साहित्य संगम संस्थान ने किया सावन की फुहार का शुभारंभ
हर रविवार गूंजेंगे शिव और सावन के गीत
टीम एबीएन, रांची। साहित्य संगम संस्थान झारखंड इकाई द्वारा पवित्र श्रावण मास के अवसर पर सावन की फुहार कार्यक्रम का शुभारंभ आज संस्थान के मंच से संगीतमय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के सचिव पूनम वर्मा अनूप ने मां सरस्वती की वंदना एवं स्वागत उद्बोधन से किया। इसके पश्चात काव्य प्रस्तुतियों का क्रम प्रारंभ हुआ।
झारखंड इकाई की पंच परमेश्वरीकरुणा सिंह कल्पना ने प्रस्तुत किया- मुझको जिसने भी पूजा है, उसका जीवन धन्य हुआ। राजस्थान इकाई की सचिव अर्पणा सिंह अर्पी ने शिव शम्भू चले कैलाश बूंदें पड़ने लगी सुनाया। पटना इकाई की अध्यक्ष सुजाता प्रिय समृद्धि ने भोला के चरणों में ध्यान लगाओ भजन गाया।
कल्याणी झा कनक ने रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे, बिजली चमक दिखाती है सुंदर गायन प्रस्तुत किया। खुशबू बरनवाल ने शिव जी आये घर-घर मंदिर सावन जल अब बरसाओ सुनाया। मधुमिता साहा ने कैसे कहूं प्रिया से दिल की बतिया गाया। लक्ष्मी कुमारी ने भी अपनी रचना प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र ने अपने उद्बोधन में सच्चे आनंद के महत्व को बताया। उनके सुभाषित वचनों से सभागार मंत्रमुग्ध हो गया।
इस दौरान संस्थान से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों रमेश हंसमुख, संजय कुमार सिंह, महेश प्रसाद, प्रमोद पाण्डेय, कृष्ण प्रेमी, रूपा माला, नंदिता माजी शर्मा, डॉ राजेश कुमार शर्मा पुरोहित ने अपनी प्रतिक्रिया दी और विशेष रूप से उपस्थित रहे।
डॉ नवीन कुमार भट्ट नीर ने बताया कि पवित्र श्रावण मास में झारखंड इकाई में यह कार्यक्रम विधिवत संपन्न हुआ। यह आयोजन इकाई के मार्गदर्शक डॉ प्रशांत करण, निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी और सचिव/कार्यक्रम संयोजिका पूनम वर्मा अनूप के कुशल नेतृत्व में हुआ।
श्रावण मास पर काव्यमंच पर प्रतिदिन शिवार्चन संध्या एकल काव्यपाठ का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देश के विभिन्न भागों से शिव प्रेमी प्रतिभागी हिस्सा लेकर श्रावण मास को मधुर भाव से शिवमय कर रहे हैं। शिवार्चन संध्या का संयोजन सरोज शुक्ला श्री द्वारा किया जा रहा है।
सचिव पूनम वर्मा अनूप ने बताया कि यह साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन सावन मास के प्रत्येक रविवार को आयोजित होगा। मौके पर संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, विभिन्न इकाइयों के सदस्य, वरिष्ठ साहित्यकारों, विद्वानों तथा साहित्य-प्रेमियों की आभासी उपस्थिति उल्लेखनीय रहेगी। कार्यक्रम का समापन 23 अगस्त 2026 को संस्थान के संरक्षक प्रशांत करण के समापन भाषण से होगा।