एबीएन डेस्क। टोक्यो पैरालंपिक की शुरुआत आज से हो रही है। इन खेलों में भारत का 54 सदस्यीय दल भाग ले रहा है जो 9 स्पर्धाओं में अपनी चुनौती पेश करेगा। टोक्यो पहुंचे भारतीय पैरा एथलीट दल में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो पहले भी इन खेलों में पदक जीत चुके हैं। भारत को अपने इन खिलाड़ियों से एक बार फिर पदक जीतने की उम्मीद है। तीरंदाजी : अगस्त 27 - पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत ओपन- हरविंदर सिंह, विवेक चिकारा पुरुषों की कंपाउंड व्यक्तिगत ओपन- राकेश कुमार, श्याम सुंदर स्वामी महिलाओं की कंपाउंड व्यक्तिगत ओपन- ज्योति बालियान कंपाउंड मिक्स्ड टीम ओपन- ज्योति बालियान और टीबीसी डमिंटन सितंबर 1 पुरुष सिंगल्स एसएल 3- प्रमोद भगत, मनोज सरकार महिला सिंगल्स एसयू 5- पलक कोहली मिक्स्ड डबल्स एसएल 3- एसयू 5- प्रमोद भगत और पलक कोहली सितंबर 2 पुरुष सिंगल्स एसएल 4- सुहास लालिनाकेरे यतिराज, तरुण ढिल्लन पुरुष सिंगल्स एसएस 6- कृष्णा नागर महिला सिंगल्स एसएल 4- पारुल परमार महिला डबल्स एसएल 3- एसयू 5- पारुल परमार और पलक कोहली पैरा कैनोइंग सिंतबर 2 महिला वीएल 2- प्राची यादव पावरलिफ्टिंग अगस्त 27 पुरुष- 65 किग्रा कैटेगरी- जयदीप देसवाल महिला- 50 किग्रा- सकीना खातून स्विमिंग अगस्त 27 200 व्यक्तिगत मिडले एसएम 7 - सुयश जाधव सितंबर 3 50 मीटर बटरफ्लाई एस 7- सुयश जाधव, निरंजन मुकुंदन टेबल टेनिस अगस्त 25 व्यक्तिगत सी 3- सोनलबेन मुधभाई पटेल व्यक्तिगत सी 4- भाविना हसमुखभाई पटेल ताइक्वांडो सिंतबर 2 महिला के 44 - 49 किग्रा- अरुणा तंवर निशानेबाजी अगस्त 30 पुरुष आर 1- 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच 1- स्वरूप महावीर उन्हालकर, दीपक सैनी महिला आर 2- 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1- अवनी लेखारा अगस्त 31 पुरुष पी 1- 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच 1- मनीष नरवाल, दीपेंदर सिंह, सिंहराज महिला पी 2- 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच 1- रुबिना फ्रांसिस सितंबर 4 मिक्स्ड राउंड 3- 10 मीटर एयर राइफल प्रोन एसएच 1- दीपक सैनी, सिद्धार्थ बाबू और अवनी लेखारा सितंबर 2 मिक्स्ड पी 3- 25 मीटर पिस्टल एसएच 1- आकाश और राहूल जाखड़ सितंबर 3 पुरुष आर 7- 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन एसएच 1- दीपक सैनी महिला राउंड 8- 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन एसएच 1- अवनी लेखारा सितंबर 4 मिक्स्ड पी 4- 50 मीटर पिस्टल एसएच 1- आकाश, मनीष नरवाल और सिंहराज सितंबर 5 मिक्स्ड राउंड 6- 50 मीटर राइफल प्रोन एसएच 1- दीपक सैनी, अवनि लेखारा और सिद्धार्थ बाबू एथलेटिक्स अगस्त 28 पुरुष जेवलिेन थ्रो एफ 57- रंजीत भाटी अगस्त 29 पुरुष डिस्कस थ्रो एफ 52- विनोद कुमार पुरुष हाई जंप टी 47- निशाद कुमार, राम पाल अगस्त 30 पुरुष डिस्कस थ्रो एफ 56- योगेश कथुनिया पुरुष जेवलिन थ्रो एफ 46- सुंदर सिंह गुर्जर, अजीत सिंह, देवेंद्र झाझरिया पुरुष जेवलिन थ्रो एफ 64- सुमित अंटिल, संदीप चौधरी अगस्त 31 पुरुष हाई जंप - शरद कुमार, मारियप्पन थंगावेलू, वरुण सिंह भाटी महिला 100 मीटर टी 13- सिमरन महिला शॉटपुट एफ 34- भाग्यश्री माधवराव जाधव सिंतबर 1 पुरुष क्लब थ्रो एफ 51- धर्मबीर नैन, अमित कुमार सरोहा सितंबर 2 पुरुष शॉट पुट एफ 35- अरविंद मलिक सितंबर 3 पुरुष हाई जंप टी 64- प्रवीण कुमार पुरुष जेवलिं थ्रओ एफ 54- टेक चंद पुरुष शॉट पुट एफ 57- सोमन राणा महिला क्लब थ्रो एफ 51- एकता भ्यान, कशिश लाकड़ा सितंबर 4 पुरुष जेवलिन थ्रो एफ 41- नवदीप सिंह
एबीएन डेस्क। विश्व के पांचवें वरीयता प्राप्त जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने सिनसिनाटी ओपन 2021 पुरुष सिंगल्स का खिताबी मुकाबला जीत लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने दुनिया के सातवें वरीतया प्राप्त रूस के एंड्री रुबलेव को सीधे सेटों में 6-2, 6-3 से शिकस्त दी। फाइनल मुकाबले में जर्मन खिलाड़ी ज्वेरेव ने अपने बचपन के दोस्त रुबलेव को एक घंटे से भी कम समय में हराकर खिताब पर कब्जा किया। ज्वेरेव ने अपने टेनिस करियर में पहली बार सिनसिनाटी ओपन का खिताब जीता है। हाल ही टोक्यो ओलंपिक में खिताबी मुकाबला जीतने वाले 24 वर्षीय ज्वेरेव अब लगातार 11 मैच जीत चुके हैं। सिनसिनाटी में खिताबी जीत के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि उन्होंने इस बार अमेरिकी ओपन के लिए जबरदस्त तैयारी की है। बीते साल यूएस ओपन में उन्हें डोनिमिक थिएम के आगे फाइनल मैच में हार का सामना करना पड़ा था। अमेरिकी ओपन की शुरुआत एक हफ्ते बाद होगी। सिनसिनाटी ओपन फाइनल में दूसरे सेट में एक बार ज्वेरेव पिछड़ते नजर आए। ऐसे समय में रुबलेव ने दूसरे सेट में 5-3 की बढ़त बना ली थी। लेकिन ज्वेरेव ने शानदार वापसी करते हुए उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यह ज्वेरेव का कुल मिलाकर पांचवां मास्टर्स खिताब है वहीं इस साल उन्होंने दूसरी बार मास्टर्स खिताब जीता है। एश्ले बार्टी के नाम रहा महिला सिंगल्स का खिताब : विश्व की नंबर एक टेनिस खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया की एश्ले बार्टी ने सिनसिनाटी ओपन में महिला सिंगल्स का खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने स्विटजरलैंड की जिल टिचमैन को सीधे सेटों में 6-3, 6-1 से शिकस्त दी। इस साल विंबलडन का खिताब जीतने वाली बार्टी ने इस मुकाबले में शुरु से ही अपने प्रतिद्वंदी पर पकड़ बना ली। इस साल बार्टी की यह पांचवीं खिताबी जीत है। फाइनल मुकाबला जीतने के बाद बार्टी ने कहा, यह मेरे लिेए बहुत ही बेहतरीन सप्ताह रहा है और प्रत्येक मैच के बाद प्रदर्शन बेहतर हुआ है, आज मैं खुद पर भरोसा करने और आत्मविश्वास के साथ खेलने में सक्षम थी जो एक बड़े फाइनल में महत्वपूर्ण था, मैं यहां सिनसिनाटी की विषम परिस्थितियों में मैच जीत न्यूयॉर्क जाने के लिए उत्साहित हूं।
एबीएन डेस्क। विराट कोहली की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड को 151 रनों से हरा दिया। इस जीत के बाद भारतीय टीम ने 5 टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। मैच में एक वक्त ऐसा जब इंग्लैंड जीत की तरफ बढ़ रहा था। लेकिन ऐसे में टीम इंडिया ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए न सिर्फ वापसी की बल्कि इंग्लैंड को शिकस्त भी दी। क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स पर भारत 7 साल बाद टेस्ट मैच जीता है। आइए हम आपको बताते हैं कि मैच के वे कौन से टर्निंग प्वाइंट रहे जब भारत ने इंग्लैंड के जबड़े से जीत खींच ली। जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद शमी की साझेदारी : टेस्ट मैच के आखिरी दिन भारत संघर्ष कर रहा था। टीम इंडिया के सभी प्रमुख खिलाड़ी पवेलियन लौट चुके थे। ऐसे में नौंवें और दसवें नंबर पर बल्लेबाज करने आए मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह टीम इंडिया के खेवनहार बने। इन दोनों ने कमाल की बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड के हाथ से मैच छीनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शमी और बुमराह ने नौवें विकेट के लिए 89 रनों की साझेदारी की। मोहम्मद शमी ने नाबाद 56 और जसप्रीत बुमराह ने 34 रनों की नॉट आउट पारी खेली। जिसके चलते भारत 271 रनों के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में सफल रहा। इंग्लैंड को दो ओवर में गिरे दो विकेट : जीत के लिए 272 रनों के लक्ष्य को हासिल करने उतरी इंग्लैंड टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। इंग्लिश टीम का पहला विकेट 1 रन के स्कोर पर गिर गया। जसप्रीत बुमराह ने सलामी बल्लेबाज रोरी बर्न्स को आउट कर टीम इंडिया को पहली सफलता दिलाई। बर्न्स अपना खाता भी नहीं खोल पाए। इसके बाद इंग्लैंड की पारी का दूसरा ओवर मोहम्मद शमी फेंकने आए। उन्होंनें ओवर की चौथी गेंद पर डॉम सिब्ली को पवेलियन भेज दिया। इस तरह भारत ने शुरू से ही शिकंजा कस लिया। इंग्लैंड के टेस्ट इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब दोनों सलामी बल्लेबाज अपने घर में बगैर खाता खोले आउट हुए। मोहम्मद सिराज ने झटके दो गेंदों पर दो विकेट : यह मैच का वह वक्त था जब मोइऩ अली और जोस बटलर मैदान पर डटे थे। ऐसे में लग रहा था कि यह दोनों बल्लेबाज मैच को ड्रॉ करा देंगे। लेकिन 39वें ओवर में गेंदबाजी करने आई मोहम्मद सिराजा ने एक बार फिर मैच का रुख पलट दिया। इस दौरान सिराज ने 39वें ओवर की पहली गेंद पर मोइऩ अली को आउट किया। इसके बाद अगली ही गेंद पर सैम करन का विकेट झटकर कर भारत को मैच में वापस ला दिया। अहम रहा जो रूट का विकेट : दूसरी पारी में इंग्लैंड के कप्तान जो रूट का विकेट काफी अहम रहा। वह भारत की जीत के आड़े आ रहे थे। चायकाल के बाद इंग्लैंड के 6 विकेट सुरक्षित थे। ऐसे में जसप्रीत बुमराह ने जो रूट को आउट कर मैच भारत की झोली में डाल दिया। रूट दूसरी पारी में 33 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने पहली पारी में 180 रन नॉट आउट बनाए थे। बुमराह ने रॉबिंसन के दिया चकमा : अंतिम सत्र में एक बार फिर ऐसा लगा कि मैच ड्रॉ की तरफ बढ़ रहा है। अभी 11 ओवर शेष थे और इंग्लैंड के 3 विकेट आउट होना बाकी। जोस बटलर और ओली रॉबिंसन सेट हो चुके थे और वे मैच को ड्रॉ की ओर ले जा रहे थे। ऐसे में जसप्रीत बुमराह ने ओली रॉबिंसन को एक धीमीं गेंद पर चकमा देकर आउट कर दिया। इसके बाद मोहम्मद सिराज ने बटलर और एंडरसन को आउट कर भारत की जीत पर मुहर लगा दी।
एबीएन डेस्क। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद 2028 ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल करने के लिए बोली लगाएगा। क्रिकेट के विश्व निकाय ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की है। आईसीसी ने खेल की ओर से बोली का नेतृत्व करने के लिए एक कार्य समूह का गठन किया है जो लॉस एंजिलस 2028, ब्रिस्बेन 2032 और उससे आगे के लिए क्रिकेट को ओलंपिक परिवार का हिस्सा बनाने पर केंद्रित रहेगा। आईसीसी की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक अमेरिका में 30 मिलियन यानी तीन करोड़ क्रिकेट प्रशंसक रहते हैं, जिससे एलए 2028 क्रिकेट के लिए ओलंपिक प्रतियोगिता में वापसी करने के लिए आदर्श खेल बन गए हैं। उल्लेखनीय है कि क्रिकेट ने अब तक ओलंपिक में सिर्फ एक उपस्थिति दर्ज की है और वो भी पैरिस 1900 में, जब केवल दो टीमें ग्रेट ब्रिटेन और मेजबान फ्रांस एक दूसरे के साथ खेली थी। अगर 2028 में क्रिकेट को ओलंपिक में शामिल किया जाता है तो 128 साल की लंबी गैर मौजूदगी खत्म हो जाएगी। क्रिकेट हालांकि अगले साल बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल होगा, जो इस बात का एक आदर्श प्रदर्शन है कि क्रिकेट ओलंपिक में क्या ला सकता है, साथ ही यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण अवसर भी है। आईसीसी के प्रमुख ग्रेग बार्कले ने कहा कि ओलंपिक खेलों में क्रिकेट को शामिल करने से क्रिकेट और खुद ओलंपिक खेलों को फायदा होगा। उन्होंने एक बयान में कहा, सबसे पहले मैं आईसीसी की ओर से आईओसी (अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति), टोक्यो 2020 और जापान के लोगों को ऐसी कठिन परिस्थितियों में इस तरह के अविश्वसनीय खेलों का आयोजन करने के लिए बधाई देना चाहता हूं। यह देखना सच में शानदार था। हम क्रिकेट को भविष्य में होने वाले ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनता हुए देख पसंद करेंगे।
एबीएन डेस्क। छह बार बैलन डीओर का खिताब जीतने वाले अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी बार्सिलोना से अलग होने की बात स्वीकार चुके हैं। मेसी अपने पुराने फुटबॉल क्लब से अलग होने के बाद अब पीएसजी के साथ जुड़ने वाले हैं। वह इस संबंध में पेरिस पहुंच रहे हैं और जल्दी ही एक बड़ी डील साईन करने के साथ पीएसजी से जुड़ जाएंगे। उन्हें पीएसजी की तरफ से सालाना 257 करोड़ रुपये से ज्यादा मिलने की उम्मीद है, यह कॉन्ट्रैक्ट दो साल का होगा जिसे 2024 तक बढ़ाया जा सकता है। बार्सिलोना छोड़ने के बाद मेसी के पास दो और विकल्प थे लेकिन उन्होंने पीएसजी से जुड़ने का फैसला किया। बार्सिलोना और मेसी के बीच पैसों की लेनदेन बड़ा मुद्दा था, जिसकी वजह से दिग्गज फुटबॉलर ने अपने इस फुटबॉल क्लब से 21 साल पुराना साथ छोड़ने का फैसला किया। हालांकि मेसी अगले पांच साल तक और बार्सिलोना के साथ बने रहने के लिए तैयार थे, लेकिन क्लब ने आर्थिक समस्याओं का हवाला देकर उनसे नाता तोड़ लिया। 34 वर्षीय मेसी ने कहा कि वह बार्सिलोना के साथ रहना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किया, जिसमें 50 प्रतिशत तक तनख्वाह में कटौती का भी विकल्प था। लेकिन बार्सिलोना इसपर राजी नहीं हुआ।
नयी दिल्ली। भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया (65 किग्रा भार वर्ग) ने कजाकस्तान के पहलवान नियाजबेकोव दौलत को 8-0 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया है। इसी के साथ भारत की झोली में छठा पदक आ गया। इस पदक के साथ ही भारत ने लंदन ओलंपिक की बराबरी की। वहीं, अगर मैच की बात करें तो पहले दौर में बजरंग ने शानदार शुरुआत की और कजाकस्तानी पहलवान नियाजबेकोव पर 1-0 की बढ़त बनाई। बजरंग ने फिर एक अंक के बढ़त के साथ स्कोर को 2-0 कर कर दिया। बजरंग ने पहले दौर में 2-0 से आगे रहे। वही, दूसरे दौर में भी पूनिया ने शानदार शुरुआत और लगातार चार अंक हासिल किया। इसी के साथ बजरंग ने कजाकस्तानी पहलवान नियाजबेकोव पर 6-0 की बढ़त बना ली। फिर बजरंग ने दो अंक हासिल कर 8-0 की बढ़त बना ली और मैच के साथ साथ ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम कर लिया। बता दें कि बजरंग ने 65 किग्रा भार वर्ग में ईरान के मुर्तजा चेका घियासी को 2-1 से पटखनी देकर कर सेमीफाइनल में जगह पक्की की थी। इससे पहले बजरंग ने किर्गीस्तान के अनार्जार अकमातालिएव को हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की की थी।
नई दिल्ली। 7 अगस्त 2021, ये वो तारीख है जो हिंदुस्तान के खेल इतिहास में अमर हो गया है और इसकी वजह हैं जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा। जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर 140 करोड़ हिंदुस्तानियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। नीरज चोपड़ा भारत के पहले एथलीट हैं जिन्होंने एथेलेटिक्स में भारत को पहली बार मेडल दिलाने का कारनामा किया है। नीरज ने ओलंपिक मेडल जीतने का ट्रेलर क्वालिफिकेशन राउंड में ही कर दिया था। जब उन्होंने अपने पहली कोशिश में ही 86.65 मीटर दूर भाला फेंक नंबर 1 पोजिशन के साथ फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। फाइनल में नीरज चोपड़ा एक बार फिर कमाल कर गए और उन्होंने मेडल के साथ करोड़ों खेल प्रेमियों का दिल भी जीत लिया। हर एथलीट की तरह नीरज चोपड़ा को भी ओलंपिक मेडल जीतने के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। एक गरीब किसान परिवार का ये बेटा कैसे टोक्यो में मेडल जीतने के काबिल बना, आइए आपको बताते हैं नीरज चोपड़ा की प्रेरणादायी कहानी। नीरज चोपड़ा की सफलता की कहानी वजन घटाने से शुरू होती है। 10-11 साल की उम्र में नीरज चोपड़ा का वजन काफी ज्यादा था। पिता और चाचा ने नीरज का वजन घटाने के लिए उन्हें पानीपत के शिवाजी स्टेडियम भेजा, जहां उन्हें कई खेल खिलवाए गए। नीरज चोपड़ा का वजन काफी ज्यादा था इसलिए वो ना तो तेज दौड़ पाते थे, ना ही लंबी छलांग और ऊंची छलांग लगाने का उनके अंदर दम था। एक दिन नीरज ने अपने दोस्तों के साथ घूमते हुए स्टेडियम में कुछ सीनियर खिलाड़ियों को भाला फेंकते देखा। नीरज ने भी मजाक-मजाक में भाला उठा लिया और इसे पूरी ताकत के साथ थ्रो किया। नीरज का जेवलिन थ्रो देखकर सभी दंग रह गए। 11 साल की उम्र में ही नीरज चोपड़ा ने भाले को 25 मीटर से ज्यादा दूर फेंक दिया। उसी दिन सभी को समझ आ गया कि नीरज चोपड़ा इसी खेल के लिए बना है। खुद नीरज चोपड़ा इस खेल से इतनी मोहब्बत कर बैठे कि वो रोजाना 7-8 घंटे भाला फेंकने की प्रैक्टिस करने लगे। नीरज चोपड़ा ने भाला तो उठा लिया लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी समस्या थी गरीबी। नीरज चोपड़ा एक किसान परिवार से हैं जिसकी आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। नीरज चोपड़ा संयुक्त परिवार में रहते थे जिसमें कुल 17 सदस्य हैं। 17 सदस्यों का ये परिवार इतना गरीब था कि वो नीरज चोपड़ा को 7 हजार का भाला भी बमुश्किल दिला पाये। वैसे जेवलिन थ्रो के भाले की कीमत उस वक्त डेढ़ लाख रुपये थी। नीरज के हाथ में सस्ता भाला था लेकिन इसके बावजूद उनका हौसला बुलंद था। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंकने की प्रैक्टिस शुरू की और वो घंटों इसका अभ्यास करने लगे। नीरज चोपड़ा ने ऐसे भी दिन देखे जब उनके पास कोई कोच नहीं था लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। नीरज चोपड़ा बचपन से ही कभी हार ना मानने वाले शख्स थे। नीरज चोपड़ा ने यू ट्यूब पर वीडियो देख भाला फेंकने की ट्रेनिंग ली। वो रोज वीडियो देखते और उसे मैदान में दोहराने की कोशिश करते। देखते ही देखते नीरज चोपड़ा यमुनानगर में ट्रेनिंग करने लगे जहां उनके करियर को पंख लगने शुरू हुए। नीरज चोपड़ा ने साल 2013 में वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। यूक्रेन में हुई इस प्रतियोगिता में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। वो 19वें स्थान पर रहे और महज 66.75 मीटर दूर ही भाला फेंक सके। लेकिन 2 साल बाद वुहान में हुई एशियन चैंपियनशिप में नीरज ने 70.50 मीटर दूर भाला फेंक 9वां स्थान हासिल किया। साल 2016 में हुए साउथ एशियन गेम्स में नीरज चोपड़ा ने 82.23 मीटर दूर भाला फेंक गोल्ड मेडल हासिल किया। इसी साल नीरज चोपड़ा ने वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में 86.48 मीटर दूर भाला फेंक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। नीरज चोपड़ा गोल्ड जीते और लोग उनका नाम जानने लगे। 2017 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज चोपड़ा ने 86.47 मीटर दूर भाला फेंक देश के लिए गोल्ड मेडल जीता और 2018 में चोपड़ा ने एशियन गेम्स में 88.06 मीटर दूर भाला फेंक एक बार फिर गोल्ड जीता। ओलंपिक तक पहुंचने के लिए नीरज ने कई खतरनाक चोट और यहां तक कि कोविड-19 का सामना भी किया लेकिन इसके बावजूद इस एथलीट ने ओलंपिक में मेडल जीत देश का मान और सम्मान बढ़ाया।
टोक्यो। भारत के पहलवान रवि दहिया ने 57 किग्रा भार वर्ग में सिल्वर मेडल जीता है। हालांकि, वह गोल्ड मेडल नहीं जीत पाए और इतिहास रचने से चूक गए। फाइनल मुकाबले में रूसी पहलवान जवुर यूगेव ने उन्हें मात दी। कुश्ती के अखाड़े में रवि दहिया से गोल्ड मेडल की उम्मीद खत्म हो गई है। 57 किलोग्राम वेट कैटेगरी के फाइनल में रवि दो बार के वर्ल्ड चैंपियन रूस के जावुर युगुऐव से हार गए हैं। हालांकि, रवि सिल्वर मेडल लेकर ही भारत लौटेंगे। युगुऐव ने उन्हें तीन पॉइंट से मात दी है। टोक्यो ओलंपिक के पुरुष फ्रीस्टाइल 57 किग्रा भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में रूस ओलंपिक समिति (आरओसी) के जायूर उगयेव के हाथों 4-7 से हार का सामना कर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। रवि ने टोक्यो में शानदार शुरुआत करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। बेटे रवि दहिया ने टोक्यो में लट्ठ गाढ़कर न सिर्फ हरियाणा का बल्कि पूरे हिंदुस्तान का दिल जीत लिया है। रजत पदक जीतने पर उन्हें बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। आप सफलता की नई ऊंचाइयों को हासिल करें, यही कामना करता हूँ।उन्होंने सेमीफाइनल में पीछे चल रहे होने के बावजूद कजाखस्तान के नूरइस्लाम सनायेव को हराकर फाइनल में प्रवेश कर भारत के लिए पदक पक्का कर लिया था। फाइनल मुकाबले के पहले पीरियड में उगयेव ने दो अंक लिए। लेकिन रवि ने तुरंत वापसी की और दो अंक बटोर स्कोर बराबर किया। हालांकि, फिर उगयेव ने दो अंक लेकर 4-2 की बढ़त ली। इसके बाद दूसरे पीरियरड में भी उगयेव ने एक अंक लिए। उगयेव ने दो और अंक हासिल कर स्कोर 7-2 कर दिया। हालांकि, रवि ने एक बार फिर वापसी की और दो अंक बटोर फासला कम कर लिया। लेकिन उनकी यह कोशिश मुकाबला जीतने के लिए काफी नहीं रही और उन्हें इस हार के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। टोक्यो ओलंपिक 2020 में सिल्वर मेडल जीतने वाले पहलवान रवि दहिया को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा, रवि कुमार दहिया एक शानदार पहलवान हैं। उनकी लड़ाई की भावना और तप उत्कृष्ट है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में रजत पदक जीतने के लिए उन्हें बधाई। भारत को उनकी उपलब्धियों पर बहुत गर्व है।
एबीएन डेस्क। टोक्यो ओलंपिक का 13वां दिन जो कि भारतीय दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। रानी रामपाल की अगुवाई वाली भारतीय महिला हॉकी टीम का मुकाबला अर्जेंटीना से सेमीफाइनल में होगा। बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन 69 किग्रा भार वर्ग में सेमीफाइनल में तुर्की की बुसेनज़ सुरमेनेलीक से भिड़ेंगी। लवलीना भारत के लिए पहले ही पदक पक्का कर चुकी हैं। इसके अलावा भाला फेंक स्पर्धा में नीरज चोपड़ा ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने जेवेलिन थ्रो के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लिया है। उन्होंने पहले ही प्रयास में 86.65 मीटर दूर भाला फेंका। वह अपने ग्रुप में पहले स्थान पर रहे।वही, रेसलिंग में 57 किग्रा भार वर्ग में रवि कुमार दहिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने बुल्गारिया के जॉर्डी वैंगेलोव को 14-4 से पटखनी दी।जबकि 86 किग्रा भारवर्ग में दीपक पूनिया ने चीन के जुशेन लिन को 6-3 से हराकर सेमीफाइनल में दस्तक दी। जेवेलिन थ्रो के फाइनल में पहुंचे नीरज चोपड़ा : भारत के स्टार जेवेलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने अपने पहली प्रयास में शानदार थ्रो किया। उन्होंने 86.65 मीटर दूर भाला फेंका। इसके साथ वह फाइनल के लिए क्वालीफाई कर गए। फाइनल में सीधे प्रवेश करने के लिए 83.50 मीटर का थ्रो होना जरूरी है। नीरज अब 7 अगस्त को फाइनल मुकाबले में अपना दमखम दिखाएंगे। पुरुष भाला फेंक के क्वालीफिकेशन राउंड में नीरज चोपड़ा ग्रुप में पहले स्थान पर रहे। फाइनल की रेस से बाहर हुए शिवपाल : पुरुष जेवेलिन थ्रो स्पर्धा के ग्रुप बी में भारत के भाला फेंक एथलीट शिवपाल सिंह क्वालीफाई नहीं कर सके। इसके साथ ही वह फाइनल की रेस से बाहर हो गए। उन्होंने तीसरे प्रयास में 74.81 मीटर का थ्रो किया। जबकि उनका बेस्ट थ्रो पहले प्रयास में रहा था जब उन्होंने 76.40 मीटर दूर भाला फेंका। सेमीफाइनल में पहुंचे रवि कुमार : भारतीय पहलवान रवि कुमार पुरुषों के फ्री स्टाइल 57 किग्रा भार वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं। रवि ने क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के जॉर्डी वैंगेलोव को 14-4 से शिकस्त दी। उनकी इस जीत के साथ रेसलिंग में भारत को पदक जीतने की उम्मीद है। अंशु मलिक हारीं : भारतीय पहलवान अंशु मलिक को महिलाओं की फ्रीस्टाइल 57 किग्रा भार वर्ग स्पर्धा में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें बेलारूस की इरिना कुराचिकिना ने 8-2 से शिकस्त दी। दुनिया की नंबर तीन महिला पहलवान इरिना ने पहले तीन मिनट के बाद अंशु मलिक पर 4-0 की बढ़त बना ली। जिसके चलते भारतीय पहलवान उबर नहीं पाईं। दीपक पूनिया की सेमीफाइनल में एंट्री : टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवानों के लिए आज का दिन शानदार रहा है। पहले 57 किलो भार वर्ग में रवि कुमार ने सेमीफाइनल में जगह बनाई उसके बाद 86 किग्रा भार वर्ग में दीपक पूनिया ने चीन के जुशेन लिन को 6-3 से पराजित करते हुए सेमीफाइनल में एंट्री की।
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