पॉक्सो मामलों के निपटारे में झारखंड का राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन, 130 फीसदी मामले निपटाएभारत में पॉक्सो मामलों की निपटान दर अब 109 प्रतिशत, जबकि झारखंड में 130 प्रतिशत रहीझारखंड की अदालतों ने लंबित मामलों को कम करने में पाई बड़ी सफलता, एक साल में दर्ज हुए मामलों से भी अधिक केस निपटाएएक शोध के अनुसार 4 वर्षों में सभी लंबित मामलों को खत्म करने के लिए देशभर में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की जरूरतयह अध्ययन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन ने कियाएबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ने पॉक्सो मामलों में बच्चों को न्याय दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। पहली बार एक वर्ष में दर्ज होने वाले पॉक्सो मामलों से अधिक मामलों का निपटारा किया है। इस दिशा में झारखंड ने राष्ट्रीय निपटान दर 109 प्रतिशत को पीछे छोड़ते हुए 130 प्रतिशत की दर हासिल की है। साल 2025 में जहां झारखंड में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) कानून के तहत 1434 मामले दर्ज हुए, वहीं अदालतों ने 1867 मामलों का निपटारा किया, जिसमें पिछले कई वर्षों से लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा शामिल है। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज (सी-लैब) फॉर चिल्ड्रन की रिपोर्ट पेंडेंसी टू प्रोटेक्शन: अचीविंग द टिपिंग पॉइंट टू जस्टिस फॉर चाइल्ड विक्टिम्स ऑफ सेक्सुअल एब्यूज के अनुसार वर्ष 2025 में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े 80,320 मामले दर्ज हुए, जबकि 87,754 मामलों का अदालती सुनवाई के बाद निपटारा किया गया। इससे निपटाने की दर 109 प्रतिशत तक पहुंच गई। खास बात यह है कि 24 राज्यों में पॉक्सो मामलों के निपटारे की दर 100 प्रतिशत से अधिक रही है। रिपोर्ट में पॉक्सो के तहत सभी लंबित मामलों को चार वर्षों के भीतर खत्म करने के लिए 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना करने की सिफारिश की गई है।मुकदमों को लेकर अक्सर तारीख पर तारीख की छवि से बदनाम भारत में 2023 तक पॉक्सो के 2,62,089 मामले लंबित थे। लेकिन अब एक अहम बदलाव देखने को मिला है क्योंकि निपटाए गए मामलों की संख्या दर्ज किए गए मामलों से ज्यादा हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार देश एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां न्यायिक व्यवस्था अब सिर्फ लंबित मामलों को संभालने के बजाय उन्हें सक्रिय रूप से कम करना शुरू कर रही है। साथ ही रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि लंबित पॉक्सो मामलों को पूरी तरह खत्म करने के लिए चार साल की अवधि में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतें स्थापित की जाएं। इसके लिए लगभग 1,977 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना चाहिए, जिसमें निर्भया फंड का भी उपयोग किया जा सकता है।रिपोर्ट कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी ध्यान दिलाती है। जैसे कि राज्यों के बीच मामलों के निपटारे की दर में अंतर, दोष सिद्धि की दर में निरंतरता की कमी और लगभग 50 फीसदी मामलों का दो साल तक लंबित रहना। उदाहरण के तौर पर, झारखंड में लंबित मामलों में 16 प्रतिशत मामले 6–10 साल से, 12 प्रतिशत 5 साल से, 19 प्रतिशत 4 साल से, 23 प्रतिशत 3 साल से और शेष 30 प्रतिशत मामले 2 साल से लंबित हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कई मामले वर्षों से लंबित हैं। ये आंकड़े उन मामलों को दिखाते हैं जो कई साल पहले न्याय प्रणाली में दर्ज हुए थे, लेकिन अब तक उनमें कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। रिपोर्ट बताती है, किसी मामले की प्रक्रिया के शुरुआती दौर से ही लंबित रहने की समस्या शुरू हो जाती है और व्यवस्था को तय समय सीमा के भीतर मामलों को आगे बढ़ाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।न्यायिक व्यवस्था के व्यापक संदर्भ में इन आंकड़ों के दूरगामी असर पर बात करते हुए इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के निदेशक (शोध) पुरुजीत प्रहराज ने कहा, भारत आज बाल यौन शोषण के खिलाफ अपने संघर्ष में एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जब न्यायिक व्यवस्था दर्ज किए जाने वाले मामलों से अधिक पॉक्सो मामलों का निपटारा करने लगती है, तब यह सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि यह उस भरोसे की वापसी होती है, जो बच्चों ने व्यवस्था पर खो दिया था। हमारा शोध बार-बार यह दिखाता है कि न्याय में हर दिन की देरी, बच्चे के मानसिक आघात को और गहरा करती है। इसलिए इस गति को बनाए रखना केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है। ताकि हर बच्चे के लिए समय पर संवेदनशील और बाल-केंद्रित न्याय अपवाद नहीं, बल्कि हक़ीक़त बन सके। इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए काम करने वाले नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी है। जेआरसी 250 से अधिक सहयोगी संगठनों के साथ देश के 451 जिलों में बाल अधिकारों के लिए काम कर रहा है।राज्यों में देखें, तो सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो के मामलों के निपटान की दर 150 प्रतिशत से अधिक रही है। वहीं, अन्य सात राज्यों में यह निपटान दर 121 से 150 प्रतिशत के बीच रही, जबकि 10 राज्यों ने 100 से 120 प्रतिशत तक की निपटान दर हासिल की। इन 24 राज्यों ने न सिर्फ 2025 में दर्ज हुए मामलों का निपटारा किया, बल्कि वर्षों से लंबित मामलों को भी काफी हद तक समाप्त करने में सफलता पाई।रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि पॉक्सो के लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के मकसद से प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हर साल मामलों के निपटारे की दर 100 प्रतिशत से अधिक बनाए रखें। इसके साथ ही जो राज्य न्यायिक प्रक्रिया में पीछे हैं, उन्हें तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग दिया जाए। साथ ही दोषसिद्धि और बरी होने की दरों की नियमित और बारीकी से निगरानी की जाए। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि मामलों के बेहतर विश्लेषण और दस्तावेजों की त्वरित उपलब्धता के लिए एआई आधारित कानूनी शोध उपकरणों और दस्तावेज प्रबंधन प्रणालियों का उपयोग किया जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया और अदालती कार्यवाही अधिक तेज व प्रभावी हो सके।यह रिपोर्ट दो दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है, जिन्हें नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और लोकसभा में पूछे गए सवालों और उनके जवाबों से लिया गया है।और जानकारी के लिए संपर्क करेंजितेंद्र परमार8595950825
झारखंड में शीतलहर, मुख्यमंत्री ने लोगों से की ठंड से बचने की अपीलटीम एबीएन, रांची। झारखंड में जारी शीतलहर को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यवासियों से सतर्कता बरतने और सुरक्षित रहने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि लोग अनावश्यक यात्रा से बचें, विशेषकर सुबह और शाम के समय, जब ठंड का प्रभाव अधिक रहता है। साथ ही गर्म कपड़े पहनने और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।मुख्यमंत्री ने अलाव या हीटर का सुरक्षित उपयोग करने और घरों में पर्याप्त वायु संचार बनाए रखने पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि ठंड के कारण यदि खांसी, जुकाम, कमजोरी, भ्रम या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।आपात स्थिति में 108 एम्बुलेंस सेवा, 104 स्वास्थ्य विभाग हेल्पलाइन अथवा 1800-345-6540 पर संपर्क करने की जानकारी भी दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी जीतने के बाद हेमंत सोरेन से मिली क्रिकेट टीम, CM ने सभी खिलाड़ियों को शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानितटीम, एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आज सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी- 2025 का खिताब जीतकर इतिहास रचने वाली वाली झारखंड क्रिकेट टीम के सदस्यों ने मुलाकात की। इस अवसर पर टीम के कप्तान और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर ईशान किशन ने पूरी टीम के साथ विजेता ट्रॉफी मुख्यमंत्री को सांकेतिक रूप से हैंडओवर कर जीत का जश्न मनाया।मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक जीत के लिए सभी खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ्स तथा जेएससीए को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मंत्री सुदिव्य कुमार, विधायक कल्पना सोरेन और मुख्य सचिव अविनाश कुमार की उपस्थिति में मुख्यमंत्री ने सभी खिलाड़ियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। वहीं, टीम के कप्तान ईशान किशन समेत सभी खिलाड़ियों ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के अपने प्रदर्शन और अनुभवों को मुख्यमंत्री के साथ साझा किया। इस दौरान सीएम हेमंत ने कहा कि सैयद मुश्ताक अली टी- ट्वेंटी क्रिकेट टूर्नामेंट जीतकर झारखंड ने डोमेस्टिक क्रिकेट में एक नया कीर्तिमान गढ़ा है। यह पूरे राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि और गौरवान्वित करने वाला पल है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में इस तरह की जीत हासिल होने से राज्य में खेलों को बढ़ावा मिलता है। आज क्रिकेट के साथ हॉकी और तीरंदाजी जैसे कई खेलों में झारखंड के खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर देश और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं।मुख्यमंत्री ने क्रिकेटरों से संवाद के क्रम में राज्य में खेल वातावरण बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों का एक ऐसा इकोसिस्टम बने जिसमें राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को आगे आने का मौका मिले।इसके लिए स्कूल और कॉलेज स्तर पर खेलों को जोड़े जाने की मजबूत शुरुआत होनी चाहिए ताकि विभिन्न खेलों के होनहार खिलाड़ी को बेहतर प्लेटफार्म मिले ताकि वे अपने प्रदर्शन को और भी निखार सकें। इस दिशा में राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने जेएससीए से कहा कि खिलाड़ियों को आगे ले जाने में खेल एसोसिएशन की की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में विदेशों में खेलने और प्रशिक्षण देने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की पहल होनी चाहिए। इससे खिलाड़ियों को अलग-अलग माहौल तथा वातावरण में खेलने का अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनके प्रदर्शन में और भी निखार आएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले अन्य प्रतियोगिताओं में झारखंड की टीम बेहतर एवं शानदार प्रदर्शन करे, इसके लिए टीम को मजबूत बनाने का प्रयास लगातार जारी रहना चाहिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज क्रिकेट, हॉकी और फुटबॉल जैसे कई लोकप्रिय खेलों के साथ परंपरागत खेलों का भी दौर नए रूप में लौट रहा है। ऐसे परंपरागत खेलों की कई प्रतियोगिताएं आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रही हैं। ऐसे में अगर कोई अगर खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहता है तो उसके लिए कई दरवाजे खुले हैं।मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने में सरकार हर तरह का सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार है। हमें झारखंड को एक ऐसा राज्य बनाना है, जो खेलों की दुनिया में पूरे देश में अपनी मजबूत तथा दमदार दावेदारी पेश कर सके।मुख्यमंत्री ने झारखंड में खेल प्रतियोगिताएं नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर राज्य स्तर पर विभिन्न खेलों के लिए प्रतियोगिताएं नियमित रूप से होती रहनी चाहिए। इस पहल से खिलाड़ियों को ना सिर्फ अपना खेल कौशल दिखाने का मौका मिलता है, बल्कि कई प्रतिभावान खिलाड़ी सामने आते हैं जो अपने प्रदर्शन से राज्य और देश को नाम रौशन करते हैं।
कैबिनेट की बैठक 23 को, लिए जाएंगे कई अहम निर्णयटीम एबीएन रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक 23 दिसंबर को होगी। प्रोजेक्ट भवन में बैठक अपराह्न तीन बजे से शुरू होगी। यह जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी समन्वय विभाग ने दी। इस बैठक में कई अहम निर्णय लिए जाने की संभावना है। जानकारी के अनुसार इस बैठक में पेसा के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा कृषि, ऊर्जा, नगर विकास सहित कई विभागों के प्रस्तावों पर भी मुहर लग सकती है।
67 चिकित्सकों को स्वास्थ्य मंत्री ने सौंपा नियुक्ति पत्र! रांची में जल्द मेडिकल यूनिवर्सिटी शुरू करने की घोषणाटीम एबीएन, रांची। स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने गुरूवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अनुबंध पर नियुक्त किये गए 67 चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपा। नामकुम स्थित राज्य के स्वास्थ्य मुख्यालय स्थित सभागार में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अजय कुमार सिंह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के झारखंड हेड शशि प्रकाश झा और स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख की उपस्थिति में 33 मेडिकल अफसर और 34 विशेषज्ञ डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंपा गया।स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की लगातार वह कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज 67 डॉक्टरों की नियुक्ति के बाद राज्य के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में भी चिकित्सक मौजूद होंगे और राज्यवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सकेगी। डॉ इरफान अंसारी ने आगे कहा कि पैसे की कोई कमी नहीं है और डॉक्टरों को उनके मन मुताबिक वेतन पर नियुक्त किया है।नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ इरफान अंसारी ने बताया कि आज ही उन्होंने एसीएस हेल्थ के साथ ब्राम्बे जाकर जमीन और मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए भवन का मुआयना किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल से भी मेडिकल यूनिवर्सिटी खोलने के लिए सहमति मिल गई है।स्वास्थ्य मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज अफसोस होता है कि 20 सालों में बीजेपी ने हेल्थ सेक्टर को लेकर कोई काम नहीं किया है। डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि झारखंड में जल्द अलग अलग जिलों में 4 मेडिकल कॉलेज खोले जायेंगे और यह तीन-चार सालों में बनकर तैयार हो जायेगा।
टीम एबीएन, रांची। श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान में सभी 342 झारखंड सिविल सेवा परीक्षा के प्रशिक्षुओं का प्रवेश कराया गया। जिसमें महानिदेशक मनीष रंजन और आरक्षी महानिरीक्षक अखिलेश झा ने सबको संबोधित किया।
रिम्स की जमीन पर बुधवार को भी चला प्रशासन का बुलडोजर, अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जारी टीम एबीएन, रांची। झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स की जमीन को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। अतिक्रमण हटाओ अभियान में और तेजी आयी है और पक्के मकानों को तोड़ने में तीन तीन बुलडोजर लगाये गये हैं। जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त कार्यपालक दंडाधिकारी साइनी तिग्गा के साथ साथ बड़गाई के सीओ विजय कुमार दास खुद अतिक्रमण हटाओ अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। बड़गाई सीओ ने बताया कि झारखंड उच्च न्यायलय के आदेश पर आज भी कार्रवाई जारी है। उन्होंने आगे बताया कि रिम्स के डॉक्टर्स आवासीय कॉलोनी में कई दिनों तक अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाये जाने के बाद से डीआईजी ग्राउंड के चारों ओर रिम्स की जमीन पर बनाये गये अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि डीआईजी ग्राउंड के पूर्वी भाग में बने पक्के निर्माण को आज हटाया जा रहा है। इसके लिए तीन-तीन बुलडोजर को लगाया गया है। बड़गाई सीओ ने बताया कि कानून के हिसाब से ये सभी निर्माण अवैध हैं। जब 1960-65 में इस जमीन का मालिकाना हक रिम्स के पास चला गया, उसके बाद जो भी रजिस्ट्री या म्यूटेशन एवं अन्य प्रक्रिया हुई है वे सब अवैध हैं। सीओ ने कहा कि किस अधिकारी का इसमें क्या दोष रहा है? यह तो आगे की जांच का विषय है लेकिन ये निर्माण अवैध हैं और इसे पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। बड़गाई अंचल के अंचलाधिकारी विजय कुमार दास ने बताया कि रिम्स की जमीन पर बने बहुमंजिला अपार्टमेंट को तोड़ने की कार्रवाई आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह अपार्टमेंट रिहायशी इलाके में है और आसपास भी लोग रह रहे हैं, इसलिए कोई अनहोनी या अप्रिय घटना नहीं हो, इसलिए पहले ऊपर के दो तलों को बेहद सावधानी से तोड़ा जा रहा है। उसके बाद इसे बुलडोजर से ढहाया जायेगा। झारखंड उच्च न्यायालय में दायर वाद संख्या डब्ल्यू पी (पीआइएल) 4736/2018 (ज्योति शर्मा वर्सेस राज्य सरकार एवं अन्य) में 3.12.2025 को पारित न्यायादेश में राज्य सरकार और रिम्स परिसर को 72 घंटे के अंदर सभी प्रकार के अतिक्रमण से मुक्त करने का आदेश दिया गया था। झारखंड उच्च न्यायालय, रांची के दिये आदेश के अनुपालन में सभी अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटा लेने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया गया था। रांची जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और रिम्स प्रबंधन संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रहा है।
झारखंड में शराब के शौकीनों के लिए गुड न्यूज, सुबह 4 बजे तक खुले रहेंगे बार टीम एबीएन, रांची। झारखंड में शराब के शौकीनों और बार संचालकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आयी है। राज्य का आबकारी विभाग बार के संचालन समय बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अगले वित्तीय वर्ष से बार सुबह 4 बजे तक खुले रह सकते हैं। फिलहाल अभी बार खुले रखने की टाइमिंग 12 बजे तक है। उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि नयी व्यवस्था के तहत बार सुबह 4 बजे तक खुले रहेंगे। जिसके लिए शुल्क का भुगतान कर लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी होगा। इस व्यवस्था के तहत सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा। साथ ही मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि नियमों की पालना न करने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से आज भारत मे ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ओएएम ने की मुलाकात, मुख्यमंत्री को ऑस्ट्रेलिया आने का दिया न्योतामुख्यमंत्री और भारत मे ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने एवं परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने पर हुई चर्चाझारखंड में निवेश की संभावनाओं और खान सुरक्षा को लेकर दोनों के बीच विशेष रूप से हुआ विचार- विमर्शटीम एबीएन, रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन औऱ विधायक कल्पना सोरेन से आज झारखंड दौरे पर आए भारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर श्री फिलिप ग्रीन ओएएम ( Mr Philip Green OAM ), प्रोफेसर सुशान मार्क्स, इंटरनेशनल लॉ ( Professor Susan Marks, International law ), टॉम सैंडरफोर्ड, फर्स्ट सेक्रेटरी ( Mr Tom Sanderford, First Secretary) एवं सुश्री अनघा, सीनियर इकोनामिक रिसर्च अफसर, ऑस्ट्रेलिया कांसुलेट- जनरल इन कोलकाता (Ms Anagha, Senior Economic Research Officer, Australian Consulate- General In Kolkata) ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान उनके बीच झारखंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने , विभिन्न क्षेत्रों में परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने तथा निवेश की संभावनाओं पर विशेष रूप से चर्चा हुई। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री को ऑस्ट्रेलिया आने का आमंत्रण दिया।मुख्यमंत्री ने श्रम आधारित अर्थव्यवस्था से ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के अपने संकल्प के बारे में भी की चर्चा की, सहयोग का मिला भरोसामुख्यमंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर को झारखंड में उपलब्ध संसाधनों एवं निवेश को लेकर राज्य सरकार की नीतयों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने श्रम आधारित अर्थव्यवस्था से ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के अपने संकल्प के बारे में भी चर्चा की, जिसपर उनके द्वारा सहयोग और साथ मिलकर आगे बढ़ने का का भरोसा दिलाया। खान सुरक्षा तथा जनजातीय समुदायों के विकास को लेकर भी हुई चर्चाभारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर श्री फिलिप ग्रीन ने मुख्यमंत्री को ऑस्ट्रेलिया आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि खनन को लेकर झारखंड ऑस्ट्रेलिया में काफी समानताएं हैं। ऑस्ट्रेलिया में खान सुरक्षा एवं सुरक्षित खनन को लेकर किन तकनीकों का इस्तेमाल होता है, उससे मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने खनन के बाद जमीन को विकसित कर स्थानीय समुदाय को वापस करने की ऑस्ट्रेलिया सरकार की नीति को सराहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में खनन की ऐसी ही नीति होनी चाहिए़। नीति यहां भी है, लेकिन इसका सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भी सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं।खान सुरक्षा एवं खनन में स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा कर संबंध में ऑस्ट्रेलिया सरकार की नीति अनुकरणीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री को यह भी कहा कि झारखंड ऑस्ट्रेलिया में भी जनजातीय समुदाय की बड़ी आबादी है । उनके विकास के लिए ऑस्ट्रेलिया में क्या कार्य हो रहे हैं, इसकी भी जानकारी दी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.