एबीएन न्यूज नेटवर्क, देवघर। राष्ट्रपति एम्स देवघर के पहले दीक्षांत समारोह में भाग लेंगी और कल यानी 1 अगस्त को आईआईटी (भारतीय खनि विद्यापीठ), धनबाद के 45वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगी। इससे पहले उन्होंने बीते बुधवार को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में एम्स-कल्याणी के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया था। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए देवघर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि देवघर हवाई अड्डे से एम्स तक के रास्ते पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। वह अपराह्न 3 बजे दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगी। उन्होंने बताया कि रास्ते में सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए बीते बुधवार को एक अभ्यास किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि काफिले में प्रोटोकॉल के अनुसार वाहन होंगे, जिनमें एक एम्बुलेंस और सामान ले जाने वाली गाड़ी के अलावा अन्य वाहन भी शामिल होंगे। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे सभी वाहनों को अनिवार्य जांच के बाद तैयार रखा गया है। इस बीच, धनबाद शहर भी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।
अपने कार्यक्रम के तहत, मुर्मू एक अगस्त को 99 साल पुराने आईआईटी (भारतीय खनि विद्यापीठ) के 45 वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भी मौजूद रहने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, मुर्मू आईआईटी-आईएसएम के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए लगभग 1 घंटे तक धनबाद में रहेंगी। एक अधिकारी ने कहा, उनके दोपहर 12 बजे पहुंचने और समारोह में शामिल होने की उम्मीद है। वह दोपहर 1 बजे तक रवाना होंगी। मुर्मू आईआईटी-आईएसएम, धनबाद में दीक्षांत समारोह में शामिल होने वाली दूसरी राष्ट्रपति होंगी।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 10 मई, 2014 को संस्थान के 36 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। आईएसएम धनबाद की स्थापना 1926 में हुई थी और 6 सितंबर, 2016 को इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) का दर्जा दिया गया था।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की 108 एंबुलेंस सेवाएं एक बार फिर से सुचारू हो जायेंगी। पिछले दो दिनों से जारी एंबुलेंस चालक एवं ईएमटी कर्मियों की हड़ताल समाप्त हो गई है। झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने सरकार से बातचीत के बाद हड़ताल वापस लेने की घोषणा की है। गुरुवार से सभी कर्मचारी पुन: ड्यूटी पर लौटेंगे।
यह सहमति बुधवार को अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, अजय कुमार सिंह के साथ हुई बैठक में बनी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित झारखंड स्टेट हेल्थ सोसाइटी के एमडी शशि प्रकाश झा, झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के एमडी अबु इमरान, परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त डॉ प्रवीण प्रकाश एवं 108, 104 और एनजीओ के स्टेट नोडल पदाधिकारी डॉ पंकज कुमार सिन्हा उपस्थित थे।
बैठक में कर्मचारी संघ की चार सूत्री मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिनमें कुशल श्रमिक के अनुरूप मानदेय देने, अगस्त माह से ईपीएफ लागू करने तथा ओवरटाइम का नियमानुसार भुगतान शामिल था।
मांगे मान लिए जाने के बाद संघ ने अपनी हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की और सभी कर्मियों को काम पर लौटने के निर्देश दिये। यह निर्णय राज्य भर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली की दिशा में एक राहतभरी खबर है, जिससे आम जनजीवन को बड़ी राहत मिलेगी।
झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग का हाई अलर्ट, दिशा-निर्देश जारी, लोगों से सतर्क रहने की अपील
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झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग का हाई अलर्ट, दिशा-निर्देश जारी, लोगों से सतर्क रहने की अपील - JHARKHAND WEATHER
झारखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट है. आपदा विभाग की ओर से भी अलर्ट जारी किया गया है.
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बारिश (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team
Published : July 27, 2025 at 6:55 AM IST
मौसम विज्ञान केंद्र, रांची द्वारा जारी चेतावनी के बाद राज्य के स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ इरफान अंसारी भी पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पतालों से लेकर आपदा विभाग तक की सारी व्यवस्थाओं को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश जारी किए हैं।
मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है ताकि खराब मौसम, वज्रपात और भारी बारिश से जान-माल की हानि न हो और सभी सुरक्षित रहें। उन्होंने राज्यवासियों को सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर आवश्यक सलाह दी है और उनसे सतर्क रहने तथा स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करने की अपील की है।
मौसम विज्ञान केंद्र, रांची के अनुसार अगले 36 घंटों में डिप्रेशन झारखंड से उत्तरी छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा, जिसके कारण इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। यही वजह है कि रविवार को रांची समेत कई जिलों में आंधी-तूफान, तेज हवाओं के साथ-साथ भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने 16वीं जनगणना की तैयारियों को लेकर कमर कस ली है। राज्य सरकार 31 जुलाई 2025 तक जनगणना अधिसूचना जारी करने की तैयारी में है। इस अधिसूचना में सरना धर्म कोड को शामिल करने की अनुशंसा की जा सकती है।
ज्ञात हो कि झारखंड में सत्तारूढ़ झामुमो और कांग्रेस लंबे समय से जनगणना में सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग करते रहे हैं। राज्य विधानसभा में भी इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। सरना कोड की मांग आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
बता दें कि जनगणना 2027 की तैयारी के लिए भारत सरकार ने झारखंड सहित सभी राज्यों को निर्देश जारी कर दिया है। राज्यों को कहा गया है कि दिसंबर 2025 तक हर हाल में नये जिले के गठन, प्रखंड, निकाय इत्यादि का गठन करना है तो कर लिया जाये इस अवधि के बाद इन कार्यों पर रोक रहेगा। इसके अलावा राज्य सरकार को कहा है कि 31 जुलाई तक हर हाल में जनगणना कार्य से संबंधित संकल्प जारी कर दिया जाये।
एक मार्च 2027 से जनगणना कार्य शुरू होगा, देशभर में इस कार्य के लिए 34 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लगायें जायेंगे। इन्हें जनगणना कार्य के पूर्व ट्रेनिंग भी दिया जायेगा। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना दो तरह से आयोजित होगी। पहले पूरे देशभर के घरों की गिनती होगी, इसके बाद प्रत्येक निवासियों की गिनती की जायेगी। इसमें जातीय जनगणना भी की जायेगी। केंद्र सरकार के निर्देश पर भू-राजस्व विभाग झारखंड जनगणना कार्य कराने के लिए तैयारी कर रहा है।
अगस्त 2025 में जनगणना से जुड़े कर्मियों का प्री-टेस्ट होगा। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 में मास्टर ट्रेनर और फील्ड ट्रेनर को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जनवरी 2026 में जनगणना से जुड़े सवालों की अधिसूचना (गजट) प्रकाशित होगी। फरवरी 2026 में जनगणना कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी। अप्रैल से सितंबर 2026 में घरों के चयन और फील्ड वर्क का काम चलेगा। दिसंबर 2026 में जनगणना पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और 1 मार्च 2027 से देशभर में जनगणना शुरू होगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 का अनावरण करने के बाद कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और सहकारिता के मार्ग पर चलने से देश का अर्थतंत्र मजबूत होगा। श्री शाह ने कहा कि पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय की अनेक उपलब्धियां रही, लेकिन इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज देश की छोटी से छोटी सहकारी इकाई का सदस्य गर्व के साथ खड़ा हो गया है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का शुभारंभ हुआ है। वर्ष 2002 में भारत सरकार ने सहकारिता नीति में बनायी थी उस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार थी और आज भाजपा सरकार द्वारा दूसरी सहकारिता नीति लाई गई है। उन्होंने कहा कि जो सरकार के दृष्टिकोण को, जो भारत को, उसके विकास को और भारत के विकास के लिए आवश्यक सभी कारकों को समझता है, वही सहकारी क्षेत्र को महत्व दे सकता है। यदि देश और अर्थव्यवस्था की मूल इकाई समृद्धि रोजगार देने वाली हो तो वह आर्थिक मॉडल कभी विफल नहीं हो सकता।
श्री शाह ने कहा कि सहकारिता नीति बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि नीति का केंद्र बिंदु व्यक्ति, गाँव, कृषि, गाँव की महिलाएँ, दलित, आदिवासी हों। इसका विजन सहकारिता की समृद्धि के माध्यम से 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है। इसका मिशन पेशेवर, पारदर्शी, तकनीकी, जिम्मेदार और आर्थिक रूप से स्वतंत्र तथा सफल लघु सहकारी इकाइयाँ विकसित करना है। हम हर गाँव में कम से कम एक सहकारी संस्था के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2027 में भारत को विश्व के तीसरे नंबर का अर्थतंत्र बनाने का लक्ष्य रखा है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम इस लक्ष्य तक जरुर पहुंच जाएंगे। पिछले चार वर्षों के अंदर सहकारी क्षेत्र को कॉपोर्रेट सेक्टर के समान अधिकार मिले हैं। एक जमाने में अर्थतंत्र के जानकारों ने सहकारिता को डाइंग सेक्टर घोषित कर दिया था।
आज वही लोग कहते हैं कि सहकारिता का भी भविष्य है। उन्होंने कहा, मैं सभी को कहना चाहता हूँ कि सहकारिता का भी भविष्य है नहीं, सहकारिता का ही भविष्य है। उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों को साथ लेकर देश का समविकास करने की क्षमता केवल सहकारिता में ही है। छोटी-छोटी पूंजी वाले अनेक लोगों को मिलाकर बड़ी पूंजी बनाकर एक उद्यम स्थापित करने की क्षमता केवल सहकारिता में है।
श्री शाह ने कहा कि नई नीति तैयार करने के लिए 48 सदस्यीय एक समिति बनी थी, जिसकी अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने की। इस समिति में विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सरकार के अधिकारी, सहकारी संघों के सदस्य और विशेषज्ञ शामिल थे।
टीम एबीएन, रांची। राज्य में संचालित अटल मोहल्ला क्लीनिक अब मदर टेरेसा एडवांस हेल्थ क्लीनिक के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज 24 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में अटल मोहल्ला क्लीनिक योजना का नाम परिवर्तित करने सहित 21 प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया।
झारखंड मंत्रालय में हुई इस बैठक कि जानकारी देते हुए कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने कहा कि मंत्रिपरिषद के द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इसके तहत राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में उर्दू सहायक शिक्षकों के पूर्व से सृजित 3712 पदों का प्रत्यर्पण करते हुए प्रथम चरण में उर्दू के लिए इंटरमीडिएट प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 3287 पद तथा मध्य विद्यालयों में स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 1052 पद कुल 4339 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावे कैबिनेट की बैठक में उग्रवादी घटनाओं अथवा राष्ट्र की सीमा के रक्षार्थ ड्यूटी के दौरान वीरगति प्राप्त होने वाले झारखंड के केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल कर्मियों के आश्रित को विशेष अनुग्रह अनुदान एवं अनुकम्पा के आधार पर सरकारी सेवा में नियुक्ति प्रदान करने स्वीकृति दी गई है।
कैबिनेट ने झारखंड राज्य के पुलिस, कक्षपाल, सिपाही, उत्पाद सिपाही संयुक्त भर्ती नियमावली, 2025 गठन के उपरांत पुलिस के पूर्व से प्रकाशित विज्ञापन को रद्द करने, भविष्य के नियुक्ति में पूर्व के आवेदकों को शुल्क भुगतान की छूट, सभी कोटि के आवेदकों को अधिकतम उम्र सीमा में छूट एवं अन्य बिन्दुओं पर निर्णय लिए जाने की स्वीकृति दी गई है।
टीम एबीएन, रांची। सदर अस्पताल ने आयुष्मान भारत - मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के क्रियान्वयन में देशभर में पहला स्थान प्राप्त कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। इस उपलब्धि पर झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आज प्रेस वार्ता कर प्रसन्नता व्यक्त की।
डॉ. अंसारी ने कहा कि यह गौरवपूर्ण क्षण है कि रांची सदर अस्पताल ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त कर झारखंड को गौरवान्वित किया है। यह अस्पताल इस बात का प्रमाण है कि राज्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हो रहा है। सदर से अब अन्य अस्पताल भी प्रेरणा लेंगे और झारखंड को हम निरामय राज्य के रूप में स्थापित करेंगे।
प्रेस वार्ता के दौरान अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक अबू इमरान भी उपस्थित रहे। मंत्री ने बताया कि सदर अस्पताल में अब 44 निजी डॉक्टर सेवा दे रहे हैं जो नि:स्वार्थ भाव से मरीजों की सेवा में समर्पित हैं। उन्होंने अस्पताल के समस्त चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई भी दी।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने जानकारी दी कि राँची सदर अस्पताल ने अब तक दो लाख से अधिक आयुष्मान कार्डधारकों को नि:शुल्क उपचार प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त, अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं, जिनमें हृदय, छाती, किडनी रोग जैसे गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं।
अंत में मंत्री ने कहा कि झारखंड स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांति के दौर से गुजर रहा है। सदर अस्पताल इसका उदाहरण है और हम पूरे राज्य में इस मॉडल को दोहराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित सदर अस्पताल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान भारत - मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के सफल क्रियान्वयन में सदर अस्पताल को देश भर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि ऐसे समय में मिली है जब देश के तमाम प्रमुख मेडिकल कॉलेज एवं बड़े सरकारी अस्पताल इस योजना के तहत सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। ये उपलब्धि इसकी दक्षता, कार्यकुशलता एवं समर्पण को दशार्ता है।
सदर अस्पताल, रांची ने अब तक दो लाख से अधिक आयुष्मान कार्डधारकों को नि:शुल्क इलाज की सुविधा दी है। इनमें सामान्य बीमारियों से लेकर अत्यंत जटिल सर्जरी और सुपर स्पेशलिटी उपचार शामिल हैं।
राज्य सरकार की पहल और अस्पताल प्रशासन की तत्परता से सदर अस्पताल में चरणबद्ध रूप से सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की शुरूआत की गई है।
इनके अतिरिक्त कई अन्य विभागों में भी स्पषलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर सेवारत हैं। आज सदर अस्पताल में घुटना प्रत्यारोपण, टोटल हिप रिप्लेसमेंट, गैस्ट्रो में ईआरसीपी के साथ दूरबीन द्वारा पथरी निकालना और गले के कैंसर में स्टेंटिंग, यूरोलॉजी में रिनल स्टोन, पेषाब की नली के स्टोन की सर्जरी और प्रोस्टेट सर्जरी, न्यूरो सर्जरी में स्पाइन सर्जरी और ब्रेन सर्जरी की जा रही है। इसके साथ बच्चों से जुड़े सभी तरह का आॅपरेषन इस अस्पताल में किया जा रहा है।
इन सेवाओं से न केवल रांची, बल्कि आस-पास के ग्रामीण इलाकों के मरीजों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है। कई गंभीर रोगों के लिए अब मरीजों को अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ रहा, बल्कि अन्य राज्यों से मरीज अब सदर अस्पताल, रांची में इलाज हेतु आ रहे हैं। अस्पताल में सरकारी फार्मेसी के अतिरिक्त अमृत फामेर्सी एवं जन औषधि केंद्र भी हैं जहां मानक के अनुरूप की दवायें उचित कीमत पर मरीजों को दी जा रही हैं।
सुपर स्पेशलिटी विभागों के संचालन के लिए अनुभवी और प्रशिक्षित सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को आयुष्मान योजना से जोड़ा गया है, ताकि रोगियों को समय पर, सटीक और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।
सदर अस्पताल, रांची की यह ऐतिहासिक उपलब्धि झारखंड राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मील का पत्थर है। यह केवल एक अस्पताल की सफलता नहीं, बल्कि राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों, प्रभावी कार्यान्वयन, और जनकल्याण की भावना का प्रमाण है।
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