कतर की एलएनजी सप्लाई में 96% की गिरावट

 

कतर की एलएनजी सप्लाई पर युद्ध का कहर, निर्यात 96% गिरा, अरबों डॉलर का नुकसान 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका-ईरान युद्ध के छह महीने पूरे होने के बीच कतर की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। दुनिया के प्रमुख एलएनजी निर्यातकों में शामिल कतर का लिक्विफाइड नेचुरल गैस निर्यात 96 फीसदी तक गिर गया है। आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान कतर को गैस बिक्री से करीब 24 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जो 2025 के आधार पर देश की लगभग पांच महीने की आय के बराबर है। 

509 से घटकर सिर्फ 18 एलएनजी खेप 

डेटा इंटेलिजेंस फर्म आईसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध के पिछले छह महीनों में कतर केवल 18 एलएनजी खेप निर्यात कर पाया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 509 था। युद्ध से पहले कतर दुनिया की रोजाना एलएनजी मांग का करीब पांचवां हिस्सा पूरा करता था। दो कतर-संबंधित एलएनजी टैंकरों पर हमले भी हुए हैं। 

कतर की परेशानी की बड़ी वजह स्ट्रेट आॅफ होर्मुज में समुद्री आवाजाही में बाधा है। एलएनजी निर्यात के लिए इस मार्ग पर भारी निर्भरता के कारण क्षेत्रीय संघर्ष ने कतर की ऊर्जा आय को दूसरे खाड़ी देशों की तुलना में ज्यादा प्रभावित किया है। 

गैस उत्पादन ढांचे पर भी असर 

संघर्ष के दौरान कतर के रास लाफान एलएनजी परिसर को भी नुकसान पहुंचा। इसके चलते देश की एलएनजी निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है। कतर ने आपूर्ति बनाये रखने के लिए अमेरिका से एलएनजी की अतिरिक्त खेपें खरीदने का रास्ता अपनाया है। जुलाई में रिपोर्ट सामने आयी थी कि कतर एजेंसी ने एशियाई ग्राहकों को आपूर्ति बनाये रखने के लिए अमेरिका से 33 स्पॉट एलएनजी कार्गो खरीदे। 

यूरोप पर भी बढ़ा गैस संकट 

कतर की सप्लाई में भारी गिरावट की भरपाई के लिए अमेरिकी एलएनजी निर्यात बढ़ा है लेकिन वैश्विक बाजार पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यूरोप में गैस भंडारण इस समय के हिसाब से ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गया है। अगर आने वाली सर्दियों में मौसम ज्यादा ठंडा रहा, तो यूरोपीय बाजार में गैस की कीमतों में तेज उछाल का जोखिम बढ़ सकता है। 

कतर सरकार ने घटाया खर्च 

एलएनजी कारोबार में रुकावट का असर कतर के सरकारी वित्त पर भी पड़ा है। सरकार ने कई विभागों के बजट में 30 फीसदी तक कटौती की है, जबकि विदेशों को दी जाने वाली सहायता में करीब 85 फीसदी की कमी की गयी है। 

आईएमएफ ने 2026 में कतर की अर्थव्यवस्था में 8.6 फीसदी संकुचन का अनुमान लगाया है, जो खाड़ी सहयोग परिषद के देशों में सबसे बड़ी गिरावट होगी। हालांकि, कतर के पास संकट से निपटने के लिए बड़ा वित्तीय कुशन मौजूद है। देश के करीब 500 अरब डॉलर के कतर इन्वेस्टमेंट आॅथोरिटी फंड समेत वित्तीय भंडार सरकार को लंबे संकट से निपटने में मदद कर सकते हैं। 

भारत के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है। भारत के प्रमुख एलएनजी आयातक पेट्रोनेट एलएनजी ने सितंबर में कतर से मिलने वाली गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता जतायी है और वैकल्पिक स्रोतों से एलएनजी जुटाने की कोशिश की जा रही है।

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