झारखंड के स्कूलों में पढ़ायी जायेगी दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनी, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने की ये घोषणा टीम एबीएन, रांची। झारखंड के स्कूलों में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की जीवनी पढ़ायी जायेगी। जी हां, झारखंड सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने ये घोषणा की है। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की घोषणा के अनुसार, वर्ष 2026 से राज्य के सभी विद्यालयों में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जीवन और योगदान से जुड़ी सामग्री को पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा। पहली से 12वीं कक्षा तक की कुल 8 किताबों में शिबू सोरेन के जीवन पर आधारित अध्याय जोड़े जायेंगे। छोटे बच्चों (कक्षा 1 से 5) के लिए शिबू सोरेन का परिचय सरल भाषा और कहानियों के माध्यम से कराया जायेगा, जबकि बड़ी कक्षाओं में उनके सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष, आदिवासी पहचान की रक्षा में उनकी भूमिका और संसदीय जीवन जैसे पहलुओं को विस्तार से पढ़ाया जायेगा। इसके अलावा, विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट वर्क और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से भी इस विषय से जोड़ा जायेगा।बता दें कि शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त को दिल्ली के सर गंगा अस्पताल में हुआ था। उनका 5 अगस्त को उनके पैतृक गांव नेमरा में अंतिम संसकार हुआ था। बेशक शिबू सोरेन दुनिया छोड़ कर चले गये, लेकिन वह हमेशा सभी के दिलों में रहेंगे।
मुख्य सचिव अलका तिवारी ने दी जानकारी टीम एबीएन, रांची। झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी व्यावसायिक बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया सितंबर के पहले पखवाड़े तक हर हाल में पूरी कर लें। उन्होंने कहा कि नीलामी शुरू करने से पहले उपायुक्त और खनन पदाधिकारी नई बालू नीति को अच्छे से समझ लें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और तकनीकी दिक्कत न आये। इसके लिए जरूरत पड़ने पर अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा उपभोक्ताओं को उचित दाम पर बालू उपलब्ध कराना है। साथ ही बालू के अवैध कारोबार पर रोक लगाना और अन्य राज्यों से बालू की आपूर्ति को हतोत्साहित करना भी इस नीति का हिस्सा है। बुधवार को सभी उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान उन्होंने कहा कि नीलामी राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे पूरी तैयारी के साथ संपन्न कराया जाना चाहिए। खनन सचिव अरवा राजकमल और निदेशक राहुल सिन्हा ने कहा कि नीलामी की पूरी प्रक्रिया में उपायुक्तों की भूमिका सबसे अहम होगी। उन्होंने उपायुक्तों से मॉक ड्रिल कराने और बोली लगाने वालों को नीलामी की प्रक्रिया से अवगत कराने की बात कही। जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि 15 अक्तूबर के बाद राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल का प्रतिबंध खत्म हो जाएगा। इसलिए उससे पहले नीलामी पूरी कर ली जानी चाहिए, ताकि समय पर खनन शुरू हो सके और राज्य में बालू की किल्लत न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बालू की कीमत सरकार तय नहीं करेगी, लेकिन यह सुनिश्चित करेगी कि कारोबार पूरी तरह वैध और नियमों के तहत हो। नियमों का पालन नहीं करने वालों का ठेका रद्द करने का अधिकार उपायुक्तों को दिया गया है। बालू घाटों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र वाले घाट शामिल हैं, जिनका संचालन ग्राम सभा के माध्यम से होगा। ऐसे घाटों की संख्या 374 है। दूसरी श्रेणी में पांच हेक्टेयर से बड़े घाट शामिल हैं, जिनकी नीलामी की जायेगी। छोटे और बड़े घाटों को मिलाकर कुल 60 समूह बनाये गये हैं। किसी भी व्यक्ति को एक हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र का घाट नहीं दिया जायेगा और दो से अधिक समूहों का ठेका भी नहीं मिलेगा। बैठक में उपायुक्तों को नीलामी प्रक्रिया का प्रेजेंटेशन भी दिखाया गया। पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर विशेषज्ञ राजीव लोचन बख्शी ने जानकारी दी और जैप आईटी के प्रतिनिधियों ने नीलामी की तकनीकी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया, ताकि आगे किसी तरह की उलझन न रहे।
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में 50 हजार राशन कार्ड धारकों के हटाये गये नाम, ये है वजहएबीएन न्यूज नेटवर्क, जमशेदपुर। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में अधिकारियों ने 50,000 से अधिक ऐसे राशन कार्ड धारकों के नाम हटा दिये हैं, जिन्होंने पिछले छह महीने या उससे अधिक समय से अपने कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार सत्यापन अभियान के दौरान कुल 1,64,237 निष्क्रिय राशन कार्ड धारकों में से 50,323 के नाम हटा दिये गये हैं। बयान में कहा गया कि 576 कार्ड धारक लाभ पाने के योग्य पाये गये, जबकि 1,13,338 अन्य के नामों की जांच की जा रही है। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के निर्देश पर, सत्यापन के बाद अपात्र राशन कार्ड धारकों के नाम सूची से हटाने के लिए व्यापक अभियान जारी है। बयान में कहा गया कि जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों से 20,067 नाम हटाये गये, क्योंकि उनके आधार कार्ड नंबर संदिग्ध पाये गये। ऐसे 2,500 से अधिक राशन कार्ड धारकों की जांच की जा रही है।बयान में कहा गया कि अधिकारियों ने 18 वर्ष से कम या 100 वर्ष से अधिक आयु के 2,274 एकल-सदस्यीय कार्ड धारकों के नाम हटा दिये हैं, जबकि 13,332 अन्य का सत्यापन किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक निष्क्रिय कार्ड धारक जमशेदपुर के शहरी क्षेत्र (68,565) और जमशेदपुर एवं गोलमुरी क्षेत्र में पाए गए, जहां यह आंकड़ा 46,703 है। उपायुक्त ने बताया कि सत्यापन अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र लोगों को ही राशन मिले। सत्यार्थी ने प्रखंड स्तर के अधिकारियों को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिये।
चारों तरफ की जायेगी पार्क और बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था टीम एबीएन, रांची। रांची में दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन का स्मृति स्थल बनेगा। इसके लिए भूमि चिन्हित करने का काम शुरू हो गया है। जानकारी के मुताबिक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की याद में राजधानी रांची के हरमू रोड स्थित बाईपास में स्मृति स्थल का निर्माण किया जायेगा। इसके लिए नगर विकास विभाग ने झारखंड राज्य आवास बोर्ड से जमीन की मांग की है। आवास बोर्ड के तरफ से जमीन चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया गया है। बाईपास रोड में डीपीएस स्कूल के पास स्थित भुसूर मौजा में गुरुजी का स्मृति स्थल बनाने पर विचार तेज है क्योंकि इस मुख्य मार्ग पर स्थित भुसूर मौजा में कई एकड़ जमीनें खाली पड़ी हैं। बताया जा रहा है कि स्मृति स्थल परिसर में चारों तरफ पार्क और बेहतर लाइटिंग की जाएगी। यहां दिशोम गुरु की एक प्रतिमा भी स्थापित की जायेगी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संभाला शिक्षा और निबंधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार, अधिसूचना जारी कर दी जानकारी टीम एबीएन, रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा निबंधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार अपने पास रखा है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। रामदास सोरेन के निधन के बाद लिया फैसला अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने यह फैसला शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद लिया है। रामदास सोरेन का 15 अगस्त को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया था। कैबिनेट सचिवालय और सतर्कता (समन्वय) विभाग ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें कहा गया है, कैबिनेट सचिवालय और सतर्कता (समन्वय) विभाग की छह दिसंबर, 2024 की अधिसूचना में आंशिक संशोधन किया गया है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पहले से सौंपे गये विभागों के अलावा स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग और निबंधन विभाग आवंटित किया गया है। रामदास सोरेन का अंतिम संस्कार शनिवार को जमशेदपुर में हजारों समर्थकों की उपस्थिति में किया गया। रामदास सोरेन अपने आवास के स्नानागार में गिरने की वजह से घायल हो गये थे और उन्हें दो अगस्त को इलाज के लिए जमशेदपुर से हवाई मार्ग से दिल्ली ले जाया गया था। उनका दिल्ली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया।
टीम एबीएन रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 18 अगस्त 2025 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर गये एक्सीओम-4 मिशन के पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने शुभांशु शुक्ला को मिशन की सफलता के लिए बधाई दी और भारत का नाम अंतरिक्ष में रोशन करने के लिए सराहना की। पीएम मोदी और शुभांशु शुक्ला की यह मुलाकात बेहद आत्मीय रही, जिसका वीडियो भी सामने आया है। पीएम मोदी ने जताया गर्व प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने न सिर्फ उनसे हाथ मिलाया बल्कि गले लगाकर और कंधे पर हाथ रखकर उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं। शुभांशु शुक्ला ने इस अवसर पर अपने टैबलेट पर प्रधानमंत्री को अंतरिक्ष यात्रा की चुनिंदा तस्वीरें भी दिखायीं, जिन्हें देखकर प्रधानमंत्री ने गहरी रुचि जताई। शुभांशु शुक्ला शनिवार देर रात अमेरिका से भारत लौटे, जहां दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका जोरदार स्वागत हुआ। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। इसके अलावा, लखनऊ से उनके पिता शंभु दयाल शुक्ला और बहन शुचि मिश्रा भी इस खास मौके पर उन्हें लेने एयरपोर्ट पहुंचे थे। गौरतलब है कि ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचकर न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान में भाग लिया, बल्कि भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया। उनकी यह उपलब्धि देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की मुख्य सचिव अलका तिवारी ने राज्य के तमाम उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि खाद्य आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में यह सुनिश्चित करें कि कोई योग्य लाभुक उससे वंचित नहीं रहे।वहीं मृत लाभुकों को चिह्नित कर उन्हें प्राथमिकता के स्तर पर हटाये, ताकि नये लाभुक जोड़े जा सके। मुख्य सचिव ने कहा कि इस प्रक्रिया में इस पर फोकस करें कि डाटा में कोई त्रुटि नहीं रहे। लाभुकों के केवाईसी पूर्ण हों। इसमें कोई समस्या हो, तो उसका परीक्षण करें कि कहां दिक्कत है और उसका समयबद्ध तरीके से निपटारा करें। हर माह इसका भौतिक निरीक्षण करें और रिकार्ड व बुक कीपिंग अप टू डेट रखें। वह सोमवार को खाद्य आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में आवश्यक सुधार को लेकर अपनी अध्यक्षता में समीक्षा कर रही थीं।
स्मृति शेष : राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की अस्थियां रजरप्पा स्थित दामोदर नदी में विसर्जित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ग्रामीण रीति-रिवाज एवं स्थानीय परंपरा के अनुरूप गुरुजी की अस्थियां दामोदर नदी के घाट पर विसर्जित की टीम एबीएन, रामगढ़/ रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज स्मृति शेष-र ाज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के अस्थि-कलश को लेकर पैतृक गांव नेमरा से रजरप्पा स्थित दामोदर नदी घाट पहुंचे। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यहां पूरे पारंपरिक विधि-विधान से स्मृति शेष-गुरुजी की अस्थियों को दामोदर नदी में विसर्जित किया। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के साथ उनके छोटे भाई विधायक बसंत सोरेन सहित अन्य पारिवारिक सदस्य तथा नेमरा ग्रामवासी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने नम आंखों से स्मृति शेष-दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की अस्थियां विसर्जित की रजरप्पा स्थित दामोदर नदी के घाट पर स्थानीय पाहन ने सभी विधिवत रीति-रिवाज का अनुपालन कराते हुए मुख्यमंत्री के हाथों स्मृति शेष-दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अस्थियां विसर्जित करायी। अस्थियां प्रभावित करते समय मुख्यमंत्री की आंखों में अपने पिता को खोने की पीड़ा साफ झलक रही थी।
नियम उल्लंघन, मनमानी और पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप टीम एबीएन, रांची। रिम्स निदेशक द्वारा स्वास्थ्य विभाग और मंत्री इरफान अंसारी पर फाइलें रोके जाने के आरोप लगाने के बाद अब विभाग ने जोरदार प्रतिक्रिया दी है। स्वास्थ्य विभाग ने निदेशक पर नियमों की अनदेखी, मनमानी और संस्थान में पारदर्शिता की गंभीर कमी के आरोप लगाये हैं। विभाग का कहना है कि निदेशक वित्तीय मामलों से जुड़ी संचिकाएं जान-बूझकर सीधे मंत्री के पास भेजते हैं, जबकि नियमानुसार इन्हें शासी परिषद की बैठक में रखना चाहिए ताकि उन पर चर्चा हो सके। चर्चा होने से पारदर्शिता आएगी, लेकिन निदेशक को ऐसे मामलों पर जवाब भी देना होगापर वे जवाब देने से बचना चाहते हैं। इसलिए वे गोपनीय तरीके से ऐसी संचिकाओं को निपटाना चाहते हैं ताकि उन्हें जवाबदेही से बचाया जा सके। शासी निकाय की बैठकें न बुलाने का आरोप रिम्स अधिनियम, 2002 की धारा 13(3) और रिम्स विनियम, 2014 के विनियम 4 के अनुसार, निदेशक-सह-सदस्य सचिव का कर्तव्य है कि वे शासी निकाय की बैठकें आयोजित करें। लेकिन विभाग का आरोप है कि निदेशक के कार्यकाल में अब तक केवल दो बैठकें ही हुई हैं, जिनमें से एक बैठक विभाग के हस्तक्षेप के बाद आयोजित की गयी। यह स्पष्ट करता है कि निदेशक जानबूझकर शासी निकाय की प्रक्रिया से बचते रहे हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि शासी निकाय की बैठक बुलाने का कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है और न ही कभी खारिज किया गया है। इसके बावजूद निदेशक ने न तो त्रैमासिक बैठकें आयोजित कीं और न ही इस दिशा में कोई पहल की। विभाग के अनुसार, यह नियमों का सीधा उल्लंघन है। बजट प्रबंधन में भी विफलता रिम्स के बजट को लेकर भी विभाग ने निदेशक की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। विभाग के अनुसार, रिम्स को शासी निकाय द्वारा अनुमोदित बजट की राशि हर वर्ष बिना किसी कटौती के मंजूर की जाती है, फिर भी संस्थान हर साल धन का समुचित उपयोग करने में विफल रहा है। बजटीय प्रावधान और वास्तविक खर्च का कोई मिलान नहीं किया गया, जिससे संस्थान लगातार वित्तीय अनियमितताओं का शिकार बना हुआ है। फाइलों का अनावश्यक विभाग को भेजा जाना स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि रिम्स, रांची एक स्वायत्त संस्थान है और अधिनियम के अनुसार अधिकांश प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार शासी निकाय के पास हैं। विभाग का कहना है कि किसी भी मामले में विभागीय अनुमति की आवश्यकता तभी होती है जब राज्य सरकार से स्पष्ट निर्देश प्राप्त हों। बावजूद इसके, निदेशक जानबूझकर फाइलें मंत्री को भेजकर न सिर्फ प्रक्रिया की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि बैठकों से बचने का प्रयास भी कर रहे हैं। वित्त एवं लेखा समिति की बैठकों की अनदेखी विभाग ने कहा है कि निदेशक ने कभी भी वित्त एवं लेखा समिति की बैठक नहीं बुलायी, जबकि वे इसके सदस्य सचिव हैं और उनका दायित्व है कि ऐसी बैठकों का आयोजन करें। अपर मुख्य सचिव द्वारा पहल करने और समय निर्धारित करने के बाद ही बैठकें आयोजित की गयींं। यह साबित करता है कि निदेशक बैठकें बुलाना नहीं चाहते ताकि वे अपनी मनमानी जारी रख सकें और पारदर्शिता से बच सकें।
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