एबीएन सेंट्रल डेस्क। 114 मल्टी रोल वाले लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के टेंडर के लिए भारतीय वायु सेना देश के अंदर विमानों के उत्पादन के लिए रणनीतिक साझेदारी नीति मॉडल पर बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट अपनाना पसंद करेगी। बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया विदेशी हथियार सिस्टम के अधिग्रहण को सुगम बनाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तहत रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में प्रदान की गई खरीद प्रक्रिया की एक कैटेगरी है और देश के अंदर उनका उत्पादन रक्षा कार्यक्रम में मेक इन इंडिया के तहत होता है। स्वदेशी एलसीए तेजस और 5वीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट के साथ 114 एमआरएफए प्रोजेक्ट को भी भारतीय वायु सेना को उत्तरी और पश्चिमी दोनों विरोधियों पर बढ़त बनाए रखने की आवश्यकता होगी। वहीं सरकारी सूत्रों ने बताया कि हम बाय ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट के लिए जाना पसंद करेंगे, जिसे वेंडर भी पसंद करते हैं और जिनके कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है। तीन अमेरिकी विमान समेत F-18, F-15 और F-21, रूसी मिग -35, Su-35, फ्रेंच राफेल, स्वीडिश साब ग्रिपेन और यूरोफाइटर टाइफून विमान के कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। सूत्र ने आगे कहा कि भारतीय वायु सेना ने अधिग्रहण प्रक्रिया पर इन कंपनियों के विचार भी मांगे थे, जिन्हें वे कार्यक्रम में चुनना चाहेंगे और उनमें से ज्यादातर ने सिर्फ ग्लोबल मेक इन इंडिया रूट के लिए प्रायोरिटी दिखाई है। साथ ही सूत्रों ने कहा कि बल ने परियोजना पर सरकार से निर्देश मांगा है कि वो आगे की कार्रवाई के लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी के लिए प्रोजेक्ट को कब आगे बढ़ा सकता है। सूत्रों ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान के दो स्क्वाड्रन 35 विमानों के साथ पूरी तरह काम करते है, जो पहले ही फ्रांस से आ चुके हैं। वहीं अब डिलीवरी के लिए सिर्फ एक विमान बचा है। सूत्रों ने आगे कहा कि इंडियन एयरफोर्स को निश्चित रूप से अधिक विमानों की आवश्यकता होगी, क्योंकि दोनों स्क्वाड्रन केवल बल की आपातकालीन आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने आयुर्वेद और योग जैसी स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ने की आवश्यकता पर बृहस्पतिवार को जोर दिया दिया ताकि लोगों को समग्र स्वास्थ्य देखभाल समाधान दिया जा सकें। यहां चिकित्सा विज्ञान राष्ट्रीय प्रतिष्ठान के 62वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि औषधि की पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रणालियों के अपने-अपने फायदे हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियां एहतियाती स्वास्थ्य देखभाल में प्रभावी हैं जबकि आधुनिक औषधियों की बीमारियों के निदान और इलाज में अहम भूमिका है। उन्होंने कहा, हमारी अपनी स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों जैसे कि आयुर्वेद और योग को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से जोड़ना वक्त की जरूरत है। महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई पर मांडविया ने कहा कि भारत के कोविड-19 प्रबंधन और टीकाकरण अभियान से दुनिया हैरान है। महामारी के दौरान भारत की स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में प्रगति पर मंत्री ने कहा, हमने न केवल कोविड टीके बनाए बल्कि बेहद कम वक्त में उनका निर्माण और निर्यात भी किया। भारत की कोविड प्रबंधन रणनीति पर निराशाजनक अनुमान लगाए गए थे। लेकिन हम न केवल महामारी से अच्छे तरह से निपट पाए बल्कि दुनियाभर में हमारी सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रणाली भी साझा की। मांडविया ने कहा, इस देश में कभी मानवश्रम या मस्तिष्क शक्ति की कमी नहीं थी। हमारे में केवल आत्मविश्वास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवोन्मेष किसी भी देश को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, आज गुजरात के धोलावीरा जाते हैं, लोथल जाते हैं। धोलावीरा की 5,000 साल पुरानी सभ्यता है। यह दिखाता है कि हम कितने सभ्य थे, उस समय हमारा विज्ञान कितना विकसित था। मांडविया ने प्रतिष्ठान और अनुसंधानकर्ताओं को शोध और नवोन्मेष के लिए निजी क्षेत्र के साथ भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और मिजोरम को मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के कहीं भी हो रहे प्रसार को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखने और चिंता वाले क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर पहले से ही कदम उठाने के सुझाव दिए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने एक पत्र में दिल्ली और चार राज्यों को जांच, पहचान, उपचार, टीकाकरण और कोविड उपयुक्त व्यवहार के पालन की पांच सूत्रीय रणनीति का पालन करने की सलाह दी। साथ ही पत्र में भीड़भाड़ वाले स्थान में मास्क पहनने पर विशेष जोर दिया गया। पत्र में कहा गया, यह आवश्यक है कि राज्य सख्त निगरानी बनाए रखें और कोरोना वायरस संक्रमण के कहीं भी हो रहे प्रसार को रोकने के लिए चिंता वाले स्थानों पर जरूरत पड़ने पर पहले ही कदम उठाएं। उन्होंने पत्र में कहा कि किसी भी स्तर पर ढिलाई अब तक कोविड के प्रबंधन में हासिल उपलब्धि को परास्त कर देगी। गौरतलब है कि इन राज्यों और राष्ट्रीय राजधानी में इस सप्ताह में संक्रमण के मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बुधवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, राष्ट्रीय कोविड-19 टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ वीके पॉल, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव, एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बैठक में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और मिजोरम की वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से चर्चा की गई, जहां कोविड-19 के मामले खतरनाक रूप से बढ़ रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि बैठक में राज्यों को टीकाकरण बढ़ाने और नए कोविड मामलों की निगरानी करने और संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक रोकथाम प्रयास करने का निर्देश का निर्णय लिया गया। अधिकारी ने कहा कि कोविड के बढ़ते मामलों से केंद्र सरकार चिंतित है। आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को समाप्त हुए अंतिम सप्ताह में महाराष्ट्र में 693 नए मामले सामने आए हैं, जिसमें पॉजिटिविटी 0.39 प्रतिशत से बढ़कर 0.40 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में इसी अवधि के दौरान 217 नए मामले सामने आए और पॉजिटिविटी 0.03 प्रतिशत से बढ़कर 0.09 प्रतिशत हो गई।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर बृहस्पतिवार को लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के जिलों में मास्क की अनिवार्यता को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वायरस का यह स्वरूप सामान्य वायरल संक्रमण की तरह है, लेकिन इससे बचाव के लिए सतर्क रहना होगा। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि कोविड-19 के नए मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, ऐसे में एनसीआर के जनपदों और लखनऊ में सार्वजनिक स्थानों पर सभी के लिए मास्क लगाने की अनिवार्यता को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। प्रवक्ता के मुताबिक, योगी ने निर्देश दिए कि लोगों को कोविड प्रोटोकॉल के अनुपालन के लिए जागरूक किया जाए। इस बाबत जन संचार प्रणाली का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाए। प्रवक्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना होगा। उन्होंने स्कूलों में जरूरत के हिसाब से कोविड प्रोटोकॉल के बारे में जागरुकता फैलाने के निर्देश दिए। योगी ने बच्चों के टीकाकरण अभियान को गति देने की अहमियत बताते हुए कहा कि 12 से 14 साल के बच्चों को पहली खुराक के बाद अब पात्रता के अनुसार दूसरी खुराक भी दी जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में नए मामलों में इजाफा देखने को मिल सकता है, मगर वायरस का यह स्वरूप सामान्य वायरल संक्रमण की तरह ही है। योगी ने कहा कि कोविड-19 रोधी टीका लगवा चुके लोगों में संक्रमण का खतरा कम हो जाता है, ऐसे में उन्हें बताया जाए कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता और सावधानी बरतना जरूरी है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक हितों में साझेदारी बढ़ रही है और दोनों पक्ष एक लचीली और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहते हैं जो सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करे। सिंह ने कहा कि भारत-अमेरिका "2+2" संवाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच सार्थक बातचीत ने दोनों पक्षों के बीच अधिक महत्वाकांक्षी और रणनीतिक जुड़ाव के लिए आधार तैयार किया है। इंडिया अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र की समान दृष्टि साझा करते हैं। उन्होंने कहा, रणनीतिक हितों पर हमारा जुड़ाव बढ़ रहा है क्योंकि दोनों देश लचीली, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था चाहते हैं जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करे, लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखे और सभी के लिए शांति और समृद्धि को बढ़ावा दे। रक्षा मंत्री ने भारत-अमेरिकी आर्थिक जुड़ाव को 21वीं सदी के परिभाषित व्यावसायिक संबंधों में से एक बताते हुए कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में द्विपक्षीय व्यापार में उछाल आया है, जो माल में 113 अरब डॉलर को पार कर गया है। उन्होंने कहा, इस बढ़ते व्यापार के संदर्भ में, भारत-अमेरिका व्यापार नीति मंच में द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने, बाजार पहुंच बाधाओं को दूर करने और व्यापार की सुगमता में सुधार के लिए चर्चा तेजी से महत्वपूर्ण हो गई है। सिंह ने कहा कि अमेरिका-भारत संबंधों का "रक्षा स्तंभ" दिनों दिन मजबूत हो रहा। उन्होंने कहा कि यह मूलभूत द्विपक्षीय समझौतों, सैन्य जुड़ाव, रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में सहयोग देने पर आधारित है और इस में अब सह-विकास और सह-उत्पादन पर नए सिरे से दिया जा रहा बल भी शामिल हुआ है। सिंह ने कहा, देर से ही सही, कुछ अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी में अपनी स्थानीय उपस्थिति का विस्तार किया है और वे भारत में भारत और दुनिया के लिए उत्पादन कर रही हैं। हालांकि, हमारा मानना है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है। भारत-अमेरिका "2+2" संवाद 11 अप्रैल को वाशिंगटन में हुआ था। रक्षा मंत्री सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ बातचीत की थी। बातचीत से पहले, उस दिन प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडन ने डिजिटल माध्यम से बैठक की थी, जिसके दौरान यूक्रेन संकट का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चेन्नई के गणितीय विज्ञान संस्थान के एक शोधकर्ता का अनुमान है कि कोविड-19 के लिए भारत में प्रभावी रीप्रोडक्शन नंबर (आर) जनवरी के बाद पहली बार बढ़कर एक से अधिक हो गया है। यह नंबर बताता है कि संक्रमण कितनी तेजी से फैल रहा है। सीताभ्र सिन्हा के अनुसार पिछले कुछ हफ्तों में लगातार बढ़ रही आर वैल्यू 12-18 अप्रैल के बीच के सप्ताह के लिए 1.07 थी। जबकि 5-11 अप्रैल के सप्ताह में यह 0.93 थी। सिन्हा ने कहा कि पिछली बार आर वैल्यू एक से ऊपर (1.28) 16-22 जनवरी के बीच के सप्ताह में थी। महामारी की शुरूआत से ही भारत के लिए आर वैल्यू पर नजर रखने वाले गणितज्ञ ने बताया, आर-वैल्यू में यह बढ़ोतरी सिर्फ दिल्ली की वजह से ही नहीं हो रही बल्कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कारण भी हुई है। एक से अधिक आर वैल्यू से पता चलता है कि उपचाराधीन मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। महामारी को नियंत्रित करने के लिए आर वैल्यू एक से नीचे होनी चाहिए। एक से कम आर वैल्यू से पता चलता है कि बीमारी फैलना बंद हो जाएगी क्योंकि ज्यादा लोग संक्रमित नहीं हो रहे। इस वर्ष आर वैल्यू 1-10 जनवरी के बीच उच्चतम थी, जो 2.98 तक पहुंच गयी, जब भारत में कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप की वजह से तीसरी लहर शुरू हुई थी। श्री सिन्हा ने कहा कि लगभग सभी प्रमुख शहरों मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में आर वैल्यू एक से अधिक है। वास्तव में, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में आर वैल्यू दो से ऊपर है। कोलकाता के लिए डेटा उपलब्ध नहीं है। अनुमानित आर वैल्यू 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में दिल्ली के लिए 2.12, उत्तर प्रदेश के लिए 2.12, कर्नाटक के लिए 1.04, हरियाणा के लिए 1.70, मुंबई के लिए 1.13, चेन्नई के लिए 1.18 और बेंगलुरु के लिए 1.04 है। प्रमुख राज्यों में, केरल और महाराष्ट्र में क्रमश: 0.72 और 0.88 आर वैल्यू हैं, जो एक से कम है। सिन्हा ने कहा, कर्नाटक में भी वर्तमान में आर वैल्यू एक से अधिक है, जो शायद बेंगलुरु में बढ़ते मामलों के कारण हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार को अद्यतन किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 2,067 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस से अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 4,30,47,594 हो गई। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या भी बढ़कर 12,340 पर पहुंच गई। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 480 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 0.49 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.38 प्रतिशत है। दिल्ली में मंगलवार को कोविड-19 के मामलों में करीब 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी लेकिन संक्रमण दर 4.42 प्रतिशत दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को 632 नए मामले आए थे, वहीं सोमवार को 501 लोगों के संक्रमित होने की सूचना मिली थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरस से संबंधित ड्यूटी कर रहे हेल्थवर्कर्स के लिए इंश्योरेंस को मंगलवार से 180 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि अब तक 1905 दावों का भी निपटारा किया जा चुका है। मंत्रालय ने कहा कि कोविड के मरीजों की देखभाल के लिए जिन हेल्थवर्कर्स को तैनात किया गया है, उनके आश्रितों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए इस पॉलिसी को विस्तार देने का फैसला लिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज की 30 मार्च 2020 को शुरुआत होने से लेकर अब तक 1905 ऐसे हेल्थवर्कर के दावों का निपटारा किया जा चुका है, जिनकी कोविड ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। PMGKP का उद्देश्य 22.12 लाख हेल्थवर्कर्स को 50 लाख रुपये का दुर्घटना कवच प्रदान करना था। इनमें ऐसे कम्यूनिटी हेल्थवर्कर और प्राइवेट हेल्थवर्कर शामिल हैं, जो कोविड के मरीजों के कॉन्टैक्ट में बने हुए हों और जिन्हें कोरोना से संक्रमित होने का खतरा है। दिल्ली में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। संक्रमण के नए मामले आज 600 के पार पहुंच गए हैं। हालांकि संक्रमण दर में कमी दर्ज की गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जामनगर में विश्व स्वास्थ्य संगठन के पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक केंद्र का उद्घाटन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि आज हम सभी पूरी दुनिया में हेल्थ एंड वेलनेस के लिए एक बहुत बड़े आयोजन के साक्षी बन रहे हैं। मैं WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ टेडरोस का विशेष रूप से आभारी हूं। अभी उन्होंने भारत की प्रशंसा में जो शब्द कहे, मैं प्रत्येक भारतीय की तरफ से उनका धन्यवाद करता हूं। उन्होंने कहा कि WHO ने ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर के रूप में भारत के साथ एक नई पार्टनरशिप की है। ये ट्रेडिशनल मेडिसिन के क्षेत्र में भारत के कंट्रीब्यूशन और भारत के पोटेंशियल दोनों का सम्मान है। भारत इस पार्टनरशिप को पूरी मानवता की सेवा के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी के रूप में ले रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज जब भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। उस कालखंड में ये जो शिलान्यास हुआ है, वो शिलान्यास आने वाले 25 साल के लिए विश्व भर में ट्रेडिशनल मेडिसिन के युग का आरंभ कर रहा है। पांच दशक से भी ज्यादा समय पहले,जामनगर में विश्व की पहली आयुर्वेद यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी। यहां एक बेहतरीन आयुर्वेद संस्थान Institute of Teaching Research in Ayurveda है। अब विश्व स्वास्थ्य संगठन का ये ग्लोबल सेंटर वेलनेस के क्षेत्र में जामनगर को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई देगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रही है। बल्कि ये लाइफ की एक holistic science है। ग्लोबल सेंटर के लिए PM मोदी ने रखे 5 लक्ष्य : प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं इस ग्लोबल सेंटर के लिए पांच लक्ष्य भी रखना चाहता हूं। 1. पहला लक्ष्य- टेक्नोलॉली का उपयोग करते हुए, ट्रेडिशनल विद्याओं के संकलन का है, उनका डेटाबेस बनाने का है। 2. दूसरा लक्ष्य- GCTM को पारंपरिक औषधियों की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के लिए इंटरनेशनल स्टैंडर्ड भी बनाने चाहिए। 3. तीसरा लक्ष्य– GCTM एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनना चाहिए जहां विश्व की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के एक्सपर्ट्स एक साथ आएं, एक साथ जुटें, अपने अनुभव साझा करें। 4. चौथा लक्ष्य– रिसर्च में निवेश से जुड़ा होना चाहिए। GCTM को ट्रेडिशिनल मेडिसीन के क्षेत्र में रिसर्च के लिए फंडिंग को मोबिलाइज करना चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सोमवार को भूकंप आया। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी और कहा कि भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजकर 9 मिनट पर 3.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र किश्तवाड़ में था।अधिकारियों ने कहा कि इससे किसी तरह के जानमाल के नुकसान की जानकारी नहीं मिली है।
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