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RBI की सख्ती : 16 से बैंकों को रोज रखना होगा CRR का 99%
Published / 2026-10-10 08:35:31
RBI की सख्ती : 16 से बैंकों को रोज रखना होगा CRR का 99%

RBI का बड़ा फैसला: 16 अक्टूबर से बैंकों को रोज रखना होगा CRR का 99 फीसदी, नकदी पर कसेगा शिकंजाबैंकिंग सिस्टम में मौजूद 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए RBI ने नियम सख्त किए हैंअब 16 अक्टूबर 2026 से बैंकों को रोज 99 फीसदी CRR मेंटेन करना होगाएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा नकदी को नियंत्रित करने के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। नए निर्देश के मुताबिक, 16 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े से बैंकों को हर दिन अपने कैश रिजर्व रेशियो (CRR) का कम से कम 99 फीसदी हिस्सा बनाए रखना होगा। अभी बैंकों के लिए यह सीमा 90 फीसदी है।अब तक बैंकों को हर पखवाड़े में रोजाना औसतन निर्धारित CRR का कम से कम 90 फीसदी हिस्सा बनाए रखना होता था। लेकिन बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति की समीक्षा के बाद RBI ने इस नियम को सख्त कर दिया है।बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी नकदी को सोखने की कोशिशRBI के इस फैसले का मकसद बाजार में जरूरत से ज्यादा मौजूद नकदी को कम करना है। 8 अक्टूबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 3.88 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी थी। पिछले दो महीनों से RBI इस नकदी को बाजार से वापस लेने के लिए कई कदम उठा रहा है। इनमें वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी और खुले बाजार में बॉन्ड खरीदने जैसे उपाय शामिल हैं।बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ने की एक बड़ी वजह बैंकों को FCNR (B) जमा के रूप में बड़ी रकम मिलना है। यह रकम विदेशी मुद्रा में आई थी। जब बैंकों ने इसे RBI के साथ स्वैप किया, तो उन्हें बदले में रुपये मिले और सिस्टम में नकदी बढ़ गई। इसके अलावा, महीने के अंत में सरकार की ओर से वेतन और पेंशन जैसे मदों में किए गए खर्च से भी बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ी।RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में भरोसा जताया था कि वित्त वर्ष 2027 के अंत तक बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी खत्म हो जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि CRR बढ़ाना RBI के लिए आखिरी विकल्प होगा।

कोडरमा : सतगावां पुलिस ने 5 पशुओं के साथ 3 तस्करों को पकड़ा, जेल
Published / 2026-10-06 23:09:56
कोडरमा : सतगावां पुलिस ने 5 पशुओं के साथ 3 तस्करों को पकड़ा, जेल

अवैध पशु तस्करी के खिलाफ सतगावां पुलिस की बड़ी कार्रवाई5 पशुओं के साथ 3 तस्कर गिरफ्तार, भेजे गए जेलएबीएन न्यूज नेटवर्क, सतगावां। पुलिस ने अवैध पशु तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार देर रात बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने एक पिकअप वाहन से दो बच्चों सहित कुल पांच पशुओं को मुक्त कराते हुए तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है।मिली जानकारी के अनुसार पिकअप वाहन संख्या JH 11Y 8956 के जरिए गिरिडीह से नवादा बिहार की ओर अवैध रूप से पशुओं को ले जाया जा रहा था। गश्त के दौरान एसआई विशाल सिंह ने संदेह के आधार पर वाहन को रुकवाकर जांच की। जांच में वाहन पर तीन बड़े दुधारू पशु और दो छोटे बच्चे लदे पाए गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वाहन और मवेशियों को जब्त कर तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया। वहीं गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास राम पिता स्वर्गीय जागेश्वर राम  ग्राम चादरगर, थाना राजधनवार, फूलचंद यादव पिता स्वर्गीय शुकर यादव थाना राजधनवार, जागेश्वर यादव पिता खिरो यादव ग्राम सलैया, थाना हिरोडीह जिला गिरिडीह के रूप में हुई है। सतगावां थाना में मामले को लेकर कांड संख्या 78/26 दर्ज करते हुए पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं जब्त किए गए सभी पांचों पशुओं को फिलहाल थाने में ही सुरक्षित देखरेख में रखा गया है। 

धनबाद : गैंगस्टर फहीम खान के घर एके-47 से हमले का मामला, 22 साल बाद अदालत ने सुनाया फैसला
Published / 2026-10-03 21:08:16
धनबाद : गैंगस्टर फहीम खान के घर एके-47 से हमले का मामला, 22 साल बाद अदालत ने सुनाया फैसला

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। गैंगस्टर फहीम खान के घर पर हमला मामले में अदालत ने तीन दोषियों को सजा सुनाई धनबाद चर्चित गैंगस्टर फहीम खान के वासेपुर स्थित घर पर वर्ष 2004 में हुए एके-47 हमले के मामले में अदालत ने 22 साल बाद फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनायी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को हत्या, आपराधिक साजिश और गैरकानूनी जमावड़े समेत कई धाराओं में दोषी पाते हुए सजा सुनायी। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 120-बी और 149 के तहत तीनों को आजीवन कारावास की सजा दी है। वहीं, आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत सात साल और धारा 307 के तहत दस साल की सजा सुनायी गयी है। अदालत ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया है। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता शाहबाज सलाम ने अदालत के फैसले की जानकारी दी। मामला 29 जनवरी 2004 का है। वासेपुर में फहीम खान के घर को निशाना बनाते हुए एके-47 समेत अत्याधुनिक हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। अचानक हुए हमले के दौरान फहीम खान ने पड़ोसी की छत पर छलांग लगाकर अपनी जान बचायी थी। हमलावरों की गोलीबारी में फहीम खान के बॉडीगार्ड विनोद शर्मा की मौत हो गई थी। वहीं, फायरिंग के दौरान शाहिद नामक एक अन्य व्यक्ति के पैर में भी गोली लगी थी। घटना के बाद इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया था। करीब 22 साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने 28 सितंबर 2026 को शाहिद आलम, शहादत हुसैन और तनवीर आलम को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गयी थी। अब अदालत ने तीनों दोषियों को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाते हुए सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। इस तरह हत्या, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़ा, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े इस पुराने मामले में अदालत का सजा संबंधी फैसला सामने आ गया है। 22 साल पुराने इस चर्चित हमले के मामले में अदालत के फैसले के बाद तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है। अब फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत मामले में अगली कार्रवाई जारी रहेगी।

रांची : सीएम पर पीएमएलए की विशेष कोर्ट में आरोप गठित
Published / 2026-09-30 20:26:01
रांची : सीएम पर पीएमएलए की विशेष कोर्ट में आरोप गठित

रांची : सीएम पर पीएमएलए की विशेष कोर्ट में आरोप गठितमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बढ़ी मुश्किलें, पीएमएलए की विशेष कोर्ट ने किया आरोप गठितटीम एबीएन, रांची। बड़गाईं अंचल के 8.86 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ गयी हैं। पीएमएलए की विशेष कोर्ट ने आरोप गठित किया। हेमंत सोरेन समेत 17 आरोपियों को ट्रायल फेस करना होगा। सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन वीसी के जरिए कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट में उनपर लगे आरोपों को पढ़कर सुनाया गया। सीएम हेमंत सोरेन ने सभी आरोप को निराधार बताया।

कोडरमा : चर्चित संजय सिंह हत्याकांड के तीन दोषियों को आजीवन कारावास
Published / 2026-09-29 21:00:50
कोडरमा : चर्चित संजय सिंह हत्याकांड के तीन दोषियों को आजीवन कारावास

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राकेश चंद्रा की अदालत ने सुनायी सजा, 75,000 रुपये जुर्माना भी लगाया  एबीएन न्यूज नेटवर्क, कोडरमा। एसटी-99/2024 झुमरी तिलैया के बहुचर्चित संजय सिंह हत्याकांड के मामले की सुनवाई करते  हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राकेश चंद्रा की अदालत ने  मंगलवार को तीन आरोपयो राज कपूर,  पिता- कैलाश प्रसाद यादव, प्रेम कपूर, पिता कैलाश प्रसाद यादव, मास्टर मोहल्ला, गांधी स्कूल, झुमरी तिलैया, कोडरमा, एवं उनके फुफेरे भाई सोनू कुमार यादव को 302 आईपीसी के तहत दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनायी। साथ ही 25000-25000 जुर्माना लगाया। जुर्माना की राशि नहीं देने पर तीन माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। मामला वर्ष  2023 का है। इसे  लेकर संगीता  देवी  ने तिलैया थाना में थाना कांड संख्या 289 / 2023  दर्ज कराया गया था। अभियोजन का संचालक लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने किया। इस दौरान सभी 16 गवाहों का परीक्षण कराया गया। कार्रवाई के दौरान अपराध की गंभीरता को देखते हुए लोक अभियोजक ने न्यायालय से अभियुक्त को  अधिक से अधिक सजा देने का आग्रह किया। वहीं  सूचक पक्ष की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार व बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अनवर हुसैन ने दलीलें पेश की। अदालत ने सभी गवाहों और साक्षयो का अवलोकन करने के उपरांत अभियुक्तों को 302, आईपीसी के तहत  दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा मुकर्रर की और जुमार्ना लगाया। बताते चलें कि न्यायालय ने 26 सितंबर को तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया था।  क्या है मामला यह मामला 14 दिसंबर 2023 का है गांधी स्कूल रोड के मास्टर मोहल्ला निवासी संजय सिंह पिता गीता प्रसाद सिंह के साथ ढाई फीट रास्ते की जमीन को लेकर आरोपितों का विवाद हुआ था। मामला प्रकाश में आया था कि  विवाद के दौरान आरोपीयों ने संजय सिंह के सर पर रड से वार किया था। जिसे संजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गये थे।मारपीट की घटना में गंभीर रूप से घायल संजय सिंह को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया था। जहां उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची रेफर किया था। जहां संजय सिंह का इलाज के दौरान 20 दिसंबर 2023 को  मौत हो गई थी। संजय की मौत के बाद मामला हत्या में बदल गया। यह कोडरमा जिले में काफी चर्चित रहा था।

गैंगस्टर फहीम खान के घर फायरिंग मामले में तीन दोषी करार
Published / 2026-09-28 20:16:15
गैंगस्टर फहीम खान के घर फायरिंग मामले में तीन दोषी करार

गैंगस्टर फहीम खान के घर पर एके-47 से हुई फायरिंग मामले में आया कोर्ट का फैसला, तीन आरोपी दोषी करार  एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। गैंगस्टर फहीम खान के घर पर एके-47 से 2004 में हुई अंधाधुंध फायरिंग मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने शाहिद आलम, शहादत हुसैन और कथित शूटर तनवीर आलम को दोषी पाया। अब सजा के बिंदु पर 3 तारीख को  कोर्ट का निर्णय आएगा। जिला व सत्र न्यायाधीश तृतीय पारस कुमार सिन्हा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। इस चर्चित मामले में साबिर आलम के भाई शाहिद आलम, वासेपुर निवासी शहादत हुसैन और पटना निवासी कथित शूटर तनवीर आलम के खिलाफ ट्रायल चल रहा था। हमले में फहीम के बॉडीगार्ड की मौत हुई थी। यह मामला 29 जनवरी-2004 का है। हमले में फहीम खान ने पड़ोसी की छत से कूदकर किसी तरह अपनी जान बचायी थी। फहीम के बॉडीगार्ड बिहार के अरवल निवासी विनोद शर्मा की फायरिंग में मौत हो गयी थी। घटना में शाहिद के पैर में गोली लगी थी।

नाबालिगों के मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को मानना होगा भारतीय कानून, केंद्र नियमों पर करे विचार: सुप्रीम कोर्ट
Published / 2026-09-28 20:09:55
नाबालिगों के मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को मानना होगा भारतीय कानून, केंद्र नियमों पर करे विचार: सुप्रीम कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस संभावना पर विचार करने को कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल मध्यस्थों के लिए ऐसे वैधानिक नियम बनाये जायें, जिनके तहत उन्हें नाबालिगों से संबंधित भारतीय कानूनों का पालन करना अनिवार्य हो। इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के साथ स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा का पालन सुनिश्चित करना भी शामिल है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस (जेआरसीए) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। पीठ में अन्य दो जस्टिस न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। याचिका में सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय सुनिश्चित करने की मांग की गयी है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि यह व्यवस्था महज एक दिशानिर्देश बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने केंद्र से मध्यस्थता नियमों के ढांचे के तहत इसे वैधानिक स्वरूप देने की संभावना पर विचार करने को कहा। न्यायमूर्ति बागची ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, कृपया मध्यस्थता नियमों के तहत ऐसे निर्देश जारी करें कि वे अपने सॉफ्टवेयर या जिस भी रूप में उस प्लेटफॉर्म को संचालित करते हैं, उसे भारतीय कानून के अनुरूप तैयार करें। सॉफ्टवेयर को भारतीय कानून के अनुरूप होना ही चाहिए। तुषार मेहता ने जवाब दिया, सरकार इस मुद्दे की जांच करेगी और जरूरी कदम उठायेगी। उन्होंने कहा, कुछ किया जा सकता है, कुछ किया जाना चाहिए और किया जायेगा। मेहता ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरी से संबंधित प्रावधानों का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस बात को लेकर चिंता जतायी गयी है कि नाबालिगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वतंत्र रूप से अकाउंट बनाने और संचालित करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि कानूनन वो किसी तरह का अनुबंध नहीं कर सकते। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिका में उठाया गया मुद्दा प्रथम दृष्टया डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के दायरे में आता है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस कानून के संबंधित प्रावधान 2027 में ही लागू होंगे और इसलिए तब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता।याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने कहा कि मौजूदा कानून के तहत नाबालिगों द्वारा किए गए अनुबंध अमान्य होते हैं और इस मुद्दे के समाधान के लिए डेटा संरक्षण कानून के लागू होने तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इसी तरह की व्यवस्था माता-पिता के नियंत्रण या नियमन के माध्यम से लागू की जा सकती है, जिसमें अनुबंध अभिभावक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि कई डिजिटल मध्यस्थ दूसरे देशों, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, में पंजीकृत हैं, लेकिन उन्होंने भारतीय बाजार में प्रवेश किया है तो उन्हें यहां के कानूनों का पालन करना होगा। एच.एस. फुल्का ने कहा कि केंद्र सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए डिजिटल मध्यस्थों को भारतीय कानूनों का पालन करने के निर्देश दे सकता है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों को इस बात का ध्यान रखने के निर्देश दिये जायें कि नाबालिगों में अनुबंध करने की कानूनी क्षमता नहीं होती और आॅनलाइन सेवाओं तक उनकी पहुंच के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किये जायें। एच.एस. फुल्का ने कहा, हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को भारत के कानूनों का उल्लंघन करने से रोका जाये। याचिका में आॅनलाइन दुनिया में बच्चों के सामने मौजूद कई जोखिमों को भी उठाया गया है। इनमें बच्चों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण की ओर ले जाना, यौन शोषण, आॅनलाइन ट्रैफिकिंग, सेक्सटॉर्शन, बच्चों के व्यवहार की प्रोफाइलिंग, निजी डेटा का दुरुपयोग और साइबर बुलिंग जैसी चिंताएं शामिल हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, यह तथ्य है कि बच्चों को किसी तरह का अनुबंध करने की अनुमति नहीं दी जा सकती और सोशल मीडिया कंपनियों के साथ उनके द्वारा किये गये ऐसे सभी समझौते अमान्य हैं। यह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। दुनिया भर में कानूनों को समझने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है, ताकि न्याय सुनिश्चित हो और बच्चों की सुरक्षा की जा सके। जब उपयोगकर्ताओं के लिए अपनी व्यक्तिगत जानकारी देना और अपनी पहचान उजागर करना अनिवार्य किया जायेगा, तो इससे बच्चों के आॅनलाइन शोषण और उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार में काफी कमी आयेगी। इस खबर से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से संपर्क करें।

झारखंड हाइकोर्ट ने पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने का आदेश किया रद्द
Published / 2026-09-26 21:27:18
झारखंड हाइकोर्ट ने पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने का आदेश किया रद्द

झारखंड हाइकोर्ट ने पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने का आदेश किया रद्दटीम एबीएन, रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने का आदेश रद्द कर दिया है. अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय भुगतान का निर्देश दिया गया है। झारखंड हाइकोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के डीएसइ की ओर से पारा शिक्षकों को नौकरी से हटाने और मानदेय नहीं देने के आदेश को निरस्त कर दिया है। डीएसइ ने संबंधित आदेश शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं होने का हवाला देते हुए दिया था।इससे पहले हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में मामले में सुनवाई हुई। पारा शिक्षकों की ओर से मानदेय रोकने और काम से हटाने के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गयी थी। अदालत ने आदेश दिया कि प्रार्थियों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान किया जाये।डीएसइ के आदेश को याचिका के जरिए दी गयी चुनौतीप्रार्थी मेरी मुर्मूव अन्य की ओर से याचिका दायर कर डीएसइ के आदेश को चुनौती दी गयी थी। पूर्व में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मामले में सुनवाई के दौरान प्रार्थ की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार ने पक्ष रखा था।विवादित प्रमाणपत्र पर पारा शिक्षकों के खिलाफ हुई कार्रवाईइंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ इलाहाबाद, हिंदी विद्यापीठ देवघर आदि संस्थानों से मैट्रिक व इंटरमीडिएट का सर्टिफिकेट वाले पारा शिक्षकों (कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ) पर कार्रवाई की गयी थी।उनका शैक्षणिक प्रमाण पत्र सही नहीं बताते हुए काम से हटाने और मानदेय रोकने को लेकर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सात नवंबर 2025 को पत्र जारी किया था। इसके आलोक में पूर्वी सिंहभूम के डीएसइ ने पारा शिक्षकों को काम से हटाने एवं मानदेय रोकने का आदेश दिया था। 

अगले महीने से गैस के लिए जरूरी होगा बीएए
Published / 2026-09-23 19:18:56
अगले महीने से गैस के लिए जरूरी होगा बीएए

1 अक्टूबर से एलपीजी सिलेंडर के लिए जरूरी होगा बीएए, जान लें बायोमेट्रिक सत्यापन के 3 तरीके एबीएन सेंट्रल डेस्क। सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशानिदेर्शों के मुताबिक 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए बायोमेट्रिक आधार आॅथेंटिकेशन (बीएए) पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। जिन उपभोक्ताओं का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा नहीं होगा उन्हें रियायती दर पर मिलने वाले एलपीजी सिलेंडर के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है। मंत्रालय ने ऐसे सभी उपभोक्ताओं से 1 अक्टूबर से पहले अपना बायोमेट्रिक आधार आॅथेंटिकेशन पूरा करने की अपील की है। 1 अक्टूबर से क्या बदल जायेगा? नये नियम के तहत यदि कोई उपभोक्ता लागू सब्सिडी के साथ नियंत्रित खुदरा बिक्री मूल्य पर एलपीजी रिफिल बुक करना चाहता है, तो उसका बायोमेट्रिक आधार सत्यापन पूरा होना जरूरी होगा। जिन उपभोक्ताओं का इअअ पहले ही पूरा हो चुका है, उन्हें दोबारा किसी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। उनकी सिलेंडर बुकिंग और सब्सिडी का लाभ पहले की तरह जारी रहेगा। तीन तरीकों से करा सकते हैं बायोमेट्रिक सत्यापन सरकार और तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को इअअ पूरा करने के लिए कई विकल्प दिये हैं। सिलेंडर डिलीवरी के समय : डिलीवरी कर्मचारी के मोबाइल ऐप के जरिए घर पर ही बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जा सकता है। गैस एजेंसी पर जाकर : उपभोक्ता अपने संबंधित एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर या गैस एजेंसी के शोरूम पर जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। मोबाइल ऐप के जरिए : उपभोक्ता संबंधित तेल कंपनी के आधिकारिक ऐप से भी आॅथेंटिकेशन कर सकते हैं: इंडेन : इंडियन आॅयल वन ऐप्प भारत गैस : हेल्लो बीपीसीएल ऐप्प एचपी गैस : एचपी पे ऐप्प इसके अलावा व्हाट्सऐप, आईवीआरएस और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी उपलब्ध विकल्पों के जरिए प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। सत्यापन नहीं कराया तो क्या होगा? मंत्रालय के मुताबिक, 1 अक्टूबर तक बायोमेट्रिक आॅथेंटिकेशन पूरा नहीं होने पर एलपीजी कनेक्शन बंद या रद्द नहीं किया जायेगा। हालांकि, बिना सत्यापन वाले कनेक्शन पर सब्सिडी का लाभ रोका जा सकता है। ऐसे उपभोक्ताओं को रिफिल बुक करते समय सिलेंडर की गैर-सब्सिडी वाली पूरी कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार ने क्यों अनिवार्य किया बीएए? बायोमेट्रिक आधार आॅथेंटिकेशन का उद्देश्य एलपीजी सब्सिडी को वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। आधार से सत्यापित उपभोक्ता के साथ एलपीजी कनेक्शन को जोड़ने से फर्जी या डुप्लीकेट कनेक्शन की पहचान करने और सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक इस्तेमाल व दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य वास्तविक और पात्र परिवारों को एलपीजी सुविधा से वंचित करना नहीं, बल्कि सब्सिडी वितरण को अधिक लक्षित और पारदर्शी बनाना है।

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