एबीएन न्यूज नेटवर्क, गया। बिहार के गया में भारतीय सेना के अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी का एक हेलीकॉप्टर मंगलवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें दो पायलट सवार थे। एक महिला सहित पायलट मामूली चोटें आयी।
हालांकि जान माल का नुकसान नहीं हुआ। बता दें कि हेलीकॉप्टर अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (ओटीए) का है और नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम पर था। यह घटना बोधगया उपमंडल के कंचनपुर गांव में घटी।
ग्रामीणों ने कहा कि जब हेलीकॉप्टर एक कृषि क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुआ तो उस समय दो पायलट उसके अंदर थे। ग्रामीणों ने दोनों पायलटों को बचाने में मदद की और बाद में स्थानीय पुलिस और ओटीए को घटना की जानकारी दी। ओटीए अधिकारी गांव पहुंचे और दोनों पायलटों को इलाज के लिए बेस कैंप ले जाया गया।
टीम एबीएन, रांची/ पटना। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में रविवार को आयोजित महागठबंधन के जन विश्वास महारैली में भाग लेने के लिए रांची जिला राजद के अध्यक्ष धर्मेंद्र महतो के नेतृत्व में विभिन्न प्रखंडों और पंचायत के हजारों कार्यकर्ता छोटी बड़ी गाड़ियों और ट्रेन मार्ग से पटना पहुंचे। पटना में श्री महतो के नेतृत्व में रांची जिला राजद के कार्यकर्ताओं ने राजद नेता तेजस्वी यादव के सम्मुख अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।
श्री यादव ने झारखंड से आये कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए उन्हें गांधी मैदान पहुंचने का आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि जन विश्वास महारैली में भाग लेने के लिए जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र महतो के साथ प्रदेश के महासचिव भास्कर वर्मा भी कार्यकर्ताओं के साथ पटना गये हैं।
राजद कार्यकर्ता और नेता पार्टी के झंडा और बैनर के साथ नारेबाजी करते हुए छोटी-छोटी गाड़ियों और ट्रेन से शनिवार को ही पटना के लिए रवाना हुए और रविवार को भी महारैली में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार की स्टार्ट-अप इकाइयों को स्केल-अप फंडिंग प्रदान करने के उद्देश्य से स्टार्ट-अप बिहार ने सिडबी के साथ हाथ मिलाया है। इसके लिए 150 करोड़ रुपये के बिहार स्टार्ट-अप स्केल-अप फाईनेंसिंग फंड की स्थापना संबंधी समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया गया। इसमें सिडबी का अंशदान 100 करोड़ रुपये एवं स्टार्ट-अप बिहार का अंशदान 50 करोड़ रुपये होगा।
उप मुख्यमंत्री-सह-उद्योग मंत्री सम्राट चौधरी एवं उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक की उपस्थिति में समझौता पत्र पर स्टार्ट-अप बिहार की और से उद्योग निदेशक पंकज दीक्षित तथा सिडबी की ओर जेनरल मैनेजर अरिजीत दत्त ने हस्ताक्षर किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री-सह-उद्योग मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार देश के विकासशील राज्यों में से एक है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में बिहार दृढ़ संकल्प के साथ एक मजबूत राज्य बनकर उभरा है। उद्योग विभाग द्वारा स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। स्टार्ट-अप नीति, 2022 के तहत स्क्रीनिंग, मूल्यांकन, पिचिंग और फंडिंग के लिये चयन प्रक्रिया 45 दिनों के अंदर पूरा कर लिया जाता है जो प्रशंसनीय है।
अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने इस अवसर कहा कि बिहार स्टार्ट-अप नीति के अन्तर्गत लाभुकों को दस लाख रूपये तक सीड फंड की राशि देने का प्रावधान है। यह राशि ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दी जाती है, जिसे 10 वर्षों के उपरान्त लौटाना होता है।
साथ ही महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए महिला उद्यमियों को निर्धारित सीमा से 5 प्रतिशत अतिरिक्त फंडिग का लाभ दिया जाता है। योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा दिव्यांग उद्यमियों को 15 प्रतिशत अतिरिक्त फंडिंग का लाभ दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि बिहार में पंजीकृत स्टार्ट-अप यदि एंजेल इन्वेस्टर अथवा सेबी रजिस्टर्ड निवेशकों से निवेश लेने में सफल होते हैं तो उन्हें 2 प्रतिशत की प्रोत्साहन राशि तथा निवेशित राशि का अधिकतम 50 लाख रूपये तक का मैचिंग फण्ड दिया जाता है। सिडवी के साथ समझौता हो जाने से बिहार का स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम और मजबूत होगा।
मौके पर उद्योग निदेशक पंकज दीक्षित ने जानकारी दी कि बिहार स्टार्ट-अप नीति के अन्तर्गत कुल 585 स्टार्ट-अप्स को चयनित किया जा चुका है, और इन्हें सीड फण्ड के रूप में 58.50 करोड़ की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। विभाग द्वारा 31 करोड़ 38 लाख रूपये इन स्टार्ट-अप्स को सीड फंड (ऋण राशि) के रूप में वितरित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बिहार के लगभग सभी जिलों से स्टार्ट-अप का चयन किया गया है।
ये स्टार्ट-अप आर्टिफिसियल इंटेलिजेन्स, सूचना प्रौद्योगिकी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन, लेखन एवं पत्रकारिता, कृषि, कृषि-तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा-तकनीकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। उद्योग निदेशक ने बताया कि नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिये चन्द्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना के द्वारा स्टार्ट-अप बिहार के सहयोग से पीजीडीएम पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।
स्टार्ट-अप बिहार द्वारा विद्यार्थियों एवं युवाओं के बीच उद्यमिता एवं स्टार्ट-अप के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य भर में विभिन्न महाविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, तकनीकी संस्थानों में विभिन्न कार्यक्रम यथा- स्टार्ट-अप ऑउटरीच कार्यक्रम, आईडियाथॉन, हैकथॉन आदि का आयोजन किया जाता है।
राज्य भर में विभिन्न महाविद्यालयो, अभियंत्रण महाविद्यालयों, संस्थानों एवं तकनीकी संस्थानों में 43 स्टार्ट-अप सेल का स्थापना की जा चुकी है तथा 7 नये स्टार्ट-अप सेल का गठन प्रक्रियाधीन है।
इस अवसर पर सिडबी के जेनरल मैनेजर अरिजीत दत्त ने जानकारी दी कि सिडबी 1995 से विभिन्न एमएसएमई केंद्रित वेंचर कैपिटल फंड्स के कोष में योगदान देकर फंड ऑफ फंड्स संचालन कर रहा है।
सिडबी ने पिछले कुछ वर्षों में फंड ऑफ फंड्स संचालन करने में दक्षता हासिल की है। सिडबी द्वारा सिडबी भारत एस्पिरेशन फंड, और एस्पायर फंड, स्टार्ट-अप ऑफ गवेर्मेंट ऑफ इण्डिया फंड, यूपी स्टार्ट-अप फंड तथा ओड़िशा स्टार्ट-अप ग्रोथ फंड जैसे फंड ऑफ फंड्स का संचालन किया जाता है।
समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर कार्यक्रम में तकनीकी विकास निदेशालय के निदेशक विशाल राज, हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय, उद्योग विभाग के विशेष सचिव दिलीप कुमार एवं संयुक्त सचिव योगेश कुमार सागर, सहायक उद्योग निदेशक ज्योति कुमारी आदि मौजूद रहे।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, भागलपुर। बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा सैण्डिश कंपाउंड में लगाये गये खादी मेला-सह-उद्यमी बाजार में जिला उद्योग केंद्र द्वारा बिहार लघु उद्यमी योजना के संबंध में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में जिला उद्योग केन्द्र के प्रभारी महाप्रबंधक मनीष कुमार ने बताया कि बिहार राज्य में जाति आधारित गणना में परिवार की मासिक आय के आधार पर आर्थिक रूप से गरीब परिवारों की सहायता के लिए बिहार लघु उद्यमी योजना लागू की गयी है। इस योजना का लक्ष्य गरीब परिवारों के आािर्थक विकास को सुनिश्चित करते हुए बेरोजगारी में कमी लाना है।
प्रभारी महाप्रबंधक ने बताया कि इस योजना के तहत रोजगार के लिए प्रत्येक गरीब परिवार के कम से कम एक सदस्य को 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लाभ प्राप्त करने हेतु आवेदन करने वाले लोगों का बिहार का निवासी होना अनिवार्य है।
लाभुक की उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा लाभुक की पारिवारिक आय प्रतिमाह छ: हजार रुपए से कम होनी चाहिए। सहायता राशि तीन किश्तों में दी जायेगी। प्रथम किस्त में परियोजना लागत की 25 प्रतिशत, द्वितीय किस्त में परियोजना लागत की 50 प्रतिशत एवं तृतीय किस्त में परियोजना लागत की 25 प्रतिशत राशि दी जायेगी।
प्रत्येक किस्त के सदुपयोग करने के बाद ही अगली किस्त की राशि दी जायेगी। प्रथम किस्त का उपयोग लाभार्थी द्वारा टूलकिट/मशीन का क्रय के लिए प्रयोग किया जायेगा। योजना के तहत लाभ पाने वाले लाभुकों को 61 प्रकार की परियोजनाओं में से किसी एक का चयनित करना होगा।
जिला स्तर पर योजना के अनुश्रवण हेतु जिला अनुश्रवण समिति का गठन कर लिया गया है जिसके अध्यक्ष जिला पदाधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लाभ लेने के लिए उद्योग विभाग के पोर्टल www.udyami.bihar.gov.in पर आनलाइन आवेदन करना है जिसकी अंतिम तिथि 20 फरवरी, 2024 है।
जागरूकता कार्यक्रम में बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के जिला खादी एवं ग्रामोद्योग पदाधिकारी बैद्यनाथ सिंह, यंग कंसलटेंट एमजे सिन्हा, उद्योग विस्तार पदाधिकारी शशि श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
मेला में खादी एवं ग्रामोद्योग पदाधिकारी बैद्यनाथ सिंह ने बताया कि मेला में बड़ी संख्या में खादी प्रेमी आ रहे हैं और खादी प्रेमियों के मांग पर ही मेला विस्तार 18 फरवरी, 2024 तक कर दिया गया है।
एबीएन न्यूजन नेटवर्क, मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले में एक चौंकाने वाली घटना में स्थानीय बाजार में लड़कियों के साथ साथ घूमते पाए जाने पर असामाजिक तत्वों ने मारपीट कर तीन लड़कों का जबरन विवाह करवा दिया। घटना एक फरवरी की रात की है और अगले दिन कहीं जाकर इस मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचित किया गया। लड़कों के परिजनों को इस विवाह के बारे में सूचित भी नहीं किया गया। आधार कार्ड में दर्ज उम्र के हिसाब से तीनों लड़कों की उम्र विवाह के लिए कानूनी तौर पर मान्य 21 वर्ष से काफी कम है।
इस घटना की जानकारी मिलते ही बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के सहयोगी संगठन ग्राम विकास युवा ट्रस्ट ने स्थानीय थाने से संपर्क किया। लेकिन थाने से त्वरित कार्रवाई नहीं होते देख ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय एसडीएम व बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी (सीएमपीओ) को लिखित अर्जी दी। सीएमपीओ ने इसके जवाब में स्थानीय थाना प्रभारी एवं प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को इस बारे में उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद ग्रामीणों के विरोध की आशंका के कारण पुलिस बोर्ड परीक्षाओं की आड़ लेकर कार्रवाई में आनाकानी करती रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अंत में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने जिले की चाइल्ड हेल्प लाइन (जिला बाल संरक्षण इकाई) और जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डालसा) से संपर्क किया। इन दोनों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस लड़कियों के गांव पहुंची और इस संबंध में छह मामले दर्ज करने के बाद तीनों लड़कियों एवं लड़कों को बाल संरक्षण इकाई के सुपुर्द कर दिया। चाइल्ड हेल्प लाइन ने काउंसलिंग के बाद शुक्रवार शाम तीनों लड़कियों को अस्थायी बालिका गृह एवं लड़कों को बाल गृह भेज दिया।
इस मामले में फिलहाल आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने विवाह कराने वाले पंडित और मारपीट कर जबरन विवाह कराने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों व पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार इन सभी लड़के-लड़कियों की आपस में काफी समय से जान-पहचान थी और ये स्थानीय बाजार में अक्सर साथ देखे जाते थे। लड़कियों के गांव के कुछ असामाजिक तत्वों को यह नागवार गुजरा और उन्होंने इन लड़कों को पकड़ कर पहले मारा-पीटा और बाद में उनका विवाह करा दिया।
बाल विवाह मुक्त भारत (सीएमएफआई) देश को 2030 तक बाल विवाह से मुक्त कराने के लक्ष्य के साथ एक मंच पर आए 160 से ज्यादा गैरसरकारी संगठनों का एक गठबंधन है। ये संगठन देश में बाल विवाह की उच्च दर वाले 300 से ज्यादा जिलों में पूरी तरह महिलाओं की अगुआई में जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे हैं।
बाल विवाह मुक्त भारत के संयोजक रवि कांत ने इस घटना को प्रशासन व स्थानीय ग्रामीणों की विफलता करार देते हुए कहा कि समूचा प्रकरण कई मायनों में शर्मनाक है। बिहार एक ऐसा राज्य है, जहां बाल विवाह की दर 40 प्रतिशत है और राज्य सरकार इसकी रोकथाम के तमाम उपाय कर रही है। इसी उद्देश्य से यह कानून लाया गया था जिसमें बाल विवाह के लिए पंचायत पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की गई थी। पंचायत पदाधिकारियों को बाल विवाह के बारे में सूचित करने और इसकी रोकथाम का जिम्मा सौंपा गया था।
इसके बावजूद स्थानीय मुखिया या सरपंच ने पुलिस या प्रशासन को सूचित करने की जहमत नहीं उठाई जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा- सूचना होने के बावजूद पंचायत प्रतिनिधियों ने किसी को जानकारी नहीं दी और प्रशासनिक निदेर्शों के बावजूद पुलिस ने कार्रवाई में सुस्ती दिखाई जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि चूक हर स्तर पर हुई है और बाल विवाह को रोकने के लिए अपेक्षित गंभीरता का अभी भी अभाव है। इससे संंबंधित और जानकारी के लिए जितेंद्र परमार (8595950825) से भी संपर्क किया जा सकता है।
टीम एबीएन, रांची/ पटना। महज 7 महीने पहले बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 9वीं बार शपथ लेने वाले नीतीश कुमार, राजधानी पटना में 18 विपक्षी दलों के साथ भाजपा के खिलाफ पहली बैठक की मेजबानी कर रहे थे। आगामी लोकसभा चुनावों से पूर्व यह पहला मौका था जब भाजपा और पीएम नरेंद्र मोदी के लिए एक संगठित विपक्ष की चुनौती तैयार हो रही थी। लेकिन अब सब कुछ बदल गया है।
नीतीश एक बार फिर भाजपा का दामन थाम चुके हैं और राजग का हिस्सा बनते ही अपने हाल ही में विरोधी हुए पुराने साथियों से तीखी प्रतिक्रिया का सामना कर रहे हैं। कभी नीतीश के करीबी रहे राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने तो यहां तक कह दिया कि नीतीश को शर्म आनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद विपक्ष के लोकतंत्र बचाने के प्रस्ताव पर दस्तखत किये थे।
उन्होंने धोखा दिया है। नीतीश के इस फैसले को धोखे के रूप में लेने वाले राजनेताओं से लेकर राजनीति की समझ रखने वाले आम इंसान तक (जो भाजपा या एनडीए के विरोध में रहे हैं) सोशल मीडिया से चाय की टापरी तक नीतीश को पलटीमार पुकार रहे हैं।
पलटीमार का पर्याय बताये जाने के पीछे एक विशेष कारण उनका वह बयान भी है जब अभी कुछ महीने पहले ही नीतीश ने भाजपा के साथ जाने से बेहतर मर जाना कुबूल किया था। लेकिन महज 45 विधायकों के सहारे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे नीतीश कुमार की रणनीति को समझना, उन्हें पलटीमार बता देने जितना आसान नहीं है।
नीतीश के जिस फैसले पर इंडिया एलायंस की नींव खोखली हो गयी, बिहार की सरकार गिर गयी, बावजूद इसके तेजस्वी यादव ने नीतीश के खिलाफ नरमी बनायी रखी। दूसरी तरफ राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा लेकर बिहार में घुसे, लेकिन नीतीश पर एक शब्द नहीं बोले। इसके पीछे भी एक महत्वपूर्ण कारण है और वह यह कि जो नीतीश के कभी भी किसी भी खेमे में शामिल होने के चरित्र को समझते हैं।
वह उनके खिलाफ आग उगलने से बेहतर चुप रहना समझते हैं, क्योंकि कल जरुरत पड़ने पर नीतीश फिर एनडीए का साथ छोड़ विपक्षी पाले में जा सकते हैं। क्योंकि वह सिर्फ अपनी परवाह करते हैं न कि इस बात कि कौन क्या सोचेगा? उनकी राजनीतिक नैतिकता पर प्रश्न खड़े करेगा या नैतिक और मौलिक पैमाने पर उनकों किस तरह से आंका जायेगा।
उन्हें इन बातों की फिक्र नहीं है और इसलिए उनसे राजनीति के लोगों को सीखने की जरुरत भी है कि कैसे विरोधी सुरों को अपने सुर में मिलाया जाता है। जो अमित शाह मंचों से कहते सुने गये कि नीतीश के लिए अब एनडीए के दरवाजे बंद हो चुके हैं और जो सम्राट चौधरी नीतीश को सत्ता से बेदखल करने तक पगड़ी न खोलने की बात कहते थे, आज नीतीश के सर पर पगड़ी सजा रहे हैं।
यूं देखें तो नीतीश ने उन लोगों को ही पलटूमार साबित कर दिया है, जो अब कभी उनके साथ न रहने की कसमें खा चुके थे। हालांकि नीतीश के एनडीए में जाने के फैसले के पीछे आगामी लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी का निजी लाभ भी शामिल है। कैसे?
जाहिर है पिछले 10 सालों में चार बार दल बदलने के फैसले के पीछे हर बार नीतीश का फायदा ही छिपा होता है। चूंकि अगले दो महीनों में देश के आम चुनाव होने हैं और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खासकर राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम मोदी की जो इंटरनेशनल छवि बनी है, नीतीश बहुत अच्छे से समझते हैं कि उस छवि के आगे फिलहाल किसी और छवि का कारगर साबित होना काफी मुश्किल है।
वह इंडिया गठबंधन की कमजोरियों को भी अच्छे से समझ गये हैं और आश्वस्त हैं कि इस गठबंधन से उनका कोई लाभ नहीं होने वाला है। वहीं उनके फैसले को इस नजर से भी देखा जा सकता है कि पिछले दो लोकसभा चुनावों में उनको एनडीए के साथ और खिलाफ रहने के परिणामों में भी भारी अंतर देखना पड़ा था। यानी 2014 के लोकसभा में जेडीयू ने जब अकेले चुनाव लड़ा था तो महज दो सीटें ही हाथ लगी थीं, वहीं 2019 के चुनावों में जब वह भाजपा के साथ आये तो 16 सीटें जीतने में सफल हुए थे।
इशारा साफ है, नीतीश अब एक बार फिर लोकसभा चुनावों से पहले जदयू के लाभ को ध्यान में रखते हुए भाजपा खेमे में शामिल हो गये हैं। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि लोकसभा चुनावों के बाद राजनीतिक लाभ लेकर नीतीश एक बार फिर पाला बदल लें।फिलहाल नीतीश भाजपा और एनडीए गठबंधन के साथ हैं, और उन आशंकाओं से भी बाहर आ गये हैं जो राजद के साथ रहते हुए उनकी पार्टी में फूट की ओर इशारा कर रही थी। और अंत में हम यह कह सकते हैं कि नीतीश कुमार ही भारतीय राजनीति के अगले चाणक्य हैं, उनका सानी कोई नहीं! (लेखक राजनीतिक रणनीतिकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। उद्योग विभाग स्टार्ट-अप टीम ने पटना के ज्ञान भवन में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है, जिसका उद्घाटन विभाग के अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने किया। उद्घाटन सत्र में बिहार के स्टार्ट-अप उद्यमियों को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव संदीप पौण्डरीक ने कहा कि बिहार में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए विभागीय स्तर पर अनेक प्रयास किये गये हैं।
हम स्टार्ट-अप इकाइयों की मदद इस तरह से करना चाहते हैं कि बिहार के स्टार्ट-अप अपनी ग्लोबल पहचान बनायें और यहां के स्टार्ट-अप उद्यमी न सिर्फ राज्य के अर्थव्यवस्था को मजबूत करें बल्कि पूरी दुनिया में छा जायें। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप बिहार द्वारा आयोजित कार्यशाला में अनेक सफल स्टार्ट-अप उद्यमियों के साथ संवाद करने का मौका बिहार के उद्यमियों को मिलेगा।
दूसरे के अनुभवों से सीख कर हम सफलता की सीढ़ियां तेज गति से चढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा सपनों को पंख लगाने तथा उन्हें उड़ान भरने के लिए खुला आसमान देने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने बिहार स्टार्ट-अप पॉलिसी 2022 बनायी है।
इस नीति के तहत लाभ पाने वाले उद्यमियों को-वर्किंग स्पेस उपलब्ध कराने के लिए पटना में दो स्थानों-मौर्यालोक और वित्त निगम भवन, फ्रेजर रोड में बी-हब बनाया गया है जिसमें मौर्यालोक स्थित बी-हब बन कर तैयार है।
बी-हब में सीटों के आवंटन हेतु बिहार स्टार्ट-अप के पोर्टल पर आनलाइन आवेदन किया जाता है और सीटों का आवंटन अधिकत्तम 02 वर्ष की अवधि के लिये किया जाता है। बी-हब में स्थायी सीटों का मासिक किराया 1500 रुपये, परिवर्तनशील सीटों के लिए मासिक किराया 1000 रुपये तथा दैनिक आधार पर 100 रुपये प्रतिदिन के आधार पर सीट आवंटित किये जाते हैं।
मौर्यालोक बी-हब में कुल 185 सीटों की व्यवस्था की गयी है। साथ ही एक कांफ्रेंस हॉल भी है जिससे लगभग 500 स्टार्ट-अप उद्यमियों को लाभ होगा। कार्यक्रम में उद्योग निदेशक पंकज दीक्षित ने कहा कि बिहार के युवाओं को स्टार्ट-अप नीति के बारे में जानकारी देने के लिए विभिन्न कॉलेजों/ शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया है।
ऐसे कार्यक्रम चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना, पटना कॉलेज, एएन कॉलेज, पटना पुस्तक मेला सहित सभी 38 जिलों के पॉलिटेकनिक/ तकनीकी संस्थानों में आयोजित किये गये हैं। सभी जिलों में स्टार्ट-अप इन्क्यूबेशन सेंटर खोले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की स्टार्ट-अप पॉलिसी के तहत 10 वर्षों के लिए 10 लाख रुपये तक की ब्याज रहित सीड फंडिंग की व्यवस्था की गयी है।
महिलाओं द्वारा प्रारंभ स्टार्ट-अप को 5 प्रतिशत अधिक तथा अनुसूचित जाति/जनजाति तथा दिव्यांगों के स्टार्ट-अप को 15 प्रतिशत अधिक राशि सीड फंड के रूप में देने का प्रावधान इस नीति के तहत किया गया है। एक्सीलेरेशन प्रोग्राम में भागीदारी के लिए 3 लाख रुपये तक के अनुदान का प्रावधान स्टार्ट-अप नीति में है।
एंजेल निवेशकों से निवेश प्राप्त होने पर कुल निवेश का 2 प्रतिशत सफलता शुल्क और सेवी पंजीकृत कैटेगरी-1 तथा एंजेल समूह से प्राप्त फंड के बराबर अधिकतम 50 लाख रुपये तक के मैचिंग लोन की व्यवस्था बिहार स्टार्ट-अप फंड से की जाती है।
उद्योग विभाग के प्रयासों से बिहार में स्टार्ट-अप का माहौल बन चुका है। केन्द्र सरकार की स्टार्ट-अप इको सिस्टम रैंकिंग में एस्पायरिंग लीडर कैटेगरी-ए में बिहार को टॉप पोजिशन पर रखा गया है। यह विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के सतत प्रयास और सबके सहयोग से ही संभव हो पाया है।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय के निदेशक विवेक रंजन मैत्रेय, निदेशक, तकनीकी विकास विशाल राज, विशेष सचिव दिलीप कुमार, चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ राणा सिंह, केरल के डीसी मैट स्टार्ट-अप के डॉ जयशंकर प्रसाद, मेडिकैड इथोज प्राइवेट लिमिटेड केरल की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी विंग कमांडर रागश्री डी नायर, पीएसजी स्टेप, कोयंबटूर के कार्यकारी निदेशक डॉ के सुरेश कुमार, स्टार्ट-अप 360 बेंग्लुरू के को-फाउंडर अशोक जी एवं केरला राज्य इन्क्यूबेशन हेड के विशाल बी कदम आदि ने स्टार्ट-अप की विविध पहलुओं के संबंध में युवा उद्यमियों का मार्गदर्शन किया।
एबीएन न्यूज नेटवर्क, पटना। बिहार में एनडीए की सरकार बन गयी है। एनडीए के नेता के रूप में नीतीश कुमार बिहार के नये मुख्यमंत्री बने हैं। बिहार के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी।
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार नौवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। छठी बार नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए भाजपा का समर्थन मिला है। नीतीश कुमार के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने पद एंव गोपनीयता की शपथ ली।
शपथ ग्रहण के दौरान जय श्रीराम और नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे लगते रहे। सम्राट चौधरी के बाद भाजपा के विजय कुमार सिन्हा शपथ के लिए आमंत्रित किये गये।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse