टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार राजनीति में एक और बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक आने वाले दिनों में लालू प्रसाद यादव की राजद और नीतीश कुमार की जदयू का विलय तय माना जा रहा है, जिसमें नीतीश कुमार एक्टिंग प्रेसिडेंट की भूमिका में होंगे। योजना के मुताबिक बिहार में ताजपोशी तेजस्वी यादव की तय मानी जा रही है, वहीं नीतीश कुमार राज्य से निकलकर केन्द्र की राजनीति करने दिल्ली का रुख करने वाले हैं, जहां नीतीश कुमार भाजपा विरोधी दल के संयोजक के रूप में काम करते दिखाई पड़ने वाले हैं। जदयू और राजद विलय कर देश की एक बड़ी पार्टी के रूप में दिखना चाहती हैं, जिसका लोकसभा चुनाव से पहले देश में एक बड़े दल के रूप में पहचान हो। नीतीश अपनी राजनीति के अंतिम दौर में हैं और इस बार वो दिल्ली की राजनीति में धमाकेदार कदम रखना चाहते हैं। नीतीश कुमार की योजना ज्यादा से ज्यादा विपक्षी पार्टियों को एक कर संयोजक बनने की है, इसलिए लालू प्रसाद और नीतीश कुमार एक साथ सोनिया गांधी से मिलने आ रहे हैं। सोनिया विदेश दौरे से लौटने के बाद दिल्ली आई हैं और नीतीश और लालू अपनी इस कवायद में कांग्रेस की भूमिका को अहम मानते हैं। योजना के मुताबिक, नीतीश कुमार एंटी भाजपा फ्रंट बनाकर भाजपा के खिलाफ जोरदार प्रचार पूरे देश में करना चाह रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस कड़ी में बिहार की गद्दी छोड़ने को नीतीश कुमार तैयार हो गए हैं और वो दिल्ली का रुख करना चाहते हैं। योजना के मुताबिक विपक्षी एकता का मजबूत गठजोड़ बनाना पहली प्राथमिकता है। वहीं संयोजक बनकर भाजपा के खिलाफ पूरे देश में प्रचार करना दूसरी प्राथमिकता। यही वजह है कि राजनीति के हाशिए पर जा चुके शरद यादव भी पटना पहुंचकर अचानक एक्टिव नजर आने लगे हैं। शरद यादव लालू प्रसाद के साथ पटना में एक मंच पर बुधवार को एक स्वर में साल 2024 में भाजपा को हराने की बात करते नजर आये। लालू प्रसाद लंबी बीमारी के बावजूद सक्रिय इसलिए दिखाई पड़ रहे हैं, क्योंकि उनकी योजना अब अपने बेटे तेजस्वी यादव को पूरे तौर पर पदस्थापित करने की है। लालू इस मुहिम में लगभग सफल हैं। वहीं तेजस्वी योजना के मुताबिक सीएम बन जाते हैं तो ये उनके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जायेगी। आरजेडी के दिग्गज नेता शिवानंद तिवारी सहित कई नेता तेजस्वी यादव को गद्दी सौंपने को लेकर गाहे बगाहे बयान देते नजर आए हैं, लेकिन ऐसा करने की योजना पर काम हो रहा है और लालू प्रसाद इसको फलीभूत करने के लिए सक्रिय नजर आने लगे हैं। बिहार का ताज तेजस्वी के हवाले करने की योजना : दो दिन पहले यानि की 20 सितंबर को नीतीश कुमार ने भी अपनी मंशा इशारों में ज़ाहिर कर दी थी कि उनकी योजना तेजस्वी यादव को मज़बूत करने की है। अगले दिन 21 सितंबर को लालू प्रसाद, शरद यादव और तेजस्वी यादव एक मंच से भाजपा विरोध की मुहिम को तेज करते नजर आए और सोनिया गांधी से मिलने की बात जोर-शोर से कही। मतलब साफ है कि लालू प्रसाद इसलिए भी उत्साहित हैं कि बिहार का ताज साल 2005 के बाद राजद के हाथों आता दिखाई पड़ रहा है और अब उनके बेटे तेजस्वी यादव उस कुर्सी से चंद महीनों की दूरी पर हैं। लालू प्रसाद तय योजना के मुताबिक नीतीश कुमार को बीजेपी विरोधी दल का संयोजक बनाने के लिए पुरजोर पहल करने वाले हैं और इस कड़ी में कांग्रेस की हामी बेहद जरूरी है। ये सर्वविदित है कि लालू प्रसाद के रिश्ते गांधी परिवार से शुरुआती दिनों से अच्छे रहे हैं और लालू प्रसाद कांग्रेस के बुरे दौर में भी कांग्रेस के साथ बने रहे हैं। इसलिए लालू प्रसाद और नीतीश कुमार का सोनिया गांधी से मिलना तय योजना के तहत किया जा रहा है। लालू प्रसाद अपनी विश्वसनियता के दम पर कांग्रेस और तमाम दलों को साथ लाने की कोशिश करेंगे, क्योंकि लालू प्रसाद भाजपा के खिलाफ हमेशा से लड़ते रहे हैं। इसलिए बीजेपी विरोधी दल को लामबंद करने की योजना सोनियां गांधी से मिलने के बाद तेज होने वाली है। राष्ट्रीय फलक पर मज़बूत दल के तौर पर दिखने की मंशा ही विलय की प्रमुख वजह है। इसलिए कांग्रेस की सर्वोपरि नेता सोनिया गांधी से मिलने के बाद बिहार की राजनीति में कई नये प्रयोग कुछ महीनों में दिखने वाले हैं जिनमें तेजस्वी यादव का सीएम बनना तय माना जा रहा है। विलय के बाद किन मुद्दों को अस्त्र बनाकर भाजपा को घेरने की है तैयारी : 90 के शुरुआती दौर में लालू प्रसाद, शरद यादव और नीतीश कुमार मंडल की राजनीति के सिरमौर माने जाते थे। ये तीनों नेता की तिकड़ी ने देश में बीपी सिंह की राजनीति को मज़बूत आधार देकर आगे बढ़ाने का काम किया था। बिहार में एक बार फिर जातीय जनगणना सफल पूर्वक अंजाम देने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके परिणाम के बाद एक बार फिर पूरे देश में कराने को लेकर योजना के मुताबिक भाजपा पर दबाव डाला जायेगा। मंडल की राजनीति को चमकाने की एकबार पुरोजर कोशिश होगी। कमंडल को पटखनी देने के लिए उसी पुरानी राजनीति का सहारा लिये जाने की योजना है, जिसकी धार अब कुंद पड़ने लगी थी। इस पूरी कवायद में सेनापति के तौर पर राष्ट्रीय फलक पर नीतीश कुमार संयोजक की भूमिका में नजर आएंगे और लालू प्रसाद द्वारा उन्हें मज़बूती से समर्थन राष्ट्रीय राजनीति में दिया जाता रहेगा। गौरतलब है कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर ही नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की सीएम आवास पर 52 मिनट की मुलाकात अकेले में हुई थी और दोनो नेताओं के चेहरे पर मुस्कुराहट को देखकर राजनीतिक पंडित बिहार में बड़े उलटफेर की आशंका ज़ाहिर करने लगे थे। इसलिए एक बार फिर राष्ट्रीय फलक पर मंडल की राजनीति का शोर सुनाई पड़ने वाली है और 28 साल पहले की राजनीति में ज्यादातर समाजवादी नेता नजर आने वाले हैं। दरअसल, इस मुहिम में कर्नाटक की जेडीएस भी साथ आ सकती है, जिसके नेता पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा हैं और नीतीश कुमार के एनडीए से बाहर आने पर उन्हें बधाई देने वालों में आगे दिखाई पड़े हैं। इतना ही नहीं देवगौड़ा ने ये भी कह दिया था कि जनता दल ने देश को तीन तीन प्रधानमंत्री दिये हैं जो आगे की रणनीति का इशारा साफ तौर पर कर चुका है। भाजपा विरोध के नाम पर इन दलों का साथ आना तय माना जा रहा है : ये तय योजना का ही हिस्सा है कि कांग्रेस और लेफ्ट को साथ रखते हुए राष्ट्रीय फलक पर एनसीपी, शिवसेना जैसे दलों का महाराष्ट्र में समर्थन हासिल किया जायेगा। वहीं पंजाब में शिरोमणी अकाली दल, झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा, यूपी में समाजवादी पार्टी और बीएसपी को भी एक साथ लाने की कवायद हो सकती है। नीतीश और लालू प्रसाद की योजना का हिस्सा केसीआर भी हैं जो तेलांगना से भाजपा विरोध के नाम पर भाजपा विरोधी फ्रंट का हिस्सा बनेंगे, क्योंकि केसीआर के लिए भाजपा-कांग्रेस के मुकाबले बड़ी चुनौती नजर आ रही है और राज्य की राजनीति में भाजपा को रोकने की कोशिशों में आगे दिखने के लिए केसीआर ऐसा करने को मजबूर होंगे। लेकिन ममता, केजरीवाल और नवीन पटनायक सहित आंध्रा के वाईएसआर इस मोर्चे का हिस्सा नहीं होंगे ये तय माना जा रहा है। इन्हें चुनाव परिणाम के बाद समर्थन के लिए आजमाये जाने की योजनाओं पर काम किया जायेगा। ज़ाहिर है बिहार की राजनीति में नए प्रयोगों का असर चंद महीनों में देशव्यापी होने की संभावना तेज है, जिस पर लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार तेजी से काम कर रहे हैं। इसमें बीजेपी को पटखनी देने के नाम पर सबको एक साथ लाने की योजना है, जिसमें संयोजक पद की भूमिका तय रणनीति का हिस्सा है। गौर करने वाली बात है कि साल 2014 में नरेन्द्र मोदी भी कैंपेन कमिटी के चेयरमैन बने थे और फिर देश के प्रधानमंत्री।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बुधवार को भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैं अपनी आइडियोलॉजी पर मजबूती से कायम हूं। कई पार्टियों ने भाजपा के साथ समझौता कर घुटने टेक लिये। लेकिन न मैं झुका हूं और न ही कभी झुकूंगा। भाजपा हमारी सबसे बड़ी दुश्मन है। अगर मैं झुक जाता तो मुझे इतने दिन जेल में नहीं रहना पड़ता। सोनिया से मिलने दिल्ली जायेंगे लालू : राजद राज्य परिषद की बैठक में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि मैं जल्द ही नीतीश कुमार के साथ मिलकर दिल्ली जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात करूंगा। राहुल गांधी की यात्रा के बाद राहुल से भी मुलाकात करूंगा। 2024 में हम भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर कर देंगे। तेजस्वी यादव ने कही यह बात : इस बीच बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य 2024 में 40 सीट महागठबंधन को जीताना है...मैं अपने सभी लोगों से कहना चाहता हूं कि अब उछल कूद नहीं करना है शांति से अपना काम करना है और लोगों को जोड़ना है। अति पिछड़ा समाज, दलित, अंतिम पायदान के लोग और गरीबों को हमें जोड़ना है।
टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार के सासाराम में मालगाड़ी के कई डिब्बे पटरी से उतर गये। यह हादसा दीनदयाल उपाध्याय रेल डिवीजन के कुंभऊ स्टेशन के पास हुआ। हादसे के चलते कई ट्रेनें प्रभावित हो गईं। मौके पर राहत और बचाव की टीमें तैनात हैं। हादसे की तस्वीरें भी सामने आई हैं। मालगाड़ी होने के चलते किसी के चोटिल होने की खबर नहीं है। टीमें डिब्बों को पटरियों से हटाकर ट्रेन रूट शुरू करने के काम में जुट गई हैं। हादसे के बाद दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन गया हावड़ा रेल रूट पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ है।
टीम एबीएन, बिहार/पटना। बिहार सरकार ने मेडिकल सेक्टर में भर्ती को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब बिहार में 8000 नए पदों पर मेडिकल भर्ती की जायेगी। मंगलवार, 20 सितंबर 2022 को हुई बिहार मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। ये सरकारी भर्तियां बिहार मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल्स में की जायेंगी। जाहिर है कि बिहार कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब राज्य में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में 8000 नये पद सृजित किये जायेंगे। बिहार में सरकारी नौकरी की तमन्ना रखने वालों के लिए ये बड़ी खुशखबरी है। बिहार मंत्रिमंडल की बैठक पूरी होने के बाद अधिकारियों ने बताया कि जिन 8000 नये पदों को मंजूरी मिली है, उनमें से 210 एडिशनल पोस्ट राज्य के 35 जिला अस्पतालों में होंगे। इसके अलावा 6,663 नये पद बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बनाए जायेंगे। पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल यानी पीएमसीएच में 229 और छपरा मेडिकल कॉलेज में 423 नये पदों पर सरकारी नौकरी दी जायेगी। नीतीश कुमार की मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार में मेडिकल की 8000 नई वैकेंसी की जरूरत पर राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर ऑफिसर ने बात की। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त पद लाने का मकसद है बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करना। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के कामकाज में सुधार लाना और उन्हें अच्छे ढंग से व्यवस्थित करना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ये बैठक दिन के 11.30 बजे शुरू हुई थी। इस बिहार कैबिनेट मीटिंग में कुल 16 प्रमुख एजेंडों पर सरकार ने मुहर लगाई। इनमें से एक बिहार में ओबीसी प्लस 2 कन्या उच्च विद्यालय खोले जाने का भी प्रस्ताव था। इसके लिए बिहार सरकार ने 556 करोड़ 23 लाख 36 हजार रुपये के खर्च को मंजूरी दी। ये सभी स्कूल आवासीय होंगे। इसके अलावा गया एयरपोर्ट पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर वैट 29 फीसदी से घटाकर 4 प्रतिशत करने का बड़ा फैसला लिया। दरभंगा एयरपोर्ट पर भी वैट घटाया गया है। वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि इस कदम से सरकार गया एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स की संख्या बढ़ाना चाहती है। राज्य में पर्यटन को भी बढ़ावा देना चाहती है।
टीम एबीएन, पटना/ रांची। बिहार के कटिहार जिले में कथित तौर पर हिरासत में एक व्यक्ति की मौत के कुछ घंटों बाद ग्रामीणों के समूह ने एक पुलिस थाने पर हमला कर दिया, जिसमें दो थाना प्रभारी (एसएचओ) सहित सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गये। उन्होंने बताया कि प्रमोद कुमार सिंह (40) के हवालात में मृत पाए जाने के बाद सैकड़ों ग्रामीणों ने प्राणपुर थाने में हंगामा किया और परिसर में खड़े वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। शराब की बोतलें मिलने के बाद प्रमोद सिंह को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि दो घायल एसएचओ में प्राणपुर थाने के मनीतोष कुमार और दंडकोहरा थाने के शैलेश कुमार शामिल हैं। कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक (एसपी) दया शंकर ने बताया कि सभी घायल पुलिसकर्मियों को कटिहार के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और हमारी टीम इलाके में तैनात हैं। भीड़ ने थाने पर किया हमला एसपी ने दावा किया कि शव तब मिला जब पुलिस अधिकारी प्रमोद सिंह को अदालत में पेश करने के लिए दस्तावेज तैयार कर रहे थे। वहीं मौत की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने लाठियों और लोहे की रॉड से थाने पर हमला कर दिया और पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया। उन्होंने कहा कि पास के पुलिस थानों से अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को बुलाये जाने के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। एसएचओ सहित सात पुलिसकर्मी घायल : उन्होंने बताया कि घायल थाना प्रभारी शैलेश कुमार पुलिसकर्मियों की भेजी गई अतिरिक्त टीम में शामिल थे। दो एसएचओ सहित सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। एसपी ने बताया कि प्रमोद सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। साथ ही पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। किशनगंज शहर से सटे पश्चिम बंगाल के रामपुर में एसआईएस सुरक्षा एजेंसी के कैश वैन से दो करोड़ तीन लाख रुपये की लूट हुई है। लूट की इस वारदात को दिनदहाड़े दोपहर के 12 बजे अंजाम दिया गया। एक स्कॉर्पियो पर सवार अपराधियों ने जो कि एसबीआई का आई कार्ड पहने हुए था और उनकी गाड़ी पर भी एसबीआई का लोगो लगा था। उसने पहले खुद को बैंक का अधिकारी बता कर वैन का दरवाजा खुलवाया फिर हथियार दिखा कर लूट की घटना को अंजाम दिया और आसानी से चलते बने। लूट की इस घटना को चार लोगों ने अंजाम दिया जो कि स्कॉर्पियो में ही सवार थे। लूट की घटना के बाद कर्मचारी निकटवर्ती किशनगंज टाउन थाना पहुंचे। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर एसडीपीओ अनवर जावेद भी दलबल के साथ पहुंचे। चुंकि घटनास्थल पश्चिम बंगाल के चुलिया थाना इलाके में पड़ता है इस वजह से एसडीपीओ ने बंगाल पुलिस को इसकी सूचना दी और साथ ले गए लेकिन रास्ते से ही पश्चिम बंगाल पुलिस कहीं निकल गई, जिससे मामला काफी संदिग्ध प्रतीत होता दिख रहा है। लूट की इतनी बड़ी घटना में कौन-कौन शामिल है, यह जांच के बाद ही पता चलेगा। जानकारी के मुताबिक तीन कर्मी बिहार में पैसे जमा कर रहे थे तो वहीं दो कर्मी पेट्रोल लेने पश्चिम बंगाल कैसे पहुंचे जो कर्मी बयान में बता रहे। एसडीपीओ ने बताया कि ऐसा कानून सांगत नहीं है पर घटनास्थल पश्चिम बंगाल में है, इस कारण जीरो एफआईआर कर बंगाल के चाकुलिया थाना पुलिस को भेजा जा रहा है। बंगाल पुलिस के पहले किशनगंज टाउन थाना पहुंचने फिर घटना स्थल पर नहीं जाने ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सूचना के मुताबिक सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों को बंगाल के चाकुलिया पुलिस से मदद नहीं मिली है इस कारण अब सुरक्षा एजेंसी के कर्मी कोर्ट की शरण में जाने की कोशिश करेंगे बताया।
टीम एबीएन, पटना/ रांची। बिहार के जूनियर डॉक्टरों के लिए अच्छी खबर है। नीतीश कुमार की सरकार ने जूनियर डॉक्टरों को इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड में इजाफा करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अब बिहार के जूनियर डॉक्टरों का स्टाइपेंड 15000 से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया जायेगा। वहीं फिजियोथैरेपी करने वाले इंटर्नस का भी स्टाइपेंड 11 हजार से बढ़ाकर 15 हजार कर दिया गया है। मंगलवार को पटना में नीतीश कैबिनेट की बैठक में इस एजेंडे पर मुहर लगी है। नीतीश सरकार ने मंगलवार को बुलाई गई बैठक में कुल 19 एजेंडों पर अपनी मुहर लगाई। जिन अहम मुद्दों पर निर्णय लिया गया उनमें रेप-पास्को जैसे केस के लिए विशेष न्यायालय में अपर जिला और सत्र न्यायाधीश के 54 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा बिहार में सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए 60 करोड़ रूपये की निकासी पर मुहर लगाई गई है। कैबिनेट ने 29 करोड़ की अतिरिक्त राशि की निकासी पर भी मुहर लगाई है, इसके अलावा डीजल अनुदान के लिए आकस्मिकता निधि से निकासी पर भी नीतीश सरकार की मुहर लगी है। शराब माफियाओं पर नकेल कसने के लिए सरकार ने सख्ती दिखाई है। ड्रोन, गाड़ी, बोट समेत अन्य सामानों की खरीददारी के लिए कैबिनेट की बैठक में 25 करोड़ रुपये स्वीकृत की गई। कैबिनेट ने राशि स्वीकृति पर अपनी मुहर लगाई। सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूर्णिया में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय और हॉस्पिटल के संचालन के लिय 423 पदों की स्वीकृति भी दी गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही खुलकर अपने आप को पीएम पद का चेहरा मानने को तैयार नहीं हैं, लेकिन उनके मन में इस पद की लालसा जोरों से दिख रही है। क्योंकि उनका बयान इस बात की ओर संकेत दे रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में वे देश का प्रतिनिधित्व करने को तैयार हैं। देश भर के विपक्षी नेताओं को लामबंद करने की मुहिम में लगे बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार ने कहा है कि वह विपक्षी दलों के साथ मिलकर देश में शासन का मॉडल बनाने पर काम कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं को विश्वास में लेने के अभियान पर सोमवार को यहां पहुंचे श्री कुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद मंगलवार को यहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद मीडिया से मुखातिब हुए श्री कुमार ने एक बार फिर कहा कि वह प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं और न ही इसकी इच्छा रखते हैं। श्री राजा ने जद यू द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का साथ छोड़े जाने का स्वागत करते हुए कहा कि बिहार के मॉडल का प्रभाव समूचे देश पर पड़ता है और इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि सभी दलों को एकजुट होना चाहिए जिससे कि भाजपा को परास्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस मुहिम में हम नीतीश जी के साथ हैं। एक सवाल के जवाब में श्री कुमार ने कहा कि बिहार मॉडल क्या है हम देश में शासन का मॉडल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। श्री कुमार ने कहा कि यदि वाम दल, क्षेत्रीय दल और कांग्रेस एक साथ आ जाये तो यह बहुत बड़ी बात होगी। श्री येचुरी ने कहा कि श्री कुमार का वामदल के पास आना देश में राजनीति के लिए सकारात्मक संकेत है। सभी विपक्षी दलों को मिलकर देश तथा संविधान को बचाना होगा। श्री कुमार ने श्री गांधी से मुलाकात के बाद सोमवार को ही जनता दल एस के नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के साथ भी बातचीत की थी।
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