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शिक्षा और स्वास्थ्य मनुष्य की महत्वपूर्ण जरूरतें हैं : भागवत
Published / 2022-04-23 03:47:20
शिक्षा और स्वास्थ्य मनुष्य की महत्वपूर्ण जरूरतें हैं : भागवत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि स्वास्थ्य मनुष्य के लिए भोजन, वस्त्र और आवास जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने यहां महाराष्ट्र आरोग्य मंडल के एक अस्पताल का उद्घाटन करने के बाद कहा, स्वास्थ्य भोजन, वस्त्र, आवास और समाज में सम्मानजनक जीवन की इच्छा की तरह ही मनुष्य की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। शिक्षा और स्वास्थ्य दो चीजें हैं, जो जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं और ये सभी को मिलनी चाहिए। उन्होंने किफायती और सुलभ तरीके से उत्कृष्ट समग्र उपचार प्रदान करने के लिए महाराष्ट्र आरोग्य मंडल की प्रशंसा की और कहा कि वर्तमान में समाज में इस तरह के काम की अत्यधिक आवश्यकता है।

बत्ती गुल : गर्मी से बढ़ी मांग और कोयले की किल्लत ने बढ़ाया बिजली संकट
Published / 2022-04-23 03:40:03
बत्ती गुल : गर्मी से बढ़ी मांग और कोयले की किल्लत ने बढ़ाया बिजली संकट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के कई राज्यों में मार्च मध्य से जारी ग्रीष्म लहर के कारण बढ़ी मांग और इसी बीच पैदा हुई कोयले की किल्लत से बिजली की कमी हो गई है। इस कारण सात राज्य घंटों बिजली कटौती करने पर मजबूर हो गए हैं। हर साल गर्मी के सीजन में देश में बिजली की मांग चरम पर होती है, लेकिन कोयले की कमी के कारण कई राज्यों में संकट गहरा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गोवा व कर्नाटक में मध्य मार्च से ही गर्मी बढ़ गई थी। इस कारण इन राज्यों में बिजली की मांग एकदम बढ़ गई। ऐसे में इन राज्यों को उद्योगों व कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आपूर्ति का कार्यक्रम नए सिरे से निर्धारित करना पड़ा। इन्हें कई घंटों कटौती भी करना पड़ रही है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में देश के कुछ राज्यों को गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा। बिजली की मांग 38 सालों की सर्वाधिक : देश में अप्रैल के पहले पखवाड़े में बिजली की मांग पिछले 38 सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसी बीच यूक्रेन संकट के कारण आयातित कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ने लगा। यही कारण देश के ताप बिजली घरों में कोयला का स्टॉक तेजी से घटने लगा। 26 दिन का कोयला स्टॉक जरूरी : आमतौर पर कोयला संयंत्रों को पूर्ण क्षमता से चलाने के लिए 26 दिन का स्टॉक जरूरी है, लेकिन कोयले की प्रचूरता वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में भारी किल्लत हो गई। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो यह 36 फीसदी रह गया। कोयला बहुत राज्यों में ओडिशा, झारखंड व छत्तीसगढ़ शामिल हैं। बंगाल में कोयले का स्टॉक सामान्य से 1 से 5 फीसदी, राजस्थान में 1 से 25 फीसदी, यूपी में 14 से 21 फीसदी व मप्र में 6 से 13 फीसदी रह गया। देश में राष्ट्रीय औसत स्टॉक भी पिछले सप्ताह सामान्य स्तर से दो फीसदी कम होकर 36 फीसदी रह गया। राज्य मांग रहे केंद्र से अतिरिक्त बिजली, हरियाणा करेगा कोयला आयात : देश में पीक अवर में बिजली की फिलहाल कुल मांग 1,88,576 मेगावाट की बताई जा रही है। इसमें 3,002 मेगावाट की ही कमी बताई जा रही है, लेकिन दूसरी ओर कई राज्य भारी कमी झेल रहे हैं। उन्हें कटौती पर मजबूर होना पड़ रहा है। यही कारण है कि राज्य केंद्र से अतिरिक्त बिजली मांग रहे हैं। मध्य प्रदेश व पंजाब भी केंद्र से ज्यादा बिजली मांग रहे हैं। वहीं, हरियाणा ने पहली बार अपने ताप बिजली घरों के लिए 10 सालों में पहली बार कोयले के आयात का फैसला किया है।

दिल्ली मेट्रो में मास्क अनिवार्य, उल्लंघन पर 200 रुपये जुर्माना
Published / 2022-04-22 17:57:31
दिल्ली मेट्रो में मास्क अनिवार्य, उल्लंघन पर 200 रुपये जुर्माना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजधानी दिल्ली में कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने मेट्रो में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। डीएमआरसी के संचार प्रमुख अनुज दयाल ने शुक्रवार को बताया कि कोविड प्रबंधन के बारे में प्रशासन द्वारा जारी नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे मैट्रो में सफर के दौरान कोविड उपयुक्त व्यवहार जैसे मास्क लगाने आदि का पालन करें। उन्होंने कहा कि मेट्रो में यात्रियों के मास्क पहनने संबंधी दिशा-निर्देश का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। इन दिशानिर्देशों का पालन कराने के लिए मेट्रो कर्मचारियों के विशेष दस्ते औचक निरीक्षण करेंगे और मास्क ना पहनने वाले यात्रियों पर जुर्माना लगाएंगे।

इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग की घटनाओं पर नितिन गडकरी ने दी कंपनियों को कड़ी चेतावनी
Published / 2022-04-22 16:27:20
इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग की घटनाओं पर नितिन गडकरी ने दी कंपनियों को कड़ी चेतावनी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर में आग लगने की बढ़ते मामले को देखते हुए सरकार लापरवाही करने वाली कंपनियों के खिलाफ आवश्यक आदेश जारी करेगी। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जांच को लेकर एक एक्सपर्ट कमेटी के गठन का ऐलान किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जल्द ही इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर गाड़ियों की क्वालिटी को लेकर एक नई गाइडलाइन जारी की जाएगी और लापरवाही करने वाली कंपनियों पर भारी जुमार्ना लगाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर जांच में किसी कंपनी की ओर से लापरवाही पाई गई तो उस पर भारी जुमार्ना लगाया जाएगा। साथ ही बाजार से सभी खराब व्हीकल्स को वापस बुलाने का आदेश दिया जाएगा। गडकरी ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट्स आने तक कंपनियां खुद से बाजार में गए सभी खराब व्हीकल्स को वापस बुलाने की कार्रवाई कर सकती हैं। केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी : नितिन गडकरी ने ट्वीट कर कहा, पिछले दो महीनों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर से जुड़ी कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन घटनाओं में कुछ लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं। उन्होंने आगे कहा, हमने इन घटनाओं की जांच करने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है। साथ ही यह कमेटी भविष्य में ऐसी घटनाएं होने से रोकने के उपाय भी बताएगी। कमेटी के रिपोर्ट्स के आधार पर हम गड़बड़ी करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। मार्च से शुरू हुई आग लगने की घटना : इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने का पहला मामला 26 मार्च को सामने आया था, जब पुणे में एक ओला ए1 प्रो इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई थी। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इसी 26 मार्च की शाम तमिलनाडु के वेल्लोर में ओकिनावा इलेक्ट्रिक स्कूटर में आगने की घटना सामने आई। इसके दो दिन बाद 30 मार्च को चेन्नई में प्योर ईवी के एक इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने की घटना सामने आई थी। नासिक में 11 अप्रैल को ट्रक में भरे स्कूटरों में आग लग गई थी।

तेजी से बदल रही विश्व व्यवस्था में भारत के पास खुद को मजबूत बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं : राजनाथ सिंह
Published / 2022-04-22 16:25:27
तेजी से बदल रही विश्व व्यवस्था में भारत के पास खुद को मजबूत बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं : राजनाथ सिंह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत के पास अपनी रक्षा, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए खुद को मजबूत बनाने के अलावा कोई और दूसरा आॅप्शन नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया की व्यवस्था तेजी से बदल रही है। सिंह ने यह बात यूक्रेन-रूस युद्ध के संदर्भ में कही। सिंह ने डेफकनेक्ट 2.0 के उद्घाटन पर कहा कि दुनिया में बहुत सी चीजें हो रही हैं जो भारत को प्रभावित कर रही हैं। डेफकनेक्ट 2.0 रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट-अप, बड़ी कंपनियों और सशस्त्र बलों के कर्मियों को एक साथ लाने के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम है। सिंह ने कहा, जब हम एयरो इंडिया 2021 (21 फरवरी) में मिले थे, तब से अब तक दुनिया इतनी बदल गई है कि इसका हिसाब या आकलन नहीं किया जा सकता है। हर नया खतरा पिछले की तुलना में अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण लग रहा है। उन्होंने कहा, हम कोविड-19 के चलते पैदा हुए संकट से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि दुनिया अब यूक्रेन के संघर्ष के मुद्दे का सामना कर रही है। सिंह ने कहा, समय के साथ जिस तरह से विश्व व्यवस्था बदल रही है। हमारे पास खुद को मजबूत बनाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। मंत्री ने कहा कि इससे पहले भी, दुनिया ने पश्चिम एशिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अस्थिरता देखी है। उन्होंने कहा, इसके अलावा, दुनिया में बहुत सी चीजें हो रही हैं जो निश्चित रूप से भारत को प्रभावित कर रही हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी रक्षा, शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत बनें। उन्होंने कहा, हमें खुद को मजबूत करने के लिए अपने कई क्षेत्रों को विकसित करने की जरूरत है। इस संबंध में डिसरप्टिव टेक्नोलॉजी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सिंह ने रक्षा प्रौद्योगिकी मामले की उपयोगिता और विशिष्टता को समान रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा, रक्षा तकनीक हमारे लिए कितनी उपयोगी है, यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी जरूरी है कि रक्षा तकनीक हमारे पास ही हो। डेफकनेक्ट 2.0 नवोन्मेषकों को अपनी क्षमताओं, उत्पादों और अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन उद्योगपतियों के समक्ष करने का अवसर प्रदान करता है। स्टार्ट-अप के लिए यह अवसर होता है कि वे निवेश हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल करें।

लद्दाख में हिली धरती, करगिल में 4.2 तीव्रता की भूकंप के झटके
Published / 2022-04-22 16:23:47
लद्दाख में हिली धरती, करगिल में 4.2 तीव्रता की भूकंप के झटके

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के करगिल में सोमवार शाम भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक लगभग 6 बजकर 50 मिनट पर 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। फिलहाल, भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। इससे पहले इसी महीने 18 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भूकंप आया था। अधिकारियों ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजकर 9 मिनट पर 3.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र किश्तवाड़ में था। ओडिशा में नयागढ़ जिले के दासपल्ला कस्बे में 14 अप्रैल को मध्यम तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि 3.5 की तीव्रता वाले भूकंप का केंद्र गंजम जिले में 10 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप के झटके पूर्वाह्न 11 बजकर 19 मिनट पर महसूस किए गए। जिले के एक अधिकारी ने बताया कि भूकंप से जानमाल को नुकसान होने की फिलहाल कोई सूचना नहीं है। ओडिशा के कालाहांडी और नबरंगपुर जिलों में भी पिछले महीने 3.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। वहीं 10 अप्रैल को गुजरात के कच्छ जिले में 3.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए, हालांकि इस दौरान जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। गांधीनगर स्थित भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) ने कहा कि भूकंप के झटके रात 12.49 बजे महसूस किए गए और इसका केंद्र कच्छ में रापड़ से एक किलोमीटर दूर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में 12.2 किलोमीटर की गहराई में था। आईएसआर के आंकड़ों के अनुसार ये पिछले एक महीने में जिले में आया 3.0 या उससे अधिक तीव्रता का पांचवा भूकंप है। इससे पहले आए भूकंपों का केंद्र जिले के रापर, दुधाई और लखपत शहरों के समीप था। इसके अलावा 8 अप्रैल को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के करगिल जिले में 3.6 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। अधिकारियों ने बताया कि इसमें किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। एनसीएस ने कहा कि भूकंप शाम 5.12 बजे आया। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र करगिल से 82 किलोमीटर उत्तरपश्चिम में स्थित था।

पृथ्वी दिवस पर बोले पीएम मोदी- धरती मां की रक्षा हर पीढ़ी का दायित्व
Published / 2022-04-22 08:55:01
पृथ्वी दिवस पर बोले पीएम मोदी- धरती मां की रक्षा हर पीढ़ी का दायित्व

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पृथ्वी दिवस "धरती माता" के प्रति कृतज्ञता जताने के साथ ही हमारे ग्रह की देखभाल के लिए प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है। पृथ्वी पर रहने वाले तमाम जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों को बचाने तथा दुनिया भर में पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ 22 अप्रैल के दिन पृथ्वी दिवस यानि अर्थ डे मनाने की शुरुआत की गई थी। वर्ष 1970 में शुरू की गई इस परंपरा को दुनिया ने खुले दिल से अपनाया और आज लगभग पूरी दुनिया में प्रति वर्ष पृथ्वी दिवस के मौके पर धरा की धानी चूनर को बनाए रखने और हर तरह के जीव-जंतुओं को पृथ्वी पर उनके हिस्से का स्थान और अधिकार देने का संकल्प लिया जाता है। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, पृथ्वी दिवस धरती माता को उसकी दया के लिए उसके प्रति कृतज्ञता जताने और हमारे ग्रह की देखभाल के लिए प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है। इस ट्वीट के साथ प्रधानमंत्री ने एक वीडियो भी साझा किया। इसमें पर्यावरण को संरक्षित करने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता के बारे में उनके पूर्व के भाषणों के अंश शामिल हैं। इस वीडियो में उन्होंने कहा है कि पर्यावरण का संरक्षण हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

जॉनसन-मोदी की बैठक में रक्षा-व्यापार समेत कई मुद्दों पर चर्चा
Published / 2022-04-22 08:25:01
जॉनसन-मोदी की बैठक में रक्षा-व्यापार समेत कई मुद्दों पर चर्चा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत दौरे पर आए अपने ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जॉनसन से रक्षा, व्यापार और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को ओर विस्तार देने के लिए विस्तृत चर्चा की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक ट्वीट में कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बोरिस जॉनसन ने नई दिल्ली में वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के रास्तों के बारे में चर्चा की। वार्ता से पहले ब्रिटेन ने कहा कि वह भारत को सर्वश्रेष्ठ ब्रिटिश उन्नत युद्धक विमान के निर्माण से संबंधित जानकारी देगा और हिंद महासागर में चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की प्रौद्योगिकी जरूरतों का समर्थन देगा। ब्रिटिश उच्चायोग ने एक बयान में कहा कि आने वाले दशकों में भारत के साथ वृहद रक्षा और सुरक्षा भागीदारी के समर्थन में ब्रिटेन, भारत को ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) जारी करेगा जिससे नौकरशाही कम होगी और रक्षा खरीद के लिए आपूर्ति का समय कम होगा। ब्रिटिश प्रधानमंत्री रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में दो दिवसीय यात्रा पर गुरुवार को भारत पहुंचे। उच्चायोग ने जॉनसन के हवाले से कहा कि दुनिया निरंकुश देशों से बढ़ते खतरों का सामना कर रही है, जो लोकतंत्र को कमतर, मुक्त व्यापार को खत्म करने और सम्प्रभुत्ता को कुचलना चाहते हैं। भारत के साथ ब्रिटेन की भागीदारी इन तूफानी सागरों में प्रकाशपुंज है। उच्चायोग ने कहा कि ब्रिटेन और भारत किफायती हरित हाइड्रोजन पर काम तेज करने के लिए वर्चुअल हाइड्रोजन विज्ञान एवं नवोन्मेष हब शुरू कर रहे हैं। उसने कहा कि जॉनसन स्वच्छ एवं नवीनीकरण ऊर्जा पर नए सहयोग पर भी चर्चा करेंगे, जिसका मकसद आयातित तेल से नई दिल्ली के ऊर्जा बदलाव को समर्थन देना और सुरक्षित तथा टिकाऊ ऊर्जा के जरिए इसके लचीलेपन को बढ़ाना तथा ब्रिटेन और भारत दोनों देशों में जलवायु परिवर्तन से निपटना है।

दिल्ली के अधिकांश नमूनों में मिला ओमीक्रोन का उप-स्वरूप
Published / 2022-04-22 01:38:16
दिल्ली के अधिकांश नमूनों में मिला ओमीक्रोन का उप-स्वरूप

लएबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली में अप्रैल के पहले पखवाड़े में जिन नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया गया उनमें से अधिकतर में ओमीक्रोन का उप-स्वरूप बीए.2.12 सामने आया है और शहर में कोविड-19 के मामलों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे यह एक वजह हो सकता है। सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह बात कही। हालांकि भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ (इनसाकॉग) के एक सूत्र ने दावा किया कि ओमीक्रोन के स्वरूप से व्युत्पन्न बीए.2.12.1 भी दिल्ली के कुछ नमूनों में पाया गया है जिसे अमेरिका में मामलों में हालिया वृद्धि की वजह बताया जा रहा है। लेकिन अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि दिल्ली के कुछ नमूनों में यह पाया गया है। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, नये उप-स्वरूप बीए.2.12 (52 प्रतिशत नमूनों में) और बीए.2.10 (11 प्रतिशत नमूनों में) उच्च संक्रमण दिखा रहे हैं और दिल्ली में हाल में लिये गये कुल नमूनों में से 60 प्रतिशत से अधिक में ये पाये गये हैं। दिल्ली में इस महीने पहले पखवाड़े में 300 से अधिक नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया गया। अधिकारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा के पड़ोसी जिलों में भी जिन नमूनों का जीनोम अनुक्रमण किया गया है, उनमें भी वायरस के लगभग ये ही उप-स्वरूप मिले हैं। दिल्ली में बुधवार को कोविड-19 के 1,009 मामले सामने आये जो एक दिन पहले आए मामलों से 60 प्रतिशत अधिक हैं।

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