यादों के झरोखे से, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने साझा की यादेंएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। झारखंड के लोहरदगा जिले का देश-विदेश में अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ एक खास रिश्ता भी रहा है, जो जुड़ता है सुरों की दुनिया की महान गायिका आशा भोसले से। प्रसिद्ध साहू परिवार के साथ उनके आत्मीय संबंधों के कारण लोहरदगा के लोगों के दिलों में उनके प्रति विशेष लगाव रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने उनसे जुड़ी कई यादें साझा करते हुए बताया कि आशा भोसले न सिर्फ अपनी गायकी बल्कि अपने जीवंत और हंसमुख स्वभाव के कारण भी लोगों के दिलों में बस जाती थीं। धीरज प्रसाद साहू के अनुसार, वर्ष 1991-92 के दौरान रोटरी क्लब द्वारा आयोजित आशा भोसले नाइट कार्यक्रम लोहरदगा और रांची के सांस्कृतिक इतिहास का एक यादगार अध्याय रहा। इस कार्यक्रम के सिलसिले में आशा भोसले अपनी बेटी के साथ रांची पहुंची थीं और तीन दिनों तक साहू परिवार के निवास सुशीला निकेतन में ठहरी थीं। उस दौरान उनके सरल और मिलनसार स्वभाव ने सभी का दिल जीत लिया था। घर के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर किसी के साथ वे सहजता से घुल-मिल जाती थीं और हंसी-मजाक में समय बिताती थीं। बताया जाता है कि उस समय रोटरी क्लब के बिहार प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू के सौजन्य से यह भव्य आयोजन संभव हो पाया था। रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के कई नामचीन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी थी। इनमें सुदेश भोसले,कुमार शानू और संगीता बिजलानी जैसे चर्चित नाम शामिल थे। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में दर्शक उपस्थित रहे और पूरी रात संगीत की मधुर धुनों में झूमते रहे। धीरज प्रसाद साहू ने बताया कि आशा भोसले का व्यक्तित्व उनकी कला से कहीं अधिक प्रभावशाली था। वे जहां भी जाती थीं, अपने हंसमुख और जिंदादिल स्वभाव से माहौल को खुशनुमा बना देती थीं। बच्चों के साथ उनका खास लगाव था और वे उनसे मजाकिया अंदाज में बातें कर उन्हें हंसाती रहती थीं। यही कारण था कि लोहरदगा के लोग उन्हें सिर्फ एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक स्नेही और अपनत्व से भरी इंसान के रूप में भी याद करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम के बाद भी कई बार मुंबई में उनकी मुलाकात आशा भोसले से हुई। हर मुलाकात में उनका वही आत्मीय व्यवहार देखने को मिला, जिसने पहली बार में ही सभी को अपना बना लिया था। वे हमेशा पुरानी यादों को ताजा करते हुए हंसी-ठिठोली करती थीं और अपने अनुभव साझा करती थीं। लोहरदगा के लोगों के लिए यह गर्व की बात रही है कि इतनी बड़ी कलाकार का उनके शहर और परिवार से इतना गहरा जुड़ाव रहा। आज भी जब उस दौर की बातें होती हैं, तो आशा भोसले की मधुर आवाज के साथ-साथ उनकी मुस्कान और सादगी भरा व्यक्तित्व लोगों के जेहन में ताजा हो उठता है। उनके साथ बिताए गए वे पल आज भी लोहरदगावासियों के लिए अनमोल धरोहर बने हुए हैं।
श्री राधा- कृष्ण प्रणामी मंदिर में अन्नपूर्णा महाप्रसाद का हुआ आयोजनटीम एबीएन, रांची। डा• संत शिरोमणी स्वामी सदानंद महाराज जी के सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग राँची मे 261 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री राधा रानी जी का दिव्य आकर्षक आभूषणों से अलंकृत कर अलौकिक श्रृंगार किया गया। तत्पश्चात महाप्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे द्वारा लगाई गई, महाप्रसाद मे मसालेदार वेजिटेबल खिचड़ी, आलू चिप्स, जलजीरा का जूस बोतल बंद का वितरण किया गया। मंदिर परिसर में उपस्थित 2 हजार से भी अधिक श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।तत्पश्चात भजन- संध्या में ट्रस्ट के भजन गायकों ने अपने मनमोहक सुमधुर भजनों से श्रोताओं को खूब झुमाया। श्री राधा कृष्ण के जयकारा से पूरा वातावरण कृष्णमय एवं भक्तिमय बन गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती की गई। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि श्री राधा कृष्ण मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा तथा 4 हजार से अधिक श्रद्धालुओं में दर्शन किये। उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रत्येक दिन दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक वेजिटेबल खिचड़ी महाप्रसाद का वितरण किया जाता है जिसमें 400 से भी अधिक श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस अवसर पर- डूंगरमल अग्रवाल, पूरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, पवन पोद्दार, ज्ञान चंद्र शर्मा सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। उक्त जानकारी श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने दी ।
लोहरदगा नगर परिषद द्वारा चूँगी वसूली में हो रहे रंगदारी के विरुद्ध व्यापारी बन्धु से अपीलएबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। सबसे पहले आप सभी को बता दें, कि सामने कोई भी हो चैंबर के लिये व्यापारीहित सबसे ऊपर है अतः व्यापारियों के साथ किसी भी प्रकार के होने वाला शोषण अथवा गलत व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विगत दो तीन दिनों से बहुत ज्यादा शिकायत है कि नगर परिषद के ठिकेदारों द्वारा नगर परिषद के उच्च पदाधिकारियों के मिलीभगत से अवैध एकरारनामा के माध्यम से रंगदारी पूर्वक चूँगी वसूली की जा रही है। विरोध करने पर ठीकेदार द्वारा नगर परिषद के साथ हुए एग्रीमेंट का हवाला दिया जा रहा है।एक ही कॉमर्शियल गाड़ी से एक रास्ता में जितना बार आना जाना हो रहा है, उतना ट्रिप का चूँगी वसूली ज़बर्दशती किया जा रहा है एवं इस कारण वाहनों का आवागमन भी बाधित हो रही है। अतः आपस मे आरोप प्रत्यारोप ना लगाते हुए कहना है कि हम व्यापारी हैं और चैंबर ऑफ कॉमर्स का काम व्यापरिहित मे आवाज़ उठाना और व्यापार हेतु व्यापारियों को स्वच्छ और सुरक्षित माहौल प्रदान करना है।इसलिये आप सभी से आह्वान है कि यदि आपको लगता है कि यह गलत है तो आप इस संदर्भ में शिकायत समेत चैंबर अध्यक्ष को लिखित आवेदन दें ताकि नगर परिषद के ऊपर इस अवैध वसूली को लेकर दबाव बनाया जा सके तथा न्यायसंगत निर्णय तक पहुंचने का प्रयास हो। चाहे इसके लिये व्यापरिहित में अनिश्चितकालीन लोहरदगा बंद ही क्यों न करना पड़े। उक्त जानकारी लोहरदगा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष रीतेश कुमार ने दी।
आशा भोंसले का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति : संजय सर्राफटीम एबीएन, रांची । भारतीय संगीत जगत की महान और सदाबहार स्वर कोकिला आशा भोंसले के आकस्मिक निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दुःखद समाचार पर झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री एवं हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। संजय सर्राफ ने अपने शोक संदेश में कहा कि आशा भोंसले जी केवल एक महान गायिका ही नहीं थीं, बल्कि वे भारतीय संगीत की आत्मा थीं। उनकी मधुर, सजीव और भावपूर्ण आवाज़ ने पिछले छह दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। उन्होंने हर पीढ़ी को अपनी अनूठी शैली, विविधता और ऊर्जा से जोड़े रखा। चाहे वह शास्त्रीय संगीत हो, फिल्मी गीत, ग़ज़ल, भजन या पॉप-हर विधा में उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी।उनके गाए अनगिनत गीत आज भी लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। उनकी आवाज़ में भावनाओं की गहराई और अभिव्यक्ति की अद्भुत क्षमता थी, जिसने उन्हें विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। आशा जी का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो सकेगी। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और वे अपने गीतों के माध्यम से हमेशा हमारे बीच जीवित रहेंगी। इस दुःख की घड़ी में समस्त संगीत प्रेमी और समाज उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कर रहे हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
क्रांतिकारी पत्रकार अमित कुमार बने IHRF के झारखंड प्रदेश सचिवधनबाद जिले के क्रांतिकारी पत्रकार के नाम से चर्चित अमित कुमार बने इंटरनेइनल ह्यूमन राइट फाउंडेशन IHRF के झारखंड प्रदेश सचिवएबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। अमित कुमार ने झारखंड राज्य का प्रदेश सचिव बनाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष पंकज यादव, राष्ट्रीय शीर्ष नेतृत्व एवं सभी वरिष्ठ पदाधिकारी का आभार जताया है।लंबा सफर न्यूजपेपर के प्रभारी ओम् शर्मा, भारतीय सर्वजन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप पांडे, झामुमो नेता प्रवीण सिंह, संजीत सिंह, भाजपा सांसद ढुलू महतो समर्थक वीरेंद्र पासवान, जीवन वेल्फेयर फाउंडेशन टीम, झारखंड वेल्फेयर सोसाइटी, इंडियन मीडिया काउंसिल, विश्व सनातन मंच, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, राष्ट्र हिंद एकता दल, एसपीएस अकादमी ने उन्हें बधाई दी।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : रामाधार पाठकदोषियों को बचाने की कोशिश हुई तो जनआक्रोश फूटेगायुवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बेनकाब करोटीम एबीएन, रांची। रांची में उत्पाद परीक्षा के पेपर लीक मामले पर युवा नेता सह समाजसेवी रामाधार पाठक ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह युवाओं के सपनों और मेहनत के साथ खुला अन्याय है।उन्होंने कहा कि आज का युवा दिन-रात मेहनत कर अपने भविष्य को संवारने में लगा है, लेकिन इस तरह के पेपर लीक कांड उनकी मेहनत पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है।रामाधार पाठक ने सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा इस कांड में शामिल हर छोटे-बड़े दोषी को बेनकाब कर सख्त से सख्त सजा दी जाए।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में किसी भी तरह की लीपापोती की गई, तो युवा वर्ग सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा और एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा।अंत में उन्होंने दो टूक कहा— युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, अब सच्चाई सामने आकर रहेगी।
डीसी-स्कूल प्रिंसिपल मीटिंग: 13 अप्रैल 2026टीम एबीएन, रांची। नये शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही रांची जिला प्रशासन ने सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह बैठक दिनांक 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट हॉल, मोरहाबादी में अपराह्न 01:00 बजे से प्रारंभ होगी। सभी निजी विद्यालयों के प्राचार्यों का इस बैठक में भाग लेना आवश्यक है।बैठक के मुख्य बिंदुजिलास्तर पर गठित शुल्क समिति के गठन, कार्यप्रणाली तथा निजी विद्यालयों द्वारा शुल्क निर्धारण एवं वृद्धि के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करना।निजी विद्यालयों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों के शीघ्र निवारण हेतु गठित कोषांग (Grievance Redressal Cell) की जानकारी देना तथा इसकी प्रभावी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना।Right to Education (RTE) Act 2009 के अंतर्गत कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया में विद्यालयों की भूमिका, जिम्मेदारियां तथा अनुपालन सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा करना।
टीम एबीएन, खजूरिया मैदान, मधुकम (रांची)। रांची के पिस्का स्थित खजूरिया मैदान में आज एक भव्य धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, नागरिक, महिलाएं, युवा एवं बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में चिन्मय मिशन के पूज्य स्वामी परिपूर्णानंद जी तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में राकेश लाल (सदस्य, क्षेत्र सामाजिक सद्भाव) पवन मंत्री (संघचालक, रांची महानगर) उपस्थित रहे। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में स्वामी परिपूर्णानंद जी ने धर्म के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म का स्थान जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है, किंतु केवल नारे लगाने से धर्म की रक्षा संभव नहीं है। धर्म का वास्तविक आधार आचरण है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्म वही है जो मनुष्य के जीवन में अभ्युदय (लौकिक उन्नति) और श्रेय (आध्यात्मिक कल्याण) दोनों प्रदान करे। स्वामी जी ने उपस्थित जनसमूह से आत्ममंथन करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को यह विचार करना चाहिए कि उसके जीवन और व्यवहार में कितना धर्म समाहित है। उन्होंने परिवार को संस्कारों की प्रथम पाठशाला बताते हुए कहा कि बच्चे अपने बड़ों के आचरण से ही धर्म सीखते हैं। यदि आचरण में धर्म नहीं होगा, तो धर्म का संरक्षण संभव नहीं है। उन्होंने जीवन मूल्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज ने अपने मूल्यों को कमजोर कर लिया है, जिसके कारण संवेदनहीनता और आत्मकेंद्रितता बढ़ी है। त्याग की भावना को समाज की एकता का आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि बिना त्याग के परिवार और समाज का अस्तित्व संभव नहीं है। स्वामी परिपूर्णानंद जी ने वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए विवाह, संतानोत्पत्ति, शिक्षा और संस्कारों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल जनसंख्या घटने की चिंता करने से समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा। उन्होंने बच्चों को धार्मिक ज्ञान देने, गीता के श्लोकों का अभ्यास करने तथा परंपराओं को समझकर अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के दूसरे वक्ता राकेश लाल ने अपने संबोधन में एक प्रेरक कथा के माध्यम से निडरता और आत्मबल का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आंतरिक साहस और एकता में निहित है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज का इतिहास वीरता और आत्मसम्मान से भरा रहा है। उन्होंने सामूहिक शक्ति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केवल व्यक्तिगत पूजा से नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से धार्मिक गतिविधियों जैसे मंदिरों में सामूहिक आरती और हनुमान चालीसा के आयोजन से समाज में एकजुटता और शक्ति का संचार होता है। उन्होंने प्रत्येक मोहल्ले में साप्ताहिक सामूहिक कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया। राकेश लाल ने सामाजिक एकता पर बल देते हुए कहा कि समाज को जाति, भाषा, क्षेत्र आदि के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा। उन्होंने नागरिक कर्तव्यों के पालन, पर्यावरण संरक्षण (जैसे पौधारोपण, प्लास्टिक का कम उपयोग) तथा सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान भजन, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, तथा भारत माता की आरती का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और ऊर्जावान बन गया। अंत में सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में धर्म, संस्कार, त्याग, एकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनाते हुए एक सशक्त एवं जागरूक समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे। इस कार्यक्रम में सकल हिंदू समाज के सभी वर्गों से 500 से ज्यादा की संख्या में भागीदारी रही इसमें विशेष कर मातृशक्ति का योगदान रहा उक्त जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची के महानगर सह प्रचार प्रमुख शिवेंदु सागर ने दी।
श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिवस एबीएन सोशल डेस्क। सेठ रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन न्यास मंडल एवं रघुनंदन टिबरेवाल, ऋषि टिबरेवाल परिवार के संयुक्त तत्वावधान में पोद्दार धर्मशाला, चुटिया में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे पंडाल में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला, जहां पूज्या माँ चैतन्य मीरा जी के श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का रसपान कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। छठे दिन की कथा का प्रमुख आकर्षण गोपी संवाद, महारास और रुक्मणी मंगल (विवाह उत्सव) रहा। कथा की शुरुआत करते हुए मां चैतन्य मीरा जी ने गोपी संवाद और महारास के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थ को अत्यंत सरल एवं मार्मिक शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि गोपियों का प्रेम सांसारिक वासना से परे, पूर्ण समर्पण और निष्काम भक्ति का प्रतीक था। महारास को उन्होंने जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य रूप बताया। जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर पूर्ण रूप से ईश्वर में लीन हो जाता है, तभी उसे उस अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है जिसे रास कहा जाता है। कथा के दौरान सबसे भावुक और आनंदमयी प्रसंग रुक्मणी मंगल रहा।मां मीरा जी ने बताया कि किस प्रकार देवी रुक्मणी ने भगवान श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर अपने हृदय की भावनाओं को व्यक्त किया और उन्हें अपना जीवनसाथी बनाने की प्रार्थना की। भगवान श्रीकृष्ण ने उनके प्रेम और विश्वास को स्वीकार करते हुए उन्हें अपनी पटरानी बनाया। जैसे ही कथा में विवाह का प्रसंग आया, पूरा पंडाल उत्सव में परिवर्तित हो गया। आकर्षक झांकियों के साथ रुक्मणी विवाह संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा की और मंगल गीत गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु नृत्य करते नजर आये, जिससे पूरा माहौल गोकुलधाम जैसा प्रतीत होने लगा। मां चैतन्य मीरा जी ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्ति मार्ग में तर्क से अधिक भाव और विश्वास का महत्व होता है। सच्चे मन से की गई भक्ति ही ईश्वर तक पहुंचने का सरल माध्यम हैकार्यक्रम के दौरान उपस्थित विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मान किया गया। मुख्य रूप से वार्ड 14 की पार्षद अंजू देवी एवं उनके भाई उदय कुमार, श्रीकृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ, सुनील पोद्दार, मनीष सोनी सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मौके पर न्यास मंडल के फतेहचंद अग्रवाल, ओम प्रकाश मोदी, पुलकित अग्रवाल, कृष्ण शर्मा, दीपक अग्रवाल, भरत अग्रवाल, पवन अग्रवाल, श्यामलाल साबू, सांवरमल अग्रवाल, कैलाश केसरी, अनमोल सिंघानिया, पंकज सिंघानिया, कमल कुमार अग्रवाल, विनोद बगवानी सहित कई सदस्य मौजूद रहे। आयोजन की संयोजिका रेखा अग्रवाल की सक्रिय भूमिका भी सराहनीय रही। आयोजकों ने जानकारी दी कि कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र और भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन के प्रसंग के साथ कथा को विश्राम दिया जायेगा। अंतिम दिवस की कथा प्रात: 9:30 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक आयोजित होगी। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस दिव्य कथा का लाभ उठाने की अपील की है।
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