एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर मनाया जा रहा ‘अमृत महोत्सव’ एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है और सभी क्षेत्रों एवं समाज के हर वर्ग के लोग इससे जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 91वें संस्करण में देशवासियों से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने हर घर तिरंगा अभियान का उल्लेख किया और लोगों से 13 से 15 अगस्त तक अपने घरों में तिरंगा फहराकर इस आंदोलन का हिस्सा बनने का भी आग्रह किया। साथ ही पीएम मोदी ने सभी देशवासियों से अपील की कि हर घर तिरंगा अभियान के तहत लोग 2 से 15 अगस्त के बीच अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर तिरंगा लगाएं। पीएम ने कहा कि मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि आजादी का अमृत महोत्सव एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है। सभी क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग के लोग इससे जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत, 13 से 15 अगस्त तक एक स्पेशल मूवमेट हर घर तिरंगा का आयोजन किया जा रहा है। इस मूवमेंट का हिस्सा बनकर 13 से 15 अगस्त तक, आप, अपने घर पर तिरंगा जरूर फहरायें, या उसे अपने घर पर लगायें। 2 अगस्त से 15 अगस्त तक, हम सभी, अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पिक्चर में में तिरंगा लगा सकते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में एक दिन में कोरोना वायरस के 19,673 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,40,19,811 हो गई। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या 1,43,676 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रविवार सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। आंकड़ों के मुताबिक, देश में संक्रमण से 39 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 5,26,357 हो गई। देश में covid-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 292 का इजाफा हुआ है। बीमारी से अब तक जितने लोग स्वस्थ हुए हैं उनकी संख्या बढ़कर 4,33,49,778 हो गई है और मृत्यु दर 1.20 प्रतिशत है। दैनिक संक्रमण दर 4.96 प्रतिशत है और साप्ताहिक संक्रमण दर 4.88 प्रतिशत है। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत देश में अब तक covid-19 रोधी टीकों की 204.25 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं। देशभर में बीमारी के कारण जिन 39 मरीजों की मौत हुई है उनमें से पश्चिम बंगाल से सात, महाराष्ट्र से चार, दिल्ली से तीन, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश से दो-दो मरीज तथा असम, गोवा, कर्नाटक, नगालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और उत्तराखंड से एक-एक मरीज ने दम तोड़ा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि मॉनसून में देरी उत्तर भारत में धान की बुआई को प्रभावित करेगी। मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून अपनी समान्य स्थिति से उत्तर की ओर जा रहा है और अगस्त के पहले हफ्ते में गंगा के तटीय क्षेत्रों में कुछ जगह ही बरसात देखने को मिलेगी। मॉनसून के बीच में इस तरह रुकने और धान की बुआई प्रभावित होने का असर खाद्य पदार्थों के दामों पर पड़ेगा। बता दें कि मॉनसून जब अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण होता है तो मैदानी इलाकों में वर्षा होती है। वहीं, जब यह अपनी सामान्य पोजीशन से उत्तर हो जाता है तो हिमालय की तली वाले क्षेत्रों में वर्षा होती है। अगले एक हफ्ते तक पूरे देश में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ने वाली है। चूंकि यह बुआई का सीजन है तो सुस्त मॉनसून का असर इस पर पड़ेगा। महंगाई के बीच बुआई में देरी से आने वाले समय में खाद्य पदार्थों के दाम और ऊपर जा सकते हैं। स्काइमेट वैदर के महेश पलावत ने कहा है कि कम वर्षा के का इस साल धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। वहीं, हैदराबाद में सेंटर फोर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर के जीवी रामंजनेयुलु ने कहा है कि इसका असर अन्य फसलों पर भी होगा। उन्होंने कहा कि अगस्त के मध्य तक अधिकांश भारत में कोई बुआई नहीं होगी और इसका किसानों पर पड़ा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि संभव है कि इस वजह से रबी की फसलों की बुआई में भी देरी हो। आईएमडी ने कहा है कि भारत में अभी तक मॉनसून सामान्य से 9 फीसदी अधिक रहा है। हालांकि, पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्वी भारत में यह 16 फीसदी कम रहा है, जबकि उत्तर पश्चिम भारत में 4 फीसदी अधिक, मध्य भारत में 21 फीसदी अधिक और दक्षिण प्रायद्वीप में यह 28 फीसदी अधिक रहा है। जुलाई में भी बरसात की यही स्थिति रही है। पूर्वी व उत्तर पूर्वी भारत को छोड़कर बाकी जगहों पर मॉनसून सामान्य से अधिक रहा है। शुक्रवार को धान उत्पादन करने वाले गंगा के मैदानी क्षेत्रों में लगभग 40 फीसदी वर्षा की कमी दर्ज की गई। झारखंड, बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश में 47-52 फीसदी की कमी दर्ज हुई।
एबीएन एडिटोरियल डेस्क (अदिति)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा को निर्देश दिया कि वे केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी की बेटी के गोवा में स्थित रेस्टोरेंट को लेकर किए गये सभी ट्वीट हटाएं। न्यायालय ने इरानी द्वारा इन नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दायर करने के बाद उन्हें समन भी जारी किया। नेताओं ने ट्वीट हटा दिए हैं लेकिन उन्होंने कहा है कि वे समन का जवाब देंगे और इस मामले को न्यायालय में लड़ेंगे। यह शायद अपनी तरह का पहला मामला है जहां न्यायालय ने नेताओं से अपने ट्वीट हटाने को कहा है और प्रकरण बुनियादी अधिकारों समेत विभिन्न विषयों से जुड़ी तमाम जटिलताएं समेटे हुए है। न्यायालय ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि वे वादी तथा उसकी बेटी से जुड़े अपने तमाम पोस्ट, वीडियो, ट्वीट एवं रीट्वीट तथा छेड़छाड़ की हुई तस्वीरें आदि हटा लें। न्यायालय ने उनसे यह भी कहा कि इरानी और उनकी बेटी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रसारित करना भी बंद कर दें। इरानी ने न्यायालय में दो करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति के मामले के साथ मानहानि का मुकदमा दायर किया है, उन्होंने निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की है और कहा है कि कांग्रेस नेताओं जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा ने अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर षडयंत्र किया और उनकी युवा संतान की मानहानि करने के उद्देश्य से उन्हें नुकसान पहुंचाने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। इससे पहले लोकसभा में कल स्मृति इरानी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच हुए गतिरोध के बाद केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और अन्य बड़े नेताओं ने इरानी के बचाव में जमकर तेवर दिखाए। सोशल मीडिया पर इरानी की बेटी के गोवा स्थित रेस्टोरेंट की तस्वीरें भी प्रसारित की गईं जिनके बारे में इरानी का दावा है कि वे फर्जी तस्वीरें हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई करने वाली न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा, प्रथम दृष्टया मुझे लगता है कि वादी के खिलाफ बिना वास्तविक तथ्यों की पुष्टि कर मिथ्या आरोप लगाये गए। न्यायालय ने कहा कि बचाव पक्ष द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन के कारण हुए ट्वीट और रीट्वीट के चलते वादी की प्रतिष्ठा को गहरी क्षति पहुंची है। न्यायालय ने कहा, प्रथमदृष्टया वादी की ओर से मामला बनता है और वादी की बात उपयुक्त लगती है तथा बचाव पक्ष के खिलाफ जाती है। मुझे यह एक अंतरिम निषेधाज्ञा जारी करने के लिए पर्याप्त लगता है जिसके तहत जयराम रमेश, पवन खेड़ा और नेट्टा डिसूजा को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने ट्वीट डिलीट करें और संवाददाता सम्मेलन के दौरान लगाए गए आरोपों को यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाएं। न्यायालय ने इन नेताओं को यह निर्देश भी दिया कि वे वादी और उसकी बेटी की छेड़छाड़ की गई तस्वीरों, उन पर लगाए आरोपों, पोस्ट, वीडियो, ट्वीट, रीट्वीट आदि को हटाएं और उनके प्रसार को रोकें। यह भी कहा गया कि यदि प्रतिवादी 1-3 अगले 24 घंटे के भीतर आदेश का अनुपालन करने में विफल रहे तो प्रतिवादी 4-6 (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) को निर्देश दिया जाता है कि वे यह सामग्री हटाएं। कल के घटनाक्रम का असर यह हुआ कि लोकसभा और राज्य सभा में केवल 1 मिनट कार्यवाही चली। सदन के स्थगित होने से पहले अगले सप्ताह के लिए सरकार के विधायी कामकाज की घोषणा की गई। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह सदन में प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक 2022, ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2022, केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2022 और नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2022 पेश किए जा सकते हैं। बहरहाल, निलंबित चल रहे 23 सांसदों का निलंबन शुक्रवार को समाप्त हो गया लेकिन अगर सोमवार को भी उनका व्यवहार पहले जैसा रहा तो उन्हें सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया जा सकता है। अधीर ने राष्ट्रपति से माफी मांगी : लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपनी उस टिप्पणी के लिए लिखित माफी मांग ली, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहकर संबोधित किया था। उनकी इस टिप्पणी को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। उन्होंने बुधवार को मीडिया से बातचीत में राष्ट्रपति के लिए राष्ट्रपत्नी शब्द का उपयोग कर दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिये भूलवश एक गलत शब्द का इस्तेमाल किया। चौधरी ने कहा, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह जुबान फिसलने से कारण हुआ। मैं माफी मांगता हूं और आपसे आग्रह करता हूं कि आप इसे स्वीकार करें। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने इसी विषय को लेकर शनिवार को राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में मोर्चा संभाला था और कांग्रेस को आदिवासी, महिला और गरीब विरोधी करार देते हुए कहा था कि मुख्य विपक्षी दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को माफी मांगनी चाहिए। राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष को माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने दावा किया था कि लोकसभा में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और कई भाजपा नेताओं ने सोनिया गांधी के साथ अपमानजनक व्यवहार किया, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा में नियम 193 के तहत सदन की कार्रवाही के लगभग वाशआॅउट होने के बाद अब 1 अगस्त को मूल्य वृद्धि को लेकर चर्चा होगी। इसको लेकर शिवसेना नेता विनायक राउत और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी की ओर से चर्चा को लेकर नोटिस मिला है। कहा ये भी जा रहा है कि इसके अगले दिन राज्यसभा में भी मंहगाई का मुद्दा उठ सकता है। सदन में अगले महीने की शुरुआत में ही विपक्ष की ओर से उठाए जा मुद्दों पर बहस होगी। माना जा रहा है कि इसके अगले दिन राज्यसभा में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा होगी। सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि सदन की सामान्य कार्यवाही सोमवार से फिर से शुरू होगी और पहले निचले सदन में बहस हो सकती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में भारत में कोविड-19 के 20,408 नए मामले सामने आए हैं और 54 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। देश में कोरोना के सक्रिय मामले 1,43,384 हैं। जबकि दैनिक सकारात्मकता दर 5.05% और साप्ताहिक सकारात्मकता दर 4.92% है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक देश में कोरोना के कुल 87.48 करोड़ टेस्ट किए जा चुके हैं जबकि पिछले 24 घंटों में 4,04,399 टेस्ट किए गए। भारत का एक्टिव केसलोड वर्तमान में 1,43,384 है। सक्रिय मामले अभी 0.33% हैं। जबकि रिकवरी रेट अभी 98.48% है। पिछले 24 घंटों में 20,958 कोरोना मरीजों के ठीक होने से कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या बढ़कर 4,33,30,442 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 203.94 करोड़ टीके की कुल खुराक (93.25 करोड़ दूसरी खुराक और 8.74 करोड़ एहतियाती खुराक) दी जा चुकी हैं। पिछले 24 घंटों में कोरोना वैक्सीन की 33,87,173 खुराकें दी गईं हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में शिक्षा भर्ती घोटाले में बरखास्त मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी इन दिनों ईडी की हिरासत में है जहां उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ चल रही जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। दरअसल, ईडी रेड में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा कैश और 5 किलो गोल्ड घर में दबाने वाली अर्पिता चटर्जी की मां बेहद साधारण और एक टूटे-फूटे मकान में रह रही है। अर्पिता मुखर्जी की मां कोलकाता से महज कुछ किलोमीटर दूर पुश्तैनी मकान में रहती हैं, जो पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। कैश क्वीन अर्पिता मुखर्जी का पुश्तैनी मकान उत्तर 24 परगना के बेलघोरिया इलाके में हैं यहां उनकी मां मिनती मुखर्जी अकेले रहती है। पुश्तैनी मकान करीब 50 साल पुराना है जिसकी हालत काफी जर्जर हो गई है। हैरानी की बात यह है कि इस मकान में अर्पिता की बुजुर्ग और बीमार मां के पास कोई भी लग्जरी सामान नहीं है। एक ओर उनकी बेटी जिस लग्जरी लाइफ का आनंद उठा रही थीं, वहीं अर्पिता की मां के पास रोजमर्रा की सुविधाओं भी नहीं है। हालांकि अर्पिता ने अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए दो हाउस हेल्प को रखा है, जो उनके भोजन पानी और अन्य जरूरतों का ध्यान रखती हैं। इलाके के लोगों के मुताबिक अर्पिता कभी कभार अपनी मां से मिलने एक कार से आया करती थी और मां से मिलकर वापस चली जाती थी। गौरलतब है कि अर्पिता मुखर्जी के घर से पहली छापेमारी में ईडी को 21 करोड़ 90 लाख रुपये मिले थे और इसके साथ ही 70 लाख रुपये का सोना भी बरामद हुआ था। वहीं दूसरी छापेमारी में फिर से 27 करोड़ 90 लाख रुपये मिले और इस दौरान 4 करोड़ 31 लाख रुपये का सोना बरामद हुआ। बता दें कि ईडी ने 23 जुलाई को अर्पिता के फ्लैट पर पहली बार छापा मारा था और यह रेड कोलकाता के शिक्षक भर्ती घोटले में मारी गई थी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पहले अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में शिरकत करने विज्ञान भवन पहुंचे। इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण भी मौजूद रहे। उद्घाटन कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने अपना संबोधन भी दिया। पीएम मोदी ने कहा कि ये समय हमारी आजादी के अमृतकाल का समय है। ये समय उन संकल्पों का समय है जो अगले 25 वर्षों में देश को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। देश की इस अमृतयात्रा में व्यापार करने में आसानी और जीवन में आसानी की तरह ही न्याय की आसानी भी उतनी ही जरूरी हैं। पिछले आठ वर्षों में देश की न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने का काम हुआ : पीएम मोदी- पीएम मोदी ने आगे कहा कि किसी भी समाज के लिए न्याय प्रणाली तक पहुंच जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी न्याय वितरण प्रणाली भी है। इसमें एक अहम योगदान न्यायिक अवसंरचना का भी होता है। पिछले आठ वर्षों में देश के न्यायिक अवसंरचना को मजबूत करने के लिए तेज गति से काम हुआ है। इसे आधुनिक बनाने के लिए 9,000 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। देश में वर्चुअल कोर्ट शुरू की जा रही : पीएम मोदी- पीएम मोदी ने कहा कि ई-कोर्ट मिशन के तहत देश में वर्चुअल कोर्ट शुरू की जा रही हैं। यातायात उल्लंघन जैसे अपराधों के लिए 24 घंटे चलने वाली कोर्ट ने काम करना शुरू कर दिया है। लोगों की सुविधा के लिए कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इनफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी किया जा रहा है। कमजोर से कमजोर व्यक्ति को भी न्याय का अधिकार मिल सके : पीएम- पीएम मोदी ने कहा कि न्याय का ये भरोसा हर देशवासी को ये एहसास दिलाता है कि देश की व्यवस्थाएं उसके अधिकारों की रक्षा कर रही हैं। इसी सोच के साथ देश ने राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण की स्थापना भी की। ताकि कमजोर से कमजोर व्यक्ति को भी न्याय का अधिकार मिल सके। आम नागरिक संविधान में अपने अधिकारों से परिचित हो : पीएम- पीएम मोदी ने कहा कि एक आम नागरिक संविधान में अपने अधिकारों से परिचित हो, अपने कर्तव्यों से परिचित हो। उसे अपने संविधान और संवैधानिक संरचनाओं की जानकारी हो, नियम और समाधान की जानकारी हो। इसमें भी टेक्नोलॉजी एक बड़ी भूमिका निभा सकती है। देश में अंडर ट्रायल कैदियों की समस्या का समाधान हो : पीएम- पीएम मोदी ने कहा कि देश में अंडर ट्रायल कैदियों से जुड़े मानवीय विषय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले भी कईं बार संवेदनशीलता दिखाई गई है। ऐसे कितने ही कैदी हैं, जो कानूनी सहायता के इंतजार में वर्षों से जेलों में बंद हैं। हमारी डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस ऑथोरिटी इन कैदियों को कानूनी सहायता देने का जिम्मा उठा सकती हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में गेहूं उत्पादन का आधिकारिक आंकड़ा जारी हो गया है। इन आंकड़ों के मुताबिक भारत में 20 साल में सबसे कम गेहूं उत्पादन हुआ है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक गेहूं उत्पादन होता है, लेकिन भीषण गर्मी के बीच इन राज्यों में जलवायु संकट देखा गया। चिलचिलाती गर्मी में गेहूं की फसल झुलसती दिखी, और यही कारण रहा कि गेहूं की उत्पादकता में दो दशकों में सबसे अधिक गिरावट आई है। मौसम विभाग के मुताबिक मार्च में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब के मानसा जिले के गेहूं किसान गुरबख्श नागी के खेत में पकने वाले गेहूं के डंठल सुनहरे पीले रंग के बाद भूरे रंग में बदल गए। ये फसल खराब होने यानी भीषण गर्मी में फसलों और दानों के सिकुड़ने का संकेत था। फसल की कटाई के बाद जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में चिलचिलाती गर्मी के कारण गेहूं की उत्पादकता में दो दशकों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल के नुकसान साल 2010 और 2019 से भी बड़ा है। 2010 में भी 2022 की तरह हीटवेव देखी गई थी। 2019 में इस साल की तुलना में थोड़ी कम गर्मी थी, लेकिन इसके बावजूद गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी। जानकारों के मुताबिक गेहूं जैसी मुख्य फसल पर मौसम का खतरनाक प्रभाव भारत की दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा पर जोखिमों का संकेत देते हैं। पंजाब में गेहूं की पैदावार 43 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह गई है। औसतन, पैदावार में प्रति हेक्टेयर 20% की गिरावट आई, जो 2010 में 8% की गिरावट से तेज थी। किसानों का कहना है कि उन्हें ₹12,000- ₹18000 प्रति क्विंटल (100 किलोग्राम) का नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल बर्बाद होने के कारण किसान कर्ज के दलदल में फंसते दिख रहे हैं। उत्तर प्रदेश भी पंजाब की तरह बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। यूपी में गेहूं की पैदावार में 18% की गिरावट आई। हरियाणा में गेहूं 19% कम पैदा हुआ। तीन प्रमुख राज्यों में गेहूं उत्पादन में गिरावट के कारण कृषि मंत्रालय ने शुरुआती उत्पादन पूर्वानुमान 111.32 मिलियन टन से 5% घटाकर 106.41 मिलियन कर दिया है। वास्तविक संख्या इससे और भी कम हो सकती है। आंकड़ों से पता चलता है कि पंजाब में, बठिंडा और मानसा में गेहूं उत्पादन में सबसे अधिक 30% तक गिरावट देखी गई है। गेहूं की पैदावार के संबंध में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो वैज्ञानिकों ने क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के आधार पर जारी किए हैं। इस पद्धति से वैज्ञानिकों को पैदावार निर्धारित करने में मदद मिलती है। इसी पद्धति से फसल के नुकसान का भी आकलन होता है। 20 साल में गेहूं की कम पैदावार के संबंध में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक असर देखे जा सकते हैं। गेहूं उत्पादन के लिए मशहूर इलाके भौगोलिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक देश में जलवायु पूर्वानुमानों से पता चलता है कि जल्द ही अगर कोई उपाय नहीं किए गए तो गर्मी और बढ़ेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि कार्यों में जोखिम अधिक है। गेहूं की फसल खराब होने पर एचटी की रिपोर्ट में बठिंडा के भारतीय किसान यूनियन के सदस्य रमिंदर सिंह उप्पल ने बताया उनकी सामान्य फसल का केवल आधा ही बिक्री योग्य गुणवत्ता का निकला। मुझे 6 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। भीषण गर्मी के कारण मेरी एक भैंस मर गई। डिहाइड्रेशन के कारण तीन मवेशियों की तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई। उन्होंने कहा, ऐसा गर्म मौसम कभी नहीं देखा। खराब मौसम के प्रत्यक्ष प्रभाव के कारण गेहूं की पैदावार में -1 % और -8 % के बीच गिरावट हुई। अप्रत्यक्ष प्रभाव, मसलन सिंचाई के स्रोत सूखने के कारण गेहूं उत्पादन में -4% से -36% तक नुकसान की आशंका है। एचटी की मीडिया रिपोर्ट में हरियाणा के करनाल में प्रमुख भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान के प्रमुख जीपी सिंह ने संशोधित अनुमानों का जिक्र किया और कहा कि अत्यधिक तापमान के कारण गेहूं उत्पादन घटा है, लेकिन सौभाग्य से गिरावट इतनी तेज नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि गेहूं उत्पादन 109 मिलियन टन हुआ।
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