल दर साल इन कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है। अब प्रदेश में चल रहे करीब चार हजार प्री प्राइमरी स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 51 हजार तक पहुंच गई है। प्राइमरी कक्षाओं में प्रति विद्यार्थी सौ ग्राम चावल और अपर प्राइमरी में 150 ग्राम चावल दिए जाते हैं। कोरोना संकट के चलते वर्ष 2020 से स्कूलों में मध्याह्न भोजन नहीं पक रहा है। विद्यार्थियों को हर माह सूखा राशन दिया जाता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गुजरात के अहमदाबाद में साल 2008 में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। विशेष न्यायाधीश एआर पटेल की अदालत ने 49 अभियुक्तों में से 38 लोगों को UAPA के तहत फांसी की सजा सुनाई गई है। बाकी 11 दोषियों को उम्र कैद हुई है। अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में 78 आरोपी थे। एक आरोपी बाद में सरकारी गवाह बन गया था। इस कारण कुल 77 आरोपी बन गए थे। 13 साल तक चली सुनवाई के दौरान 1,163 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। पुलिस और कानूनी एजेंसियों ने 6 हजार से ज्यादा सबूत पेश किए थे। यह मामला 26 जुलाई 2008 का है जब अहमदाबाद नगर पालिका क्षेत्र में एक घंटे के भीतर 21 सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इस धमाके ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इस विस्फोट में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। देश में इतने कम समय में इतने धमाके पहले कभी नहीं हुए थे। एक घंटे के अंदर अहमदाबाद में 21 धमाके हुए थे। पुलिस ने अहमदाबाद में 20 प्राथमिकी दर्ज की थी, जबकि सूरत में 15 अन्य प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जहां विभिन्न स्थानों से बम बरामद किए गए थे। अदालत ने सभी 35 प्राथमिकी को मर्ज करने के बाद मुकदमा चलाया, क्योंकि पुलिस जांच में दावा किया गया था कि वे एक ही साजिश का हिस्सा थे।
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