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अब जब्त अवैध शराब का डिजिटल रिकॉर्ड रखेगा उत्पाद विभाग
Published / 2026-09-22 21:56:26
अब जब्त अवैध शराब का डिजिटल रिकॉर्ड रखेगा उत्पाद विभाग

जब्त अवैध शराब को लेकर उत्पाद विभाग का बड़ा कदम, डिजिटल और व्यवस्थित तरीके से तैयार होगा पूरा रिकॉर्ड   टीम एबीएन, रांची। झारखंड में जब्त अवैध शराब को लेकर अब उत्पाद विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। वर्षों से पुलिस और आबकारी विभाग के मालखानों में पड़ी जब्त शराब का पूरा रिकॉर्ड अब डिजिटल और व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जाएगा। उत्पाद विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने राज्य के सभी जिलों के एसपी को पत्र लिखकर जब्त अवैध शराब का पूरा हिसाब मांगा है। किस जिले के किस थाना क्षेत्र में, किस तारीख को, किस कांड संख्या के तहत कितनी शराब जब्त की गयी है, इसकी पूरी जानकारी विभाग ने एक निश्चित समय अवधि के बीच मांगी है। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण, नकली और अवैध शराब से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने और आबकारी राजस्व की चोरी रोकने की दिशा में काम किया जायेगा।

ट्राई की सख्ती के बाद बिना डेटा वाले सस्ते रिचार्ज लाने की तैयारी में जियो, एयरटेल और वीआई
Published / 2026-09-22 18:08:58
ट्राई की सख्ती के बाद बिना डेटा वाले सस्ते रिचार्ज लाने की तैयारी में जियो, एयरटेल और वीआई

ट्राई की सख्ती! जियो, एयरटेल और वीआई लायेंगे बिना डेटा वाले सस्ते रिचार्ज एबीएन नॉलेज डेस्क। मोबाइल रिचार्ज को लेकर टेलिकॉम यूजर्स के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। ट्राई ने जियो, एयरटेल और वीआई रिचार्ज प्लान को लेकर नए नियम जारी किये हैं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मोबाइल रिचार्ज को लेकर टेलिकॉम यूजर्स के लिए एक अहम बदलाव करते हुए वॉइस और एसएमएस  ओनली रिचार्ज प्लान को लेकर नये नियम जारी किया है। वैसे ग्राहक जो मुख्य रूप से फोन का इस्तेमाल कॉलिंग और रटर के लिए करते हैं और जिन्हें मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होती, उन्हें इस नये नियम का फायदा मिलेगा। टई द्वारा जारी इन नये नियम के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों को अलग-अलग वेलिडिटी वाले ऐसे स्पेशल टैरिफ वाउचर ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराने होंगे, जिनमें केवल वॉइस और एसएमएस की सुविधा होगी। ऐसे में ग्राहकों को अपनी जरूरत के हिसाब से रिचार्ज करने की सुविधा मिलेगी। क्या रिचार्ज सस्ता हो जायेगा? अगर बात करें रिचार्ज सस्ता होगा या नहीं तो इसका जवाब है, हां कुछ ग्राहकों के लिए सस्ता हो सकता है। मगर सभी लोगों के लिए नहीं होगा। जानकारी के मुताबिक, ट्राई ने सभी मोबाइल रिचार्ज की कीमत को कम करने का आदेश नहीं दिया है। जो लोग पहले से डेटा वाला प्लान का इस्तेमाल कर रहे हैं और जिन लोगों को डेटा चाहिए। उन लोगों के लिए इस नियम के तहत रिचार्ज सस्ता होने की गारंटी नहीं है। इस नए नियम का फायदा सिर्फ उन्हीं लोग को होगा जिन लोगों को डेटा नहीं चाहिए। ऐसे ग्राहक डेटा के साथ आने वाले प्लान के जगह पर सिर्फ कॉल और एसमएस वाला विकल्प चुन सकते हैं। 28 दिन की वैलिडिटी का क्या होगा ? नये नियम में 30 दिन या उससे कम अवधि वाले  वॉइस-एसएमएस ओनली विकल्प उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है। इसके अलावा कम से कम एक एसटीवी भी होना चाहिए। जिसे हर महीने उसी तारीख को दोबारा रिन्यू किया जा सके। यानी जिन ग्राहकों को सिर्फ कॉल और एसमएस की जरूरत है, उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक छोटी अवधि का विकल्फ मिलेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ट्राई ने जियो, एयरटेल और वीआई के सभी मौजूदा 28-दिन वाले प्लान को सीधे 30 दिन का करने का आदेश दिया है। नियम का मुख्य फोकस बिना डेटा वाले वॉइस और एसएमएस प्लान को अलग-अलग वैलिडिटी में उपलब्ध कराने पर है। ट्राई खुद मोबाइल टैरिफ की कीमत तय नहीं करता, कंपनियां बाजार और अन्य व्यावसायिक परिस्थितयों के आधार पर अपने टैरिफ तय करती है। 84 दिन और 365 दिन वाला प्लान भी खत्म नहीं होगा ट्राई ने कम से कम एक लंबी वैलिडिटी वाला जियो, एयरटेल और वीआई भी रखने को कहा है। यानी जिन लोगों को तीन महीने, छह महीने या साल भर के लिए सिर्फ कॉल और एसएमएस चाहिए, उनके लिए भी विकल्प बना रहेगा। ट्राई के मौजूदा एफएक्यू के मुताबिक वॉइस और एसएमएस ओनली में डेटा नहीं होता और ऐसे प्लान की वैलिडिटी 365 दिन तक हो सकती है।  किन ग्राहकों को मिलेगा फायदा इस बदलाव का फायदा खासतौर पर कम डेटा इस्तेमाल करने वाले, फीचर फोन यूजर्स, बुजुर्गों और ऐसे ग्राहकों को मिल सकता है जिन्हें इंटरनेट की जरूरत नहीं है। उन्हें ऐसे प्लान के लिए भुगतान नहीं करना पड़ेगा जिसमें डेटा शामिल हो, जबकि उनका इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉलिंग और एसमएस तक सीमित है। ट्राई ने भी छोटे और किफायती विकल्पों की जरूरत को इस बदलाव की प्रमुख वजहों में बताया है।

पत्रकार को कवरेज से रोकना गंभीर अपराध
Published / 2026-09-18 10:29:17
पत्रकार को कवरेज से रोकना गंभीर अपराध

पत्रकारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारीपत्रकार को कवरेज से रोकना गंभीर अपराध हैएबीएन सेंट्रल डेस्क। साथी ध्यान दें - 1 जुलाई 2024 से IPC खत्म हो चुकी है, अब पूरे देश में BNS - भारतीय न्याय संहिता 2023 लागू है। यदि कोई आपको खबर कवरेज, फोटो/वीडियो बनाने से रोकता है, धमकाता है तो ये धाराएं लगेंगी।1. कवरेज से रोकने / बाधा डालने परBNS 126 - सदोष अवरोध (रास्ता रोकना, कैमरा पकड़ना)BNS 127 -सदोष परिरोधBNS 221 - लोक सेवक को कर्तव्य से रोकना (पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है)2. कैमरा तोड़ना / वीडियो डिलीट कराना / माइक छीननाBNS 324 - रिष्टि / संपत्ति को नुकसान (5 साल तक सजा)BNS 303 / 306 - चोरी / लूटBNS 316 - आपराधिक न्यास भंग3. गाली-गलौज, धमकाने और मारपीट करने पर BNS 351(1)(2)(3) - आपराधिक धमकी (2 से 7 साल तक सजा)BNS 352 - शांति भंग करने के इरादे से अपमान करनाBNS 115(2) - स्वेच्छा से चोट पहुंचानाBNS 117 - गंभीर चोट4. सबसे मजबूत धाराएंBNS 308(2) -जबरन वसूली (खबर रोकने के लिए धमकाना)IT Act 66E + 67 - जबरदस्ती फोटो/वीडियो डिलीट करानाFIR में क्या लिखवाएंमैं .......... समाचार पत्र/चैनल का .......... क्षेत्र का पत्रकार हूं। मैं जनहित में खबर का कवरेज कर रहा था, तभी आरोपी .......... ने मुझे कवरेज करने से रोका, मेरे साथ गाली-गलौज, धमकी और हाथापाई की तथा मेरा कैमरा तोड़ने / वीडियो डिलीट कराने का प्रयास किया। आरोपी पर BNS की धारा 126, 351, 324, 352 के तहत सख्त कार्रवाई की जाये। 

अभय तिवारी के भाई-पत्नी पर कोर्ट का फैसला सुरक्षित
Published / 2026-09-15 20:59:32
अभय तिवारी के भाई-पत्नी पर कोर्ट का फैसला सुरक्षित

जेएसएसएससी-सीजीएल परीक्षा फर्जीवाड़ा किंगपिन अभय तिवारी की पत्नी और भाई की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित टीम एबीएन, रांची। जेएसएसएससी-सीजीएल भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले के किंगपिन अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली गयी है। अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। दोनों ने 28 अगस्त को याचिका दाखिल कर कोर्ट से जमानत की गुहार लगायी है। जांच एजेंसी सीआईडी दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी हैं।   18 अगस्त को सीआईडी ने सुषमा कुमारी और अक्षय तिवारी को गिरफ्तार किया था। अभय तिवारी गोड्डा जिला में खाद आपूर्ति विभाग में पदस्थापित था। वह परीक्षा का संचालन कर चुकी टीडीपीएल एजेंसी का मार्केटिंग मैनेजर भी था। टीडीपीएल में रहते हुए अभय तिवारी जेपीएससी और जेएसएससी की कई परीक्षा पास कर चुका था। अभय तिवारी ने अपनी पत्नी और भाई समेत परिजनों को भी फर्जीवाड़ा कर नियुक्ति करायी थी। मामले में कई सफल अभ्यर्थियों के साथ कई कोचिंग संचालकों की भी गिरफ्तारी हुई है। मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।

कोलकाता से धनबाद पहुंचा बंटी खान, कोर्ट तक पैदल ले गई पुलिस!
Published / 2026-09-14 22:42:23
कोलकाता से धनबाद पहुंचा बंटी खान, कोर्ट तक पैदल ले गई पुलिस!

कोलकाता से धनबाद पहुंचा बंटी खान, कोर्ट तक पैदल ले गई पुलिस!सड़क पर निकला कड़ा पुलिस पहरा, बंटी खान को देखने उमड़ी भीड़एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। कोलकाता से गिरफ्तारी के बाद बंटी खान को धनबाद लाया गया। पूछताछ के बाद सोमवार को पुलिस उसे कोर्ट में पेश करने के लिए पैदल लेकर निकली। पुलिस सुरक्षा के बीच बंटी खान को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भारी भीड़ जुट गई।दुबई भागने की थी तैयारी?पुलिस के अनुसार, बंटी खान कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश निकलकर दुबई जाने की तैयारी में था। कोलकाता में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक वैध पासपोर्ट और कथित फर्जी पासपोर्ट समेत वीजा संबंधी दस्तावेज बरामद किए हैं।पासपोर्ट-वीजा का खेल किसका?बरामद दस्तावेजों ने पुलिस की जांच को नया मोड़ दे दिया है। कथित फर्जी पासपोर्ट और वीजा किसने तैयार कराया? विदेश भेजने की व्यवस्था में कौन-कौन लोग शामिल थे? क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क था? पुलिस इन सभी सवालों के जवाब तलाश रही है।प्रिंस खान कनेक्शन भी जांच के घेरे मेंपुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बंटी खान की कथित विदेश जाने की योजना का उसके भाई प्रिंस खान से कोई संबंध था या नहीं। फिलहाल इस कनेक्शन की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।हत्या, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत कई केसपुलिस के मुताबिक बंटी खान के खिलाफ हत्या, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। अब रिमांड में पूछताछ के दौरान उसके आपराधिक नेटवर्क और कथित विदेश जाने की पूरी तैयारी से जुड़े कई राज सामने आने की उम्मीद है। 

15 नहीं, आईओसी में होंगे 16 सदस्य
Published / 2026-09-11 20:04:18
15 नहीं, आईओसी में होंगे 16 सदस्य

15 नहीं, आईओसी में होंगे 16 सदस्य15 की जगह 16 सदस्यीय कार्यकारी परिषद को मिली मंजूरीआईओसी की कौन सी सिफारिश आई काम?एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) को खेल मंत्रालय से बड़ी राहत मिली है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) की सिफारिश के बाद IOA को 16 सदस्यीय कार्यकारी परिषद (Executive Council) के साथ काम जारी रखने की अनुमति दे दी है। राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (NSG Act) के तहत कार्यकारी परिषद में 15 सदस्य होने का प्रावधान है, लेकिन IOC के नियमों के अनुरूप IOA को इसमें विशेष छूट दी गई है। मंत्रालय ने इस संबंध में राजपत्र अधिसूचना जारी की है। इसमें कहा गया कि राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम की धारा 37(2) के तहत ऐसी छूट दी जा सकती है, जिससे राष्ट्रीय खेल निकाय अपने अंतरराष्ट्रीय महासंघों या संबंधित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नियमों के अनुरूप काम कर सकें। दरअसल, मौजूदा समय में आईओए की कार्यकारी परिषद में 16 सदस्य हैं। इनमें भारत में मौजूद आईओसी सदस्य भी शामिल हैं, जिन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त है। एनएसजी एक्ट के तहत परिषद की सदस्य संख्या 15 रखने की बात थी, जिसके बाद आईओए ने मंत्रालय से नियमों में छूट देने का अनुरोध किया था। आईओए ने अधिनियम के अनुरूप अपने संविधान में बदलाव का मसौदा आईओसी को भेजकर उसकी राय मांगी थी। इसके जवाब में आईओसी ने परिषद में सदस्यों की संख्या को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया, आईओसी ने विशेष रूप से सिफारिश की है कि कार्यकारी परिषद के सदस्यों की संख्या में बदलाव नहीं किया जाए और यह संख्या भारत में मौजूद आईओसी सदस्यों की संख्या से स्वतंत्र रहे। अधिसूचना के मुताबिक इसका मतलब है कि आईओसी सदस्य के अलावा कार्यकारी परिषद में 15 अन्य सदस्य होंगे। इस तरह कुल संख्या 16 बनी रहेगी।उम्र और कार्यकाल के नियमों में पहले ही किया बदलावमंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय खेल निकायों को अपने कामकाज में अंतरराष्ट्रीय चार्टर और नियमों से मुख्य रूप से निर्देशित होना चाहिए। इसी आधार पर सरकार ने आईओसी की सिफारिश को एनएसजी एक्ट के प्रावधानों के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए यह छूट दी है। आईओए ने हाल ही में विशेष आम सभा की बैठक में अपने संविधान में बदलाव भी किया था। इसमें एनएसजी एक्ट के तहत निर्धारित उम्र और कार्यकाल की सीमा को शामिल किया गया है। आईओए ने कहा है कि वह अधिनियम के अन्य शासन संबंधी सिद्धांतों और आवश्यकताओं का पालन जारी रखेगा। आईओए के चुनाव इस साल के अंत में होने हैं। ऐसे में कार्यकारी परिषद की संरचना को लेकर मंत्रालय का यह फैसला आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ईश्वर से लोगों की तुलना करने पर पूर्व मंत्री जयराम रमेश के खिलाफ शिकायत
Published / 2026-09-10 21:07:17
ईश्वर से लोगों की तुलना करने पर पूर्व मंत्री जयराम रमेश के खिलाफ शिकायत

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के खिलाफ कोर्ट में शिकायत, ब्रह्मा-विष्णु-महेश की गांधी-नेहरू-जिन्ना से तुलना की, 18 सितंबर को होगी सुनवाई एबीएन सेंट्रल डेस्क (संभल)। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल की चंदौसी कोर्ट में हिंदू शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता ने कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के खिलाफ एक परिवाद (शिकायत) दायर किया है। मामले में अब 18 सितंबर को सुनवाई होनी है। वाद दायर करने वाले सिमरन गुप्ता ने बताया कि मामला यह है कि जयराम रमेश ने भोपाल में कांग्रेस जनसभा में हमारे जो सृष्टि के रचयिता हैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश—उनकी तुलना आज के संभावित महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू व जिन्ना से की थी, यह सनातन का अपमान है। ऐसे में स्पष्ट बात कहता हूं, कांग्रेस का नेता हो या कोई, जो मेरे सनातन के खिलाफ बोलेगा, उसे उसी भाषा में जवाब दूंगा। उन्होंने बताया कि इस मामले की सुनवाई 18 सितंबर को एमपी एमएलए कोर्ट में होगी। सिमरन गुप्ता के अधिवक्ता प्रसून कुमार ने बताया कि जयराम रमेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। उनके खिलाफ एक वाद दायर किया है, जिन्होंने ब्रह्मा, विष्णु, महेश—जो हमारे इष्ट देव हैं—उनकी तुलना महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना से करके सनातनियों का अपमान किया। उन्होंने आगे कहा कि सृष्टि निर्माताओं की तुलना कांग्रेस नेता ने देश के बंटवारे में भागीदार रहे नेताओं से करके हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचायी। इसलिए कांग्रेस नेता के विरुद्ध हमने परिवाद दायर किया है।

नाबालिगों को सोशल मीडिया के जोखिमों से बचाने को सुप्रीम कोर्ट सख्त
Published / 2026-09-10 19:41:14
नाबालिगों को सोशल मीडिया के जोखिमों से बचाने को सुप्रीम कोर्ट सख्त

नाबालिगों को सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमों से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस एबीएन सेंट्रल डेस्क (नयी दिल्ली)। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आॅनलाइन शोषण और सोशल मीडिया व अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े दूसरे जोखिमों से बचाने के लिए फायरवॉल (नेटवर्क सुरक्षा प्रणाली) समेत प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गयी है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस की ओर से दायर इस याचिका में इस बात को लेकर चिंता जतायी गयी है कि भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 11 के तहत नाबालिगों के अनुबंध करने में सक्षम न होने के बावजूद उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने और संचालित करने की अनुमति दी जा रही है। याचिका में कहा गया है कि उपयोगकर्ताओं की उम्र और उनकी ओर से किसी कानूनी रूप से वैध अनुबंध में प्रवेश करने के अधिकार को सत्यापित करने वाली प्रभावी और एक समान व्यवस्था के अभाव में बच्चे आॅनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, डिजिटल ट्रैफिकिंग, सेक्सटॉर्शन, व्यवहार संबंधी प्रोफाइलिंग, निजी डेटा के दुरुपयोग, साइबर बुलिंग और उम्र के अनुरूप न होने वाली एडल्ट सामग्री के संपर्क जैसे गंभीर जोखिमों के सामने आ रहे हैं। इस मामले की सुनवाई भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल थे। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह सोशल मीडिया इंटरमीडियरी समेत डिजिटल प्लेटफॉर्मों को सूचित करे कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे द्वारा किया गया कोई भी अनुबंध शुरू से ही अवैध है और इसके आधार पर आगे की जाने वाली किसी भी कार्रवाई को निलंबित किया जाये। याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी नियम- 2021 में एक विशेष प्रावधान शामिल करने अथवा उपयुक्त दिशा-निर्देश तैयार करने की भी मांग की गयी है, ताकि नाबालिग माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना ऐसा कोई अनुबंध न कर सकें। इसके साथ ही माता-पिता या अभिभावक की पहचान और उनके अधिकार की पुष्टि इलेक्ट्रानिक केवाईसी अथवा कानूनन मान्य किसी अन्य व्यवस्था के माध्यम से किए जाने की मांग की गई है। याचिका में यह भी मांग की गयी है कि जहां नाबालिगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच की अनुमति है, वहां माता-पिता या अभिभावक की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए परामर्श जारी किये जायें और संबंधित डिजिटल सेवा की प्रकृति तथा उससे जुड़े जोखिम के अनुरूप सुरक्षा उपाय लागू किये जायें। सरकार की ओर से उपयुक्त व्यवस्था तैयार किए जाने तक अंतरिम दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गयी है। सुप्रीम कोर्ट में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस की ओर से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एच एस फुल्का ने कहा, काननून नाबालिग कोई अनुबंध नहीं कर सकता और यह कानूनी संरक्षण केवल इसलिए समाप्त नहीं हो सकता कि समझौता कागज से निकलकर आॅनलाइन एक क्लिक के जरिए किया जा रहा है। हर दिन लाखों बच्चों को केवल उनके द्वारा बतायी गयी जन्मतिथि के आधार पर शक्तिशाली डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा रहा है। न वास्तविक उम्र का सत्यापन होता है और न ही अभिभावक की कोई भूमिका सुनिश्चित की जाती है। हमारी याचिका इसी अंतर को समाप्त करने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि आॅफलाइन बच्चे को मिलने वाला वही कानूनी संरक्षण आॅनलाइन दुनिया में भी समान रूप से लागू हो। उन्होंने कहा, अदालत ने कहा है कि भारत में सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है और डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ फायरवॉल (नेटवर्क सुरक्षा प्रणाली) होने चाहिए। हम आज जारी किये गये नोटिस का स्वागत करते हैं। यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है कि कानून उस डिजिटल दुनिया के साथ कदम मिलाकर चले, जहां आज बच्चे वास्तव में मौजूद हैं। याचिका में बच्चों को डिजिटल इकोसिस्टम से बाहर करने की मांग नहीं की गई है। इसमें कहा गया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म शिक्षा, शोध, कौशल विकास, परीक्षा की तैयारी, करियर के अवसरों और नागरिक भागीदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। याचिका का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नाबालिगों की डिजिटल पहुंच केवल उनके द्वारा उम्र की अप्रमाणित घोषणा पर निर्भर न हो, बल्कि इसके लिए कानूनी रूप से जवाबदेह और डिजिटल रूप से सत्यापित व्यवस्था मौजूद हो। याचिका में डिजाइन के स्तर पर रोकथाम की अवधारणा को अपनाने की वकालत की गई है। इसके तहत डिजिटल सेवाओं को डिजाइन और उपलब्ध कराते समय ही बच्चों के लिए संभावित और पूवार्भासी जोखिमों को दूर किया जाए, बजाय इसके कि नुकसान होने के बाद केवल उसकी पहचान, शिकायत, हानिकारक सामग्री हटाने या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर निर्भर रहा जाये। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस की जनरल काउंसिल रचना त्यागी ने कहा, डिजिटल सुरक्षा की शुरूआत डिजाइन के स्तर पर रोकथाम से होनी चाहिए। हमें नुकसान होने का इंतजार करके उसके बाद प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। हमें अपने स्कूलों, अपनी माइग्रेशन प्रणालियों और अपनी तकनीकों को इस तरह डिजाइन करना होगा कि शोषण के लिए कोई जगह ही न बचे। इस खबर से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (85959 50825) से संपर्क करें। 

टीएमसी सांसद नदीमुल हक के ठिकानों पर ईडी की छापामारी
Published / 2026-09-07 20:48:42
टीएमसी सांसद नदीमुल हक के ठिकानों पर ईडी की छापामारी

टीएमसी सांसद नदीमुल हक के ठिकानों पर ईडी का बड़ा एक्शन, रांची-दिल्ली-कोलकाता में सात जगह छापेमारी एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रवर्तन निदेशालय ने तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मोहम्मद नदीमुल हक और उनके उर्दू दैनिक समाचार पत्र से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता स्थित जांच एजेंसी की टीम ने इस मामले में रांची, दिल्ली और कोलकाता में कुल सात ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। रांची के कोकर क्षेत्र में समाचार पत्र के कार्यालय में केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम पहुंची और वहां वित्तीय लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। तृणमूल कांग्रेस के सांसद मोहम्मद नदीमुल हक अखबार-ए-मशरिक प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। पूरी कार्रवाई पश्चिम बंगाल के बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर ईडी की ओर से दर्ज ईसीआईआर के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी समाचार पत्र की गतिविधियों और उससे जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों की गहराई से जांच कर रही है। वित्तीय रिकॉर्ड से फंडिंग तक, हर कड़ी खंगाल रही ईडी केंद्रीय जांच एजेंसी की जांच का दायरा केवल समाचार पत्र के संचालन तक ही सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में कथित रूप से ऐसी सामग्री के प्रकाशन और प्रसार के आरोप भी शामिल हैं, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका जतायी गयी थी। इसके अलावा, जांच टीम संदिग्ध स्रोतों से हुई फंडिंग, कथित अवैध लेनदेन और बिना हिसाब-किताब के किये गये नकद लेनदेन के आरोपों की भी गहन पड़ताल कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि समाचार पत्र तथा उससे जुड़े व्यक्तियों या संस्थाओं के बैंक खातों में राशि कहां से आयी और उसका उपयोग किन-किन गतिविधियों में किया गया। तीन शहर, सात ठिकाने और दस्तावेजों की गहन जांच कार्रवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा वित्तीय दस्तावेज, बैंक खातों के रिकॉर्ड और डिजिटल सामग्री की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच का मुख्य मकसद कथित लेनदेन की पूरी वित्तीय कड़ी को समझना और किसी संभावित अपराध से जुड़े धन के स्रोत का पता लगाना है।सोमवार को की गयी इस कार्रवाई के तहत रांची, दिल्ली और कोलकाता के सात परिसरों को जांच के दायरे में लिया गया। तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों द्वारा विभिन्न दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाये जा रहे हैं। कार्रवाई पर राज्यसभा सांसद मोहम्मद नदीमुल हक या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई तत्काल सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी थी।

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