जानें सूरज तक पहुंचने के पहले चरण पर सबकुछएबीएन नॉलेज डेस्क। इसरो ने जानकारी दी है कि उसका सूर्य मिशन आदित्य एल1 अपनी पहली कक्षा में बदलाव करेगा। इसरो रविवार को सुबह करीब 11.45 बजे पहली अर्थ बाउंड फायरिंग करेगा। इससे पहले शनिवार को इसरो ने पीएसएलवी सी57 लॉन्च व्हीकल से आदित्य एल1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से हुई। यह मिशन भी चंद्रयान-3 की तरह पहले पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और फिर यह तेजी से सूरज की दिशा में उड़ान भरेगा।पृथ्वी की कक्षा में 16 दिन बितायेगा आदित्य एल1इसरो ने बताया कि आदित्य एल1 ने पावर जेनरेट करना शुरू कर दिया है। अर्थ बाउंड मैनुवर्स की मदद से यह फायरिंग की जायेगी। इससे आदित्य एल1 अपनी कक्षा बदलकर अगली कक्षा में प्रवेश करेगा। आदित्य एल1 पृथ्वी की कक्षा में 16 दिन बितायेगा। इस दौरान पांच बार इसकी कक्षा बदलने के लिए अर्थ बाउंड फायरिंग की जायेगी।110 दिन बाद लैग्रेंजियन पॉइंट पर पहुंचेगा आदित्य एल1110 दिन की यात्रा के बाद आदित्य एल1 लैग्रेजियन-1 पॉइंट पर पहुंचेगा। लैग्रेंजियन-1 पॉइंट पहुंचने के बाद आदित्य एल1 में एक और मैनुवर किया जायेगा, जिसकी मदद से आदित्य एल1 को एल1 पॉइंट के हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया जायेगा। यही से आदित्य एल1 सूरज की स्टडी करेगा। यह लैग्रेंजियन पॉइंट सूरज की दिशा में पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है।आदित्य एल1 के साथ सात पेलोड भेजे गये हैं, जो सूरज का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इनमें से चार पेलोड सूरज की रोशनी का अध्ययन करेंगे। वहीं बाकी तीन सूरज के प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन करेंगे। इससे पहले इसरो ने सफलतापूर्वक चांद की सतह पर चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर को उतारकर इतिहास रच दिया है। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन गया है।
22 सितंबर को मिलेगा अगला अपडेटइसरो ने दी ताजा जानकारीएबीएन नॉलेज डेस्क। इसरो ने शनिवार को रोवर को स्लीप मोड में भेज दिया है। अगला अपडेट अब 22 सितंबर को मिलेगा। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने यह जानकारी दी। इसरो ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि रोवर ने अपना कार्य पूरा कर लिया। इसे अब सुरक्षित रूप से पार्क किया गया है और स्लीप मोड में सेट किया गया है। एपीएक्सएस और लिब्स पेलोड बंद हैं। इन पेलोड से डेटा लैंडर के माध्यम से पृथ्वी पर प्रेषित किया जाता है। फिलहाल, बैटरी पूरी तरह चार्ज है। सौर पैनल 22 सितंबर, 2023 को अपेक्षित अगले सूर्योदय पर प्रकाश प्राप्त करने के लिए उन्मुख है। रिसीवर चालू रखा गया है। असाइनमेंट के दूसरे सेट के लिए सफल जागृति की आशा! अन्यथा, यह हमेशा भारत के चंद्र राजदूत के रूप में वहीं रहेगा। इससे पहले इसरो चीफ ने प्रमुख एस सोमनाथ ने कि चंद्रमा पर भेजे गये चंद्रयान-3 के रोवर और लैंडर ठीक से काम कर रहे हैं और चूंकि चंद्रमा पर अब रात हो जायेगी इसलिए इन्हें निष्क्रिय किया जायेगा। सोमनाथ ने कहा कि लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान अब भी काम कर रहे हैं और हमारी टीम अब वैज्ञानिक साजो-सामान के साथ ढेर सारा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अच्छी खबर यह है कि लैंडर से रोवर कम से कम 100 मीटर दूर हो गया है और हम आने वाले एक या दो दिन में इन्हें निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहे हैं, क्योंकि वहां (चांद पर) रात होने वाली वाली है। अब तक चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान पर लगे एक उपकरण ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सतह में गंधक होने की स्पष्ट रूप से पुष्टि की है। इसरो ने यह भी कि कहा कि उपकरण ने उम्मीद के मुताबिक एल्युमीनियम, कैल्शियम, लौह, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन का भी पता लगाया है।
इसरो-चंदयान विश्राम हम लैंडर और रोवर को विश्राम देने की प्रक्रिया में हैं : एस सोमनाथ एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रमुख एस सोमनाथ ने शनिवार का कहा कि चंद्रयान -3 मिशन से जुड़ी टीम विक्रम लैंडर और रोवर को विश्राम देने की प्रक्रिया में है। इसरो प्रमुख ने आज भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट आदित्य एल 1 को सफलतापूर्वक पृथ्वी की इच्छित कक्षा में स्थापित किये जाने के बाद श्रीहरिकोटा में इसरो वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा- हम दोनों (विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर) को विश्राम देने की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं। इसरो प्रमुख ने कहा कि लैंडर के भीतर रखकर भेजे गये रोवर ने सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर कदम रखने के बाद 100 मीटर तक चहलकदमी की है। लैंडर को चंद्रमा पर शिवशक्ति बिंदु पर उतारे जाने के बाद इस हिस्से पर अंधेरा होने से पहले कुछ दिनों का काम और बाकी है। उन्होंने कहा कि विक्रम और प्रज्ञान अंधेरे में रहते हुए अपने सौर पैनलों को बिजली बनाने से रोक देंगे और अगर 14 दिन बाद भी वह काम कर पाये तो यह बोनस होगा। उल्लेखनीय है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने 23 अगस्त को चंद्रयान-3 को चांद के दक्षिणी घ्रुव पर उतार कर नया इतिहास रच दिया। दुनिया का कोई भी देश चांद की इस कठिन सतह पर नहीं पहुंचा है। इसके अलावा इसरो ने अपने पहले सूर्य मिशन के तहत आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित करके अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो सूत्रों के मुताबिक 23 घंटे 40 मिनट की उल्टी गिनती समाप्त होने के साथ ही आज पूर्वाह्न 11:50 बजे पीएसएलवी-सी57 के जरिए शार रेंज से प्रक्षेपित आदित्य एल-1 को अब पृथ्वी की निचली कक्ष में स्थापित कर दिया गया है। इसी के साथ ही 125 दिनों की लंबे सफर में सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने का सिलसिला शुरू हो गया। उन्होंने बताया कि मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक पूरे अभियान पर नजर रखे हुए हैं।
11 दिन में इसरो के दो बड़े मिशन चांद-सूरज पर इसरो ने वो किया जो दुनिया नहीं कर पायीएबीएन नॉलेज डेस्क। इसरो ने चांद पर चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग का ऐलान किया। चांद के साउथ पोल में जहां कोई देश नहीं पहुंच पाया था, वहां भारत पहली बार पहुंचा। विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने 23 अगस्त से ही अपना काम शुरू कर दिया और पिछले 10 दिनों में कई ऐसी खोज की हैं, जो दुनिया के लिए एक अचंभा है। पूरी दुनिया इसरो की इस सफलता के आगे नतमस्तक हो गयी थी, नासा से लेकर दुनिया की अन्य बड़ी एजेंसियों ने करफड को सलाम ठोका था। भारत चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा, दक्षिणी पोल पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना था। इसरो जैसा कोई नहीं इसरो एक ऐसा संस्थान है, जिस पर पूरी दुनिया निगाहें रखती हैं। मंगलयान, चंद्रयान और अब सूर्ययान की सफलताओं ने इसके कद को और भी बढ़ा कर दिया है। दुनिया की कई बड़ी एजेंसियां अपने बड़े मिशनों में अंतर रखती हैं, क्योंकि तैयारी के लिए वक्त चाहिए और बाकी भी चीजें देखनी होती हैं। लेकिन इसरो ने सीमित संशाधनों के बाद कई ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिसने इतिहास रचा है। 11 दिनों के भीतर ही एक लैंडिंग और एक लॉन्चिंग इसका पुख्ता सबूत भी देता है। ऐसे सूरज की ओर बढ़ा आदित्य एल-1 इन सफलताओं की वजह से ही आज दुनिया की कई बड़ी एजेंसियां और देश इसरो की मदद लेते हैं। भारत ने कई बार दूसरे देशों के सैटेलाइट अपनी तरफ से लॉन्च किये हैं, क्योंकि अन्य देशों के पास इतना अनुभव नहीं है इसलिए इसरो की मदद ली जाती है।इसके अलावा कई देश अपने अहम मिशन में भी इसरो को साझेदार बनाते हैं, जिसका ताजा उदाहरण चंद्रयान-4 होने वाला है। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद जापान भारत के साथ मिलकर चंद्रयान-4 पर काम करने वाला है। इसरो के आदित्य एल-1 मिशन से जुड़ी जानकारी : सूरज का अध्ययन करने के लिए इसरो ने आदित्य एल-1 मिशन लॉन्च किया है। 2 सितंबर को इसने उड़ान भरी और करीब 4 महीने के भीतर ये एल-1 पॉइंट पर पहुंचेगा। सूरज और पृथ्वी के बीच एल-1 एक ऐसा पॉइंट है, जहां से सूरज पर लगातार नजर रखी जा सकती है और उसकी आग से भी बचा जा सकता है। ये पृथ्वी से करीब 15 लाख किमी। दूर है। 400 करोड़ रुपये के बजट वाले इस प्रोजेक्ट से सूरज की कोरोना लेयर, वहां के वायुमंडल, एल-1, सूरज की किरणों, वहां के भूत और भविष्य से जुड़ी जानकारियों का अध्ययन करने का मौका मिलेगा।
सूर्य का अध्ययन जरूरी क्यों? जानें इसके बारे में सब कुछएबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक उतारकर इतिहास रचा। उत्साह से लबरेज राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी आज आदित्य-एल1 मिशन को लॉन्च करेगी।इस मिशन का उद्देश्य सूर्य का अध्ययन करना है।चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब दुनिया की नजर आदित्य-एल1 मिशन पर होगी। आदित्य-एल1 क्या है? मिशन के उद्देश्य क्या हैं? मिशन के घटक कौन-कौन से हैं? इसे कब और कहां से लॉन्च किया जायेगा? सूर्य का अध्ययन क्यों जरूरी है? आइए समझते हैं...पहले जानते हैं आदित्य-एल1 क्या है?आदित्य एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला मिशन है। इसके साथ ही इसरो ने इसे पहला अंतरिक्ष आधारित वेधशाला श्रेणी का भारतीय सौर मिशन कहा है। अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंजियन बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की योजना है जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है।दरअसल, लैग्रेंजियन बिंदु वे हैं जहां दो वस्तुओं के बीच कार्य करने वाले सभी गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे को निष्प्रभावी कर देते हैं। इस वजह से एल1 बिंदु का उपयोग अंतरिक्ष यान के उड़ने के लिए किया जा सकता है।मिशन के उद्देश्य क्या हैं?भारत का महत्वाकांक्षी सौर मिशन आदित्य एल-1 सौर कोरोना (सूर्य के वायुमंडल का सबसे बाहरी भाग) की बनावट और इसके तपने की प्रक्रिया, इसके तापमान, सौर विस्फोट और सौर तूफान के कारण और उत्पत्ति, कोरोना और कोरोनल लूप प्लाज्मा की बनावट, वेग और घनत्व, कोरोना के चुंबकीय क्षेत्र की माप, कोरोनल मास इजेक्शन (सूरज में होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोट जो सीधे पृथ्वी की ओर आते हैं) की उत्पत्ति, विकास और गति, सौर हवाएं और अंतरिक्ष के मौसम को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करेगा।मिशन के घटक कौन-कौन से हैं?आदित्य-एल1 मिशन सूर्य का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए सात वैज्ञानिक पेलोड का एक सेट ले जायेगा। विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) सूर्य के वायुमंडल के सबसे बाहरी भाग यानी सौर कोरोना और सूरज में होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोटों यानी कोरोनल मास इजेक्शन की गतिशीलता का अध्ययन करेगा।सोलर अल्ट्रा-वायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (एसयूआईटी) नामक पेलोड अल्ट्रा-वायलेट (यूवी) के निकट सौर प्रकाशमंडल और क्रोमोस्फीयर की तस्वीरें लेगा। इसके साथ ही SUIT यूवी के नजदीक सौर विकिरण में होने वाले बदलावों को भी मापेगा।आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (एएसपीईएक्स) और प्लाज्मा एनालाइजर पैकेज फॉर आदित्य (पीएपीए) पेलोड सौर पवन और शक्तिशाली आयनों के साथ-साथ उनके ऊर्जा वितरण का अध्ययन करेंगे।सोलर लो एनर्जी एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (SoLEXS) और हाई एनर्जी एल1 ऑर्बिटिंग एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (HEL1OS) विस्तृत एक्स-रे ऊर्जा रेंज में सूर्य से आने वाली एक्स-रे किरणों का अध्ययन करेंगे। वहीं, मैग्नेटोमीटर पेलोड को एल1 बिंदु पर दो ग्रहों के बीच के चुंबकीय क्षेत्र को मापने के लिए बनाया गया है।आदित्य-एल1 के सातों विज्ञान पेलोड की खास बात है कि ये देश में विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किये गये हैं। ये सभी पेलोड इसरो के विभिन्न केंद्रों के सहयोग से विकसित किये गये हैं।
चांद पर कहां क्रैश हुआ था रूस का लूना-25, नासा ने खोज निकाली वह जगह!एबीएन नॉलेज डेस्क। चांद की सतह पर पहुंचने में भारत के चंद्रयान-3 और रूस के लूना-25 के बीच होड़ थी। चंद्रयान-3 से बाद में लॉन्च किया लूना-25 चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया। अब अमेरिका की नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) ने उस जगह का पता लगाने का दावा किया है, जहां लूना-25 क्रैश हुआ था। नासा ने गुरुवार को घोषणा की कि उसके लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (एलआरओ) अंतरिक्ष यान ने एक गड्ढा देखा है, जो रूस के लूनर मिशन लूना-25 का मलबा हो सकता है।रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने 21 अगस्त को लूना-25 के क्रैश हो जाने की खबर दी थी। नासा में एलआरओ टीमों ने अगले ही दिन साइट की तस्वीरें खींचने के लिए अंतरिक्ष यान को आदेश भेजे। क्रैश से पहले ली गई तस्वीरों और बाद में ली गयी तस्वीरों की तुलना करने पर उन्हें एक छोटा सा नया गड्ढा दिखाई दे रहा है। नासा ने दावा किया है कि यह संभवत: लूना-25 का मलबा हो सकता है। लूना-25 के दुर्घटनाग्रस्त होने की सटीक परिस्थितियां अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन रोस्कोस्मोस ने कहा कि लैंडिंग से पहले की कक्षा में जाने के दौरान अंतरिक्ष यान में जिस तरह की गति और बदलाव था, वह निर्धारित गति से काफी अलग था। चंद्रमा के लिए लॉन्च किये गये प्रोजेक्ट्स की गति को नियंत्रित करना काफी ज्यादा चैलेंज भरा काम होता है। चंद्रयान-2 से सीख लेकर चंद्रयान-3 कछुए की गति की तहर धीरे-धीरे चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में सक्षम हो पाया।
क्या चांद पर आया भूकंप? प्रज्ञान के मैसेज का इसरो लगा रहा पताएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत का मिशन चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव से लगातार नयी-नयी जानकारी दे रहा है। हाल ही में विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान की चांद की जमीन से ली गयी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे लेकिन इस बार मामला कुछ अलग ही दिख रहा है। इसरो को चांद पर भूकंप आने की जानकारी मिली है। हालांकि अभी तक ये तय नहीं हो सका है कि चांद की जमीं से जो जानकारी आ रही है वो सच में भूकंप है भी या कुछ और। चांद भूकंपीय गतिविधि (आईएलएसए) पेलोड ने एक घटना की जानकारी दी है जो प्राकृतिक घटना जैसी मामूल पड़ती है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि हम सभी स्रोत की जांच कर रहे हैं।राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से जानकारी दी गई है कि अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (एपीएक्सएस) उपकरण ने चांद पर ऑक्सीजन के साथ ही कुछ और छोटे तत्वों का भी पता लगाया है।बता दें कि चांद पर भेजे गए प्रज्ञान रोवर में लगे माइक्रो इलेक्ट्रो मैकेनिकल सिस्टम (एमईएमएस) प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण ने चांद पर हो रही कई तरह की हलचल का पता लगाया है। ऐसी ही एक घटना 26 अगस्त को रिकॉर्ड की गई है जो पूरी तरह से प्राकृतिक है। इस घटना के बारे में इसरो के वैज्ञानिक पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।हाइड्रोजन का पता लगाने की कोशिश जारीबता दें कि कुछ दिन पहले ही चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर में लगे लिब्स डिवाइस ने चांद की सतह की संरचना की जांच की थी। जांच के दौरान चांद पर सल्फर के मौजूद होने की पुष्टि हुई है।इसरो की ओर से जानकारी दी गयी थी कि रोवर के स्पेक्ट्रोस्कोप ने जैसा अनुमान लगाया गया था। उसके मुताबिक ही एल्यूमीनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम, टाइटेनियम, मैंगनीज, सिलिकॉन और ऑक्सीजन का पता लगाया है। इसरो ने कहा कि अब हमारी कोशिश हाइड्रोजन का पता लगाने की है।
चंद्रयान-3 का चांद पर एक सप्ताह पूरा, जानिये- इन 7 दिनों में प्रज्ञान ने क्या-क्या खोजा?एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का चंद्रयान-3 अपने मिशन में लगा हुआ है। वह पिछले एक सप्ताह से विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान की मदद से लगातार नयी-नयी खोजें करने के साथ कई हैरान कर देने वालीं जानकारियां भी जुटा रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान कैल्शियम और टाइटैनियम समेत कई तरह के खनिज पदार्थों की तलाश करने साथ रोवर प्रज्ञान ने चंद्रमा पर आक्सीजन भी तलाश लिया है, जो मनुष्य के लिए बेहद जरूरी है। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि चांद पर अब हाइड्रोजन और पानी भी संभव हो सकता है, जिसकी मदद से भविष्य में चांद पर बस्तियां बनाना संभव होगा। यहां पर बता दें कि चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान की ताकत अब देश-दुनिया देख रही है। आइये जानते हैं कि चंद्रमान-3 द्वारा चांद पर 23 अगस्त को सॉफ्ट लैंडिंग के बाद क्या-क्या खोजा और तलाशा है, जो भविष्य मेंं चांद पर मनुष्यों की बस्तियां बसाने में मददगार साबित होगा।चांद पर अधिक तापमानविक्रम लैंडर पर लगाये गये खास तरह के थर्मामीटर के अनुसार, चंद्रमा पर 4 इंच जमीन की सतह के नीचे तापमान 10 डिग्री सेल्सियस था। उधर, लैंडर पर लगे चास्टे ने चांद की ऊपरी सतह पर तापमान 50-60 डिग्री सेल्सियस होने का पता लगाया है। इसके अलावा, चंद्रमा की सतह के ऊपर और सतह से 10 सेंटीमीटर नीचे के तापमान में अधिक अंतर था। वैज्ञानिकों की मानें तो इस खोज से यह फायदा मिलेगा कि इंसान अगर भविष्य में चांद पर जाने की योजना बनाता है तो बस्तियां कहां पर बसाना अधिक ठीक रहेगा।चांद पर मिला सल्फरचंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान ने चंद्रमा पर सल्फर के मिलने की पुष्टि की है। चांद पर यह हल्के पीले रंग का रसायन है। इससे सल्फाइस बनता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक सल्फर का इस्तेमाल पानी की सफाई के अलावा, खनिजों के खनन में किया जाता है। इतना ही नहीं, सल्फर की सहायता तेल रिफाइनिंग, कार बैटरी, एसिड और फर्टिलाइजर में भी होता है।एल्यूमिनियम भी मिलाचंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान ने चंद्रमा पर एल्यूमिनियम को भी तलाशा है। मिली जानकारी के अनुसार, चंद्रमा की सतह पर काफी मात्रा में एल्यूमिनियम मिला है, जिससे एंट्रींजेंड बनता है। इससे कई तरह की चीजों का निर्माण किया जा सकता है। सामान्य वैज्ञानिक भाषा में समझें तो एल्यूमिनियम फॉस्फेट की सहायता से कांच का निर्माण किया जाता है। एल्यूमिनियम की मदद से पेंट, वार्निंश, धातु, सिरेमिक, पल्प या पेपर प्रोडक्ट, कास्मेटिक जैसी चीजों का निर्माण किया जाता है। हल्का और मजबूत होने के चलते इससे गाड़ियां, बर्तन, खिड़कियां या दीवारों और छतों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कॉयल, केन्स और फॉयल भी बनाया जा सकता है।कैल्शियम भी होगा मददगारचंद्रमा की सतह पर भारी मात्रा में कैल्सियम के भी होने की पुष्टि हुई है। कैल्शियम का इस्तेमाल मेडिकल का सामान बनाने में किया जा सकता है। इससे सीमेंट और मोर्टार के अलावा कांच बनाने में भी मदद ली जा सकती है। इसका इस्तेमाल टूथपेस्ट के इस्तेमाल में भी हो सकता है। दवा, खाद्य पदार्थ बनाने, पेपर ब्लीज और साबुन बनाने में भी कैल्शियम की मदद ली सकती है।लोहे से बदलेंगे हालातचंद्रमा की सतह लोहा भी मिला। इसके इस्तेमाल घर समेत अन्य चीजें बनाने में हो सकता है। धरती पर छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी चीज बनाने में इसका इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में चांद पर बस्तियां बनाने के दौरान इसका इस्तेमाल हो सकता है।क्रोमियम और टाइटैनियमरोवर प्रज्ञान ने चांद की सतह पर क्रोमियम यऔर टाइटैनियम की भी खोज की है। क्रोमियम दरअसल, मोटामा घटाने के साथ डायबिटीज को नियंत्रित करने में मददगार होता है। इसके अलावा, टाइटैनियम सबसे मजबूत होने के साथ हल्के वजन का धातु कहलाता है। इसकी मदद से एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर बनाया जाता है। इसके अलावा, बुलेटप्रूफ जैकेट और आर्मर प्लेटिंग बनाई जाती है। इसी तरह, आक्सीन के अलावा, मैग्नीज और सिलिकॉन भी मनुष्यों के चांद पर बसने की स्थिति में मददगार साबित होंगे।
रोवर प्रज्ञान ने पृथ्वीवासियों से की बात, कहा- चंद्रमा के रहस्यों को उजागर करने की राह पर हूं...एबीएन नॉलेज डेस्क। चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान ने ताजा मैसेज भेजा है। जिसमें उसने पृथ्वीवासियों से बातचीत की है और उसने हालचाल भी पूछा। रोवर प्रज्ञान ने अपनी और लैंडर विक्रम के बारे में भी बताया। रोवर प्रज्ञान ने यह भी बताया कि चंद्रमा के रहस्यों को उजागर करने की राह पर आगे बढ़ रहा है।रोवर प्रज्ञान ने बताया, बहुत जल्द अच्छी खबर मिलेगी : रोवर प्रज्ञान ने जो ताजा मैसेज किया है। उसको लेकर चंद्रयान-3 के आधिकारिक ट्विटर हैंडल में इसरो ने शेयर किया। जिसमें लिखा, हैली पृथ्वीवासियों। मैं हूं रोवर प्रज्ञान। आशा करता हूं, आप सभी अच्छे होंगे। मैं सभी को यह बताना चाहता हूं कि मैं चंद्रमा के रहस्यों को उजागर करने की दिशा में आगे बढ़ रहा हूं। रोवर प्रज्ञान ने आगे बताया, मैं और मेरा दोस्त विक्रम लैंडर संपर्क में हैं। आखिर में रोवर प्रज्ञान ने बताया, सबसे अच्छा जल्द ही आने वाला है।
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