एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जिसके पांच शहरों में मेट्रो ट्रेन दौड़ रही है। सूबे को जल्द ही बुलेट ट्रेन की सौगात भी मिल सकती है। दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के 2029 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। 11 फरवरी को राज्यसभा में रेल मंत्री ने बताया कि दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर समेत देशभर में 7 कॉरिडोर पर सर्वे कराकर और डिटेल प्रॉजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराया जाएगा। सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि दिल्ली-वाराणसी रूट पर कुल 13 स्टेशन होंगे। इनमें से 12 स्टेशन उत्तर प्रदेश में होंगे, जबकि 13वां दिल्ली में अंडरग्राउंड होगा। क्या होगी स्पीड : 813 किलोमीटर लंबे रूट पर 330 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेन दोड़ेगी। वाराणसी से दिल्ली के बीच जहां अभी ट्रेनों को लगभग 10-12 घंटे लग जाते हैं, वहीं बुलेट ट्रेन से यह सफर महज 3 घंटे 33 मिनट में पूरा हो जाएगा। अंडरग्राउंड स्टेशन के लिए 15 किलोमीटर का सुरंग भी बनाया जाएगा। कहां-कहां स्टेशन : सफर की शुरूआत दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन से शुरू होगी तो पहला स्टेशन नोएडा सेक्टर 146 में होगा। इसके बाद ट्रेन जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़, भदोही होते हुए मंडुवाडीह (वाराणसी) पहुंचेगी। लखनऊ में अवध क्रॉसिंग स्टेशन से एयरपोर्ट 4.5 किलोमीटर दूर और चारबाग रेलवे स्टेशन 5 किलोमीटर दूर होगा। हर दिन कितनी ट्रेनें प्लान के मुताबिक, इस रूट पर वाराणसी से हर 47 मिनट पर एक ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना होगी। दिनभर में कुल 18 ट्रेनें यहां से रवाना होंगी। सुबह 6 बजे से आधी रात तक बुलेट ट्रेन मिलेगी। अवध कॉसिंग पर हर दिन करीब 43 ट्रेनें पहुंचेंगी, जिनके बीच औसतन 22 मिनट का गैप होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। आने वाले दो सालों में कोरोना का एक और वैरिएंट सामने आ सकता है। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन से भी ज्यादा खतरनाक होगा और भारी तबाही मचा सकता है। इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और महामारी एक्सपर्ट क्रिस व्हिटी ने चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस हमें चौंका सकता है। क्रिस व्हिटी ने एक इंटरव्यू में कहा कि, कोरोना के खिलाफ जंग में हम सभी को अभी एक लंबा सफर तय करना है। क्योंकि आने वाले समय में यह वायरस हमें अपने वैरिएंट को लेकर लगातार चौंकाता रहेगा। उन्होंने कहा कि, कोरोना वायरस जिंदगी भर बना रह सकता है और आने वाले समय में यह एक सामान्य फ्लू की तरह हो सकता है। नया वैरिएंट बन सकता है मुसीबत : व्हिटी ने कहा कि, आने वाले दो सालों में नया वैरिएंट ओमिक्रॉन से भी ज्यादा मुसीबत पैदा कर सकता है। यह वैरिएंट किभी भी मुकाबले में कमजोर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि, यह बात पूरी तरह गलत है कि कोरोना वायरस अपने अंत की ओर है और दुनिया में यह अब सामान्य स्थिति की ओर पहुंच रहा है। क्योंकि नया वैरिएंट कभी भी आ सकता है और हमें इसके जोखिम के बारे में दोबारा सोचना पड़ेगा। तीन में से एक की हो सकती है मौत : ब्रिटेन के एक्सपर्ट का कहना है कि नया वैरिएंट तीन में से एक मौत का जिम्मेदार हो सकता है। ऐसा इसलिए है कि ओमिक्रॉन वायरस वंश के एक अलग हिस्से से विकसित हुआ था, लेकिन इस बात की संभावना बिल्कुल नहीं है कि अगला वैरिएंट ओमिक्रॉन से ही विकसित होगा।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चार महीने तक ईंधन की कीमतें स्थिर रहने के बाद मंगलवार को कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोत्तरी होनी शुरू हुई। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस लगातार बढ़ती हुई कीमतों की वजह क्या है? यह सवाल केंद्रीय सड़क परिवहन और महामार्ग मंत्री नितिन से पूछा गया। नितिन गडकरी ने इसका जवाब दिया। ईंधन की दर दिन-ब-दिन आउट ऑफ कंट्रोल होता जा रहा है। लगातार पांचवे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े हैं। इन पांच दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम चार बार बढ़ाए गए हैं। शनिवार (26 मार्च) को भी ईंधन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी की है। शनिवार को पेट्रोल-डीजल के दामों में 80 पैसों की बढ़ोत्तरी हई है। इस तरह पिछले पांच दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 3 रुपए 20 पैसे तक दाम बढ़ चुके हैं। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की बात करें तो यहां पेट्रोल के दाम 84 पैसे तो डीजल के दाम 85 पैसे बढ़े। इस तरह मुंबई में शनिवार को पेट्रोल की कीमत 112.51 रुपए प्रति लीटर से बढ़ कर 113.35 रुपए प्रति लीटर हो गई। इसी तरह डीजल की कीमत 96.70 रुपए से बढ़ कर 97.55 रुपए प्रति लीटर हो गया। इस तरह दिल्ली की बात छोड़ दें तो लगभग सभी महानगरों में पेट्रोल का दाम 100 रुपए को क्रॉस कर चुका है। दिल्ली में शनिवार को पेट्रोल की कीमत 98.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल की दर 89.87 रुपए प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस बेतहाशा होती हुई बढ़ोत्तरी की वजह से आम आदमी की जेब पर काफी बोझ बढ़ा है। चार महीने तक ईंधन की कीमतें स्थिर रहने के बाद मंगलवार को कीमतों में एक बार फिर से बढ़ोत्तरी होनी शुरू हुई। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इस लगातार बढ़ती हुई कीमतों की वजह क्या है? यह सवाल केंद्रीय सड़क परिवहन और महामार्ग मंत्री नितिन गडकरी से पूछा गया। नितिन गडकरी ने इसका जवाब दिया। पेट्रोल-डीजल की कीमतें रोज क्यों बढ़ रही? इस सवाल के जवाब में बोले गडकरी : नितिन गडकरी ने कहा, भारत में 80 फीसदी तेल आयात किया जाता है। इस वक्त रशिया और यूक्रेन का युद्ध शुरू है। इस युद्ध का असर कई देशों पर हो रहा है। युद्ध के काल में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने की वजह से हम कुछ नहीं कर सकते। ईंधन की कीमतें बढ़ने का टेंशन होगा कम, हर पांच किलोमीटर पर बन रहे हैं चार्जिंग स्टेशन : 19 मार्च 2022 तक देश में 10 लाख 60 हजार 707 इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। यह जानकारी सड़क परिवहन और हाइवे मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में दी। एक सवाल के जवाब में नितिन गडकरी ने कहा, ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशियंसी के मुताबिक 21 मार्च 2022 तक देश में 1742 सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन कार्यरत हो चुके हैं। देश के अहम महामार्गों पर 5 किलोमीटर के अंतर पर चार्जिंग स्टेशन बनाने का काम किया जा रहा है। जब ज्यादातर लोग इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने शुरू कर देंगे तो बहुत हद तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का असर कम हो जाएगा। यह वजह है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता दिखाई जा रही है। सरकार की ओर से इसे बढ़ावा देने के लिए जोर दिया जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कांग्रेस ने शुक्रवार को अपने तीन राष्ट्रीय सचिवों उमंग सिंघार, वीरेंद्र सिंह राठौर और बीएम संदीप को उनके उत्तरदायित्व से मुक्त करके गुजरात की जिम्मेदारी सौंप दी है। पार्टी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के ये तीनों सचिव अब कांग्रेस के गुजरात प्रभारी रघु शर्मा के साथ काम करेंगे। सिंघार अब तक झारखंड, राठौर बिहार और संदीप महाराष्ट्र में पार्टी प्रभारियों के साथ काम कर रहे थे। कांग्रेस ने गुजरात के लिए रामकिशन ओझा के तौर पर एक और सचिव की नियुक्ति की है। वह भी रघु शर्मा के साथ प्रदेश में काम करेंगे। पार्टी ने गुजरात में काम कर रहे अपने दो सचिवों जितेंद्र बघेल और बिश्वरंजन मोहंती को उनके उत्तरदायित्व से मुक्त किया है। गुजरात में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। योगी आदित्यनाथ के लिए आज बहुत ही बड़ा दिन है, आज योगी दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर कार्यभार संभालेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में करीब 70 हजार लोगों की उपस्थिति में लगातार दूसरी बार देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस समारोह में शामिल होने के लिए पीएम मोदी लखनऊ एयरपोर्ट पहुंच गए हैं। योगी सरकार ने नए मंत्रिमंडल की लिस्ट जारी कर दी है। केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाया गया है। योगी आदित्यनाथ के साथ 52 मंत्री आज शपथ लेंगे। इन लोगों के नाम इस मंत्रिमंडल में शामिल किया है जो इस प्रकार हैं। केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, भूपेंद्र सिंह चौधरी, अनिल राजभर, जितिन प्रसाद, राकेश सचान, अरविंद कुमार शर्मा, योगेंद्र उपाध्याय, आशीष पटेल, संजय निषाद को कैबिनेट में जगह मिली है। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)नितिन अग्रवाल, कपिलदेव अग्रवाल, रवीन्द्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश चंद्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, असीम अरुण, जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, नरेंद्र कश्यप, दिनेश प्रताप सिंह, अरुण कुमार सक्सेना, दयाशंकर मिश्र दयालु का नाम शामिल है। राज्य मंत्री के तौर पर मयंकेश्वर सिंह, दिनेश खटिक, संजीव गौड़, बलदेव सिंह ओलख, अजीत पाल, जसवंत सैनी, रामकेश निषाद, मनोहर लाल मन्नू कोरी, संजय गंगवार, बृजेश सिंह, केपी मलिक, सुरेश राही, सोमेंद्र तोमर, अनूप प्रधान, प्रतिभा शुक्ला, राकेश राठौर, रजनी तिवारी, सतीश शर्मा, दानिश आजाद अंसारी, विजय लक्ष्मी गौतम का नाम शामिल हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ "परीक्षा पे चर्चा" कार्यक्रम के पांचवें संस्करण का आयोजन यहां तालकटोरा स्टेडियम में एक अप्रैल को किया जाएगा। संवाद कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री छात्रों को परीक्षा के तनाव को दूर करने के गुर बताएंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने ट्वीट किया, इंतजार अब खत्म हो गया है! परीक्षा पे चर्चा का 5 वां संस्करण 1 अप्रैल, 2022 को तालकटोरा स्टेडियम, नयी दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों के साथ बातचीत करेंगे और परीक्षा के तनाव का सामना करने को लेकर अपने विचार साझा करेंगे। स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ प्रधानमंत्री के इस संवाद कार्यक्रम का पहला संस्करण यहां तालकटोरा स्टेडियम में 16 फरवरी, 2018 को आयोजित किया गया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि 12-14 साल के आयु समूह को कोविड रोधी टीके की 72 लाख से ज्यादा खुराकें लगाई जा चुकी हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोविड-19 रोधी टीकों की 1,82,23,30,356 करोड़ से अधिक खुराक दी गई हैं। बुधवार शाम सात बजे तक 28 लाख 17 हजार 612 से ज्यादा खुराकें लगाई गई थी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 12-14 साल आयु वर्ग को टीकों की 69,99,528 खुराकें लगाई जा चुकी हैं। उसने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों, अग्रिम पंक्ति के कर्मियों और 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को 2.21 करोड़ से ज्यादा ऐहतियाती खुराक लगाई जा चुकी हैं। सफलता की ओर बढ़ता टीकाकरण अभियान : मनसुख मंडाविया ने ट्वीट किया कि देश को अपने युवा योद्धाओं पर बेहद गर्व है। देश में 16 मार्च से कोविड-19 के खिलाफ 12 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण कार्बेवैक्स वैक्सीन के साथ शुरू हुआ था। इसके अलावा, सरकार ने प्रिकाशन डोज हासिल करने के लिए 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कामरेडिटी की शर्त को माफ करने का भी फैसला किया था। 28 दिनों के अंतराल में दी जाएगी दूसरी डोज : सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 12 से 14 साल के आयु वर्ग के बच्चों को बायोलाजिकल ई के इंट्रामस्क्युलर वैक्सीन कार्बेवैक्स की दो खुराक 28 दिनों के अंतराल में दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना टीकाकरण का आंकड़ा 181.89 करोड़ (1,81,89,15,234) के पार पहुंच गया है। कोरोना महामारी की मार झेलने के बाद देश में कोविड के खिलाफ टीकाकरण 16 जनवरी, 2021 को शुरू हुआ, जिसके बाद सभी के लिए टीकाकरण के नए चरण की शुरूआत 21 जून, 2021 से हुई। देश में टीकाकरण अभियान को गति वक्त पर टीकों की उपलब्धता के कारण मिली है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत भारत सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मुफ्त में कोरोना के टीके उपलब्ध करा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रचंड बहुमत के बाद 25 मार्च को लगातार दूसरी बार योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रिमंडल में पूर्वांचल का भी रसूख बढ़ने की उम्मीद है। पूर्वांचल के कई नेताओं को मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। इसके लिए कयासों के साथ ही प्रयासों का भी दौर शुरू है। विधानसभा चुनाव में गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ जैसे जिलों में अहम भूमिका निभाने वाले एमएलसी व प्रदेश उपाध्यक्ष एके शर्मा की भी ताजपोशी हो सकती है। इसके साथ ही वाराणसी सहित आसपास के जिलों से चुने गए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। पूर्वांचल के जरिए जातीय समीकरण साधने की कोशिश : योगी-2 सरकार के गठन से पहले बृहस्पतिवार को गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मंत्रिमंडल की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। पूर्वांचल में बलिया से लेकर प्रयागराज तक एक दर्जन से ज्यादा विधायकों के मंत्री बनने की संभावना है। दरअसल, पूर्वांचल के जरिए ही जातीय समीकरण भी साधने की पूरी कवायद होगी। यही कारण है कि ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार, पिछड़ी जाति के राजभर, पटेल, बिंद सहित अनुसूचित जाति के विधायक अपनी बारी की उम्मीद में है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो वाराणसी के अनिल राजभर को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके अलावा पिछली बार मंत्रिमंडल में रहे रविंद्र जायसवाल और डॉ नीलकंठ तिवारी पर विचार किया जा रहा है। पटेल नेताओं में मिर्जापुर के रमाशंकर पटेल व अनुराग पटेल के साथ ही रोहनिया विधायक डॉ सुनील पटेल और सेवापुरी विधायक नीलरतन पटेल भी दौड़ में है। राजपूत विधायकों में बलिया के दयाशंकर सिंह, सैयदराजा के सुशील सिंह भी शामिल हैं। मऊ के मधुबन विधायक राम विलास चौहान, मझवा के डॉ विनोद बिंद भी अपनी जगह बनाने में जुटे हैं। इसके साथ ही अनुसूचित जाति को साधने में वाराणसी के अजगरा सीट से विधायक टी राम, मिर्जापुर के राहुल कोल, सोनभद्र के दुद्दी के रामदुलार व ओबरा के संजीव कुमार में से किसी को मौका मिल सकता है। फिलहाल बृहस्पतिवार की अहम बैठक पर विधायकों की निगाह टिकी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की चिंता इस वक्त जरूर बढ़ रही होगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्य में कुछ महीने पहले (अक्टूबर 2021 में) मंडी संसदीय सीट, अर्की, फतेहपुर और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने आंतरिक जांच के लिए एक टीम नियुक्त की जिसका निष्कर्ष यह था कि पार्टी (मुख्यमंत्री) मंडी के मिजाज को पढऩे और छह बार के राज्य के मुख्यमंत्री और दिवंगत कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के लिए जनता के समर्थन को समझने में विफल रही। उपचुनाव के नतीजे निश्चित रूप से चौंकाने वाले थे क्योंकि ठाकुर न केवल मंडी जिले से ताल्लुक रखते हैं बल्कि मंडी संसदीय क्षेत्र से भी भाजपा के पहले मुख्यमंत्री थे, जहां मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और भरमौर (चंबा) जिलों में 17 विधानसभा सीट हैं। अर्की और फतेहपुर पर कांग्रेस का कब्जा था जबकि भाजपा के पास जुब्बल-कोटखाई और लोकसभा सीट थी। जुब्बल कोटखाई में पड़े मतों में से केवल चार प्रतिशत वोट से ही भाजपा उम्मीदवार को जीत मिली। हार की कोई जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए ठाकुर ने महंगाई और कीमतों में बढ़ोतरी को इस झटके के लिए जिम्मेदार ठहराया। एक तरह से यह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सीधी आलोचना थी, जो नरेंद्र तोमर के साथ-साथ पर्यवेक्षक की भूमिका में भी रहीं और उन्होंने इस पद के लिए ठाकुर के नाम की सिफारिश भी की थी। पेचीदा मामला यह है कि ठाकुर मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद नहीं थे। भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने 2017 के चुनावों से ठीक नौ दिन पहले पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पी के धूमल के नाम की घोषणा की थी। लेकिन धूमल चुनाव हार गए और इसका फायदा ठाकुर को मिला जिनके बारे में कई लोगों की निजी राय यह है कि उन्हें अपनी योग्यता से ज्यादा मिल गया। 1990 के बाद से ही इस राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच द्विध्रुवीय मुकाबला देखने को मिलता रहा है। लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) ने भी घोषणा की है कि वह इस बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा की सभी 68 सीट पर चुनाव लड़ेगी। आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में से एक और राज्य के पूर्व डीजीपी आई डी भंडारी ने कहा, भाजपा और कांग्रेस को लेकर लोगों में कोई उत्साह नहीं दिखता है और यही कारण है कि जनता हर पांच साल में सरकार बदलती है। लेकिन हम अपनी सदस्यता बढ़ाने के लिए दोनों दलों की ओर देख रहे हैं। उपचुनाव के नतीजों के बाद हिमाचल में कांग्रेस उत्साहित है लेकिन इसमें आंतरिक गुटबाजी ज्यादा है। सुखविंदर सिंह सुक्खू कांग्रेस के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जिनके निधन के बाद मंडी उपचुनाव हुए उनके साथ उनकी नहीं बनती थी। शिमला के एक राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, राज्य में कांग्रेस की मुख्य समस्या हमेशा से गुटबाजी रही है। पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव में किसी भी नेता को पार्टी का नेतृत्व करने के लिए पेश करना मुश्किल होगा। सुक्खू एक बड़े नेता हैं लेकिन पार्टी में आशा कुमारी और कुलदीप राठौर जैसे अन्य बड़े नेता भी हैं। ऐसे में सामूहिक नेतृत्व ही पार्टी के लिए सुरक्षित तरीका है। हालांकि इसके खत्म होने की संभावना नहीं है। गुजरात का मामला भी अलग है। 2017 के बाद इस राज्य में कांग्रेस की संभावनाएं तेजी से कम हो गई हैं। 2017 में पार्टी का प्रदर्शन उतना बुरा नहीं था जितना कि डर था। भाजपा ने विधानसभा की 182 सीट में से 99 जीतीं। कांग्रेस को 77 सीट पर जीत मिली। लेकिन वह सरकार नहीं बना पाई। बाद में कई विधायक भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी हाल ही में हुए पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में बुरी तरह हार गई थी। पार्टी को बेहतर स्थिति में लाने के लिए कांग्रेस ने तेजतर्रार पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया। पटेल ने जुलाई 2015 में पाटीदारों के आरक्षण के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था। इस आंदोलन के दौरान 14 पाटीदार युवाओं की मौत हो गई थी और उससे जुड़ी हिंसा में इस समुदाय के नेताओं के खिलाफ 438 मामले दर्ज किए गए थे। हार्दिक पटेल ने राज्य सरकार को मामलों को वापस लेने या फिर आंदोलन का सामना करने के लिए 23 मार्च तक का समय दिया है। उनका तर्क यह है कि राज्य सरकार और केंद्र ने गरीबों और पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने और आर्थिक रूप से पिछड़ी सवर्ण जातियों के लिए 10 प्रतिशत कोटा देने के लिए सहमति जताई थी। ऐसे में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की स्थिति असहज हो गई है क्योंकि अगर वह मामलों को वापस ले लेते हैं तो इसका मतलब यह हिंसा को स्वीकार करने के समान है और अगर वह इससे इनकार करते हैं तो एक और आंदोलन देखा जा सकता है। भाजपा ने कुछ महीने पहले ही विजय रूपाणी की जगह लगभग कम मशहूर भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया। पटेल पूर्व मुख्यमंत्री और पाटीदार समुदाय से ताल्लुक रखने वाली आनंदीबेन पटेल के दबाव के कारण शीर्ष पद पर बने हुए हैं। लेकिन एक और चुनौती है आप। हालांकि गुजरात के कांग्रेस प्रभारी रघु शर्मा आप को चुनौती के रूप में नहीं देखते हैं। लेकिन वह मानते हैं कि कांग्रेस की एक समस्या है। उन्होंने कहा, हमने बूथ पर संगठन को कभी मजबूत नहीं किया। हमने एक माहौल बनाया। ऐसा लगने लगा जैसे सरकार बदल जाएगी। लेकिन भाजपा ने हमसे ज्यादा बूथ पर ध्यान केंद्रित किया, यह इसकी जीत की एक प्रमुख वजह थी। पंजाब में कई दशकों में पहली बार इस चुनाव में कई दलों के बीच मुकाबला देखने को मिला। लंबे समय बाद गुजरात में भी गंभीर रूप से बहु-आयामी मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि अब आप भी मैदान में उतर चुकी है।
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