समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट ने रांची के मोराबादी कुसुम विहार में चलाया पक्षी बचाओ अभियान, की बेजुबान प्राणियों को दाना-पानी देने की अपील टीम एबीएन, रांची। झारखंड में समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से भीषण गर्मी को देखते हुए मोरहाबादी कुसुम विहार रोड नंबर 4 में बेजुबान पक्षियों के रक्षा के लिए पक्षी बचाओ अभियान कार्यक्रम आज आयोजित किया गया। इसमें छोटे-छोटे बच्चों के अलावा उनके अभिभावकों को इस भीषण गर्मी में पक्षियों सहित अन्य बेजुबान प्राणियों को दाना पानी देने की अपील भी की गयी।मौके पर बच्चों एवं उनके अभिभावकों के बीच पक्षियों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए सिकोरे बांटे गये। साथ ही साथ यह संकल्प दिलाया गया कि सब अपने-अपने घरों पर सिकोरे रख कर पक्षियों को दाना पानी देकर उनकी रक्षा करने में अपना योगदान देंगे।
रामभक्तों के लिए खुशखबरी! आराम करने के लिए बन रहा है अनोखा भवन, 150 श्रद्धालु एक साथ कर सकेंगे आराम राम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या में रामकोट में 2000 स्क्वायर फीट में भवन बना रहा है जहां 100-150 श्रद्धालु 15 दिन से 1 महीने तक रह सकेंगेनिर्माण कार्य 6 महीने में पूरा होगाराम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या में भवन बना रहा हैभवन में 100-150 श्रद्धालु 15 दिन से 1 महीने तक रह सकेंगेनिर्माण कार्य 6 महीने में पूरा होगाएबीएन सेंट्रल डेस्क। अगर आप राम मंदिर में प्रभु राम की सेवा करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। राम मंदिर ट्रस्ट ने राम मंदिर में प्रभु राम की सेवा करने वाले लोगों के लिए एक भवन बनाने का निर्णय लिया है, जहां आप 15 दिन से एक महीने तक रह सकते हैं। इस भवन में श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं भी विकसित की जायेंगी। यह भवन राम मंदिर से मात्र 200 मीटर दूरी पर रामकोट में बनाया जा रहा है। लगभग 2000 स्क्वायर फीट में यह भवन कल से बनना शुरू होगा और आज इसका भूमि पूजन ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने किया है। इस भवन में 100 से 150 श्रद्धालु आराम से रह सकेंगे। भवन का कार्य अगले 6 महीनों में पूरा हो जायेगा इस भवन का निर्माण अगले 6 महीनों में पूरा हो जायेगा। इसके बाद देश-विदेश से आने वाले भक्त अगर प्रभु राम की सेवा और आराधना करना चाहते हैं और रात को ठहरना चाहते हैं, तो राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा इस भवन में रुक सकते हैं। इस भवन का निर्माण लगभग 2000 स्क्वायर फीट की भूमि पर हो रहा है, जहां 100 से 150 श्रद्धालु ठहर सकते हैं। लगभग 150 यात्री रह सकेंगे राम मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रामकोट में एक जमीन खरीदी है। यहां देशभर से सेवा करने आने वाले श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था की जायेगी। इस निवास भवन में 15 दिन, 20 दिन और 1 महीने तक रहने की व्यवस्था होगी। यह निवास भवन 2000 स्क्वायर फीट में बनेगा और इसमें लगभग 150 यात्री रह सकेंगे। यह एक स्टील स्ट्रक्चर होगा। आज इसका भूमि पूजन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया। इसका निर्माण कार्य कल से शुरू होगा और 5 से 6 महीने में पूरा हो जायेगा।
समाज में व्याप्त अंधविश्वास और बुराइयों को समाप्त करने के लिए बुद्ध शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि बुद्ध पूर्णिमा जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म उनके ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की तिथि के रूप में मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का महत्व केवल उनके जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन की पावनता इसलिए भी विशेष है क्योंकि यही वह तिथि है जब भगवान बुद्ध को बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे गहन तपस्या के बाद सत्य और ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह दिन ध्यान, तप, और करूणा के अभ्यास का प्रतीक है, जबकि हिंदू धर्म में इसे ईश्वर के अवतार के रूप में पूजा जाता है। इस दिन कई लोग सत्य, अहिंसा और संयम का व्रत लेकर पुण्य अर्जित करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 11 मई को रात 8 बजकर 1 मिनट से प्रारंभ होगा और 12 मई को रात 10 बजकर 25 मिनट तक समाप्त होगा। उदया तिथि के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 12 मई सोमवार को मनाया जायेगा। जो बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म दोनों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। इन योगों में पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु और भगवान बुद्ध की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है,जो आत्मिक शांति और पुण्य अर्जन का कारण बनते हैं। यह समय पूजा, ध्यान और तप के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इस दिन के विशेष योगों का लाभ उठाकर लोग भगवान बुद्ध की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ अपने जीवन में शांति और समृद्धि लाने की कोशिश करते हैं। यह दिन न केवल भगवान गौतम बुद्ध का जन्मदिन है, बल्कि इसी दिन उन्हें सत्य का ज्ञान भी प्राप्त हुआ था। बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को भगवान बुद्ध द्वारा दिखाए गए जीवन के सत्य और उनके धर्म के उपदेशों का पालन करने के रूप में मनाते हैं। इस दिन का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक जागरूकता और मानवता के सेवा की प्रेरणा देता है। ध्यान, साधना और करुणा के साथ भगवान बुद्ध की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से उबरने में मदद मिलती है। हिंदू धर्म में भी इस दिन का महत्व है क्योंकि इसे भगवान विष्णु के नौवे अवतार के रूप में देखा जाता है। भगवान बुद्ध ने जीवन के दु:ख, पाप, और कर्म के फल को समझाया और इसे पवित्र उपदेशों के माध्यम से मानवता को दिखाया। इस दिन को आध्यात्मिक उन्नति, आत्मिक शांति, और पुण्य अर्जन का अवसर माना जाता है। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और बुराइयों को समाप्त करने के लिए बुद्ध शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक है इस दिन हम सभी को अपने आचरण में सुधार लाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेना चाहिए।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि मातृ दिवस हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, इस वर्ष 11 मई को मातृ दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मां यह मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का सार है। मां वह शक्ति है, जो निःस्वार्थ प्रेम, त्याग, समर्पण और करुणा की सजीव प्रतिमूर्ति होती है। संसार की कोई भी भावना मां की ममता के आगे नहीं टिक सकती। इसी मातृत्व की महानता को सम्मान देने के लिए हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मातृ दिवस मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है।यह दिवस मात्र एक दिन नहीं, बल्कि वह अवसर है जब हम अपनी मां को यह बता पाते हैं कि वह हमारे जीवन में कितनी महत्वपूर्ण हैं। यह एक भावनात्मक पर्व है जो हमें अपने हृदय की गहराइयों से मां के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की प्रेरणा देता है।मां ममता की मूरत है मातृ दिवस की शुरुआत अमेरिका से हुई, जब अन्ना जार्विस नामक महिला ने अपनी मां की स्मृति में इस दिन को मनाने की पहल की।धीरे-धीरे यह परंपरा वैश्विक रूप लेती गई और आज लगभग हर देश में यह दिन श्रद्धा और प्रेम से मनाया जाता है। भारत में भी यह दिन खास महत्व रखता है। भारतीय संस्कृति में तो मां को देवी तुल्य माना गया है। मातृदेवो भव: की भावना हमारे शास्त्रों में भी निहित है। मां केवल जन्म नहीं देती, बल्कि जीवन भर हमारा मार्गदर्शन करती है, कष्टों को अपने आँचल में समेटकर हमारे लिए सुख-संवेदनाओं का सागर लुटा देती है। मातृ दिवस के अवसर पर बच्चे अपनी मां को उपहार देते हैं, विशेष भोज बनाते हैं या कोई हस्तनिर्मित कार्ड या कविता के माध्यम से अपने भाव प्रकट करते हैं। हालांकि, यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि मां के योगदान को सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन आदर और प्रेम देना चाहिए। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में जब संयुक्त परिवार विघटित हो रहे हैं, मां की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में मातृ दिवस हमें माँ के साथ समय बिताने, उनके अनुभवों से सीखने और उन्हें मान देने का एक सशक्त अवसर देता है। अंततः, मां न सिर्फ जीवन की जननी हैं, बल्कि वह एक प्रेरणा हैं, एक आधार हैं और हमारे अस्तित्व की जड़ हैं। मां को समर्पित यह दिन उनके प्रति हमारे प्रेम और आदर की अभिव्यक्ति का माध्यम बनता है।
समाज में व्याप्त अंधविश्वास और बुराइयों को समाप्त करने के लिए बुद्ध शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि बुद्ध पूर्णिमा जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है यह दिन भगवान गौतम बुद्ध के जन्म उनके ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की तिथि के रूप में मनाया जाता है।बुद्ध पूर्णिमा का महत्व केवल उनके जन्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इस दिन की पावनता इसलिए भी विशेष है क्योंकि यही वह तिथि है जब भगवान बुद्ध को बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे गहन तपस्या के बाद सत्य और ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है।यह पर्व हर वर्ष वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह दिन ध्यान, तप, और करूणा के अभ्यास का प्रतीक है, जबकि हिंदू धर्म में इसे ईश्वर के अवतार के रूप में पूजा जाता है। इस दिन कई लोग सत्य, अहिंसा और संयम का व्रत लेकर पुण्य अर्जित करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर माना जाता है। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 11 मई को रात 8 बजकर 1 मिनट से प्रारंभ होगा और 12 मई को रात 10 बजकर 25 मिनट तक समाप्त होगा। उदया तिथि के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 12 मई सोमवार को मनाया जाएगा। जो बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म दोनों के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण है। इन योगों में पवित्र नदियों में स्नान, भगवान विष्णु और भगवान बुद्ध की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है, जो आत्मिक शांति और पुण्य अर्जन का कारण बनते हैं। यह समय पूजा, ध्यान और तप के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इस दिन के विशेष योगों का लाभ उठाकर लोग भगवान बुद्ध की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ अपने जीवन में शांति और समृद्धि लाने की कोशिश करते हैं। यह दिन न केवल भगवान गौतम बुद्ध का जन्मदिन है, बल्कि इसी दिन उन्हें सत्य का ज्ञान भी प्राप्त हुआ था। बौद्ध धर्म के अनुयायी इस दिन को भगवान बुद्ध द्वारा दिखाए गए जीवन के सत्य और उनके धर्म के उपदेशों का पालन करने के रूप में मनाते हैं। इस दिन का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक जागरूकता और मानवता के सेवा की प्रेरणा देता है। ध्यान, साधना, और करुणा के साथ भगवान बुद्ध की पूजा करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से उबरने में मदद मिलती है।हिंदू धर्म में भी इस दिन का महत्व है क्योंकि इसे भगवान विष्णु के नौवे अवतार के रूप में देखा जाता है। भगवान बुद्ध ने जीवन के दुःख, पाप, और कर्म के फल को समझाया और इसे पवित्र उपदेशों के माध्यम से मानवता को दिखाया। इस दिन को आध्यात्मिक उन्नति, आत्मिक शांति, और पुण्य अर्जन का अवसर माना जाता है। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और बुराइयों को समाप्त करने के लिए बुद्ध शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक है इस दिन हम सभी को अपने आचरण में सुधार लाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लेना चाहिए।
नेशनल रिलीज- जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड डोमिनिकन रिपब्लिक में हुई वर्ल्ड लॉ कांग्रेस में बच्चों को न्याय दिलाने के लिए जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड मुहिम शुरू करने का फैसला, भुवन ऋभु को सौंपी नेतृत्व की जिम्मेदारी जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड दुनियाभर के विधिवेत्ताओं, संस्थानों और सरकारों को एकजुट कर कानून के शासन के जरिए बाल अधिकारों की सुरक्षा व मजबूती के लिए पहली वैश्विक मुहिम है पिछले दो दशकों में सर्वोच्च न्यायालय व विभिन्न उच्च न्यायालयों में दायर भुवन ऋभु की 60 से भी अधिक जनहित याचिकाओं पर आए ऐतिहासिक फैसलों ने भारत में बदला बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण का परिदृश्य भुवन ऋभु बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक हैं एबीएन सोशल डेस्क। पूरी दुनिया में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन (डब्ल्यूजेए) ने अपने तरह की पहली वैश्विक मुहिम जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड शुरू की है जिसकी कमान भारत के प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता भुवन ऋभु को सौंपी गयी है।इसका एलान डोमिनिकन रिपब्लिक में हुई वर्ल्ड लॉ कांग्रेस में हुआ जिसमें 70 देशों के 1500 से भी ज्यादा विधिवेत्ताओं, जजों, बाल अधिकार अधिवक्ताओं और कानून के जानकारों ने हिस्सा लिया। जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड दुनियाभर के विधिवेत्ताओं, संस्थानों और सरकारों को एकजुट कर कानून के शासन के जरिए बाल अधिकारों की सुरक्षा व मजबूती के लिए पहली वैश्विक मुहिम है। इसमें बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम व बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण व बाल अधिकारों को मजबूती देने के लिए भुवन ऋभु के नेतृत्व में दुनियाभर के अधिवक्ताओं, विधिवेत्ताओं और संस्थानों का एक मजबूत वैश्विक नेटवर्क तैयार किया जायेगा।इस मौके पर भुवन ऋभु ने कहा, हर बच्चे के लिए न्याय व सुरक्षा पहली वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए। सीमाहीन अपराधों से निपटने के लिए सीमाहीन कार्रवाइयों और प्रतिक्रिया की जरूरत है। बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून के शासन को मजबूती न सिर्फ उनका मूलभूत अधिकार है बल्कि यह स्वतंत्रता, समता और सभ्यता के भविष्य के लिए भी अनिवार्य शर्त है।इस मंच का एक मुख्य उद्देश्य होगा- विभिन्न क्षेत्रों में नि:शुल्क कानूनी मदद मुहैया कराने वाले वरिष्ठ वकीलों की सूची तैयार और ब्योरे रखना। यह मंच नई पीढ़ी के वकीलों को बाल अधिकार कानूनों का प्रशिक्षण देगा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग व रणनीतिक कानूनी हस्तक्षेपों के जरिए कानूनी सुधारों को बढ़ावा देगा और बच्चों से जुड़े मामलों में न्यायिक तंत्र तक पहुंच को बेहतर बनायेगा।इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए डब्ल्यूजेए के अध्यक्ष जेवियर क्रेमाडेस ने कहा, भुवन ऋभु के हाथ में कमान से कानून के शासन के बाबत विभिन्न वैश्विक नजरियों के बारे में हमारी समझ और गहरी होगी। यह हर बच्चे की न्याय तक पहुंच और सीमाओं के आर-पार सहयोग व साझेदारी की संस्कृति विकसित करने का समय है।भुवन ऋभु जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के संस्थापक और प्रमुख सूत्रधार हैं जो बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारत का सबसे बड़ा कानूनी हस्तक्षेप नेटवर्क है। पिछले दो वर्षों में ही जेआरसी ने सीधे हस्तक्षेपों के जरिए तीन लाख से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं, ट्रैफिकिंग गिरोहों के चंगुल से 85,000 बच्चों को मुक्त कराया है और 54,000 से ज्यादा बाल दुर्व्यापारियों और बाल शोषकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में सहायता की है।भुवन ऋभु ने पिछले दो दशकों में 60 से भी ज्यादा जनहित याचिकाएं दायर की है जिस पर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने बाल अधिकारों को मजबूती देने वाले ऐतिहासिक फैसले सुनाये हैं। वर्ष 2011 में उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिकिंग को संयुक्त राष्ट्र के प्रोटोकाल के अनुरूप परिभाषित किया। साथ ही, 2013 में उनके कानूनी अभियान ने देश में गुमशुदा बच्चों के मुद्दे को उजागर किया और आखिरकार इस पर ऐतिहासिक फैसला आया। भुवन ऋभु बहुत से कानूनी और नीतिगत सुधारों के प्रमुख सूत्रधार रहे हैं। उन्होंने बच्चों के आॅनलाइन और असल जीवन में यौन शोषण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी सामग्रियां रखना, देखना व डाउनलोड करना अपराध है। साथ ही शीर्ष अदालत ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जगह बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (सी-सीम) शब्द के उपयोग का निर्देश दिया ताकि बच्चों के खिलाफ अपराध की वास्तविक प्रकृति को उजागर किया जा सके। उन्होंने विभिन्न कानूनी हस्तक्षेपों के जरिये यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि अपराधी कानून के शिकंजे से बचने न पाएं और पीड़ित बच्चों को तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर न्याय मिले। वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन उन गिने-चुने अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल है जो शांति, न्याय और लोकतंत्र के आधार के तौर पर कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए पिछले 60 वर्षों से सतत प्रयास कर रहा है।
टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 08 मई 2025 को मोहिनी एकादशी उत्सव अत्यंत धूमधाम और भक्तिमय वातावरण में आयोजित किया गया। प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर रजनीगंधा, गुलाब, बेला, गेंदा, तुलसीदल की मालाओं से श्री श्याम प्रभु का श्रृंगार किया गया। साथ ही मंदिर में विराजमान शिव परिवार एवं बजरंगबली का भी इस अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया।रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु के जयकारों के बीच पावन ज्योत प्रज्ज्वलित की गयी। श्री श्याम तुम्हारे कदमों में हम नजर बिछाए बैठे हैं, हारे का सहारा है बाबा श्याम हमारा, अपने दिल का हाल सुनावन आयां हां, बस इतनी तमन्ना है हे श्याम तुम्हें देखूं... इत्यादि मधुर भजनों की लय पर भग्तगण श्री श्याम प्रभु को रिझाते रहे। इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान, फल, मेवा व केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया। रात्रि 12 बजे महाआरती व प्रशाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। आज के इस कार्यक्रम में गोपी किशन ढांढनीया, ओम जोशी, रमेश सारस्वत, बालकिशन पररमपुरिया, नितेश लाखोटिया, चंद्र प्रकाश बगला, धीरज बंका, अभिषेक डालमिया, राजेश सारस्वत, विकास पाडिया का विषेश सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार ने दी।
अन्न का शरीर से गहरा संबंध है तथा जैसा खाए अन्न-वैसा बने मन : गायत्री साधक एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार रांची शाखा के कुटुंबजन ग्रेटर नोएडा वेस्ट में अपने आवास परिसर में अपने दो पौत्रों में छोटे का अनप्राशन संस्कार और बड़े का जन्मदिवस संस्कार 51 घंटे का अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन कर गायत्री यज्ञीय विधान से संपन्न किये। शाखा प्रतिनिधि साधक ने संस्कार अनुष्ठान कार्यक्रम में स्थानीय सोसाइटीज के पहुंचे बच्चों व अभिभावकों बीच इस अवसर पर गायत्री महामंत्र, महाविद्या, महाविज्ञान, यज्ञ विधान, गायत्री परिवार,जप-अनुष्ठान संबंधित संचालित कार्यक्रमों के कुछ आयोजनों पर तथा इस संस्थान अभियान के अंतर्गत प्रचलित युग निर्माण अभियान, विचार क्रांति अभियान, ग्रामे ग्रामे गायत्री यज्ञ, गृहे गृहे गायत्री स्थापन, उपासना, संस्कार प्रकरण संबंधित विषयगत उद्देश्य अन्नप्राशन संस्कार व जन्मदिवस संस्कारोत्सव युक्त यज्ञीय प्रकरण पर प्रकाश डाल बताया कि अन्न का शरीर से गहरा संबंध है, जैसा खाए अन्न- वैसा बने मन बताया कि शिशु के लिए अन्नाहार क्रम को श्रेष्ठतम संस्कारयुक्त यज्ञीय व धमार्नुष्ठान के वातावरण में करना अभीष्ट होता है। बताया कि शास्त्र में निदेर्शानुसार तेन त्यक्तेन भुंजीथा और आहार शुद्धौ सत्वशुद्धि का शास्त्र वचन है,अर्थात् हमें त्याग के साथ भोग करने का निर्देश है, भोजन ईश्वर को समर्पित कर या अग्नि में आहुति प्रदान कर खाने का निर्देश है। इस आधार व अवसर पर परिवार में विधिवत 51 घंटे का अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर देवपूजन, चालीसा -पाठ, मंत्र-जप सहित यज्ञीय कार्यक्रम करके गायत्री महामंत्र, महामृत्युंजय महामंत्र, प्रखर प्रज्ञाय सजल श्रद्धाय सहित कई महत्वपूर्ण मंत्रों से यज्ञीय आहुति में शुद्ध खीर मिष्ठान की मंत्राहुति देकर शेष भाग का प्रसाद भोग शिशु को अन्नाहार कराया गया। इस अवसर पर बड़े पौत्र का जन्मदिवसोत्सव भी पंच तत्वों के पूजन विधान से मनाया गया और सोसाइटीज में ऐसी वैदिक विधि विधान से नयी पीढ़ी में शिशुदेवों जैसा संस्कार विधान का आचरणअनुकरण का संदेश दिया गया। अंत में सभी ने उक्त शिशुओं को बधाई, मंगलमय कामना का संदेश व आशीर्वचन दे प्रसाद ग्रहण और प्रीति पान कर समापन किया। आगे बताया कि कल गुरुवार को मोहिनी एकादशी व्रत-उपवास क्रम में राष्ट्रीय आनलाइन समूह प्रतिनिधित्व में यह गायत्रीपरिवार साधक भाग लेकर इस 51 घंटे के दीप प्रज्ज्वलन के सानिध्य में इस अखंड जप-अनुष्ठान में शामिल होंगे। उक्त जानकारी गायत्री परिवार की शीला देवी और जय नारायण प्रसाद ने दी।
सीता नवमी मां जानकी के प्राकट्य दिवस पर श्री राधा- कृष्ण सेवा धाम मंदिर में हुआ विशेष पूजा-अर्चना एवं महा आरती का आयोजन भजन- कीर्तन में खूब झूमे श्रद्धालु टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग मे श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम के श्री राधा- कृष्ण मंदिर मे सीता नवमी व मां जानकी प्राकट्य दिवस के अवसर पर विशेष पूजा- अर्चना भव्य भजन कीर्तन, महाभोग एवं महाआरती का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में ट्रस्ट द्वारा भगवान श्री राज श्याम जी एवं माता सीता का विधिवत भोग पुजारी अरविंद पांडे द्वारा लगाया गया तथा पूरे विधि विधान से पूजा- अर्चना एवं आरती की गई। मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद भोग का वितरण किया गया। तत्पश्चात भजन- कीर्तन के कार्यक्रम में सांस्कृतिक परिषद रांची के महिलाओं द्वारा श्री राम सीता एवं श्री राधा कृष्ण पर समर्पित गाये मनमोहक सुमधुर भजनों की अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रोताओं को खूब झुमाया। तथा पूरा वातावरण को भक्तिमय बना दिया।इस अवसर पर सांस्कृतिक परिषद द्वारा सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम मे रहे मंदबुद्धि दिव्यांग निराश्रित प्रभु जी एवं आश्रम में रह रहे हैं उनकी सेवा करने वाले सेवादार साथियों को अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद खिलाया गया। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा कि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाया जाता है। इस दिन को देवी सीता के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। सीता नवमी धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन व्रत रखने से दांपत्य जीवन में सुख शांति और समृद्धि आती है माता सीता को आदर्श पत्नी और नारीत्व का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हमें माता सीता के आदर्शों का पालन करने की प्रेरणा देता है और हमारे जीवन में सुख शांति और समृद्धि की कामना करता है। इस अवसर पर विजय अग्रवाल, डुंगरमल अग्रवाल, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सज्जन पाड़िया, मनोज चौधरी, पूरणमल सर्राफ, संजय सर्राफ, सुरेश भगत, सुरेश अग्रवाल, नंदकिशोर चौधरी,पवन पोद्दार, विशाल जालान, शिव भगवान अग्रवाल, प्रेमचंद श्रीवास्तव, सुरेश मलिक,विधा देवी अग्रवाल, रानी लाभ, ममता शरण, सुधा मलिक, रानी दास, अनुपमा रंजन, श्वेता किरण, निर्मला किरण, कविता मलिक, पुष्पा लाभ, मनीषा प्रसाद, संध्या देवी, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी।
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