टीम एबीएन, पटना। सरकार ने बिहार के दीघा तथा सोनपुर को जोड़ने के लिए गंगा नदी पर छह लेन के पुल के निर्माण को बुधवार को मंजूरी दी, जिसके बनने से उत्तर तथा दक्षिण के बीच यातायात की सुविधा को बेहतर बनाया जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज यहां हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस पुल पर 3065 करोड़ रुपए की लागत आयेगी और पुल का निर्माण 42 माह में पूरा किया जा सकेगा। पुल को इस तरह से एक्स्ट्रा केबल से तैयार किया जायेगा कि इसके नीचे गंगा नदी पर बड़े जहाजों की आवाजाही हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि इस पुल की लंबाई 4.5 किलोमीटर होगी और यह छह लेन का होगा। इसके बनने से छपरा, मोतीहारी तथा बेतिया सहित कई जिलों में आवाजाही को आसान बनाया जा सकेगा। पुल का निर्माण साढ़े तीन साल में पूरा किया जा सकेगा।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उनकी सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण तेजी कर रही है और इसके लिए हर बजट की कमी नहीं होने दी जा रही है। उनका कहना था कि 2013-14 में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए बजट 31 हजार 130 करोड़ रुपए था जो अब कई गुना बढ़ाकर दो लाख 30 हजार करोड़ रुपये तक कर दिया गया है।
एबीएन न्यूज नेटवर्क पटना। लोकसभा के 2024 में होने वाले चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की मंगलवार को यहां बिहार प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक हुई जिसमें प्रदेश संगठन की चुनाव तैयारियों की समीक्षा की गयी।
कांग्रेस की बिहार से जुड़ी यह महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक यहां पार्टी मुख्यालय में हुई जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित पार्टी के कई प्रमुख वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया।
श्री खड़गे ने बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव संबंधित तैयारियों को लेकर बिहार प्रदेश कांगेस के नेताओं से चर्चा हुई। बिहार में महागठबंधन सरकार मजबूती से बिहार के लोगों के लिए आशा के अनुरूप काम कर रही है।
हम सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध हैं। बिहार की तरक्की, खुशहाली और अमन-चैन के लिए कांग्रेस का एक-एक कार्यकर्ता पूरी मेहनत से जन-जन तक जाने को और बिहार के लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप खरा उतरने को तत्पर है।
टीम एबीएन, जहानाबाद। हजारीबाग एसीबी की टीम ने शनिवार को विष्णुगढ़ थाना के छोटा बाबू मनोज कुमार को 6000 रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। वादिनी ललिता देवी ने छोटा बाबू मनोज कुमार पर केस मैनेज करने के नाम पर घूस मांगने की शिकायत एसीबी से की थी।
एसीबी ने मामले का सत्यापन कराने के बाद रणनीति बनायी। एक टीम गठित कर मनोज कुमार को घूस लेते गिरफ्तार कर लिया गया। ग्राम-हेठली बोदरा, निवासी ललिता देवी ने एसीबी को दिये आवेदन में बताया था कि इनके पति बदरी यादव के नाम पर विष्णुगढ़ थाना में केस हुआ है।
विष्णुगढ़ थाना के छोटा बाबू मनोज घर आकर केस मैनेज करने को लेकर 10,000 रुपये की मांग की। नहीं देने पर पति को जेल भेज देने की बात कही। काफी मिन्नत के बाद 6 हजार रुपये में सौदा तय हुआ, मगर मैं रिश्वत नहीं देना चाहती हूं। एसीबी की टीम ने पहले मामले का सत्यापन कराया।
इसके बाद जाल बिछाकर कार्रवाई करते हुये मनोज कुमार को रंगेहाथ धर दबोचा। एसीबी की टीम उन्हें अपने साथ हजारीबाग ले गयी, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। बता दें कि छोटा बाबू मनोज कुमार (52 वर्ष) पिता किशोरी मोहन बिहार के जहानाबाद के ग्राम पो. इक्कीस, थाना-मुखदुमपुर के रहनेवाले हैं।
एबीएन, न्यूज नेटवर्क, पटना। 24 दिसंबर को जदयू की वाराणसी में प्रस्तावित रैली स्थगित कर दी गयी है। रैली स्थगित होने के बाद जदयू की तरफ से तर्क दिया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने रैली की जगह नहीं दी, जिसकी वजह से रैली स्थगित करनी पड़ी।
इस खबर के बाद प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला है। नीतीश कुमार की वाराणसी रैली रद्द होने पर प्रशांत किशोर ने बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि नीतीश राष्ट्रीय राजनीति में कोई नेता नहीं हैं। लोकसभा 2024 में इतनी बुरी तरह से हारेंगे कि जदयू पार्टी खत्म हो जायेगी।
दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यूपी के वाराणसी में लोकसभा चुनाव-2024 के मद्देनजर होने वाली रैली कैंसिल हो गयी है। रैली कैंसिल होने के बाद से बयानबाजी का दौर खूब चल रहा है।
जदयू के नेता रैली कैंसिल होने को साजिश बता रहे हैं, तो वहीं भाजपा के नेताओं का बयान है कि नीतीश कुमार को बनारस में वार्ड पार्षद इतना वोट भी नहीं मिलेगा। इन सबके बीच, जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा बयान दिया।
प्रशांत किशोर ने कहा- नीतीश कुमार को ये समझ या आंकलन करने की क्षमता ही नहीं है कि अगर आप महागठबंधन के साथ गये हैं और चुनाव हार गये तो आपकी पार्टी ही नहीं बचेगी, तो गठबंधन करियेगा किसके साथ? स्थिति ये हो जायेगी कि लोकसभा चुनाव-2024 में बुरी तरह से हारेंगे और जदयू पार्टी खत्म।
नीतीश कुमार राजनीति में कोई फैक्टर नहीं हैं। नीतीश राष्ट्रीय राजनीति में कोई महत्व के नेता नहीं हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकसभा चुनाव-2024 के नजरिए से इतना कह सकता हूं कि एक पार्टी जिसकी सबसे बड़ी हार होगी वो जेडीयू है। इस पार्टी को पांच सीटें भी नहीं आयेंगी।
प्रशांत किशोर यहीं नहीं रुके, उन्होंने नीतीश पर एक और तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने महागठबंधन क्यों बनाया गया था, पहले इसे समझिये। नीतीश कुमार को लोग जितना समझते हैं उससे कम मैं भी नहीं जानता हूं।
महागठबंधन बनाने से पहले नीतीश कुमार सबसे पहले मुझसे मिलने दिल्ली आये और मुझे चार घंटे तक समझाया कि महागठबंधन क्यों बनाना चाहते हैं। नीतीश कुमार ने महागठबंधन सिर्फ इसलिए बनाया था, उनको लालू यादव और तेजस्वी यादव से कोई प्रेम नहीं है और भाजपा की नीतियों से दिक्कत भी नहीं है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार के मन में ये डर था कि लोकसभा 2024 तक वो अगर भाजपा के साथ बने रहे तो लोकसभा जीतने के बाद भाजपा वाले मुझे हटा देंगे, क्योंकि बिहार में बड़ी पार्टी तो भाजपा है।
नीतीश कुमार को उस समय ऐसा लग रहा था कि लोकसभा चुनाव-2024 जीतने के बाद भाजपा वाले अपना मुख्यमंत्री बनायेंगे। ऐसे में भाजपा ऐसी स्थिति पैदा करती उससे पहले भाजपा का साथ छोड़ नीतीश कुमार लालू यादव के साथ चले गये। इस फैसले से नीतीश कुमार कम से कम साल 2025 तक तो मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। दिनांक 13 एवं 14 दिसंबर, 2023 को पटना के ज्ञान भवन में बिहार बिजनेस कनेक्ट-2023 (जो कि एक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट है) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के 600 से भी अधिक उद्यमी और निवेशक भाग लेंगे।
मुख्य सचिवालय सभाकक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार के मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने कहा कि बिहार में औद्योगिक विकास के लिए अच्छा माहौल बना है। हम उद्योग जगत को बताना चाहते हैं कि बिहार में निवेश करना तथा नये उद्योग लगाना उनके लिए फायदेमंद होगा।
उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बिहार ने कई प्रोत्साहन नीतियां बनाने के साथ-साथ उद्योगों के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना का भी विकास किया है। प्लग एण्ड प्ले इंडस्ट्रियल शेड जैसी सुविधाओं ने निवेशकों को बिहार में उद्योग लगाने के लिए आकर्षित किया है।
उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने कहा कि बिहार में उपलब्ध सुविधाओं तथा बिहार सरकार की औद्योगिक नीतियों के बारे में निवेशकों को बताने के लिए चेन्नई, तिरूपुर, बैंगलुरू, मुम्बई, नई दिल्ली, चंडीगढ़ और कोलकाता में इंवेस्टर्स मीट आयोजित किये गये।
संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, बांगलादेश, ताईवान तथा जापान में भी इंवेस्टर्स मीट आयोजित कर निवेशकों को बिहार में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में पटना में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित किया जा रहा है। जिसमें मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री अनेक मंत्री, देश के प्रमुख निवेशक तथा उद्योगपति भाग लेंगे।
उन्होंने कहा कि बिहार बिजनेस कनेक्ट-2023 में अडानी ग्रुप से प्रणव अडानी, आईओसीएल की शुक्ला मिस्त्री, नाहर गु्रप आफ इंडस्ट्रीज के कमल ओसवाल, गोदरेज गु्रप के राकेश स्वामी, माईक्रोमैक्स बायोफ्यूल्स के राजेश अग्रवाल, हाई स्पिरिट कॉमर्शियल वेंचर्स के तुषार जैन, एएमडी के हसमुख रंजन, टाईगर एनालिटिक्स के महेश कुमार, एक्सेंचर के प्रशान्त कुमार, सुपरसेवा ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की कुमुद शर्मा, देवरेब कम्पनी के धीरज पाण्डेय, रूब्रीक के अभिलाष पुरूषोतमन, सुरेश चिप्स एंड सेमिकंडक्टर के चंदन राज, सैन इनर्जी एंड सॉलुशन के आनंद प्रकाश, एरिस्टो फार्मा के उमेश शर्मा, हैदराबाद इंडस्ट्रीज लिमिटेड अक्षय सेठ, जेके लक्ष्मी सीमेंट के अरूण शुक्ला, प्रिंस पाइप एंड फिटिंगस के जयंत छेड़ा, पटेल एग्री के डॉ दिलीप पटेल, आईटीसी के बी सुमंत, भारत ऊर्जा डिस्टिलेरिज के शुभम सिंह, अनमोल फीड्स प्राइवेट लिमिटेड के अमित सरावगी, सावी लेदर्स के विजय झा, बांसवाड़ा सिंटेक्स के शालिन तोसनीवाल सहित सैंकड़ो उद्योगपति भाग लेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी गयी कि बिहार देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिहार का सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 10.9 प्रतिशत रहा जो देश में तीसरा सबसे अधिक वृद्धि दर रहा। 2021-22 में पूरे देश के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही।
सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योगों के विकास में बिहार देश में अग्रणी है। वर्ष 2022 में इन उद्योगों के शानदार विकास के लिए बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा सबसे बेहतरीन काम करने वाले राज्य का पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसी तरह फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य निष्पादन के लिए 2023 में बिहार को वर्ल्ड फूड एक्सपो के दौरान माननीय राष्ट्रपति के कर-कमलों से पुरस्कृत किया गया।
बिहार में देश का सबसे युवा और कुशल कार्यबल मौजूद है। प्रदेश की 53 प्रतिशत से अधिक की आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है और बिहार को देश का सबसे युवा राज्य माना जाता है। हर जिले में तकनीकी एवं कौशल विकास की संस्थाओं के माध्यम से अच्छी ट्रेनिंग व्यवस्था बिहार में उपलब्ध है। देश की प्राय: हर बड़े औद्योगिक इकाइयों में बिहार के कुशल कारीगर कार्यरत हैं।
बिहार में टेक्सटाइल, लेदर और फूड प्रोसेसिंग उद्योगों के लिए भारी मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध है। लीची, मखाना, मक्का, आम, मशरूम, आलू, सब्जी आदि के उत्पादन में बिहार देश के अग्रणी तीन राज्यों में शामिल है। बिहार में गंगा, गंडक और कोशी सहित दर्जनों ऐसी नदियां हैं जहां सालों भर पानी रहता है। हर प्रकार के उद्योग के लिए बिहार में पर्याप्त पानी उपलब्ध है।
इथेनॉल जैसे उद्योग जिसमें पानी की आवश्यकता ज्यादा होती है, के लिए बिहार देश के सबसे बेहतरीन राज्यों में एक है। 13 करोड़ की आबादी के साथ बिहार अपने आप में एक बहुत बड़ा बाजार है। बिहार में माल उत्पादन करके नेपाल, भूटान और बांगलादेश में निर्यात किया जा सकता है।
पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर के राज्य, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और उड़ीसा के बाजार को यदि शामिल कर लिया जाए तो बिहार में उत्पादित सामग्री को 40 करोड़ लोगों का बाजार उपलब्ध हो जाता है। पिछले एक दशक में बिहार के सड़क नेटवर्क में अभूतपूर्व सुधार आया है। किसी भी जिला से राजधानी पटना पांच घंटे में पहुंचा जा सकता है।
पिछले एक दशक में 3 लाख किलोमीटर नई सड़कें बिहार में बनायी गयी है। बिहार के हर क्षेत्र में 24 घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध है। सभी 75 औद्योगिक क्षेत्रों में डेडिकेटेड फीडर के माध्यम से उद्योगों के लिए बिजली उपलब्ध करायी गयी है।
निवेश को आकर्षित करने के लिए बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति-2016 है जिसे उद्यमियों की मांग पर 2020 और 2022 में संशोधित भी किया गया है। टेक्सटाइल तथा लेदर, बायोफ्यूल्स, लॉजिस्टिक तथा स्टार्ट-अप के लिए हमारे पास अलग से डेडिकेटेड पॉलिसी है।
जिनके माध्यम से अनेक प्रकार के प्रोत्साहन और अनुदान दिये जाते हैं। राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद को प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योगों की स्थापना के लिए सभी विभागों से इलेक्ट्रॉनिक क्लियरेंस की व्यवस्था की गयी है।
टीम एबीएन, पटना। बिहार के जहानाबाद में अपने कोचिंग सेंटर के बाहर से महीने भर पहले लापता हुई 14 साल की नाबालिग बच्ची चेतना (बदला हुआ नाम) को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से छुड़ाया गया। मध्य प्रदेश पुलिस, बिहार पुलिस और बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की कड़ी मशक्कत और सघन जांच के बाद बच्ची को छुड़ाने में कामयाबी मिली।
इस महीने भर के अर्से में बच्ची को बिहार के गया में बेचा गया और फिर मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के एक गांव के 26 साल के एक युवक से उसकी शादी करायी गयी जहां से आखिर में उसे बचाया गया।
पीड़ित बच्ची तीन नवंबर को सुबह आठ बजे अपने कोचिंग सेंटर के लिए निकली थी। लेकिन देर शाम तक जब वह घर नहीं लौटी तो चिंतित परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। लेकिन बच्ची नहीं मिली तो अगले दिन उन्होंने थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करायी।
छुड़ाए जाने के बाद बच्ची ने महीने भर के दौरान रोंगटे खड़े कर देने वाले घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी। उसने बताया कि उसके करीबी दोस्त आकाश जिसकी उम्र तकरीबन 20 वर्ष है, ने शादी का झांसा देकर उसे घर छोड़कर जाने के लिए मनाया था।
लेकिन उस दिन आकाश शादी के बहाने अपने दो दोस्तों के साथ उसे जहानाबाद के एक होटल में ले गया जहां उन सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद नाबालिग ने आकाश से विवाह के बारे में पूछा तो उसने साफ इनकार कर दिया। सदमे की शिकार चेतना को लगा कि अब वह अपने घर वालों को मुंह नहीं दिखा पायेगी और उसने आत्महत्या करने की सोची।
किसी तरह वह होटल से भाग निकली। वह आत्महत्या करने की सोच रही थी कि तभी उसे मध्य प्रदेश का एक व्यक्ति मिला जिसने भांप लिया कि बच्ची असहाय है और परेशानी की शिकार है। उसने नाबालिग को सब्जबाग दिखाए कि सब ठीक हो जायेगा। कोई रास्ता नहीं देख बच्ची कुछ बेहतर होने की उम्मीद में उसके साथ हो ली।
लेकिन उसके बाद जो हुआ वह साबित करता है कि समाज में चेतना जैसी असहाय बच्चियों के लिए कदम-कदम पर कितने खतरे हैं। वह व्यक्ति बच्ची को बिहार के गया ले गया जहां उसने उसे मध्य प्रदेश के एक आदमी को डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया। बच्ची को मारा पीटा गया, यातनाएं दी गईं और उसी दिन उसका जबरन विवाह करा दिया गया।
इसके बाद उसका कथित पति बच्ची को मंदसौर स्थित अपने घर ले गया जहां उसे दिन में बेरहमी से पीटा जाता और रात को बलात्कार किया जाता। उधर, चेतना के पिता ने उम्मीद नहीं छोड़ी। बिहार पुलिस और बीबीए की टीम लगातार लगातार बच्ची की तलाश में जुटी रही।
बीबीए जो कि बाल विवाह मुक्त भारत गठबंधन का अंग है, इस तरह की स्थितियों में फंसे बच्चों को मुक्त कराने के लिए लगातार काम करता रहा है। बाल विवाह मुक्त भारत गैरसरकारी संगठनों का एक देशव्यापी गठबंधन है जो 2030 तक भारत को बाल विवाह से मुक्त कराने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है।
बच्ची की तलाश में सबसे बड़ी सफलता तब हाथ लगी जब पुलिस ने उसे बेचने वाले व्यक्ति का सुराग लगाकर उसे बिहार के अरवल जिले से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके पास से बच्ची का मोबाइल फोन भी बरामद किया।
गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल की जांच में उसके खाते में एक जगह से एक लाख और एक अन्य खाते से 50 हजार की राशि जमा होने की जानकारी मिली। इन खातों की जांच से पुलिस मंदसौर के उस गांव तक पहुंची जहां बच्ची को रखा गया था। आखिर में बिहार और मध्य प्रदेश पुलिस के साथ चेतना के पिता और बीबीए की टीम मंदसौर पहुंची और आधी रात को बच्ची को मुक्त कराया।
बच्ची को खरीदने वाले कथित पति को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जायेगा जहां उसकी काउंसलिंग की जायेगी। शुरुआत में बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस ने सेक्सन 366 ए के तहत मामला दर्ज किया था लेकिन बीबीए अब आरोपियों के खिलाफ बाल दुर्व्यापार यानी ट्रैफिकिंग से संबंधित धाराएं जोड़ने की पैरवी कर रहा है।
देश में बाल विवाह और बच्चों की ट्रैफिकिंग के मामलों के आपस में जुड़े होने की ओर संकेत करते हुए बीबीए के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि यह एक खतरनाक सच्चाई है कि बाल दुर्व्यापारी चेतना जैसी बहुत सी बच्चियों को विवाह की आड़ में बेच देते हैं जहां उनसे बलात्कार किया जाता है।
इस तरह के आघात और यातना से गुजरने वाला हरेक बच्चा हमारे समाज के चेहरे पर एक तमाचा है। बाल विवाह का खात्मा जरूरी है और यह तभी संभव हो सकता है जब हम इस बुराई की गंभीता को समझते हुए इसके खिलाफ सामूहिक तौर पर युद्धस्तरीय अभियान छेड़ें।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार बिहार में 2019 में लड़कियों के लापता होने के 7299 मामले आये। यद्यपि 2021 में स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला 4578 मामले दर्ज हुए। लेकिन हालात अब भी खतरनाक हैं और बच्चे अब भी असुरक्षित हैं।
एबीएन सोशल डेस्क। प्रेम रावत जीवन और व्यक्तिगत शांति के महत्व को समझने की आवश्यकता पर संदेश प्रस्तुत करेंगे। बोधगया विश्व प्रसिद्ध शिक्षक और बेस्टसेलिंग लेखक, मानवतावादी और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित प्रेम रावत दुनिया भर के श्रोताओं को वास्तव में अपने अंदर स्थित शांति का अनुभव करने और संतुष्टि का जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं।
प्रेम रावत ने अपने अथक प्रयासों से लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और आशा और शांति का एक व्यावहारिक संदेश दिया है। उनका यह संदेश बिना किसी भेदभाव के हर एक मनुष्य के लिए है। उन्होंने चार साल की छोटी उम्र से ही इस विषय में बोलना शुरू कर दिया था। उनका मुख्य संदेश है अपने आपको जानो जीवन के महत्व को समझो। यह एक व्यवहारिक संदेश है, जो मनुष्य को व्यक्तिगत संतुष्टि देता है। वो 11 वर्ष बाद गया में पुन: 26 नवम्बर को आ रहे हैं।
प्रेम का लक्ष्य शिक्षा के व्यावहारिक उपकरणों का उपयोग करके लोगों को फिर से अपने खुद के संपर्क में लाना है। उनका संदेश उनके गहन व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। उन्होंने पिछले छह दशकों से अधिक समय में 5,500 से अधिक इवेंट को संबोधित किया है। बोधगया के औरा गांव में अन्नपूर्णा राइस मिल के पास, राज विद्या केंद्र द्वारा आयोजित इस विशाल कार्यक्रम में प्रेम रावत हजारों लोगों को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे से दोपहर तक निर्धारित है।
कार्यक्रम में भारत और विदेशों की कई जगहों से हजारों लोग कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना शुरू कर देंगे। प्रेम रावत जिस शांति की बात करते हैं। उसे अनुभव करने का एक व्यावहारिक तरीका भी बताते हैं वो अपनी पुस्तकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वेबसाइट की सामग्री, मीडिया साक्षात्कार और इन सबसे बढ़कर अपने लाइव कार्यक्रमों के माध्यम से दुनिया भर में लाखों लोगों को अपना संदेश देते हैं।
केवल 2023 में प्रेम रावत ने टीवी, प्रिंट और रेडियो सहित, मीडिया के सभी माध्यमों से 775 मिलियन से अधिक लोगों को अपना संदेश दिया है। प्रेम रावत ने हाल ही में दुबई, संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की जहां एक तरफ उन्होंने दुनिया भर के शिक्षकों को अपने पीस एजुकेशन प्रोग्राम से परिचित कराया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपनी बेस्टसेलिंग पुस्तक हियर योरसेल्फ: हाउ टू फाइंड पीस इन अ नोइजी वर्ल्ड का अरबी संस्करण लॉन्च किया।
उनकी इस ऐतिहासिक यात्रा ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया। जो उनकी अंतर्दृष्टि और प्रयासों को लाखों लोगों तक पहुंचा रहे हैं। कुछ दिनों बाद, प्रेम रावत को संयुक्त अरब अमीरात में प्रसिद्ध शारजाह अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक मेले में आयोजित एक कार्यक्रम में उनकी सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक के अरबी संस्करण के विमोचन के अवसर पर बोलने के लिए भी आमंत्रित किया गया था। 50 से अधिक वर्षों से प्रेम रावत ने 100 से अधिक देशों में लाखों लोगों को शांति का दिया है।
भारत में जन्मे प्रेम रावत ने अपना पहला सार्वजनिक संबोधन चार साल की उम्र में दिया। तेरह साल की उम्र में उन्होंने दुनिया भर में अपना संदेश देना शुरू किया। एक प्रतिभाशाली बालक और 70 के दशक के किशोर से लेकर विश्व शांति दूत बनने तक प्रेम रावत ने लाखों लोगों को असाधारण स्पष्टता, प्रेरणा और जीवन की गहरी सीख दी है। पीस इज पॉसिबल और हियर योरसेल्फ के बेस्टसेलिंग लेखक और प्रेम रावत फाउंडेशन के संस्थापक प्रेम रावत जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों के साथ कार्य करते हैं।
उन्हें बताते हैं कि अपने भीतर शांति के स्रोत का अनुभव कैसे करें। उनका यह प्रयास विश्व के एक सौ से अधिक देशों तक फैला हुआ है। आशा, खुशी और शांति का उनका यह व्यावहारिक संदेश प्रत्येक मनुष्य के लिए है। उनके संदेश का 40 से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उनके द्वारा बनाया गया पीस एजुकेशन कार्यक्रम जेलों में, युद्ध से तबाह देशों में, वयोवृद्ध केंद्रों में अस्पतालों में सिखाया जाता है। इसका प्रसार विश्व के 80 देशों में है। दुनिया भर में एक हजार से अधिक स्कूलों और विश्वविद्यालयों में अपनाया गया।
यह कार्यक्रम जीवन के सभी क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। जिसमें समाज और संघर्ष से हाशिए पर रहने वाले लोग भी शामिल हैं। यह प्रतिभागियों को व्यक्तिगत शांति का वास्तविक अनुभव करने के लिए प्रेरित करता है। वर्ष 2012 में उन्हें ब्रांड लारिएट इंटरनेशनल हाल आफ फेम लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
वो इस अवार्ड के चौथे प्राप्तकर्ता बने। इस अवार्ड के अन्य प्राप्तकर्ता नेल्सन मंडेला और स्टीव जॉब्स थे। प्रेम रावत का उल्लेख गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में किया गया है। उनकी पुस्तक स्वयं की आवाज के बुक लांच के अवसर पर सर्वाधिक श्रोता 1,14,704 उपस्थित हुए। यह किसी एक लेखक द्वारा अपनी पुस्तक पढ़ने के अवसर पर सबसे अधिक श्रोताओं की उपस्थिति का रिकार्ड है।
यह पुस्तक हियर योरसेल्फ हार्पर कॉलिन्स प्रकाशक द्वारा मूल में अंग्रेजी में प्रकाशित हुई है। रावत पायलट भी हैं। जिन्हें 15 हजार घंटो की उड़ान का अनुभव प्राप्त है। वह वह एक आविष्कारक, फोटोग्राफर, क्लासिक कार रेस्टोरर और साथ ही एक सफल पारिवारिक व्यक्ति हैं। उनकी चार संतानें हैं। जबकि वह चार बच्चों के दादा भी हैं।
टीम एबीएन, पटना। छठ जीवन के उजास का पर्व है। पारंपरिक लोक गीतों की धुन पर जब पूरा समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत को आंचल में समेटे प्रकृति के साथ आबद्ध होकर पूरी सादगी और स्वच्छता के साथ एकजुट खड़ा हो जाता है, तब छठ होता है।
पूर्वांचल का यह त्योहार अब राज्य और देश की सीमाओं को लांघते हुए विश्व के अनेक देशों में पहुंच चुका है। वस्तुतः बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग देश-विदेश में जहां भी गये, अपने गमछे में यहां की संस्कृति को बांधकर ले गए। उनके साथ गई महिलाओं ने अपने आंचल में संस्कारों और लोकगीतों का खोइंचा लेकर गयीं।
तभी तो छठ का त्योहार अब चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, गोवा, दिल्ली, चंडीगढ़ इंदौर जैसे स्थानों पर तो मनाया ही जाता है; विदेशों में लंदन, बर्लिन, मास्को, वाशिंगटन और नेवार्क जैसे वृहद शहरों में भी मनाया जाता है। मॉरीशस, फिजी और गुयाना जैसे देशों में तो हजारों लोग इस पर्व को मनाते हैं।
पूर्वी भारत में जितने भी लोक त्योहार मनाया जाते हैं, सब में महिलाएं एक साथ मिलकर गीत गाती हैं। भैया दूज हो या रक्षाबंधन, कार्तिक पूर्णिमा हो या एकादशी- लोक परंपरा से जुड़े सभी त्योहारों के दौरान लोक गीत गाए जाते हैं, लेकिन छठ की बात ही कुछ और है। इसे त्योहार की जगह महापर्व का दर्जा दिया गया है। लोक आस्था के महापर्व के गीत पूरी तरह प्रकृति को समर्पित हैं।
पारंपरिक धुनों पर सुरुज देव और छठी मैया की महिमा का बखान। साथ ही उन सभी प्राकृतिक सामग्रियों का भी बखान जिनका उपयोग छठ पर्व के दौरान किया जाता है। छठ से जुड़ी परंपराओं और छठ की पवित्रता को बरकरार रखने की कोशिशों का बखान। ये सभी छठ गीतों की कुछ खास विशेषताएं हैं।
जिस प्रकार आत्मा के बिना शरीर का अस्तित्व नहीं हो सकता, उसी प्रकार इस चराचर जगत की सत्ता भगवान भास्कर पर ही अवलंबित है। धरती यदि हमारी माता हैं तो सूर्य पिता हैं । पृथ्वी पर जब-जब संकट के क्षण आते हैं, इसकी रक्षा के लिए सूर्य देव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय हो जाते हैं। भगवान भास्कर में असीम शक्ति है।
इतनी प्रचंड शक्ति कि सारी प्रकार की व्याधियों का नाश सूर्य की किरणों से संभव है। 2023 में जब हम अटूट विश्वास के इस पर्व को मना रहे हैं तो सब की कामना यही है समस्त विश्व सुख और शांति फैले तथा अपने देश एवं बिहार राज्य की चहुमुखी प्रगति हो। विश्व पर मंडरा रहे खतरे और चिंताओं का नाश हो।
शुद्धता, स्वच्छता और असीम श्रद्धा छठ पर्व को खास बनाते हैं। हमें सदैव शुद्धता और स्वच्छता पर ध्यान देने की जरूरत है। छठ के दौरान स्वच्छता का भाव व्यक्तिगत स्तर पर भी दिखता है और सार्वजनिक स्तर पर भी। छठ व्रती अपने अपने घरों की सफाई तो करते ही हैं, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और स्वच्छता के लिए लोग स्वेच्छा से आगे आते हैं। इससे वातावरण में विशेष प्रकार की पवित्रता समाहित हो जाती है ।
इस महापर्व के दौरान गाये जाने वाले लोकगीतों की परंपरा बहुत ही समृद्ध रही है। इस चार दिवसीय अनुष्ठान की सारी गतिविधियों को गीतों में स्थान मिला है। पहला दिन नहाय-खाय का होता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। सभी व्रतधारी गीत गाते हुए गंगा स्नान के लिए जाते हैं। तट पर बैठकर भी मां गंगा की स्तुति की जाती है-
वस्तुतः मां गंगा के तट पर छठ पर्व करने का आनंद सबसे विशिष्ट होता है। लेकिन इस पर्व के दौरान एक और खास बात होती है और वह यह कि जिस किसी भी नदी या तालाब के तट पर छठ का महापर्व आयोजित होता है, वह तक भी पटना का गंगा घाट बन जाता है-
आधुनिकता ने छठ की सामग्रियों को बाजार का विषय बना दिया है। लेकिन पारंपरिक रूप से देखा जाए तो छठ सामाजिक समरसता का त्यौहार है। समाज के सभी वर्गों की भागीदारी छठ के सामग्रियों में होती है। कुम्हार के घर से दीया आता है तो जुलाहे के घर से बाती। डोम के घर से सुप आता है तो मालिन के घर से फूल। एक लोकगीत में छठ व्रती महिला अपने पति से गुजारिश करती है-
प्रकृति के कण-कण में जब सूर्य देव की सुनहरी किरणें प्रविष्ट होती हैं तो प्रकृति का रोम-रोम सिंदूरी हो उठता है । सूर्यदेव कभी केले के पत्ते पर तो कभी नारियल के पत्ते पर उदित होते दिखाई पड़ते हैं । छठ व्रती महिलाएं गाती हैं-
इस प्रकार के सवाल-जवाब के माध्यम से छठ व्रती स्त्री दूसरी स्त्री को बताती है कि वह अपने पुत्र-पुत्री और अपने स्वामी के सुख और समृद्धि के लिए यह छठ व्रत कर रही हैं। लोकगीतों में छठ पूजा की सामग्रियों की चर्चा बार-बार होती है। कांच ही बांस के बहंगिया बहुत ही चर्चित और प्रसिद्ध छठ गीत है-
छठ पूजा में पवित्रता का बहुत महत्व है, जो भी सामग्री पूजा के लिए उपयोग में लाई जाती है, वह पूरी तरह से शुद्ध होनी चाहिए । एक लोकगीत में जब तोता छठ की सामग्री को जूठा करने का प्रयास करता है, तो उसकी खूब खबर ली जाती है-
सुगा यानी तोता जब छठ सामग्री को जूठा करने के प्रयास में वाण लगने से मूर्छित हो गिर पड़ता है, तो फिर छठ व्रती महिला आदित्य देव से प्रार्थना करती हैं-
महापर्व छठ के लोकगीतों में सामाजिक ताने-बाने का एक दूसरा स्वरूप ही देखने को मिलता है। ग्रामीण भारतीय समाज में प्रायः हर लोक पर्व में बेटे की कामना की जाती है । लेकिन छठ के एक गीत में बेटी की कामना बड़े ही निराले अंदाज में की गयी है-
छठ गीतों में शारदा सिन्हा और विंध्यवासिनी देवी के गाये गीत सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। अनुराधा पौडवाल, कल्पना, देवी, मैथिली ठाकुर आदि के गीत भी खूब बजते हैं। जिंदगी के केंद्र में सूरुजदेव हैं। जगत को समस्त ऊर्जा की प्राप्ति सूर्य से होती है। प्रतिवर्ष इस पवित्र लोक पर्व के दौरान लोक गायकों और गायिकाओं द्वारा नये-नये गीत भी पेश किए जाते हैं।
हमने भी छठ के कई गीत गाये हैं जिनमें मगही, मैथिली और भोजपुरी गीत शामिल हैं। चननी तानले चलथि रघुवीर सेवका घुटी भर धोती भींजे, सोना षट्कोनिया हे दीनानाथ हे घुमइछा संसार पारंपरिक और कौने खेत जनमल धान-सुधान हो, कौने खेत डटहर पान हे माई गीतों के बोल हैं।
वस्तुतः छठ गीतों की एक बड़ी ही समृद्ध परंपरा रही है। विंध्यवासिनी देवी और शारदा सिन्हा ने जो छठी मैया के जो गीत गाए हैं, वह अभी लोगों की जुबान पर हैं। बिहार के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग पारंपरिक छठ गीत गाये जाते हैं। छठ पर्व के दौरान इन गीतों का बहुत महत्व होता है। लोकगीतों के बिना छठ पर्व अधूरे लगते हैं। (नीतू कुमारी नवगीत बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका हैं।)
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