विगत जुलाई माह में बरोरा थाना क्षेत्र के अपर मंदरा में हुई फायरिंग और मारपीट करने से जुड़े मामले के मुख्य आरोपी पप्पू चौहान एबीएन न्यूज नेटवर्क, बाघमारा, कतरास (धनबाद)। बरोरा गोलीकांड में घटना के बाद अपरमंदरा निवासी ललीता देवी के लिखित आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। मामले के अन्य आरोपितों को पुलिस ने पूर्व में ही गिरफ्तार कर लिया था लेकिन पप्पू चौहान फरार चल रहा था। बरोरा थाना परिसर में पत्रकारों को जानकारी देते हुए कतरास सर्किल इंस्पेक्टर मो. रुस्तम ने बताया कि विगत 26 जुलाई को अपरमंदरा में बिजली तार जोड़ने को लेकर माथाबांध और अपर मंदरा के लोगों के बीच मारपीट और फायरिंग की घटना हुई थी। एसएसपी के निर्देश पर अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी बाघमारा अजीत कुमार विमल के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया था। टीम ने इस कांड के मुख्य आरोपी पप्पु चौहान को गिरफ्त में ले लिया गया। पप्पू का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है।
झारखंड सीआईडी की टीम पहुंची जेएसएससी कार्यालय, सचिव सुधीर गुप्ता से हो रही पूछताछ टीम एबीएन, रांची। झारखंड सीआईडी की टीम जेएसएससी कार्यालय पहुंची है। जेएसएससी सचिव सुधीर गुप्ता की मौजूदगी में कार्रवाई चल रही है। सुधीर गुप्ता से पूछताछ भी हो रही है। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और एडीशनल एविडेंस को लेकर सीआईडी की टीम ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। सीआईडी की टीम सफल अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कर रही है। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ी के शिकायत के आधार पर सीआईडी कार्रवाई में जुटी है। सीआईडी ने अगस्त में जेएसएससी के सचिव सुधीर गुप्ता से सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामले में कड़ी पूछताछ की थी।
धनबाद : ED की रडार पर कोयला कारोबारी का परिवारएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। अवैध कोयला खनन और तस्करी मामले में ED ने कारोबारी एलबी सिंह की पत्नी आरती सिंह से रांची कार्यालय में घंटों पूछताछ की। जांच एजेंसी ने उनके पति के कारोबार, संपत्तियों और निवेश के स्रोत को लेकर सवाल किए। 29 जुलाई की छापेमारी में ED को 1.02 करोड़ रुपये नकद, करीब 160 करोड़ के म्यूचुअल फंड निवेश और 200 से अधिक अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिलने का दावा है। अब जांच कथित अवैध कमाई को संपत्तियों और निवेश में लगाने के एंगल पर आगे बढ़ रही है।
असामाजिक तत्वों एवं अराजक गतिविधियों के विरुद्ध रांची पुलिस का अभियान टीम एबीएन, रांची। राजधानी में सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग, खुले में नशाखोरी, लफंगई और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोकथाम लगाने के उद्देश्य से रांची पुलिस ने शनिवार शाम एक विशेष समकालिक सघन जांच अभियान चलाया। यह अभियान नगर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में स्थित 50 से अधिक संवेदनशील एवं रणनीतिक स्थानों पर एक साथ संचालित किया गया। प्रमुख जांच स्थल एवं लक्षित क्षेत्र : इस विशेष अभियान के अंतर्गत खुले मैदानों, प्रमुख व्यापारिक चौराहों, सुनसान इलाकों और शराब की दुकानों के आसपास के क्षेत्रों में सघन जांच की गयी।प्रमुख चौक-चौराहे व बाजार क्षेत्र : फिरायालाल चौक, अल्बर्ट एक्का चौक, मेन रोड तथा अन्य भीड़भाड़ वाले प्रमुख व्यापारिक केंद्र। खुले मैदान व जमावड़े वाले स्थान : ओटीसी ग्राउंड, डीआईजी ग्राउंड, मोराबादी मैदान परिसर एवं अन्य खुले सार्वजनिक मैदान जहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है। सुनसान व निर्माणाधीन क्षेत्र : स्मार्ट सिटी परिसर (धुर्वा), रिंग रोड से सटे सुनसान मार्ग, खाली पड़े प्लॉट और अंधेरे वाले संवेदनशील रास्ते। शराब दुकानों के निकटवर्ती क्षेत्र : सभी देशी-विदेशी शराब दुकानों के आसपास के स्थान, नजदीकी ढाबे, गुमटियां व नुक्कड़ जहां खुले में शराब पीने और उपद्रव करने की आशंका रहती है। प्रत्यक्ष निगरानी: संपूर्ण अभियान की मॉनिटरिंग डीएसपी द्वारा व्यक्तिगत रूप से एवं रियल-टाइम में की गयी। अभियान के दौरान पुलिस उपाधीक्षक स्वयं फील्ड में मौजूद रहे और विभिन्न थाना प्रभारियों तथा सशस्त्र पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला। सघन तलाशी एवं चेकिंग: संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान व तलाशी ली गई, वाहनों की जांच की गई और अनावश्यक रूप से भीड़ लगाने वालों को खदेड़ा गया। 100 से अधिक लोगों पर कार्रवाई: अभियान के दौरान खुले में शराब पीने, संदिग्ध रूप से मंडराने और हुड़दंग मचाने वाले 100 से अधिक व्यक्तियों को पकड़ा गया। इन सभी को भविष्य में ऐसी गतिविधियों की पुनरावृत्ति न करने की सख्त चेतावनी एवं समुचित हिदायत देकर छोड़ा गया, जबकि इनके नाम-पते पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज कर लिये गये हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य असामाजिक तत्वों, मनचलों और आदतन अपराधियों पर नकेल कसना। खुले में नशाखोरी, फब्तियां कसने, उपद्रव और सड़क पर होने वाले अपराधों पर पूर्णत: रोक लगाना। शहरवासियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए राजधानी में एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना। सार्वजनिक अपीलरांची पुलिस आम जनता से अपील करती है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर शांति और व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें। किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि, उपद्रव या संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम (डायल 112) या अपने नजदीकी थाने को दें। रांची पुलिस द्वारा असामाजिक तत्वों के विरुद्ध इस प्रकार का विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
झारखंड: JSSC-CGL पेपर लीक मामले में CID की बड़ी कार्रवाई, परीक्षा संचालन से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तारटीम एबीएन, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC-CGL) 2023 में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID), झारखंड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए परीक्षा संचालन से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी सीआईडी थाना कांड संख्या 01/2025 के तहत की गई है। मामले की जांच लगातार जारी है।JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामलासीआईडी के अनुसार, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित झारखंड स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा- 2023 में कथित अनियमितताओं के संबंध में सीआईडी थाना कांड संख्या 01/2025 दर्ज किया गया था। इसी मामले में जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?गिरफ्तार किए गए पहले आरोपी की पहचान सोमांश प्रकाश के रूप में हुई है। वह भरत जी तिवारी का पुत्र है और मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के विक्रमगंज थाना क्षेत्र स्थित असकामिनी नगर का रहने वाला है। वर्तमान में वह दिल्ली के बुरारी थाना क्षेत्र के संत नगर, बरारी स्थित हाउस नंबर C-81, अपर ग्राउंड फ्लोर में रह रहा था।दूसरे आरोपी राहुल कुमार हैं, जो संजय कुमार मिश्रा के पुत्र हैं। वह बिहार के वैशाली जिले के महुआ थाना क्षेत्र के चांदसराय गांव का निवासी है। राहुल कुमार भी वर्तमान में दिल्ली के बुरारी थाना क्षेत्र के संत नगर, बरारी स्थित उसी पते पर रह रहा था।सीआईडी ने तेज की जांचअपराध अनुसंधान विभाग ने बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के क्रम में की गई है। सीआईडी अब इस पूरे नेटवर्क और परीक्षा संचालन में संभावित भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। मामले में आगे और भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द: बड़ी संख्या में झारखंड हाई कोर्ट पहुंचे नौकरी गंवाने वाले कर्मचारी टीम एबीएन, रांची। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द होने के बाद अब नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के पास जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर अब बड़ी संख्या में कर्मचारी झारखंड हाई कोर्ट पहुंच रहे हैं। कर्मचारी कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं से मिलाकर अपनी बातें रख रहे हैं। वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए मामले में जल्द ही याचिका दाखिल होने की संभावना है।
समाजसेवी एवं भाजपा नेता प्रकाश कुमार सिंह के खिलाफ मुकदमा हाईकोर्ट ने किया निरस्त टीम एबीएन, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने समाजसेवी सह भाजपा नेता प्रकाश कुमार सिंह के खिलाफ वर्ष 2024 में दर्ज मामले में चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही, चार्जशीट एवं तेनुघाट न्यायालय के संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया है। प्रकाश कुमार सिंह ने तेनुघाट व्यवहार न्यायालय द्वारा 17 दिसंबर 2025 को उनकी याचिका खारिज किये जाने के आदेश को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में सीआर एमपी नं. 2482 आॅफ 2026 दाखिल की थी। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने 11 अगस्त को सुनवाई के बाद बेरमो थाना कांड संख्या 60/2024, जीआर संख्या 385/2024 से संबंधित पूरी आपराधिक कार्यवाही, चार्जशीट संख्या 01/2024, 03 जुलाई 2024 के कॉग्नाइजेंस आॅर्डर तथा 17 दिसंबर 2025 के तेनुघाट न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रकाश कुमार सिंह के विरुद्ध किसी भी धारा में आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते हैं और याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध धारा 188, 171-एफ एवं 171-एच के तहत कोई अपराध नहीं बनता। साथ ही, माननीय न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने अपने आदेश में तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के 17 दिसंबर 2025 के आदेश पर काफी स्पष्ट और गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि तेनुघाट व्यवहार न्यायालय द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज करना विधिसम्मत नहीं था तथा रिकॉर्ड पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं थी। प्रकाश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार ठाकुर, अधिवक्ता राजेश कुमार एवं अधिवक्ता अनीश कुमार सिन्हा ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखा। फैसले के बाद प्रकाश कुमार सिंह ने कहा कि उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर बेरमो के एक राजनीतिक परिवार के इशारे पर प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग के माध्यम से की गयी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास था और न्यायालय के आदेश से सत्य की जीत हुई है। यह फैसला न्याय व्यवस्था में उनके विश्वास को और मजबूत करता है। उच्च न्यायालय का यह आदेश 11 अगस्त 2026 को पारित किया गया।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) मेधा घोटाला और परीक्षा अनियमितता मामले में सीआईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश होता जा रहा है।सीआईडी ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन और बिचौलियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार हुए आरोपियों में उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार शामिल है। जानकारी के अनुसार इन सभी की गिरफ्तारी परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल के साथ मिलकर सेटिंग-गेटिंग करने के आरोप में हुई। इन गिरफ्तारियों के साथ ही इस पूरे प्रकरण में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है।
जेपीएससी परीक्षा अनियमितता: सीआईडी की जांच का दायरा बढ़ा, 18 ठिकानों पर छापेमारी टीम एबीएन, रांची। जेपीएससी परीक्षा अनियमितता मामले में सीआईडी ने जांच का दायरा और बढ़ाते हुए राज्य के पांच जिलों में 18 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में की गयी। छापेमारी के दौरान सीआईडी ने कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये हैं। इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों की पासबुक और चेकबुक, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट्स की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। जांच एजेंसी अब 31 अन्य अभ्यर्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।इसके अलावा वर्ष 2013 से 2025 के बीच आयोजित कई भर्ती परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। संबंधित अभ्यर्थियों से उनके आवेदन पत्र, ओएमआर शीट, शैक्षणिक दस्तावेज और अन्य प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। सीआईडी की जांच में मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी की भूमिका भी सामने आयी है। जांच एजेंसी के अनुसार, अभय तिवारी ने न केवल राज्य स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया, बल्कि केंद्रीय स्तर की कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की थीं। अब सीआईडी इस बात की भी जांच कर रही है कि इन परीक्षाओं में उनकी सफलता के पीछे किसी संगठित सिंडिकेट या अन्य अनियमितताओं की भूमिका तो नहीं थी।
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