एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) ने सोमवार को जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उत्सर्जन में कटौती नहीं की गई तो मानव की उत्तरजीविता, भोजन और पानी की कमी, समुद्र के ऊंचे स्तर से लेकर गंभीर आर्थिक क्षति तक भारत को गंभीर रूप से नुकसान होगा। आईपीसीसी वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट "जलवायु परिवर्तन 2022: प्रभाव, अनुकूलन और भेद्यता" पर दूसरी किस्त में कहा गया है कि अगर उत्सर्जन को तेजी से समाप्त नहीं किया गया वैश्विक स्तर पर गर्मी और आर्द्रता मानव सहनशीलता से परे स्थितियां पैदा करेंगी और भारत उन स्थानों में से है जो इन असहनीय हालात का अनुभव करेगा। जलवायु संबंधी जोखिम बढ़ेंगे : रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि एशिया में कृषि और खाद्य प्रणालियों के लिए जलवायु संबंधी जोखिम पूरे क्षेत्र में अलग-अलग प्रभावों के साथ बदलती जलवायु के साथ बढ़ते जाएंगे। यह मानते हुए कि तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ेगा, भारत में चावल का उत्पादन 10 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जबकि मक्के का उत्पादन 25 से 70 प्रतिशत तक घट सकता है। 31 डिग्री सेल्सियस का गीला-बल्ब तापमान घातक : गीले-बल्ब तापमान का जिक्र करते हुए, एक उपाय जो गर्मी और आर्द्रता को जोड़ता है, इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि उत्सर्जन में वृद्धि जारी रहती है तो गीले-बल्ब का तापमान भारत के अधिकांश हिस्सों में 35 डिग्री सेल्सियस की अनुपयोगी सीमा तक पहुंच जाएगा या उससे अधिक हो जाएगा। 31 डिग्री सेल्सियस का गीला-बल्ब तापमान मनुष्यों के लिए बेहद खतरनाक है, जबकि 35 डिग्री सेल्सियस होने पर छाया में आराम करने वाले फिट और स्वस्थ वयस्क भी लगभग छह घंटे से अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकते हैं। अभी भारत में वेट-बल्ब का तापमान शायद ही कभी 31 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है, देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम वेट-बल्ब तापमान 25-30 डिग्री सेल्सियस रहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों जलवायु और गैर-जलवायु वाहक जैसे कि सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों ने एशिया के सभी उप-क्षेत्रों में जल आपूर्ति और मांग दोनों में जल संकट की स्थिति पैदा कर दी है। 21वीं सदी के मध्य तक भारत में अमु दरिया, सिंधु, गंगा और अंतर-राज्यीय साबरमती-नदी बेसिन के अंतरराष्ट्रीय ट्रांसबाउंड्री नदी बेसिन गंभीर जल संकट चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, क्योंकि जलवायु परिवर्तन एक चिंता बढ़ाने के कारक के रूप में कार्य कर रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण एशियाई देशों में इस सदी के अंत तक सूखे की स्थिति (5-20 प्रतिशत) में वृद्धि का अनुभव हो सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस-यूक्रेन संकट से द्विपक्षीय कारोबार के मामले में भारत पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन तेल के दाम में तेजी आने से अर्थव्यवस्था के समक्ष जोखिम पैदा हो सकता है। शुक्रवार को जारी बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) अर्थशास्त्रीय शोध रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई। इसमें कहा गया है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गये हैं। इससे बाह्य स्तर पर स्थिरता तथा रुपये की गतिविधियों को लेकर जोखिम है। रूस ने यूक्रेन पर सैन्य धावा बोला है। इससे जनजीवन प्रभावित होने के साथ क्षेत्र में विभिन्न समस्याएं बढ़ेंगी। पश्चिमी देश रूस के कदम के विरोध में उस पर वित्तीय पाबंदियां लगा रहे हैं। दुनिया के अन्य भागों में आर्थिक प्रभाव जिंसों के ऊंचे दाम, मुद्रास्फीति में तेजी और वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव यानी गतिहीन मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) के रूप में देखने को मिल सकता है। इनवेस्को ने एक रिपोर्ट में कहा, अगर यह संकट बढ़ता है और ईरान की तरह रूस को पश्चिमी भुगतान और त्वरित संदेश प्रणाली (स्विफ्ट) से बेदखल किया जाता है तो ऊर्जा आपूर्ति में बाधा से गंभीर गतिहीन मुद्रास्फीति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। रूस, यूरोप को 40 प्रतिशत गैस की आपूर्ति करता है जबकि कोयला समेत ठोस ईंधन की आपूर्ति में उसकी हिस्सेदारी आधी है। साथ ही एक तिहाई तेल की भी आपूर्ति करता है। अब तक अमेरिका ने रूस को वैश्विक भुगतान प्रणाली के उपयोग से प्रतिबंधित नहीं किया है। बीओबी आर्थिक शोध रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन संकट से द्विपक्षीय कारोबार को लेकर भारत पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन तेल के दाम में तेजी से अर्थव्यवस्था के लिये बड़ा जोखिम है। वित्त वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट और आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति दोनों इस संकट से पहले पेश की गयी और उसमें कच्चे तेल की ऊंची कीमत के प्रभाव को शामिल नहीं किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बजट और आरबीआई की मौद्रिक नीति में कच्चे तेल की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान रखा गया है। हालांकि यह कीमत स्तर आने वाले समय में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात करता है। वित्त वर्ष 2020-21 में भारत ने 82.7 अरब डॉलर का तेल आयात किया था। जबकि चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान 125.5 अरब डॉलर का तेल आयात किया गया है। हालांकि अब तेल की कीमत 8 साल के उच्च स्तर पर है, ऐसे में तेल आयात बिल ऊंचा रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में तेल आयात 155.5 अरब डॉलर रह सकता है। आर्थिक गतिविधियों में सुधार के साथ अगले वित्त वर्ष में भी तेल आयात में सुधार की उम्मीद है। तेल मांग में 5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। इसमें कहा गया है, हमारा अनुमान है कि तेल के दाम में स्थायी तौर पर 10 प्रतिशत की वृद्धि से तेल आयात में 15 अरब डॉलर या जीडीपी का 0.4 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ेगा। तेल के दाम में तेजी से रुपये पर भी असर पड़ा है। इससे व्यापार घाटा बढ़ेगा और अंतत: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर स्थिरता प्रभावित होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल के दाम में 10 प्रतिशत की तेजी से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष 0.15 प्रतिशत प्रभाव पड़ेगा। जबकि थोक मुद्रास्फीति का कच्चा तेल संबंधित उत्पादों में भारांश 7.3 प्रतिशत है। ऐसे में 10 प्रतिशत की वृद्धि से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से थोक महंगाई दर में करीब एक प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका द्वारा भारत को 30 प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन बेचने पर बातचीत अंतिम चरण में है। इसकी अनुमानित लागत तीन अरब डॉलर है। कई सूत्रों ने यह पुष्टि की है। यह पहली बार है जब अमेरिका किसी गैर नाटो सहयोगी देश को ये ड्रोन बेच रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 में अमेरिका की यात्रा के दौरान पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत इस प्रमुख रक्षा सौदे की घोषणा की गई थी। इसके बाद दोनों देशों ने इस पर बातचीत तेज कर दी और भारत को बेचे जाने वाले ऐसे ड्रोन की संख्या 10 से बढ़ाकर 30 कर दी। इनमें से प्रत्येक 10 ड्रोन नौसेना, वायु सेना और थल सेना को दिए जाएंगे। सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत और अमेरिका सरकार के बीच 30 विमानों के प्रीडेटर/एमक्यू9बी खरीद कार्यक्रम पर बाचतीत अंतिम चरण में है। सूत्रों ने बताया कि यह प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा बनाए रखने की क्षमता है जिस पर विभिन्न मूलभूत समझौतों और एमटीसीआर में भारत के शामिल होने के जरिए कई वर्षों से काम किया गया है। भारत इस क्षमता को हासिल करने वाला पहला गैर-नाटो साझेदार होगा। रक्षा उद्योग में इन आधुनिक ड्रोन का कोई सानी नहीं है। इनका निर्माण जनरल एटॉमिक्स करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। गौ, गंगा और ब्राह्मण धरती के प्रत्यक्ष देवता हैं। रघुवंश की उत्पत्ति भी गौमाता के आशीर्वाद से ही हुई है। गौ आधारित जैविक खेती अपनाकर किसान और कृषि जहरमुक्त, समृद्धशाली व स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी निभा सकते हैं। उक्त विचार भारतीय किसान के अखिल भारतीय अधिवेशन के शुभारंभ के अवसर पर महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 स्वामी पंचमानंद जी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि किसान जैविक खाद और प्राकृतिक खेती को अपनायें व रासायनिक उर्वरक के स्थान पर गौमूत्र से निर्मित कीटनाशक का उपयोग करें। स्वागत उद्बोधन देते हुए राष्ट्रीय मंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने भारतीय किसान संघ के प्रतिवेदन को रखते हुए किसान संघ की संगठनात्मक गतिविधियों से अवगत कराया। श्री मिश्र ने कहा कि लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का हक है। भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष आई एन बसवेगौड़ा ने कार्यक्रम में आभार व्यक्त करते हुये कहा कि कृषि व किसान को आत्मनिर्भर बनाने के लिये स्वाबलंबी व रोजगारयुक्त ग्राम की अवधारणा पर काम करना होगा। तभी खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकेगा। देश व दुनिया के सबसे बड़े किसान संगठन में शुमार भारतीय किसान संघ के 13वें अखिल भारतीय अधिवेशन का शुभारंभ भारत माता व कृषि देवता भगवान बलराम पूजन के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर पुरानी गल्ला मण्डी स्थित महादेवी परिसर में हुआ। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी पंचमानंद जी व भारतीय किसान संघ के केन्द्रीय पदाधिकारीयों की मौजूदगी में ध्वजारोहण, गौ माता व फसल पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंच पर अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री आई एन वसवेगौड़ा, उपाध्यक्ष भैयाराम जी मौर्य, उपाध्यक्ष श्रीमति विमला तिवारी, उपाध्यक्ष अम्बुभाई पटेल, राष्ट्रीय मंत्री मोहिनी मोहन मिश्र जी उपस्थित रहे। मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख व भारतीय किसान संघ के संपर्क अधिकारी रामलाल जी, किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री महेश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना, मध्यभारत के प्रांत अध्यक्ष कैलाश सिंह ठाकुर, प्रांत महामंत्री पवन शर्मा, महाकौशल प्रांत अध्यक्ष गजराज सिंह, प्रांत महामंत्री प्रहलाद पटेल, मालवा के प्रांत अध्यक्ष रामप्रसाद सूर्या, प्रांत महामंत्री रमेश दांगी, प्रांत संगठन मंत्री मनीष शर्मा, भरत पटेल, अतुल माहेश्वरी सहित देशभर से आये किसान संघ के पदाधिकारियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। तीन दिवसीय अधिवेशन में देश भर के सभी प्रदेशों के किसान संघ के पदाधिकारी व 500 से अधिक जिलों के किसान प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस अधिवेशन में भारतीय किसान संघ दस सत्रों में कृषि व किसान के विभिन्न विषयों पर चर्चा करेगा। अधिवेशन के दूसरे दिन शोभायात्रा व किसान सभा का आयोजन होगा। जिसमें देश भर से आये हजारों किसान बन्धु सम्मिलित होंगे। प्लास्टिक मुक्त रखा गया है परिसर : अखिल भारतीय अधिवेशन स्थल को प्लास्टिक मुक्त रखा जा रहा है। किसान संघ के क्षेत्र संगठन मंत्री महेश चौधरी ने बताया कि अधिवेशन में भोजन व्यवस्था हो अन्य व्यवस्थाएं सभी जगह हम प्लाटस्टिक मुक्त व्यवस्थायें कर रहे हैं। जिससे प्लास्टिक मुक्त अभियान को बल मिलेगा और प्रकृति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। भारतीय किसान संघ की शोभायात्रा और सभा सम्पन्न : भारतीय किसान संघ शोभायात्रा और किसान सभा ने 26 फरवरी को भोपाल में किसानों की शोभायात्रा की। इस रैली में देश के 500 जिलों के हजारों किसान शामिल होंगे। शोभायात्रा लाल परेड ग्राउंड के पास एम वी एम कॉलेज ग्राउंड से प्रारंभ होकर राजभवन मार्ग, रोशनपुरा चौराहा, रंगमहल टॉकीज, टी टी नगर थाना, अपैक्स बैंक, पत्रकार भवन, मालवीय नगर से होते हुए एम वी एम कॉलेज ग्राउंड पर समाप्त होगी, यहां पर एक विशाल किसानसभा आयोजित की जावेगी। उक्त जानकारी भारतीय किसान संघ मध्य प्रदेश के प्रदेश प्रचार प्रमुख, राघवेन्द्र सिंह पटेल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। बताते चलें कि दिनांक भारतीय किसान संघ झारखंड प्रदेश से जय सिंह, क्षेत्र संगठन मंत्री प्रकाश नारायण तिवारी, प्रशांत खाखा, मनधीरन महतो, मनोज साहू, प्रकाश नारायण, छत्रधारी महतो, दीपक उरांव, नकुल मुंडा, वीरेंद्र साहू, घूरन महतो, दिनेश सिंह, विजय कुमार एवं विभिन्न जिलों के पदाधिकारी शामिल हुए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूक्रेन के खिलाफ रूस का सैन्य अभियान लगातार जारी है। रूसी सैनिकों ने यूक्रेन की राजधानी कीव में शुक्रवार को हमला कर दिया और सरकारी क्वार्टरों के निकट गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें गूंज रही थी। इस युद्ध में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। रूस की इस कार्रवाई से यूरोप में व्यापक युद्ध की आशंकाएं पैदा हो गई है और साथ ही उसे रोकने के लिए दुनियाभर में प्रयास भी शुरू हो गए हैं। इस बीच राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की संपत्तियां जल्द जब्त हो सकती हैं। 27 देशों वाला यूरोपीय संघ इस संबंध में सहमति के बेहद करीब है। लग्जमबर्ग के विदेश मंत्री जीन एसेलबोर्न ने शुक्रवार को यह दावा किया। आपको यह भी बता दें क यूक्रेन सरकार ने शुक्रवार को दावा किया कि रूस ने पिवडेन्नी के ब्लैक सी बंदरगाह के पास दो विदेशी जहाजों पर गोलीबारी की। +++++++++++ पानी की टंकी गोल क्यों बनाई जाती है, चौकोर या तिकोनी क्यों नहीं होती पानी की टंकियां तो आपने भी देखी होंगी। नगर निगम की बड़ी पानी की टंकी हो, जो करीब 100 फुट ऊंचाई पर स्थापित की जाती है या फिर घर के बाथरूम में सप्लाई के लिए रखी जाने वाली 500 लीटर की टंकी, एक बात समान होती है कि सब-के-सब गोल होती है। जबकि जिस स्थान पर वह रखी होती है यदि चौकोर होती तो स्थापित करने के लिए शायद ज्यादा अच्छा होता है। सवाल यह है कि पानी की टंकी गोल क्यों बनाई जाती है। टंकी गोल क्यों होती है : विषय विशेषज्ञ ने बताया भारतीय नौसेना से रिटायर परिमल कुमार घोष बताते हैं कि यह केवल पानी की टंकियॉ आकार की बात नहीं है परन्तु अधिक से अधिक वस्तुओं के आकार गोल होने के पीछे भौतिकी विज्ञान की सूत्र व पदार्थ के मौलिक आकार पर बाहरी प्रभाव, दबाव, एवं पारिपार्शिक परिस्थिति की प्रतिक्रियॉ आदि के सिद्धान्त पर ही आधारित हैं। गोलाकार वस्तु के कोई कोण नहीं होता है, बल्कि हरेक बिन्दु सम दूरत्य व समानुपातिक तरीके से विन्यास होने के कारण उन पर घर्षण व दबाव बराबर, एवं समपरिमान क्षेत्र में समानुपातिक विस्तारित व वितरित हो जाते हैं। इसके परिणाम स्वरूप गोलाकार वस्तु के किसी भी एक स्थान पर दबाव या प्रतिक्रिया सीमित नहीं रहती हैं। सरल शब्दों में समझिए यदि पानी की टंकी को चौकोर बना दिया जाएगा तो उसके चार कोण स्थापित हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में जब टंकी के अंदर पानी भरा जाएगा और जब टंकी से पानी निकाला जाएगा तब पानी में हलचल होगी और कोण होने के कारण हलचल थोड़ा तेज हो जाएगी। इसके चलते टंकी की उम्र कम होती चली जाएगी। कुछ कंपनियां ग्राहकों की मांग पर चौकोर पानी की टंकी बनाती है परंतु ऐसी टंकियों के निर्माण और विक्रय की प्रक्रिया बहुत धीमी होती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ऊर्जा का आयात और खपत करने वाले विश्व के तीसरे सबसे बड़े देश भारत ने शनिवार को कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के कारण किसी तरह के आपूर्ति व्यवधान की आशंका के मद्देनजर वह वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर करीब से नजर रख रहा है। भारत ने यह भी कहा कि कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए वह रणनीतिक भंडारों से तेल जारी करने को समर्थन देगा। रूस के यूक्रेन पर हमला करने के परिणामस्वरूप 24 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें सात वर्ष के सर्वकालिक उच्च स्तर 105.58 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। बाद में पश्चिम देशों द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने के बाद इन दरों में कमी आई और ये 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं। तेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा, भारत सरकार वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर करीब से नजर रख रही है जिससे बदलती भूराजनीतिक परिस्थिति के परिणाम स्वरूप ऊर्जा की आपूर्ति संबंधी व्यवधानों के बारे में पता चल सके। मौजूदा आपूर्ति स्थिर कीमतों पर जारी रहे यह सुनिश्चित करने के लिए भारत उचित कदम उठाने के लिए तैयार है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का उपभोक्ता मूल्य पर क्या असर होगा इसके बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया। इसमें कहा गया, भारत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी करने की पहल का समर्थन करने, बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए भी प्रतिबद्ध है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में कमी लाने के लिए भारत ने अमेरिका, जापान और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर पिछले वर्ष नवंबर में अपने आपातकालीन भंडार से 50 लाख बैरल कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई थी। तब कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत 82-84 प्रति बैरल थी। बयान में यह नहीं बताया गया कि भारत कच्चा तेल कितनी मात्रा में जारी करेगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार को आम बजट-2022 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधानों पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित कर रहे है। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, इस वेबिनार में तीन सत्र रखे गए हैं। इनमें आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, ई संजीवनी और टेलीमेंटल स्वास्थ्य कार्यक्रम शामिल हैं। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि क्रिटिकल हेल्थकेयर सुविधाएं ब्लॉक स्तर पर हों, जिला स्तर पर हों, गांवों के नज़दीक हों। इस इंफ्रास्ट्रक्चर को मैंटेन करना और समय-समय पर अपग्रेड करना जरूरी है। इसके लिए प्राइवेट सेक्टर और दूसरे सेक्टर्स को भी ज्यादा ऊर्जा के साथ आगे आना होगा। स्वच्छ भारत मिशन हो, फिट इंडिया मिशन हो, पोषण मिशन हो, मिशन इंद्रधनुष हो, आयुष्मान भारत हो, जल जीवन मिशन हो, ऐसे सभी मिशन को हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक लेकर जाना है। उन्होंने कहा कि ये बजट बीते 7 साल से हेल्थकेयर सिस्टम को रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म करने के हमारे प्रयासों को विस्तार देता है। हमने अपने हेल्थकेयर सिस्टम में एक समग्र दृष्टिकोण को अपनाया है। आज हमारा फोकस हेल्थ तो है ही,कल्याण पर भी उतना ही अधिक है। पीएम मोदी ने कहा कि जब हम हेल्थ सेक्टर में holistic और inclusiveness की बात करते हैं तो, इसमें तीन फैक्टर्स का समावेश कर रहे हैं। पहला- modern medical science से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ह्यूमेन रिसोर्स का विस्तार। प्रधानमंत्री ने कहा कि बेहतर पॉलिसी के साथ ही उनका इम्प्लीमेंटेशन भी बहुत आवश्यक होता है इसके लिए जरूरी है कि ग्राउंड पर जो लोग पॉलिसी को उतारते हैं, उन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए इसलिए इस बजट में हमनें 2 लाख आंगनवाड़ियों को सक्षम आंगनवाड़ियों में अपग्रेड करके उन्हें और सशक्त बनाने का प्रावधान किया है। जैसे-जैसे हेल्थ सर्विस की डिमांड बढ़ रही है, उसके अनुसार ही हम स्किल्ड हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने का भी प्रयास कर रहे हैं। इसलिए बजट में हेल्थ एजुकेशन और हेल्थकेयर से जुड़े ह्युमेन रिसोर्स डेवलपमेंट के लिए पिछले साल की तुलना में बड़ी वृद्धि की गई है। ये भारत के क्वालिटी और affordable हेल्थकेयर सिस्टम की ग्लोबल access भी आसान बनाएगा। इससे मेडिकल टूरिज्म बढ़ेगा और देशवासियों के लिए income opportunities बढ़ेंगी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, कंज्यूमर और हेल्थकेयर प्रोवाइडर के बीच एक आसान इंटरफेस उपलब्ध कराता है। इससे देश में उपचार पाना और देना, दोनों बहुत आसान हो जाएंगे। इतना ही नहीं, ये भारत के क्वालिटी और अफॉर्डेबल हेल्थकेयर सिस्टम की ग्लोबल एक्सेस भी आसान बनाएगा। आयुष की भूमिका तो आज पूरी दुनिया भी मान रही है। हमारे लिए गर्व की बात है कि WHO भारत में अपना विश्व में अकेला Global Centre of Traditional Medicine शुरू करने जा रहा है।
एबीएन डेस्क। सरकार ने अप्रैल से शुरू हो रहे रबी विपणन वर्ष 2022-23 में रिकॉर्ड 444 लाख टन गेहूं की खरीद का अनुमान लगाया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार केंद्रीय खाद्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये राज्यों के खाद्य सचिवों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की बैठक की अध्यक्षता की। बयान के मुताबिक बैठक में आगामी रबी विपणन सीजन : (आरएमएस) 2022-23 और खरीफ विपणन सीजन (केएमएस) 2021-22 की रबी फसल की खरीद व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। बयान में कहा गया, आगामी आरएमएस सीजन 2022-23 के दौरान खरीद के लिए 444 लाख टन गेहूं का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष आरएमएस 2021-22 के खरीद अनुमान से अधिक है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना महामारी के दौरान भारत में 19 लाख से अधिक बच्चों के सिर से माता-पिता या सरंक्षक का साया उठ गया। जबकि पूरे विश्व में कोविड से अनाथ होने वाले बच्चों की संख्या 52 लाख से अधिक है। 20 देशों में हुई स्टडी के बाद लैंसेट में छपी रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती 14 महीनों में जितनी मौतें हुईं, करीब उससे दोगुनी मात्र छह महीनों (1 मई से 31 अक्टूबर 2021) के बीच हुईं। पूरे विश्व में कोविड से बेसहारा हुए कुल बच्चों को देखा जाए तो 3 में से 2 किशोरावस्था में थे। ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के मुख्य शोधकर्ता जूलियट उनविन के अनुसार कोविड से बेसहारा होने वाले बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकती है जैसे-जैसे विश्व में कोविड-19 से होने वाली मौतों के आंकड़े दर्ज होंगे। उनविन कहते हैं, अनाथ बच्चों का जनवरी 2022 तक का रियल टाइम डेटा देखें तो ये संख्या 67 लाख तक पहुंच जाती है। स्टडी में अक्टूबर 2021 तक ही आंकड़े लिए गए हैं, जबकि महामारी पूरे विश्व में अभी भी चल रही है। साफ है कि कोविड से अनाथ हुए बच्चों की संख्या भी बढ़ेगी। महिलाओं से 3 गुना पुरुषों की जान गई : अनाथ होने वाले बच्चों की दर सबसे अधिक दक्षिण अफ्रीका के पेरू में रही, यहां 1000 बच्चों पर 8 से 7 बेसहारा हुए। जबकि विश्व में महिलाओं से तीन गुना पुरुषों की मौतें हुईं। अमेरिका के डिजीज कंट्रोल ऑफ प्रिवेंशन सेंटर के प्रमुख शोधकर्ता सुसैन हिलिस बताते हैं कि स्टडी में कोविड से होने वाली प्रति मौत के सापेक्ष एक बच्चे का अनाथ या बेसहारा होना लिया गया है। इस तरह से हर छह सेकंड में एक बच्चे को जोखिम उठाना पड़ा, जब तक कि उसके पास समय भीतर मदद नहीं पहुंचाई गई। भविष्य में ऐसे बच्चों को मॉनीटर करने के लिए सर्विलांस सिस्टम से जोड़ना होगा।
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