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यूपी में बनेगा छह धन्वंतरि मेगा हेल्थ पार्क
Published / 2022-03-17 13:50:39
यूपी में बनेगा छह धन्वंतरि मेगा हेल्थ पार्क

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रदेश में छह धन्वंतरि मेगा हेल्थ पार्क बनाए जाएंगे। इसमें स्वास्थ्य व सर्जिकल उपकरणों और दवाओं के उत्पादन का आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इस योजना को लेकर स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर जिले में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की बात कही है। इसी के तहत करीब 30 हजार करोड़ के निवेश के साथ छह धन्वंतरि मेगा हेल्थ पार्क स्थापित किए जाने हैं। इस पार्क के क्रियांवयन को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हलचल शुरू हो गई है। इस पार्क के जरिए प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र का आधारभूत ढांचा सुधारने की तैयारी है। इसी तरह प्रदेश में 10 हजार करोड़ की लागत के साथ महर्षि सुश्रुत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन की भी तैयारी चल रही है। अत्याधुनिक लाइफ सपोर्ट सुविधा से लैस एम्बुलेंस की संख्या को दोगुन करने, हर जिले में डायलिसिस केंद्र और वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त प्रदेश बनाने, जन औषधि केंद्र के नेटवर्क का विस्तार करने की भी कार्ययोजना है। प्रदेश में सभी मेडिकल कॉलेजों को शुरू कर एमबीबीएस कीसीटों को बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है।

भारत का प्रमुख लक्ष्य आत्मनिर्भर और आधुनिक बनना : मोदी
Published / 2022-03-17 13:50:14
भारत का प्रमुख लक्ष्य आत्मनिर्भर और आधुनिक बनना : मोदी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का उल्लेख तो नहीं किया लेकिन कहा कि आज दुनिया की नजर भारत पर टिकी है और कोविड महामारी के बाद जो नयी वैश्विक व्यवस्था उभर रही है, उसमें भारत को अपनी भूमिका बढ़ानी है और साथ ही तेज गति से अपना विकास भी सुनिश्चित करना है। उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) के 96वें सामान्य बुनियादी पाठ्यक्रम के समापन समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि 21वीं सदी के भारत का सबसे बड़ा लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत का है और किसी भी सूरत में इस अवसर को खोना नहीं है। उन्होंने कहा, 21वीं सदी के जिस मुकाम पर आज भारत है, पूरी दुनिया की नजरें हम पर टिकी हुई हैं। कोविड ने जो परिस्थितियां पैदा की हैं, उसमें एक नया वर्ल्ड आॅर्डर (वैश्विक व्यवस्था) उभर रहा है। इस नए वर्ल्ड आॅर्डर में भारत को अपनी भूमिका बढ़ानी है और तेज गति से अपना विकास भी करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षुओं को एक चीज का हमेशा ध्यान रखना है कि 21वीं सदी के भारत का सबसे बड़ा लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत और ह्यह्यआधुनिक भारत का है। उन्होंने कहा, इस समय को हमें खोना नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा और कर्तव्य भाव का महत्व प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण का अभिन्न हिस्सा रहा है और उन्हें इस भाव को अपनी सेवा के दौरान भी बनाए रखना होगा तभी वह समाज व देश के लिए एक सकारात्मक परिवर्तन का हिस्सा बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने में 25 साल बचे हैं और इसमें देश कितना विकास करेगा, उसमें इन प्रशिक्षुओं की बहुत बड़ी भूमिका होगी। मोदी ने कहा, ह्यह्यबीते 75 वर्षों में हमने जिस गति से प्रगति की है, अब उससे कई गुना तेजी से आगे बढ़ने का समय है। इसलिए आपको फाइलों और फील्ड के कामकाज के अंतर को समझना है। फाइलों में आपको असली चीज नहीं मिलेगी, फील्ड के लिए आपको उससे जुड़ा रहना ही पड़ेगा। फाइलों में जो आंकड़े होते हैं, वह सिर्फ नंबर नहीं होते हैं। हर एक आंकड़ा... हर एक नंबर एक जीवन होता है और हमें इसके महत्व को समझना होगा। उन्होंने कहा जीवन में हर एक व्यक्ति के कुछ सपने होते हैं और उनकी कुछ आकांक्षाएं होती हैं। आपको उनकी कठिनाइयों और चुनौतियों के लिए काम करना है। ज्ञात हो कि 96वां बुनियादी पाठ्यक्रम एलबीएसएनएए का पहला सामान्य बुनियादी पाठ्यक्रम है, जिसमें नई शिक्षा और पाठ्यक्रम प्रारूप मिशन कर्मयोगी के सिद्धांतों पर आधारित है। इस बैच में 16 सेवाओं के 488 अधिकारी प्रशिक्षु और 3 रॉयल भूटान सर्विसेज (प्रशासनिक, पुलिस और वन) के प्रशिक्षु शामिल हैं।

कोरोना : चीन में बढ़ रहे मामले, भारत में 24 घंटे में 60 की मौत, 2539 नये संक्रमित
Published / 2022-03-17 07:50:22
कोरोना : चीन में बढ़ रहे मामले, भारत में 24 घंटे में 60 की मौत, 2539 नये संक्रमित

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में एक दिन में कोरोना के 2,539 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 4,30,01,477 हो गई। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 30,799 रह गई है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से गुरुवार को सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में 60 और लोगों की संक्रमण से मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 5,16,132 हो गई। देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 30,799 हो गई है, जो कुल मामलों का 0.07 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 2,012 की कमी दर्ज की गई। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर बढ़कर 98.73 प्रतिशत हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, देश में अभी तक कुल 78,12,24,304 करोड़ नमूनों की कोविड-19 संबंधी जांच की गई है, जिनमें से 7,17,330 नमूनों की जांच पिछले 24 घंटे में की गई। संक्रमण की दैनिक दर 0.35 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.42 प्रतिशत दर्ज की गई। देश में अभी तक कुल 4,24,54,546 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और कोविड-19 से मृत्यु दर 1.20 प्रतिशत है। वहीं, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक कोरोना रोधी टीकों की 180.80 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण से मौत के 60 मामले सामने आए, जिनमें से 50 मामले केरल के थे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक जिन लोगों की संक्रमण से मौत हुई है, उनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों को अन्य बीमारियां भी थीं। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि उसके आंकड़ों का भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के आंकड़ों के साथ मिलान किया जा रहा है।

सावधान : जलवायु परिवर्तन देश में मचा सकती है तबाही
Published / 2022-03-16 13:52:29
सावधान : जलवायु परिवर्तन देश में मचा सकती है तबाही

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया इस समय कई संकटों का सामना कर रही है। अब इस बीच भारत पर एक नया खतरा मंडरा रहा है। एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत में जलवायु परिवर्तन की वजह से तबाही मच सकती है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर इंटर गवर्मेंटल पैनल आॅन क्लाइमेट चेंज ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को लेकर कई चिंताजनक तथ्यों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से भारत सबसे अधिक आर्थिक तौर पर प्रभावित है। इसके साथ ही सदी के आखिरी तक करीब 5 करोड़ लोग खतरे में होंगे। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई, चेन्नई और गोवा जैसे स्थानों पर तटीय इलाकों के समुद्र में डूबने का खतरा है। आईपीसीसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। आइए जानते हैं कि इस रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया है? तीन तरफ से भारत समुद्र से घिरा है। 7516.6 किलोमीटर भारतीय समु्द्र की लंबाई है। भारत की जनसंख्या अधिक है जिसकी वजह से समुद्र में पानी बढ़ने से भारत पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ रहा है। भारत में साढ़े तीन करोड़ लोगों पर जलवायु परिवर्तन की वजह से हर साल तटीय बाढ़ का खतरा हो सकता है। भारी बारिश का सामना कर रहे हैं तटीय शहर : भारत के तटीय शहरों में शामिल मुंबई, चेन्नई, गोवा, विशाखापट्टनम, ओडिशा में बढ़ रहे समुद्री जलस्तर की वजह से निचले इलाकों में पानी भर जाएगा। इन शहरों में समुद्र 0.8 डिग्री गर्म हो जाएगा जिसके कारण चक्रवातों की संख्या बढ़ जाएगी। तीव्रता बढ़ने से चक्रवात बार-बार आएंगे। इन शहरों में गर्म हवाएं चल रही हैं और भारी बारिश हो रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उन इलाकों में भारत शामिल हैं जिन्हें जलवायु परिवर्तन के कारण असहनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। भारत के मैदानी शहरों दिल्ली, बिहार, पटना, लखनऊ, हैदराबाद में लोगों को जलवायु परिवर्तन की वजह से असहनीय तापमान और भयानक सर्दी जैसी मौसमी स्थितियां हैं। इन राज्यों पर जलवायु परिवर्तन का खतरा : उत्तरी और भारत के कई इलाकों में सदी के आखिरी तक लोग बेहद खतरनाक वेट-बल्ब तापमान को महसूस करेंगे। अगर उत्सर्जन बढ़ता रहा है, तो लखनऊ और पटना में 35 डिग्री सेल्सियस वेट बल्ब तापमान पहुंच जाएगा जबकि भुवनेश्वर, चेन्नई, मुंबई, इंदौर और अहमदाबाद में वेट बल्ब तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर देखा जाए, तो असम, मेघालय, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।

पांच राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के इस्तीफे से कितना बदलेगा कांग्रेस का राजनीतिक समीकरण
Published / 2022-03-15 17:56:44
पांच राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों के इस्तीफे से कितना बदलेगा कांग्रेस का राजनीतिक समीकरण

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बड़ा कदम उठाया है। सोनिया गांधी ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के पीसीसी अध्यक्षों से इस्तीफा मांगा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने ट्वीट किया, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की प्रदेश इकाइयों के अध्यक्षों को इस्तीफा देने के लिए कहा है ताकि प्रदेश कांग्रेस कमेटियों का पुनर्गठन किया जा सके। उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंगलवार को पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चुनावी राज्यों की प्रदेश इकाइयों के प्रमुखों से कहा था कि वे पद छोड़ दें ताकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन किया जा सके। गोदियाल ने अपना इस्तीफा ट्वीट करते हुए कहा, प्रदेश में हुये विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए आज मैंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मैं परिणाम के दिन ही इस्तीफा देना चाहता था पर हाईकमान के आदेश की प्रतीक्षा पर रुका था। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार कर सामना करना पड़ा। उसे 70 सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ 19 सीट मिलीं, जबकि भाजपा ने 47 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खाते में केवल 2 सीट : वहीं 403 विधानसभा सीटों वाली उत्तर प्रदेश में प्रियंका और राहुल गांधी की कड़ी मेहनत के बाद भी कांग्रेस को केवल दो सीटों पर जीत मिली है। मणिपुर में भी कांग्रेस को 5 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। वहीं पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी। उसके बावजूद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने केवल 18 सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि गोवा में कांग्रेस ने 11 सीटों पर कब्जा जमाया है। प्रियंका गांधी ने वरिष्ठ नेताओं के साथ कांग्रेस के प्रदर्शन की समीक्षा की : इससे पहले, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर चुनाव अभियान से संबंधित वरिष्ठ नेताओं के साथ मंगलवार को समीक्षा की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में विधानसभा चुनाव के दौरान रही कमियों और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की गई। प्रियंका गांधी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी, राजीव शुक्ला, सलमान खुर्शीद, अराधना मिश्रा मोना और कई अन्य नेता शामिल हुए। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस महज दो सीटों पर सिमट गई। लल्लू और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी करारी हार का सामना करना पड़ा।

नैतिकता का स्तर इतना नीचे गिर सकता है, ये नहीं सोचा था : सुप्रीम कोर्ट
Published / 2022-03-15 09:57:30
नैतिकता का स्तर इतना नीचे गिर सकता है, ये नहीं सोचा था : सुप्रीम कोर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवार के सदस्यों को मिलने वाली 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि पाने के लिए झूठे दावों पर सोमवार चिंता जतायी और कहा कि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि इसका दुरुपयोग किया जा सकता है और उसे लगता था कि नैतिकता का स्तर इतना नीचे नहीं गिर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले की जांच महालेखाकार कार्यालय को सौंप सकता है। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्न की पीठ ने कहा, हमने कभी उम्मीद नहीं की थी और कभी सोचा नहीं था कि इसका भी दुरुपयोग किया जा सकता है। यह शुचिता का काम है और हमने सोचा था कि हमारी नैतिकता इतनी नीचे नहीं गिरी है कि इसमें कुछ झूठे दावे भी होंगे। हमने यह कभी सोचा नहीं था। पीठ ने मुआवजा देने के लिए दिए जा रहे कोविड-19 से मौत के फर्जी प्रमाणपत्रों पर पिछले सप्ताह चिंता जतायी थी और कहा था कि वह इस मुद्दे की जांच का आदेश दे सकता है। पीठ ने कहा था कि अगर ऐसे फर्जी दावों में अधिकारी शामिल है तो यह बहुत गंभीर बात है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) के सदस्य सचिव के साथ समन्वय करने के लिए एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त करें ताकि कोविड​​-19 पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को मुआवजे का भुगतान किया जा सके। सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि दो तरह के सुझाव आए है कि उच्चतम न्यायालय कुछ अंतिम सीमा तय करने पर विचार कर सकता है ताकि जो भी आवेदन करना चाहता है, वह निश्चित समयसीमा में आवेदन कर सकता है। पीठ ने मेहता से कहा कि सुनवाई की पिछली तारीख पर उसने प्राधिकारियों से इस संबंध में उचित आवेदन देने को कहा था। मेहता ने कहा कि वह मंगलवार को आवेदन देंगे और न्यायालय बुधवार को सुनवाई कर सकती है। पीठ ने मेहता से कहा कि प्राधिकारी को आवेदन में फर्जी दावों के मुद्दे पर भी कुछ कहने की आवश्यकता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, इसे शामिल किया जाएगा। इसके बाद सुप्रीमकोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 21 मार्च तय कर दी। उच्चतम न्यायालय गौरव बंसल और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में कोविड​​-19 पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को अनुग्रह सहायता राशि देने का अनुरोध किया गया है।

जालंधर : मशहूर कबड्डी खिलाड़ी को मारी गोली, मौत
Published / 2022-03-14 18:13:08
जालंधर : मशहूर कबड्डी खिलाड़ी को मारी गोली, मौत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पंजाब के जालंधर में अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी संदीप नंगल अंबिया को कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। घायल अवस्था में लोगों ने उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। कबड्डी के संचालक बलविंदर सिंह चट्ठा ने बताया कि गांव मल्लियां कलां में कबड्डी प्रतियोगिता चल रही थी। इस बीच, संदीप अपने कुछ साथियों को छोड़ने बाहर गया, जहां कुछ हथियारबंद हमलावरों ने उस पर गोलियां चला दीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाद में संदीप की मौत हो गई। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

रिकॉर्ड : टीटी ने एक दिन में वसूला 1.70 करोड़ का जुर्माना
Published / 2022-03-14 17:55:02
रिकॉर्ड : टीटी ने एक दिन में वसूला 1.70 करोड़ का जुर्माना

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम-मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल के एक मुख्य टिकट निरीक्षक ने चालू वित्त वर्ष में बिना टिकट यात्रा करने वाले रेल यात्रियों से कुल 1.70 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूल किया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक विश्व रंजन ने सोमवार को यहां एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 16 टिकट निरीक्षकों ने व्यक्तिगत रुप से बिना टिकट यात्रियों से एक करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूल किया। उन्होंने कहा कि मुख्य टिकट निरीक्षक आशीष यादव ने इस साल एक अप्रैल 2021 से नौ मार्च तक 20,600 यात्रियों से 1.70 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला। यह व्यक्तिगत क्षमता के लिहाज से सबसे अधिक संग्रह हो सकता है। रंजन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में यादव सहित 42 सदस्यों वाले उड़न दस्ते ने विभिन्न ट्रेन में बिना टिकट यात्रियों से 71 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूल किया है। पश्चिम मध्य रेलवे जोन का मुख्यालय जबलपुर में है। इसमें तीन रेल मंडल जबलपुर, भोपाल और कोटा रेल मंडल शामिल हैं।

संसद का बजट सत्र : आमजन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद
Published / 2022-03-14 07:33:14
संसद का बजट सत्र : आमजन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने से पहले सोमवार को उम्मीद जताई कि सत्र के दौरान सदस्यों की सक्रिय सहभागिता और सकारात्मक सहयोग से सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर स्वस्थ और परिणाममूलक संवाद होगा। बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी से 11 फरवरी तक चला था और दूसरा चरण 14 मार्च (सोमवार) से 8 अप्रैल तक चलेगा। बिरला ने ट्वीट किया, संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से प्रारंभ हो रहा है। आशा है कि माननीय सदस्यों की सक्रिय सहभागिता और सकारात्मक सहयोग से सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर स्वस्थ और परिणाममूलक संवाद होगा। सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को बढ़ती बेरोजगारी, कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर में कटौती और युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे भारतीयों की निकासी समेत कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर सकता है। सत्र के इस चरण में वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट प्रस्तावों के लिए संसद की मंजूरी प्राप्त की जाएगी। इसके अलावा केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के लिए बजट पेश करना सरकार के एजेंडा में शीर्ष पर होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जम्मू-कश्मीर के लिए सोमवार को बजट पेश करेंगी। सरकार ने संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) विधेयक को भी लोकसभा में विचार किए जाने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है। बजट सत्र के पहले चरण में 29 जनवरी से 11 फरवरी तक दो अलग-अलग पालियों में लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही संचालित की गई थी। बहरहाल, इस बार कोविड-19 संबंधी हालात में काफी सुधार आने के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे से साथ-साथ चलेगी। कांग्रेस सदन में उठाएगी महंगाई, बेरोजगारी, कामगारों का मुद्दा : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रविवार को अपने आवास पर कांग्रेस की संसदीय रणनीति समिति की बैठक की अध्यक्षता की और बजट सत्र के दौरान समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के समन्वय के साथ काम करने का फैसला किया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद कहा, हमने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा की। हम सत्र के दौरान जनहित से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ समन्वय में काम करेंगे। यू्क्रेन से भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी, महंगाई, बेरोजगारी, कामगारों का मुद्दा, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुद्दा आदि उन मुद्दों में शामिल हैं, जिन्हें इस सत्र में उठाया जाएगा।

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