टीम एबीएन, रांची। झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री गुरुजी शिबू सोरेन की स्मृतियों को सहेजने के लिए राज्य सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। मोरहाबादी स्थित उनका सरकारी आवास अब गुरुजी स्मृति संग्रहालय के रूप में विकसित किया जायेगा।
आज हुई कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी और नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू ने यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष रखा। दोनों मंत्रियों ने कहा कि गुरुजी का घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन और भावनाओं का केंद्र है। उनके घर की हर वस्तु और हर सामान उनकी संघर्ष यात्रा की याद दिलाते हैं।
डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि गुरुजी की स्मृतियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके घर को संग्रहालय का रूप देना बेहद जरूरी है ताकि झारखंड की नई पीढ़ी उनके जीवन और विचारधारा से प्रेरणा ले सके।
नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि गुरुजी की स्मृतियां अमर रहेंगी और यह संग्रहालय झारखंड की अस्मिता और संघर्ष की गाथा को हमेशा जीवित रखेगा।
इसके साथ ही दोनों मंत्रियों ने जामताड़ा के चिरुडीह में गुरुजी की याद में एक भव्य पार्क और विशाल प्रतिमा स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा। यही वह भूमि है, जहां से गुरुजी ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई की शुरूआत की थी।
डॉ अंसारी ने कहा कि आज वे मंत्री और जनप्रतिनिधि हैं तो यह गुरुजी की ही देन है। उन्होंने हमेशा पुत्रवत स्नेह दिया, मार्गदर्शन किया और जीवनभर प्रेरणा देते रहे। चिरुडीह की धरती पर स्मारक बनना हमारे लिए गर्व की बात होगी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार की नयी उत्पाद नीति सोमवार से रांची में लागू हो गयी। इसके तहत जिले की 150 शराब दुकानों को ई-लॉटरी के माध्यम से आवंटित किया गया है। इनमें से 138 दुकानों का लाइसेंस और साइट वेरिफिकेशन पूरा हो गया है और सोमवार से वहां बिक्री शुरू हो गयी।
बाकी दुकानों में भी जल्द ही बिक्री शुरू कर दी जायेगी। नयी नीति के अनुसार, अब शराब की दुकानें रात 11 बजे तक खुली रहेंगी। पहले दुकानें रात 10 बजे तक ही चलती थीं। समय बढ़ने से ग्राहकों को थोड़ी सहूलियत मिलेगी।
सरकार ने शराब की कीमतों में कुछ बढ़ोतरी की है, लेकिन इसके बावजूद पहले दिन दुकानों पर लंबी कतारें लगीं। ग्राहकों का कहना है कि ब्रांड की उपलब्धता और दुकानों के समय में बढ़ोतरी से उन्हें राहत मिलेगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सोचिए, अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत हो और बैंक जाने या लंबा फॉर्म भरने की झंझट न उठानी पड़े। बस एटीएम कार्ड का इस्तेमाल करें या मोबाइल से यूपीआई करें और आपका पीएफ सीधे आपके खाते में आ जाये। सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन अब यह हकीकत बनने वाला है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) जल्द ही अपनी नयी डिजिटल सेवा ईपीएफओ 3.0 लॉन्च करने जा रहा है। पीएम इकोनॉमी एडवाइजर काउंसिल के सदस्य इकोनॉमिस्ट संजीव सान्याल ने ईपीएफओ में बड़े बदलाव के संकेत दिये हैं। यह बड़ा बदलाव 2025 में ही लागू होगा और देश के 8 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा पहुंचायेगा।
पहले जहां पीएफ निकालने या ट्रांसफर करने में हफ्तों लग जाते थे, अब वही काम कुछ ही मिनटों में हो जायेगा। मोबाइल ऐप, डिजिटल डैशबोर्ड और यूपीआई पेमेंट जैसी सुविधाएं कर्मचारियों के जीवन को बेहद आसान बना देंगी। ईपीएफओ 3.0 न केवल पैसे निकालने को सरल बनायेगा, बल्कि जानकारी अपडेट करने, क्लेम करने और ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाओं को भी तेज कर देगा।
इसकी शुरुआत जून 2025 से ही होने वाली थी, लेकिन तकनीकी परीक्षणों की वजह से टल गयी। लेकिन अब यह इंतजार ज्यादा लंबा नहीं रहेगा। इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी आईटी कंपनियां इसे सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में जुटी हैं। सरकार का दावा है कि यह अपग्रेड भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को नयी ताकत देगा और कर्मचारियों का भरोसा और भी मजबूत करेगा।
ईपीएफओ 3.0 की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि अब पीएफ का पैसा आसानी से निकाला जा सकेगा। अब कर्मचारी अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) को एक्टिव करके और आधार को बैंक खाते से जोड़कर सीधे एटीएम से पैसे निकाल सकेंगे। यह सुविधा खास तौर पर इमरजेंसी में बहुत उपयोगी होगी। पहले पीएफ निकालने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। इसके लिए आॅनलाइन या आॅफलाइन आवेदन करना पड़ता था। साथ ही एम्प्लॉयर्स से अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित होगी। कर्मचारी बिना किसी झंझट के अपने पैसे निकाल सकेंगे।
र्ईपीएफओ 3.0 एक नया मोबाइल-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म लेकर आएगा। यह कर्मचारियों को अपने पीएफ खाते को आसानी से इस्तेमाल करने में मदद करेगा। नया डिजिटल डैशबोर्ड यूजर-फ्रेंडली होगा। कर्मचारी अपने फोन से कभी भी, कहीं भी अपने खाते की जानकारी देख सकेंगे। इसमें जमा राशि, क्लेम की स्थिति और अन्य डिटेल्स शामिल होंगे। पहले कर्मचारियों को ढऋ आॅफिस जाना पड़ता था। या फिर मुश्किल आॅनलाइन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। लेकिन अब यह सब कुछ मोबाइल पर उपलब्ध होगा।
ईपीएफओ 3.0 में डेथ क्लेम की प्रक्रिया को भी आसान किया जायेगा। पहले मृतक सदस्य के परिवार को क्लेम के लिए कई डॉक्यूमेंट्स जमा करने पड़ते थे। नाबालिग नॉमिनी के लिए गार्जियनशिप सर्टिफिकेट की जरूरत होती थी। लेकिन अब इस सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म कर दी गयी है। इससे परिवारों को जल्दी वित्तीय सहायता मिल सकेगी। यह बदलाव खास तौर पर उन परिवारों के लिए राहतकारी होगा जो मुश्किल समय से गुजर रहे होंगे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को तियानजिन में मुलाकात की। यह करीब 10 महीनों में दोनों की पहली मुलाकात है। दोनों के बीच करीब 50 से 55 मिनट तक द्विपक्षीय वार्ता हुई।
इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और चीन के संबंधों को बेहतर बनाने के मकसद के साथ व्यापक चर्चा की। यह मुलाकात अमेरिका की व्यापार और शुल्क संबंधी नीतियों की वजह से भारत-अमेरिका संबंधों में आयी अचानक गिरावट के मद्देनजर महत्वपूर्ण है।
पीएम मोदी और शी ने रविवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर मिले। चर्चा के लिए मुद्दों की व्यापकता को देखते हुए आधिकारिक सूत्रों ने संकेत दिया है कि वे दिन में बाद में फिर से मिल सकते हैं। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्तूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी।
तियानजिन की अपनी यात्रा से पहले पीएम मोदी ने कहा था कि विश्व की आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। जापान के योमिउरी शिंबुन को दिए एक साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर, पूवार्नुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। पीएम मोदी की चीन यात्रा चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के एक पखवाड़े से भी कम समय बाद हुई है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नाम पत्र लिखा। जिसमें कहा गया कि समाजवाद के प्रवर्तक एवं अग्रवाल समाज के जनक महाराजा अग्रसेन आज करोड़ों अग्रवालों के कुलगुरु, संस्थापक एवं पथ प्रदर्शक हैं।
एक रुपया और एक ईंट के सिद्धांत का पालन करते हुए आज अग्रवाल समाज पूरे विश्व में सेवा कार्य कर रहा है। आज जहां भी कुआ, बावड़ी, धर्मशाला, पनशाला, अस्पताल आदि हैं उनमें से 80% से भी अधिक अग्रवाल समाज के द्वारा निर्मित है।
महाराजा अग्रसेन जी 5185 वर्ष पूर्व सूर्यवंशी क्षत्रिय कुल के मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की 34वीं पीढ़ी के शासक थे। भारत सरकार ने भी युद्धपोत का नाम महाराजा अग्रसेन के नाम पर रखा है और 1976 में उनके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया था। कई सड़कों के नाम भी महाराज अग्रसेन के नाम पर रखे गये हैं।
झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन आपसे मांग करता है कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम महाराजा अग्रसेन जी के नाम पर किया जाये। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम महाराजा अग्रसेन जी के नाम पर करने की मांग की है।
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम महाराजा अग्रसेन जी के नाम पर करने से करोड़ों अग्रवालों का सम्मान बढ़ेगा और साथ ही महाराजा अग्रसेन जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल और महामंत्री विनोद कुमार जैन ने दी।
एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। झारखण्ड इस मन्तव्य के साथ जीएसटी दरों में प्रस्तावित बदलाव का समर्थन करेगा, जिसमें राज्यों को होनेवाली राजस्व क्षति की भरपाई जीएसटी कंपनसेशन से किया जाये। एक अनुमानित आकलन के अनुसार झारखंड को लगभग 2000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राजस्व की प्राप्ति नहीं हो सकेगी।
इसी परिप्रेक्ष्य पर आज दिल्ली में आठ राज्यों के वित्त मंत्रियों की संयुक्त बैठक हुई। प्रस्तावित बदलाव पर विचार विमर्श किया गया। तय किया गया कि इस मुद्दे पर एक संयुक्त ज्ञापन भी भारत सरकार को समर्पित किया जायेगा। झारखंड की ओर से इस बैठक में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शामिल हुए। हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडू, तेलंगाना एवं पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री / वाणिज्य कर मंत्री / राजस्व मंत्री की बैठक आहूत की गयी।
राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वस्तु और सेवा कर (जी.एस.टी) केंद्र और राज्यों के बीच एक साझा राजकोषीय ढांचा है। जो सर्वसम्मति और संघीय व्यवस्था पर आधारित है। दरों का सरलीकरण और युक्तिकरण वांछनीय उद्देश्य हैं। लेकिन इन्हें राज्यों की राजकोषीय स्थिरता की कीमत पर नहीं अपनाया जाना चाहिए। यदि वर्तमान प्रस्ताव को बिना किसी कंपनसेशन के लागू किया जाता है, तो इससे राज्यों के राजस्व को भारी नुकसान होगा, राजकोषीय असंतुलन बढ़ेगा और इसलिए यह वर्तमान स्वरूप में अस्वीकार्य है।
इसलिए, राज्यों की यह सुविचारित अनुशंसा है कि दरों को युक्तिसंगत बनाने के लिए एक मजबूत राजस्व संरक्षण ढांचा, Sin और Luxury की वस्तुओं पर एक पूरक शुल्क, और कम से कम पाँच वर्षों के लिए एक गारंटीकृत Compensation की व्यवस्था होनी चाहिए। केवल ऐसा संतुलित दृष्टिकोण ही राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता की रक्षा करेगा और साथ ही कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की सच्ची भावना के साथ जीएसटी सुधार के उद्देश्यों को आगे बढ़ायेगा।
यहां मालूम हो कि तीन सितंबर से चार सितंबर तक दिल्ली में जीएसटी दरों के बदलाव पर जीएसटी परिषद की बैठक होनी है। इस बैठक में केंद्र सरकार का प्रस्ताव है कि जीएसटी की दरों के चार स्लैब यथा- 5%, 12%, 18%, एवं 28% को युक्ति संगत बनाते हुए 12% एवं 28% के स्लैब को समाप्त किया जाये।
जिन मालों एवं सेवाओं के कर की दरों को घटाने का प्रस्ताव है उसके फलस्वरुप आशा है कि सामग्रियों के मूल्य घटने के कारण जन मानस पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा साथ ही देश की अर्थव्यस्था सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाएगा। परंतु वर्तमान में जीएसटी परिषद द्वारा जो रेट रेसनलाइजेशन का प्रस्ताव लाया गया है उस निर्णय से राज्यों के उपर पड़ने वाले वित्तीय भार का आकलन नहीं किया गया है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में राज्य की नीतिगत दिशा तय करने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक 2 सितंबर (मंगलवार) को दोपहर 2:30 बजे प्रोजेक्ट भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में आयोजित की जायेगी। इस संबंध में आधिकारिक जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) ने गुरुवार, 28 अगस्त को जारी की है। इस बार की कैबिनेट बैठक को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसका कारण यह है कि हाल ही में संपन्न झारखंड विधानसभा मानसून सत्र में कई अहम प्रस्ताव और विधेयक सदन में पेश व पारित किये गये थे। अब इन प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति देने के लिए मंत्रिपरिषद की मुहर जरूरी है। माना जा रहा है कि बैठक में इन्हीं बिंदुओं पर चर्चा होगी और अंतिम निर्णय लिये जायेंगे।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बैठक में कई विभागों से जुड़े जनहितकारी प्रस्ताव भी लाये जा सकते हैं। राज्य की जनता की निगाहें इस बैठक पर टिकी हुई हैं। आम लोगों को उम्मीद है कि सरकार ऐसे फैसले लेगी जो सीधे तौर पर उनके जीवन को आसान बनायें। विशेषकर किसानों, बेरोजगार युवाओं, छात्रों और ग्रामीण जनता के लिए राहतकारी योजनाओं की घोषणा की संभावना जतायी जा रही है।
विधानसभा सत्र के बाद यह कैबिनेट बैठक सरकार के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। घाटशिला विधानसभा उपचुनाव से जुड़े विषय पर भी चर्चा हो सकती है। वहीं, आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भी इस बैठक में लिये जाने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र का आज आखिरी दिन है। इसके बाद सदन के सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जायेगा। जानकारी के मुताबिक आज सदन में कई विधायी कार्य पूरे किये जायेंगे।
जानकारी के मुताबिक आज सदन में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगने की संभावना है। मुख्यमंत्री प्रश्नकाल होने की उम्मीद जतायी जा रही है। रिम्स-2 का नाम बदलकर शिबू सोरेन मेडिकल कॉलेज रखने के प्रस्ताव पर निर्णय लिया जा सकता है। शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग पर सदन से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जायेगा। अब तक कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव व सत्ता पक्ष के कई अन्य सदस्य गुरुजी को भारत रत्न देने की मांग सदन में रख चुके हैं।
बता दें कि 22 अगस्त को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र शुरू हुआ था। इस सत्र में राज्य सरकार ने अनुपूरक बजट पेश करने के साथ-साथ पांच अहम विधेयक और प्रस्ताव सदन में रखे। इनमें सबसे चर्चित राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2025 है, जिसके तहत कुलपति की नियुक्ति सहित कई अधिकार राज्यपाल से लेकर राज्य सरकार को दिये गये हैं।
उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पहले 1 अगस्त से 7 अगस्त तक निर्धारित था और इसका शुभारंभ 1 अगस्त को हुआ भी था, लेकिन 4 अगस्त को दिशोम गुरु और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के कारण सत्र को तत्काल प्रभाव से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था।
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