मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी एवं दीपों से सजाया गया टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित पुंदाग मे श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवा धाम श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर में 234 वां श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा महाप्रसाद का आयोजन किया गया। आज का श्री कृष्ण प्रणामी अन्नपूर्णा सेवा प्रणामी ट्रस्ट के सदस्यों ने आयोजित किया। अन्नपूर्णा महाप्रसाद का विधिवत भोग दोपहर 12 बजे मंदिर के पुजारी अरविंद कुमार पांडे द्वारा लगायी गयी, तत्पश्चात मंदिर परिसर में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। आज के महाप्रसाद में केसरिया खीर एवं आलू का चिप्स का वितरण किया गया। तत्पश्चात भजन- संध्या के कार्यक्रम में ट्रस्ट के भजन गायकों ने मनमोहक सुमधुर भजनों मे अमृत गंगा का रसपान कराते हुए श्रोताओं को खूब झुमाया तथा श्री राधा कृष्ण के जयकारे से पूरा वातावरण कृष्णमय एवं भक्तिमय बन गया। तत्पश्चात सामूहिक रूप से महाआरती की गयी। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि दीपावली के पावन अवसर पर श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर को आकर्षक रंग बिरंगी रोशनी एवं दीपों से सजाया गया है। तथा श्री राधा कृष्ण जी का दिव्य आलौकिक श्रृंगार किया गया है। दीपावली के दिन विशेष पूजा-अर्चना, भजन कीर्तन किया जायेगा। मौके पर ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, शिव भगवान अग्रवाल, मधुसूदन जाजोदिया मनीष जालान पूरणमल सर्राफ, संजय सर्राफ, सुरेश भगत, भगत, विष्णु सोनी, पवन पोद्दार, मुरली प्रसाद, हरीश कुमार, परमेश्वर साहू, बसंत वर्मा, सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष उपस्थित थे।
गोवर्धन पूजा पर्यावरण, प्रकृति और समाज के प्रति श्रद्धा, समर्पण और संतुलन का देता है संदेश : संजय सर्राफएबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गोवर्धन पूजा दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाती है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट पूजा 22 अक्टूबर दिन बुधवार को मनाया जाएगा। यह पावन पर्व भगवान कृष्ण द्वारा अपने भक्तों पर किए गए आशीर्वाद के प्रति सम्मान प्रकट करता है। यह हिंदुओं के हृदय में एक विशेष स्थान रखता है क्योंकि यह उस अवसर का स्मरण कराता है जब भगवान कृष्ण ने अपने भक्तों को प्रकृति के प्रकोप से बचाने के लिए इंद्र के अहंकार का नाश किया था। इस पर्व का संबंध श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से है।मान्यता है कि द्वापर युग में जब ब्रजवासियों ने हर वर्ष इंद्र देव की पूजा करनी चाही, तब बाल स्वरूप श्रीकृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का परामर्श दिया। श्रीकृष्ण का तात्पर्य था कि प्रकृति पर्वत, वन, पशु और जल स्रोत ही हमारे जीवन के वास्तविक आधार हैं। इंद्र के क्रोधित होने पर मूसलधार वर्षा हुई, तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। तब से यह पर्व गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को विविध प्रकार के व्यंजन- सब्जियां, मिठाइयाँ, अनाज, फल, पकवान आदि का अन्नकूट अर्पित किया जाता है। यह अर्पण कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व कृषि और समृद्धि का उत्सव भी है।प्रातःकाल गोवर्धन (गोबर या मिट्टी से निर्मित प्रतीक पर्वत) की आकृति बनाई जाती है, जिसे फूलों से सजाया जाता है। इसके चारों ओर परिक्रमा की जाती है। फिर भगवान को अन्नकूट अर्पित कर भजन-कीर्तन किए जाते हैं।इस त्यौहार को अन्नकूट भी कहा जाता है जिसका अर्थ है भोजन का पर्वत भक्त कई व्यंजनों को तैयार करते हैं जिन्हें प्रसाद के रूप में भगवान कृष्ण को अर्पित किया जाता है।मूर्तियों को स्नान मथुरा के नाथद्वारा जैसे स्थानों पर भगवान कृष्ण की मूर्तियों को दूध से स्नान कराया जाता है नये वस्त्र पहनाए जाते हैं और आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है इस दिन भोजन और मिठाइयां थालियों पर सजाकर भगवान कृष्ण को भोग लगाने के लिए भोजन के पहाड़ बना दिए जाते हैं। यह पर्व सामूहिकता, सहभोज और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। गाँवों और मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं। अनेक स्थानों पर गोवर्धन परिक्रमा का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु हजारों की संख्या में भाग लेते हैं।गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पर्यावरण, प्रकृति और समाज के प्रति श्रद्धा, समर्पण और संतुलन का संदेश है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना और उसे संरक्षित रखना ही सच्ची पूजा है।
टीम एबीएन, रांची। अग्रसेन पथ स्थित श्री श्याम मंदिर में दिनांक 17 अक्टूबर 2025 को कार्तिक कृष्ण रंभा सह दीपोत्सव एकादशी महापर्व का अत्यंत भक्तिमय वातावरण में श्रद्धा के साथ मनाया गया। दीपावली पर्व को इस एकादशी पर पूरे मंदिर परिसर को विभिन्न रंगों के विद्युत की लड़ियों एवं 1100 शुद्ध घी के दीयों से रोशन किया गया। प्रात: श्री श्याम प्रभु को नवीन वस्त्र (बागा) पहनाकर स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत कर विभिन्न प्रजातियों के रंग बिरंगे ताजा फूलों से श्रृंगार किया गया। जैसे- गुलाब, बेला, रजनीगंधा, गेंदा, जरबेरा, गुलदाउदी। साथ ही इस अवसर पर मंदिर में विराजमान वीर हनुमान एवं शिव परिवार का भी विशेष श्रृंगार किया गया। रात्रि 9 बजे श्री श्याम प्रभु के जयकारों के बीच अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर श्री श्याम मंडल के सदस्यों ने गणेश वन्दना के संगीतमय संकीर्तन प्रारंभ किया। मौके पर बैठ्यों रांची मं लगाकर दरबार श्याम धनी राज करे, अनोखा जो भी हुआ श्याम तेरे द्वार हुआ, श्याम तेरे भरोसे मेरा ये परिवार है, दरबार है निराला खाटू के श्याम का, तुम हमारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं... इत्यादि भजनों की लय पर भक्तगण भाव विभोर हो रहे थे। साथ ही इस अवसर पर श्री श्याम प्रभु को गुलाब जामुन, चंद्रकला, मलाई चाप, लड्डू, गोंद पाक, केसरिया पेड़ा एवम केसरिया दूध का भोग अर्पित किया गया। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में रमेश चंद्र सारस्वत, ओम जोशी, गोपी किशन ढांढनीयां, चंद्र प्रकाश बागला, धीरज बंका, नितेश केजरीवाल, प्रियांश पोद्दार, विकास पाड़िया, जीतेश अग्रवाल, अजय साबू का सहयोग रहा। उक्त जानकारी श्री श्याम मंडल श्री श्याम मंदिर, अग्रसेन पथ रांची के मीडिया प्रभारी सुमित पोद्दार (9835331112) ने दी।
एबीएन सोशल डेस्क। भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ केवल आडंबर या अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि जीवन दर्शन और आत्मिक उत्थान के सूत्र हैं। योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि इन्हीं में दीपावली सबसे प्रमुख पर्व है, जो केवल दीपों और मिठाइयों का त्योहार नहीं, बल्कि अंधकार से प्रकाश, अज्ञान से ज्ञान और नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर यात्रा का प्रतीक है।दीपावली केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, स्वच्छता और संतुलित जीवनशैली का संदेश देने वाला उत्सव है। जिस प्रकार हम इस दिन अपने घरों और आँगन को स्वच्छ कर उजाला फैलाते हैं, उसी प्रकार यह पर्व हमें अपने शरीर, मन और वातावरण को भी शुद्ध व स्वस्थ रखने की प्रेरणा देता है।दीपावली से पहले घरों की सफाई, वस्त्र धोना, पुराने सामान को हटाना यह सब केवल परंपरा नहीं, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक अभ्यास हैं। स्वच्छ वातावरण में संक्रमण और रोगों की संभावना कम होती है। मानसिक स्पष्टता और स्फूर्ति बढ़ती है। ऊर्जा का प्रवाह सकारात्मक रहता है दीपावली का सबसे बड़ा संदेश है अंधकार पर प्रकाश की विजय। यह अंधकार केवल बाहर का नहीं, बल्कि मन का अंधकार भी है। जब व्यक्ति अपने भीतर के नकारात्मक विचारों, भय और ईर्ष्या को त्याग देता है, तो मानसिक स्वास्थ्य में गहरा सुधार होता है। योग और ध्यान के अभ्यास से मन का दीप प्रज्वलित किया जा सकता है ध्यान से तनाव और चिंता कम होती है।प्राणायाम से मस्तिष्क में ऑक्सीजन प्रवाह बढ़ता है सकारात्मक विचार रोग प्रतिरोधक शक्ति को मजबूत करते हैं।दीपावली के अवसर पर मिठाइयाँ, तली हुई वस्तुएँ और भारी भोजन प्रचलित हैं, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि हम संयम भूल जाएँ। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह पर्व हमें सिखाता है कि भोजन आनंद का माध्यम हो, अत्यधिकता का नहीं। घर में बनी शुद्ध मिठाइयाँ और प्राकृतिक आहार को प्राथमिकता दें, अधिक तेल, चीनी और कृत्रिम रंगों से बनी वस्तुएँ शरीर को हानि पहुँचाती हैं। दीपावली अनेक धार्मिक घटनाओं से जुड़ी हुई है भगवान श्रीराम के वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटने पर दीप जलाकर स्वागत किया गया। भगवान वामन ने असुरराज बलि को पाताल भेजकर धर्म की स्थापना की। भगवान महावीर स्वामी ने इसी दिन निर्वाण प्राप्त किया। माता लक्ष्मी का पृथ्वी पर अवतरण भी इसी दिन हुआ माना जाता है। इन सभी घटनाओं में एक ही भाव निहित है सत्य और धर्म की विजय, अधर्म और अंधकार का अंत दीपावली का वास्तविक अर्थ केवल बाहर दीप जलाना नहीं है, बल्कि अंतरात्मा के अंधकार को मिटाकर भीतर ज्योति प्रज्वलित करना है। जैसे दीपक में घी डालने पर वह प्रकाश देता है, वैसे ही मनुष्य जब अपने भीतर श्रद्धा, सत्य और करुणा का घी डालता है, तो उसका जीवन प्रकाशमय बन जाता है। वास्तव में, यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्ची ज्योति बाहर नहीं, अपने भीतर ही जलानी होती है। दीपावली हमें जीवन जीने का एक गहरा संदेश देती है—थोड़ा सा प्रकाश भी अंधकार मिटा सकता है।असत्य और अन्याय कभी स्थायी नहीं होते।दान, करुणा और सहअस्तित्व ही सच्चे उत्सव का रूप हैं। स्वच्छता केवल घर की नहीं, मन की भी आवश्यक है।जब हम अपने घर की सफाई करते हैं, तो यह हमें स्मरण कराता है कि हमें अपने मन और विचारों की भी सफाई करनी चाहिए। दीपावली सामाजिक एकता, सहयोग और सद्भाव का संदेश देती है। इस दिन दान-पुण्य, गरीबों की सहायता, और समाज में समानता का भाव हमें यह सिखाता है कि जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर का दीप जलाएगा, तब समूचा समाज आलोकित हो उठेगा।दीपावली केवल व्यक्तिगत आनंद का नहीं, बल्कि साझा सुख और करुणा के प्रकाश का पर्व है। आज का समय भौतिकता और प्रतिस्पर्धा से भरा हुआ है। दीपावली का संदेश हमें याद दिलाता है कि, प्रकाश केवल घरों में नहीं, विचारों में भी होना चाहिए। खुशी केवल प्रदर्शन में नहीं, आत्मिक शांति में छिपी है।फिजूलखर्ची से नहीं, संयम और सेवा से सच्चा उत्सव मनता है। दीपावली का वास्तविक अर्थ पटाखों का शोर नहीं, बल्कि अंतरात्मा की मौन शांति है। दीपावली हमें यह प्रेरणा देती है कि यदि जीवन में प्रकाश चाहिए, तो हमें स्वयं दीप बनना होगा। जब हर मनुष्य के भीतर करुणा, प्रेम, सत्य और विवेक की ज्योति प्रज्वलित होगी, तब ही संसार में सच्चा उजाला फैलेगा।
दीपावली महापर्व 20 अक्टूबर को,प्रकाश का पर्व एक सांस्कृतिक,धार्मिक और सामाजिक उत्सव दीपावली हमारे जीवन में उजाला, प्रेम, अच्छाई, सौहार्द और आशा का लाता है संदेश : संजय सर्राफ एबीएन सोशल डेस्क। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत विविधताओं का देश है, जहां प्रत्येक पर्व अपने आप में विशेष महत्व रखता है। इन्हीं पर्वों में से एक है दीपावली, जिसे दीवाली के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष दीपावली का महापर्व 20 अक्टूबर दिन सोमवार को मनाया जायेगा। यह पर्व न केवल हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, बल्कि जैन, सिख एवं बौद्ध धर्मों में भी इसका विशेष स्थान है। दीपावली सिर्फ रोशनी और पटाखों का त्यौहार नहीं है बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञानता से ज्ञान की ओर और बुराई से अच्छाई की ओर जाने का प्रतीक है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है और पूरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ इसका आयोजन होता है। इस दौरान लोग अपने घरों की सफाई करते हैं रंगोली सजाते हैं दिये जलाते हैं और नए सामान की खरीदारी करते हैं दिवाली केवल एक दिन का त्यौहार नहीं है बल्कि यह 5 दिनों तक चलने वाला महापर्व है हर दिन का अपना धार्मिक महत्व और अलग पूजन विधान होता है पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है और समापन भैया दूज पर। इन पांच दिनों में मुख्य आकर्षण माता महालक्ष्मी की पूजा होती है जो कार्तिक अमावस्या की रात में की जाती है।इस दिन लोग घर-आंगन में दीप जलाकर अंधकार को दूर करते हैं और धन- समृद्धि की देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, दीपावली के दिन भगवान श्रीराम चंद्रजी 14 वर्षों के वनवास के पश्चात अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया और तभी से दीप जलाने की परंपरा चली आ रही है। इसी दिन भगवान विष्णु ने नरकासुर का वध कर 16 हजार कन्याओं को मुक्त कराया था, जिसे नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता है दीपावली का त्योहार पांच दिनों तक चलने वाला उत्सवों में प्रमुख हैं : धनतेरस- इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है और स्वास्थ्य एवं समृद्धि की कामना की जाती है। नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली)- यह बुराई के नाशऔर आत्मशुद्धि का प्रतीक दिन है। दीपावली- इस दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है, जो धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी हैं। घरों मंदिरों और दुकानों को दीपों, मोमबत्तियों और रंग-बिरंगे विद्युत बल्बों से सजाया जाता है। गोवर्धन पूजा- यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववासियों की रक्षा करने की कथा से जुड़ा है। भाई दूज- यह भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का पर्व है, जिसमें बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं। दीपावली केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह परिवार और समाज को एक सूत्र में बांधने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर मिठाइयां बांटते हैं, उपहार देते हैं पटाखे जलाते हैं और साथ मिलकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं। यह उत्सव आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यापारिक वर्ष का आरंभ इसी दिन से माना जाता है।दीपावली खुशियों का पर्व है,आज आवश्यकता है कि हम पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए दीपावली को हरित इको फ्रेंडली तरीके से मनायें जैसे मिट्टी के दीप जलाना, कम ध्वनि वाले पटाखों का चयन करना और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देना। दीपावली केवल दीपों का पर्व नहीं है, यह हमारे जीवन में उजाला, प्रेम, सौहार्द और आशा का संदेश लाता है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि चाहे अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटा सा दीप भी उजाला फैला सकता है। आइये इस दीपावली हम संकल्प लें कि हम अपने भीतर और समाज में अच्छाई, सत्य और सकारात्मकता का प्रकाश फैलायें। दीप जलायें, आशा जगायें- यही है दीपावली का सच्चा संदेश।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रदेश का लोक सांस्कृतिक पर्व विशिष्ट पहचान है। सोहराय पर्व झारखंड का प्रसिद्ध लोक संस्कृति पर्व में से एक है, जो संपूर्ण झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है। राजधानी रांची के बीचोंबीच सड़क पर इतिहास में पहली बार 16 अक्टूबर 2025 को डहरे सोहराय का आयोजन मोराबादी मैदान से पदयात्रा करते हुए एसएसपी चौक, रेडियम रोड होते हुए जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक पहुंचकर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा। मौके पर देवेन्द्र नाथ महतो ने बताया कि कार्यक्रम में संपूर्ण झारखंड से हजारों लोग पारंपरिक वेश भूषा के साथ शामिल होंगे, कार्यक्रम की तैयारी पूर्ण हो चुकी है। यह कार्यक्रम वृहद झारखंड कला संस्कृति मंच के बैनर तले आयोजन होगा। कार्यक्रम में स्थानीय एवं प्रामाणिक लोक कलाकार शामिल होंगे। मौके पर सोहराय से जुड़े गीत, नृत्य, पारंपरिक वाद्य यंत्र, वस्त्र, पेंटिंग, हस्तशिल्प और व्यंजन प्रस्तुत किये जायेंगे। कार्यक्रम की तैयारी पूर्ण हो चुकी है।
बच्चों में सद्गुण जगायें और बढ़ाये जायें विषय पर हुआ स्वाध्याय एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार साधकों का आज स्वाध्याय पाठ-संवाद हुआ। बच्चों में सद्गुण जगायें और बढ़ाये जायें। बताया गया कि हम सब और हमारे बच्चे भी सामाजिक व्यक्ति हैं। हमारे बच्चे बचपन में पारिवारिक अधिक हैं, यद्यपि उनका भी इस उम्र में एक समाज है, जो बाल समाज स्वरूप है, फिर उन्हें भी अगले दिनों चलकर, युवावस्था पाकर सामाजिक व्यक्ति बनना है, एक उत्तरदायी नागरिक बनना है। फिर दूसरों की नागरिकता, सज्जनता और उनकी प्रतिष्ठा का ध्यान, ख्याल करते हुए, सन्मार्ग, सत्कर्म का अनुसरण करना, उनकी नागरिकता व प्रतिष्ठा का मूल्यांकन करना आदि सद्गुण आवश्यक व अपेक्षित होता है। अत: हम सब अभिभावकों का कर्तव्य है कि बच्चों में अभी से ऐसा सुसंस्कार, शिष्टता, सदाचार, अनुशासन का मनोभाव, सुंदर वातावरण माहौल, स्वच्छता, शुचिता, परिश्रम, परोपकार, सेवाभाव, सद्ज्ञान व सद्गुण का भाव जगाने, बढ़ाने में सहयोग व सद्भाव उत्पन्न करें कि सबमें सज्जनता, नागरिकता, सभ्यता का मान प्रतिष्ठा का भाव बढ़ें।मूल्य समझें और आगे चलकर, उनकी रक्षा करते हुए वे एक सफल नागरिक बन सिद्ध व गौरवान्वित हों सकें। प्रेमलता दीदी ने अपने संवाद सार में में बताया कि नागरिकता, सज्जनता व प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा आधार है सद्गुण। उपर्युक्त विषय पर गायत्री परिवार आनलाइन स्वाध्याय पाठ-संवाद समूह के साधक-शिष्य भाई-बहनों ने आज सुबह पूज्यगुरुदेवश्री वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पं• श्रीरामशर्मा आचार्य द्वारा लिखित युग साहित्य हमारी भावी पीढ़ी और उसका नवनिर्माण नामक युग-साहित्य का राष्ट्रीय आनलाइन स्वाध्याय पाठ व संवाद किये। प्रारंभ गायत्री महामंत्र के मंत्रोच्चारण एवं गुरु-ईश वंदना सस्वर पाठ से और पाठ समापन शांतिपाठ से किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ-साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।
दीपेश निराला ने झारखंड के विभिन्न जिलों से आए लोगों को दिया आरटीआई कानून का प्रशिक्षण झारखंड सरकार जल्द नियुक्त करे झारखंड राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त : दीपेश निराला टीम एबीएन, रांची। हमर अधिकार मंच के बैनर तले आरटीआई दिवस मनाते हुए आज आरटीआई कानून को लागू हुए 20 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आरटीआई रिसोर्स पर्सन सह वकील दीपेश निराला ने झारखंड के विभिन्न जिलों से आये विभिन्न व्यक्तियों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 कानून का प्रशिक्षण दिया। झारखंड में वर्ष 2022 के बाद से लेकर अब तक सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने पर चिंता व्यक्त की गई, जबकि मार्च, 2025 में राज्य में नेता प्रतिपक्ष भी नियुक्त हो चुके हैं, इसके मद्देनजर उपस्थित लोगों ने सरकार से मांग किया कि जल्द से जल्द झारखंड में सूचना आयुक्त की नियुक्ति की जाय। इस वर्कशॉप में दीपेश निराला, उमाशंकर सिंह, ओम प्रकाश उपाध्याय, राजकुमार, अपराजिता मिश्रा, ममता वर्मा, सुनीता मेहता, शिवानंद कांशी, राजेश कुमार, अजीत कुमार, राजीव राज, नवल किशोर लाल, चंद्रदेव कुमार गिरिडीह, पप्पू कुमार, हरेंद्र बहादुर सिंह, वेद प्रकाश साव, चंदन कुमार सिंह, बृजेश मिश्रा, आशीष कुमार जायसवाल, हरीश नागपाल, राजू रंजन मिश्रा, रिंकू तमांग, परमजीत कौर, साक्षी गोस्वामी, पिया बर्मन, दिलीप कुमार, दलबीर सिंह, विनोद जैन बेगवानी, रविंद्र मेहता, नेहा सिंह, सज्जन कुमार सिन्हा, डॉक्टर प्रशांत कुमार सिंह, मारिया साहेब, खुशबू सिंह, गायत्री कुमारी, सना सानया, नम्रता सोनी, मुकेश त्रिपाठी, अरविंद कुमार तिवारी, कविता होरो, और संतोष मृदुला उपस्थित हुए। मंच संचालन संतोष मृदुला ने किया और धन्यवाद ज्ञापन दलबीर सिंह ने दिया।
टीम एबीएन, रांची। संपूर्ण सृष्टि की ज्वलंत समस्याओं का मूल कारण आध्यात्मिक दरिद्रता है। दरिद्र मन वाला व्यक्ति समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए बोझ है। ब्रह्माकुमारी संस्थान आध्यात्मिक सम्पन्नता के लिए विशेष कार्य कर रहा है। दीपावली का प्रकाश पर्व भी अन्दर की दरिद्रता समाप्त करके ज्ञान, गुण और शक्तियों की सम्पन्नता लाने का संदेश देता है। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय चौधरीबगान, हरमू रोड के प्रांगण में आयोजित दीपोत्सव समारोह में सतयुग के श्री लक्ष्मी नारायण के ताजपोशी की चैतन्य झांकी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके उद्घाटन करते हुए डॉ अभिषेक, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने व्यक्त किये। डॉ शांति हेल्थ डिपार्टमेंट झारखंड सरकार ने कहा जीवन में ज्ञान जागृति न होने से ही मनुष्य तनाव में है। मिथ्या समझ के कारण समाज में ये गलतियां हो रही है। ईश्वरीय ज्ञान का प्रकाश ही स्वच्छता और पारदर्शिता लायेगा। इफको मानव संसाधन विभाग के प्रबंधक संजय कुमार सहाय ने कहा ईश्वरीय ज्ञान से जागृत आत्माओं के सम्पूर्ण प्रकाश में अत्याचार, शोषण व भ्रष्टाचार जैसी काली प्रवृतियां समाप्त हो जायेगी व विश्व के कोने-कोने में शांति, प्रेम व भाईचारे के भावनाएं जागृत होंगी। जगनाथपुर मंदिर न्यास के उपाध्यक्ष अशोक नारसरिया वर्तमान समय का मानव धन दौलत की लिप्सा में आत्मा के दिव्य तेज को नष्ट कर रहा है। ज्ञान योग के बल से आलोकिक मानव ही उच्च आध्यात्मिक स्थिति से वैभवशाली बन देवई स्वराज्य की स्थापना करेंगे। झारखण्ड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा निर्विकारी बन सदा जागती ज्योति शिव से आत्म दीप जगा कर ही हम सच्ची दीपावली मना सकते हैं। सदानंद नस्कर डीएजी उपमहालेखाकार ने कहा ईश्वरीय विश्व विद्यालय सम्पूर्ण पवित्रता का ऐसा प्रकाश स्तम्भ है जिसके प्रकाश से हर मानव अपने जीवन का अंधकार हटा सकता है। कौशल राजगढ़िया अधिवक्ता ने कहा कि अब इस धरा को जगमग करने के लिए परम ज्योति निराकार परमात्मा का अवतरण हुआ है। सर्व अनिष्टों से निवृति उनसे योग लगाकर ही हो सकती है। स्वामी मुक्तस्थ योग विशेषज्ञ ने कहा दीप प्रज्ज्वलित कर हम ज्ञान धन की कामना करते हैं ताकि अज्ञान का तम: जिंदगी से चला जाय। मारवाड़ी युवा मंच समर्पण शाखा की अध्यक्ष पूजा अग्रवाल ने कहा अलौकिक प्रकाश से संपन्न आत्माएं कभी किसी के मन को पीड़ा नहीं दे सकती। रश्मि जायसवाल ब्रांड इवेंट उपप्रबंधक ने कहा भारत देश पूर्व की भांति अब फिर से शिरोमणि और जगद्गुरु का स्थान प्राप्त करेगा और इसी भारत देश से ईश्वरीय अध्यात्म की दैदीप्यमान किरणें संपूर्ण भू-मंडल को प्रकाशित करेंगी। केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने ब्रह्माकुमारी संस्थान के लिए दीपावली के दिन का महत्व बताते हुए कहा इसकी स्थापना सन् 1937 में दीपावली के दिन ही की गयी थी। आज से पांच हजार वर्ष पूर्व खुशियों के दीपक जलते थे। कार्यक्रम में उपस्थित प्रदीप गुप्ता प्रोफेसर गोस्सनर कॉलेज, डॉ प्रोफेसर रानी प्रगति, एसएस मेमोरियल कॉलेज, अनुराधा सर्राफ ने भी अपने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में गाईडेड मेडिटेशन ने राजयोग का अभ्यास कराया। समारोह में भारी संख्या में लोग उपस्थित थे। सबने आने वाले समय में आत्मदीप जाग्रत रखने का संकल्प लिया। ज्ञातव्य हो कि ब्रह्माकुमारी केंद्र में ज्ञान प्रकाश हेतु नि:शुल्क प्रशिक्षण प्रतिदिन प्रात: 7 बजे से 10 बजे तथा सन्ध्या 5 से 6.30 बजे तक दिया जाता है। उक्त जानकारी केन्द्र प्रशासिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने दी।
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