कानून व्यवस्था

View All
Published / 2026-04-10 17:42:23
नयी दिल्ली : आईपीएल के चार सट्टेबाज गिरफ्तार

  • दिल्ली में IPL के नाम पर सट्टेबाजी: ऑनलाइन सट्टा चलाने वाले गैंग का भंडफोड़, चार सट्टेबाजों को रंगे हाथों पकड़ा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में शुक्रवार को अवैध सट्टेबाजी के आरोप में चार लोगों को पकड़ा है। जो आईपीएल के मैचों में सट्टा लगाते थे। पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली में चार लोगों को अवैध सट्टेबाजी के आरोप में पकड़ा गया है। आरोपियों को दिल्ली और गुजरात के बीच एक मैच पर सट्टा लगाते हुए पकड़ा गया। 

पुलिस ने बताया कि एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए टीम ने छापा मारा। यह छापा आठ अप्रैल को मध्य दिल्ली के करोल बाग इलाके में एक परिसर में मारा गया। वहां चार पुरुष सट्टेबाजी की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल पाए गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मौके से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। 

इन मोबाइल फोन का उपयोग सट्टा लगाने और रिकॉर्ड करने के लिए किया जा रहा था।
आरोपियों की पहचान हिमांशु (तीस), अमन जैन (चौंतीस), आकाश गर्ग (इकतीस) और आशीष कुमार (पैंतीस) के रूप में हुई है। 

पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने खुलासा किया कि वे नियमित रूप से आईपीएल सट्टेबाजी में शामिल थे। वे सट्टेबाजी के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते थे। पुलिस ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच चल रही है।

दिल्ली में सट्टेबाजी का खुलासा

पुलिस को अवैध सट्टेबाजी के संबंध में विशेष जानकारी मिली थी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई की। आठ अप्रैल को करोल बाग क्षेत्र में छापा मारा गया। 

छापेमारी के दौरान चार व्यक्ति सट्टेबाजी करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की सतर्कता को दर्शाती है। पुलिस ने मौके से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन फोन का इस्तेमाल सट्टेबाजी के रिकॉर्ड और लेनदेन के लिए होता था।

आरोपियों ने पूछताछ में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि वे नियमित रूप से आईपीएल मैचों पर सट्टा लगाते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है और आगे की जांच जारी है।

Published / 2026-04-09 21:14:55
हजारीबाग घोटाला : आठ साल से चल रहे घोटाले का अब हुआ पर्दाफांश

आठ साल तक चलता रहा हजारीबाग ट्रेजरी में घोटाला, अब खुला राज, तीन सिपाहियों ने ही किया खजाना खाली 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, हजारीबाग। जिले के ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में पुलिस ने तीन सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 

करीब 15.41 करोड़ रुपये की अवैध निकासी होने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शंभू कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में तीनों ने वित्तीय गड़बड़ी में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। 

जानकारी के अनुसार, वित्त विभाग द्वारा किये गये डेटा विश्लेषण के दौरान संदिग्ध लेन-देन का पता चला। इसके बाद हजारीबाग के अपर समाहर्ता की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अस्थायी पे-आईडी बनाकर सरकारी खजाने से अवैध रूप से रकम निकाली और उसे विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया। 

जांच के बाद 21 संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों में मौजूद करीब 1.60 करोड़ रुपये की राशि को भी सुरक्षित कर लिया गया है। इस मामले में जिला कोषागार पदाधिकारी द्वारा लोहसिंगना थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है। 

यह मामला सिर्फ तीन सिपाहियों तक सीमित नहीं लगता, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर करीब 8 वर्षों तक इतनी बड़ी राशि की निकासी कैसे होती रही और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी? 

गौरतलब है कि हाल ही में बोकारो जिले में भी इसी तरह का मामला सामने आया था, जहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा शाखा में पदस्थापित लेखपाल कौशल कुमार पांडेय ने सेवानिवृत्त हवलदार के नाम पर करीब 4.28 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की थी। 

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने झारखंड की वित्तीय व्यवस्था और ट्रेजरी सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। अब देखना यह होगा कि इस बड़े घोटाले में और किन-किन लोगों की संलिप्तता सामने आती है और प्रशासन इस पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है। 

Published / 2026-04-07 19:34:47
100-200-500 के नोटों के करंसी पेपर का उत्पादन बढ़ा

100-200-500 के नोटों पर बड़ा अपडेट, जल्द होने वाला है ये काम 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 100, 200 और 500 रुपए के नोटों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जो आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक के लिए राहत भरी खबर है। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सरकार ने नकदी आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिये हैं। 

इसी के तहत करंसी पेपर का उत्पादन बढ़ाया गया है, जिससे जल्द ही बाजार में नए नोटों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित प्रतिभूति कागज कारखाना (एसपीएम) ने उत्पादन बढ़ाकर हालात को संभालने का संकेत दिया है।  

कारखाने ने तय लक्ष्य से अधिक करंसी पेपर तैयार किया है, जिससे आने वाले समय में 100, 200 और 500 रुपए के नये नोट बाजार में उपलब्ध हो सकेंगे। इससे आम लोगों और व्यापारियों को लेनदेन में आसानी मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अनिश्चितता के चलते नकदी की मांग बढ़ सकती है। 

एसपीएम देश का प्रमुख करंसी पेपर उत्पादन केंद्र है, जहां भारतीय नोटों के लिए कागज तैयार किया जाता है। पहले भी नोटों की कमी के समय यहां 10 और 20 रुपये के नोटों के लिए कागज तैयार किया जा चुका है। 

लक्ष्य से ज्यादा उत्पादन 

कारखाने ने 31 मार्च 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 7 मीट्रिक टन करंसी पेपर का उत्पादन किया, जबकि लक्ष्य 6 मीट्रिक टन का था। प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल के चलते यह उपलब्धि हासिल हुई है। नए वित्तीय वर्ष में भी उत्पादन लगातार जारी है, जिससे भविष्य में नोटों की आपूर्ति और मजबूत होने की संभावना है। 

कैश की बढ़ती जरूरत में मददगार 

विशेषज्ञों का कहना है कि 500 रुपये के नोट के बाद 100 रुपये के नोट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि 200 रुपये के नोट तीसरे स्थान पर आते हैं। यही कारण है कि एटीएम में इन नोटों की अधिक उपलब्धता जरूरी मानी जाती है। अगर वैश्विक हालात के चलते इंटरनेट सेवाओं या डिजिटल लेनदेन में कोई बाधा आती है, तो ये नये नोट नकद लेनदेन को सुचारू बनाये रखने में अहम भूमिका निभायेंगे। 

अर्थव्यवस्था को मजबूती 

प्रतिभूति कागज कारखाना देश की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जिसने पहले 1000 रुपये के नोट के लिए भी कागज तैयार किया था। इसके अलावा पासपोर्ट और स्टांप पेपर के निर्माण में भी यह आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। कारखाने के अधिकारियों के अनुसार, हर परिस्थिति में काम करने की क्षमता और टीमवर्क के दम पर उत्पादन लक्ष्य से आगे निकलना संभव हुआ है। वहीं, बैंकिंग और व्यापार जगत के जानकारों का मानना है कि नये नोटों की उपलब्धता से बाजार में लेनदेन और सुचारू होगा, जिससे आमजन को सीधा फायदा मिलेगा।

Published / 2026-04-06 20:22:20
फास्टैग में यूपीआई पेमेंट पर लगेगा 25% एक्सट्रा टोल

बिना फास्टैग सफर पड़ेगा महंगा, यूपीआई पेमेंट पर देना होगा 25% ज्यादा टोल, बदल गये नियम 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। हाईवे यात्रियों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली को पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लागू कर दिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की नयी अधिसूचना के मुताबिक 10 अप्रैल से टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद हो जायेगा और सभी लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ही होंगे। 

नयी व्यवस्था के तहत अब फास्टैग को अनिवार्य कर दिया गया है यानी बिना वैध फास्टैग के कोई भी वाहन चालक नकद भुगतान नहीं कर पायेगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम में कमी आयेगी और यात्रा अधिक तेज व सुगम होगी। 

डिजिटल भुगतान ही एकमात्र विकल्प 

नयी प्रणाली में टोल का भुगतान मुख्य रूप से फास्टैग या अन्य डिजिटल माध्यमों से करना होगा। जिन वाहनों में फास्टैग नहीं होगा, वे वैकल्पिक रूप से यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकेंगे लेकिन उन्हें 25 प्रतिशत अधिक शुल्क देना होगा। वहीं, भुगतान न करने या असफल रहने की स्थिति में वाहन को रोका जा सकता है और ई-नोटिस जारी किया जा सकता है। तीन दिन के भीतर भुगतान न होने पर दोगुना शुल्क वसूला जायेगा। 

टोल छूट के नियम सख्त 

सरकार ने टोल छूट के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियमों को और सख्त किया है। अब टोल छूट व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि केवल अधिकृत सरकारी वाहनों या आधिकारिक उपयोग को ही मिलेगी। पात्र लोगों को ह्लए७ीेस्र३ी िऋअरळँह्व लेना अनिवार्य होगा, जिससे पहचान संबंधी विवाद और देरी में कमी आने की उम्मीद है। 

नियमित यात्रियों के लिए सालाना पास 

नियमित यात्रियों के लिए 3,075 रुपए का वार्षिक फास्टैग पास भी उपलब्ध है, जिसमें 200 यात्राएं शामिल हैं। सरकार इसे भविष्य की बिना रुकावट वाली टोल प्रणाली की दिशा में अहम कदम मान रही है। यह सुविधा रोजाना यात्रा करने वालों के लिए किफायती साबित हो सकती है, जबकि कम यात्रा करने वालों के लिए सामान्य भुगतान बेहतर विकल्प रहेगा।

Published / 2026-04-01 21:46:18
प्रभाकर प्रभात बने ईडी रांची जोनल के नये जॉइंट डायरेक्टर

ईडी में बड़ा फेरबदल : प्रभाकर प्रभात बने रांची जोनल के नये जॉइंट डायरेक्टर 

टीम एबीएन, रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में बड़े पैमाने पर अधिकारियों का तबादला किया गया है। इस फेरबदल के तहत प्रभाकर प्रभात को रांची जोनल कार्यालय का नया जॉइंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है, जबकि अजय लुहाच का तबादला रांची से रायपुर कर दिया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रभाकर प्रभात को रायपुर से रांची स्थानांतरित कर नई जिम्मेदारी सौंपी गयी है। वहीं, वर्तमान जॉइंट डायरेक्टर अजय लुहाच को रायपुर भेजा गया है। 

कई अधिकारियों का हुआ तबादला 

ईडी द्वारा जारी आदेश में अन्य अधिकारियों के भी स्थानांतरण किये गये हैं। अवनीश तिवारी को पणजी से चंडीगढ़, राकेश कुमार सुमन को कोच्चि से लखनऊ, मयंक पांडे को गुवाहाटी से मुंबई तथा प्रभाकर प्रभात को रायपुर से रांची भेजा गया है। इसके अलावा अजय लुहाच रांची से रायपुर स्थानांतरित किये गये हैं। 

अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी गयी 

अधिसूचना के अनुसार अभयुदय ए आनंद को कोच्चि जोनल कार्यालय, रामधन डागर को मुख्यालय और सत्यमकाम दत्ता को गुवाहाटी भेजा गया है। माधुर डी सिंह को मुख्यालय से गुरुग्राम के साथ-साथ श्रीनगर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि राज कुमार को लखनऊ से मुख्यालय स्थानांतरित किया गया है। साथ ही अजय लुहाच को पणजी जोनल कार्यालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है।

Published / 2026-03-30 21:25:20
गृह मंत्रालय ने ब्लॉक किये 8 लाख सिम और 83 हजार व्हाट्सएप अकाउंट्स

गृह मंत्रालय ने लिया बड़ा एक्शन- गृह मंत्रालय ने ब्लॉक किये 8 लाख सिम और 83 हजार व्हाट्सएप अकाउंट, जानिये वजह... 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के तहत आने वाली साइबर विंग आई4सी ने देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़े आपरेशन को अंजाम दिया है। साल 2025 से अब तक चली इस सघन कार्रवाई में अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हजारों व्हाट्सएप अकाउंट्स, सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइसेस को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया गया है। 

व्हाट्सएप और स्काइप पर बड़ी कार्रवाई 

साइबर ठग अक्सर व्हाट्सएप और स्काइप जैसे प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेकर लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। आई4सी ने इस नेटवर्क को तोड़ते हुए 83,867 व्हाट्सएप अकाउंट और 3,962 स्काइप आईडी को ब्लॉक कर दिया है। इसके साथ ही, ठगी के उद्देश्य से तैयार किए गए 827 मोबाइल ऐप्स को भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। 

सिम कार्ड और कटएक नंबरों पर शिकंजा 

दूरसंचार विभाग और टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर गृह मंत्रालय ने 8.45 लाख संदिग्ध सिम कार्ड को बंद कर दिया है। तकनीकी स्तर पर अपराधियों को रोकने के लिए 2.39 लाख मोबाइल कटएक नंबरों को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है, जिसका अर्थ है कि अब उन मोबाइल हैंडसेट्स का उपयोग किसी भी नेटवर्क पर नहीं किया जा सकेगा। 

सहयोग पोर्टल से हटा संदिग्ध कंटेंट 

डिजिटल सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सहयोग पोर्टल की मदद से इंटरनेट पर मौजूद 1,11,185 संदिग्ध और आपत्तिजनक सामग्रियों को हटाया गया है। मंत्रालय अब उन गिरोहों की पहचान करने में जुटा है जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड और अकाउंट्स आपरेट कर रहे थे। इस बड़ी कार्रवाई से साइबर अपराधियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है और आम नागरिकों को डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने के लिए मंत्रालय लगातार अपनी निगरानी बढ़ा रहा है।

Published / 2026-03-14 22:05:45
तैयारी : डिजिटल होगी देश की पहली जनगणना

रांची में प्रशिक्षण संपन्न, अप्रैल से शुरू होगा मकान सूचीकरण 

टीम एबीएन, रांची। जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत रांची जिला में मकान सूचीकरण एवं आवास गणना के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। यह प्रशिक्षण 12 से 14 मार्च तक समाहरणालय ब्लॉक-बी में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश की योजनाओं और नीतियों के निर्माण का सबसे अहम आधार होती है, इसलिए इसे सटीक और पारदर्शी तरीके से पूरा करना जरूरी है। प्रशिक्षण में जनगणना कार्य निदेशालय के उप निदेशक केश्या नायक आर। और जिला नोडल अधिकारी संजीव कुमार मांझी ने अधिकारियों को मकान सूचीकरण की प्रक्रिया, डिजिटल उपकरणों के उपयोग, House Listing Operation Mobile App और CMMS Web Portal  के माध्यम से डाटा अपलोड, सत्यापन और सुरक्षा की जानकारी दी। 

प्रशिक्षण में अपर समाहर्ता रामनारायण सिंह, सुदर्शन मुर्मू, एसडीओ कुमार रजत, एसडीओ किस्टो कुमार बेसरा समेत कई अधिकारी और सांख्यिकी कर्मी मौजूद रहे। समापन अवसर पर जिला सांख्यिकी पदाधिकारी शेषनाथ बैठा ने कहा कि यह प्रशिक्षण जनगणना की तैयारियों को मजबूत करेगा। 

जनगणना 2027 दो चरणों में होगी—पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मकान सूचीकरण और दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का होगा। यह भारत की पहली पूर्णत: डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्व-गणना की सुविधा भी दी जायेगी।

Published / 2026-03-13 17:42:54
अब शहर में 25 और गांवों में 45 दिन बाद बुक होंगे सिलिंडर

  • LPG बुकिंग के नियम बदले: शहर में 25 दिन, गांव में 45 दिन बाद होगी गैस बुकिंग; ई-KYC नहीं तो Booking और सब्सिडी बंद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। गैस आपूर्ति में संभावित बाधा और बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में आंशिक बदलाव किया है। साथ ही ई-केवाईसी नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं की बुकिंग और सब्सिडी भी अस्थायी रूप से रोक दी गई है।

ई-KYC नहीं तो Booking और सब्सिडी बंद

केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग व्यवस्था में कुछ बदलाव किए हैं। नए नियमों के अनुसार अब शहरी क्षेत्रों में 25 दिन बाद और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन बाद ही गैस सिलेंडर की नई बुकिंग की जा सकेगी। बुकिंग करने के दो से तीन दिन के भीतर गैस की आपूर्ति कर दी जाएगी। 

इसके लिए गैस कंपनियों के सॉफ्टवेयर में भी जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराया है, उनकी गैस बुकिंग बंद कर दी गई है और सब्सिडी भी रोक दी गई है। हालांकि ई-केवाईसी की प्रक्रिया अभी भी जारी है। जो उपभोक्ता ई-केवाईसी करा लेंगे, वे पहले की तरह गैस सिलेंडर बुक कर सकेंगे।

जिले में अलग-अलग कंपनियों की कुल 14 गैस एजेंसियां काम कर रही हैं, जिनमें से आठ ग्रामीण वितरक हैं। इन एजेंसियों से जुड़े ग्रामीण उपभोक्ता अब 45 दिन बाद ही सिलेंडर बुक करा पाएंगे। 

जिले में करीब 2 लाख 60 हजार एलपीजी उपभोक्ता हैं। इनमें लगभग 1 लाख 87 हजार उज्ज्वला योजना के कनेक्शनधारी हैं, जबकि करीब 73 हजार सामान्य कनेक्शन वाले उपभोक्ता हैं। उज्ज्वला योजना के कनेक्शनधारकों में ई-केवाईसी की रफ्तार अभी काफी धीमी है।

फिलहाल उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल में सात सिलेंडर पर सब्सिडी मिलती है, जबकि सामान्य कनेक्शन वालों को नौ सिलेंडर पर सब्सिडी दी जाती है। उज्ज्वला कनेक्शनधारकों को प्रति सिलेंडर 337 रुपये और सामान्य कनेक्शन वालों को 37 रुपये की सब्सिडी मिलती है।

सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों पर होगी कार्रवाई 

जानकारों के मुताबिक फिलहाल गैस की वास्तविक कमी नहीं है और प्लांट में सामान्य दिनों की तरह ही गैस की बॉटलिंग हो रही है। युद्ध की आशंका के कारण लोगों ने पहले से ही गैस सिलेंडर जमा करना शुरू कर दिया, जिससे अस्थायी समस्या पैदा हुई। 

जिन उपभोक्ताओं ने पहले ही ई-केवाईसी करा लिया है, उनकी बुकिंग सामान्य रूप से हो रही है। इस बीच कुछ लोग स्थिति का फायदा उठाकर गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी कर रहे हैं। शुक्रवार को कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर 1500 रुपये तक में बेचे जाने की जानकारी मिली है। 

प्रशासन ऐसे लोगों पर नजर रख रहा है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा, कमर्शियल गैस की आपूर्ति बंद होने के बाद कुछ होटल और रेस्टोरेंट संचालकों द्वारा घरेलू एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करने की भी शिकायतें मिली हैं। ऐसे मामलों में भी प्रशासन कार्रवाई करेगा।

Page 2 of 94

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse